28.9.23

Press Club Elections 2023 Violate Delhi High Court's Orders of 2010

Yashwant Singh-

The Press Club of India comes under the Companies Act: 1956. Thus Press Club of India is a registered company. The 'Ordinary voting members are considered as shareholders' of the company,  i.e PCI. As per the Companies Act, no new members/ shareholders can cast a vote in Annual General Body meetings and elections for one year, from the date of their membership. The same law is applicable to the Press Club of India; which is flouting the 'Orders of 2010, by Honb'le Delhi High Court, procured by Sandeep Dixit, ex Secretary General of The Press Club of India and Nirnimesh Kumar, who was then a Legal Correspondent of The Hindu. Vinay Kumar, Sandeep Dixit and Nirnimamesh worked at The Hindu. In 2010, the Delhi High Court, gave a 'direction and Order' that no new member from 2008 can participate in the voting in 2010 elections. 

19.9.23

विश्वकर्मा योजना पिछड़ों के लिये सौगात या झांसा

kp singh-

भाजपा और इण्डिया गठबंधन के बीच तू डाल डाल मैं पात पात का खेल चल रहा है। एक शह देता है तो दूसरा काट निकालकर उल्टी शह दे डालता है। इस बाजी में कौन जीतेगा इसका नतीजा तो 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सामने आयेगा। फिलहाल तो लोग इस रोमांचक और रोचक लड़ाई का मजा ले रहे हैं। वैसे लड़ाई में भी दोनों तरफ कई पैंच हैं जिससे खेल का सस्पेंस और बढ़ गया है। ताजा पेंच डालने की कारीगरी नीतिश कुमार ने दिखाई है ऐंकरों के बहिष्कार के मुद्दे पर। बताया तो यह गया था कि इण्डिया की मुंबई में हुयी बैठक में सर्वसम्मति से इस बहिष्कार का फैसला लिया गया था। जिसमें भले ही नीतिश कुमार खुद मौजूद न रहे हों लेकिन उनके प्रतिनिधि तो थे और उन्होंने भी शायद यही कहा था कि जो पंचन की राय वही उनकी राय है। फिर नीतिश कुमार को इत्तेफाक कैसे हो गया। ऐसी प्रायोजित नाराजगी के पीछे कोई न कोई रहस्य होता है। क्या नीतिश के रूठने के पीछे यह तो रहस्य नहीं है कि विपक्षी एकता के लिये शुरूआत उन्होंने की, पूरे कुनबे को उन्होंने जोड़ा लेकिन अब वे अलग थलग से हैं। उन्हें वह भाव नहीं दिया जा रहा जिसकी अपेक्षा थी। शायद वे विपक्षी गठबंधन के संयोजक पद को पाने के तलबगार थे भले ही खुले तौर पर उन्होंने यह कहा हो कि उन्हें संयोजक बनने की कोई हसरत नहीं है। पर लगता यह है कि एक ओर वे बड़प्पन भी ओढ़े रखना चाहते थे दूसरी ओर चाहते थे कि अन्य लोग समझदारी दिखाकर उनके गले में संयोजक बनाने की माला डाल दें पर किसी ने उनका नाम भी नहीं लिया। शरद यादव ने तो अपनी यह नियति स्वीकार कर ली है पर संभवतः नीतिश इसे पचा नहीं पा रहे। फिलहाल जो भी हो उनके और पत्ते अभी आगे खुलेंगे। नीतिश जी बड़े महीन नेता हैं। हालांकि उनके सामने एनडीए में जाने का विकल्प अब नहीं रह गया है लेकिन इण्डिया के गांधी या जयप्रकाश बनने का चांस भी उनके हाथ नहीं आ रहा। इस कुंठा में इण्डिया के लिये अगर उन्होंने फिदाइन बनने की ठान ली हो तो क्या आश्चर्य है बतर्ज खेलेंगे नहीं तो खेल बिगाड़ेंगे।

18.9.23

News18 India airs “Vishwa Mitra” – An exclusive documentary on Prime Minister Narendra Modi's Birthday


September 18, 2023: On the occasion of Prime Minister Shri Narendra Modi's birthday, News18 India, India's No.1 Hindi news channel, aired an exclusive documentary that showcased the life and leadership of India’s PM for viewers. The documentary, titled Vishwa Mitra, was broadcast on the 17th of September, 2023.

ABP Majha Unveils an Exciting Line-Up as Bappa Majha Returns to Delight Viewers

Mumbai, September 18, 2023: ABP Majha, Maharashtra's leading news channel, is happy to announce the return of its popular show Bappa Majha, with an exciting line-up of celebrations and unique programming. Scheduled to air from September 19th to September 28th, these programs promise to captivate viewers with an array of exclusive content.

News18 celebrates Hindi Diwas with a grand contest – Hindi Ke Samrat

News18, India's No. 1 News Network, once again brought back its unique celebration of the Hindi Diwas – Hindi ke Samrat - that is celebrated on the 14th of September every year. The third edition of this award-winning contest received an overwhelming response this year, generating a reach of over 22 million. This initiative stands testimony to News18’s commitment to not only celebrating the cultural heritage of its viewers but also deeply integrating itself as a brand into the socio-cultural fabric of its audience.

