Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

29.1.17

बोकारो इस्पात संयंत्र के विस्थापितों की कहानी




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28.1.17

'आजतक' छोड़कर 'हिंदी खबर' गए अभिषेक रस्तोगी


लखनऊ से खबर है कि अभिषेक रस्तोगी ने आजतक से इस्तीफा दे दिया है. वे यूपी के रीजनल चैनल हिंदी खबर में लखनऊ में बतौर क्राइम हेड ज्वाइन कर चुके हैं. अभिषेक सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं. अभिषेक 14 साल से लखनऊ में पत्रकारिता कर रहे हैं.

27.1.17

'सफर में हमसफ़र - रवींद्र कालिया और ममता कालिया' का लोकार्पण

दिल्ली। रवि को अपनी यादों का पिटारा जान से प्यारा था। होता भी क्यों न! कितने तो शहरों में तंबू लगाए और उखाड़े, कितने लोगों की सोहबत मिली, एक से एक नायाब और नापाम तजुर्बे हुए। पर दाद देनी पड़ेगी उनकी सादगी की कि कभी जीवन-जगत के ऊपर से विश्वास नहीं टूटा। बीहड़ से बीहड़ वक्त और व्यक्तित्व में उन्हें रोशनी की एक किरण दिखी। सुप्रसिद्ध कथाकार ममता कालिया ने विश्व पुस्तक मेले में साहित्य भण्डार द्वारा आयोजित पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में अपने दिवंगत पति रवींद्र कालिया को याद करते हुए कहा कि रवि के लेखन की सबसे बड़ी खासियत यही है कि उसमें तेवर है पर तल्खी नहीं, तरंग है पर तिलमिलाहट नहीं।

'कालिया और कालिया' में 'मेरी प्रिय कहानियाँ' का लोकार्पण

दिल्ली। कहानी लिखना एक साधना और एकाकी कला है। चाहे कितने आधुनिक साधन और संजाल आपके सामने बिछे हों, लिखना आपको अपनी नन्हीं कलम से ही है। कई कई दिन कहानी दिल दिमाग में पडी करवटें बदलती रहती हैं। अंतत: जब कहानी लिख डालने का दबाव होता है,अपने को अपने ही बहुरंगी घर-संसार से निर्वासित कर लेना पड़ता है। सुप्रसिद्ध कथाकार ममता कालिया ने विश्व पुस्तक मेले में राजपाल एंड सन्ज़ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम 'कालिया और कालिया' में अपने दिवंगत पति रवींद्र कालिया को याद करते हुए कहा कि जीवन संघर्ष ने उनकी रचनाधर्मिता को तीखी धार दी और रचनाकर्म कभी रुका नहीं।

सुरेश सलिल की किताब 'कारवाने ग़ज़ल' का लोकार्पण

नई दिल्ली।  विश्व पुस्तक मेले में राजपाल एन्ड सन्ज़ के स्टाल पर सुरेश सलिल की पुस्तक 'कारवाने ग़ज़ल'  का लोकार्पण हुआ। लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि विख्यात कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी ने कहा कि ग़ज़ल, सॉनेट और हाइकू ऐसे काव्य रूप हैं जिनमें दुनिया की सभी भाषाओं में सृजन हुआ। उन्होंने सुरेश सलिल की पुस्तक 'कारवाने ग़ज़ल' को इस संदर्भ में मौलिक बताया कि इसमें आठ सौ साल के भारतीय ग़ज़ल इतिहास के सभी महत्त्वपूर्ण ग़ज़लकारों को सम्मिलित किया गया है। उन्होंने कहा कि हिंदी कवियों की ग़ज़लों को भी इस संग्रह में देखना सचमुच  महत्त्वपूर्ण है। इस अवसर पर उन्होंने स्मृतियों को ताज़ा करते हुए कहा कि राजपाल एंड सन्ज़ की शृंखला में प्रकाश पंडित की पुस्तकों के द्वारा वे उर्दू शाइरी के प्रशंसक बने थे।

26.1.17

लगता है ब्लंडर करना पत्रिका वालों के DNA में है...

पत्रिका अखबार इन दिनों खबरों से ज्यादा गलतियों का पुलिंदा बनते जा रहा है। और गलतियां भी ऐसी जो अख़बार की साख गिराने काफी है। इनके पत्रकारों की हरकतें देखकर लगता है यह पत्रकार बने कैसे? कौन सी किताब पढ़कर डिग्री ले ली इन्होंने? लगता है ब्लंडर करना इनके पत्रकारों के DNA में है। वैसे भी इनके रिपोर्टर फिल्ड से ज्यादा समय इंटरनेट पर ख़बरे ढूंढने में बिताते हैं। इसलिये काबिलियत इक्का दुक्का में ही है। बाकी सब ढ़ाक के तीन पात हैं।

मोदी ने ये किसका पांव छू लिया!

25.1.17

राहुल गांधी के लिए दमदार चेहरों वाली ताकतवर टीम तैयार !

कांग्रेस में नई टीम तैयार हो रही है। राहुल गांधी की इस टीम के लिए खुद सोनिया गांधी ने कमान संभाली है। प्रियंका गांधी मददगार रहेगी। संगठन में बड़ों का सम्मान बढ़ेगा और युवाओं को नए अवसर मिलेंगे। काबिल और विश्वसनीय चेहरों की ताकत बढ़ेगी। नोटबंदी के बाद एक बार फिर अगले बजट सत्र में राहुल गांधी अपने नए तेवर में दिखेंगे। 

-निरंजन परिहार- 


भास्कर का दलाल फोटोग्राफर दागी पुलिसवालों को बचाने में जुट गया!


