29.2.08

भड़ास पर मैंने खुद ही एडल्ट कंटेंट की पाबंदी लगाई थी, लीजिए अब हटा रहा हूं....

हुवां हुवां हुवां हुवां.....जिधर देखो, उधर हुवां हुवां हो रहा है, भड़ास को लेकर। दरअसल भड़ास चीज ही ऐसी है कि शीशे के घरों में रहने वालों को यह कतई नहीं पच सकता, बर्दाश्त हो सकता। दुख तो इस बात का है कि पहले के स्वतंत्रा सेनानी अब आज के नए तानाशाह बन बैठे हैं और वो सारी हरकतें कर रहे हैं जिसे कोई भी प्रगतिशील, समझदार और जमीन से जुड़ा साथी नहीं कर सकता। अच्छा है, रहिमन दुख हो भला जो थोड़े दिन होए....। कम से कम शिनाख्त तो हुई कि इन नकाब ओढ़े चेहरों के पीछे का सच क्या है। भड़ास ने इनके नकाब को एक झटके में उतार फेंका है।

कई ब्लागर इसी की खबर दे रहे हैं कि भड़ास पर पाबंदी लगा दी गई है। अरे भइया, सुबह सुबह आनलाइन होते ही तमाशा देखकर पहला काम यही किया मैंने एडल्ट कंटेंट वाला टैग लगा दिया, सेटिंग में जाकर ताकि तुम मूर्खों को यह लग सके तुम्हारी मूर्खता सफल हुई। अब जबकि तुम सभी को भरोसा हो चुका है कि भड़ास पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, तो लो, मैं इस प्रतिबंध को खुद हटा देता हूं। अब तुम भड़ास खोलोगे तो देखोगे कि कोई वार्निंग नहीं दिखेगी, सीधे भड़ास खुलेगा और तुम्हारे चेहरे पर एक झापड़ लगेगा.....चटाक से, भड़ास के इतने सरल व सहज तरीके से खुलने को लेकर।

कल हमारा क्या होगा, तुम्हारा क्या होगा, ये तो किसी को नहीं पता पर आज की जंग तो हम भड़ासियों ने जीत ली है। तुम लोगों की खुशफहमी पर पानी फेरकर कि भड़ास प्रतिबंधित हो गया।

लगे रहो भाइयों...भड़ास पर पाबंदी लगवाने में, हम भी लगे हैं तुम्हें नंगा कराने में.....
जय भड़ास
यशवंत

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