लखनऊ 30 मई : राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष जे एन तिवारी ने देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी को उनके आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक पत्र प्रेषित करते हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए उन सुविधाओं को बहाल करने की मांग किया है, जिसका सीधा असर उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
30.5.21
स्वामी, बाबा या सुपर प्राइम मिनिस्टर
स्वामी रामदेव कहें या बाबा रामदेव, पर है तो वह एक कारोबारी आदमी ही और एक कारोबारी भला हमारे देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को टर-टर कैसे कह सकता है? जबकि ठीक एक दिन पहले वे उन्हीं के पत्र के जवाब में खुद पत्र लिखकर डॉक्टर्स के लिए कहे गए अपने अपशब्दों के लिए माफी मांग चुका होता है। है ना अजीब!
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‘अगेंस्ट द वेरी आइडिया ऑफ़ जस्टिस: यू.ए.पी.ए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़’ पुस्तिका का विमोचन
रांची : मूवमेंट अगेंस्ट यु.ए.पी.ए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़ (एम.यु.आर.एल.) – राष्ट्रिय स्तर पर विभिन्न मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संस्थाओं का साझा मंच के तहत झारखण्ड में पुस्तिका ‘अगेंस्ट द वेरी आइडिया ऑफ़ जस्टिस: यु.ए.पी.ए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़’ का विमोचन हुआ.
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भारत की अखंडता-संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा है विदेशी सोशल मीडिया
संजय सक्सेना, लखनऊ
विदेशी सोशल कम्पनी ’द्विटर’ और वाटसएप का कुछ वर्ष पूर्व ठीक वैसे ही हिन्दुस्तान में पर्दापण हुआ था, जैसे कभी ‘ईस्ट इंडिया कम्पनी’ के नाम पर अंगे्रज व्यापार करने के लिए भारत में पधारे थे।ईस्ट इंडिया कंपनी सन 1600 में बनाई गई थी। उस समय ब्रिटेन की महारानी थीं एलिजाबेथ प्रथम थीं, जिन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी को एशिया में कारोबार करने की खुली छूट दी थी,बात एशिया में कारोबार की होती जरूर थी,लेकिन कम्पनी की नजर सिर्फ और सिर्फ हिन्दुस्तान पर टिकी हुई थी। कम्पनी के पीछे के इरादों को कोई भांप नहीं पाया था। इसी के चलते यह कंपनी कारोबार करते-करते ही भारत में सरकार बनाने की साजिश तक में कामयाब हो गई। उसकी इस साजिश को अमलीजामा पहनाने वालों में कुछ हिन्दुस्तानियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा था।
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आज उदंत मार्तण्ड की कमी खलने लगी है
वह 30 मई का ही दिन था, जब भारत में एक क्रांतिकारी युग का उदय हुआ था। एक ऐसा क्रांतिकारी युग, जो खुद अपनी बेबाक दुनिया रचने जा रहा था। जिसकी चाह न सिर्फ स्वधीनता की प्राप्ति थी, बल्कि देश के क्रांतिकारियों, नौंजवानो, लेखकों और कलमकारों को अपनी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी देना था। देश में कई अंग्रेजी अखबार अपनी पैठ बना चुके थे। उनमें भारतीयों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का कोई स्थान नहीं था। उस समय हिंदी भाषी भारतीयों के पास ऐसा सशक्त माध्यम नहीं था, जिन्हे वह अपना कह सके, जिसके माध्यम से अपनी बात तानाशाही अंग्रेजी हुकुमत तक पहुंचा सके।
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कुमार विश्वास के कोविड केयर केन्द्र पर पहुँची स्थानीय विधायक, कुमार के कार्यालय ने दी शीत-निद्रा टूटने पर शुभकामनाएँ
मशहूर कवि कुमार विश्वास का कोविड केयर सेंटर अब जनप्रतिनिधियों के लिये भी प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है। कुमार की इस का अनुकरण अब कई राजनीतिक लोग भी बखूबी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में कुमार विश्वास द्वारा अम्बेडकर नगर जनपद के शुकुलबाजार गॉंव में शुरू कराए गए कोविड केयर सेंटर पर शनिवार को स्थानीय विधायक भी पहुँची। उन्होंने वहॉं पहुँच कर ज़रूरतमंदों के बीच कुमार विश्वास द्वारा भिजवाए गए कोविड केयर किट का वितरण भी किया।
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कुमार विश्वास ने एक ही दिन में खुलवाया कई गाँवों के लिए कोविड केयर सेंटर
प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने इन दिनों गॉंवों को कोरोना मुक्त बनाने की एक मुहिम छेड़ रखी है। गॉंव बचाओ के नाम से चल रहे अपने अभियान में कुमार अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में बसे सैकड़ों गॉंवों की मदद कर चुके हैं। गॉंव वासियों द्वारा अनुरोध मिलने पर कुमार की टीम द्वारा वहॉं कोविड केयर सेंटर खुलवाए जा रहे हैं तथा ग्रामीणों के बीच कोरोना केयर किट के ज़रिए सभी आवश्यक दवाएँ पहुँचाई जा रही हैं। बिहार के लोगों की ट्विट का रिप्लाई करते हुए कुमार ने कई गॉंवों के लिए कोविड केयर सेंटर की व्यवस्था करा दी है। अररिया से प्रभात यादव ने कुमार से कोविड केयर सेंटर खोलने का अनुरोध करते हुए ट्विटर पर लिखा-
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23.5.21
जनता मूर्ख बन रही है और मोदी बना रहे हैं!
CHARAN SINGH RAJPUT-
वैसे तो हर सरकार ने किसी न किसी रूप में जनता को ठगा ही है पर मोदी सरकार ने ऐसा बेवकूफ बनाया कि कहीं न छोड़ा। उनको भी जिनके बलबूते पर सत्ता का मजा लूटते रहे। क्या रोजी-रोटी स्वयंभू हिन्दुओं की नहीं गई है ? क्या कोरोना कहर से ये लोग अछूते रह गये हैं ? क्या आज के हालात में इन लोगों के बच्चों का भी भविष्य और जान खतरे में नहीं है ? जमीनी हकीकत तो यह है कि हिन्दुत्व का राग अलापने वाली मोदी सरकार ने सबसे अधिक हिन्दुओं की भावनाओं से ही खिलवाड़ किया है। ये जो नदियों में शव बह रहे हैं किन लोगों के हैं ? ये जो शवों के आसपास कपड़े दिखाई दे रहे है किस धर्म के लोगों के हैं ?
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जरूरतमंद परिवारों को मदद से निगम ने किया इंकार तो माकपा ने बनाया अनाज बैंक
कोरबा। लॉक डाऊन के कारण बांकी मोंगरा क्षेत्र में पसरती भुखमरी से लड़ने के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने अनाज बैंक की स्थापना की है। इस अनाज बैंक से आज इस क्षेत्र के मोंगरा बस्ती, मड़वाढ़ोढा तथा गंगानगर में लगभग 50 गरीब परिवारों को राशन किट वितरित किया गया। इस किट में चावल, दाल, तेल, नमक, चाय और शक्कर के साथ ही प्याज, मसाले और हरी सब्जियां भी हैं। प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को न्यूनतम एक सप्ताह का राशन देने का लक्ष्य रखा गया है।
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22.5.21
कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के!
कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के : निगम कंगाल, तो माकपा पार्षद ने की व्यवस्था, कहा- माकपा कार्यकर्ता महापौर के साथ मिलकर चंदा इकट्ठा करने के लिए तैयार
कोरबा। कोरोना महामारी की इस दूसरी भयानक लहर में भी कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के काम कर रहे हैं। कोरबा निगम क्षेत्र के अंतर्गत सैकड़ों मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को घर-घर जाकर कोरोना पीड़ितों का सर्वे करने और कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता फैलाने का काम दिया गया है, लेकिन ये 'कोरोना योद्धा' बिना किसी सुरक्षा किट के मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर यह काम कर रहे हैं।
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18.5.21
मजबूर पिता ने बेटी की लाश को कंधे पर लादा और बेटे के साथ श्मशान घाट निकल पड़ा, देखें वीडियो
Rizwan Chanchal-
एक बार फिर मानवीय संवेदना को तार तार करता वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जो नंगे होते समाज पर प्रश्न चिन्ह छोड़ गया। कंधे पर बेटी का शव उठाये सड़क पर चलते इस बाप के दर्द से न तो पत्थर दिल होते समाज के उन तमाम आते जाते राहगीरों वाहन सवारों में किसी एक का दिल पसीजा और न ही कोई प्रसाशनिक सहायता दी गई।
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17.5.21
बौद्धिक श्रमिकों को कोरोना योद्धा घोषित करने को लेकर सियासी दलों की मंशा साफ़ नहीं
विनय प्रकाश सिंह-
देश भर में लगातार कोरोना की जद में आ रहे बौद्धिक श्रमिकों (पत्रकारों) की स्थिति को लेकर राजनीतिक दल केवल बयानबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस जिन राज्यों में विपक्ष में है उन राज्यों में कांग्रेस नेताओं द्वारा पत्रकारों को कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग मीडिया के माध्यम से की जा रही है।जिन राज्यों में भाजपा विपक्ष में है वहा भाजपा प्रदेश नेतृत्व पत्रकारो को कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग कर रहा है। पत्रकारों को लेकर लगातार बयानबाजी की जा रही है। कई राज्यों के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के उप राष्ट्रपति तक ने ट्वीट कर पत्रकारों को कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग की है।
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भागवत जी, अब जलती चिताओं पर 'सकारात्मकता' का पाठ पढ़ाने वाले से मुक्ति चाहता है देश
CHARAN SINGH RAJPUT-
क्या कोई जिम्मेदार आदमी इतना संवेदनहीन और क्रूर हो सकता है कि कोरोना महामारी में आक्सीजन की कमी से मरने वाले लोगों को 'मुक्ति' मिलने की बात कहे। आरएसएस के कर्णधार तो अपने इस संगठन को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बताता रहा है। आरएसएस से जुड़े लोग तो संगठन को मानवता को समर्पित बताते-बताते थकते नहीं हैं। क्या आरएसएस इस सोच पर नाज करता है।
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15.5.21
काम करो नकारात्मक और उपदेश दो सकारात्मकता का, नहीं चलेगा ...