24.1.17

सपा द्बारा पाले-पोसे गए बाहुबली विजय मिश्रा के आतंक से कब मिलेगी मुक्ति?

संबंधित खबर...

ये है पत्रिका के बड़े पत्रकारों की औकात


ये पत्रकार लोग लगता है पढ़े लिखे नहीं बल्कि जाहिल-गंवार हैं. कहीं ये चाटुकारिता के दम पर तो पत्रकारिता नहीं कर रहे हैं? ये अपने आपको भारतीय कहते हैं लेकिन इनको ये तमीज नहीं कि भारत का झंडा कैसा है पर ये अपने आपको देशभक्त कहते रहते हैं.

मुंबई प्रेस क्लब के सदस्य इरफान खान नहीं रहे

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भुवेन्द्र त्यागी की किताब ‘ये है मुंबई’ के विमोचन की तस्वीर




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23.1.17

जिद्दी खबरों का आईना…

जिद्दी खबरों का आईना…

* अर्पण जैन 'अविचल'
वो भी संघर्ष करती है, मंदिर-मस्जिद की लाइन-सी मशक्कत करती है, वो भी इतिहास के पन्नों में जगह बनाने के लिए जद्दोहद करती है, लड़ती- भिड़ती है, अपने सपनों को संजोती है, अपने अरमानों से जिद्द करती है, परेशान इंसान की आवाज़ बनकर, न्याय के मंदिर की भाँति निष्पक्षता के लिए , निर्भीकता का अलार्म बनने की कोशिश में, पहचान की मोहताज नहीं, पर एक अदद जगह की उम्मीद दिल में लिए, पराड़कर के त्याग के भाल से, चतुर्वेदी और विद्धयार्थी के झोले से निकलने के साहस के साथ, भारतेन्दु के हरीशचंद्र से लेकर बारपुते की नईदुनिया तक, संघर्ष के प्रेमचन्द से निकलती हुई कठोर सत्य के रज्जु बाबू तक, आदम की नज़र में आकर, समाज के चौराहे से, संपादक की टेबल तक तरजीह पाने को बेताब होती है, तब तो जाकर कहीं मुकाम हासिल कर पाती है,क्योंकि वो 'जिद्दी' होती है, जी हाँ, खबर भी जिद्दी होती है |
खबर की ज़िद क्या हो सकती है, जब इस प्रश्न के उत्तर को खोजने की चेष्टा से गहराई में उतरो तो पता चलता है क़िदफ़्तर के कूड़ेदान में पहुँचना ही उसकी सबसे बड़ी ज़िद होती है | पत्रकारों की मेजों पर  दम  तोड़ना हीसम्पादक की नज़र में अटक-सा जानाखबरची की नज़र में आनाही उसकी ज़िद का पैमाना है| पाठक के मानस का अंग बन पाना ही उसकी जिद का प्रमाण है| ज़िद करने का जज़्बा और हुनर तो बहुत है खबर में, इसीलिए वह संघर्ष का स्वर्णिम युग लिख पाती हैं |
       बहरहाल, खबर के आंकलन और ज़िद के ही परिणाम हैं जिससे कई रसूखदार पर्दे से बाहर आ गए और कई घर ज़द में | बेबुनियाद रवैये से लड़ती हुई जब संघर्ष के मैदान में कोई खबर आती है तो सरे-आम कई आरोप भी लग जाते हैं|
व्यवस्था के गहरे असंतुलन और बाज़ारवाद से दिनरात संघर्ष करना ही खबर का नाम है| जिस तरह से हर जगह बाजार का गहरा प्रभाव हो रहा है, उसी तरह से कई बार संपादकीय संस्था की विवशता उस खबर के जीवन पर घाव कर देती है|
तर्क के मजबूत आधार के बावजूद भी कई लाभ-हानि के जर्फ (पात्र) से गुजरभर जाना ही उसके अस्तित्व का सबसे बड़ा फ़ैसला होता है|
यक़ीनन वर्तमान दौर में पत्रकारिता का जो बदरंग चेहरा होता जा रहा है, उस कठिन काल में शाब्दिक उल्टियाँ हावी हैं| परिणाम की पराकाष्ठा से परे प्रवर्तन के अगणित अध्याय बुनती खबरें पाठक की सरज़मीं भी हिलाकर रखने का माद्दा रखती है | अवसान के सन्दर्भ से उपजकर जिस तरह से मशक्कत के आधार स्थापित करने का जो दर्द एक खबर को होता है, निश्चित ही वो दर्द अन्यत्र दुर्लभ है |
खबर, चाटुकरिता की भीड़ को चीरती हुई, तत्व के अवसाद को धता बताकर समर के सृजन का विकल्प अर्पण करती है, यही उसके परम होने का सौभाग्य है, इसीलिए खबर जिद्दी है |
गहन और गंभीर सूचकों का अनुगामी न बन पाना और जनहित में सृजक हो जाना खबर की पूर्णता का आंकलन है| वर्तमान दौर में यदि खबर ज़िद करना छोड़ दे तो मानो संसार में सत्य का देखना भी दूभर हो जाएगा| समाज में वर्तमान में जिस हीन भावना से मीडिया को देखा जा रहा है, उससे तो लगता है कि खबर के आज होने पर यह हाल हैं, जब खबर ही अवकाश पर हो जाएगी तो फिर हालात क्या होंगे? सामान्य जनमानस का जीवन ही कठिन हो जाएगा |
आम जनता का रखवाला केवल न्याय का मंदिर और संविधान ही है, उसी संविधान के अनुपालन में जो भूमिका एक खबर की है उसे नकारा नहीं जा सकता है| इसी कारण ही संवैधानिक संस्थाओं और शासन-प्रशासन को भय रहता है पोल खुल जाने का, तभी तो आम जनमानस के जीवन का अभिन्न अंग भी खबर है |
जीवन के हर क्षेत्र में जिद्दी खबरों का समावेश होना, खाने में नमक जैसा है | उपस्थिति की आवश्यकता है अन्यथा बेस्वाद जिंदगी से जिंदादिली गौण हो जाती है |
       पत्रकारिता के पहरेदार भी खबरों की ज़िद के कारण ही जीवन के केनवास पर अच्छे-बुरे चित्र उकेर पा रहे है, वर्ना समाज के बंधनों की बलिवेदी पर समाज का ही ख्याल भी रख पाना आसान नहीं है| जब भी समाज का ताप उच्च होता है तब उस ताप पर नियंत्रण भी खबर ही करती है | अपराध, विवाद, बुराई, कुरीतियाँ, आदि परिणाम पर अंकुश भी खबरों के माध्यम से ही लगता है | बस ये खबर तो जिद्दी है पर खबर के पुरोधाओं को भी खुद जिद्दी और सच के आईने को साथ लेकर पानी होना ही होगा |
खबर की जिद्द की गहराई के बारे में विस्तृत से तब ध्यान गया, जब इंदौर के कार्टूनिस्ट , पत्रकार साथी वीरेंद्र सिंह जी का अख़बार'कार्टून मिरर’ उन्होंने हाथ में दिया, उस अख़बार की पंच लाइन है 'जिद्दी खबरों का आईना' | बहुत ही सटीक आंकलन का भाव दर्शाता अख़बार, जो कार्टून पर केंद्रित प्रदेश का पहला मासिक अख़बार ही है |
-- अर्पण जैन 'अविचल'
पत्रकार एवं स्तंभकार
09893877455
http://asjainindia.blogspot.in/

