31.8.15

आसोतरा बनेगा आदर्श जल ग्राम

Ashok Rajpurohit


- कुण्डल के बाद जिले का दूसरा गाव चयनित   - जलक्रांति अभियान का अहम फैसला   
बाड़मेर : जल क्रांति अभियान के तहत अब बालोतरा पंचायत समिति का आसोतरा ग्राम भी आदर्श जल ग्राम बनेगा।  केंद्र सरकार के जल क्रांति अभियान में एक अहम फैसला लेते हुए सिवाना पंचायत समिति के कुंडल के बाद आसोतरा को आदर्श जल ग्राम बनाने की घोषणा की गई है।  इस  अंतर्ग्रत आगामी सालो में इन दोनों गावो में पानी की मुलभुत सुविधाओ के साथ साथ गइन दोनों गावो को जिले के पानी के आधार पर रोल मॉडल के रूप में विकसित करने के काम को राज्य और केंद्र सरकार की मदद से सम्पन्न किया जायेगा।

पूर्व सैनिकों की समान पद समान पेंशन की मांग के समर्थन में बनारस में प्रदर्शन


वाराणसी में सामाजिक सरोकारों से जुड़े जन संगठनों और संस्थाओं के साझा मंच "साझा संस्कृति मंच" ने 'समान पद समान पेंशन' की मांग को लेकर पूर्व सैनिकों के आज से रविन्द्रपुरी कालोनी वाराणसी में प्रारंभ हुए अनिशचित कालीन धरने का समर्थन करते हुये कहा कि पूर्व सैनिकों द्वारा लम्बे समय से की जा रही मांग बिलकुल व्यावहारिक है और यह समय उनकी मांग को सम्मान के साथं स्वीकारने के लिए बिलकुल उचित है जब हम 1965 के युद्ध की 50 वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं .

उत्तराखण्ड क्रिकेट को लेकर सियासत हो रही हैः दिव्य नौटियाल


-आशीष वशिष्ठ-

उत्तराखंड के क्रिकेट खिलाड़ी देश भर में धूम मचा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां आज तक क्रिकेट का बुनियादी ढांचा तक खड़ा नहीं हो पाया है। मगर उत्तराखंड के खिलाड़ी अपने गृह राज्य से नहीं खेल सकती क्योंकि भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेता भी अपनी-अपनी एसोसिएशन लेकर क्रिकेट के खैरख्वाह होने का दावा कर रहे हैं। सबको अपनी दुकान चलानी है और सब बीसीसीआइ की राज्य एसोसिएशन से संबद्धता की राह में रोड़ा बने हुए हैं। नतीजतन उत्तराखण्ड क्रिकेट को बीसीसीआई से मिलने वाली मान्यता सियासत की भेंट चढ़ गई है।

समान नागरिक संहिता

-priyank dwivedi-

समय समय पर समाज का एक बुद्धिजीवी तबक़ा समान नागरिक संहिता पर चर्चा करता है और अपनी राय देता है कि जब देश एक है तो कानून अलग अलग क्यों? अलग कानून की वजह से एक लोकतांत्रिक राष्ट्र दो भागों में बंट जाता है। समान नागरिक संहिता बेहद ही संवेदनशील और विचार विमर्श का विषय रहा है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद-44 इसकी सिफारिश करता है। समान नागरिक संहिता पहले सामाजिक मुद्दा हुआ करता था लेकिन आज के बदलते राजनीतिक परिदृश्य ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। और यही कारण है कि आजादी के 68 वर्षों बाद भी ये लागू नहीं हो पाई है।

30.8.15

बस्तर : राष्ट्रीय दैनिक अखबार पत्रिका के खिलाफ बस्तर के आदिवासी हुए लांमबंध

राष्ट्रीय दैनिक अखबार पत्रिका के बस्तर संस्करण के खिलाफ बस्तर आदिवासी लामबंध हो गये है,एक समाचार प्राकषन को लेकर बस्तर के आदिवासियों ने आज बस्तर बंद बुलाया है इससे पहले जगदलपुर मुख्यालय मे पत्रिका के संभागीय कार्यालय मे आदिवासियों ने संपादक राजेष दुबे और सीटी एडिटर अनुराग षुक्ला एंव खबर लिखने वाले अनिमेष पाल के आक्रेाष जताते हुए पत्रिका अखबार की प्रतियां जलाई और पुतला दहन किया अदिवासियों की मांग है कि प्रत्रिका के संपादक राजेष दुबे,अनुराग ष्षुक्ला और अनिमेष पाल के खिलाफ आदिवासी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए इस संबध मे जिले के एस.पी अजय यादव को एक ज्ञानप भी सौपा गया था।

जातिवादी रंग गहरा रहा है देवघर प्रभात खबर में?