CHARAN SINGH RAJPUT-
गजब खेल है आरएसएस और भाजपा का काम करेंगे नकारात्मक, माहौल बनाएंगे बांटने का और उपदेश देने निकल जाएंगे सकारात्मकता का। कोरोना कहर में मोदी सरकार स्वास्थाएं सेवाओं के प्रति उदासीन रवैया अपनाती रही। भावनात्मक मुद्दों का राग छेडक़र लोगों को बेवकूफ बनाती रही। बेतहाशा महंगाई के साथ नोटबंदी, जीएसटी, नये किसान कानून लागू कर औेर श्रम कानून में संशोधन कर लोगों का जीना मुश्किल कर दिया। रोजी-रोटी का बड़ा संदेश में खड़ा कर दिया। घोर लापरवाही बरत कर लोगों को कोरोना महामारी के मुंह में झोंक दिया और अभियान चलाने निकलने हैं सकारात्मकता का। लोगों को सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रवचन दिया जा रहा है। प्रवचन भी कौन दे रहा है ? जो संगठन निर्माण के बाद से ही नकारात्मक काम करता आ रहा है। लोगों की सोच सकारात्मक करने का बीड़ा आरएसएस ने उठाया है। इनकी नजरों में लोग बेवकूफ हैं। बिना वजह के नकारात्मकता में जी रहे हैं। कोरोना महामारी में लोग आक्कसीजन की कमी से मर रहे हैं। लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए 40000 तक आक्सीजन सिलेंडर के नाम पर वसूले जा रहे हैं। कोरोना मरीजों को अस्पतालों में बेड तक नहीं मिल रहे हैं। संक्रमित शवों के कंधे देने और मुंह देखने के लिए नाम उगाही चल रही है। नदियों में शव बह रहे हैं, उन्हें कुत्ते नोच रहे हैं और ये लोग सकारात्मकता का संदेश देते घूम रहे हैं।
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कोविड 19 की आपदा को अवसर में बदला पंजाब यूनिवर्सिटी ने, दाखिला टेस्टों के नाम पर आवेदकों से लूटे करोड़ों रुपए
Dr Rajinder K Singla
RTI Activist, Chandigarh
यहां एक तरफ कोविड 19 महामारी ने विकराल रूप धारण कर देश में सभी जगह त्राहि त्राहि मचा रखी है, और मानवता की इस दुखद घड़ी में अनेक लोग व संस्थाएं पीड़ित लोगों की मदद में जुटे हुए हैं, वहां दूसरी तरफ सोशल मीडिया में फैली खबरों और न्यूज विडियोज से ऐसे केस भी दिन प्रतिदिन उजागर हो रहे हैं यहां दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने इस आपदा को अवसर में बदल कर लूटने का काम शुरू किया हुआ, फिर लूट चाहे दवाइयों, हॉस्पिटल बेड, ऑक्सीजन के नाम पर हो या किसी अन्य तरीके से।
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योगी का रामराज : कोरोना संक्रमितों के शवों की दुर्गति के साथ हो रही सौदेबाजी
CHARAN SINGH RAJPUT-
आक्सीजन की कमी से कोरोना संक्रमित मरीजों को मरने के लिए मजबूर करने वाले लोग तो हत्यारे हैं ही पर जो लोग शवों पर सौदेबाजी कर रहे हैं उन्हें क्या कहा जाए ? जिन लोगों के राज में यह सब हो रहा है उन्हें क्या कहा जाए ? शव को कंधा दिलाने, मुंह दिखाने के नाम पर पैसा लेना कहां की सभ्यता, कहां के संस्कार औेर कहां की संस्कृति है ? कानपुर से आ रही खबरों में मोर्चरी हाउस में शव को कंधा देने के नाम पर 500 रुपये और मुंह दिखाने के 1000 रुपये वसूले जा रहे हैं। क्या इन सब बातों की जानकारी शासन-प्रशासन को नहीं है ?
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कोरोना के बहाने शादियों को लेकर कुदरत का यह संदेश
Krishan pal Singh-
कोरोना की दूसरी लहर ने ऐसे समय में दस्तक दी जब शादियों की लगन शुरू हो गई थी। लोगों ने गेस्ट हाउस से लेकर डीजे तक बुक करा लिये थे और थोक के भाव में निमंत्रण कार्ड बांट डाले थे। लेकिन सारा खेल खराब हो गया। अप्रैल में काफी दिनों तक खतरे के बावजूद मेजबान तो कोरोना का मुंह चिढ़ाते रहे जबकि मेहमानों ने संयम बरता। बाद में जब हर रोज जाने पहचाने लोगों में एक दो की मौत की खबरें आने लगी तो मेजबानों को भी झुरझुरी आ गई और उनका उत्साह मंद पड़ गया। खासतौर से मई में अब जो शादियां हो रही हैं उनमें सीमित मेहमान बुलाये जा रहे हैं। फालतू के तामझाम में भी बड़ी कमी देखी जा रही है।
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भाजपा नेता ने लगाई ट्वीटर पर गुहार, कुमार विश्वास ने पहुँचाई मदद
कोरोना संकट के दौरान जहॉं देश एक तरफ़ भयंकर असुरक्षा बोध से गुजर रहा है वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने पूरी ज़िम्मेदारी के साथ सकारात्मकता सृजित करने का ज़िम्मा सँभाल रखा है। अपनी कविताओं तथा बेबाक़ टिप्पणियों के लिए सदा चर्चा में बने रहने वाले लोकप्रिय कवि डॉ. कुमार विश्वास इन दिनों लोगों की मदद करने के लिए सुर्ख़ियों में बने हुए हैं। ट्विटर पर लोग उनसे बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर जैसी आवश्यकताओं के लिए सहायता माँग रहे हैं तथा कुमार की टीम बेहद त्वरित गति से लोगों की समस्याओं का समाधान भी कर रही है। कुमार से मदद मॉंगने वालों में सामान्य लोगों से लेकर प्रशासनिक पदाधिकारी एवं अलग-अलग राजनीतिक दलों के बड़े नेतागण भी शामिल हैं।
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जेल में गोलियों की तड़तड़ाहट का खेल क्यों और कैसे...?
Rizwan Chanchal-
उत्तर प्रदेश की चित्रकूट जेल शुक्रवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी,जेल के अंदर शार्प शूटर अंशुल दीक्षित ने शार्प शूटर मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली और मुकीम उर्फ काला पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हुए दोनों को मौत के घाट उतार दिया बाद में जेल पुलिस ने अंशू को भी जेल में ही ढेर कर दिया। घटना घटित होने के बाद से शासन-प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
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मैं पुलिस कमिश्नर नोएडा हूं, आप लोगों को इस महामारी में कोई दिक्कत हो तो मुझे बताइए!
यह शब्द जनपद गौतमबुद्धनगर के पुलिस आयुक्त श्री आलोक सिंह ने आज दिनांक 14 मई 2021 को ग्रामीण क्षेत्र में भ्रमण के समय जेवर के ग्राम रामपुर बांगर में कहे। उन्होंने वहां मौजूद बुजुर्गों की कुशलक्षेम जानी और बीते दिनों के हालात के बारे में तफ्सील से बातें की।
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11.5.21
कोरोना काल में उलटे-सीधे दावों के साथ कई कंम्पनियां कर रही हैं अपनी-अपनी दवाओं की ब्रांडिंग
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर का दावा कोरोना की तीसरी लहर अक्टूबर में आएगी
अजय कुमार,लखनऊ
कोरोना महामारी से निपटने एवं अपने आप को इससे बचाए रखने के लिए देश के नागरिक हर संभव कोशिश कर रहे है,जिसकी जहां तक ‘पहुंच’ है वह उसका उतना फायदा उठा रहा है। काढ़ा, भंपारा, गरारा, योगासन से लेकर विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। इंग्लिश से लेकर होम्योपैथिक, आर्युवैदिक, हकीमी सब कुछ अपनाया जा रहे हैं। दादी माॅ के नुस्खें अपनाए जा रहे हैं। इसके लिए घरेलू इलाज बताने वालीं किताबें खंगाली जा रही हैं। यार-दोस्तों से सुझाव लिए जाते हैं। खासकर सुझाव लेने के लिए उन लोगों को ज्यादा तरजीह दी जाती है जो कोरोना पाॅजिटिव होने के बाद निगेटिव हो चुके हैं। प्रिंट एवं इलेक्टानिक मीडिया के माध्यम से डाक्टर जो सुंझाव देते हैं उसे ‘देववाणी’ समझ कर उस पर अमल किया जाता है। स्थिति यह है कि इस समय जिससे भी बात करिये वह ऐसे समझाता है जैसे किसी एक्सपर्ट से बात हो रही हो। दवा कम्पनियां भी मौके का खूब फायदा उठा रही हैं। इन्होंनेअपनी कई दवाओं को कोरोना से निपटने में कारगर बता कर बाजार में झोंक दिया है,जिसमें ग्राहक फंसने से बच नहीं पाता है। उधर, हालात यह है कि आम आदमी कोरोना महामारी की दो लहरो से जूझ ही रहा था कि कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक से लोग भयभीत होने लगे हैं। जिस तरह से यह आशंका जताई जा रही हे कि तीसरी लहर का प्रभाव बच्चों पर ज्यादा पड़ेगा,उससे तमाम माॅ-बाप का सहम जाना स्वभाविक है।
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साधारण खांसी जुकाम बुखार पेट दर्द के मरीज अपना इलाज कहां कराएं?
नान कोविड मरीज इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं, उनके लिए भी अस्पताल निर्धारित करने की मांग, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
लखनऊ : राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने मुख्यमंत्री जी के अधिकारिक ई मेल आईडी पर एक पत्र प्रेषित करते हुए नॉन कोविड मरीजों के इलाज की व्यवस्था के बारे में चिंता व्यक्त किया है। उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि राजधानी में स्थित सभी बड़े अस्पताल एसजीपीजीआई लखनऊ ,केजीएमयू लखनऊ, आर एम एल आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ बलरामपुर अस्पताल लखनऊ, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय लखनऊ, दीनबंधु चिकित्सालय लखनऊ डेडीकेटेड कोविड अस्पताल के रूप में चिन्हित कर दिए गए हैं । इन अस्पतालों में कोविड पॉजिटिव वाले मरीजों की भर्ती हो रही है ।जो मरीज कोविड नेगेटिव है उनको डेडीकेटेड अस्पतालों में देखा नहीं जा रहा है।
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डिजीटल ट्रांसफार्मेशन के लिए तैयार हों नए पत्रकार
- प्रो. संजय द्विवेदी
एक समय था जब माना जाता है कि पत्रकार पैदा होते हैं और पत्रकारिता पढ़ा कर सिखाई नहीं जा सकती। अब वक्त बदल गया है। जनसंचार का क्षेत्र आज शिक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। वर्ष 2020 को लोग चाहे कोरोना महामारी की वजह से याद करेंगे, लेकिन एक मीडिया शिक्षक होने के नाते मेरे लिए ये बेहद महत्वपूर्ण है कि पिछले वर्ष भारत में मीडिया शिक्षा के 100 वर्ष पूरे हुए थे। वर्ष 1920 में थियोसोफिकल सोसायटी के तत्वावधान में मद्रास राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में डॉक्टर एनी बेसेंट ने पत्रकारिता का पहला पाठ्यक्रम शुरू किया था। लगभग एक दशक बाद वर्ष 1938 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के पाठ्यक्रम को एक सर्टिफिकेट कोर्स के रूप में शुरू किया गया। इस क्रम में पंजाब विश्वविद्यालय, जो उस वक्त के लाहौर में हुआ करता था, पहला विश्वविद्यालय था, जिसने अपने यहां पत्रकारिता विभाग की स्थापना की। भारत में पत्रकारिता शिक्षा के संस्थापक कहे जाने वाले प्रोफेसर पीपी सिंह ने वर्ष 1941 में इस विभाग की स्थापना की थी। अगर हम स्वतंत्र भारत की बात करें, तो सबसे पहले मद्रास विश्वविद्यालय ने वर्ष 1947 में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की स्थापना की।
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खूनी चरित्र वाली भाजपा पश्चिम बंगाल में टीएमसी पर हिंसा का आरोप लगा रही है!