22.1.17

प्रोडक्ट हटा लेने का मतलब माफ़ी होता है क्या?


एक ढोल जगीरों का और एक "देशभक्ति" का। दोनों दूर से सुहावने लगते हैं क्योंकि जब फटते हैं तो पोल खुल जाती है। BJP के राज में इन दिनों देशभक्ति का ढोल भी जमकर बज रहा है। मुद्दा कोई भी हो देशभक्ति का रंग चढ़ाकर ही उठाया जाता है। E-शॉपिंग साईट अमेजोन वाला मामला ही देख लीजिये। पहले तिरंगे प्रिंट वाले प्रोडक्ट बिकने की जानकारी मिली। फिर महात्मा गांधी की इमेज वाली स्लीपर की फोटो मिली। और भी प्रोडक्ट हो सकते हैं। ढूंढने पर वो भी मिल जायेंगे। खैर बात करते हैं ढोल की...विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बड़ा ही कड़ा रुख अख्तियार करते हुये अमेजोन को तत्काल माफ़ी मांगने बोल दिया। इतना ही नहीं माफ़ी न मांगने की स्थिति में वीजा भी रद्द करने की धमकी दे डाली।

वसुंधरा दीप ऐप की धमाकेदार लांचिंग, इंडिया वाइस के कुमाऊं प्रभारी का सम्मान



रुद्रपुर। लोहड़ी मेले में जिलाधिकारी चंद्रेश यादव ने वसुंधरा दीप के ऐप की लांचिंग की। वसुंधरा दीप के स्टाल पर ऐप डाउनलोड करने वालों की काफी भीड़ रही। ऐप डाउनलोड करने वालों को वसुंधरा दीप की तरफ से उपहार दिया गया। लोगों ने थैक्स वसुंधरा दीप बोल कर आभार भी जताया। वसुंधरा दीप ने लोहड़ी मेले में अपना ऐप लांच किया। इसके लिए मेले में वसुंधरा दीप ने अपना स्टाल लगाया था, जहां मेले में पहुंचे लोगों ने अपने मोबाइल फोन में ऐप डाउनलोड किया।

पंचकूला के कुछ पत्रकारों ने प्रेस क्लब की उड़ाई धज्जियां

-संविधान को दरकिनार करके एक महिला के इशारे पर बना दिया पदाधिकारी 
-महिला किस अखबार से है, पता नहीं, लेकिन कुछ दिन बाद आकर मचाती है हाहाकार

पंचकूला । पंचकूला प्रेस क्लब अपने गठन के 15 साल बाद अपनी हालत पर रोता है। इस क्लब को कुछ पत्रकारों ने अपनी जागीर बना लिया है और एक महिला जोकि जेल की हवा खा चुकी है, उसके इशारे पर दो-चार पत्रकार मिलकर 15 से 20 ऐसे पत्रकारों को इक्ट्ठा करते हैं, जोकि पंचकूला में सक्रिया नहीं रहते और पार्टी के नाम पर एकत्रित होकर किसी को भी सभी का प्रधान या महासचिव बनाकर अपनी चांदी कूटते हैं। इस महिला ने पिछले पांच महीने में दो बार पंचकूला के पत्रकारों को बेवकूफ बनाकर अपनी पसंद के हिसाब से प्रधान एवं महासचिव बदल दिये। 80 सदस्यों वाली प्रेस क्लब में मात्र 15 से 20 लोगों को इस महिला ने पार्टी के नाम पर एकत्रित किया। उन्हें पहले खाना खिलाया और शराब पिलाई।

15.1.17

बस्तर में आपात स्थिति : मानवाधिकार कर्मियों पर हमले, प्रवेश के लिए पुलिस से लेनी होती है इजाजत