16.9.23

स्मरण/ सुनील दुबे : व्यक्तित्व की कमी, संपादन की खूबी

आलोक पराड़कर -

ये 1997-98 का कोई वार था। लखनऊ से प्रकाशित 'हिन्दुस्तान' के लिए बनारस में ब्यूरो की तैयारी थी, कुछ लोगों को रखा जाना था। छह-सात साल 'आज' में काम करने के बाद मैं वहां से मुक्त था और मुझे नौकरी की तलाश थी। बताया गया कि स्थानीय संपादक सुनील दुबे स्वतः साक्षात्कार लेंगे। कई लोग थे, मैं भी पहुंचा। पत्रकारिता पर थोड़ी बातचीत के बाद उन्होंने बस ये ही पूछा था कि 'आज' की नौकरी क्यों छोड़ी? मुझे याद नहीं कि मैंने क्या वजह बताई लेकिन फिर मुझे पता चला कि मुझे वाराणसी ब्यूरो में रख लिया गया है। हमारी छोटी-सी टीम संपादकीय टीम थी जिसमें मेरे साथ राधेश्याम कमल, अजय चतुर्वेदी, आशुतोष पांडेय और डॉक्टर प्रभा रानी थीं। काशी विद्यापीठ और कांग्रेस से जुड़े डाक्टर सतीश कुमार लंबे समय से दिल्ली 'हिन्दुस्तान' के लिए खबरें किया करते थे, इसलिए वे भी इस टीम में शामिल माने गए। हमारा नेतृत्व ब्यूरो चीफ शेखर कपूर करते थे। बाद में ए.के.लारी भी आए। दुबे जी जब भी बनारस आते, लारी जी और रंजीत गुप्त उनके साथ होते। दुबे जी इनके साथ किसी पंडित जी से भी मिलने जाते। कई बार ये भी कहा जाता कि जल्द ही रंजीत गुप्त भी हमारे साथ आ जाएंगे जो उन दिनों 'राष्ट्रीय सहारा' में थे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 


अखबार की डेड लाईन बनी घोड़े की लगाम

 ग्रामीण पत्रकारिता में अखबार की डेड लाईन का बड़ा महत्त्व है। बाई लाईन खबर के तो क्या कहने ! मजा ही मजा ! नाम भी पहचान भी बहुत करीबियों से मिलता सम्मान भी। उसी से जाना जाता है कि खबर कहां से लिखी गई। जब पत्रकार की डेड लाईन न हो तो वह पत्रकार है या कोई पीड़ित आम जन यह उसके लिए आत्म ग्लानि का विषय होता है। संस्थान ग्रामीण पत्रकारों की डेड लाईन बन्द कर उनको सजा देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने किया मेक इंडिया नं-1 पत्रिका का विमोचन

पटना- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी मीडिया सेल, बिहार  द्वारा निर्मित पत्रिका, ‘‘मेक इंडिया नं-1’’ का विमोचन अपने कर कमलों से किया। ‘मेक इंडिया नंबर-1’ की परिकल्पना दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की दूरस्त परिकल्पना है। इस पत्रिका में भारत को दुनिया का नंबर वन राष्ट्र बनाने की परिकल्पना एवं प्रयासों के संबंध में विस्तृत रूप से चर्चा की गयी है।

भड़ास पर नामज़द खबर देख पब्लिक ऐप के ग्रुप एडमिन (एसाइनमेंट)ने बगैर सूचना के ग्रुप से निकाला

Sudhir Awasthi -
asudhir81@gmail.com



अपने आप को सर्वश्रेष्ठ न्यूज ऐप के रूप में बताकर मियां मिट्ठू बन कर झूठी वाहवाही लूटने की आदतों में सुमार हो चुके public न्यूज ऐप ने पिछले काफी लंबे अर्से से अपने रिपोर्टर को महज रिपोर्टर नहीं बल्कि विज्ञापन का दलाल बनाने पर जुटा हुआ है।

पटना में युवा पत्रकारों का बनाया हुआ झोपड़ी का कार्यालय पटना नगर गिगम ने हटवाया...

Abhishek Kumar Singh
64singh@gmail.com    

बशीर बद्र की एक पंक्ति है...लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में..आपलोग भी सोच रहे होंगे मुझे बशीर बद्र साहब की याद क्यों आ गई.. दरअसल आज हमारे सभी भाइयों की मेहनत से बनाई हुई झोपड़ी उजड़ गई...पटना के वीरचंद पटेल मार्ग स्थित राजद कार्यालय के पास  युवा पत्रकारों ने कोरोना काल में  बैठने के लिए 10 बाई 10 की एक झोपड़ी बनाई थी...

देश के नंबर वन अखबार में अगडे पिछड़े की राजनीति में अखबार का बेड़ा गर्क, लगातार गिरावट रहा प्रसार

देश के नंबर वन अखबार के धनबाद कार्यालय से मिल रही जानकारी के मुताबिक संताल के साहिबगंज, पाकुड, गोड्डा, देवघर जैसे संस्करण को भागलपुर मे पारमार्जित किए गए हैं। ये सभी संस्करण अब यहां संपादित और प्रकाशित किए जाएंगे। इधर धनबाट से अजय पांडे, दिलिप दास(कायस्थ), वीरेंद्र पांडेय, विनय सिंह, शैलेन्द्र मिश्रा सहित कई लोगों का स्थानांतरण भागलपुर किया गया है।

इस धोखाधड़ी के लिए किस संस्था को ज़िम्मेदार ठहराया जाए?

sandeep kumar
journalistkumar899@gmail.com


ग़ाज़ियाबाद ज़िले में साहिबाबाद के लाजपत नगर इलाक़े से साइबर फ़्रॉड की एक बहुत बड़ी वारदात सामने आई है…जालसाजी की शुरुआत कैनरा बैंक के कर्मचारी ने की….और उसके साथ कुछ और लोगों ने मिलकर 5 लाख से ज़्यादा का साइबर फ़्रॉड किया ….15 जुलाई को पीड़ित ने कैनरा बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर एफ़डी की डुप्लीकेट कॉपी लेने के लिए फ़ोन किया…तो उधर से एक लिंक व्हॉट्सएप पर भेजकर उसमें डीटेल्स भरने के लिए कहा गया…