रोहित शर्मा विश्वकर्मा-
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में अब तक रिपोर्टों के मुताबिक 12 लोग मारे गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का आरोप है कि इन 12 लोगों में उसके 6 कार्यकर्ता शामिल हैं। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का आरोप है कि उसके भी 4 कार्यकर्ता मारे गए। बाकी मारे गए लोगों की स्पष्ट पहचान नहीं हो पाई है। इसी बीच पश्चिम बंगाल पुलिस ने प्रदेश में चुनाव के बाद हिंसा में भाजपा महिला कार्यकर्ता की बलात्कार की घटना को झूठा बताया है। प्रदेश में हिंसा की इन घटनाओं पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है। स्पष्ट है राज्यपाल जगदीप धनकड़ वही रिपोर्ट देंगे जिसका आरोप भाजपा लगा रही है, जो सच्चाई से बिल्कुल परे होगी। इस बारे में बीबीसी की रिपोर्ट सच्चाई के करीब नजर आती है जिसमें कहा गया है कि चुनाव के नतीजे के बाद प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हिंसा फैली हुई है व डर और भय का माहौल पाया जा रहा है। जो इस बात को संकेत करता है कि भाजपा के गुंडे हार की हताशा में उन लोगों पर हमला कर रहे हैं जिन्होंने टीएमसी को वोट देकर उसे अप्रत्याशित जीत दिलाई। वास्तव में भाजपा के गुंडों को यह लग रहा था कि मोदी-शाह की रैलियों और रोड शो में आने वाली भीड़ से प्रभावित होकर भाजपा को वोट देकर उसे पश्चिम बंगाल में सत्तासीन करेंगे। लेकिन इन गुंडों की भाषाओं और आक्षांशाओं के विपरीत चुनाव नतीजा आने के बाद भाजपा के गुंडे हताशा का शिकार होकर बौखला गए हैं और हिंसा पर उतारू हो गए हैं। जो भाजपा के चरित्र का प्रदर्शन करती हैं।
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प्राकृतिक आक्सीजन को जहरीली कर कब तक जिंदा रहेंगे कृत्रिम आक्सीजन के सहारे?
CHARAN SINGH RAJPUT-
कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक आक्सीजन सिलेंडरों का रोना रोया जा रहा है। अधिकतर मौतें आक्सीजन की कमी से होने की बातें सामने आ रही हैं। आक्सीजन भी कैसी कृत्रिम। क्या हमारे शरीर में इतनी प्राकृतिक आक्सीजन है कि हम अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रख सकते हैं। हम अपने संसाधनों के पीछे भागते-भागते आक्सीनज को जहरीला नहीं कर दिया है। क्या आज के जीवन स्तर में हम आक्सीजन से ज्यादा कार्डन डाई आक्साइड अपने अंदर लेने को मजबूर नहीं हो रहे हैं। क्या आज की तारीख में इन सब बातों पर मंथन करने की जरूरत नहीं है कि आखिरकार कोरोना जैसी महामारी और आक्सीजन की कमी से लोगों के संक्रमण होने और उनकी मौतों की नौबत आई कैसे ? क्या कृत्रिम आक्सीजन के सहारे हम जी सकते हैं ? क्या हमने खुद ही प्राकृतिक आक्सीजन को जहरीला नहीं किया है ? क्या आक्सीजन के स्रोत हम खुद ही खत्म नहीं कर रहे हैं ? आधुनिकता की दौड़ में दौड़ते-दौड़ते हमने शहरों को तो छोड़ दीजिए गांवों में भी आक्सीजन के स्रोत खत्म नहीं कर दिये हैं ? शहरों का प्रदूषण गांवों तक पहुंच गया है। यहां तक शुद्ध हवा देने वाले पर्वतीय क्षेत्रों तक (गंगोत्री) तक लोग प्रदूषण फैला दे रहे हैं। क्या कोरोना न होते हुए भी कितने लोग लोग कृत्रिम आक्सीजन लेने को मजबूर नहीं हैं ?
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5.5.21
हॉस्पिटल में एडमिट के समय का एक डरावना किस्सा जिसे मैंने सकारात्मकता में बदला
Mohit Shukla-
मैं कोरोना के समय नोएडा सेक्टर - 39 के कोविड हॉस्पिटल में एडमिट था, जिसमें मेरे रूम के ठीक सामने दीवार पर साफ - साफ लिखा था , कोरोना मरीज के शव को ले जाने का रास्ता, और जब कोई बॉडी जाती तो ऐसा लगता कि मानो हम सब कैदी की तरह बंद हैँ और आज फलां व्यक्ति को फांसी के लिए ले जा रहे हैँ , हर मरीज अंदर से सहमा हुआ , डरा हुआ और घबराया हुआ , कि ना जाने अब किसका नंबर आयेगा , सबकी हिम्मत जबाब दे रही थी , ये पहली मरतफ़ा था जब सब मौत को इतने पास से देख रहे थे , और ये मेरे तो एक दम सामने वाली दीवार पर ही लिखा था , और मैं सिंगल प्राइवेट रूम में एडमिट था , तो साथ में कोई दूसरा कोई नहीं.
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IFWJ's former Secretary General Andhare Passes Away
Andhare will always be remembered by the newspaper employees of the country
New Delhi, 1 May. Indian Federation of Working Journalist has deeply mourned the death of its former Secretary-General, an accomplished journalist and trade unionist Manohar P Andhare. He passed away on 29th April at Secunderabad (Telangana). He was 94. He was living with his son, who is also a journalist with a Hyderabad based English daily He was the editor of Yugdharma daily of Nagpur.
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जिनके पास स्मार्टफोन या कंप्यूटर नहीं है वो कैसे करेंगे कोरोना टीका के लिए अपना रजिस्ट्रेशन...
कॅरोना महामारी को लेकर एक तरफ जहां पूरे विश्व मे आपदा आ गई है। वही भारत सरकार इस आपदा में भी गरीबों के साथ मजकिया रवैया अपना रही है।बताते चले कि कोविड 19 को लेकर देश मे वैक्सीनेशन की कार्य एक एक लोगो तक सरकार द्वारा दिए जाने की बात कही जा रही है वही ग्रामीणों क्षेत्रों में यह वादे अभी भी पूणर्तः कमजोर दिख रही है।
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इस महामारी में भी कुछ लोग हैवानियत की सारी हदें पार कर गए
Ashok Chopra
करोना महामारी ने विश्व के अधिकांश लोगों के जीवन को बदल दिया है । लोग सहम गए हैं। बहुत से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। बहुतों के अपने बेवक्त काल की आगोश में चले गए। भारत सहित बहुत से देशों में बिमारी के विकराल रूप के आगे समुचा स्वास्थ्य तन्त्र बेबस, मजबूर व लाचार हो गया है।
अमेरिका जैसे विकसित देश में भी स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई । लोगों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा। संसाधनों की कमी हों गई। बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा है। कोई भी देश बेबस हो सकता है ये बात समझ आती है।
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भाजपा के लिए खतरे की घंटी हैं दमोह में पराजय
कृष्णमोहन झा-
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30.4.21
ऐसे कैसे चले गए रोहित सरदाना!
देश के जाने माने युवा पत्रकार और न्यूज एंकर रोहित सरदाना हमारे बीच से अचानक उठकर चल दिए। कोरोना उनको लील गया। वे एक राष्ट्रवादी पत्रकार के रूप में जाने जाते थे। लोग स्तब्ध हैं कि ऐसे भला संसार छोड़कर कोई जाता है क्या।
-निरंजन परिहार
रोहित सरदाना चले गए। नहीं जाना चाहिए था। बहुत जल्दी चले गए। जाना एक दिन सबको है। आपको, हमको, हर एक को। फिर भी, रोहित के जाने पर दुख इसलिए है, क्योंकि न तो यह उनके जाने की उम्र थी और न ही जाने का वक्त। कोई नहीं जाता इस तरह। खासकर वो तो कभी नहीं जाता, जिसको दुनिया ने इतना प्यार किया हो। पर, रोहित सरदाना फिर भी चले गए। वे 22 सितंबर 1979 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जन्मे और 30 अप्रेल 2021 को कोरोना के क्रूर काल में समा गए। सिर्फ 42 साल, संसार से जाने की उम्र नहीं होती। फिर भी चले गए। दरअसल, विधि जब हमारी जिंदगी की किताब लिखती है, तो मौत का पन्ना भी साथ ही लिखकर भेजती है। विधि ने उनकी जिंदगी की किताब कम पन्नों की लिखी थी। रोहित ने इस रहस्य को जान लिया था। इसीलिए, बहुत समझदारी से उन्होंने आपसे, हमसे और करोड़ॆं लोगों की जिंदगी के पन्नों के आकार के मुकाबले अपनी जिंदगी के आकार को बहुत ज्यादा बड़ा कर लिया, और बहुत कम वक्त में ही उन्होंने बहुत कुछ जी लिया।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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10.4.21
भाजपा का रेजिडेंशियल टाउनशिप का वादा पुलिस आवासों के नाम बदलने तक ही रह गया सीमित
Satya Prakash Bharti
satyabhrt7@gmail.com
-गोरखपुर सहित ज़ोन के 11 जिलों में पुलिस आवासों के नाम बदलकर कर दिए शहीद रौशन सिंह के नाम
-बीजेपी के घोषणा पत्र में था पुलिसकर्मियों और उनके परिवार वालों के लिए शहीद रौशन सिंह के नाम पर रेजिडेंशियल टाउनशिप बनाने का दावा
-प्रदेश के बड़े शहरों में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए स्कूल सहित हाईटेक टाउनशिप बनाने का था वादा
-चार साल बाद भी नहीं मिल सकी पुलिसकर्मियों को रेजिडेंशियल टाउनशिप
लखनऊ। प्रदेश में बीजेपी सरकार अपने 32 पन्नो के घोषणा पत्र और उनमें किये गए वादों को लेकर सत्ता में आई। मूलभूत आवश्यकताओं को भूलकर अन्य मार्ग पर चल पड़ी। बीजेपी ने 2017 में चुनाव से पूर्व पुलिसकर्मियों और उनके परिवार वालों के लिए स्कूल सहित रेजिडेंशियल टाउनशिप बनाने के वादे किए थे। लेकिन यह वादा भी नाम बदलने तक ही सीमित रह गया। बीते 22 फरवरी को गोरखपुर सहित ज़ोन के 11 जिलों में मौजूद पुलिस आवासों के नाम बदलकर शहीद रौशन सिंह के नाम पर करने का अहम फैसले तक ही सीमित रह गया। वहीं चार साल बाद भी उत्तर प्रदेश पुलिस को टाऊनशिप न मिल सकी। वहीं जिस शहीद के नाम पर यह टाउनशिप बननी थी उसके गांव की हालत भी खस्ताहाल है।
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5.4.21
‘Hun To Bolish’ by Ronak Patel launches as fully-fledged Primetime show today on ABP Asmita
Ahmedabad, 5th April 2021: With an aim to deliver the promise of innovative and fresh content, ABP Asmita has launched a new show ‘Hun To Bolish’ € a prime-time show which started off as a popular segment on the news channel eight months ago. Taking the cue from the segment’s rising popularity, India’s fastest-growing Gujarati news channel, ABP Asmita has now formally launched it as a full-fledged programme, hosted by renowned journalist Mr. Ronak Patel, Editorial Head, ABP Asmita.