दिल्ली । तेलंगाना लोकतांत्रिक मंच की सदस्य एडवोकेट के. सावित्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लोकतंत्र का दम घोंटा जा रहा है। सावित्री एडवोकेट बाल्ला रवींद्रनाथ की पत्नी हैं। रवींद्रनाथ उस सात सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य हैं जिसे क्रिसमस के दिन बस्तर जाते वक्त छत्तीसगढ़ पुलिस ने उठा लिया। फोरम फॉर रिलीज ऑफ पॉलिटिकल प्रिजनर्स की तेलंगाना इकाई के सचिव रवींद्रनाथ और उनके साथियों पर कुख्यात छग जन सुरक्षा अधिनियम लगाया गया है और उनके सहित मानवाधिकार जांच दल के सभी सात सदस्यों को बगैर जमानत सुकमा जेल में बंद किया गया है।

तिरंगे प्रिंट वाले जूते के बाद महात्मा गांधी की इमेज वाली स्लीपर बेच रहा अमेजोन...


ऑनलाइन शॉपिंग साइट अमेजोन में भारतीय तिरंगे के प्रिंट वाले जूते बिकने वाले केस को अभी चंद दिन ही हुये हैं। और उतना ही समय हुआ है, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के आदेश को जिसमें कम्पनी से बिना शर्त तत्काल माफी मांगने की बात कही गई थी। लेकिन आपको बता दें कि अमेजोन पर ऐसे और भी प्रोडक्ट हैं जो भारत देश की छवि को धूमिल कर रहे हैं। ताजा जानकारी और एक अखबार की खबर के मुताबिक वहां महात्मा गांधी की इमेज प्रिंट हुई स्लीपर भी बिक रही है।

घायल हो रही गंगा-जमुनी तहजीब को मरहम दे गया आईना का खिचड़ी भोज


लखनऊ। पत्रकारों के संगठन ‘‘आईना’’ आल इण्डिया न्यूज़ पेपर ऐसोसिएशन के खिचड़ी भोज ने आज मिसाल कायम कर दी। लखनऊ से पल-बस कर देश भर को रौशन करने गंगा-जमुनी तहजीब को चुनौती देने वालों को ‘‘आईना’’ ने साम्प्रदायिक सौहार्द का आईना दिखा दिया। मकर संक्रांति के मौके पर सनातन धर्म के धार्मिक-साँस्कृतिक कार्यक्रम के खिचड़ी भोज में घायल हो रही गंगा-जमुनी तहजीब को मरहम देते हुए पत्रकारों की इस जमात ने धर्म-जाति की हर सरहद को तोड़ दिया।

कठपुतली नाटक “मोहन से महात्मा: द्वारा गांधी जी के जीवनवृत्त पर प्रकाश डाला गया


वाराणसी : स्थानीय कैथी गांव में छोटा शिवाला मंदिर परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान सुविख्यात कठपुतली कलाकार मिथिलेश दूबे के नेत्रित्व में सृजन कला मंच की टीम ने “मोहन से महात्मा” नाटक की प्रस्तुति की. इस नाटक में लगभग 150 कठपुतलियों के माध्यम से महात्मा गांधी के जन्म से लेकर शहीद होने तक की घटनाओं को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया है. अफ्रीका प्रवास, नमक सत्याग्रह, भारत छोडो आन्दोलन, दांडी मार्च, स्वतंत्रता एवं देश विभाजन आदि घटनाओं को कठपुतलियों ने जीवंत कर दिया था.

13.1.17

CIC declares Sanawar School a ‘Public Authority’

Whistleblower’s decade long struggle again makes this elite school
accountable to public

Lawrence School, Sanawar, which has been wriggling hard to escape from
the confines of ‘Right to Information Act’ since last decade, has
finally been brought within the ambit of RTI Act by the Central
Information Commission, New Delhi, declaring it a ‘Public Authority’.

The decision came in the wake of directions from Himachal Pradesh High
Court which had in February 2008 stayed the operation of earlier CIC
decision dated  January 25, 2008 wherein this school was declared as a
public authority with further directions to the school headmaster to
provide information requested by the applicant Dr Rajinder K Singla.
It was on September 19, 2016 that the Division Bench of HP High Court
comprising Chief Justice Mansoor Ahmad Mir and Justice Tarlok Singh
Chauhan quashed the CIC decision of 2008, reminding the case back to
CIC to decide it afresh.

11.1.17

EC ban pre elections opinion polls, exit polls, surveys to save Democracy

Election Commission of India is Backstabbing Mother India, in the name of Of Opinion/Exit or polls. Election commission should ban pre election Exit or Opinion polls completely, not only for this election in 5 states, but in all states till 2019 and also Lok Shabha 2019 Elections Completely. Reason is political party b is Supported by Business men. These business men pay money to all newspapers, news channels to show party B winning maximum number of seats in pre election exit and opinion polls.

धीरेन्‍द्र श्रीवास्‍तव की यह कविता आप से बहुत कुछ कहती है...