देवघर प्रभात खबर में अब जातिवाद का रंग गहरा रहा है। सबसे कुशल व सक्सेस सर्कुलेशन मैनेजर का भी अब तबादल कर दिया गया। कारण दो जातियों के बीच जंग। विकास बलियासे यहां के लोकल ताकतवर समुदाय का व्यक्ति था। ब्राहम्ण जाति से था। उसको हटाने के लिए कई बार प्रयास किया गया था। अब दत्ता की टीम ने उसे यहां से जमशेदपुर रवाना कर दिया। यहां पर कायस्त व ब्राहणों के बीच वर्चस्व की जंग जारी है। कायस्थ लाॅबी की कमान खुद आरके दत्ता संभाल रहे हैं।

बलात्कार संस्कृति के धारकों वाहकों की लगायी आग से देश धू धू जल रहा है

पलाश विश्वास

सच मानिये तो अब फिजां त्योहार मनाने की नहीं है। पहले फिजां ठीक कीजिये...

गुजरात के एक करोड़ बीस लाख जनसंख्यावाले पाटीदार समाज  अपना मुख्यमंत्री ,पूर्व मुख्यमंत्री होने के बावजूद आरक्षण चाहिए तो हिंदू ह्रदय सम्राट के गुजरात पीपीपी माडल से आखिर किस किसका विकास हुआ,आरक्षण की प्रासंगिकता से बड़ा सवाल यही है कि गुजरात माडल का मुल्क बनाकर हम किस किस को आरक्षण देकर उन्हें बायोमेट्रिक स्मार्ट डिजिटल बाजार में क्रयशक्ति से लैस करें ताकि वह अपना विकास कर भी न सकें तो कमसकम जिंदा तो रहे,इस परगौर कीजियेगा 2020 और 2030 के लिए बेसब्र इंतजार से पहले।