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3.4.21
पत्रकार प्रमोद श्रीवास्तव के परिजनों की मदद के लिए योगी को पत्र लिखा
माननीय मुख्यमंत्री जी
वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रमोद श्रीवास्तव के कोरोना से हुये असामयिक निधन से समूचा पत्रकार जगत दुःखी है।
मैं उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि स्वर्गीय प्रमोद श्रीवास्तव के परिवार को कोरोना से हुए निधन से मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए।
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2.4.21
राज्यव्यवस्था के साथ-साथ जेल में बंद जनता के चरित्र का भी सटीक चित्रण है जेल डायरी ''कैदखाने का आईना''
अधिवक्ता श्याम कुमार सिन्हा-
कानूनी अर्थ में जेल को सुधारगृह कहा जाता है और बंदियों को सामाजिक रूप से विकारग्रस्त माना जाता है। राज्यव्यवस्था (सरकार) हमेशा यह दावा करती है कि जेल प्रवास बंदियों को आपराधिक गलती दोहराने से रोकती है, समाज से अलग-थलग करके बंदियों को पश्चाताप का अवसर दिया जाता है, आदि-आदि।
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Truth of Total TV : शोषण चरम पर
Total tv में शोषण चरम पर है...बिना गलती के ही लोगों को निकला जा रहा है...अब तक 3 कैमरा मेन और एक ऐंकर को निकाला गया है...जिनका क़सूर सिर्फ़ इतना था की उन्होंने दो महीने से सैलरी नहीं आने का कारण पूछ लिया...यहाँ के इनपुट और आउटपुट head मोनी बाबा हैं...जो चापलूसी के अलावा कुछ कर नहीं सकते...सही मायने में ये वो दीमक है जो total tv को खा रहे हैं...जो टोटल tv TRP में कभी आगे था...जिसकी पहचान थी...जिसके employees बाराखंबा ऑफ़िस की सीड़ियों पर बैठकर script लिखा करते थे उनका जज़्बा ये दो मोनी दीमक खा गए...
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नोएडा आबकारी विभाग उड़ा रहा है कानून की धज्जियां – लोहे के खोखों में चल रहे हैं दारु के अवैध ठेके
आजकल नोएडा में अनेक दारु के ठेके लोहे के खोखों में चल रहे हैं.
RTI एक्टिविस्ट दिवाकर सिंह ने अवैध ठेके के मालिकों और उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग के संभावित गठजोड़ की जांच करके कई तथ्य पता लगाये हैं.
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जो एक वक्त में योद्धा थे, वे आज बेचारे बन गए हैं
स्नेह मधुर-
अमृत प्रभात और Northern India Patrika ( NIP) का एक ज़माना था। लेकिन मालिकों की चालबाज़ियों और धोखाधड़ी का शिकार हो गए सैकड़ों कर्मचारी और पत्रकार। वेतन नहीं मिला, वेतन कम हो गया। कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि यानी Provident Fund की कटौती तो कर ली जाती थी लेकिन कंपनी अपना अंशदान देने की जगह कर्मचारियों के वेतन से काटी गई रकम को भी PF ऑफिस में जमा नहीं करती थी।
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13 वर्ष बाद मिला पेंशन तो गुंडा टैक्स वसूलने को पीछे लगी तिकड़ी
पुलिसिया सहयोग के लिए थाने का चक्कर लगा रहा 70 वर्षीय वृद्ध
बलिया: स्वाथ्य विभाग के वरिष्ठ सहायक पद से सेवानिवृति के करीब 13 वर्ष बाद पेंशन की मोटी रकम बैंक खाते में आई तो गुंडा टैक्स वसूलने के लिए क्षेत्रीय पत्रकार समेत तीन लोगों की तिकड़ी पीछे लग गई और अब जान से मारने की धमकी भी दे रहे है। बिल्थरा रोड बलिया में एक विवादित पत्रकार है। एक हिस्ट्रीशटर के साथ मिलकर 74 वर्ष के सेवानिवृत्त वृद्ध से साढे तीन लाख की मांग रहे रंगदारी।
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दैनिक भास्कर : HR की मनमानी और सैलरी कटौती से परेशान हो रहे कर्मचारी
bhaskarhindi.com ये डिजिटल वेबसाइट दैनिक भास्कर के जबलपुर - नागपुर समूह की है। समूह के मालिक मनमोहन अग्रवाल हैं, जो कि भोपाल शहर का एक प्रतिष्ठित नाम है। उनकी संस्था और उनके नाम को उन्हीं की संस्था में काम करने वाले कुछ लोग धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। जी हां आपने ठीक पढ़ा। दरअसल मैनेजमेंट ने यहां पर एच आर और ऑफिस मैनेजमेंट की ज़िम्मेदारी जिस व्यक्ति को दी है, वह कर्मचारियों का लगातार शोषण करने में लगा हुआ है।
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मप्र की शिवराज सरकार ने कोर्ट आर्डर के बाद मजीठिया वेतनमान की वसूली से किए हाथ खड़े
ग्वालियर। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान भूमाफियों और अपराधियों पर कार्रवाई की भले ही डींगे हांकते हो लेकिन पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू मजीटिया वेतनमान की वसूली करने में हाथ खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला जागरण के नईदुनिया अखबार से जुड़ा है। मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ग्वालियर श्रम न्यायालय क्रमांक 01 में कर्मचारियों के प्रकरण में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में अवार्ड पारित कर वेतन अंतर की राशि की वसूली के लिए प्रकरण राज्य शासन को भेज दिया।
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खबर चलाने का भय दिखा तथाकथित पत्रकार चला रहे धनउगाही गिरोह
धनउगाही में सफल न होने पर चला रहे निराधार खबर
कुछ वर्ष पूर्व तक केवल पढ़े-लिखे और सुलझे लोग ही पत्रकारिता जगत में कदम रखते थे किसी भी खबर को चलाने के पहले उस खबर के तह तक जाकर उसकी सच्चाई को सामने रखते थे। आमजन के लिए पत्रकार शब्द सम्मानित हुआ करता था क्योंकि उनका उद्देश्य जरूरतमंदों की मदद करना होता था लेकिन अब कई तथाकथित पत्रकारों ने केवल माइक और आईडी लेकर केवल विज्ञापन के नाम पर धनउगाही करना अपना मुख्य पेशा बना लिया है।
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फिर सवालों के दायरे में सहाराश्री के फैसले
इतिहास के बड़े मोड़ और बड़े परिवर्तनों की बात करें तो जंगल में घटित एक घटना शायद इतिहास की बड़ी घटनाओं में से एक है। कुछ साधुओं और कुछ राहगीरों की टोली को जंगल में डाकुओं ने लूटने के इरादे से घेर लिया। मौत सामने खड़ी थी। बेबस राहगीरों के पास अपनी जान बचाने के लिए अपना कीमती सामान नगदी आदि, डाकुओं को सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। तभी एक साधु महाराज ने हौंसला दिखाते हुए डाकुओं के सरदार से एक सवाल किया कि आप यह लूटपाट, खून खराबा आदि जैसा खराब काम क्यों करते हो। सरदार ने जवाब दिया कि अपने परिवार के लिए। साधू ने पूछा कि क्या जिस परिवार और जिन लोगों के लिए आप यह सब करते हो क्या वो लोग आपके पाप और उस पर मिलने वाली सजा में भी भागीदार हैं, जाओ उनसे पूछ कर आओ हम यहीं खड़े हैं। संक्षिप्त यह कि डाकुओं का सरदार घर गया तो उसने साधू का सवाल अपने परिवार से दोहराया। परिवार के लोगों ने कहा कि पाप आप करते हो हम उसके भागीदार क्यों बनेंगे। साधू महाराज के सवाल और परिवार के जवाब से डाकुओं के सरदार का हृदय परिवर्तन हो गया और इसी किदवंती के आधार पर कहा जाता है कि इसके घटना के बाद ही एक महर्षि, वाल्मीक का नाम इतिहास में दर्ज हुआ और एक बड़ा धर्म ग्रंथ भी अस्तित्व मे आया। इस कहानी के विस्तार या इसके पर बहस के बजाए आज इसका चर्चा सिर्फ इसलिए कर रहा हूं कि वर्तमान में भारत के बड़े घोटालों के आरोप में चर्चा में चल रहे सहारा ग्रुप के चेयरमेन सुब्रत राय सहारा यानि सहाराश्री के साथ, क्या उनका कथित सहारा परिवार भी साथ था। जिस दौरान वो तिहाड़ मे बेहद कष्ट का समय गुजार रहे थे, तब उनके सबसे बड़े सपने और सबसे बड़े खर्च पर खड़ा किये गये मीडिया हाउस के परिवारजन उनके लिए क्या सोच रहे थे, या केवल अपने लिए ही नौकरियां या धंधा ढूंड रहे थे, या जिन निकम्मों और नाकाम लोगों कहीं और नौकरी नहीं मिली वो वफादारी के नाम पर उसी परिवार को लूटने लगे थे, जिसको पालने पोसने और खड़ा करने के लिए सहाराश्री जैसा रिवल्यूश्नरी और डॉयनमिक शख्स घोटालों का न सिर्फ आरोपी बना बल्कि कई साल तक जेल में कष्ट झेलता रहा।
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देश में स्थापित विपक्ष में दम नहीं, नया जमीनी नेतृत्व ही दे सकता है टिकाऊ विकल्प
CHARAN SINGH RAJPUT-
देश में एक से बढक़र एक आपदा आई पर जिस तरह से विवश लोग आज की तारीख में आ रहे हैं शायद ही कभी कभी रहे होंगे। यह अपने आप में विडंबना है कि लोगों की आय कम हो रही है और खर्चे बढ़ रहे हैं। देश में प्रभावशाली तंत्रों को जनता को लूटने की पूरी छूट दे दी गई हैं पर यदि किसान आंदोलन को छोड़ दें तो कोई प्रभावशाली आंदोलन देश में नहीं हो पा रहा है। जो भी प्रयास हो रहे हैं वह व्यक्तिगत हो रहे हैं। राजनीतिक दल तो जैसे बिल्ली की भाग से छींका टूटने का इंतजार कर रहे हैं। मोदी सरकार अपने निर्णयों से देश का कबाड़ा करती जा ही है पर लोग हिन्दू-मुस्लिम, स्वर्ण, दलित और पिछड़ों में उलझे हुए हैं।
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1.4.21
चचा-भतीजे का सैफई से शुरू हुआ मनमुटाव लखनऊ तक पहुंचा, सुलह की कोशिशों पर लगा ‘ग्रहण’
अजय कुमार, लखनऊ
लखनऊ। इस बार की होली ने समाजवादी कुनबे के ‘रिश्तों का रंग’ और भी फीका कर दिया। इस बार की होली में न तो मुलायम सिंह यादव होली मनाने सैफई पहुंचे, न ही शिवपाल यादव सैफई मंच पर नजर आए। मुलायम की ‘जगह’ प्रोफेसर और सांसद रामगोपाल यादव ने मंच की कमान संभाल रखी थी तो, जो किरदार मुलायम के रहते शिवपाल यादव निभाया करते थे, अबकी होली में वह किरदार अखिलेश यादव निभाते नजर आए। इस बार सैफई की होली में नया इतिहास लिखा गया जो पहले की अपेक्षा पूरी तरह से बदला-बदला था। शायद मुलायम सिंह सैफई मंच पर मौजूद होते तो वह ऐसा कभी नहीं होने देते जिससे रिश्तों की दीवारें और भी बड़ी हो जाती। चाचा शिवपाल यादव मौजूद तो सैफई में ही थे, लेकिन वह अपने पिता के नाम से बने एक स्कूल में अपने समर्थकों के साथ होली खेलते और फाग सुनते नजर आए, जबकि अखिलेश सैफई में अपने आवास पर होली खेलते रहे।
