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14.2.20

ट्रेन और टॉयलट...!!

ट्रेन और टॉयलट...!!
तारकेश कुमार ओझा
ट्रेन के टॉयलट्स और यात्रियों में बिल्कुल सास - बहू सा संबंध हैं। पता
नहीं लोग कौन सा फ्रस्ट्रेशन इन टॉयलट्स पर निकालते हैं। आजादी के इतने
सालों बाद भी देश में चुनाव शौचालय के मुद्दे पर लड़े जाते हैं। किसने  कितने शौचालय बनवाए और किसने नहीं  बनवाए , इस पर सियासी रार छिड़ी रहती है। देश के सेलीब्रिटीज नामचीन हस्तियां टॉयलट पर फिल्में बनाती हैं और कमाई  करती है। जिनसे  यह नहीं  हो पाता वो विज्ञापन के जरिए  ही मुट्टी गर्म करने की कोशिश में रहती है। दूसरे मामलों  के बनिस्बत शौचालय में विशेष सुविधा है।रसगुल्ला खाकर रस पीने की तर्ज पर सेलीब्रिटीज इसकी आड़ में फिल्म और विज्ञापन से कमाई भी करते हैं तिस पर मुलम्मा यह कि बंदा बौद्धिक है। फिल्म और विज्ञापन के जरिए शौचालय की महत्ता का संदेश समाज को दे रहा है।   टॉयलट्स एक महागाथा की तर्ज पर शौचालय से शासकीय अधिकारियों का पाला भी पड़ता रहता है। कुछ दिन  पहले मेरे क्षेत्र में हाथियों के हमलों  में ग्रामीणों  की लगातार मौत से दुखी एक शासकीय अधिकारी दौरे  पर निकल पड़े। एक गांव में उन्हें निरीक्षण की सूझी। इस दौरान  वे यह जानकार दंग रह गए  कि सरकार ने गांव में 63 घरों  में सरकारी अनुदान  से शौचालय तो बना दिए, लेकिन इस्तेमाल एक का भी नहीं हो रहा है। सब में ताले पड़े हैं। दिशा - मैदान  के लिए ग्रामीण आदतन जंगल जाते हैं और वहां  जानवारों के हमलों का शिकार होते हैं। फिर तो अधिकारी  का पारा सातवें  आसमान पर जा पहुंचा। फिर क्या... आनन - फानन  जांच और निगरानी  समिति गठित हुई। हालांकि ग्रामीणों  की आदत में  सुधार हुआ  या नहीं, इसका नोटिस नहीं लिया जा सका। 
यात्रा  के  दौरान  ट्रेन के टॉयलट स्वाभाविक स्थिति में भी नजर आ जाए तो
सुखद  आश्चर्य होता है। याद नहीं पड़ता कि साधारण  दर्जे की किसी यात्रा में ट्रेन के शौचालय सही - सलामत मिले हों। कभी पानी  उपलब्ध तो यंत्रादि टूटे। कभी बाकी सब ठीक तो पानी  गायब।  बचपन में  लोकल ट्रेन में सफर से  इसलिए डर लगता था कि  उसमें टॉयलट नहीं होते थे। हाल में मेमू लोकल में इसकी व्यवस्थाहो तो गई। लेकिन कुछ दिन पहले गोमो - खड़गपुर मेमू लोकल से यात्रा के दौरान जायजा लिया तो डिब्बों के टॉयलट इस हाल में मिले... कि कुछ महीने पहले  की गई पुरानी यात्रा की याद ताजा हो गई। वहीं टूटे नल, बेसिन  में  पड़े प्लास्टिक की   बोतलें और टॉयलट के पास गुटखा और पान की पीके वगैरह। लोग कहते हैं इसके लिए  व्यवस्था दोषी है। व्यवस्था कहती है कि हम सुविधाएं देते हैं, लोग तोड़फोड़ और गंदगी फैलाते हैं तो हम  क्या करें। आखिर कहां तक हम व्यवस्था सुधारते रहें। सचमुच टॉयलट एक महागाथा...












 
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लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं।
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13.2.20

दुनिया के दरवाजे पर कोरोना वायरस की दस्तक खतरे की घंटी है

कृष्णमोहन झा

जानलेवा कोरोना वायरस से अब तक चीन में लगभग 400 से अधिक लोगों की असमय मौत हो गई है वही इस वायरस से संक्रमित 18 सौ से अधिक मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। चीन के जिस वुहान शहर को कोरोना वायरस के प्रकोप का केंद्र बताया जा रहा है, वहा नौ दिन के अंदर 1000 बिस्तर वाला सर्व सुविधा संपन्न अस्पताल का निर्माण इस हकीकत को उजागर करता है कि चीन सरकार ने स्थिति की भयावहता को भली भांति महसूस कर लिया है। शायद इसीलिए 1000 बिस्तरों वाले इस अत्याधुनिक सुविधा संपन्न अस्पताल के अलावा 14 बिस्तर वाला एक नए अस्पताल का निर्माण भी द्रुतगति से तैयार किया जा रहा है। चीन में सरकार द्वारा कोरोना वायरस के प्रकोप पर नियंत्रण हेतु बहुत सारे कदम उठाए गए हैं। एक करोड़ 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले वुहान सहित हुबेई प्रान्त के स्थानीय लोगों की कहीं भी आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

केजरीवाल की सादगी के सामने फेल हुए भाजपा के सभी हथकंडे

चरण सिंह राजपूत

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में वही हुआ जिसकी संभावना व्यक्त की जा रही थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का जादू दिल्लीवासियों के सिर चढ़कर बोला। 70 में से 62 सीटें जीतकर केजरीवाल ने साबित कर दिया कि वह ही दिल्ली के बादशाह हैं। केजरीवाल के सामने भाजपा का कोई भी हथकंडा उसके काम न सका। केजरीवाल की हर बात को दिल्ली के लोगों ने सर माथे लिया।

अमेरिका के लिए 'केम छो ट्रंप' तो भारत को होगा 'शेम शो ट्रंप'

CHARAN SINGH RAJPUT
देश के फकीर प्रधानमंत्री देश की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए एक और बड़ा कारनामा करने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को 24-25 फरवरी को भारत यात्रा पर बुला रहे हैं। भाई फकीर प्रधानमंत्री जो ठहरे तो ठाठबाट  और स्वागत भी फकीर जैसा ही होगा न। जैसी फकीरी उन्होंने अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में होने वाली 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम में दिखाई उससे बड़ी फकरी वह गुजरात के अहमदाबाद शहर में डोनल्ड ट्रंप का रोड शो कराकर कर दिखाने वाले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के भारत दौरे में कई ट्रेड डील होने की उम्मीद है। उम्मीद व्यक्त की जा रही है कि इस डील में वह किसानों की बर्बादी का सौदा कर अपनी गरीबी और संघर्ष का एक और प्रमाण देने वाले हैं।

दिल्ली में केजरीवाल की बंपर जीत को भाजपा व कांग्रेस को हल्के में न लेना चाहिए


स्थानीय मुद्दों एवं नेताओं की उपेक्षा ज्यादा नहीं चल सकती... दिल्ली में केजरीवाल की बंपर जीत को भाजपा व कांग्रेस को हल्के में न लेना चाहिए| भाजपा व कांग्रेस समर्थक इस जीत पर कुछ भी टिपण्णी करें पर उन्हें समझ लेना चाहिए कि इस जीत का  राष्ट्रीय राजनीति पर असर पड़ना स्वाभाविक है। भाजपा के लिये यह समय आत्ममंथन का समय है, राजनीति कभी भी एक दिशा में नहीं चलती, एक व्यक्ति का जादू भी स्थायी नहीं होता राजनीति में।

12.2.20

जब लिखने लगा स्वामी अग्निवेश के लेख और बयान, उनको जांचने-परखने का मिला मौका

CHARAN SINGH RAJPUT
राष्ट्रीय सहारा में आंदोलन करने पर जब हम लोग टर्मिनेट कर दिये गये तो नोएडा स्थित राष्ट्रीय सहारा के गेट पर हक की लड़ाई लड़ रहे थे तो मेरे मित्र महंत तिवारी का फोन आया। उन्होंने मुझसे कहा कि सोशल एक्टिविस्ट और बंधुआ मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी अग्निवेश को लेख और बयान लिखने के लिए राजनीतिक सोच रखने वाले व्यक्ति की जरूरत है। इसके लिए वह मानदेय भी देने को तैयार हैं। राजनीति में दिलचस्पी होने की वजह से मेरे अंदर राजनीतिक सोच भी है और लेख लिखने का शौक भी।

दिल्ली चुनाव के नतीजे क्या कहते हैं

ANUPAM SRIVASTAVA
   
" दिल्ली में आज भीख भी मिलती नहीं उन्हें,
था कल तलक दिमाग जिन्हें ताजो तक्थ का"

आम आदमी पार्टी की दिल्ली में धमाकेदार जीत ने एक बार फिर निराश आमजन के लिए आशा की रोशनी दिखाई है। केजरीवाल के लिए यह जिंदगी का सबसे सुखद क्षण होगा वही जब चुनाव सर्वे का आंकड़ा देने वाली संस्थाओं के द्वारा गोलमोल जवाब देना उनके लिए एक जोरदार झटका वह भी धीरे से..? भारतीय लोकतंत्र के दो भाईयों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि दिल्ली में भाजपा जैसी राजनीतिक खिलाड़ी की पराजय होगी। आप ने जिस तरह दिल्ली में अपनी जोरदार आमद दिखाई है। वह हैरत अंगेज ही है। बीबीसी ने इसे भारतीय इतिहास का सबसे रोचक क्षण कहां है। केजरीवाल ने कहा कि यह जीत दिल्ली की जनता लोकतंत्र और भारत की जीत है। भाजपा कहती हैं देश बदल रहा है लेकिन 2020 की दिल्ली बदल रही हैं।

देश की आधी आबादी कितनी सुरक्षित?


महिलाओं की सुरक्षा हमेशा से हमारे देश में एक बड़ा मुद्दा रहा है। देश की महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार और अन्य कई अपराधों के चलते।

कांग्रेस-भाजपा साफ, आप फिर दिल्ली टाप

                                        
वास्तव में एक बार फिर से सिद्ध हो गया कि सियासत में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। कि परिणाम क्या होगा क्योंकि सियासत में कुछ भी स्थाई नहीं होता। दिल्ली के चुनाव में एक बार यह बात सत्य साबित हो गई। जिस प्रकार से भाजपा ने दिल्ली के चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी उससे ऐसा प्रतीत होने लगा था कि दिल्ली का चुनाव किसी भी करवट बैठ सकता है। जिस प्रकार से भाजपा ने अपने ढ़ेरों मुख्यमंत्रियों का कुनबा दिल्ली के चुनाव में उतार रखा था इस कारण दिल्ली के चुनाव का अनुमान नहीं लग पा रहा था। क्योंकि, जिस प्रकार से प्रचार-प्रसार शुरुआत हुई थी उससे ऐसा प्रतीत होता था कि भाजपा एक मजबूत स्थिति में पहुँच रही है। क्योंकि चुनावी सभाओं में जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया जाता था उससे एक अलग रूप रेखा तैयार होती हुई दिखाई दे रही थी। परन्तु दिल्ली की जनता ने अपना ध्यान केन्द्रित रखा और अपने अनुसार मतदान किया।

नोएडा टेंडर घोटाले में यादव सिंह फिर गिरफ्तार


जे.पी.सिंह

न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यादव सिंह को सोमवार को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी नोएडा प्राधिकरण में 116.39 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाला मामले में हुई है। आरोप है कि यादव के कार्यकाल में निजी कंपनियों को गलत तरीके से यह टेंडर दिया गया था। दो साल पहले इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था।यादव सिंह के खिलाफ आपराधिक साजिश और सरकारी पद के दुरुपयोग के साथ ठेकेदारों और फर्मों से नियमित रूप से रिश्वत लेने का मुकदमा दर्ज किया गया है।

9.2.20

अकेले यात्रा करने पर आप अपने को जान पाते हैं - डॉ कायनात



यात्रायें समाज के हर तबके से जोड़ती है, महिला यायावर का नजरिया होता है  संवेदनशील

यात्रा लेखन एवं फोटोग्राफी विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला हुई शुरू

गरीब मजदूरों के सच्चे दोस्त थे मजदूर नेता व जनपक्षधर अधिवक्ता कामरेड सत्तो दा






रूपेश कुमार सिंह
स्वतंत्र पत्रकार


‘कामरेड सत्यनारायण भट्टाचार्य उर्फ सत्तो दा गरीब मजदूरों के सच्चे दोस्त थे। वे ताउम्र गरीबों के हक-अधिकार की रक्षा के लिए लड़ते रहे। वे इस अन्यायी व लूटेरी व्यवस्था के घोर विरोधी थे। वे मार्क्सवाद-लेनिनवाद-माओवाद विचारधारा के प्रबल हिमायती थे और सर्वहारा वर्ग की सत्ता की स्थापना के लिए ही पूरी जिंदगी काम करते रहे। वे एक मजदूर नेता होने के साथ-साथ धनबाद व बोकारो बार एशोसिएशन के वरिष्ठ व सम्मानित अधिवक्ता भी थे, जो गरीबों का मुकदमा मुफ्त में लड़ते थे।’ उक्त पंक्तियां 7 फरवरी, 2020 को झारखंड के कतरास के भंडारीडीह सामुदायिक भवन के मैदान में गूंज रही थी।

4.2.20

12वें पं. बृजलाल द्विवेदी साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित होंगे श्री कमलनयन पाण्डेय


गांधी भवन में 9 फरवरी को आयोजित होगा मीडिया विमर्श का सम्मान समारोह

भोपाल। मीडिया विमर्श के सारस्वत आयोजन में 9 फरवरी को त्रैमासिक पत्रिका ‘युगतेवर’ (सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश) के संपादक कमलनयन पाण्डेय को प्रतिष्ठित साहित्यक पत्रकारिता सम्मान 'पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा। सम्मान समारोह का आयोजन गांधी भवन में सुबह 11:30 बजे से होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात गाँधीवादी-समाजवादी चिन्तक श्री रघु ठाकुर, मुख्य वक्ता वरिष्ठ संपादक प्रो. कमल दीक्षित, विशिष्ट अतिथि साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के पूर्व निदेशक डॉ. उमेश कुमार सिंह और प्रख्यात व्यंग्यकार श्री गिरीश पंकज होंगे। समारोह की अध्यक्षता सप्रे संग्रहालय के संस्थापक एवं पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ संपादक श्री विजयदत्त श्रीधर करेंगे।

कब आएगा देश में जनसंख्या विरोधी कानून?