पोस्ट डेटेड चेक है नीतीश कुमार का पैकेज

हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,इन दिनों बिहार में पैकेज-पैकेज का खेल चल रहा है। तेरा पैकेज इतने का तो मेरा इतने का। मगर सवाल उठता है कि पैकेज होता क्या है? क्या अपने घर में रखे पैसे को विभिन्न मदों में खर्च करना पैकेज देना होता है या फिर पैकेज का मतलब है कहीं बाहर से पैसों की प्राप्ति कर फिर उसको खर्च करना? जहाँ तक मैं समझता हूँ कि अपने दांयें हाथ से पैसे उठाकर बांयें हाथ को दे देने को किसी भी तरह से पैकेज देना तो नहीं ही कहा जाना चाहिए।
मित्रों,फिर भी अगर हम यह मान भी लें कि नीतीश कुमार जी ने बिहार के खजाने से बिहार के लोगों को 2 लाख करोड़ से ऊपर का पैकेज दे दिया तो क्या बिहार सरकार इस पैकेज तो तुरंत लागू करने जा रही है? इतिहास के आईने में अगर हम झाँकें तो पाते हैं कि 1942 में सर स्टेफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में क्रिप्स मिशन ने भारत का दौरा किया था। मिशन का कहना था कि हम भारत को डोमिनियन स्टेटस तो देंगे लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति व विजय-प्राप्ति के बाद। जाहिर है कि ब्रिटिश सरकार द्वितीय विश्वयुद्द में किसी भी तरह भारतीयों की सहायता चाहती थी। चूँकि प्रथम विश्वयुद्ध से पहले और के दौरान किए गए अपने वादों से ब्रिटिश सरकार युद्ध जीतने के बाद मुकर चुकी थी और उसका दमन-चक्र पहले से भी ज्यादा भीषण हो गया था इसलिए कांग्रेस ने अतीत से सीख लेते हुए क्रिप्स मिशन के प्रस्ताव को पूरी तरह से नकार दिया। गांधी ने प्रस्ताव को पोस्ट डेटेड चेक की संज्ञा दी अर्थात् यह प्रस्ताव एक ऐसे बैंक चेक के समान है जिस पर वर्तमान की नहीं बल्कि भविष्य की तारीख डाली गई है और वह बैंक भी ध्वस्त हो जानेवाला है।
मित्रों,नीतीश कुमार जी का कथित पैकेज भी एक पोस्ट डेटेड चेक के समान है जिसको जनता तभी भुना पाएगी जब वो नीतीश  कुमार जी की बातों पर भरोसा करके एक बार फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज कर देती है। अगर हम सन् 1942 के भारत से आज के बिहार की तुलना करें तो पाते हैं क्रिप्स मिशन यानि नीतीश सरकार बिहार के लोगों से कह रही है कि हमने जो-जो पिछली बार नहीं किया इस बार जरूर कर देंगे लेकिन पहले हमें जिताओ तो। तब तो भारत की जनता ने क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों को सिरे से नकार दिया था तो क्या इस बार बिहार की जनता पोस्ट डेटेड चेक पर भरोसा कर लेगी? दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के पैकेज पर अमल शुरू हो भी गया है।
मित्रों,अब हम जरा-सा विश्लेषण कर लेते हैं कथित पैकेज में निहित कथ्य का भी। वास्तव में यह पैकेज सिर्फ व्यय का पैकेज है इसमें आय की बात कहीं की ही नहीं गई है। पैकेज में यह तो कहा गया है हम यह फ्री देंगे,वह फ्री देंगे लेकिन कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि हम इतने उद्योग स्थापित करेंगे या बिहार की आय में इतने की वृद्धि करेंगे या फिर इतने लोगों को रोजगार देंगे। पूरी दुनिया जानती है कि बिहार के युवाओं को रोजगार चाहिए न कि फ्री की वाई-फाई,फ्री का बिजली-पानी। बिहार के युवाओं को बेरोजगारी भत्ता नहीं चाहिए बल्कि रोजगार चाहिए,औद्योगिकृत-विकसित बिहार चाहिए जिसमें वे स्वाभिमान के साथ अपने घर-परिवार के साथ एक अच्छी और स्तरीय जिंदगी जी सकें। वास्तव में जिस दिन ऐसा होगा उसी दिन से बिहार स्वाभिमान के साथ सिर उठाकर जी सकेगा। एक क्या हजारों स्वाभिमान रैलियों का आयोजन भी बिहार के प्राचीन और मध्यकालीन स्वाभिमान को पुनर्स्थापित नहीं कर सकती।
हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित

29.8.15

Miracle of Budwig Cancer Therapy

शांति की आरोग्य यात्रा – आह से अहा तक 
इस महिला का नाम शांति उम्र 40 वर्ष है। यह डूँगरगंढ, बीकानेर के पास किसी गांव की रहने वाली है। डेढ़ साल पहले इसकी बच्चेदानी में लियोमायोसारकोमा नाम का कैंसर हुआ। बीकानेर के एक अच्छे अस्पताल में इसका आपरेशन और कीमोथैरपी कर दी गई। 6 महिने तक सब कुछ ठीक ठाक रहा, लेकिन उसके बाद स्थिती बिगडने लगी। उसकी कमर में बांई तरफ एक बहुत बड़ा मेटास्टेटिक ट्यूमर हो गया, जिसमें बहुत दर्द रहने लगा, खून की कमी हो गई और हिमोग्लोबिन 6 से नीचे आ गया। कमजोरी, उबकाई, अनिद्रा तथा कई परेशानियां होने लगी। भूख भी नही लगती थी। एलोपैथी से कोई फायदा नही हो रहा था, इसलिए उनकी दवाइयां बंद कर दी गई। कुछ महिने इधर-उधर भटकने के बाद, किसी ने उसे सही राह दिखाई। और तीन महीने पहले वह मुझसे परामर्श लेने आई। वह बहुत कमजोर, सुस्त और निढ़ाल हो चुकी थी, चेहरा पीला पड़ चुका था। वह कुछ बोल भी नहीं पा रही थी, हिमोग्लोबिन 7 ग्राम के आस पास रहा होगा। बांईं तरफ कमर की गांठ में असहनीय दर्द और वेदना थी।
 
