9.4.09

Loksangharsha: चश्मे नम....


चश्मे नम....



चश्मे नम नूर की दुआ जाने ।
क्या है तेरे दिल में है खुदा जाने ?
ख्वाहिशों के जुनूँ में बस यूं ही
आ गए आज हम कहाँ जाने ?
फर्श पर अर्श झुक रहा था कभी
क्या हुआ फिर तेरी सदा जाने ?
मौत को जिंदगी मिली कितनी
तुझसे बेहतर तेरी अदा जाने ॥

--------------------डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल "राही"

3 comments:

  1. श्यामसखा‘श्याम9/4/09 7:26 PM

    मौत को जिंदगी मिली कितनी
    तुझसे बेहतर तेरी अदा जाने ॥
    मेरा अन्दाज यूं है
    जिन्दगी को जिन्दगी से छीनना था
    मौत का कैसा हंसीं होसला था
    अगर कविता या गज़ल में हेतु मेरे ब्लॉग पर आएं
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    सस्नेह
    श्यामसखा‘श्याम

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  2. मौत को जिंदगी मिली कितनी
    तुझसे बेहतर तेरी अदा जाने.
    badi achchhi line hai,dhanywaad.

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  3. मौत को जिंदगी मिली कितनी
    तुझसे बेहतर तेरी अदा जाने.
    badi achchhi line hai,dhanywaad.

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