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कृषक चेतना के अनूठे कवि : केदारनाथ अग्रवाल (जन्म : 1 अप्रैल1911)
शैलेन्द्र चौहान
बकौल खुद - 'मेरा विश्वास है कि कथ्य और शिल्प अलग नहीं है। दोनों की सांघातिक इकाई है। उसे तोड़ा नहीं जा सकता। कालिदास और बाल्मकि को पढ़ते हुए भी मुझे यह बात महसूस हुई है। इन कवियों ने यह भी सिखाया कि छोटे छोटे बंधों में कितनी बंधी हुई, धारदार बातें कही जा सकती है। मैंने ऐसी कविताएं लिखने की सोची कि दुश्मन भी एक बार प्रशंसा करें। रामविलास मेरे मित्र रहे है, उनसे बातें होती थी । वे कविता पर बात करते हुए कटु आलोचक हो जाते थे। निराला मुझे बेहद प्रिय थे। वे न होते तो खड़ी बोली कविता क्या होती। मैंने मिल्टन और कीट्स की कविताएं भी पसंद की है। मेरी शिकायत आलोचकों से रही है । उन्होंने मेरी कविता को समझने की कोशिश नहीं की, प्रगतिशील आलोचकों ने भी। नामवर ने भी जाने किस किस को उठाया, हमारी ओर उनका ध्यान नहीं गया। किसी खेमे ने मुझे महत्व नहीं दिया। मैंने पार्टी की सदस्यता कभी ग्रहण नहीं की, अपनी मजबूरियों के कारण। मैंने सोचा कि नारे की कविताएं हमेशा नहीं लिखी जानी चाहिये। जब सामूहिक आन्दोलन जोरों पर हो, तब की बात छोड़कर। उस समय हमने भी लिखा और आगे लिखेंगे। अभी हमें हिन्दी साहित्य को प्रगतिशील कविताओं से भरना है और उसकी प्रतिष्ठा बढ़ानी है। हमें दुश्मन को बौद्धिक जवाब देना है। जवाब देने से पूर्व एक बात अच्छी तरह से समझ लेने की है कि संसार में यदि जिन्दा रहना, तो प्रतिबद्ध होना पड़ेगा। यथास्थिति में परिवर्तन ना आया तो अलंदे और मुक्तिबोध मरते ही रहेंगे । हम लेखकों को प्रतिबद्ध रचनाएं लिखनी चाहिये- खतरे के बावजूद। कबीर, रैदास छोटे तबके के लोग थे, चिंतक जागरूक। उन्होने भण्डाफोड़ किया व्यवस्था का । निराला ने यही किया। हमें कला का उपयोग व्यवस्था बदलने, लोगों की मानसिकता बदलने के लिए करना है। हमारे जवाब का यही रास्ता है। मैं सोचता हूं कि जब तक जिन्दा रहूं जब तक मौत न आए, जब तक जिऊं, उसका उपयोग करूं। मैं अपना विकास पाने के लिए बैचेन हूं। मुझे जीने का अर्थ, वेद में, उपनिषद में, कहीं नहीं मिला, मिला तो प्रतिबद्धता में । इससे घबराने की जरूरत नहीं। पैब्लो नैरूदा, मॉयकोब्सकी, नाजिम हिकमत की तरह जीने की जरूरत है । यही जिन्दगी का राज है और इसी से कविता बनती है।'
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31.3.21
सहारा में अन्याय के खिलाफ ऐसा बिगुल बजा कि आंदोलन ने क्रांति कर रूप ले लिया!
CHARAN SINGH RAJPUT-
यूं ही नहीं हुई सहारा में क्रांति! वैसे तो निजी कंपनियों में गुलामी पूरी तरह से घर कर गई है पर सहारा ग्रुप में तो गुलामी का आलम यह रहा है कि सहाराकर्मी अभिवादन के नाम पर नमस्ते, प्रणाम या गुड़ मॉर्निंग नहीं बोलते बल्कि पहले गुड सहारा और अब सहारा प्रणाम बोलते रहे हैं। चैयरमैन सुब्रत राय को सहाराश्री बोला जाता है। हालांकि अब सहारा में मनमानी, तानाशाही और अन्याय के खिलाफ लगातार आवाज उठ रही है। इसका बड़ा कारण 2016 में सहारा में बगावत है। सहारा में उठी बगावत की चिंगारी अब पूरे देश में आग का रूप ले चुकी है। यह वही संस्था है जिसमें डंडे के जोर पर कर्मचारियों से जहां चाहे हस्ताक्षर करा लिए जाते रहे हैं। चाटुकारिता की सभी हदें पार की जाती रही हैं। हक की आवाज को दमन के बल पर दबा दिया जाता रहा है। चेयरमैन (सुब्रत राय) को भगवान की तरह पूजा जाता रहा है। राजनेताओं, नौकरशाह, बाहुबलियों, बालीवुड और खेल हस्तियों तक पकड़ दिखाकर कर्मचारियों और निवेशकों को डराया जाता रहा है। मालिकानों और अधिकारियों ने तो जमकर अय्याशी की पर कर्मचारियों का बस शोषण और दमन ही किया गया। इस संस्था में अन्याय के खिलाफ ऐसा बिगुल बजा कि आंदोलन ने क्रांति कर रूप ले लिया। जिस मीडिया के बल पर गलत को सही कराते थे उसी मीडिया हाउस में टैंट गाड़ दिया गया। तिहाड़ जेल में बंद चेयरमैन को जाकर खरी-खोटी सुनाई गई। ललकार दिया गया। सहारा के दमन, काले कारनामों और अन्याय के खिलाफ छिड़े इस आंदोलन को सही शब्दों में उतार दिया जाए तो बालीवुड के लिए एक बढ़िया क्रांतिकारी फिल्म बन जाए।
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पंचायत चुनाव और राजनीति का अधोगामी नीति शास्त्र
Krishan pal Singh-
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का बिगुल गत 26 मार्च को इसकी अधिसूचना जारी होने के साथ ही बज गया है। इसके कारण होली के त्यौहार पर चुनावी माहौल भारी नजर आया। मतदाताओं को रिझाने के नये-नये अंदाज गढ़ने में संभावित उम्मीदवार बहुरूपियों को भी मात करते दिख रहे हैं जिससे होली में रंगों के साथ-साथ तौर तरीकों की नूतनता और विविधता के बीच अनोखे आयाम नजर आ रहे हैं।
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अलविदा प्रमोद, पहले प्रमाद फिर ऐसा विषाद, उम्मीद न थी
Rizwan Chanchal-
पत्रकार साथी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव को भी कोरोना ने आखिरकार डस ही लिया अभी ही वे राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति कार्यकारिणी का चुनाव भी जीते थे, कोरोना के संक्रमण का शिकार होकर उनका अचानक यूँ हम सबका साथ छोड़ जाना जहां उनके आश्रितों,परिजनों को असहनीय दर्द दे गया वहीं हम जैसे न जाने कितने पत्रकार साथियों को बेहद ग़मगीन कर गया,आंखों के सामने उनका वो चेहरा अभी भी घूम रहा हैं,जो चंद दिन पहले ही राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति का कार्यकारिणी सदस्य चुने जाने के बाद साथी पत्रकारों के बीच फूलमालाओं का वरण कर मुस्कुरा रहा था,उनके स्नेह के एवज में पत्रकार साथियों का स्नेह ही तो था जो उन्हें उनकी जीत के रूप में मिला था जिसकी खुशी से वो मुस्कराते हुए सभी का आभार व्यक्त कर रहे थे किंतु किसी को क्या पता था कि ये मुस्कुराहट हम सभी के दिलों को झकझोर देगी,आंखों को जलन दे देगी सभी को हतप्रभ करते हुए अलविदा कह देगी।
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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मारीचों ने कैसे चुरा लिया...
Krishan pal Singh-
चार्वाकवादी पैटर्न पर चल रही सरकार की नीतियों का अजीबो गरीब लब्बोलुआब
ऋषियों की लीक से हटकर भी एक परंपरा रही है। इस परंपरा के प्रतिनिधि ऋषियों की समूह वाचक संज्ञा लोकायत कही गई है। इस परंपरा के एक प्रख्यात ऋषि हुए हैं- चार्वाक। उनका चर्चित सूत्रवाक्य रहा है जब तक जिओ सुख से जिओ और उधार लेकर घी पिओ। मुख्य धारा के ऋषि ब्रह्म को सत्य और संपूर्ण जगत को मिथ्या बताते रहे हैं। जबकि लोकायत परंपरा के व्यवहारिक ऋषियों की दृष्टि में सब कुछ जगत ही है। आत्मा, परमात्मा, परलोक इत्यादि धारणाओं को वे प्रवंचना मानते हैं। उनके विचार में जगत ही सत्य है जिसे सुखमय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जानी चाहिए।
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1232 KMs : लॉकडाउन में असली भारत की यह कहानी
himanshu joshi-
स्वतंत्र भारत में सरकार की सबसे बड़ी भूल पर प्रकाश डालता एक वृतचित्र। विनोद कापड़ी ने इस वृतचित्र में अपने पत्रकारिता और फिल्मी करियर का पूरा अनुभव झोंक दिया है।
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राजनीतिक भ्रष्टाचार और पुलिस का दुरुपयोग
- शैलेन्द्र चौहान
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने शनिवार 20 तारीख को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के नाम लिखे अपने एक पत्र में दावा किया कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख चाहते हैं कि पुलिस अधिकारी हर महीने बार और होटलों से कम से कम 100 करोड़ रुपए की वसूली करें। उन्होंने यह भी कहा कि वाझे को देशमुख का संरक्षण मिला हुआ था। भारत में सत्ताधीशों और सरकारी तंत्र द्वारा इस तरह की उगाही कोई अपवाद नहीं है बल्कि आम है। भारतीय राजनीति में धन उगाही एक प्रचलित प्रवृत्ति है और पुलिस इसका सुगम माध्यम है| बाकी आर टी ओ, इनकम टैक्स, सेल टैक्स, रेवेन्यू आदि सैकड़ों चैनल हैं जिनके माध्यम से धन उगाही होती है| यह कोई नई या अनोखी बात नहीं है। यह हर राज्य की परंपरा है। कोई इससे बचा नहीं है। हर राज्य की परंपरा है| कोई इससे बचा नहीं है।
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28.3.21
25.3.21
बुरा न मानो होली है
shailendra chauhan-
मौसम बहुत सुहाना है
-शैलेन्द्र चौहान
तो आ जाओ
कि भेड़ॊं के बाल मूंड़ कर
ऊन बनाना है
धुली हुई कमीज को लेवोजिन से
चमकाना है
शीशे की ऊंची ऊंची इमारतों में
कम्प्यूटरों से ढंक जाना है
स्टॉक एक्सचेंज में छलांग लगाना है
राजनीति को अंबानी-अडानी के चरणों में
ले जाना है
सोशल मीडिया पर सबको
बहलाना है
लोग अपने मसले खुद ही निपट लेंगे, हमें तो
विधर्मियों को उनकी औकात बताना है
राग भैरवी सुनाना है
ताली और थाली बजाना है
कोरोना को हराना है
पूरी दुनिया में धाक जमाना है
ये हुक्काम बहुत सयाना है
यूं कद दरमियाना है
पांव तले सिरहाना है
नीति अनीति का भेद मिटाना है
सबको देशभक्ति का पाठ पढ़ाना है
किसी को नक्सली किसी को आतंकी बताना है
किसानों को बॉर्डर से हटाना है
आम्रपाली के मकानों का
धोनी की नाव में ठिकाना है
हर चीज की एक कीमत होती है
यह मंत्र सदियों पुराना है
आवश्यक परंपराएं निभाना है
मौका भी है दस्तूर भी है
लूटकर भरना खजाना है
अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाना है
..तो आ जाओ...
