9.6.12

केदार हिम



हमने पिछले दिनों आपको रजत हिम और कंचन हिम बनाने की विधि बतलाई थी, जिसको बनाने के लिए जयपुर की हैल्थ फर्स्ट कंपनी के बढ़िया  अलसी के तेल की जरूरत पड़ती है। यदि आपके पास वह तेल उपलब्ध न हो तो आप केदार हिम बना सकते हैं। गर्मी चरमावस्था पर है और सभी को ठंडक चाहिये। तो आप केदार हिम से ठंडे हो जाइये। मैंने हाल ही में लंग कैंसर या फुफ्फुस कर्कट रोग पर एक नया लेख विकिपीडिया पर डाला है, आप उसे इस लिंक पर पढ़ सकते हैं। 

http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AB%E0%A5%81%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%AB%E0%A5%81%E0%A4%B8_%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%9F_%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%97#.E0.A4.9F.E0.A5.8D.E0.A4.AF.E0.A5.82.E0.A4.AE.E0.A4.B0_.E0.A4.AE.E0.A4.BE.E0.A4.B0.E0.A5.8D.E0.A4.95.E0.A4.B0.E0.A5.8D.E0.A4.B8


केदार हिम

सामग्रीः –
1. कंडेंस्ड मिल्क एक टिन 400 ग्राम।      2. ताजा बारीक पिसी अलसी 100 ग्राम।      3. दूध 1 लीटर।      4. अलसी के अंकुरित या किशमिश चौथाई कप।    5. बारीक कटी बादाम 25 ग्राम।           6. वनीला एक छोटी चम्मच।     7. चीनी स्वादानुसार।        8. कोको पाउडर 50 ग्राम।

केदार हिम बनाने की विधिः–

सबसे पहले दूध गर्म कीजिये। थोड़े से (लगभग 100-150 ग्राम) में अलसी के पाउडर को अच्छी तरह मिला कर एक ओर रख दें। फिर दूध को धीमी-धीमी आंच पर 15-20 मिनट तक औटा कर ठंडा होने के लिये रख दें। अब दूध, चीनी, कंडेंस्ड मिल्क और अलसी के मिश्रण को बिजली से चलने वाले हैंड ब्लेंडर से अच्छी तरह फैंटे। मेवे, वनीला मिला कर फ्रीजिंग ट्रे में रख कर जमने के लिए डीप फ्रीजर में रख दें। चाहें तो आधी जमने पर फ्रीजिंग ट्रे को बाहर निकाल कर एक बार और अच्छी तरह फैंट कर डीप फ्रीजर में रख दें। अगले दिन सुबह आपकी स्वास्थ्यप्रद, प्रिजर्वेटिव, रंगों व घातक रसायन मुक्त केदार हिम तैयार है।


केदारनाथ
केदारनाथ हिमालय पर्वतमाला में बसा भारत के उत्तरांचल राज्य का एक कस्बा है। यह रुद्रप्रयाग की एक नगर पंचायत है। यह हिन्दू धर्म के अनुयाइयों के लिए पवित्र स्थान है। यहाँ स्थितकेदारनाथ मंदिर का शिव लिंग १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हिन्दू धर्म के उत्तरांचल के चार धाम और पंच केदार में गिना जाता है। श्रीकेदारनाथ का मंदिर ३,५९३ फीट की ऊंचाई पर बना हुआ एक भव्य एवं विशाल मंदिर है। इतनी ऊंचाई पर इस मंदिर को कैसे बनाया गया, इस बारे में आज भी पूर्ण सत्य ज्ञात नहीं हैं। सतयुग में शासन करने वाले राजा केदार के नाम पर इस स्थान का नाम केदार पड़ा। राजा केदार ने सात महाद्वीपों पर शासन और वे एक बहुत पुण्यात्मा राजा थे। उनकी एक पुत्री थी वृंदा जो देवी लक्ष्मी की एक आंशिक अवतार थी। वृंदा ने ६०,००० वर्षों तक तपस्या की थी। वृंदा के नाम पर ही इस स्थान को वृंदावन भी कहा जाता है।

यहाँ तक पहुँचने के दो मार्ग हैं। पहला १४ किमी लंबा पक्का पैदल मार्ग है जो गौरीकुण्ड से आरंभ होता है। गौरीकुण्ड उत्तराखंड के प्रमुख स्थानों जैसे ऋषिकेशहरिद्वारदेहरादून इत्यादि से जुड़ा हुआ है। या दूसरा मार्ग है हवाई मार्ग। अभी हाल ही में राज्य सरकार द्वारा अगस्त्यमुनि और फ़ाटा से केदारनाथ के लिये पवन हंस नाम से हेलीकाप्टर सेवा आरंभ की है और इनका किराया उचित है।सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर बंद कर दिया जाता है और केदारनाथ में कोई नहीं रुकता। नवंबर से अप्रैल तक के छह महीनों के दौरान भगवान केदा‍रनाथ की पालकी गुप्तकाशी के निकट उखिमठ नामक स्थान पर स्थानांतरित कर दी जाती है। यहाँ के लोग भी केदारनाथ से आस-पास के ग्रामों में रहने के लिये चले जाते हैं। वर्ष २००१ की भारत की जनगणना के अनुसार केदारनाथ की जनसंख्या ४७९ है, जिसमें ९८% पुरुष और २% महिलाएँ है। साक्षरता दर ६३% है जो राष्ट्रीय औसत ५९.५% से अधिक है (पुरुष ६३%, महिला ३६%)। ०% लोग ६ वर्ष से नीचे के हैं।  (विकिपीडिया से साभार)
भ्रमण
यहां स्थापित प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ केदारनाथ मंदिर अति प्राचीन है। कहते हैं कि भारत की चार दिशाओं में चार धाम स्थापित करने के बाद जगद्गुरू शंकराचार्य ने ३२ वर्ष की आयु में यहीं श्री केदारनाथ धाम में समाधि ली थी। उन्हीं ने वर्तमान मंदिर बनवाया था। यहां एक झील है जिसमें बर्फ तैरती रहती है इस झील के बारे में प्रचलित है इसी झील से युधिष्ठिर स्वर्ग गये थे। श्री केदारनाथ धाम से छह किलोमीटर की दूरी चौखम्बा पर्वत पर वासुकी ताल है यहां ब्रह्म कमल काफी होते हैं तथा इस ताल का पानी काफी ठंडा होता है। यहां गौरी कुण्ड, सोन प्रयाग, त्रिजुगीनारायण, गुप्तकाशी, उखीमठ, अगस्तयमुनि, पंच केदार आदि दर्शनीय स्थल हैं।
केदारनाथ आने के लिए कोटद्वार जो कि केदारनाथ से २६० किलोमीटर तथा ऋर्षिकेश जो कि केदारनाथ से २२९ किलोमीटर दूर है तक रेल द्वारा आया जा सकता है। सड़क मार्ग द्वारा गौरीकुण्ड तक जाया जा सकता है जो कि केदारनाथ मंदिर से १४ किलोमीटर पहले है। यहां से पैदल मार्ग या खच्चर तथा पालकी से भी केदारनाथ जाया जा सकता है। नजदीक हवाई अड्डाजौली ग्रांट २४६ किलोमीटर दूरी पर स्थित है, यहां से केदारनाथ के लिए हवाई सेवा हाल ही में शुरू हुई है।  (विकिपीडिया से साभार) 

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