यारों हिटलर का नाश करो

धीरेन्‍द्र श्रीवास्‍तव
जो गुजर गया मत याद करो।
अब समर क्षेत्र की बात करो।
देखो आगे हिटलर शाही।
त्रिशूल तानकर नाच रही।
जुमलों की फसलें काट रही।
दरवाजा आंगन बाँट रही।
इस बंटवारे से बचने को,
जो मित्र हैं उनसे साथ करो।
जो गुजर गया मत याद करो।
अब समर क्षेत्र की बात करो।

ओछी आधुनिकता मानवीय मूल्यों की विध्वंसक है


आधुनिकता का अतीत:

'अधुना' यानी यूँ कहें कि इस समय जो कुछ है, वह आधुनिक है. कुछ विचारकों की माने तो आधुनिक शब्द की व्यत्पत्ति पॉचवी शताब्दी के उत्तरार्ध में लैटिन भाषा के 'माँड़्रनस' ( Modernus ) शब्द से हुई, जिसका प्रयोग औपचारिक रूप से  तत्कालीन समय में इसाई और गैर-इसाई रोमन अतीत से अलग करने हेतु किया गया था. उसके बाद इसका प्रयोग प्राचीन की जगह वर्तमान को स्थापित करने हेतु किया गया, जो यूरोप में उस समय उत्पन्न हो रहा था, जब नए युग की चेतना प्राचीन के साथ नए सम्बंध के माध्यम से नया आकार ग्रहण कर रही थी. अधिकतर विद्वान इस मान्यता पर एकमत दिखायी देते है कि आधुनिकता की शुरूआत यूरोप में हुई. इसलिए अक्सर आधुनिकता को 'पश्चिमीकरण का पर्याय' माना जाता है. लोगो को सचेत करते हुए अमृतराय जी लिखते है कि "आधुनिकता के लिए हरदम यूरोप और अमेरिका की तरफ टकटकी लगाए रहना बेतुकी बात है, आधुनिकता किसी देश की बपौती नही है".

मुंबई में पतंग पर पहरा!

मुंबई, 11 जनवरी। मुंबई पुलिस इस बार पतंग उड़ाने में लगनेवाले मांझा को लेकर सख्त हो रही है। जॉइंट पुलिस कमिश्नर देवेन भारती ने आश्वस्त किया है कि मांझे पर प्रतिबंध को लेकर पुलिस शीघ्र ही आदेश जारी करेगी। विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा की अगुवाई में जैन शक्ति फाउंडेशन एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मंडल को भारती ने यह विश्वास दिलाया। महाराष्ट्र सरकार ने भी एक आदेश में नायलॉन मांझा धागे को मानव जीवन एवं पक्षियों के लिए हानिकारक बताते हुए इसे प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है। उसी आदेश की पालना में पुलिस सख्त कारवाई करेगी।

यादव वोटर नेताजी का साथ छोड़ता नहीं दिख रहा है

अजय कुमार, लखनऊ

थम नहीं रहा है सपा परिवार का रार : सुलह की कोशिशों के बीच बढ़ती दूरियां... भारतीय राजनीति का एक छिपा हुआ सिद्धांत यह भी है कि अगर आपका अपना फायदा न हो तो दूसरे का नुकसान तो किया ही जा सकता है।शायद इसी थ्योरी पर मुलायम सिंह यादव आगे बढ़ रहे हैं। उन्हें इस बात का अच्छी तरह से अहसास है कि अगर उन्होंने पुत्र अखिलेश के सामने सरेंडर नहीं किया तो उनका जो बुरा हुआ सो हुआ अखिलेश के लिये भी सत्ता की राह मुश्किल हो सकती है। मुलायम खेमा जानता है कि अखिलेश विकास का लाख ढ़िढोरा पीटे,लेकिन यूपी में चुनाव सिर्फ विकास के सहारे नहीं जीते जा सकते हैं। यहां जातपात का भी गणित देखना होता है और जब बात जातिवादी सियासत की चलेगी तो कम से कम मुसलमानों का भरोसा अखिलेश से अधिक मुलायम पर होगा।

बेसुर है रवीश कुमार के बगैर एनडीटीवी हिंदी का प्राइम टाइम

एनडीटीवी हिंदी और रवीश कुमार एक अटूट नाता है। एनडीटीवी का भले ही टीआरपी के रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर है बावजूद रवीश कुमार की फेन्स फॉलोविंग देश दुनिया में लाखों है। समय ९ बजे शुरू होता है एनडीटीवी हिंदी का प्राइम टाइम। इसे होस्ट करने वाले वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने दर्शको में अपनी एक जगह बनाई है। रवीश कुमार दर्शको की नब्ज को बेहतर टटोलते हैं। भले ही वो अग्रेसिव पत्रकारिता के पक्षधर नहीं हैं। हर मुद्दे को सहजता से टीवी के दर्शको तक पहुंचाते हैं। मुद्दे के हर पहलुओं को खंगालते हैं।

अभिज्ञात अपनी तरह के अलग कवि हैं : केदारनाथ सिंह


कोलकाता में सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से आयोजित सात दिवसीय युवा संस्कृति उत्सव व हिन्दी मेला में 'इतिहास और संस्कृति : मुक्तिबोध का साहित्य' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में अभिज्ञात के काव्य संग्रह 'बीसवीं सदी की आख़िरी दहाई' का लोकार्पण ज्ञानपीठ से सम्मानित प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अभिज्ञात मेरे प्रिय कवि हैं।

लखनऊ सहित भारत के विभिन्न क्षेत्रों के ब्लॉगरों और साहित्यकारों ने न्यूजीलैंड में फहराई हिन्दी की पताका


ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन ऑफ पीपुल ऑफ इंडियन ओरिजिन वाईकाटो, भारतीय विद्या भवन, हेमिल्टन तथा परिकल्पना के संयुक्त तत्वावधान में विगत 23 दिसंबर 2016 से 01 जनवरी 2017 के बीच न्यूजीलैंड के ऑकलैंड, हेमिल्टन, रोटोरूआ आदि शहरों में आयोजित सातवें अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में फिजी के शिक्षा मंत्रालय के हिन्दी प्रतिनिधि श्री रमेश चन्द्र, न्यूजीलैंड के सांसद श्री कंवलजीत सिंह बख्शी, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी, न्यूजीलैंड नेशनल पार्टी की सांसद डॉ परमजीत परमार तथा हिन्द मेडिकल कॉलेज लखनऊ के निदेशक डॉ ओ. पी. सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

DUJ PROTEST TO HINDUSTAN TIMES MANAGEMENT

The Delhi Union of Journalists (DUJ) today, has written to the Hindustan Times management in Delhi, protesting its decision to fire large contingents of journalists in various parts of the country. In the opinion of DUJ, it shows that the management has no respect to the law of land with inhuman mass retrenchments resorted to from time to time.