प्रजातंत्र टीवी जिंगा OTT पर लॉन्च हो चुका है, अब चंद दिनों के बाद जिओ टीवी और जिओ फायबर भी दिखेगा।

प्रजातंत्र टीवी न्यूज़ चैनल सीधी व साहसिक पत्रकारिता के लिए खड़ा हो रहा है । प्रजातंत्र टीवी टीम की यह कोशिश होगी कि वह हर दर्शक की उम्मीदों पर खरा उतरे। चैनल उन खबरों को लोगों तक प्राथमिकता के साथ पहुंचाएगा जो खबरिया चैनल नहीं दिखा पाते हैं. रिपोर्टर्स के माध्यम से न्यूज चैनल छोटे-छोटे शहरों और गांवों की महत्वपूर्ण खबरों को दर्शकों तक पहुंचाएगा. प्रजातंत्र टीवी न्यूज़ चैनल सेटेलाइट मल्टीसिस्टम ऑपरेटर्स के साथ-साथ कई प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध होगा, क्योंकि प्रजातंत्र टीवी की टीम का लक्ष्य प्रजा की आवाज बनना है कौशलेन्द्र प्रताप सिंह के प्रधान संपादकत्व में प्रजातंत्र टीवी न्यूज़ चैनल कुछ ही दिनों में लॉन्च हो रहा है प्रजातंत्र टीवी जिंगा OTT पर लॉन्च हो चुका है अब चंद दिनों के बाद जिओ टीवी और जिओ फायबर भी दिखेगा एडिटर इन चीफ कौशलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिओ फायबर के बाद एयरटेल डीटीएच पर भी जल्द ही यह दिखेगा चैनल की लांचिंग की तैयारियाँ जोरों पर है। दिल्ली में लांचिंग कार्यक्रम रखा जायेगा है।

बुंदेलखंड का बुंदेला परिवारःसियासी ताकत और पारिवारिक अदावत का घालमेल

अजय कुमार,लखनऊ

उत्तर प्रदेश के दक्षिण और मध्य प्रदेश के पूर्वाेत्तर में स्थित बंुदेलखंड आजकल काफी सुर्खियों में है. एक वजह है कि देश की राजधानी दिल्ली से सटी औद्योगिक नगरी नोएडा के गठन के 47 वर्ष बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नोयडा की ही तर्ज पर बुंदेलखंड का विकास करने के लिए इस क्षेत्र में नोयडा से भी आकार में बड़ा एक और नया औद्योगिक शहर बनाने का निर्णय लिया है.बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के नाम से नया औद्योगिक शहर झांसी-ग्वालियर मार्ग बसाया जाएगा.योगी सरकार द्वारा 12 सितंबर 2023 को कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई.खास बात ये है कि बीडा का आकार नोएडा से भी बड़ा होगा. नोएडा का गठन 13 हजार हेक्टेयर जमीन से किया गया था. बीडा का गठन करीब 14 हजार हेक्टेयर जमीन से किया जा रहा है.बीडा के लिए सरकार पहले चरण में 5000 करोड़ रुपये की राशि देगी.योगी सरकार का यह फैसला निश्चित ही तौर पर मील का पत्थर साबित होगा.इससे रोजगार के अवसर बढेगें तो क्षेत्र में खुशहाली आयेगी.

15.9.23

कानपुर जर्नलिस्ट क्लब ने हिंदी दिवस पर गोष्ठी का किया आयोजन

कानपुर : 14 सितम्बर हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को अशोक नगर स्थित कानपुर जर्नलिस्ट क्लब के तत्वावधान में हिन्दी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग भाषायी सरलीकरण के लिए परिचर्चा की गयी जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार कुमार त्रिपाठी ने की जहाँ वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी भाषा के चलन में काफी व्रद्धि हुई है लेकिन अभी भी हिन्दी के उन्नयन में सार्थक प्रयासों की जरूरत है। वही वरिष्ठ पत्रकार कैलाश अग्रवाल ने कहा कि हिंदी भाषा के जो विद्यालय है उनमें पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए कलम के माध्यम से पत्रकार उपयुक्त माहौल बनाये ताकि अभिवावकों में अंग्रेजी भाषा के स्कूल कालेजो में बच्चों को पढ़ाने की विवशता न हो।

