6.6.12


क्या कभी सत्य की जीत होगी?

संदीप द्विवेदी

'सत्यमेव जयते' एक धारावाहिक है। जिसमें ऐसे ज्वलंत मुद्दों को उठाया जाता है जिस पर समाज की चुप्पी है। धावाहिक के प्रस्तोता आमिर खां की कोशिश है कि ऐसे मुद्दों पर लोगों की नजर जाये। लेकिन क्या आपको लगता है कि इस धारावाहिक में दिखाये गये किसी भी बात से लोग अनजान हैं? नहीं बिल्कुल नहीं। ये ऐसे मुद्दें हैं जिनकी चर्चा रोज़ाना अखबारों, गली मुहल्लों या घरों में होती रहती है। लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकलता। 
सही क्या है और गलत क्या है? इसका फैसला समाज के ठेकेदार ही करते हैं। अब तक सत्यमेव जयते में कई ऐसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया है जो हमारे समाज के नासूर हैं। दहेज, भ्रूण हत्या, बाल यौन शोषण, प्रेम विवाह, डाक्टरी का पेशा इत्यादि ऐसे विषय हैं जिनकी निंदा तो सभी करते हैं लेकिन इसे खत्म करने के लिए कोई आगे नहीं आता। 
सत्य किसी को स्वीकार नहीं है। सत्य को जानते सभी हैं लेकिन उसका सामना कोई नहीं करना चाहता। समाजिक बुराईयों के खिलाफ लड़ाई के लिए केवल धारावाहिक या फिल्मों से कुछ नहीं होगा। दर्शक कुछ पलों के लिए भावना में आकर तालियां बजा कर उत्साहित हो सकते हैं लेकिन इसका प्रभाव बहुत कम होता है। जरूरत है कि हमारे आने वाली पीढ़ी को ऐसे संस्कार दिए जाये जिससे उनमें ऐसी समाजिक बुराईयों के लिए कोई जगह न हो पाये। 
इसमें कोई शक नहीं कि 'सत्यमेव जयते' कार्यक्रम ने लोगों के दिल पर चोट की है। लेकिन बात कितनी बन पाती है इसका पता तो आने वाले समय में ही लगेगा। आमिर खान के शो 'सत्यमेव जयते' के हर एपिसोड का दर्शक बेसब्री से इंतजार करते हैं| हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक रहता है कि आमिर अपने शो में कौन सा गंभीर सामाजिक मुद्दा उठाने वाले हैं|
पहले एपिसोड में कन्या भ्रूण हत्या, दूसरे में बाल यौन शोषण, तीसरे में दहेज़ प्रथा, चौथे एपिसोड में देश की स्वास्थ्य सेवा की बिगड़ती हालत के बाद पांचवें एपिसोड में भी आमिर ने बेहद गंभीर मुद्दे देश में तेजी से बढ़ते ऑनर किलिंग जैसे अपराध को चुना है| 
मीडिया की थोड़ी समझ रखने के कारण मैं यह कह सकता हॅूं कि लोग टीवी या सिनेमा केवल और केवल मनोरंजन के लिए देखते हैं। समाजिक शिक्षा के लिए वे अपने परिवार और समाज की सोच को ही अपनाते हैं। ऐसे में यह कहना बहुत कठिन है कि 'सत्यमेव जयते' की सामाजिक​ शिक्षा का असर लोगों की मानसिकता और सोच पर कितना होता है।  

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