ये वक्त की पुकार है
कम्पटीशन का जमाना है
घुड़दौड़ में अव्वल आना है
धन कमाना है
केेेैरियर बनाना है
रिश्ते नाते सब भूल जाना है
नाचना है, गाना है, रंग लगाना है
होली मनाना है
अहा..मौसम बहुत सुहाना है।
संपर्क: 34/242, सेक्टर-3, प्रतापनगर, जयपुर-302033
मो.7838897877
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दैनिक जग मार्ग को खूब मिला है विज्ञापन, हर प्रति पर 491 रुपये!
हरियाणा में एक मीडिया हाउस ऐसा भी है जिसको करोडों रुपए का विज्ञापन दिया गया है. इस मीडिया संस्थान (जो मीडिया से सम्बंधित है भी नहीं बल्कि स्वयं की विचारधारा का एक पम्पलेट मात्र है) की DPR में स्वयं द्वारा दी गई प्रसार संख्या (जो अमूनन फेक होती है) को भी सच मान लिया जाए तो हर प्रति पर 491 रुपए का विज्ञापन दिया गया है.
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अरबपति खानदान की बहू ने कहा-जेठ सम्पत्ति हड़पने के लिए करवाना चाहते हैं मेरी हत्या
कानपुर में देश के मशहूर औद्योगिक घराने की बहू अम्बिका सिंघानिया ने अपने ही जेठ शरदपत सिंघानिया और बेटे अद्वेतपत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अम्बिका की शादी अरुण सिंघानिया से हुआ थी। अरुण की 2010 में मौत हो गई थी। अम्बिका का आरोप है कि उनके जेठ शरद उनके पति की मौत के बाद से ही पुश्तैनी संम्पत्ति हड़पने के लिए उनकी हत्या की साज़िश रच रहे है। अब उस साजिश में उन्होंने मेरे बड़े बेटे को भी बरगलाकर नशे का आदी बनाकर शामिल कर लिया है। अम्बिका ने कानपुर के एसएसपी डॉ प्रीतिंदर सिंह से शिकायत करके न्याय की गुहार लगाई है।
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गोइन्का पुरस्कारों की घोषणा
कमला गोइन्का फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्री श्यामसुन्दर गोइन्का ने एक प्रेस विज्ञप्ति द्वारा बताया है कि संपूर्ण भारत के हिन्दी व राजस्थानी साहित्यकारों को वर्ष 2020-2021 के तहत मिलने वाले पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। ये पुरस्कार हिन्दी व राजस्थानी भाषा में लिखित व प्रकाशित पुस्तकों तथा साहित्यकारों के साहित्य के प्रति किए गए समग्र-योगदान के आधार पर दिए जाते हैं। सभी घोषित पुरस्कार व पुरस्कार प्राप्ता की सूची इस प्रकार है:
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ABP Majha conducts ‘Majha Maharashtra, Digital Maharashtra 2021’ to expand digital literacy in India
Mumbai, 25th March 2021: As digital takes center-stage in the continuously evolving marketplace of today, ABP Majha organized a special event, ‘Majha Maharashtra, Digital Maharashtra 2021’ – to educate the people and bridge the gap between technology and ‘the common man.’ Since digital technologies played an extremely crucial role during the COVID-19 pandemic, the theme of the event was ‘Digital Transformation and Ecosystem in the Post-COVID world’.
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23.3.21
त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों ने मुझे मौका दिया तो पत्रकारों को उनका वाजिब हक दिलाएंगे: सुधांशु रंजन
एकमा में पत्रकार होली मिलन सह कोरोना योद्धा सम्मान समारोह का हुआ आयोजन
छपरा (रुचि सिंह सेंगर)। आजादी की लड़ाई से लेकर अबतक पत्रकारों को सिर्फ छला गया है तथा यदि पंचायत प्रतिनिधियों ने मुझे एक मौका दिया तो पत्रकारों व त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए सदन से लेकर सड़क तक संघर्ष किया जाएगा।
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Banarasvocals dot com invites Mass Communication and BMM Students for Internship
If you are a student of Mass Communication Or BMM and wants to begin the Journey of your career then Banarasvocals.com invites you to join as an Intern (as a Reporter, Marketing Executive, Videographer, Video Editor or as a Writer) for one month. Banaras Vocals is a Startup which is completely in sync with Our PM's 'Vocal For Locals' 😁Initiative.
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22.3.21
अब फटी जींस पर गिद्ध निगाहें
Etisha Arun-
अभी कुछ ही दिन तो हुए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का जश्न मनाये हुए, आधी आबादी की "महिमा" का बखान किए हुए। लगभग एक सदी (1908) से अधिक हो गया काम के घंटे, जीने लायक मजूरी और अन्य सुविधाओं के लिए शिकागो की सड़कों पर उतरी थीं महिलाएं अपनी बेहतरी के लिए। उन्हीं की याद में दशकों से हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं चलिए इसी परिप्रेक्ष्य में हम महिलाओं की स्थिति का आकलन करते हैं। यानि 113 साल पहले महिलाओं ने बेहतर जीवन ( वेतन और अन्य मुद्दे फिर कभी) को लेकर सड़कों पर उतरीं थीं वह दूर हुई। यानि पहले भी महिलाएँ जिन समस्याओं से जूझ रही थीं कमोबेश आज भी जूझ रही हैं। पहले भी समाज में सम्मान बराबर का नहीं था आज भी है।
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महोबा में पत्रकारों का विवाद
नवजीत सिंह-
महोबा जिला अस्पताल में दो पत्रकारों के विवाद की सूचना पर मामला शांत कराने पहुंचे संयुक्त मीडिया क्लब के बुंदेलखंड प्रभारी पर ही कथित पत्रकार इस्राइल कुरैशी हमलावर हो गया। मौके पर कई पत्रकारों ने एक दूसरे को शांत कराया जिसके बाद मामला कोतवाली पहुंच गया।
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'Uddhav Thackeray Should Ask Anil Deshmukh To Resign', Says Shivraj Singh Chouhan
Noida : As Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chouhan completed one year in the state, ABP News reached out to the veterans of both ruling and the opposition parties to understand the current political situation and the leaders’ viewpoints on the performance of the Madhya Pradesh government. These perspectives were shared on a special edition of ABP News’ flagship conclave, ‘Shikhar Sammelan’.
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डॉ उषा प्रियंवदा को शिखर सम्मान और लेखिका अलका सिन्हा को वातायन साहित्य सम्मान से पुरस्कृत किया गया
लंदन : केंद्रीय हिंदी संस्थान के तत्वावधान में आयोजित वातायन का अंतरराष्ट्रीय वार्षिक सम्मान समारोह उत्कृष्ट रूप से संपन्न हुआ, जिसमें प्रख्यात साहित्यकार डॉ उषा प्रियंवदा को शिखर सम्मान (लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, 51000 रूपये) और प्रसिद्ध उद्घोषक और लेखिका अलका सिन्हा को वातायन साहित्य सम्मान (31000 रुपए) से पुरस्कृत किया गया।
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प्रोफेसर सह पत्रकार अरविंद नाथ तिवारी ' साहित्य ज्ञानाक्षर' सम्मान से हुए सम्मानित
बगहा। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित वीर भाषा हिन्दी साहित्य पीठ ने प्रोफेसर सह हिन्दुस्थान समाचार के जिला संवाददाता पत्रकार अरविन्द नाथ तिवारी को 'साहित्य ज्ञानाक्षर सम्मान ' से राष्ट्रीय स्तर पर कल रविवार को सम्मानित किया गया है।
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सुनील सौरभ को गणेश शंकर विद्यार्थी स्मृति सम्मान
-मुकेश, गया (बिहार)
गया। पत्रकारिता में उच्च मानक स्थापित करने व गम्भीर लेखन हेतु वरिष्ठ पत्रकार सुनील सौरभ को 'गणेश शंकर विद्यार्थी स्मृति सम्मान' से सम्मानित किया गया है। उत्तर प्रदेश के बदायूं में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्यकार सम्मान समारोह में सुनील सौरभ को यह सम्मान दिया गया है।
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20.3.21
"सावधान इंडिया 'के दिवंगत कर्मचारी के परिजन को एफडब्लूआईसीई की पहल पर मिला २० लाख रूपए,
फिल्मों की तमाम यूनियनों ने भी की मदद
मुंबई : १३ फरवरी को शूटिंग से घर जाते हुए सड़क दुर्घटना में सावधान इंडिया टीवी शो के सहायक कला निर्देशक प्रमोद कालेकर की मृत्यु हो गई थी। उनके साथ एक और व्यक्ति भी था जिसे गंभीर चोटें आईं। बताया गया कि प्रमोद लगातार सेट पर २३ घंटे से ज्यादा समय से काम कर रहे थे और ज्यादा देर तक लगातार काम करने की वजह से उनका संतुलन ठीक नहीं रहा था। दुर्घटना में एक दूसरा व्यक्ति जो यूनिट का एक अन्य सदस्य था, वह पीछे की सीट पर बैठा था और घायल हो गया था जिसका उपचार चल रहा है। शिफ्ट से ज्यादा शूटिंग करने के खिलाफ छिड़ी फेडरेशन आॅफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज (एफडब्लूआइसीई) की जंग ने जिस दुर्घटना के बाद तेजी पकड़ी है, उस दुर्घटना में दिवंगत हुए सिने कर्मचारी के परिवार को भी फेडरेशन की मदद से २० लाख रुपये की मदद मिल गई है।
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आम जनता से पाँच-दस किलोमीटर के लिए भी टोल वसूलने का बहाना है टोल प्लाज़ा हटाने का वादा
धर्मवीर-
देश के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गड़करी के द्वारा कल लोकसभा में दिए गए बयान के अनुसार आने वाले एक वर्ष में देश से सभी टोल प्लाज़ा हटा दिए जाएँगे । टोल का कलेक्शन सीधे GPS +फ़ास्टटैग + बैंक अकाउंट की सहायता से किया जाएगा । मंत्री जी के अनुसार इस नये क्रांतिकारी बदलाव के कारण टोल टैक्स पर लगने वाले समय और तेल की बचत होगी।
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19.3.21
मोदी को भगवान मानने की तीरथ रावत जैसी मूढ़ता, चालबाजी और चमचई करोड़ों लोगों को नापसंद
अयोध्या प्रसाद ‘भारती’-
तीरथ सिंह रावत के उत्तराखण्ड के नये मुख्यमंत्री बनने पर शायद ज्ञानचक्षु खुल गये, उन्हें नरेंद्र मोदी में भगवत्ता नजर आ गई। उन्होंने मोदी की तुलना अयोध्या के राजा दशरथ के बेटे राम से कर दी। उनका कहना है कि जैसे जनसेवा के लिए राम को भगवान माना गया और उनकी पूजा की जाती है वैसे ही भविष्य में मोदी की भी की जाएगी। रावत के इस बयान की राज्य और देश के अलावा दुनिया भर में आलोचना हो रही है और इसे चमचागीरी का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है। रावत का यह बयान इस बात का संकेत भी है कि राज्य के निर्वाचित विधायकों को दरकिनार कर उन्हें मुख्यमंत्रित्व उनकी पायंलागूं योग्यता के चलते ही मिला होगा। पहाड़ों से लेकर मैदानों तक नेताओं की हीनता, शब्दों और भावों की सामान्य समझ रखने वाले लोग रावत की खूब मजम्मत कर रहे हैं।
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पुरस्कार रचनाकर्म पर या व्यक्तिगत संबधों पर?
