27.11.15

भड़ास में टीआरपी की खबर पढ़कर अच्छा लगा कि न्यूज़ 24 जैसा चैनल नीचे जा रहा है

भड़ास में टीआरपी की खबर पढ़कर अच्छा लगा कि न्यूज़ 24 जैसा चैनल नीचे जा रहा है। मैं बताना चाहूँगा की न्यूज 24 में डेस्क में जो लोग बैठे हैं उन्हें ख़बरों का सेन्स ही नहीं है। दूसरे चैनल जिस खबर को प्रमुखता से चलाते हैं न्यूज़ 24 इतना महान है की उनको खबरों की कोई जरूरत ही नहीं होती। न्यूज़ 24 का हाल ऐसा ही रहा तो इसका गर्त में जाना तय है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ की जो लोग डेस्क में बैठे हैं तो क्या उन्होंने न्यूज़ 24 की लुटिया  डुबोने का फैसला ही कर लिया है क्या। स्ट्रिंगर्स से खबर मंगा ली जाती है लेकिन चलाने के लिए टाइम ही नहीं होता।स्ट्रिंगर्स बेचारा दिन भर मेहनत करके खबर बनाता है।


एक आदमी उसको एप्रूवड करता है और दूसरा ज्ञानी आकर उसको कचरे के डिब्बे में डाल देता है। इनके बाप का पैसा तो खर्च नहीं होता खबर करने में सो इनको दर्द भी नहीं होता। मैं दावे के साथ कहता हूँ की असाइनमेंट में ऐसी में बैठे लोग हम लोगों की तरह मेहनत कर दें तो मैं उनकी टाँगो के नीचे से निकल जाऊंगा। खबर चल भी जायेगी तो पेमेंट के लिए रोते रहो कोई सुनने वाला नहीं। जिससे भी कहो तो वो गेंद को दुसरे की गोद में फेंक देता है। साल छह महीने में आ भी जायेगा तो इतना पैसा भेज देतें हैं की देखकर लगता है आत्महत्या ही कर लो। साथ हो जो खबर चैनल किसी तरह चला भी लेता है तो पेमेंट भेजने में बोल दिया जाता है की चली ही नहीं है।

हर जगह दलाल बैठे हैं अपना पैसा तो दबाकर रखते हैं स्ट्रिंगर्स का पैसा भी खा जाते हैं। महान हैं न्यूज 24 वाले। लगता है जाकर इनके चारों तरफ परिक्रमा लगा ले लेकिन डर है की ऐसी गलती की तो ऐसी जिल्लत की नौकरी भी हाँथ से चली जायेगी। इसलिए भइया किसी से कुछ न कहो, अपने अपने बच्चों को टोकरी के नीचे ढक दो। रही बार टीआरपी की तो ये तो अभी सर बानगी है अगर ऐसे ही ज्ञानी लोग चैनल में बैठे रहेंगे तो आगे आने वाले समय में चैनल का क्या हस्र होगा ये तो आप जानते ही हैं। मैं तो चैनल का एक अदना सा मजदूर हूँ अगर मेरा नाम प्रकाशित किया जायेगा तो मुझे मजदूरी से भी निकाल दिया जायेगा, इसलिए आपसे हाँथ जोड़कर निवेदन है की मेरा नाम न प्रकाशित किया जाय। धन्यवाद!

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. 

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