Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

30.11.17

हिंदुस्तान, कानपुर के पत्रकार नवीन की हत्या


दैनिक जागरण के पत्रकार से इश्क का भूत यूं उतरा


पूरे मामले को समझने के लिए नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें...


21.11.17

IFWJ underlines for Media Council on the National Press Day

Indian Federation of Working Journalists (IFWJ) and leading trilingual newspaper ‘Desha Hitha’ today organised the National Press Day in the auditorium of the Indian Newspaper Society of New Delhi. It was attended by a large number of journalists belonging to different languages from all over the country. The IFWJ Secretary General Parmanand Pandey and the Editor of the Rashtriya Times, Shri Vijay Shankar Chaturvedi were the main speakers.

Journalists, non journalists of small, medium and big newspapers as well as audio-visual media participated in the programme. The IFWJ Secretary General Shri Pandey laid emphasis on setting up of a Media Commission to look into the problems and prospects of all types of media i.e. print, audio-visual and electronic to prepare a comprehensive policy for strengthening the freedom of speech and expression and ensuring the safety and security of the journalists. He said that the Press Council has become totally redundant in view of the formidable growth of audio-visual, social media, web portals and MoJo etc. Therefore, the need to have a Media Council for moral regulation of the media and also for addressing the problems of the journalists has become imperative. He told the august gathering on the occasion that the IFWJ has been consistently and continuously fighting for raising the economic and professional standards of the journalists. He underlined the need for taking effective steps by the government to prevent and deter the attacks on the journalists, which have unfortunately been growing in the recent times.

Shri Vijay Shankar Chaturvedi, the Editor of the Rashtriya Times, who has always been voicing the problems of the journalists of the small and medium newspapers, alleged that the present government is playing into the hands of the big newspapers, which have been cornering the bulk of advertisements. Big newspapers have failed to honour even the directions of the Supreme Court in extending even the statutory facilities to journalists but have prevailed upon the government to stop the advertisements to small and medium newspapers. As a result of it, hundreds of newspapers have either been closed or on the verge of the closure. Shri Chaturvedi called upon the government to immediately withdraw the new DAVP policy which has been adopted for releasing DAVP advertisements to newspapers.

सैफई थाने में 14 वर्षीय नाबालिग बच्चे पर बरसा दरोगा का कहर


मोबाइल चोरी के आरोप में 14 साल के नाबालिग को लाठी थप्पड़ों, से मारा, गाल व कान पर चोट के निशान मौजूद, बाद में 10 हजार लेकर छोड़ा गया नाबालिग बच्चा

सैफई ( इटावा) सैफई थाने के एक दरोगा की लाठी मासूम पर कहर बनकर टूटी मोबाइल चोरी के इल्जाम में दरोगा ने मासूम पर कहर बरसाया और बाद में उसे 10 हजार रुपये लेकर छोड़ दिया। 2 दिन पूर्व सैफई थाने का दरोगा योगेंद्र शर्मा पीजीआई टेम्पो स्टैंड से एक 14 साल के नाबालिग बच्चे को मोबाइल चोरी के आरोप में पकड़कर थाने लाकर उसकी बेहरमी से मारपीट की दरोगा की लाठी उस नाबालिग पर कहर बनकर टूटी। मासूम चिल्लाता रहा लेकिन दरोगा का ह्रदय नही पसीजा गालियां देकर उसकी मारपीट करता रहा। यही नही पुलिस को उस नाबालिग से कुछ बरामद नही हुआ तो उसके भाई की भी मारपीट की और मां बाप को गाली दी व छोड़ने के एवज में दस हजार रुपये लिए तब जाकर उस मासूम को छोड़ा।

कुरान, इस्लाम और मुसलमान

वर्ष 2010 के एक अध्ययन के मुताबिक, दुनियाँ के दूसरे सबसे बड़े धार्मिक सम्प्रदाय इस्लाम के तकरीबन 1.6 अरब अनुयायी हैं. जोकि विश्व की आबादी की लगभग 23% हिस्सा हैं, जिसमें 80-90 प्रतिशत सुन्नी और 10-20 प्रतिशत शिया हैं. मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, अफ्रीका का हार्न, सहारा, मध्य एशिया एवं एशिया के अन्य कई हिस्सों में इस्लाम अनुयायी प्रमुखता से पाए जाते हैं. राष्ट्र की एक छोटी लेखिका होने के नाते मेरा फर्ज बनता है कि उन प्रत्येक समाजिक मुद्दो पर लिखूँ, जो सम-सामयिक हों, सामाजिक बेहतरीकरण के हिस्सेदार हों और हम सबको एक नई राह दिखलाने में सहायक हों. लिखने से पहले मै पवित्र मज़हबी पुस्तक कुरान-ए-शरीफ़ एवं हदीश को तसल्ली से पढ़ी, गहराई से समझने की कोशिश के साथ साथ एक व्यापक मनन-चिंतन भी किया. खैर, कुछ तथाकथित सेक्युलर लोग यह जरूर बोल सकते हैं कि यह अनावश्यक विषय है, मज़हबी मामला है, इसमें हिन्दू लेखिका द्वारा लेख लिखा जाना ठीक नहीं है. मुझसे कई लोग अक्सर बोलते भी हैं कि आप एक हिन्दू लेखिका होकर भी मुस्लिम, सिक्ख, इसाई धर्म को क्यूँ पढ़ती हो ?. खैर, साहब आपकी सोच आपको मुबारक हो. मै एक कालजयी लेखिका नही बनना चाहती, समाज की बिसंगतियों पर मै सतत् कलम चलाती रहूँगी, जिससे समाज में कुछ सकारात्मक बदलाव आ सके. मेरा इससे दूर दूर तक लेना देना नहीं है कि आप मेरे बारे में क्या सोचते हैं ? आप स्वतंत्र हैं, सोचते रहिए साहब. मै एक स्वतंत्र लेखिका हूँ, सतत् लिखती रहूँगी, न तो मैने कभी कलम को नीलाम किया है और न ही आगे करूँगी. सर कट जाए, मगर कलम नहीं बिकनें दूँगी.

ये है प्रेस क्लब आफ इंडिया का गौतम-विनय पैनल


नवीन निशांत ने हिंदुस्तान छोड़ा, करेंगे भास्कर का सहरसा एडिशन लांच