shailendra chauhan-
सामान्यतः हमारे समय के वे रचनाकार जिन्हें बहुत इनाम-इकराम मिल जाते हैं, बहुत नाम हो जाता है उनकी रचनाएं पढ़ने पर यह लगता है कि अब वे सिर्फ लिखने के लिए लिख रहे हैं| उनकी रचनाओं मे तमाम तरह की कलाबाजी, अतिशय संशय (कि रचना बहुत अलग और विशिष्ट बन पाई या नहीं), बासीपन और अंततोगत्वा उबाऊपन का आभास होने लगता है| उनके प्रति लोगों का भक्तिभाव बढ़ जाता है|
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4 Years of Yogi govt: ABP Network-CVoter Survey unravels the achievements and challenges
Noida, 18th March 2021: With an aim to capture the common man’s outlook on the Yogi Adityanath-led-Uttar Pradesh government, ABP Network-C Voter revealed the findings of a comprehensive ‘UP ka Mood’ Survey. Conducted alongside research partner CVoter (Centre for Voting Opinion & Trends in Election Research), the ABP Network-C Voter ‘UP ka Mood’ Survey has provided a clearer picture of the citizens’ standpoint on various pertinent issues & concerns associated with the current government, as it completes 4 years in power.
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16.3.21
‘लखनऊ का अभिमान’ हिन्दी समाचार पत्र समूह ने पत्रकारों और समाजसेवियों को किया सम्मानित
पहली बार एक मंच पर पत्रकार , समाजसेवी , अधिवक्ता एवं आर टी आई कार्यकर्त्ता के 124 लोगो को लखनऊ का अभिमान सम्मान 2021 से किया गया सम्मानित
लखनऊ l ‘लखनऊ का अभिमान’ हिन्दी समाचार पत्र समूह ने आज 13 मार्च 2021, दिन शनिवार को राजधानी लखनऊ की स्टेशन रोड,हुसैनगंज स्थित सिटी मोन्टेसरी स्कूल के सभागार में स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह 2021 का आयोजन किया गया जिसमें पत्रकारिता और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले पत्रकारों और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया l “हर खबर पर नज़र; नगर-नगर, डगर-डगर” की टैगलाइन के साथ समाचार जगत में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखने वाले ‘लखनऊ का अभिमान’ हिन्दी समाचार पत्र समूह के स्वामी और मान्यता प्राप्त सम्पादक मो. सफीर सिद्दीकी ने बताया कि उनका समाचार पत्र समूह अभिव्यक्ति के महाधनी,सामाजिक चिंतन और जनसेवा के प्रति समर्पित पत्रकारों और समाजसेवियों को पत्रकारिता और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्थापना दिवस कार्यक्रम में सम्मानित किया l
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अखबारों ने जिसका महिमामंडन किया वह जनता का लाखों रुपये ले उड़ा
गोरखपुर: जिस तरह बिना सोचे समझे जांचे परखे बगैर किसी साक्ष्य के किसी के विरुद्ध खबरें दिखाने और छापने से कई बार बेकसूरों को सामाजिक दंश झेलना पड़ता है ठीक उसी तरह बिना सोचे समझे अपने निजी स्वार्थ के लिए ठगों तथा कपटियों की बड़ी-बड़ी फोटो युक्त खबरें छाप कर उनका महिमामंडन करने और उन्हें प्रचारित करने का खामियाजा भी बेकसूर लोगों को ही भुगतना पड़ता है । वर्तमान वाक्या गोरखपुर जनपद का है।
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असम में पत्रकारिता के 175 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आईआईएमसी में सेमिनार का आयोजन
नई दिल्ली । ''जब भारत आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तब असम की पत्रकारिता 175 वर्ष पूर्ण कर चुकी है। आज से 25 वर्ष बाद जब भारत आजादी की 100वीं सालगिरह मना रहा होगा, तब असम की पत्रकारिता 200 वर्ष पूर्ण कर रही होगी। मेरा मानना है कि उस वक्त के न्यू इंडिया में न्यू असम की पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।'' यह विचार केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा ‘असम में पत्रकारिता के 175 वर्ष’ पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित सेमिनार में व्यक्त किए। कार्यक्रम में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, असम राज्य सूचना आयोग के सूचना आयुक्त समुद्रगुप्त कश्यप, ‘द असम ट्रिब्यून’ के कार्यकारी संपादक प्रशांत ज्योति बरुआ और ‘दैनिक पूर्वांचल प्रहरी’ के कार्यकारी संपादक वशिष्ठ नारायण पांडेय ने अपने विचार रखे।
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जनता टीवी UP/UK को मीडियाकर्मियों की आवश्यकता
आवश्यकता... जनता टीवी UP/UK के लिए
👉🏻 एंकर/प्रोड्यूसर
👉🏻 रनडाउन प्रोड्यूसर
👉🏻असिस्टेंट प्रोड्यूसर
👉🏻प्रोड्यूसर
👉🏻इनपुट
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15.3.21
धर्मांधता और जातिवाद दोनों ही मानवता के दुश्मन हैं
DharamVeer-
जो वर्ग देश के दलित हिंदू राष्ट्रपति को भी जाति के कारण मंदिर में प्रवेश नहीं करने देता वह मंदिर परिसर में हिंसा को भी जायज़ ठहरा देगा । जो लोग मंदिर के अंदर दलित हिंदुओं तक को प्रवेश नहीं करने देते वही एक मुस्लिम को मंदिर में बर्दाश्त कैसे कर पाएँगे ..? धर्मांधता और जातिवाद एक संक्रामक रोग है । प्राथमिकता के आधार पर इसको रोकने की बजाय ज़्यादातर लोग इस आग को भड़काने में लगे हैं । जिन लोगों ने पहले जातिवाद के आधार पर ख़ुद को एलीट क्लास में रखा आज वही लोग धर्म आधारित व्यवस्था के सिरमौर बने रहना चाहते हैं और यह पूरा हिंसक माहौल हिंदू धर्म या हिंदुओं के कारण नहीं बल्कि उस एलीट क्लास के द्वारा सत्ता और समाज़ पर क़ब्ज़े की लड़ाई के कारण है ।
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सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा कांशीराम जी को याद करते हुए..
जयराम शुक्ल
यह सही है कि देश में जाति के आधार पर शोषण और अत्याचार हुए हैं। इस सिलसिले ने ही अँबेडकर साहब की प्राणप्रतिष्ठा की और राजनीति में कांशीराम जैसे महानायक को गढ़ा। आज कांशीराम का जन्मदिन है।
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जॉब अलर्ट : पल पल न्यूज़ को देशभर में संवाददाता और ब्यूरो चीफ चाहिए
नई दिल्ली । देश मे प्रतिष्ठित यूट्यूब न्यूज़ चैनल और न्यूज़ पोर्टल पल पल न्यूज़ www.palpalnews.in को देश के प्रत्येक राज्य और जिले में संवाददाता और ब्यूरो चीफ की आवश्यकता है ।
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नेताजी बोस की 125वीं जयंती पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को खुला पत्र
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को खुला पत्र
प्रतिष्ठा में:
श्री नरेंद्र मोदी जी,
प्रधानमन्त्री
भारत सरकार, नई दिल्ली
विषय: भारत सरकार द्वारा नेता जी सुभाष चन्द्र बोस का 125 वां जन्मदिन मनाने का निर्णय ...... उनके सन 1977 तक जीवित रहने और समय समय पर व्यक्त किये गये विचार, उदगार और अहम जानकारियां
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हिंदुस्तान गोरखपुर का पिछलग्गू बन गया दैनिक जागरण
सादर नमस्कार
मैं दैनिक जागरण गोरखपुर की पिटी हुई पत्रकारिता की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूँ। जागरण के प्रखर रिपोर्टरों की मेहनत की एक बानगी आपको भेज रहा हूँ। असल में दैनिक जागरण पिछले कुछ महीने से हिंदुस्तान गोरखपुर का अभिन्न पिछलग्गू बना हुआ है। इसमें कोई शक नही कि हिंदुस्तान अखबार की टीम कंटेंट बेस्ड शानदार रिपोर्टिंग कर रही है। शायद ही कोई दिन ऐसा रहता होगा कि जब हिंदुस्तान अखबार रूटीन रिपोर्टिंग या एक्सक्लुसिव प्रजेंटेशन में जागरण की बैंड न बजाता हो। रोज रोज पिटने के बाद भी जागरण के कारकूनों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
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धनिष्ठा मरने के बाद पांच लोगों को अपने अंग देकर नया जीवन दे गई
Ajeet Kumar -
कहते हैं खुशियां बांटने से और ज्यादा बढ़ती है। और इस कहावत को साकार कर दिखाया 20 महीने की एक मासूम बच्ची के माता पिता ने। दरअसल दिल्ली के रोहिणी मे रहने वाले आशीष कुमार की बेटी धनिष्ठा की एक हादसे के दौरान मौत हो गई थी। जिसके बाद मासूम बच्ची के माता पिता ने निर्णय लिया कि बच्ची के ऑर्गन्स को डोनेट किया जाए। और माता पिता ने हिम्मत जुटाते हुए बच्ची के ऑर्गन डोनेट कर दिए। आज वो मासूम बच्ची इस दुनिया में नहीं है, लेकिन इस बच्ची ने 5 लोगों को जीवन दान दे दिया।
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दैनिक जागरण आगरा में हो रहा कर्मचारियों का उत्पीड़न
जागरण की आगरा यूनिट अपने कर्मचारियों के उत्पीड़न करने में कोई कमी नहीं छोडना चाहती है. बढती महंगाई में वेतन बढोत्तरी न होने संपादकीय विभाग पहले से परेशान है. अब उन पर अतरिक्त काम का दबाव भी बनाया जा रहा है.