                   

यह पूरा परिवार अशिक्षित था और और ग्रामीण इलाके के एक खेत में रहता था। ये हिंदी भाषा भी नहीं बोल पाते थे। इन्हें बुडविग प्रोटोकोल की पूरी ट्रेनिंग देना हमें बड़ा कठिन काम लग रहा था। फिर भी हमने दिन भर इन्हें बुडविग प्रोटोकोल की ट्रेनिंग दी। मुझे तो लग ही नहीं रहा था कि यह मरीज चार दिन भी बुडविग प्रोटोकोल ले पाएगी। लेकिन डेढ़ महीने बाद उसके भाई का अचानक फोन आया, मुझसे कुछ सवाल पूछे और कहा कि शांति की हालत धीरे धीरे सुधर रही है। यह सब सुनने के बाद भी मुझे कोई खास उम्मीद नहीं थी।  लेकिन जब 25 नवम्बर 2014 को शांति ने मेरे कमरे में कदम रखा तो मैं इसे देखकर स्तभ रह गया। मुझे विशवास नहीं हो पा रहा था कि क्या यह वही महिला है जो तीन महिने पहले मुझे दिखाने आई थी। वह बार-बार मुझसे अपना भाषा मे कुछ कहने व पूछने की कोशिश कर रही थी। वह खुश व प्रसन्न दिखाई दे रही थी। उसका चेहरा चमक उठा था। चेहरे के दाग धब्बे दूर हो चुके थे। चेहरे की लाली और चिकनापन देखते बनता था। उसकी रग-रग से ओमेगा-3 के अणु और ऊर्जावान इलेक्ट्रोन्स टपक रहे थे। उसकी उल्टियां बंद हो चुकी थी, भूख खुल गई थी, दर्द में भी आराम था। उसका हिमोग्लोबिन बढ़ कर 11.5 ग्राम हो चुका था। उसकी बड़ी सारी गांठ 84x78 से कम होकर 46x34 मि.मी. हो चुकी है। उसके लीवर का आकार सामान्य हो गया है। किडनी का स्टोन निकल चुका है। ये सारा चमत्कार बुडबिग प्रोटोकोल का है। अलसी का तेल अपना असर दिखा चुका है। संलग्न रिपोर्ट्स और तस्वीरें सारी कहानी बयां कर रही है। उसकी दोनों तस्वीरों में रात दिन का फर्क है। आज हमारा आत्म विश्वास शिखर को छू रहा है। शांति की आरोग्य यात्रा की खबरें जर्मनी तक पहुँची हैं। सभी दोस्त हमें बधाई दे रहे हैं। फेसबुक पर लाइक्स और कमेंट्स का अंबार लगा है। जर्मनी से विजुवलाइजेशन गुरू क्लॉस पर्टल ने भी बधाई का मेल भेजा है। ये हमारे लिए फक्र की बात है।  हम ऐसा समझते थे कि बुडविग उपचार लेने वाले मरीज को कुछ तो पढ़ा लिखा और समझदार होना जरूरी है। लेकिन शांति ने हमारी इस भ्रांति का हमेशा के लिए चकनाचूर करके रख दिया तोड़ कर रख दिया। जुग जुग जियो शांति...

मुल्क रिलायंस अदाणी का, हुकुम उनका और हुकूमत भी उनकी!