विश्राम राय का जन्म दिवस आज : चंद्रशेखर को दे दिया था अपना टिकट...


आज 10 जनवरी का दिन आजमगढ़ जनपद के लिये गौरव का दिन है. आज के दिन ही पूर्वांचल के गान्धी कहे जाने वाले समाजवादी आन्दोलन के अप्रतिम योद्धा स्व बाबू विश्राम राय जी का जन्मदिवस है। उच्च कुलीन भूमिहार जाति में पैदा होने के बाद भी बाबू साहब ने 1960 के दशक में पिछड़े और वंचित वर्ग का आगे बढ़कर नेतृत्व किया। 1962 में सोशलिस्ट पार्टी ने बाबू विश्राम राय जी को राज्यसभा का टिकट दिया परन्तु बाबू साहब ने अपना टिकट पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को यह कहते हुए दे दिया की चंद्रशेखर नौजवान और प्रखर वक्ता हैं इनकी राज्यसभा में मुझसे ज्यादा जरूरत है इस बात पर डॉ लोहिया जी बाबू साहब से नाराज भी हुए थे।

अभागे ओम पुरी का असली दर्द

-निरंजन परिहार-

ओम पुरी की मौत पर उस दिन नंदिता पुरी अगर बिलख बिलख कर रुदाली के अवतार में रुदन – क्रंदन करती नहीं दिखती, तो ओम पुरी की जिंदगी पर एक बार फिर नए सिरे से कुछ नया लिखने का अपना भी मन नहीं करता। पति के अंतिम दर्शन पर आंखों में छटपटाते अश्रुओं की धार बहाने और भर्राए हुए गले से अपने गहन दुख में डूबने का रोना रोने का नंदिता का अभिनय सचमुच लाजवाब था। अभिनय... जी हां, अभिनय...। अभिनय इसलिए, क्योंकि कोई पत्नी 65 साल के अपने बूढ़े पति को उसके एक मात्र बेटे से भी मिलने न दे, जिससे वह बहुत प्यार करता हो। जो महिला पति को उसकी वृद्धावस्था के बावजूद धुर अकेला छोड़कर उसी के पैसों पर जिंदगी के सारे शौक पूरे करती फिरे। जिस उमर में पति को पत्नी के साथ की सबसे ज्यादा आवश्यकता हो, तब उसे अकेला उसके हाल पर छोड़ दे। और जो पत्नी दुनिया भर में पति की इज्जत को चौराहों पर नीलाम करनेवाली अपनी किताब के विमोचन करवाकर फूलमालाएं पहनकर अपने अभिनंदनों पर अभिभूत होती रहे, उस महिला को ओम पुरी की मौत पर आंसू बहाते देख अभिनय नहीं तो और क्या कहा जाए।

कबीर कला मंच के संस्कृतिकर्मियों को सर्वोच्च न्यायालय से मिली ज़मानत

- विनीत तिवारी 

शीतल के पति सचिन माली की आज (3 जनवरी 2016 को) करीब 4 साल के बाद सावित्री बाई फुले के जन्मदिन पर ज़मानत हो जाना बहुत बड़ी उपलब्धि है। जानते हैं कि ज़मानत मिलना लड़ाई ख़त्म हो जाना नहीं है। अभी लड़ाई लंबी है लेकिन सचिन और शीतल का छोटा बच्चा है- चारेक साल का होगा। अभंग नाम है उसका। बहुत प्यारा है। उसे पिता का साथ मिलेगा और सचिन को भी अभंग के नन्हे मगर समझदार बचपन का संग रहेगा। शीतल ने भी बहुत भागदौड़ की है। उसे भी सचिन के पास रहने से लड़ने का नया हौसला मिलेगा, थोड़ी उसकी थकन कम होगी। शीतल और सचिन आर्थिक रूप से संपन्न पृष्ठभूमि से नहीं हैं। बहुत मुश्किल से सब साथियों ने मिलकर लड़ाई लड़ी। सबसे ज़्यादा तो कॉमरेड पानसरे, आनंद पटवर्धन और कॉमरेड प्रकाश रेड्डी, कॉमरेड भालचंद्र कानगो सक्रिय रहे। इनका तो मुझे पता है लेकिन निश्चित ही और भी बहुत लोग इस लड़ाई में शामिल थे। और मुम्बई और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की मेहनत को भी शुक्रिया और सलाम। मराठी के प्रमुख प्रगतिशील प्रकाशन गृह लोकवांग्मय प्रकाशन  सचिन माली की कविताओं की  पुस्तकें प्रकाशित कीं जो सचिन ने जेल में रहते हुए लिखी थीं। अभी तीसरी आने  वाली है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मतिथि पर विशेष : खून दिया तो मिली आजादी