वंशवाद का हंगामा क्यों है वरपा

 केपी सिंह-

लोग आश्चर्यचकित हैं कि इन सयानों को अचानक वंशीय शासन का भूत क्यों सताने लगा है जबकि पिछले 42 वर्षों से देश में कोई भी ऐसा नेता प्रधानमंत्री नहीं बना जिसकी जड़ें किसी वंश परम्परा में ढूंढी जा सकें। इस दौरान तो एक पूरी पीढ़ी बचपन से जवानी का दौर पूरा करते हुये बुढ़ापे में प्रवेश कर चुकी है और एक बिल्कुल नयी पीढ़ी मैदान में आ गयी हैं। सो इन पीढ़ियों को ऐसे किसी खतरे की सुध क्यों हो। लोकतंत्र में निश्चित अंतराल के बाद होने वाले चुनावों में सत्ता को जनता जनार्दन के सामने परीक्षा देनी पड़ती है जिसमें मुख्य रूप से उसका आकलन इस आधार पर होता है कि उसने बेरोजगारी, महंगाई, लोगों की आर्थिक बदहाली दूर करने और समाज में खुशगवार माहौल कायम करने के उद्देश्य को किस हद तक सफल किया। यह मौलिक मुद्दे अगले चुनाव के केन्द्र में भी हैं लेकिन इन पर डट कर जबाव देने की तैयारी करने की बजाय ऐसे मुद्दे प्लांट करने की कसरत की जा रही है जो स्वाभाविक तौर पर लोगों के चिंतन में हो ही नहीं सकते। इसमें सहायक बनकर मीडिया का एक वर्ग अपनी जगहसाई करा रहा है। जी हां बात हो रही है आज एक प्रमुख हिंदी दैनिक में पटना के एक पत्रकार के प्रकाशित आलेख की जो अपनी युवावस्था में बिहार की राजनीति के बारे में धारदार खबरें देने के लिये विख्यात थे लेकिन आज सत्ता प्रतिष्ठान के खबरची की भूमिका अदा करके संतोष का अनुभव कर रहे हैं।

मजीठियाः अब रिव्यू में हारा जागरण, 20जे की ढाल काम ना आई, कैटेगरी पर दिखाया आईना, लगाया जुर्माना

 साथियों, इलाहाबाद हाईकोर्ट से आज एक बड़ी खबर आई है। रिकवरी के मामले में सिंगल बेंच और डबल बेंच में हारने के बाद दैनिक जागरण ने सिंगल बेंच के ऑर्डर के खिलाफ रिव्यू पेटिशन डाली थी। जिसे माननीय अदालत ने मैरिट के आधार पर खारिज करके जागरण को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने 20 जे को ढाल बनाने वाली कंपनियों पर टिप्पणी की और साथ ही कैटेगरी के मुद्दे पर एक कदम और आगे जाते हुए रिक्वासिफिकेशन पर भी स्थिति साफ कर दी। 20जे और कंपनी की कैटेगरी/क्वासिफिकेशन में यह आदेश अन्य साथियों के लिए भी काफी काम का है। आज के रिव्यू और इससे पहले का आदेश सभी साथियों को अपने वकीलों को उपलब्ध करवा देना चाहिए।

'स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान' अवधेश प्रधान को

चित्तौड़गढ़। साहित्य संस्कृति के संस्थान संभावना द्वारा 'स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान' की घोषणा कर दी गई है। संभावना के अध्यक्ष डॉ के सी शर्मा ने बताया कि वर्ष 2023 के लिए 'स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान' बनारस निवासी प्रसिद्ध आलोचक अवधेश प्रधान को उनकी चर्चित कृति 'सीता की खोज' के लिए दिया जाएगा। डॉ शर्मा ने बताया कि प्रधान की यह कृति भारतीय साहित्य की सुदीर्घ परम्परा में सीता जैसे कालजयी चरित्र का विशद अध्ययन है जिसमें संस्कृत साहित्य से लगाकर लोक साहित्य तक व्याप्त सीता के चरित्र का सिंहावलोकन है। वाराणसी निवासी वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार प्रो काशीनाथ सिंह, भोपाल निवासी वरिष्ठ हिंदी कवि राजेश जोशी और जयपुर निवासी वरिष्ठ लेखक डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल की चयन समिति ने सर्व सम्मति से इस कृति को सम्मान के योग्य पाया। काशीनाथ सिंह ने वक्तव्य में कहा कि प्रो.अवधेश प्रधान आधुनिक,मध्यकालीन और पौराणिक साहित्य के गम्भीर अध्येता हैं। अनंत रामकथाओं में से सीता के उज्ज्वल चरित्र को खोज निकालना अनूठा कार्य है। उन्होंने कहा कि प्रधान जी की खोज से असहमत तो हुआ जा सकता है,उसे अनदेखा या उसकी उपेक्षा नही की जा सकती। इसके पीछे उनका गहन श्रम है और दृष्टि भी। राजेश जोशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि अवधेश प्रधान जैसे विद्वान मध्यकालीन और आदिकालीन भारतीय साहित्य का जिस तरह पुनरावलोकन करते हैंवह हम सबके लिए बहुत उपयोगी और ज्ञानवर्धक है। डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने अपनी अनुशंसा में कहा कि पांडित्य और गहन शोध के साथ प्रधान जी की सहज-सरल भाषा इस कृति को अविस्मरणीय बनाती है। उन्होंने कहा कि उनका अध्ययन काशी की ज्ञान परम्परा का नया सोपान है।

हिन्दी दिवस को अनुष्ठान के रूप में नहीं, उत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए

सप्रेम संस्थान द्वारा हिन्दी दिवस के अवसर पर कला लेखन में हिन्दी के महत्त्व पर विशेष टेलिफोनिक बातचीत ।
 