इस समय देश में नागरिक संशोधन बिल पर हो रहे पक्ष – विपक्ष के आंदोलनों के बीच एक बड़ा मुद्दा देश के नेताओं से दूर हो गया हैं | सत्ता पक्ष जानता है कि अभी नागरिक संशोधन बिल पर चल रहा आन्दोलन पूरा ही नहीं हुआ है तो यह नया विवाद क्यों पैदा किया जाय और विपक्ष को विरोध करने का एक और मुद्दा दे दिया जाय | पर कोई भी यह समझने के लिए तैयार नहीं है कि यह राजनीति का मसला नहीं बल्कि देश की अधिकांश समस्याओं की जननी बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण करने का एक ठोस समाधान है व अधिकांश समस्याओं का निदान है।

3.2.20

अमेठी में विकास कार्य देखकर रायबरेली की जनता भी गांधी परिवार से पीछा छुड़ाने के मूड में


अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में तीन दशकों से हासिए पर पड़ी कांगे्रस आजकल हर वह पैतरा अजमा रही है,जिससे यूपी में राजनीति में वह फिर से उस मुकाम को हासिल कर सके, जहां उसकी तूती बोला करती थी, उसकी आवाज को अनदेखा करना किसी के लिए आसान नहीं था,लेकिन सियासी थपेड़ों में कभी यूपी पर राज करने वाली कांग्रेस अब नंबर चार की पार्टी बनकर रह गई है। उसका वोट प्रतिशत भी 6-7 प्रतिशत पर सिमट गया है। सबसे आश्चर्यजनक यह है कि एक तरफ भाजपा, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सियासत में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिलता रहता है,लेकिन कांगे्रस का ग्राफ गिरता ही जा रहा है। अगर यह कहा जाए कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ अमेठी और रायबरेली ही ऐसे दो इलाके बचे हैं, जहां थोड़ी-बहुत गांधी परिवार की राजनैतिक हैसियत देखने को मिल जाती थी लेकिन पिछले दो लोकसभा चुनाव से यह परिपाटी भी बदल गई। अब तो कांगे्रस रायबरेली तक ही सिमट गई है,जहां से सोनिया गांधी सांसद हैं,जबकि टीवी कलाकार और भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी से अमेठी हारकर राहुल गांधी केरल पलायन कर गए हैं। जहां की मुस्लिम बाहुल्य वायनाड सीट से वह सांसद हैं।

5 ट्रिलियन की इकॉनमी और खैराती भीड़ गढ़ती संसदीय राजनीति


(डॉ अजय खेमरिया)

जबाबदेह नागरिक समाज के अपरिहार्य तत्व को खत्म करने की समवेत सहमति बनाती चुनावी राजनीति एक खतरनाक संकेतक है।दिल्ली विधानसभा चुनाव में जिस तरह मुफ्तखोरी की उद्घोषणाए हो रही है वह भारत के संसदीय लोकतंत्र की परिपक्वता को प्रश्नचिंहित करता है।औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के प्रस्ताव का विरोध करते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था"धूर्त,बदमाश, एवं लुटेरे हाथों में सत्ता चली जायेगी।सभी भारतीय नेता सामर्थ्य में कमजोर और महत्वहीन व्यक्ति होंगे।वे जुवान से मीठे होंगे।सत्ता के लिए आपस में लड़ मरेंगे और भारत राजनीतिक तू- तू मैं- मैं में कहीं खो जाएगा।"

28.1.20

यात्रा वृतांत : कई मामलों में बेहद विशेष है पवनार आश्रम






भूदान आंदोलन के प्रणेता विनोबा भावे के कार्यों और विचारों के जीवंत कहानी कहता वर्धा स्थित परमधाम आश्रम (पवनार आश्रम) आज भी जनसेवा में लगा हुआ है । धाम नदी के किनारे निर्मित इस क़रीब 15 एकड़ के क्षेत्रफल में विस्तारित इस आश्रम जाने का अवसर मुझे वर्धा निवास के दौरान प्राप्त होता रहा ।

यह आश्रम सामान्य आश्रमों की अपेक्षा बेहद विशेष व अद्वितीय है । कुछ बातें जो इसे विशिष्ठ बनातीं हैं इस प्रकार हैं -

चर्चा इनकी भी हो

पी. के. खुराना

मुझे कुछ समय के लिए आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के कामकाज का तरीका देखने का मौका मिला था। वे नियमित रूप से उच्चाधिकारियों की बैठक लेते थे और प्रदेश भर में चल रहे कामकाज की समीक्षा होती थी। कहां सड़क बन रही है, कहां संडास बनाए जा रहे हैं, कहां विकास के अन्य काम हो रहे हैं आदि पर चर्चा चलती रहती थी। सुबह-सवेरे जाग कर योग करना और फिर काम पर लग जाना उनकी आदत थी। अड़सठ वर्ष की उम्र में भी सारा दिन लगातार काम करते हुए वे उबासी भी नहीं लेते थे।

27.1.20

शेरू का पुनर्जन्म ....!!

शेरू का पुनर्जन्म ....!!
तारकेश कुमार ओझा
कुत्ते तब भी पाले जाते थे, लेकिन विदेशी नस्ल के नहीं। ज्यादातर कुत्ते आवारा ही होते थे, जिन्हें अब  स्ट्रीट डॉग कहा जाता है। गली - मोहल्लों में  इंसानों के बीच उनका  गुजर - बसर हो जाता था। ऐसे कुत्तों के प्रति  किसी प्रकार का विशेष  लगाव या नफरत की भावना भी तब बिल्कुल नहीं  थी। हां कभी - कभार नगरपालिका और  रेलवे  प्रशासन  की अलग  - अलग कुत्ते पकड़ने वाली  गाड़ियां जब मोहल्लों  में आती तो वैसे  ही खौफ फैल जाता  , जैसे पुलिस की गाड़ी देख अपराधियों में  दहशत होती है। समय के  साथ ऐसी गाड़ियों  में  भर  कर आवारा  कुत्तों को ले  जाने  का  चलन बंद हो गया। इसके बाद  आवारा  कुत्तों  की अलग त्रासदी समाज में  जगह - जगह नजर  आने लगी। बहरहाल बचपन के दिनों में मुझ पर कुत्ते पालने का धुन  सवार हुआ। पता चला पास में  एक जगह  कुछ पिल्ले चिल्ल पों  मचाए रहते हैं। कुछ दोस्तों  के साथ वहां पहुंचा और पिल्लों के  बीच एक कुछ तेज सा  नजर आने वाला पिल्ला उठा लिया। कुछ दिनों में ही पिल्ला  सब का प्रिय बन गया। बच्चों  ने नाम  रखा शेरू। घर की  पालतू गायों  को दूध पीकर शेरू सचमुच  शेर जैसा  तगड़ा हो गया। शेरू में कई  खूबियां थी, लेकिन कुछ कमियां भी  थी। वो अचानक उग्र  हो कर आते - जाते लोगों पर हमले  कर देता। कईयों को उसने काटा। लोग डर से गली  के सामने  से  गुजरने  से खौफ खाने  लगे। इसके बाद हमने  उसे  लोहे  की  मोटी  जंजीर से  बांधना शुरू  किया। केवल  रात में ही उसे  खोला  जाता। मुझे अपने  फैसले  पर पछतावा  होने लगा,   क्योंकि   लोगों से हमारे रिश्ते बिगड़ने लगे।  कुछ शुभचिंतकों ने उसे  कहीं   दूर छोड़ आने  या जहर देकर मार देने  का सुझाव दिया। लेकिन  तब तक शेरू से  लगाव  इतना  बढ़ चुका था कि इस बात का ख्याल भी कलेजा चीर कर रख देता। अचानक आक्रामक हो जाने के सिवा शेरू में ऐसी कई  खूबियां थी जो उसे  साधारण कुत्तों  से  अलग करता था। परिवार के सदस्य की तरह शोक की स्थिति में उसकी आंखों से आंसू बहते मैने कई बार देखा था। खुशी  -  गम के  माहौल में  वो आक्रामकता मानो  भूल जाता। हालांकि आगंतुक डरे  - सहमे रहते। जीवन संध्या पर  शेरू कमजोर और बीमार रहने  लगा। हालांकि  अपनों को देखते ही उसकी आंखें  चमक उठती। आखिरकार ठंड की एक उदास शाम शेरू किसी मुसाफिर की तरह चलता बना... कुछ रह गया तो उसकी लोहे  की वो जंजीर , जिससे उसे बांध कर रखा जाता था। । उसके जाने  का गम  मुझे सालों  सालता रहा। किशोर उम्र में  ही  तय कर लिया कि  अब कभी कोई  जानवर नहीं पालूंगा। शेरू  की याद आते  ही सोचता इस नश्वर संसार में मोह - माया जितना  कम  रहे अच्छा। शेरू के जाने के बाद मन अपराध बोध से भी भर जाता। मैं शेरू  के  अचानक आक्रामक हो उठने  की वजह सोच कर परेशान  हो उठता। मुझे लगता कि अंजाने में मैं  शायद शेरू कि  किसी ऐसी  जरूरत को  नहीं भांप  पाया। जिसका बुरा असर उसकी शारीरिक - मानसिक सेहत पर पड़ा। कई  सालों  तक मैं कोई जानवर  नहीं  पालने  के अपने  फैसले  पर अडिग रहा। लेकिन हाल में बेटे की जिद के  आगे झूकना  पड़ा। बेटे ने विदेशी नस्ल का  कुत्ता पाला। नाम रखा ओरियो। चंद दिनों  का ही  था जब घर लाया गया। अपनी  सोच के  लिहाज से  मैं  उससे  दूरी बनाए रखने  का भरसक प्रयास करता रहा। लेकिन डरे - सहमे  रह कर भी वो  मेरे इर्द - गिर्द मंडराने की  कोशिश करता। मैने उसे कभी दुत्कारा तो नहीं लेकिन  कभी दुलार भी  नहीं  किया। लेकिन अपनी  सहज वृत्ति से ओरियो  ने जल्द ही घर के  सभी लोगों  को अपना  बना  लिया। कुछ दिनों में ही आलम  यह कि  उसे देखे  बिना हमें  चैन नहीं  तो परिवार के किसी सदस्य की अस्वाभाविक  अनुपस्थिति उसे बेचैन  कर देती। उसे  देख कर  मैं  सोच में  पड़ जाता हूं  कि  आखिर कौन  सिखाता है इन्हें पालकों  से  प्यार  करना  और वफादारी वगैरह। अभी वो चंद महीने  का ही है, लेकिन  परिवार की  महिलाओं  व बच्चों के  मामले में उसकी भूमिका बिल्कुल किसी बॉडीगार्ड की  तरह है। घर में हर किसी  के आगे - पीछे घूमते रह  कर  अपनी  वफादारी जतलाता  रहता है।  मासूम  बच्चों  की  तरह उन पर भी  जादू  कर देना  जो इनसे दूर रहना  चाहते हैं। ओरियो को देखता हूं तो लगता है शेरू का पुनर्जन्म  हुआ है।
 

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लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं।
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सत्य और संघर्ष से बनी व्यास की आत्मकथा, जयपुर में हुआ विमोचन




जयपुर। कथेतर लेखन अब भारतीय साहित्य की मुख्य धारा है जिसमें हमारे युग की सच्चाई बोल रही है। कवि-लेखक डॉ सत्यनारायण व्यास की आत्मकथा 'क्या कहूं आज' केवल साधारण मनुष्य की सच्चाई और संघर्ष की दास्तान नहीं है बल्कि इसमें लंबे दौर के जीवन अनुभवों को देखा जा सकता है। वरिष्ठ आलोचक और साहित्यकार डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने उक्त विचार राजस्थान विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित विमोचन समारोह में व्यक्त किए। डॉ अग्रवाल ने कहा कि महाविद्यालयी शिक्षक के खरे अनुभव भी इस आत्मकथा को विशिष्ट बनाते हैं।

हिन्दुस्तान भागलपुर के एडिटोरियल की स्थिति विस्फोटक, संपादक की वजह से स्टाफ में रोष


भागलपुर में हिन्दुस्तान के एडिटोरियल की हालात गंभीर होती जा रही है। यहां विस्फोटक स्थिति होती जा रही है। संपादक के चुनींदा लोगों को छुट्टी देने और उनकी बतमीजी वाली भाषा की वजह से यहां के सभी स्टाफ (कुछ को छोड़कर) में स्थानीय एडिटर की तानाशाही और पागलपनी चलते रोष फैलता जा रहा है।

राम मंदिर निर्माण तारीख को लेकर संशय बरकरार, रामनवमी से मंदिर निर्माण की चर्चाओं का जोर