DHARMENDRA KESHARI 
सुभाष चंद्र बोस (जन्म- 23 जनवरी, 1897 ई., कटक, उड़ीसा; मृत्यु- 18 अगस्त, 1945 ई., जापान) के अतिरिक्त भारत के इतिहास में ऐसा कोई व्यक्तित्व नहीं हुआ, जो एक साथ महान सेनापति, वीर सैनिक, राजनीति का अद्भुत खिलाड़ी और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरुषों, नेताओं के समकक्ष साधिकार बैठकर कूटनीति तथा चर्चा करने वाला हो। भारत की स्वतंत्रता के लिए सुभाष चंद्र बोस ने क़रीब-क़रीब पूरे यूरोप में अलख जगाया। बोस प्रकृति से साधु, ईश्वर भक्त तथा तन एवं मन से देशभक्त थे। महात्मा गाँधी के नमक सत्याग्रह को 'नेपोलियन की पेरिस यात्रा' की संज्ञा देने वाले सुभाष चंद्र बोस का एक ऐसा व्यक्तित्व था, जिसका मार्ग कभी भी स्वार्थों ने नहीं रोका। जिसके पाँव लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटे, जिसने जो भी स्वप्न देखे, उन्हें साधा। नेताजी में सच्चाई के सामने खड़े होने की अद्भुत क्षमता थी।

पुस्तक सप्लाई में दलित जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप की जरूरत

-एच.एल.दुसाध
सर्दियों में भारत और दक्षिण एशिया के बुद्धिजीवियों का वार्षिक मिलन-स्थल का रूप ले चुके    ‘नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला ‘(एनडीडब्ल्यूबीएफ) 7 जनवरी से शुरू हो रहा है,जिसका समापन  जनवरी,2017 को होगा. पुस्तक व्यवसाय को बढ़ावा देने व लोगों में पुस्तक-प्रेम पैदा करने के उद्देश्य से आयोजित इस मेले की शुरुआत 1972 में हुई,जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति वी.वी.गिरी ने किया था.विंडसर प्लेस में 18 मार्च से 4 अप्रैल,1972 तक चले पहले पुस्तक मेले का आयोजन 6790 वर्ग मीटर में क्षेत्र में हुआ था,जिसमें 200  प्रकाशकों ने भाग लिया था.मेले के मौजूदा स्थल प्रगति मैदान में जब इसकी शुरुआत 1976 से हुई तब 7770 वर्ग मीटर में फैले उस  पुस्तक में 266 प्रकाशकों ने शिरकत किया था.

सिर्फ BSF ही नहीं अगर कोई NCC भी जॉइन करता है तब भी उसे बुरे हालात से जूझना पड़ता है

BSF 29 बटालियन महासुरक्षा बल का जवान "तेज बहादुर यादव"... यह नाम इन दिनों काफी चर्चा में है। वजह है इनका वायरल हुआ वीडियो जिसे उन्होंने बर्फीले क्षेत्र में वर्दी और बंदूक के साथ पहरा देते समय बनाया है। वीडियो में तेज ने अपनी ड्यूटी की कठनाई बताते हुये सिपाहियों को मिल रहे खाने के स्तर को आड़े हाथों लिया है। बहरहाल जो कभी उस माहौल में नहीं रहे उनको बता दूं कि हकीकत बनाये गये वीडियो से इतर नहीं है। और सिर्फ BSF ही नहीं इस देश में अगर कोई NCC भी जॉइन करता है तब भी उसे ऐसे ही हालात से जूझना पड़ता है। अब सवाल यह कि जो सैनिक सीमा की सुरक्षा कर रहा है उसे इतना और ऐसे स्तर का खाना/सुविधा तो मिले की वह दुश्मन पर भारी पड़ सके। लेकिन हमारे सिस्टम में होता उल्टा है। सच बयां करने वाले के खिलाफ सबूत जुटाकर उसे दागदार साबित करके बात दबाने का भरकस प्रयास किया जाता है।

सतीश वर्मा की डोगरी भाषा में अनुवादित किताब का विमोचन


सहारा मीडिया नेटवर्क ग्रुप के राष्ट्रीय सहारा अखबार के वरिष्ठ पत्रकार सतीश वर्मा की पाकिस्तान की जमीनी हकीकत को बयां करती डोगरी भाषा में अनुवादित ‘पाकिस्तान दी हकीकत कन्नै रूबरू’’ का जम्मू स्थित केएल सहगल हाल में राज्य के उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल कुमार सिंह ने विमोचन किया। इस अवसर पर राज्य के एमएलसी रमेश अरोड़ा तथा विधायक डा. कृष्ण लाल भगत के अलावा निदेशक राज्य सूचना विभाग डा. शाहिद इकबाल आईएस, जम्मू के एडिशनल डीसी डा. अरूण मन्हास तथा डोगरी की सुप्रसिद्ध लेखिका प्रो. चंपा शर्मा समेत कई जानी मानी हस्तियां मौजूद थी।

करुणानिधि के अवाक करते अंदाज की असलियत में अखिलेश का यादवी अक्स

-निरंजन परिहार-

राजनीति में रिश्तोंदारों का कुनबा खड़ा करने में करुणानिधि तो मुलायम सिंह यादव से भी ज्यादा मजबूत रहे हैं। लेकिन यूपी में पिता और पुत्र के बिगड़ते राजनीतिक रिश्तों के अक्स में तमिलनाड़ु से अचानक खबर आई कि करुणानिधि ने चुपचाप अपने बेटे स्टालिन को पार्टी की कमान सौंप दी है। वैसे भी, जयललिता के संसार से चले जाने के बाद करुणानिधि के राजनीतिक जीवन में कोई बहुत आकर्षण नहीं रह गया था।

कितनी मुस्लिम हितैषी हैं मायावती?