भूपेंद्र कुमार अस्थाना-

   लखनऊ, 14 सितम्बर 2023, हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं, बल्कि एक अभिव्यक्ति है। हिन्दी का व्यक्तित्व वर्णमाला में काफी विशाल है। हिन्दी में ही वह सामर्थ्य है कि संसार की किसी भी बोली और भाषा को ज्यों का त्यों लिखित रूप दे सकती है। अब बात आती है कला साहित्य में लेखन की तो साहित्य में तो बहुत हिन्दी लेखन हुआ और हो भी रहा है। लेकिन कला के क्षेत्र में ख़ास तौर पर दृश्यकला में इसका विशेष अभाव रहा है। अमूमन साहित्यकार, कवि इस विधा में जो भी लेखन किया है वही रहा है कलाकारों की अपेक्षा साहित्यकार का योगदान ज्यादा रहा है। हालांकि आज कुछ कलाकार कला समीक्षक इस विधा में भी लेखन कार्य कर रहे हैं लेकिन कम है। हिंदी में कला पर पुस्तकें भी कम हैं अंग्रेजी की अपेक्षा। हिन्दी हमें आमजन तक पहुंचाती है। इसीलिए हिन्दी कला लेखन और संवाद कला को आमजन तक पहुंचाने में एक सीमा तक सहायक रहा है। वहीं कला विद्यार्थीयों ,अध्येताओं आदि के लिए भी कला इतिहास और समकालीन कला पर हिन्दी पुस्तकें महत्वपूर्ण रहती हैं।कला विकास के लिए हिन्दी एक उपयोगी भाषा है। हाँ, इस पर और गंभीर स्तर पर काम होना शुभकारी रहेगा। आर्ट क्यूरेटर, कला लेखक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने कहा कि गुरुवार को हिन्दी दिवस के अवसर पर सप्रेम संस्थान और अस्थाना आर्ट फ़ोरम की तरफ से विषय - कला लेखन और आम आदमी तक कला पहुंचाने में हिंदी का महत्व और वर्तमान परिदृश्य में हिन्दी कला लेखन,समीक्षा में हिंदी का क्या महत्व है ? पर कुछ कलाकारों, कला लेखकों के विचार संग्रह करने की कोशिश की गयी। यह संग्रह टेलीफोनिक माध्यम से किया गया। जिसमें देश के अनेक हिंदी भाषा में लिखने वाले कला लेखकों, कलाकारों ने अपने विचार साझा किया।

हैपी हिन्दी दे

अरुण श्रीवास्तव-

सभी हिंदी भक्तों, हिन्दी प्रेमियों, हिन्दी आधारित कवियों और हिन्दी को राष्ट्र भाषा घोषित करने/कराने में दिन रात एक करने वालों को भी ... "हैपी हिन्दी डे" (आखिर इतना तो अधिकार उनका भी बनता है) हिन्दी के मास्साब इस बार क्षमा करेंगे .. उन्हें हाल ही (5 सितंबर शिक्षक दिवस पर) बधाई दी जा चुकी है। हालांकि यह बात अलग है कि अपने अंडर में शोध करने वाले छात्र का लिखा अपने नाम छपवाने वाले गुरुजी के नाम पर हम शिक्षक दिवस मनाते आ रहे हैं।

14.9.23

ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में भारत-अफ़्रीका संबंधों को लेकर दो दिनों परिचर्चा की शुरुआत

दिल्ली, 14 सितम्बर, 2023

भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुए जी 20 के आयोजन की उपलब्धियों और संदेशों को आम जन तक पहुँचाने के लिए दिल्ली विश्वविद्याल की कल्चरल काउंसिल ने अलग अलग कॉलेज़ों के साथ मिलकर कार्यक्रम करवाने का फ़ैसला किया। इसके तहत आज ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज(इवनिंग) में भारत-अफ़्रीका के संबंधों को लेकर दो दिनों की परिचर्चा की शुरुआत हुई। आयोजन की शुरुआत भारत की विदेश राज्यमंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने इस बात को रेखांकित किया कि जी 20 के इस आयोजन के दौरान अफ्रीकी देशों को आमंत्रित देश का दर्जा देना बहुत बड़ी शुरुआत है।

12.9.23

वामपंथी पार्टियों के पत्र के बाद बागेश्वर की जिलाधिकारी अनुराधा पाल के खिलाफ जांच के आदेश

राजकुमार सिंह परिहार-

वामपंथी नेताओं की शिकायत पर बागेश्वर की जिलाधिकारी अनुराधा पाल के खिलाफ जांच के आदेश। मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड, डॉ वी षणमुगम ने कुमाऊँ कमिश्नर को दिये जांच के आदेश।

11.9.23

जी-20 में आयीं फर्स्ट लेडी को बस्तर की महिलाओं की ओर से मिलेट का उपहार


फर्स्ट लेडी ने बस्तर की महिला किसानों के मिलेट से बने लड्डू का लिया स्वाद

महिलाओं ने बस्तर आने का दिया निमंत्रण

रायपुर। बस्तर का मिलेट विशेषकर रागी से बने लड्डू जी-20 में आये राष्ट्राध्यक्षों और उनकी पत्नी को काफ़ी भाया। अवसर था जी-20 देशों में भाग लेने वाले प्रमुखों की प्रथम महिलाओं और जीवनसाथियों को 9 सितंबर को पूसा रोड पर आईएआरआई परिसर में एक कृषि प्रदर्शनी के लिए विशेष निमंत्रण दिया गया।

सर मेरी बात मुख्यमंत्री योगी जी तक पहुंचा दो, देवरिया के अधिकारी सुन नहीं रहे हैं!

opl Srivastava-

देवरिया 11 सितंबर। सर मेरी बात मुख्यमंत्री योगी जी तक पहुंचा दो। जी हां यह बात एक पढ़ी-लिखी लेकिन मजबूर एवं विवश महिला की है क्योंकि उत्तर प्रदेश की देवरिया जिले में प्रशासनिक अधिकारी बे लगाम हो गए हैं उनको ना तो लखनऊ में बैठे वरिष्ठ उच्च अधिकारियों का डर है और ना ही योगी जी का।

Stop ED director from new enquiry, SC urged

National president of Azad Adhikar Sena Amitabh Thakur has sent a letter petition to the Chief Justice of India praying before him to immediately stop ED director Sanjay Mishra from initiating any new enquiry.