पलाश विश्वास

नामालूम कि कब यादें सिरे से गुमशुदा हो जायें! कत्लेआम के लिए सियासत काफी है ,दोस्तों। रब को हत्यारा और हत्यारे को रब क्यों बनाते हो ? गुजरात में जो हो रहा है और बाकी देश में जो होने वाला है। धर्म और जाति के नाम जो फिर बंटवारा बेइंतहा है। पहचान के नर्क में जो मुल्क मुल्क दम तोड़ रहा है। रंगा सियार का रंग भी उतरने लगा है।


प्यारे नित्यानंद गायेन,
bahut hi jyada nalayak ho.itbna khoobsoorat likh sakte ho.tamaam chijo mein vakt barbad karte ho lekin likhye bahut kam ho.hum kharab likhte hain .firbhi khoob likhte hain kyunki tumhare hisse ka likhna bhi haota hai.kab mujhe rahat doge?bachpana chhodo bhi aur jang mein shamil ho jao.do kaudi ke Pr se baaj aao.tumhar kalam parmanu bam hai,use hi aajmao.hum jaise do kaudi ke logo eke liye vakt jaya naa karo.bahut sakht naaraj hun.yaar,thodi,humaari bhi pawah kiya karo.yaaede ab bhi aato hai.na jane ,kab yade gumshuda ho jaye.

रक्षा बंधन की पौराणिक कथा

प्रयाग पांडेय

"येन बद्धो बलि राजा, दान बिन्द्रो महाबला,
तेन त्वाम बदिष्यामि, रक्षेः मान चल, मान चला"॥

सभी सम्मानित मित्रो को श्रावण मास की जनेऊ पूर्णिमा अथार्त ‘जन्यो पुन्यू’ और रक्षा बंधन की अनेक - अनेक शुभ कामनाएं और ढेरों बधाइयाँ ।  मित्रो , पौराणिक दृष्टि से आज  महत्वपूर्ण दिन है । इस मौके पर आदि काल से सत्ता के लिए खेले जाने वाले खेलों और अपनी उपलब्धियों पर गुमान के हश्र को भी बखूबी समझा जा सकता है । दरअसल सत्ता और वर्चस्व  का संघर्ष हरेक युग और काल में रहा है । यह लड़ाई सतयुग से चली आ रही है ।   पौराणिक कथाओं के अनुसार सतयुग में जो कोई समर्थ राजा एक सौ अश्वमेव यज्ञ कर पाने में सफल हो जाता , वह  भगवान इंद्र के समकक्ष हो जाता था । ऐसे में स्वाभाविक रूप से भगवान इंद्र के वर्चस्व  को खतरा उत्पन्न होना तय था । पौराणिक कथानुसार  उस दौर में एक महादानी राजा थे - बलि ।

एड्स : बचाव ज़रूरी है

एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी ये सभी बीमारियां रक्त के उत्पादों और यौन संबंधों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे में चली जाती हैं. हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक़ गैर शिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों से इंजेक्शन लेने से एचआईवी/एड्स फैलने का ख़तरा हो सकता है.

11 लोगों को मिलेगा शान-ए-गुफ्तगू सम्मान

इलाहाबाद । साहित्यिक संस्था ‘गुफ्तगू’ के तत्वावधान में पांच सितंबर से
दो दिवसीय साहित्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। संस्था के अध्यक्ष
इम्तियाज़ अहमद गा़जी ने बताया कि पांच सितंबर की शाम 6.30 बजे से धूमनगंज
स्थित सुधा वाटिका में ‘शान-ए-गुफ्तगू’ सम्मान समारोह और किदार नाथ शर्मा
(पंचकूला) की पांच कहानी संग्रहों पर परिचर्चा होगी। मुख्य अतिथि फिल्म
गीतकार इब्राहीम अश्क (मुंबई) होंगे, अध्यक्षता पंडित बुद्धिसे शर्मा
करेंगे।

उत्तराखण्ड के दो मंत्री 'वसुंधरा दीप' अखबार के मुख्य कार्यालय रुद्रपुर पहुंचे


वसुन्धरा दीप समाचार पत्र के बारे मे शिक्षा मंत्री और बीज प्रमाणीकरण संस्था के अध्यक्ष को जानकारी देते जीएम भरत शाह

शिक्षा मंत्री को स्मृति चिन्ह देते वसुंधरा दीप समाचार पत्र के लोग

रुद्रपुर - उत्तराखण्ड के शिक्षा मंत्री, मंत्री प्रसाद नैथानी और कैबिनेट दर्जा प्राप्त मंत्री तिलक राज बेहड़ वसुंधरा दीप के मुख्य कार्यालय रुद्रपुर पहुंचे और समाचार पत्र के उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा वसुंधरा दीप समाचार पत्र जिस तरह से बेबाकी और निर्भीकता से समाचार प्रकाशित कर रहा हैं वाकही काबिले तारीफ है।