-एस.आर. दारापुरी, भूतपूर्व पुलिस महानिरीक्षक एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट 

माह फरवरी, 2017 में होने वाले विधान सभा चुनाव में मायावती ने मुसलामानों का वोट प्राप्त करने के लिए उन्हें 97 टिकट दिए हैं. इस वार मायावती दलित-मुस्लिम कार्ड खेलने की कोशिश कर रही है. अतः यह देखना ज़रूरी है कि मायावती ने अपने चार वार के मुख्य मंत्री काल में मुसलमानों का कितना कल्याण किया था. यह भी ज्ञातव्य है कि मायावती इससे पहले तीन वार मुसलमानों की धुरविरोधी पार्टी भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन करके सरकार बना चुकी है. आगे भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ज़रुरत पड़ने पर वह भाजपा से फिर हाथ नहीं मिलाएगी. इतना ही नहीं 2002 में मायावती ने गुजरात जा कर मोदी के पक्ष मे चुनाव प्रचार किया था और मोदी को 2000 से अधिक मुसलमानों की हत्याएं करवाने के मामले में क्लीन चिट भी दी थी.

आदिवासी विहीन बहुजन समाज पार्टी?

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

सर्वविदित है कि जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य—उत्तर प्रदेश। लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य—उत्तर प्रदेश। इस सबसे बड़े राज्य में बहुजन समाज पार्टी बहुजनों की सरकार बनाने के लिये बसपा सुप्रीमों मायावती ने विधानसभा की कुल 403 सीटें पर अपनी पार्टी के प्रत्याशियों की घोषणा की है जो इस प्रकार है :—

1. अजा/एससी को 87,
2. मुस्लिम को 97,
3. ओबीसी को 106 और
4. अगड़ी जाति के 113 उम्मीदवार हैं.

JFA expresses shock at Bihar scribe’s murder

By NJ Thakuria
Guwahati: Journalists’ Forum Assam (JFA) expresses shock at the murder
of a Bihar  based journalist and the mysterious death of a Jharkhand
based scribe within 24 hours. The Assam based media rights body
reiterated its old demand for a national action plan to safeguard the
media persons and ensure justice to the media victims.

3.1.17

2.1.17

अब वित्त मंत्री बजट में क्या बोलेंगे सरकार, घोषणाएं तो आपने ही कर डाली !

-निरंजन परिहार-

सन 2016 के जाते जाते और सन 2017 के आते आते, पूरा देश सांसे थामकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंतजार कर रहा था। हर किसी को उम्मीद थी कि नोटबंदी पर मोदी कुछ तो बोलेंगे। लेकिन नए साल की पूर्वसंध्या पर अपने बहुप्रतीक्षित संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ कई मोर्चे साधने की कोशिश की। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने गरीब, निम्न और मध्यम वर्ग के लिए कई घोषणाएं कीं। उन्होंने किसानों, महिलाओं और छोटे कारोबारियों के लिए खुशी के कई ऐलान किए तो दूसरी तरफ कालाधन रखने वालों को न बख्शने की अपनी हदाड़ भी दोहराई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा, ‘दीपावाली के तुरंत बाद देश शुद्धि यज्ञ का गवाह बना है। देशवासी संकल्प और धैर्य के साथ बुराइयों को पराजित करने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।’

‘टीपू’ लड़ता भी है और लड़ाता भी है

दूरदर्शी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पसंदीदा डायलाग याद है, ‘हारकर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं।’ सचमुच ‘टीपू’ दंगल जीत गए हैं। कल तक जो खुद को समाजवादी बताते थे, वे अब अखिलेशवादी हो गए हैं। दंगल में अखिलेश ने एक बात साबित कर दिया कि वे कमजोर नहीं हैं। ‘टीपू’ दबता नहीं। लड़ता भी है और लड़ाता भी है...। वह तलवार डराने के लिए नहीं, चलाने के लिए उठाता है। ‘दंगल’ का असर यह है कल तक यूपी में साढ़े चार मुख्यमंत्री थे और अब सिर्फ एक।

संघ प्रचारक मताले जी को मातृ-शोक

रायपुर. मध्य क्षेत्र के संपर्क प्रमुख, संघ प्रचारक श्री राजकुमार मताले जी की माता श्रीमती भागरता बाई मताले का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। ब्रेन हेमरेज के चलते माताजी को अस्पताल में भर्ती किया गया था लेकिन विगत 29 दिसम्बर को उन्होंने शरीर त्याग दिया।

1.1.17

जेटली की जिंदगी का राजनीतिक मायाजाल

-निरंजन परिहार-

अरुण जेटली का अतीत दुनियादारी के अंदाज में काफी सफल रहा है। दिल्ली युनिवर्सिटी में जब वे पढ़ते थे, तब भले ही बस के पैसे भी उनके पास नहीं हुआ करते थे, लेकिन आज सैकंड के हिसाब से वकालात की फीस की गणना करनेवाले देश के शिखर के वकीलों में जेटली नंबर वन पर हैं। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में दोस्ती हुई तो रजत शर्मा और प्रभु चावला तो पत्रकार बनकर निकल गए। मगर, जेटली जेपी के साथ सड़क पर उतरे तो पहले दिन से ही उन्होंने राजनीति की राह को समझ लिया था कि यही रास्ता उन्हें कभी देश के शिखर पर भी स्थापित करेगा। आज जेटली बीजेपी में सक्षम भी हैं, सत्ता के गलियारों में समर्थ भी हैं और देश की राजनीति के सबसे सबल लोगों में भी शामिल हैं। वकील तो वे असल में पेट पालने के लिए बने, क्योंकि राजनीति से जिंदगी की जरूरतों को पूरा करने को अनैतिक माननेवाले जेटली जिंदगी की सफलता को बहुआयामी अंदाज में देखने के शौकीन हैं। जेटली 65 के हो गए हैं और 28 दिसंबर 1952 को जब वे जन्मे थे, तो कोई भूचाल नहीं आया था। मगर, आज वे दूसरों के भूकंप की हवा निकालने की ताकत दिखा रहे हैं।