पर्युषण महापर्व 12 सितम्बर से प्रारम्भ, आठ दिन हरि सब्ज़ियों का करेंगे त्याग

जैन धर्म के प्रमुख महापर्व पर्युषण 12 सितम्बर से प्रारम्भ होंगें जो कि 19 सितम्बर को “संवत्सरी महापर्व” (क्षमापर्व) के दिवस के साथ पूर्ण होंगे। श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र ने बताया कि देश के विविध अंचलों चातुर्मासरत श्रमण - श्रमणियों के पावन सान्निध्य में जैन धर्मावलम्बि तप - त्याग - साधना - आराधना पूर्वक 8 दिवस इस महापर्व को मनाएगें। इन अष्ट दिवसों में जैन अनुयायियों के मुख्यतया पांच प्रमुख अंग हैं स्वाध्याय, उपवास, प्रतिक्रमण, क्षमायाचना और दान.

10.9.23

गीताश्री की किताब 'बलम कलकत्ता'

 संदीप तोमर-

पुस्तक का नाम: बलम कलकत्ता

लेखक: गीताश्री

प्रकाशन वर्ष: 2021

मूल्य : 201 रुपए

प्रकाशक: प्रलेक प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड 

बिहार के मुजफ्फरपुर में जन्मी गीताश्री एक प्रतिष्ठित पत्रकार हैं, जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ हिंदी पत्रकार (वर्ष 2008-2009) के लिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार भी जीता है। अब तक उनके दस कहानी संग्रह, पाँच उपन्यास, स्त्री-विमर्श पर चार शोध पुस्तकें प्रकाशित हैं, चोदह किताबों का सम्पादन-संयोजन भी उनके नाम दर्ज है। वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक 'भूत-खेला' एक चर्चित किताब रही है। अपनी इस पुस्तक के लिए उन्होंने बहुत सारे शोध किए। शिवना प्रकाशन से कथाकार गीताश्री के सम्पादन में रेखाचित्रों का एक महत्त्वपूर्ण संग्रह भी प्रकाशित हुआ था- ‘रेखाएँ बोलती हैं’। शहरगोई (संस्मरण) भी इसी वर्ष प्रकाशित रचना है।

बसपा अकेले के चक्कर में वोटकटुआ पार्टी बनकर न रह जाये

संजय सक्सेना, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट का नतीजा भारतीय जनता पार्टी से कहीं अधिक बहुजन समाज पार्टी के लिए  खतरे की घंटी नजर आ रहा है.घोसी में वोटिंग से चंद घंटे पहले बसपा सुप्रीमों मायावती ने जिस अलोकतात्रिक तरीके से अपने वोटरों से वोट नहीं देने या फिर नोटा का बटन दबाने का आहवान किया था उसे दलित वोटरों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया और समाजवादी पार्टी के पक्ष में खुलकर मतदान किया.यदि ऐसा न होता तो घोसी में समाजवादी पार्टी को इतनी बड़ी जीत कभी नहीं मिलती.समाजवादी पार्टी बसपा के दलित वोट बैंक को अपने में मिलने के लिए काफी समय से हाथ-पैर मार रही थी,उसका यह सपना काफी हद तक घोसी में पूरा हो गया.बसपा सुप्रीमों को यह समझना होगा कि एक बार दलित वोटर ने उनसे किनारा कर लिया तो दोबारा वापसी असंभव नहीं तो मुश्किल जरूरी हो सकती है.वैसे भी दलित वोटर अपने लिये नये सियासी ठिकाने की तलाश कर रहा था.इसकी सबसे बड़ी वजह है मायावती का राजनीति से मोहभंग होना.बसपा सुप्रीमों अब राजनीति में काफी कम समय देती हैं.पार्टी के पुराने नेताओं ने भी बसपासे दूरी बना ली है. घोसी  उपचुनाव के नतीजे ने बसपा के अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने के अरमानों को भी बड़ा झटका दिया है.अच्छा होता कि बसपा घोसी चुनाव से दूरी नहीं बनाती,इससे बसपा को कम से कम अपने वोट बैंक में बिखराव तो नहीं देखने को मिलता.मायावती का चुनाव नहीं लड़ने के फैसले पर इस लिए भी उंगली उठ रही है क्योंकि कुछ समय पूर्व आजमगढ़ लोकसभा उप-चुनाव में बसपा ने शानदार प्रदर्शन किया था,भले वह चुनाव नहीं जीत पाई थी,लेकिन दलितों के साथ-साथ मुस्लिम वोटरों ने भी उसके पक्ष में बड़ी तादात में मतदान किया था,जिसके चलते सपा तीसरे नंबर पर सिमट गई थी.अच्छा होता मायावती आजमगढ़ से निकले टेंªड को घोसी में भी अपना प्रत्याशी उतार कर पार्टी के लिए दलित-मुस्लिम वोट बैंक की संभावनाएं बरकरार रखती,लेकिन बसपा की गैरमौजूदगी में हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित सपा की जीत से अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में पिछड़ो-दलितों और अल्पसंख्यकों(पीडीए) का समाजवादी पार्टी या आइएनडीआइए की तरफ झुकाव बढ़ने के प्रबल आसार हैं.