अजय कुमार,लखनऊ

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,विश्व हिन्दू परिषद और साधू संतों आदि तक सभी मंदिर निर्माण की भव्यता को लेकर तो खूब दावे  कर रहे हैं, लेकिन करोड़ों हिन्दुओं के अराध्य मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर का निर्माण कब से शुरू होगा, यह कोई नहीं बता रहा है, जबकि हर राम भक्त मंदिर निर्माण की तारीख जानना चाहता है।

साईं बाबा : न पाथरी के न शिरडी के,वे तो सबके हैं


कृष्णमोहन झा

महाराष्ट्र में जब से शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एवं कांग्रेस की महा विकास आघाडी सरकार के हाथों में सत्ता की बागडोर आई है, तब से रोज नए विवादों के जन्म लेने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब इन विवादों की पहुंच उन क्षेत्रों तक भी हो गई है ,जो वर्षों से लोगों की आस्था और श्रद्धा के केंद्र बने हुए है। पिछले दिनों इसी तरह का एक अनावश्यक विवाद करोड़ों लोगों की आस्था एवं श्रद्धा के केंद्र शिरडी को लेकर निर्मित हुआ है, जो साईं बाबा की तपस्थली के रूप में सारे विश्व में विख्यात हैं। साईं बाबा की समाधि के दर्शन हेतु प्रतिदिन यहां पचास हजार से अधिक लोग आते हैं और यह संख्या अवकाश के दिनों में तथा नव वर्ष , रामनवमी, गुरुपूर्णिमा तथा विजयदशमी के शुभ अवसर पर लाखों की संख्या को पार कर जाती है।

मोदी सरकार के लिए बड़ी आफत बना शाहीन बाग आंदोलन

CHARAN SINGH RAJPUT
   
नई दिल्ली। देश में अपनी बात रखने और विभिन्न मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन करने के लिए भले ही जंतर-मंतर को जाना जाता हो पर आज की तारीख में सीएए के विरोध में शाहीन बाग में हो रहे आंदोलन ने जो मुकाम हासिल किया है वह जंतर-मंतर को पीछे छोड़ता प्रतीत हो रहा है। गणतंत्र दिवस में जिस तरह से वहां पर सीएए के विरोधियों की भीड़ उमड़ी और गणतंत्र दिवस मनाया उसने मोदी सरकार द्वारा मनाए जा रहे गणतंत्र दिवस को भी पीछे छोड़ दिया। भले ही राजपथ पर देश की आन-बान-शान में विभिन्न झांकियां निकाली गईं हों पर शाहीन बाग के गणतंत्र दिवस समारोह ने न केवल देश बल्कि विदेश का भी ध्यान अपनी ओर खींचा।

25.1.20

ओछी मानसिकता रखने वाले पत्रकारों की कलम से पत्रकार और पत्रकारिता का गिरता स्तर

Pradeep Gadhwal
 

लोकतंत्र में संविधान के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकार  को जाना जाता है । एक पत्रकार की अहमियत क्या होती है ? उन पीड़ितों से पूछो जिन की परेशानी प्रशासनिक स्तर तक बगैर  जात-पात, धर्म पूछे एक पत्रकार ने पहुंचाई है । लेकिन बदलते समय के अनुसार आम जनता और प्रशासन के बीच सेतु की यह कड़ी धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है इसकी प्रमुख वजह निकल कर आई है वह है अब ऐसे पत्रकार बनने लगे हैं , जिनके पास किसी प्रकार का कोई अनुभव हैं ही नहीं है । न हीं कोई डिग्री डिप्लोमा है । ऐसे व्यक्ति प्रायः पत्रकारिता में इसलिए आते हैं कि समाज में उनकी पत्रकार की इमेज बने जिसके जरिए वह रोब डालने वाला बन सके। 

गांधी के राम

कुछ दिनों पहले मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा, "वो तो अच्छा हुआ कि गोडसे ने गांधी को मार दिया, अगर गांधी आज ज़िंदा होता तो मैं मार देता।"

आज के परिप्रेक्ष्य में इस बात के समर्थन में कुछ पाठक भी होंगे, लेकिन सिर्फ समर्थन के लिए ही यह बात लेख के प्रारम्भ में नहीं कही और ना ही गाँधीजी के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति या दया उत्पन्न करने की चेष्टा है यह वाक्य। यह वाक्य ना तो नफरत फैलाने के लिए और ना ही किसी राजनीतिक दल की दाल गलाने के लिए मैनें बताया है।

15.1.20

जब सहारा में बकाया भुगतान के लिए भी करना पड़ा था आंदोलन


CHARAN SINGH RAJPUT

एक समय था कि सहारा के चेयरमैन सुब्रत राय नेताओं और बालीवुड हस्तियों से यह कहते-कहते नहीं थकते थे कि इतना बड़ा ग्रुप हाने के बावजूद हमारे यहां कहीं से कोई विरोध स्वर नहीं हैं। कोई यूनियन नहीं है। सब लोग एक परिवार की तरह काम करते हैं। सुब्रत राय ने सहारा को विश्व का सबसे बड़ा विशालतम परिवार कहा था। उनका कहना था कि रेलवे के बाद देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला ग्रुप सहारा है।

10.1.20

अमेरिका-ईरान तनाव से उड़ी मोदी सरकार की नींद, भारत को आर्थिक मोर्चे पर होंगी तमाम दुश्वारियां


अजय कुमार,लखनऊ

विकास के मामले में भारत भले ही दुनिया में अपनी पहचान नहीं बना पाया हो,लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश की अहमियत को कभी किसी ने कम करके नहीं आका। खासकर जब से केन्द्र में मोदी सरकार आई है तब से भारत अंतराष्ट्रीय हनक-धमक और भी बढ़ गई है। मोदी की आवाज को दुनिया गंभीरता से सुनती है। पीएम संतुलन बनाकर आगे बढ़ते हैं,इसी वजह से उनके अमेरिका से भी अच्छे संबंध हैं तो रूस भी उन पर विश्वास करता है। परस्पर विरोधी इजरायल-फिलीपींस ही नहीं मुस्लिम देशों में भी मोदी का सिक्का चल रहा है।

2.1.20

खास मौकों पर चुप रहने वालों को इतिहास नहीं करता माफ

अजय कुमार, लखनऊ

विदेशी पैसे से पल रहे देश के मुट्ठी भर लोग और चंद नेता अगर सड़क पर आगजनी और हो-हल्ला मचाकर यह सोचते हैं कि वह भारत के भाग्य विधाता बन जाएंगे तो उन्हें अपने मन से यह गलत फहमी निकाल देनी चाहिए। कोई भी देश लोकतांत्रिक तरीके से चलता है। लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार और उसके बनाए कानून का पालन करना देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी और कर्तव्य दोनों ही हैं। अगर सरकार के किसी फैसले कोई खुश नहीं है तो भी उसे विरोध का रास्ता लोकतांत्रिक तरीके से ही चुनना अथवा न्याय की शरण में जाना होगा,जहां दूध का दूध,पानी का पानी हो जाता है। कुछ नेताओं द्वारा अपनी सियासी रोटियां सेकनें के लिए सरकार के प्रत्येक फैसले के खिलाफ जहर उगलना उसे संविधान विरोधी बता कर बखेड़ा खड़ा करने के दुष्प्रचार को जनता अच्छी तरह से समझती है।

25.12.19

मोदी नाम केवल्म से नहीं जीते जा सकते हैं राज्य


संजय सक्सेना,लखनऊ


झारखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार को लेकर हर तरफ हाय-तौबा मचा हुआ है। सब अपने-अपने तरीके से बीजेपी की हार की समीक्षा कर रहे हैं, खासकर राष्ट्रीय दल का तमगा हासिल किए हुए कांगे्रस-बीजेपी की जर्बदस्त तुलना की जारी है। कोई 16 सीटें जीतने वाली कांगे्रस को दस में दस नंबर दे रहा है तो 25 सीटें जीतने वाली बीजेपी का ‘जीरो’ करार दे रहा है। सबका अपना-अपना नजरिया हैं तो इस हकीकत को भी नही झुठलाया जा सकता है कि झारखंड में कांगे्रस इस लिए जीती, क्योंकि उसने झारखंड में अपने कदम मजबूती के साथ जमाने के बजाए दूसरे(जेएमएम) की बैसाखी का सहारा लेना ज्यादा सही समझा, इसीलिए वह आज झारखंड में खड़ी दिखाई दे रही है।

ऐसे तो और भड़केगा सीएए और एनआरसी के खिलाफ हो रहा आंदोलन

सी.एस. राजपूत

नई दिल्ली। किसी भी लोकतांत्रिक देश में जब माहौल बिगड़ता है तो उस देश की सरकार का दायित्व बनता है कि वह किसी भी तरह से माहौल को शांत करे। जब बात किसी मांग की होती है और आंदोलन राष्ट्रव्यापी हो तो सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है कि वह उस आवाज को सुने। केंद्र में काबिज मोदी सरकार है कि हर आवाज को डंडे के बल पर दबाने पर आमादा है। यही वजह रही कि देश में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में हो रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्ष के उकसावे के बाद मुस्लिमों के उपद्रव के रूप में लिया है।

संसद में हुआ अटल सम्मान समारोह, देश विदेश की 25 विभूतियां सम्मानित

मुख्य आयोजक भुवनेश सिंघल सुनाए अटल जी के अंतिम दिनों के भावुक संस्मरण, सांसद कवियों ने कविताओं के माध्यम से भरी हुंकार

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में पूर्व संध्या पर 24 दिसम्बर 2019 को दोपहर 1 बजे से संसद भवन में ‘अटल सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एक अनूठी पहल करते हुए सांसद कवियों का राष्ट्रीय अटल कवि सम्मेलन भी किया गया जिसमें विभिन्न सांसद व केन्द्रीय मंत्री ने मंझे हुए कवि की तरह काव्य पाठ कर उपस्थित श्रोताओं को हतप्रभ कर दिया।

24.12.19

यूपी में हिंसाः पीएफआई लम्बे समय से था सक्रिय मगर सुरक्षा तंत्र आंख मूंदे रहा

                                              अजय कुमार, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में प्रतिबंद्धित एवं विवादित संगठन ‘स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आॅफ इंडिया’(सिमी) और उससे जुड़ा संगठन ‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) एक बार फिर से राज्य में अपने पैर पसार रहा हैं। सिमी और पीएफआई  दिल्ली में मोदी और यूपी में योगी सरकार बनने के बाद से राज्य के मुसलमानों को कथित भय दिखाकर उकसाने में लगे हैं तो रिहाई मंच, बामसेफ, आईसा, नागरिक एकता पार्टी और शराब मुक्ति मोर्चा जैसे विवादित संगठनों की भी सक्रियता में तेजी देखी गई। चाहें तीन तलाक पर कानून बनाने की बात हो या फिर अयोध्या पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला अथवा गौरक्षा के नाम पर यदाकदा हुईं माॅब लीचिंग की घटनाओं ने इन संगठनों को ‘उर्जा’ प्रदान की तो नागरिकता संशोधन बिल की आड़ में इन संगठनों ने उत्तर प्रदेश को दंगा-आगजनी की आग में झोंक दिया। प्रतिबंद्धित संगठन को गैर भाजपा दलों के नेताओं के विवादित बयानों ने भी खूब फलने-फूलने का मौका दिया। वैसे,खुफिया सूत्र बताते हैं कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी यूपी में बवाल और हिंसा के लिए ‘जमीन’ तैयार की गई थी,लेकिन उस समय खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलांे की अति-सक्रियता के कारण इनके मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए थे। उस समय तमाम मुस्लिम धर्मगुरू भी परिपक्तता दिखाते हुए लगातार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील  करते दिखाई दिए थे,लेकिन नागरिकता संशोधन बिल के पास होने के समय करीब-करीब सभी मुस्लिम धर्मगुरूओं और बुद्धिजीवियों ने मुसलमनों को समझाने की बजाए ‘आग में घी डालने’ का काम ज्यादा किया।

नागरिकता कानून तो एक बहाना है असल मुद्दों से ध्यान भटकाना है

देश में इस वक्त हालात बद से बदतर होते नजर आ रहे हैं ऐसा कोई भी फैसला बीजेपी सरकार ने लिया हो और उस पर विरोध प्रदर्शन ना हुआ हो, यह तो कभी हो ही नहीं सकता है. बीजेपी सरकार ने अपने पिछले शासनकाल में नोटबंदी और जीएसटी का ऐतिहासिक फैसला लेकर लोगों को इस तरह उलझाया...पता ही नहीं चला कि बीजेपी के 5 साल कैसे गुजर गए. लोगों को लगा कि सरकार को अभी और वक्त चाहिए  भारत को न्यू इंडिया बनाने के लिए.... अब सरकार ने अपने अगले 5 साल गुजारने के लिए नागरिकता संशोधन कानून के जाल में लोगों को इस कदर उलझा दिया है कि लोग आपस में ही उलझे रह जाएं और देश के जो असली मुद्दे हैं उनसे ध्यान बिल्कुल ही हट जाए. साथ ही देखते ही देखते सरकार के 5 साल फिर से ऐसे ही गुजर जाए.