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न्यूज़18 हिंदी डॉटकॉम के संपादक दया और मैनेजर पीयूष एक घिनौनी परंपरा की नींव डाल रहे हैं
अमरेंद्र किशोर-
न्यूज़18 हिंदी डॉटकॉम के संपादक दया शंकर मिश्र और मैनेजर पीयूष बबेले एक घिनौनी परंपरा की नींव डाल रहे हैं। ये दोनों नेटवर्क18 में काम करने वालों से इस्तीफ़ा जबरन SMS पर माँग रहे हैं। उनसे अपने मनमाफ़िक भाषा में इस्तीफ़ा लिखवा रहे हैं। ये दबी जुबान में सैलरी में दिक्कत आने की भी धमकी दे रहे हैं। दोबारा न्यूज़18 में नौकरी पाने में समस्या आने की भी धमकी दे रहे हैं।
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अमर उजाला ने गुरुग्राम में खोला नया थाना
गुरुग्राम अमर उजाला की हालत खराब लग रही है। तभी हर दिन खबरों में कोई न कोई लापरवाही की बात सामने आ जाती है। ताजा मामला 18 सितंबर को अमर उजाला गुरुग्राम एडिशन में छपी खबर है। जिसमें अमर उजाला ने एक नया पुलिस थाना ही खोल दिया। हुआ यूँ कि गांजे के साथ युवक गिरफ्तार हुआ जिसका प्रेसनोट गुरुग्राम पुलिस ने जारी किया। अमर उजाला के पत्रकार ने प्रेसनोट में स्पष्ट शब्द होने के बावजूद लापरवाही दिखाते हुए लिखा की आरोपी को सेक्टर-31 थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया।
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सरकारी कार्यालय बना दारू का अड्डा, देखें तस्वीरें
uvaish choudhari-
इटावा सरकारी कार्यालय बना मयखाना ड्यूटी टाइम में छलक रहे जाम,वन क्षेत्राधिकारी राष्ट्रीय चम्बल सेंचुरी का कार्यालय ड्यूटी टाइम में बना दारू का अड्डा, रेंजर डिप्टी रेंजर, जैसे अधिकारी से लेकर वन दरोगा फॉरेस्ट गार्ड सहित 5 कर्मचारी अधिकारी कार्यालय में पीते नजर आए दारू कैमरे में हुए कैद, रेंजर डिप्टी रेंजर जैसे बड़े पद पर तैनात है अधिकारी और कर्मचारी, ज़िला वन अधिकारी ने माना वीडियो में दिख रहा कि वन्य जीव से जुड़े स्टाफ के लोग ड्रिंक कर रहे है उच्चाधिकारियों को अवगत करा कर जांच कराई जाएगी।
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Job Opening for Femal News Anchor Mumbai
Dear Sir,
3D Media House is fast growing organization active into multi segment of News, Music, album, Video production & its distribution for various platform, Our News Network is Bouquet of 7 You Tube New Channels in different segment. We have our corporate office in Mumbai, India.
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समीर कुमार की दादागीरी
लगभग एक वर्ष पहले PBNS नाम से प्रसार भारती की डिजिटल सेवा शुरू हुई थी। विजन था देश का सबसे बड़ा डिजिटल नेटवर्क शुरू करना। समीर कुमार नामक व्यक्ति को इसकी बागडोर दी गई तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर, ADG रैंक दे कर।
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संपादक संजय मिश्र ने पत्रकारिता के सिद्धांतों को ताक पर रख दिया है, सुनें आडियो
PRAMOD KUMAR SINGH-
आदरणीय सर,
मैंने पिछले मेल के माध्यम से प्रभात खबर के एक पत्रकार का आडियो भेज कर ' पत्रकारिता के नियमों का उल्लंघन और कानून के विरुद्ध कार्य करने ' वाले पत्रकार पर दंडात्मक कार्रवाई का अनुरोध किया था !
पिछला आडियो मनोज सिंह नामक, ब्यूरोचीफ का था और यह आडियो उसके संपादक संजय मिश्र का है! यह मेरे भाई के साथ वार्ता में कहता है कि "यदि आपके भाई अखबार नहीं जलाते तो हम दिखा देते दारोगा पुलिस को कि झूठा केस करने का, क्या परिणाम होता है"! विचित्र बात है?
एक संपादक यह जानता है कि एक आम नागरिक पर पुलिस ने झूठा केस किया है फिर भी इसके द्वारा 'पत्रकारिता' के सिद्धांतों को ताक पर रख कर, जनहित की अवहेलना कर डाली!
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अरविंद शर्मा बनेंगे शशांक शेखर
अरविंद शर्मा को लेकर तमाम कयास लगाए गए किसी ने डिप्टी सीएम का दावेदार घोषित कर दिया तो किसी ने 2022 के लिए सीएम का दावेदार । किसी ने दिनेश शर्मा की छुट्टी कराकर उन्हें केंद्र में लाने की बात कही तो किसी ने दिनेश शर्मा उपसभापति । खैर आते है मुद्दे पर कैबिनेट सचिव शशांक शेखर का नाम तो आपने सुना होगा । वह शशांक शेखर जो आगरा के डीएम से आगरा दिल्ली एक्सप्रेवे के दौरान डीएम से यह कहते है तेरा पेट फाड़कर जमीन ले लूंगा । वह शशांक शेखर जो भट्टा पारसौल में उपद्रव के दौरान यह कहते है कि क्या डीएम एसएसपी पैदल नही चलकर आ सकते थे क्या या किस संविधान में लिखा है डीएम एसएसपी पैदल नही चल सकते । ऐसा ही शशांक शेखर की जरूरत यूपी को है। दरअसल यह पर्दे के पीछे 2024 का मोदी का माइक्रो मैनेजमेंट है ।
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दुम दबाकर गुजरात से भागा आईटीवी नेटवर्क का गुजरात ब्यूरो!
zahir bhatti-
आईटीवी नेटवर्क के गुजरात ब्यूरो पर राहु-केतु भारी चल रहा हैं। नेटवर्क की मैली मुराद के चलते एक मुसीबत टली नहीं कि दूसरी दस खड़ी हो जाती हैं! जहां अपने पैर जमाने की फिराक में होता है, वहीं कीचड़ में धंस जाते हैं। गौरतलब है कि पहले अहमदाबाद के थलतेज में स्थित होटल कैम्बे ग्रांड में 18 मार्च 20 को चैनल की अकाल मृत्यु हुई। चैनल शुरू होने के महज दो साल के भीतर गर्त में चला गया। होटेल स्वामी को ब्यूरो का किराया न भर पाने के कारण चैनल का सारा सामान जब्त हो गया। साथ ही जमानत राशि, छ लाख रुपए का जनरेटर और कुछ ढाई लाख रुपए का बिजली बिल लंबित है।
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बासी खबरों-फोटो के सहारे नम्बर वन बनना चाहता है भास्कर
'नया कलेवर, तीखा तेवर' स्लोगन से आगे बढ़ रहे दैनिक भास्कर ने 25वें वर्ष में प्रवेश कर लिया है। भास्कर को और अधिक बेहतर बनाने के लिए मालिक सुधीर अग्रवाल चाहे जितनी कोशिश कर लें मगर इनके कार्मिक ही इस अखबार की साख को भट्टा बैठाने में लगे हैं। ताजा मामला राजस्थान के ब्यावर ब्यूरो ऑफिस का है। वहां तैनात भास्कर टीम की लापरवाही का आलम ऐसा है कि पुरानी और बासी खबरों के सहारे पन्ने भरे जा रहे हैं। संपादक की मेहरबानी के चलते बरसों से एक ही दफ्तर में जमी ब्यावर टीम न सिर्फ खबरों की खानापूर्ति, बल्कि लापरवाही की हदें पार कर रही है। थोड़े-थोड़े समय बाद पुरानी खबरों और तस्वीरों को फिर से छापना इनकी फितरत बन गई है।
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10.3.21
भारत सरकार का आजादी का अमृत महोत्सव और आपातकाल लोकतंत्र सेनानियों का दयनीय जीवन
-करणीदानसिंह राजपूत
आजादी का अमृत महोत्सव भारत सरकार पूरे देश में मनाने जा रही है। यह महोत्सव आजादी के 75 साल पूरे होने पर मनाया जा रहा है। यह 12 मार्च 2021 से देशभर में शुरू होगा और 75 सप्ताह तक यानी 15 अगस्त 2023 तक मनाया जाएगा। इस महोत्सव पर आयोजन के लिए प्रत्येक राज्य में और प्रत्येक जिले में तैयारियां शुरू हो चुकी है। इस 75 सप्ताह तक चलने वाले महोत्सव में अनेक कार्यक्रम होंगे।
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5.3.21
दुख हुआ चंडीगढ़ संजीव महाजन से जुड़ी खबर सुनकर
Om Raturi
क्यों संजीव, यह सच है क्या ? हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक पत्रकारिता का सफर तय करने का मौका मिला जाने अनजाने गिरते पड़ते। पता नहीं जीवन में कितनी तरह का नशा हमने किया, रिपोर्टिंग की, लेकिन सबसे बड़ा नशा इंसानियत का लगा । दुख हुआ चंडीगढ़ संजीव महाजन से जुड़ी खबर सुनकर। चंडीगढ़ में दिल्ली के बाद वेतनमान अच्छा है लेकिन पत्रकारों की भौतिक तावादी भूख, नेताओं की संगत में रहकर बढ़ जाती है असलियत यह है कि संजीव महाजन के नाम पर खबर किसी दूसरे ग्रुप में भेजी होगी ।
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आ गया है महिला दिवस - पर महिलायें हैं कहाँ?
प्रेस रिलीज़ - लव मैटर्स इंडिया, 4 मार्च 2021
टाइटल 1 : आ गया हैं महिला दिवस - पर महिलायें हैं कहाँ?
टाइटल 2 : स्त्रियों की सेहत, शरीर और सेक्सुअलिटी और इंटरनेट: एक लुप्त कड़ी
वर्ष 2020 ने दुनिया को डिजिटल की तरफ़ बढ़ते हुए देखा -काम के लिए, शिक्षा के लिए और मनोरंजन के लिए भी। व्यक्ति और संस्थाएं काम करने, सीखने-पढ़ने और संलग्न रहने के लिए ऑनलाइन ज़रियों की तरफ अग्रसर होने लगे। फिर भी, ऑनलाइन प्लेटफार्म की तरफ बढ़ते कदम , हर किसी के लिए एक जैसे नहीं रहे और उसके फायदे भी असमान रूप में मिले। इंटरनेट तक पहुँचने में आर्थिक, लैंगिक, शहरी-ग्रामीण विभाजन का सीधा असर पड़ता है, यह सूचना, संसाधनों और उपयुक्त मौक़ों की उपलब्धता को भी प्रभावित करता है।
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