SATISFIED 
This book has more than Johanna Budwig's diet. It has other valuable information that has been working for me. I have stage four lung cancer yet I have never felt this good for years. I asked my oncologist, "why do I feel so go." He looked confused and answered, "that's good." Do yourself a favor and get this book. All the methods in this book would work for persons without cancer and I think they would prevent cancer as well as make you feel better. - Amazon Customer, Oxnard, CA USA


Biography of Dr. Johanna Budwig

I gladly announce that Biography of Dr. Johanna Budwig is going to be published in Health of India as Cover Story. Definitively Budwig Protocol is a miracle cure for cancer with documented 90% success if you follow this treatment perfectly and religiously. This treatment targets on prime cause of cancer. Prime cause of Cancer is oxygen deficiency in the cells. Two factors are essential to attract oxygen in the cells: 1- Sulfur containing protein (found in cottage cheese) and 2- some unknown fat which nobody could identify until 1949 when Dr. Budwig developed paper chromatography technique to identify fats. These fats were Alpha-linolenic acid and linoleic acid found abundantly in FLAX OIL. Thus she developed Cancer therapy based on Flax oil and cottage cheese.   Click here to download Dear Friends, If anybody wants to have hard copy of this issue, you may get from Mr. Mohit chaturvedi on his mobile (09314937709 or 09309291100) or email (dietvictuals@gmail.com). Cost is Rs. 60/- + courier, if applicable. In Jaipur no courier charges.Thanks. Dr. O.P.Verma
  • Comments on FB
  • Brent Wilcox im telling you this lady was WAY WAY WAY AHEAD OF HER TIME...the body was set up to heal itself...Dr. Budwig understood this to be true...i have researched her and the Budwig Center, this proves that cancer is curable WITHOUT chemotheraphy!!!
    12 hrs · Unlike · 9
  • Inge Kalkhoven I agree Brent
    11 hrs · Edited · Unlike · 1
  • Kelly Madsen Holmes I Love Her!!! I am so Grateful for her, she's Awesome!!!
    11 hrs · Unlike · 4
  • Kelly Madsen Holmes Great job on cover story !!
    6 hrs · Unlike · 1
  • Om Verma Friends, the cover story includes her biography, some quotes, protocol in brief, some testimonials, biography of Mr Lothar Hirneise and 5 important herbs used in Cancer e.g. Dandelion, Mulberry, Milk Thistle, Stinging Nettle and Essiac tea
    2 hrs · Like
  • Om Verma Even cover page looks awesome. It is for the first time thart Budwig appears on cover page of an Indian magazine. How thrilled and excited I am.!!!
    2 hrs · Like
  • Om Verma I definitely agree with Brent Wilcox. In my opinion Budwig was the best scientist of the era. It is very sad that no body worked on Quantum Biology after her demise.
    • 1 hr · Edited · Unlike · 2
    • Brent Wilcox sadly, she has not been recognized for her INCREDIBLE work in curing cancer here in America due to the fact that there is no money to be made in curing cancer...America allows you to llive with illnesses...Dr Budwig has proven it can be done...it is obvious her work was outstanding....7 times nominated for the Nobel Prize! 
  • Lothar Hirneise Thanks Dr. Verma for this!!!
    2 mins · Unlike · 1
  • Om Verma Friends we are lucky to have Lothar Hirneise in our group. He has worked with Johanna Budwig for several years. He says that he is student of Budwig. But he is actually the successor of Dr Budwig. He has developed a nice Budwig Center in Germany. Heart of his famous 3E Program is Dr Budwig's Oil-Protein Diet.
    2 hrs · Like · 1
  • Subasni Balakrishnan Shalini Arumugam ths is the one I told u
    2 hrs · Unlike · 1
  • Inge Kalkhoven Good to know that there is a budwig centre in Germany i thought there was only one in spain
    2 hrs · Unlike · 2
  • Brent Wilcox yes, i thought the only one was in spain....nice to learn more about the budwig center!
    2 hrs · Unlike · 1