झारखंड विस चुनाव परिणाम ने मोदी-शाह को दिखाया आईना


सी.एस. राजपूत


नई दिल्ली। झारखंड का विधानसभा चुनाव एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रहे आंदोलन के बीच हुआ है। आंदोलन सही था या फिर गलत इसका निर्णय बहुत हद तक झारखंड चुनाव के परिणाम से भी होना था। इतना ही नहीं मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल के कारनामे भी इस आंदोलन में समाहित थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी झारखंड चु नाव प्रचार में धारा 370 धारा का हटाना, तीन तलाक पर बिल लाना, राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो जाना, ये सभी अपनी उपलब्धियों का बखान झारखंड चुनाव प्रचार में किया।

23.12.19

आंदोलन और हिंसा एक सिक्के के दो पहलू नहीं

अजय कुमार,लखनऊ

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन बिल पर दो दिनों की हिंसा के बाद जिंदगी फिर से धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगी है,लेकिन अपने पीछे कई सवाल भी छोड़ गई है,जिसका जवाब कुछ दिनों तक सड़क पर तांडव मचाने वाले लोगों उनके परिवार के सदस्यों को देना होगा तथा उस समाज को भी चिंन्हित करना होगा, जिस समाज के दंगाई सड़क पर सरकारी और निजी सम्पतियों के साथ आगजनी के साथ-साथ हाथ में पत्थर लिए मरने-मारने पर उतारू थे। पुलिस को जिस तरह दंगाइयों ने अपना निशाना बनाया। वह सुनियोजित था। लखनऊ की बात की जाए तो यहां हिंसा का बंगाल और कश्मीरी कनेक्शन भी दिखाई दिया। राज्य के बाहर से आए युवा जिनके शरीर से लेकर पैरों तक में ब्रांडेड कपड़े और जूते नजर आ रहे थे,उनकी भी शिनाख्त शुरू हो गई है। तलाश उन लोगों की भी हो रही है जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर दूसरे राज्यों से आए दंगाइयों को ठहराने-खाने की व्यवस्था की। योगी सरकार जिस तरह से दंगाइयों पर शिकंजा कस रही है,उससे तो यही लगता है कि दंगाइयों को गिरफ्तार किया जाएगा कुछ पर रासुका के तहत कार्रवाई भी की जा रही है। इसके अलावा दंगाइयों की सम्पति जब्त करके जानमाल का जो नुकसान हुआ है,उसकी भरपाई की जाएगी। इसको लेकर पुलिस काफी आगे बढ़ भी चुकी है।

यूनिवर्सिटी में कर दी दिल्ली पुलिस ने फर्जीकल स्ट्राइक

पुलिस वालों के हौसले  देश की जनता ने इस कदर बुलंद कर दिए हैं कि अब जनता को ही इसकी भरपाई  खूब बेहतरीन ढंग से करनी पड़ रही है. अभी कुछ समय पहले ही हैदराबाद पुलिस ने रेप के चारों आरोपियों का फर्जी एनकाउंटर किया था. भावनाओं में बहते हुए जनता ने पुलिस का पूरा साथ दिया. इस बात को भी आप अच्छे से जानते हैं कि शेर के मुंह में एक बार खून लग जाए तो उसको खून की आदत पड़ ही जाती है. वही हाल पुलिस वालों का हो चुका है. दिल्ली में पुलिस वालों द्वारा एक नामी यूनिवर्सिटी में घुसकर छात्रों को  इस कदर मारा गया जैसे वह यूनिवर्सिटी नहीं, आतंकवादियों की ट्रेनिंग का अड्डा था.

रिटायर आईपीएस अफसर दारापुरी की रिहाई के लिए चलेगा अभियान

योगी सरकार की आंख की किरकिरी बने आम आदमी की आवाज दारापुरी
मजदूर किसान मंच की बैठक में दारापुरी की रिहाई के लिए लिया प्रस्ताव
दारापुरी की रिहाई के लिए चलेगा हस्ताक्षर अभियान
आरएसएस-भाजपा की विभाजनकारी राजनीति का करेगें पर्दाफाश
आदिवासियों को किसी कीमत पर बेदखल नहीं होने देगें-दिनकर


ओबरा, सोनभद्र :  योगी सरकार की हर जन विरोधी, लोकतंत्र विरोधी कार्यवाहियों के आलोचक रहे और हर वक्त अपनी जनपक्षधरता के प्रति प्रतिबद्ध रहे मजदूर किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व आईपीएस अधिकारी एस0 आर0 दारापुरी सरकार की आंख की किरकिरी बन गए थे।

21.12.19

श्रमिकों को बंधुआ बनाने वाला है इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल

सी.एस. राजपूत

नई दिल्ली। हाल ही में केंद्र सरकार ने जो इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल लोकसभा में पेश किया वह श्रमिकों को और मुश्किल में डालने वाला है। मोदी सरकार ने पूंजपीतियों को राहत देते हुए और श्रमिक यूनियनों पर शिकंजा कसते हुए इसके विभिन्न प्रावधानों में औद्योगिक संस्थानों में हड़ताल करने को कठिन बनाया गया है और बर्खास्तगी को आसान कर दिया गया है।

भ्रष्टाचार व मनमानी का अड्डा बना आईजीएनसीए

सिद्धार्थ शंकर गौतम

भारतीय कला और संस्कृति के बिखरे खंडों को एकत्रित करने और उनके संरक्षण की आवश्यकता को पहचानते हुए 1987 में मूर्धन्य कला विद्वान डॉ. कपिला वात्स्यायन ने इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र की स्थापना की थी। उन्होंने इस केन्द्र को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई किन्तु वर्तमान में इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र विशुद्ध रूप से राजनीति, भ्रष्टाचार व सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों की शरणस्थली बन गया है। कला-संस्कृति के नाम पर हर माह होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी धन की जमकर फिजूलखर्ची की जा रही है।

13.12.19

ललित कला अकादमी में हर ओर मनमानी!

ललित कला अकादमी नामक संस्थान भारत सरकार का वह सफ़ेद हाथी है जहाँ करोड़ों रुपये अध्यक्ष के घूमने एवं दान कार्य में लगाए जाते हैं. वर्तमान अध्यक्ष के चयन प्रक्रिया में सभी नियम ताक पर रख दिए गए.

12.12.19

राजनेताओं ने बनाया है हिंदू और मुस्लिम के बीच का चक्रव्यूह....


आखिर कब खत्म होगी हिंदू और मुस्लिम के बीच की नफरत की आग

हम इस धरती में जन्म भी लेते हैं इसी मिट्टी के होकर भी रह जाते हैं. हम सबको इस बात का तो पता है कि  मरना तो हमने एक न एक दिन है ही, मगर फिर भी धर्म जाति  और समुदाय  को लेकर आपस में लड़ते झगड़ते रहते हैं आखिर मरने के बाद भी क्यों नहीं खत्म होती ये हिंदू और मुस्लिमों के बीच की नफरत  की आग ! हम तो इस संसार को छोड़कर चले जाते हैं फिर भी बना जाते हैं इस नफरत की दीवार को....मुस्लिमों को लेकर इस समय भारत देश में जो नफरत की आग पैदा हो चुकी है या पहले से ही थी, ऐसा भी कह सकते हैं कि आप हिंदू मुस्लिमों के भेदभाव के जिस चक्रव्यूह में भारत के लोग फंसे हुए हैं. ऐसा लगता है कि कभी समाप्त ही नहीं होगी.

कैब पर तुष्टिकरण की खतरनाक सियासत

अजय कुमार, लखनऊ

केन्द्र की मोदी सरकार ने आखिरकार  भारी विरोध के बीच अपने घोषणा पत्र के एक और चुनावी वायदे ‘नागरिकता संशोधन बिल’ (कैब)को कानूनी जामा पहना ही दिया। अब सिर्फ राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की औपचारिकता बची है। वहीं इस बिल को गैर-संवैधानिक बता कर कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गए हैं।

9.12.19

बलात्कार के बढ़ते मामलों में क्या सरकार व सिस्टम पर सवाल नहीं करना चाहिए


बलात्कार की बढ़ रही वारदातों को देख अब सरकार व सिस्टम से सवाल करने की मजबूरी हुई जरूरी

संदीप के. गुप्ता
असि. प्रोफेसर एवं मीडिया रिसर्च स्कॉलर
ईमेल sandyreporter12@gmail.com


बलात्कार के आए दिन हो रहीं नई वारदातें व बढ़ते हुए क्रूर, बर्बर, घ्रणित दुष्कर्मों के मामले को देखकर तो यह निश्चित हो गया है कि लोगों में अब कानूनी सजा का भय नहीं है। कानून अब उनके लिए शायद एक दाँवपेंच का तंत्र बन गया है। न्यायिक-व्यवस्था का ढुलमुल रवैया, सुस्त कार्यवाही, तारीखों पे तारीख को लेकर अपराधी बड़ी निडरता से अपने अपराधों को जन्म दे रहे हैं। अपराधियों की नजर में यह न्याय-व्यवस्था कानून फिल्मी हो गया है। यह महज एक अन्धा कानून ही लगता है। दलीलों सबूतों का खेल लगता है। यह सब ऐसा क्यों है, और क्यों अपराधियों को यह सब सहज व निडर लगता है।

इमरान को भारी ना पड़ जाये बाजवा से टकराहट!

कृष्णमोहन झा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद पर इमरान खान को आसीन हुए अभी मुश्किल से 16 माह का वक्त ही बीता है ,लेकिन इतनी छोटी सी अवधि में ही सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ उनके संबंधों में इतनी खटास आ गई है कि निकट भविष्य में ही प्रधानमंत्री पद से इमरान खान की विदाई के कयास लगाए जाने लगे हैं। दरअसल सेना अध्यक्ष बाजवा से लगभग दो माह के बाद इमरान खान की मुलाकात के तत्काल बाद जब इमरान खान अचानक दो दिन की छुट्टी पर चले गए ,तभी से राजनीतिक दलों एवं मीडिया द्वारा इसे सेना एवं सरकार के बीच बढ़ती दूरियों के रूप में देखा जा रहा है।

7.12.19

‘हैचरी’ यात्रा : इन चूजों के भगवान तो हम मनुष्य ही हैं! (देखें वीडियो)

यशवंत सिंह

करनाल से दिल्ली लौटते वक्त रास्ते में मशहूर ढाबे पर भरपेट मक्खन-पराठे का आनन्द उठाने के बाद फोटो सेशन!

तो फिर राम रहीम, आशाराम, चिमन्यानंद स्वामी और सेंगर जैसे आरोपियों का भी करो एनकाउंटर!

CHARAN SINGH RAJPUT

हैदराबाद में पशु चिकित्सक के साथ गैंगरेप और जलाकर मार डालने घटना को लेकर जिस पुलिस को हम कोसते-कोसते थकते नहीं रहे थे। जिस पुलिस के चलते ही हम अपराध होने की घटना बताते हैं। जिस पुलिस पर हम भ्रष्टतम होने का आरोप लगाते हैं वही पुलिस न्यायिक हिरासत लिये गये हैदराबाद गैंगरेप मामले के आरोपियों का एनकाउंटर करने पर नायक की भूमिका में आ गई है। हैदराबाद के लोग उन पर फूल बरसा रहे हैं। महिलाएं राखी बांध रही हैं। आज पैदा हुए इस अराजक हालात में आम लोगों के साथ ही पीड़िताओं के सगे संबंधियों का इस एनकाउंटर खुश होना बनता भी है।

5.12.19

यदि रोक नहीं सकते रेप, गैंगरेप और पीड़िताओं की जलाने की घटनाएं तो छोड़ दो राजपाट

चरण सिंह राजपूत

जो लोग यह सोच रहे हैं कि देश में कुछ अच्छा होने जा रहा है वह भूल जाएं। रेप, गैंगरेप हत्या और उसके बाद जलाने के मामले में देश में तमाम बवाल मचने के बावजूद, संसद और राज्य सभा में सासंदों के चिल्लाने के बावजूद उन्नाव के बिहार थाना क्षेत्र में गैंगरेप की पीड़िता को पांच लोगों ने जिंदा जलाने की कोशिश की। हालांकि सभी आरोपी गिरफ्तार कर लिये गये हैं पर यह वारदात यह दर्शाती है कि आरोपियों के मन में किसी कानून या फिर समाज का कोई भय रह नहीं गया है। यह भी कहा जा सकता है कि कानून को ताक पर रखकर बहू-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करने वाले लोग हर जिम्मेदार तंत्र को ठेंगा दिखा रहे हैं। कौन हैं इस मानसिकता का जिम्मेदार?