इण्डिया बनाम भारत विवादः बात निकली है तो जायेगी दूर तलक

केपी सिंह-

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने चिर परिचित स्वभाव के अनुरूप फिर एक नये विवाद को छेड़ डाला है। अभी तक उन्हें इण्डिया शब्द बहुत प्रिय लगा करता था। उन्हें लगता था कि भारत की बजाय इण्डिया कहने में ज्यादा स्मार्ट बोध है। इण्डिया से उनके नारों में टंकार भी अच्छी बन जाती थी। विपक्ष द्वारा अपने गठबंधन का नाम इण्डिया करने के पहले उन्हें रोज इण्डिया नाम जुड़े स्लोगन को गढ़ने की लत सी लगी हुयी थी। मेक इन इण्डिया, जीतेगा इण्डिया और न जाने कितने स्लोगन की फेहरिस्त है जो मोदी ने बड़े उमंग से गढ़े थे। लेकिन अब उन्हें इण्डिया से एलर्जी हो गयी है। हर जगह अंग्रेजी में भी लिखा जा रहा है तो इण्डिया की बजाय भारत जबकि यह अभी तक रहे रिवाज के विपरीत है। अन्य देशों ने भी मोदी की मर्जी देखते हुये इसका अनुकरण शुरू कर दिया है। विपक्ष पूंछ रहा है कि क्या कल को वे अपने गठबंधन का नामकरण इस तरह कर लें कि उसका संक्षिप्त नाम भारत हो जाये तो मोदी भारत नाम को भी बदल डालेंगे। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस मामले में बीजेपी की बड़ी प्यारी चुटकी ले डाली है।

बुनियादी चिंताओं का प्रतिनिधित्व करती है नंद बाबू की रचनाएं : प्रोफेसर हाड़ा

उदयपुर में नन्द चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी पर आयोजन

उदयपुर ।  प्रसिद्ध समाजवादी कवि और साहित्यकार नंद चतुर्वेदी की रचनाएं मूलतः समाज के उन सभी पक्षों का प्रतिनिधित्व करती है, जो आधुनिक समाज में परिलक्षित हो रही है. इन रचनाओं में  जहां एक ओर स्त्री के प्रति चिंता है तो दूसरी ओर समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति संवेदनशीलता, राजनीति और आधुनिकता पर कटाक्ष है तो मानवतावादी चिंतन का  प्रतिनिधित्व भी. उक्त विचार राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर और विद्या भवन रूरल इंस्टीट्यूट के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वाधान में  आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी  “नंद चतुर्वेदी : साहित्यिक मंथन” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रख्यात समीक्षक प्रोफेसर   माधव हाडा ने व्यक्त किए.

पुस्तक समीक्षा - राजेन्द्र अवस्थी की कविताएँ

 डॉ- शिवशंकर अवस्थी
महासचिव, ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

मेरे पिताजी डॉ- राजेन्द्र अवस्थी ने अपनी साहित्यिक यात्र का प्रारम्भ एक कवि के रूप में किया था। ये जबलपुर तथा नागपुर के उनके युवा दिन थे। कवि सम्मेलनों में भाग लेना उनकी आदत में शुमार था। नागपुर में वे दैनिक नवभारत में साहित्य संपादक और नागपुर साहित्य सम्मेलन के मंत्री थे तथा कवि सम्मेलनों के संयोजन-संचालन में पारंगत थे। तब वे राजेन्द्र प्रसाद अवस्थी ‘तृषित’ के नाम से लिऽा करते थे। समय बीतता गया और वे राजेन्द्र प्रसाद अवस्थी तृषित से मात्र राजेन्द्र अवस्थी रह गए। यह परिवर्तन अथवा रूपांतरण उनकी गांव और शहर और फिर शहर से महानगर की यात्र का भी संकेतक है। हमारा परिवार नागपुर से बम्बई गया और फिर दिल्ली आकर हम यहां बस गए। पिताजी ने फिर मुड़कर नहीं देऽा। बहुत कम ही ऐसा अवसर आया कि वे नागपुर या जबलपुर गए। शहर से महानगर की उनकी यात्र-प्रक्रिया का प्रभाव उनकी रचनात्मक दृष्टि पर भी पड़ा, पद्य छूटता गया और गद्य उनकी प्राथमिकता हो गया। लेकिन गद्य में भी काव्य की कमनीयता बनी रही। उनका कवि हृदय कभी सुप्त नहीं हुआ, वह जीवंत रहा, वे लिऽते रहे। 

दल बदलू नेता बनने से नहीं चलेगा काम

Aman Pandey-

बीते 5 सितंबर को 6 राज्यों के 7 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए। नतीजतन 8 सितंबर की शाम होते-होते उपचुनाव के नतीजे भी डिक्लीयर हो गए। 7 सीटों में से 3 बीजेपी जबकि 4 सीटों पर विपक्ष पार्टियों की झोली में गए। सबसे ज्यादा जिस सीट को मीडिया ने तवज्जो दी वो है उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट। सपा के सुधाकर सिंह ने बीजेपी के दारा सिंह चौहान को 40 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हराया। लेकिन घोसी की हार को समझना भी अत्यन्त जरूरी।


 

9.9.23

छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीदी का रिकॉर्ड बनाया, इस साल 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की आशा : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल


अच्छी बारिश हो रही, उत्पादन भी अच्छा होने की उम्मीद : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 23.93 करोड़ रूपए का किया भुगतान

गोबर विक्रेताओं को 5.36 करोड़, स्व-सहायता समूहों एवं गौठान समितियों को 2.77 करोड़ रूपए का भुगतान

स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के रूप में 13.55 करोड़ रूपए का भुगतान

