गजल
हमको साथी भी ऐसे मिले
जैसे राजा को टूटे किले
पत्तियां,फूल, फल सब झरे
पेड़ आंधी में ऐसे हिले
हमको चलना भी तो आ गया
पांव पत्थर पे जब से छिले
चोट-दर-चोट खाकर हँसे
खत्म होंगे न ये सिससिले
अपनी ही गफलतों में रहे
कद्रदानों से कैसे गिले
हम थे नीरव मुखर हो गये
आप जब से हैं हम से मिले।
पं, सुरेश नीरव
मों.९८१०२४३९६६
(भाई अजीत कुमार मिश्र ने मेरी गजल के जवाब में गजल लिखकर अपनी प्रतिक्रया व्यक्त की है भाई..बधाई)
हमने लेख भी ऐसे लिखे
ReplyDeleteजिसने पढ़े वही हिले।
कलम, कागज, सब मिले
पर ना आप जैसी लिखे।
कुछ हमको भी लिखना आ गया
जब कागज पर पेन चले।
शब्द दर शब्द तुकबंदी मिलाई
हमको लगा कि गज़ल लिखे।
भ्रम में खुद को शायर समझे
हर शायर से उलझ गये।
देख कर आपकी गज़ल हम,
अजीत खुद की औकात समझ गये।
09235133411
vaah vaah,
ReplyDeletejugal jodi ko badhaii. ishwar ye jodi kayam rakhe or log inhen dekh kar bhagte rahen ;-)
jai jai bhadaas