4.12.19

भारतीय सामाजिकता का नया समय

-प्रो. संजय द्विवेदी

हमारे सामाजिक विमर्श में इन दिनों भारतीयता और उसकी पहचान को लेकर बहुत बातचीत हो रही है। वर्तमान समय ‘भारतीय अस्मिता’ के जागरण का समय है। जबकि यह ‘भारतीयता के पुर्नजागरण’ का भी समय है। ‘हिंदु’ कहते ही उसे दूसरे पंथों के समकक्ष रख दिए जाने के खतरे के नाते, मैं ‘हिंदु’ के स्थान पर ‘भारतीय’ शब्दपद का उपयोग कर रहा हूं। इसका सच तब खुलकर सामने आ जाता है, जब हिंदुत्व विरोधी ताकतें ही कई अर्थों में भारतीयता विरोधी एजेंडा भी चलाते हुए दिखती हैं। वे हिंदुत्व अलग-अलग नामों से लांछित करती हैं। कई बार ‘साफ्ट हिंदुत्व’ तो कई बार ‘हार्ड हिंदुत्व’ की बात की जाती है। किंतु डा. राधाकृष्णन की किताब ‘द हिंदु व्यू आफ लाइफ’ कई अंधेरों को चीरकर हमें सच के करीब ले जाती है। इस दिशा में स्वातंत्र्य वीर सावरकर की ‘हिंदुत्व’ भी महत्त्वपूर्ण बातें बताती है।

30.11.19

मृत्युदंड से कम स्वीकार्य नहीं

किसी भी देश के लिए महिलाओं की स्थिति इस बात का सूचकांक होती है कि वह देश और समाज पतन के रास्ते पर चल रहा है या सामाजिक प्रगति के रास्ते पर। इस दृष्टिकोण से देखें तो भारत का भविष्य उज्जवल दिखाई नहीं देता। तेलंगाना राज्य के हैदराबाद में पशु चिकित्सक 26 वर्षीया डॉ. प्रियंका रेड्डी के साथ जो हृदय विदारक घटना हुई उसकी सजा मृत्युदण्ड से तनिक भी कम स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। हैवानियत की सारी हदें पार कर दरिंदों ने जिस तरह पहले सामूहिक बलात्कार और फिर पुलिस से बचने के लिए जिंदा जलाने का घृणित कार्य किया वह इस बात को दर्शाता है कि महिला सुरक्षा कानून का आज भी वहशियों के भीतर कोई खौफ नहीं है, अन्यथा वर्ष 2012 से लेकर अब तक करीब दो लाख बलात्कार के मामले दर्ज नहीं किये जाते।

19.11.19

झूठ की बुनियाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या कर रहा है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

अजय कुमार,लखनऊ

अपने आप को मुसलमानों का रहनुमा समझने का दंभ भरने वाला करीब 50 वर्ष पुराना ‘आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड’ (एआईएमपीएलबी) अपने आप को हमेशा सुर्खिंयों में बनाए रखने की कला में माहिर है। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की बात कह कर उसने यह बात फिर साबित कर दी है। इससे पहले भी कई मौकों पर बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुखालफत कर चुका है। चाहें राजीव सरकार के समय मुस्लिम महिला साहबानों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुजारा भता दिए जाने का फैसला रहा हो या फिर इंस्टेंट तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कट्टरपंथी सोच रखने वाले बोर्ड को कुछ भी रास नहीं आता है। वह हर मसले को शरीयत की चादर में छिपा देने को उतावला रहता है। समय के साथ बदल नहीं पाने और कट्टरपंथी सोच के चलते एआईएमपीएलबी से तमाम बुद्धिजीवी मुलसमान दूरी बनाने लगे हैं। आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड अपनी संकुचित सोच के चलते विवादों में भी बना रहता है। एक समय बोर्ड को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जेबी संगठन समझा जाता था। आज भी बोर्ड इसी लीक पर चलते हुए भाजपा और उसकी सरकारों की मुखालफत में लगा रहता है। बोर्ड का गठन जिन परिस्थितियों में हुआ था,उसे भी समझना जरूरी है। 

11.11.19

फ्लाप मध्यस्थता का ‘हिट फार्मूला’ बना फैसले का आधार!

अजय कुमार, लखनऊ

अयोध्या विवाद अब इतिहास के पन्नों में जरूर सिमट कर रह जाएगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला कई अहम सवाल भी खड़ा कर गया है। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि देश की सियासी और सामाजिक चूले हिला देने वाले इस विवाद को सुलझाने में आजादी के बाद 72 साल क्यों लग गए ? सवाल यह भी है कि मोदी सरकार की तरह केन्द्र की पूर्ववर्ती सरकारों ने ऐसी इच्छाशक्ति क्यों नहीं दिखाई, जिससे अयोध्या विवाद को सुलझाया जा सकता था ? कुछ लोग कह सकते हैं कि ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि अयोध्या विवाद सुलझाने का कोई प्रयास नहीं किया गया हो,लेकिन हकीकत यही है कि अयोध्या विवाद नहीं सुलझा तो इसके लिए सबसे अधिक कांगे्रस जिम्मेदार है। क्यों कि उसने दशकों तक मजबूती के साथ देश पर राज किया था,जबकि अन्य दलों की जब भी केन्द्र में सरकारें बनी तो उनको वह मजबूती नहीं मिल पाई,जिस मजबूती के साथ कांगे्रस की सरकारें चला करती थीं। जनता पार्टी की सरकार जरूर अपवाद है,लेकिन पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने के बाद भी जनता पार्टीे की सरकार अंर्तविरोधाभास के चलते अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई थी। यहां तक की मोदी भी अपने पहले कार्यकाल में अयोध्या विवाद सुलझाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे,क्योंकि एक तो संख्याबल के हिसाब से वह आज जितना मजबूत नहीं थे तो दूसरा राज्यसभा में भी उसका(मोदी सरकार) बहुमत नहीं था।

अयोध्या कांड : सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संतुलन साधने का प्रयास किया



सज्जाद हैदर
                   
देश के सबसे बड़े विवाद की जड़ आज उच्चतम न्यायालय ने अपनी ताकत का प्रयोग करते हुए समाप्त कर दी। इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश की आज की राजनीति ने सत्ता और कुर्सी की लालच में पूरे देश को आग में झोंकने का कार्य किया। इसका सबसे मुख्य कारण यह है कि धार्मिक भावना जिसकी आड़ में उन्माद भी फलता एवं फूलता है। क्योंकि हमारे देश की सबसे बड़ी मुख्य वजह यह है कि देश में बढ़ता हुआ जातिवाद, जिसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले अधिकतर व्यक्ति या तो अनपढ़ होते हैं या फिर न्यून्तम स्तर की शिक्षा तक ही सीमित रह जाते हैं। जोकि नेताओं की चाल को नहीं समझ पाते और नेताओं की सियासी साज़िश का आसानी के साथ शिकार हो जाते हैं। और धार्मिक भावनाओं के आधार पर विभाजित हो जाते हैं। जबकि शिक्षित एवं विद्वान व्यक्ति ऐसा कदापि नहीं करते।

श्रीराम मन्दिर आंदोलन के प्रणेता याद आते हैं

विनीत नारायण

आज हम हिन्दुओं के सदियों पुराने ज़ख्मों पर मरहम लगा है । इस ऐतिहासिक अवसर पर उन हज़ारों सन्तों व  भक्तों को हमारी भावभीनी श्र्द्धांजली जिन्होंने पिछली सदियों में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि की मुक्ति के लिए संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान किया।

10.11.19

और ये सही जवाब...!

#मुझे_फ़क्र_है_कि_मैं_इस_मुल्क़_का_सुन्नी_मुसलमान_हूँ
मैं भी तुम जैसा हूँ अपने से जुदा मत समझो,
आदमी ही रहने दो ख़ुदा मत समझो!

अज़ीज़ाने गिरामी-ए-मिल्लत और मेरे मुल्क़ के गयूर नौजवानों,
 राम मंदिर और बाबरी मस्जिद हक़-ए-मिल्कियत मुतालबे पर अदालते अज़मीया का आज का फ़ैसला बाइस-ए-मसर्रत तो है ही, हिंदुस्तान की क़ौमी यकजहती के वक़ार को बुलंद-ओ-बाला रखने का पैग़ाम भी आलमी दुनिया को देता है।
 फैसले पर तमाम तरह की राय शुमारी हुई, मुल्क़ के आईन के एतबार से अवाम की अपनी अपनी मुख़्तलिफ़ राय भी थीं मगर मैं जो लिख रहा हूँ वो थोड़ा लीक से हटकर है...
         मुख़्तलिफ़ सियासी जमातों और नामनेहाद क़ौमी रहनुमाओं ने जिस तरह पिछले 75 साला जम्हूरी निज़ाम में मुसलमानों ख़ास कर सुन्नी मुसलमानों का "ब्रेन-ड्रेन" कर मुल्क़ की मुख्य-धारा से काटने का एक घिनोना खेल खेला था।आज अदालत-ए-अज़मीया ने उस मंसूबे को  पामाल कर दिया।
आज ईद मिलादुन्नबी के मुबारक मौक़े पर हिंदुस्तान के सुन्नी मुसलमानों ने जिस नज़्मों-ज़ब्त से काम लिया और अदालत के फ़ैसले को सर-माथे लगाकर मुल्क़ के आईन का इक़बाल बुलंद किया उससे ये साबित हो गया कि नानक,कबीर,रहीम,रसखान,
ख़्वाजा,आला हज़रत,अमीर ख़ुसरो, निज़ामुद्दीन औलिया की इस रूहानी मिट्टी में कोई शरपसंद अब मट्ठा नही डाल सकता।
क्या इत्तेफ़ाक़ है! आज अल्लामा इकबाल की यौमे पैदाइश भी है। इस इंक़लाबी शायर ने श्रीराम को "इमाम-ए-हिंद" की पदवी से नवाज़ा था। आज भी उनकी तहरीर- "सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा" हमारी रूह की गहराईयों में बसी है। आज हमारा हिन्दुस्तान, हमारा प्यारा मुल्क़ सारे जहां से अच्छा बनने की सिम्त में आगे बढ़ा है और मुझे कहते हुए बड़ा फक़्र है कि इसकी नींव हिंदुस्तान के सुन्नी मुसलमानों ने आज अदालत-ए-अज़मीया के फैसले पर अपनी मोहर लगा कर रखी है।और जवाब दिया है उन फ़िरक़ा परस्त ताक़तों को जो अपने सियासी मफाद के लिये इस क़ौम के मुस्तक़बिल से अब तक खेलते आ रहे थे।
बचा के रखियेगा नफ़रत से,
दिल की बसती को,
ये आग ख़ुद नहीं लगती,
लगाई जाती है!

जय-हिंद जय भारत!
डॉ. सयैद एहतेशाम-उल-हुदा
प्रखर वक्ता एवं राष्ट्रवादी चिंतक
माइनॉरिटी सोशल रिफॉर्मिस्ट
9837357723

7.11.19

क्या राम मंदिर मुद्दा खत्म होने देंगे राम को भुनाने वाले लोग?

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है। मंदिर और मस्जिद दोनों ओर के पैरोकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने की बात कर रहे हैं। देश में कहीं से कोई अनहोनी न होने पाए, इसके लिए पुलिस-प्रशासन को पूरी रह से सक्रिय कर दिया गया है । पर क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानकर दोनों ओर के पैरोकार चुप बैठ जाएंगे ? क्या मंदिर -मस्जिद के नाम पर सियासत करने वाले दल इन धर्म स्थलों की राजनीति करनी छोड़ देंगे ? अब तक के भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों का इतिहास देखा जाए तो लगता नहीं है कि ये लोग सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी मानेंगे। जिस पार्टी कानून हाथ में लेकर सरकारों को चुनौती देते हुए रथयात्रा निकाली है, कानून को ढेंगा दिखाकर अयोध्या में बाबरी मस्जिद ध्वस्त की है।

2.11.19

पांच सौ साल पुराना विवाद सुलझने के करीब!

अयोध्या मामला : फैसले से पहले सौहार्द की चिंता,  सरकार और धर्मगुरुओं ने एक सुर में की शांति की अपील

अजय कुमार, लखनऊ

‘लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई।’ अयोध्या के करीब पांच सौ साल पुराने भगवान राम की जन्म भूमि बनाम बाबरी मस्जिद विवाद के बारे में उक्त पंक्तियों को बार-बार दोहराया जा सकता है, लेकिन देर से ही सही अब यह उम्मीद बंधने लगी है कि मोदी सरकार यानी भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपने घोषणा पत्र में किए वायदे को पूरा करने की गंभीर इच्छा शक्ति और सुप्रीम कोर्ट के सख्त रूख के बाद अयोध्या विवाद पर फैसले की घड़ी आ गई है। अगर ऐसा हुआ तो सदियों पुराना अयोध्या विवाद हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा। अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के 12 वर्षो के बाद 16 अक्टूबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। फैसला रिजर्व कर लिया गया है। करीब एक दस दिनों के भीतर अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों वाली बैंच का अंतिम(संभवता) फैसला आ जाएगा। माहौल न बिगड़े, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी पक्ष सहज स्वीकार करें इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित तमाम धर्मगुरूओं के द्वारा ही नहीं अयोध्या विवाद का मुकदमा लड़ रहे तमाम पक्षकार भी यही चाहते हैं कि कोर्ट के फैसले का सम्मान हो।

परिवार के आत्महत्या करने जैसे मामलों में जिलाधिकारी और संबंधित जनप्रतिनिधियों पर हो दंड का प्रावधान

CHARAN SINGH RAJPUT

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आर्थिक तंगी के चलते दो बच्चों को जहर देकर दंपति ने आत्महत्या की है। मीडिया से लेकर सामाजिक संगठन और राजनीतिक संगठनों ने तो औपचाकिरता निभाकर जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली। हां सोशल मीडिया पर यह मामला जरूर मजबूती से उठा। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मामला प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का है। प्रधानमंत्री भी ऐसे कि देश के विकास का ढिंढोरा पूरे विश्व में पीटते फिर रहे हैं। दूसरे देशों में जा-जाकर अपनी कीर्तिमान गिना रहे हैं। संपन्न लोगों के बीच में जाकर सेल्फी ले रहे हैं। अमेरिका जैसे देश में जाकर अपनी महिमामंडन में कार्यक्रम करा रहे हैं।

1.11.19

ऑस्ट्रेलिया में डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल की दो पुस्तकों का लोकार्पण हुआ





ऑस्ट्रेलिया के खूबसूरत शहर पर्थ की अग्रणी साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘संस्कृति’ तथा हिन्दी समाज ऑफ पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया (HSWA) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एक सुरुचिपूर्ण एवम आत्मीय आयोजन में भारत से आए सुपरिचित लेखक डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल की दो सद्य प्रकाशित पुस्तकों ‘समय की पंचायत’ और ‘जो देश हम बना रहे हैं’ का लोकार्पण किया गया. 

31.10.19

क्या प्रशांत किशोर गैर-भाजपा पार्टियों को कमजोर करने के भाजपाई एजेंडे के मोहरे हैं!


