अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...
"कुर्सी तो रानी लागे बड़ी सुहानी लगे , कोई भी मर्द नहीं जनता जनानी लगे शेम शेम""पर अब जनता जनानी अब शेर है ......गीदड़ तो अब मांद में दुबके बैठे है
"कुर्सी तो रानी लागे बड़ी सुहानी लगे , कोई भी मर्द नहीं जनता जनानी लगे शेम शेम""
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