प्रशांत किशोर की राजनीतिक ईमानदारी पर शक के बादल... कहीं वे मोदी के पेरोल पर दूसरी पार्टियों को कमजोर करने का  काम तो नहीं कर रहे हैं !

-निरंजन परिहार-

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद चुनावी रणनीतिकार  प्रशांत किशोर की  विश्वसनीयता पर शक के बादल गहराने लगे है।  राजनीतिक हलकों में  महाराष्ट्र के मामले में प्रशांत किशोर की राजनीतिक सूझबूझ, रणनीतिक  तैयारी  और ग्राउंड रियलिटी को समझने की क्षमता पर  प्रश्नचिन्ह उठने लगे हैं। इसके साथ सबसे बड़ा  सवाल यह भी पैदा हो रहा है कि  क्या वे दूसरी राजनीतिक पार्टियों को कमजोर करने के लिए  बीजेपी और नरेंद्र मोदी के रोल पर तो काम नहीं कर रहे हैं।  प्रशांत किशोर के प्रति प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के रोल पर होने का यह सवाल  इसलिए पैदा हुआ है क्योंकि बिहार में जेडीयू, उत्तर प्रदेश और  गुजरात में कांग्रेस व अब  महाराष्ट्र में  शिवसेना को प्रशांत किशोर के चुनावी सहयोग ने ताकतवर करने के बजाय कमजोर किया है।

लघुकथा- सब्ज़ी मेकर

इस दीपावली वह पहली बार अकेली खाना बना रही थी। सब्ज़ी बिगड़ जाने के डर से मध्यम आंच पर कड़ाही में रखे तेल की गर्माहट के साथ उसके हृदय की गति भी बढ रही थी। उसी समय मिक्सर-ग्राइंडर जैसी आवाज़ निकालते हुए मिनी स्कूटर पर सवार उसके छोटे भाई ने रसोई में आकर उसकी तंद्रा भंग की। वह उसे देखकर नाक-मुंह सिकोड़कर चिल्लाया, “ममा… दीदी बना रही है… मैं नहीं खाऊंगा आज खाना!”

26.10.19

भगवान चित्रगुप्त जी महाराज परमपिता ब्रह्मा जी के अंश से उत्पन्न हुए हैं और यमराज के सहयोगी हैं, जानिए पूरी कथा....

भैयादूज-चित्रगुप्त जयंती 29 को

संजय सक्सेना,लखनऊ

पांच त्योहारों की श्रृंखला में दीपावली का सबसे अधिक महत्व है तो भैयादूज और इसी दिन पड़ने वाली भगवान चित्रगुप्त जी महाराज की जयंती  की अपनी अलग महत्ता है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विधान है। तद्नुसार इस बार 29 अक्टूबर को भैयादूज और चित्रगुप्त जी महाराज की जयंती मनाई जाएगी। इस दिन कायस्थ समाज कलम-दवाज की पूजा करके अपने अराध्य चित्रगुप्त जी महाराज की पूजा-अर्चना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

19.10.19

यूपी में आइजीआरएस की सभी सेवाएं ठप, सीएम हेल्पलाइन नंबर ने भी काम करना बंद कर दिया!

तो क्या यूपी के सीएम से भी जनता को नहीं मिलेगा न्याय? जाने-माने तेजतर्रार समाजसेवी तनवीर अहमद सिद्दीकी ने  बताया यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हमेशा ही गरीबों के मसीहा रहे हैं। आम जनता की फरियाद को सुनने के लिए आए दिन अधिकारियों को फटकार ही नहीं लगाते लापरवाही बरतने पर सख्त से सख्त कार्यवाही कर चेताते भी रहते हैं। इसके बाद भी सीएम योगी की हर कोशिशें बेकार हो रही हैं। आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। अंतिम रूप में प्रदेश की जनता सीएम योगी के दरबाद में पहुंचकर ही न्याय की गुहार लगाती है। लेकिन सितंबर 2019 से न्याय का अंतिम दरबार भी बंद हो गया है।

14.10.19

रेल यात्रा या जेल यात्रा ...!!

रेल यात्रा या जेल यात्रा ...!!
तारकेश कुमार ओझा
ट्वीटर से समस्या समाधान के शुरूआती दौर में मुझे यह जानकार अचंभा होता
था कि महज किसी यात्री के ट्वीट कर देने भर से रेल मंत्री ने किसी के लिए
दवा तो किसी के लिए दूध का प्रबंध कर दिया। किसी दुल्हे के लिए ट्रेन की
गति बढ़ा दी ताकि बारात समय से कन्यापक्ष के दरवाजे  पहुंच सके। क्योंकि
रेलवे से जुड़ी शिकायतों के मामले में मेरा अनुभव कुछ अलग ही रहा। छात्र
जीवन में रेल यात्रा से जुड़ी  कई लिखित शिकायत मैने केंद्रीय रेल मंत्री
समेत विभिन्न अधिकारियों से की। लेकिन महीनों बाद जब जवाब आया तब तक मैं
घटना को लगभग भूल ही चुका था। कई बार तो  मुझे दिमाग पर जोर देकर याद
करना पड़ा कि मैने क्या शिकायत की थी। जवाबी पत्र में लिखा होता था कि
आपकी शिकायत मिली.... कृपया पूरा विवरण बताएं जिससे कार्रवाई की जा सके।
जाहिर है किसी आम इंसान के लिए इतना कुछ याद रखना संभव नहीं हो सकता था।
रोज तरह - तरह की हैरतअंगेज सूचनाओं से मुझे लगा कि शायद प्रौद्योगिकी के
करिश्मे से यह संभव हो पाया हो। बहरहाल हाल में  नवरात्र के दौरान  की गई
रेल यात्रा ने मेरी सारी धारणाओं को धूल में मिला दिया। सहसा उत्तर
प्रदेश स्थित अपने गृह जनपद प्रतापगढ़ यात्रा का कार्यक्रम बना। 12815
पुरी - आनंदविहार नंदन कानन एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में बड़ी मुश्किल से
हमारा बर्थ कन्फर्म हो पाया। खड़गपुर के हिजली से ट्रेन के आगे बढ़ने के
कुछ देर बाद मुझे टॉयलट जाने की जरूरत महसूस हुई। भीतर जाने पर मैं हैरान
था , क्योंकि ज्यादातर टॉयलट में पानी नहीं था। मैने तत्काल ट्वीटर से
रेलवे के विभिन्न विभागों में शिकायत की। मुझे उम्मीद थी कि ट्रेन के
किसी बड़े स्टेशन पहुंचते ही डिब्बों में पानी भर दिया जाएगा। शिकायत पर
कार्रवाई की उम्मीद भी थी। लेकिन आद्रा, गया, गोमो और मुगलसराय जैसे बड़े
जंक्शनों से ट्रेन के गुजरने के बावजूद हालत सुधरने के बजाय बद से बदतर
होती गई। पानी न होने से तमाम यात्री एक के बाद एक टॉयलटों के दरवाजे खोल
रहे थे। लेकिन  तुरंत मुंह बिचकाते हुए नाक बंद कर फौरन बाहर निकल रहे
थे। क्योंकि सारे बॉयो टॉयलट गंदगी से बजबजा रहे थे। वॉश  बेसिनों में भी
पानी नहीं था। इस हालत में मैं इलाहाबाद में ट्रेन से उतर गया। हमारी
वापसी यात्रा आनंद विहार - पुरी नीलांचल एक्सप्रेस में थी। भारी भीड़ के
बावजूद सीट कंफर्म होने से हम राहत महसूस कर रहे थे। लेकिन पहली यात्रा
के बुरे अनुभव मन में खौफ पैदा कर रहे थे। सफर वाले दिन करीब तीन घंटे तक
पहेली बुझाने के बाद ट्रेन आई। हम निर्धारित डिब्बे में सवार हुए। लेकिन
फिर वही हाल। इधर - उधर भटकते वेटिंग लिस्ट और आरएसी वाले यात्रियों की
भीड़ के बीच टॉयलट की फिर वही हालत नजर आई। किसी में पानी रिसता नजर आया तो किसी में बिल्कुल नहीं। कई वॉश बेसिन  में प्लास्टिक की बोतलें और
कनस्तर भरे पड़े थे। प्रतापगढ़ से ट्रेन के रवाना होने पर मुझे लगा कि
वाराणसी या मुगलसराय में जरूर पानी भरा जाएगा। लेकिन जितनी बार टॉयलट गया
हालत बद से बदतर होती गई। सुबह होते - होते  शौचालयों में गंदगी इस कदर
बजबजा रही थी कि सिर चकरा जाए। ऐसा मैने कुछ फिल्मों में जेल के दृश्य
में देखा था। लोग मुंह में ब्रश दबाए इस डिब्बे से उस डिब्बे भटक  रहे थे
ताकि किसी तरह मुंह धोया जा सके। बुजुर्ग, महिलाओं और बच्चों की हालत
खराब थी। फिर शिकायत का ख्याल आया... लेकिन पुराने अनुभव के मद्देनजर ऐसा
करना मुझे बेकार की कवायद लगा। इसी हालत में ट्रेन हिजली पहुंच गई। हिजली
के प्लेटफार्म पर भारी मात्रा में पानी बहता देख मैं समझ गया कि अब साफ -
सफाई हो रही है... लेकिन क्या फायदा ... का बरसा जब कृषि सुखानी...।
ट्रेन से उतरे तमाम यात्री अपना बुरा अनुभव सुनाते महकमे कोस रहे थे। मैं
ट्वीटर से समस्या समाधान को याद करते हुए घर की ओर चल पड़ा।
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*लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ठ पत्रकार
हैं।------------------------------**------------------------------*

13.10.19

गृह मंत्री संविधान और अपनी शपथ का ध्यान रखें, एक वर्ग को भय-अनिश्चितता में रखना उचित नहीं

उबैद उल्लाह नासिर

गृह मंत्री अमित शाह यह भूल जाते हैं कि  अब वह केवल भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष नहीं बल्कि देश के गृह मंत्री भी हैं, यही नहीं वह शायद यह भी भूल जाते हैं कि सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री के तौर पर उन्होंने क्या शपथ लिया था अन्यथा नागरिकता और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर के सिलसले में वह ऐसे बयान न देते जो हमारे संविधान के शब्दों और उसकी आत्मा के खिलाफ है। गृह मंत्री जानते हैं की संविधान की धारा 14  और 15  के तहत इस देश में सभी नागरिकों को सामान अधिकार प्राप्त हैं और सरकार धर्म जाति  क्षेत्र और लिंग के आधार पर किसी से किसी प्रकार का भेद भाव नहीं कर सकती उन्होंने सांसद और मंत्री के तौर पर जो शपथ ली है उस में भी यही कहा गया है कि वह  उक्त आधारों पर देश के किसी नागरिक से किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करेंगे फिर वह ऐसे बयान कैसे दे सकते हैं की सरकार नागरिकता का जो क़ानून बनाने जा रही है उस से हिन्दुओं सिखों जैनियों बौद्धों ईसाईयों आदि को डरने की ज़रूरत नहीं क्योंकि सरकार उन सबको भारत की नागरिकता दे देगी उनके इस बयान से स्पष्ट है कि केवल मुसलमानों को घुसपैठिया बता कर उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा। यह तो सम्भव है की सरकार लोक सभा में अपने बहुमत और राज्य सभा में अपने मैनेजमेंट से उक्त क़ानून पास करा ले और राष्ट्रपति जिस प्रकार आँख बंद कर के सरकार के हर क़ानून को मंज़ूरी दे रहे हैं उसी प्रकार इस क़ानून को भी मंज़ूरी दे दें लेकिन गृह मंत्री को जान्ना चाहिए की उक्त क़ानून को ठीक उसी तरह सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जायेगी जैसे धारा ३७० को समाप्त करने के लिए दी गयी है और संविधान की उक्त धाराओं के चलते सुप्रीम कोर्ट इस क़ानून को निष्क्रय कर देगा क्योंकि संविधान इस सिलसले में बिलकुल स्पष्ट है।

3.10.19

हे राम! कैसा हो गया गांधी का देश

जहां एक तरफ़ अखण्ड भारत मोहनदास करमचंद गांधी को बापू और महात्मा कहता औऱ पूजता है वहीं समाज का एक तबका ऐसा भी है जो उन्हें देशद्रोही बताता है. सवाल तो यह है कि दुनियाभर को लोहा मनवाने वाले इस महात्मा के ऊपर अचानक इतनी टिप्पणी कैसे होने लगी. आख़िरकार यह वही व्यक्ति है जिन्होंने अफ्रीका आन्दोलन, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो, नमक आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन आदि कई बड़े आंदोलन किए. साथ ही वैश्विक स्तर पर ओबामा से लेकर नेल्सन मंडेला जैसे दुनियाभर में गांधीवादी और गाँधी जी के भक्त भरे पड़े हैं.

यह शहर हर साल डूबता है पर यहाँ के नेताओं और अफसरों का शर्म नहीं डूबता

Madhup Mani "Pikku"
दुनिया का एकमात्र ऐसा शहर जहाँ बाढ़ नदी से नहीं, नाले के पानी से आता है... 30 वर्षों से इस शहर पर एक ही दल का राज है. कहने में कोई गुरेज नहीं कि यह शहर प्रत्येक वर्ष बाढ़ से नहीं नाले के पानी से हीं डूब जाता है. जी हाँ हम बात कर रहे हैं बिहार के ऐतिहासिक राजधानी पटना की. निम्न और निम्न मध्यम वर्गीय परिवार जिन्हें सरकार की ओर से न कोई सब्सिडी मिलती है और न हीं इन तक कोई बाढ़ राहत पहुँच पाती है, वो हर साल अपने घर के बहुत मेहनत से ख़रीदे लाखों के सामान को अपनी आँखों के सामने डूबते और बर्बाद होते देखते हैं.

इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा : चमनलाल


नागपुर. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर चमनलाल ने वर्तमान परिस्थितियों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की जा रही है. जो असल देशभक्त हैं उन्हें दरकिनार कर उन लोगों को आजादी के आंदोलन का नायक बनाने की कोशिश की जा रही है जिनका आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था। इसलिए नागरिकों को बेहद सजग रहते हुए तर्कों और तथ्यों के आधार पर सच्चाई का पता लगाने की कोशिश करना चाहिए.

क्या भारतीय राजनीति ने गांधी का रास्ता खारिज कर दिया?

प्रो. संजय द्विवेदी

‘हिंद स्वराज’ के बहाने गांधी की याद... महात्मा गांधी की मूलतः गुजराती में लिखी पुस्तक ‘हिन्द स्वराज्य’  हमारे समय के तमाम सवालों से जूझती है। महात्मा गांधी की यह बहुत छोटी सी पुस्तिका कई सवाल उठाती है और अपने समय के सवालों के वाजिब उत्तरों की तलाश भी करती है। सबसे महत्व की बात है कि पुस्तक की शैली। यह किताब प्रश्नोत्तर की शैली में लिखी गयी है। पाठक और संपादक के सवाल-जवाब के माध्यम से पूरी पुस्तक एक ऐसी लेखन शैली का प्रमाण जिसे कोई भी पाठक बेहद रूचि से पढ़ना चाहेगा। यह पूरा संवाद महात्मा गांधी ने लंदन से दक्षिण अफ्रीका लौटते हुए लिखा था। 1909 में लिखी गयी यह किताब मूलतः यांत्रिक प्रगति और सभ्यता के पश्चिमी पैमानों पर एक तरह हल्लाबोल है। गांधी इस कल्पित संवाद के माध्यम से एक ऐसी सभ्यता और विकास के ऐसे प्रतीकों की तलाश करते हैं जिनसे आज की विकास की कल्पनाएं बेमानी साबित हो जाती हैं।

गाँधी एक व्यक्ति नही विचार हैं

Shivam Dwivedi
पूर्व में गाँधी जयंती थी। जाहिर है खूब विचार विमर्श चला। गाँधी प्रासंगिक है या अप्रसांगिक। गाँधी किसका है और किसका नहीं है। गांधी बीजेपी का है या कांग्रेस का। एक दूसरे कि विचारधारा को गलत सावित करने के लिए और अपनी विचारधारा को सही बताने के लिए इतिहास , राजनीति, की बड़ी - बड़ी बातें की तथा अंत में एक दूसरे को या गांधी को कोसने के सिवा और कुछ नहीं शेष मिला । पर आखिर में गांधी है किसका ? तेरा या मेरा ।

2.10.19

कौन माई का लाल है जो भागलपुर के हिंदुस्तान और भास्कर में डिप्टी मेयर को छपने से रोक सके!

''कौन माई का लाल है जो भागलपुर के हिंदुस्तान और भास्कर में डिप्टी मेयर को छपने से रोक सके''! जी हां, ये दावा है भागलपुर में अपनी धमक बनाने की कोशिश कर रहे डिप्टी मेयर राजेश वर्मा का। साथ ही वो इन दोनों संस्थानों के संपादकों के अपनी जेब में होने का दावा भी करते हैं।

हनी ट्रैप : गिरते मूल्य, उलझता चरित्र

डा. शशि तिवारी
भौतिकवाद की आपाधापी एवं पश्चिम सभ्यता के अनुसरण ने न केवल भारतीय संस्कृति को तहस-नहस किया है बल्कि सामाजिक मूल्यों का भी हृास किया हम सिर्फ गंदगी के दलदल में धसने की अंधी दौड़ में सिर्फ दौड़े ही जा रहे है। समय का चक्र तेजी से घूम रहा है। पश्चिम के लोग भारतीय मूल्यों एवं सस्कृति को तेजी से अपना रहे है क्यांेकि, उसके न केवल अपने फायदे है बल्कि शांति प्राप्ति का भी मार्ग है । भारतीय मूल्यों में नैतिकता को सर्वोच्च माना गया है तभी तो कहा भी जाता है ''पैसा गया तो कुछ नहीं, स्वास्थ्य गया तो कुछ गया लेकिन इज्जत गई तो सब कुछ गया'' यह बात बड़े दीर्घ अनुभवों के बाद बात कही गई।

तीन साल से जेल में बंद 954 करोड़ के घोटाले के आरोपी यादव सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

जेपी सिंह
नोएडा अथॉरिटी के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल गई है। मंगलवार को तीन सदस्यीय पीठ ने यादव सिंह की जमानत याचिका मंजूर कर ली। करोड़ों के घोटाले का आरोपी यादव सिंह पिछले तीन साल से जेल में बंद थे।उनपर 954.38 करोड़ रुपए के एग्रीमेंट बांड को गलत तरीके से जारी करने का आरोप है। पीठ ने यादव सिंह को जमानत देते हुए ट्रायल कोर्ट को जमानत की शर्त निर्धारित करने के लिए कहा। हालांकि, सीबीआई ने यादव सिंह की जमानत याचिका का विरोध किया।

छिंदवाड़ा में हुआ था असहयोग आंदोलन का शंखनाद

मनोज कुमार
महात्मा, बापू राष्ट्रपिता, किसी भी संबोधन से आप स्मरण करेंगे तो आपके जेहन में उस व्यक्ति की छवि उभर कर आएगी जिसे हम गांधीजी कहते हैं. ये वो व्यक्तित्व हैं जिनके बिना भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. सत्य, अहिंसा, सर्वधर्म समभाव के लिए सम्पूर्ण जीवन जीने वाले इस महान संत के चरणकमल से मध्यप्रदेश एक बार नहीं, कई कई बार स्वयं को गौरवांवित किया है. अविभाजित मध्यप्रदेश में गांधीजी की दस अविस्मरणीय यात्राएं हुई थी. सबसे पहली बार वे 1918 में इंदौर आए थे. मार्च महीने में गांधीजी की यात्रा चार दिनों की थी. तब उन्होंने भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन के 8वें अधिवेशन का उद्घाटन किया था और यहीं से हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाये जाने की मांग उठी थी. बाद में उन्होंने एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था. गांधी की दूसरी यात्रा वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य में कंडेल नहर सत्याग्रह के संदर्भ में हुई थी. कंडेल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पंडित सुंदरलाल शर्मा के कार्यों से गांधीजी इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पंडित शर्मा को अपना गुरु बना लिया. 

25.9.19

नोटबंदी से भी ख़राब हालात हैं महाराष्ट्र में!

भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को यहां मुंबई स्थित पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर किसी भी प्रकार के व्यापारिक लेन-देन पर रोक लगा दी है, आरबीआई ने वित्तीय अनिमितताओं को लेकर पंजाब और महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के कामकाज में प्रतिबंध लगाया है|

आयुष्मान भारत योजना की गड़बड़ियों पर पहरा

ललित गर्ग

देश में आज सरकारी अस्पतालों में जहां चिकित्सा सुविधाओं एवं दक्ष डाॅक्टरों का अभाव होता है, वहीं निजी अस्पतालों में आज के भगवान रूपी डॉक्टर एवं अस्पताल मालिक मात्र अपने पेशा के दौरान वसूली व लूटपाट ही जानते हैं। उनके लिये मरीजों की ठीक तरीके से देखभाल कर इलाज करना प्राथमिकता नहीं होती, उन पर धन वसूलने का नशा इस कदर हावी होती है कि वह उन्हें सच्चा सेवक के स्थान पर शैतान बना देता है। केन्द्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना आम व्यक्ति को बेहतर तरीके से असाध्य बीमारियों की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये प्रारंभ की गयी थी, लेकिन इस बहुउद्देश्यीय योजना को भी पलीता लगाने में कोई असर नहीं छोड़ी गयी है। लेकिन इस योजना में गडबड़ी एवं धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ जिस सख्ती से कार्रवाई की जा रही है, वह अनूठी एवं कारगर है, सरकार की सक्रियता एवं जागरूकता की परिचायक है।

18.9.19

यूपी में पहचान छिपाकर रह रहे हैं दस लाख घुसपैठिए!

यूपी में पैठ जमाए बैठे हैं बंग्लादेशियों के 'पालनहार'
अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना वजह नहीं कहा है कि असम की तरह ही यूपी में भी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तैयार किया जाना चाहिएं। दरअसल,वोट बैंक की सियासत के चलते बंग्लादेशियों के लिए यूपी हमेशा सुऱिक्षत ठिकाना रहा। यह बंग्लादेशी अपने को असमिया बताकर अपनी नागरिकता छिपाते रहे तो वोट के सौदागरों ने इन्हें न केवल पाला-पोसा बल्कि इनको यहां की नागरिकता दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाजवादी सरकार के समय बड़ी संख्या में बंग्लादेशियों ने यहां घुसपैठ की तो कुछ नेताओं/पार्षदों ने अपने पैड पर लिखकर देना शुरू दिया कि वह इन्हें(बंग्लादेशियों को) लम्बे समय से पहचानते हैं।

12.9.19

'वन मैन आर्मी' जैसी योगी सरकार के ढाई साल

अजय कुमार, लखनऊ                                                 
भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने एक नये कल्चर को जन्म दिया है। अब केन्द्र की मोदी सरकार हो या फिर भाजपा शासित राज्यों की सरकारें सब की सब जनता के सामने अपना रिपोर्ट कार्ड करने को लेकर काफी उतावली रहती हैं। पूर्व में जो चलन देखने को मिलता था उसमें केन्द्र और राज्य की सरकारें साल-दर-साल अपनी उपलब्धियां जनता के सामने रखती थी, लेकिन जब से मोदी युग शुरू हुआ है तब से 100 दिन, छहः-छहः महीने के काम का हिसाब जनता को दिया जाने लगा है। इसी क्रम में आजकल मोदी सरकार अपने सौ दिन पूरे होने का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने पेश कर रही हैं तो उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 19 सितंबर से अपनी सरकार के ढाई साल के कामों का लेखा-जोखा जनता के सामने रखेगी। यह नई परम्परा है तो इसके फायदे भी अनेक हैं। इस परम्परा को सरकार की मार्केेटिंग का फंडा भी कहा जा सकता है। एक तरफ सरकार को रिपोर्ट कार्ड के बहाने अपनी पीठ थपथपाने का मौका मिल जाता है दूसरे सरकार के कामकाज में पारदर्शिता भी बनी रहती है। इसका प्रभाव यह होता है कि पांच साल बाद जब चुनाव होते हैं तब  जनता के सामने अपनी सरकार के कामकाम का ढिंढोरा पीटने में ज्यादा मेहनत नहीं पड़ती है। 19 सितंबर 2019 को योगी सरकार के ढाई  साल पूरे हो जाएंगे।

बेसिक शिक्षा विभाग अलीगढ़ ने किया सूचना अधिकार का उल्लंघन, आयोग में तलब

अलीगढ़ । जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी और उनके मातहत या तो सूचना अधिकार कानून जानते नही हैं या फिर जानबूझ कर सूचना नहीं देना चाहते हैं। सूचना अधिकार अधिनियम के प्रति बेसिक शिक्षा विभाग अलीगढ़ की उदासीनता  तो यही कह रही है कि उनके यहां कानून का नही उनका ही राज़ चलता है।

‘जय श्री राम’ को ‘जेएसआर’ बनाने वाली मानसिकता

संजय सक्सेना, लखनऊ
हिन्दुस्तान में ऐसे लोगों की लम्बी-चैड़ी फौज है जिनका समाज और देशहित से कोई लेना-देना नहीं है।इसमें कुछ कद्दावर नेताओं,टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्यों से लेकर कथित बुद्धिजीवियों का एक वर्ग  भी शामिल है जो हर समय, हर मसले पर मौके-बेमौके अपनी राजनीति चमकाने के लिए निकल पड़ता है। चाहें कश्मीर से धारा 370 और 35 ए हटाने की बात हो या फिर पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की, इनको सबूत चाहिए होता है। देश में या  सीमा पर किसी आतंकवादी को मारा जाता है तो इन्हें मानवाधिकारों की रक्षा की चिंता होने लगती है। परंतु देश पर कोई संकट या प्राकृतिक आपदा आती है तो यह लोग  देश का साथ देने की बजाए अपने एसी कमरों में कैद हो जाते हैं।

11.9.19

इस साल संयुक्‍त राष्‍ट्र के अति महत्‍वपूर्ण सम्‍मेलन का हिस्‍सा बनेंगी एक्ट्रेस दीया मिर्जा


संयुक्त राष्ट्र के उपमहासचिव और 196 मंत्रियों की उपस्थिति में करेंगी स्वागत समारोह को होस्‍ट

UNCCD के चौदहवें COP के लिए रिसेप्‍शन होस्‍ट करेंगी दीया मिर्जा

पर्यावरण संरक्षण और संवर्द्धन पर लोगों के लिए एक निरंतर आवाज़ रही दीया मिर्ज़ा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए अथक प्रयास किया है। इस वर्ष भी जलवायु परिवर्तन और मरुस्थलीकरण के सबसे महत्वपूर्ण सम्मेलनों में से एक का आयोजन सोमवार को राजधानी दिल्‍ली में होगा।

सरदार सरोवर में जल स्तर 138.68 मीटर तक बढ़ाने का विरोध जारी रखे मप्र शासन


नर्मदा बचाओ आंदोलन और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई 8 घंचे तक घमासान चर्चा

बड़वानी| नर्मदा चुनौती सत्याीग्रह में चले मेधा पाटकर और नर्मदा घाटी के विस्थापित प्रतिनिधियों के उपवास की समाप्ति के वक्त जैसा कि तय हुआ था, आंदोलन द्वारा उठाए सभी सवालों और मुद्दों पर नर्मदा घाटी विकास विभाग से विस्तृत चर्चा 9 सितंबर 2019, सोमवार को हुई। भोपाल में तेज बारिश के कारण निर्णय लिया गया कि आंदोलनका‍री नर्मदा नघाविप्रा, इंदौर पर ही पहुँचेंगें जहां भोपाल से आए मंत्री, श्री सुरेन्द्रसिंह बघेलजी, अधिकारियों एवं आंदोलन के 35 साथी – देवराम कनेरा, रणवीर तोमर, गोखरु सोलंकी, सुरभान भीलाला, सुरेश प्रधान, राहुल यादव, वरिष्ठ पत्रकार चिन्मय मिश्र व अन्य – मेधा पाटकरजी के साथ पूरे 8 घण्टे  चर्चा निर्णय में भिड़े रहे। इस बैठक में मध्‍यस्थ के रुप में भूतपूर्व मुख्य सविच श्री शरदचंद्र बेहार जी के अलावा वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान शामिल थे।

Prime Minister ensure addressal of Social-Environmental Concerns before Inauguration

Ranchi, September 11 : We have learnt that the Prime Minister is going to  dedicate tomorrow to the nation the second riverine Multi Modal terminal at Sahibganj in Jharkhand, even when many of the concerns regarding the social and environmental impact remain to be addressed. It is claimed that the terminal has been built in record time, and certainly one of the reason is the brushing aside or neglect of these serious issue. We are deeply concerned by the neglect of these concerns by the authorities.

10.9.19

जैकलीन आई एम कमिंग : पीटर मेंडलिस बनकर 'मुगेऱीलाल' के साथ साकार हुए 'हसीन सपने'

अमर आनंदरघुवीरलाल को छोटे पर्दे पर देखकर हमेशा उस नायक की छवि मन में रही जो निम्न मध्यम वर्ग की दबी-कुचली ख्वाहिशों का प्रतिनिधित्व करता है और जिंदगी में तमाम अवरोधों के बावजूद सपने देखने और उसे पूरा करन की कोशिश करने के लिए प्रेरित करता है। मुंगेरीलाल के हसीन सपने के अलावा अगर फिल्मों की बात करें तो , मैसे साहब, पीपली लाइव न्यूटन से लेकर सुई धागा तक अनेक ऐसी फिल्में रही हैं जिसमें रघुवीर यादव को जीवन संघर्ष के नायक के तौर पर स्थापित करने में कोई कमी नहीं रखी।  अपनी 6 फिल्मों को अपने अभिनय के दम पर ऑस्कर तक पहुंचाने वाले रघुवीर यादव की नई फिल्म जैकलीन आई एम कमिंग भी उनके इसी अंदाज का हिस्सा है और मेरा सौभाग्य है कि मैं उनकी इस फिल्म का हिस्सा हूं। रखुवीर यादव यानी फिल्म में होसंगाबाद किनारे के काशीनाथ तिवारी की भूमिका कर कर रहे रखुवीर के साथ मेरा किरदार पीटर मेंडलिस का है, जो एक सरकारी विभाग में उनका सीनियर है और परेशानी के दौरान उनका हौसला बढ़ाता है और उन्हें प्रसन्न रखने की कोशिश करता है।

9.9.19

यूपी में बूढ़ी कांग्रेस को मिले युवा नेतृत्व तो बने बात

अजय कुमार, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में कांगे्रस के हौसलों को उड़ान नहीं मिल पा रही है। प्रियंका वाड्रा गांधी की तमाम कोशिशों के बाद भी कांगे्रसी लगातार मिलती हार से उबर नहीं पा रहे हैं। कांगे्रस के छोटे-बड़े नेताओं ने मायूसी की चादर ओड़ रखी है तो कार्यकर्ताओं ने भी हवा का रूख भांप कर अपने आप को ‘समेट’ लिया है। कांगे्रस के सामने समस्या यह है कि उत्तर प्रदेश कांगे्रस में जान फूंकने वाले उसके तमाम दिग्गज नेता उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच गए हैं, जहां से वह कांगे्रस के पक्ष में बयानबाजी से अधिक कुछ नहीं कर सकते हैं। इन बुर्जुग नेताओं के पास न तो अब इतनी इच्छाशक्ति बची है कि वह जनता के बीच जाकर कांगे्रस विचारधारा  को प्रचार-प्रसार कर सकें, न ही इन नेताओं के पास किसी बड़े आंदोलन को लम्बे समय तक चलाने की शारीरिक ताकत है। रही सही कसर राहुल गांधी के अमेठी से वानयाड पालयन ने पूरी कर दी। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की रायबरेली संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव जीतने सोनिया गांधी भी राज्य में कभी नहीं दिखाई देती हैं।

भारत में सबसे अधिक महिलाएं करती हैं आत्महत्या

विश्व आत्महत्या निवारण दिवस 10 सितम्बर पर विशेष

प्रभुनाथ शुक्ल

आत्महत्या जिंदगी का सबसे प्राणघातक फैसला है। जीवन में कई स्थितियां ऐसी बनती हैं जब इंसान उससे लड़ नहीं पाता। जब उसे समस्या का निदान नहीं दिखता तो उसके पास एक मात्र विकल्प आत्महत्या होती है। आत्महत्या कोई भी आदमी कर सकता है। वह उच्च शिक्षाविंद्, वैज्ञानिक, अभिनेता, राजनेता, महिलाएं, युवा या फिर आम आदमी। आत्महत्या के संबंध में यह तर्क मनगढ़ंत हैं कि पढ़े-लिखे लोग आत्महत्या कम करते हैं या नहीं करते। भारत में कई उदाहारण हैं जहां सफल व्यक्ति अपनी जिंदगी से पस्त होकर ऐसा कदम उठाता है। जिसके बारे में आम आदमी यह सोच भी नहीं सकता है कि संबंधित व्यक्ति इस तरह का भी फैसला ले सकता है। देश में कई आईएएस, आईपीएस, राजनेता, फिल्मी हस्तियां आत्महत्या कर चुके हैं। दक्षिण भारत में काफी किंग के नाम से मशहूर हस्ती इसका ताजा उदाहरण हैं। जिन्होंने भारी आर्थिक नुकसान की वजह से ऐसा कदम उठाया। आत्महत्याओं को हम समय रहते रोक सकते हैं, लेकिन हमारे भीतर ऐसी सोच पैदा नहीं होती है। आधुनिक जीवन शैली बेहद प्रतिस्पर्धात्मक हो चली है। व्यक्ति हर बात को अपनी सफलताओं और असफलताओं से जोड़ देता जिसकी वजह से इस तरह की घटनाएं होती हैं। पूरी दुनिया में हर साल 10 लाख लोग आत्महत्या करते हैं। विश्व में होने वाली कुल आत्महत्याआंे का 21 फीसदी भारत में होता है। लोगों को आत्महत्या से बचाने के लिए 2003 से पूरी दुनिया में 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या निवारण दिवस मनाया जाता है। मानोचिकित्सक मानते हैं कि सामाजिक जागरुकता की वजह से ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है।

2020 का विधान सभा चुनाव पार्टियों की आईटी टीम लड़ेगी


वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र यादव के साथ अमरेंद्र पटेल की बातचीत

वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र यादव कहते हैं कि मीडिया संस्थागत बदलाव का ही नहीं, बल्कि व्यवस्थागत बदलाव का भी केंद्र रहा है। सामाजिक बदलाव का भी कारक रहा है। मीडिया की तकनीकी बदल रही है और इसका कार्य क्षेत्र और स्वरूप भी बदल गया है। पत्रकार अमरेंद्र पटेल के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि 2020 का विधान सभा चुनाव पार्टियों की आइटी टीम लड़ेगी और इसकी कवायद भी शुरू हो गयी है। वीरेंद्र यादव से अमरेंद्र पटेल की हुई बातचीत प्रस्तुत है:

7.9.19

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को फ्री मेट्रो राइड पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार

जे.पी.सिंह
दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार को उच्चतम न्यायालय ने कड़ी फटकार लगाई है।उच्चतम न्यायालय  ने महिलाओं को दिल्ली मेट्रो में फ्री सवारी के प्रस्ताव पर कहा है  कि एक तरफ लुभावने वादे और दूसरी तरफ नुकसान के दावे यह साथ-साथ नहीं चल सकते हैं।एक तरफ दिल्ली सरकार  मुफ्त सवारियां कराने जा रही है और दूसरी तरफ वह उच्चतम न्यायालय से चाहती है कि केन्द्र सरकार को निर्देश दे कि 50 फीसदी ऑपरेशनल नुकसान की वे भी भरपाई करे।

6.9.19

होइहि सोइ जो कमलनाथ रचि राखा!



डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'

सियासत की करवट, उधेड़बुन में उलझी मध्यप्रदेश कांग्रेस, बारिश के मौसम में भी भोपाल का बढ़ता तापमान, अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ के खिलाफ मंत्री के ऊँचें स्वर, आबकारी अधिकारी की सौदेबाजी, विधायकों को हिस्सा दिलवाना, अपनी ही सरकार के मंत्री का पुतला जलना, राजा-महाराजा का बगावत पर उतर आना, प्रदेश कांग्रेस की कमान के लिए छटपटाना, पूर्व अध्यक्ष का दुःख जाहिर करना, बंटाधार का चिट्ठी-पत्री का खेल खेलना आदि बहुत सी घटनाएँ बीते हफ्ते मध्यप्रदेश कांग्रेस के भाग्य में जुड़ तो गई किन्तु इसके पीछे मुख्यमंत्री कमलनाथ की चुप्पी भी विचारणीय और निर्णायक बनी हुई है।

5.9.19

निलंबित TFI के भ्रष्ट तानाशाहों, व्यभिचारियों को खुला पत्र.....

भारत में इस समय बदलाव की बयार चल रही है। नई दिल्ली से शुरू हुई यह कहानी पूरे देश में देखी जा सकती है। जो कभी CBI और RBI को अपनी कठपुतली समझते थे,आज वह रहम की भीख मांग रहे हैं। जहां पूरी दुनियां पीएम मोदी की कूटनीति की कायल है, वही दुश्मन देश के राष्ट्राध्यक्षों को नींद भी नसीब नहीं हो रही...!

यूपी कांग्रेस : गिरता जनाधार, प्रियंका पर ऐतबार

अजय कुमार, लखनऊ

कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा सियासत की पुरानी खिलाड़ी हैं। कभी वह अपनी माॅ सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली और भाई राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी तक सिमटी थीं। आम चुनाव में पूर्वी उत्तर प्रदेश (जिसे मोदी-योगी का गढ़ माना जाता है) में कागे्रस को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी प्रियंका पर डाली गई तो मानों कांगे्रसियों को हौसले की उड़ान मिल गई। होता भी क्यों नहीं, प्रियंका को वर्षाे से कांगे्रस का छिपा हुआ ट्रम्प कार्ड माना जा रहा था। पूर्वी यूपी की प्रभारी बनते ही प्रियंका ने पूर्वांचल से भाजपा और मोदी की जड़े खोदने के लिए खूब हाथ-पैर मारे। मोदी एंड टीम को लगातार कोसा। पूर्वी उत्तर प्रदेश की करीब 50 सीटों के प्रत्याशी उनके ही द्वारा तय किए गए,लेकिन नतीजा शून्य रहा। प्रियंका का न तो जादू चला, न कोई चमत्कार हुआ। कांगे्रस का वोट प्रतिशत और सीटें जीतने दोनों के मामले में पिछड़ गई। अर्थात कांगे्रस को सबसे बुरा वक्त प्रियंका ने दिखा दिया था।

4.9.19

सहारनपुर की इस खबर को पी गए बड़े अखबार


बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी पर हमला

सुनवाई आगे बढ़ने के साथ मंदिर समर्थकों में बढ़ रही बेचैनी
जे.पी.सिंह

अयोध्या मामले में जैसे जैसे उच्चतम न्यायालय में सुनवाई आगे बढ़ रही है और हिन्दू पक्ष विवादित स्थल के मालिकाने का अबतक कोई ठोस सबूत पांच सदस्यीय संविधान पीठ को नहीं दिखा सका है वैसे वैसे मंदिर समर्थकों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। नतीजतन अब अदालत के बाहर मुस्लिम पक्षकारों के वकील को धमकी देने के साथ-साथ वादी पर भी हमला शुरू हो गया है।बाबरी मस्जिद मामले के वादी  इकबाल अंसारी पर हमला करने और मुकदमा वापस लेने के लिए धमकी देने का आरोप लगा है। साथ ही जान से मारने की धमकी दी गई है। इकबाल अंसारी ने यह हमले का आरोप अंतरराष्ट्रीय शूटर वर्तिका सिंह पर लगाया है।बाबरी मस्जिद के पक्षकार मोहम्मद इकबाल और अंतरराष्ट्रीय शूटर कहने वाली वर्तिका सिंह के बीच झड़प ने सुरक्षा में चूक उजागर कर दी।

3.9.19

लखनऊ में पूर्व पीएम अटल जी के नाम पर बनेगा मेडिकल विश्वविद्यालय

अजय कुमार, लखनऊ
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट की बैठक में छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इसमें प्रमुख रूप से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के लिए राज्य सरकार द्वारा लखनऊ में 50 एकड़ जमीन को मंजूरी देना शामिल है। योगी सरकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर सरकार चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रही है। इसके लिए लखनऊ के मॉल क्षेत्र में जमीन चिह्नित की गई है।