रायपुर, 09 सितम्बर 2023/मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से गोधन न्याय योजना के अंतर्गत ऑनलाईन राशि वितरण कार्यक्रम में हितग्राहियों के बैंक खातों में 23 करोड़ 93 लाख रूपए अंतरित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल बारिश अच्छी हो रही है और उत्पादन भी अच्छा होने की उम्मीद है। हमारी सरकार हर साल धान खरीदी का रिकॉर्ड बनाया है। इस साल हमें आशा है कि 125 लाख मीट्रिक धान खरीदी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस बार भी छत्तीसगढ़ से चावल खरीदी का कोटा घटा दिया है, हमारे बारदाने का कोटा भी कम कर दिया है। मैंने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आग्रह किया है।

हीरक जयंती पर रायपुर मेडिकल कॉलेज को मिला उपहार, मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने मेडिकल कॉलेज के 700 बिस्तर क्षमता वाले नए चिकित्सालय भवन का किया भूमिपूजन

मुख्यमंत्री ने हीरक जंयती समारोह का किया शुभारंभ

छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य मशीनरी हर संकट से निपटने के लिए तैयार – श्री भूपेश बघेल

रायपुर मेडिकल कॉलेज में जीनोम सिक्वेन्सिंग लैब शुरू होगा



रायपुर. 9 सितम्बर 2023. मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज रायपुर के पंडित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय में 700 बिस्तर क्षमता वाले नए एकीकृत चिकित्सालय भवन का भूमिपूजन किया। चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के लिए 322 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक सर्वसुविधायुक्त चिकित्सालय भवन का निर्माण शीघ्र प्रारंभ होगा। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में महाविद्यालय के हीरक जयंती समारोह का शुभारंभ भी किया। आज से ठीक 60 साल पहले 9 सितम्बर 1963 को रायपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई थी। उप मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव, संसदीय सचिव श्री विकास उपाध्याय, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. प्रीतम राम, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री कुलदीप जुनेजा, विधायक श्री सत्यनारायण शर्मा, महापौर श्री एजाज ढेबर, रायपुर नगर निगम के सभापति श्री प्रमोद शर्मा और रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती डोमेश्वरी वर्मा दोनों कार्यक्रमों में शामिल हुईं।

8.9.23

पुस्तक समीक्षा - पांव ज़मीन परः लोक जीवन की लय का स्पंदन

मोहन सपरा-

कवि-कथकॎार-आलोचक शैलेन्द्र चौहान का संस्मरणात्मक उपन्यास उर्फ़ कथा रिपोर्ताज ‘पांव ज़मीन पर’ बोधि प्रकाशन जयपुर से प्रकाशित हुआ है। लोक जीवन की लय को स्पंदित और अभिव्यक्त करती शैलेन्द्र चौहान की कथा रिपोर्ताज ‘पांव जमीन पर’ एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति है। कवि कथाकार शैलेन्द्र का लेखन एक सचेत सामाजिक कर्म है। उनका चिन्तन प्रतिबद्धता का चिन्तन है। वह जन प्रतिबद्ध लेखक हैं। विवेच्य किताब में शैलेन्द्र चौहान ने भारतीय ग्राम्य जीवन की जो बहुरंगी तस्वीर उकेरी है उसमें एक गहरी ईमानदारी है और अनुभूति की आंच पर पकी संवेदनशीलता है। ग्राम्य जीवन के जीवट, सुख-दु:ख, हास-परिहास, वैमनस्य, खान-पान, बोली-बानी, रहन-सहन आदि को बहुत जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है। यह सब मिलकर पाठक के समक्ष सजीव चित्र की सृष्टि करते हैं और चाक्षुष आनंद देते हैं। लोक जीवन का उत्सव इनमें कदम-कदम पर झलकता है।

मौत ऐसे करती है पीछा... बरसात से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े हुए तो आकाशीय बिजली ने किया अंत, देखें तस्वीरें

DINESH KUMAR Jaiswal-
    
अयोध्या। इनायत नगर थाना क्षेत्र स्थित सिद्धनाथन मंदिर के पास बाइक से अपने घर वापस लौट रहे दो किशोरों की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई है। घटना की जानकारी पाकर मौके पर पहुंची इनायतनगर पुलिस ने दोनों किशोर का शव कब्जे में लेकर पंचायत नामा कराने के उपरांत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद दोनों किशोर के परिजनों में कोहराम मच गया है। 



 

6.9.23

नवभारत टाइम्स द्वारा भास्कर की 2 दिन पुरानी खबर चोरी

महोदय, कृपया संलग्न 2 स्क्रीनशॉट का अवलोकन करने का कष्ट करें । नवभारत टाइम्स के NBT app पर आज सौरभ दीक्षित के नाम से सबसे ऊपर बैनर पर एक खबर लगाई गई है जो रविवार को दैनिक भास्कर के App, डिजिटल एडिशन और समाचार पत्र में प्रकाशित हो चुकी है। दैनिक भास्कर में 2 दिन पहले ये खबर नीरज झा के नाम से प्रकाशित है। 

यूपी की करीब एक दर्जन सीटों ने बढ़ा रखी है बीजेपी की टेंशन

स्वदेश कुमार-

भारतीय जनता पार्टी के नेता भले ही सार्वजनिक रूप से अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर जीत का दावा कर रहे हों, लेकिन अंदर खाने की खबर यही है कि फिलहाल बीजेपी आलाकमान 68-70 सीटों से आगे जीत का अनुमान नहीं लगा पा रहा है.बीजेपी मुस्लिम बाहुल्य कुछ सीटों पर हमेशा से कमजोर रही है तो कई मौजूदा सांसद जनता के बीच अपनी खराब छवि के चलते पार्टी के लिए बोझ बन गए हैं.अब आलाकमान को यह तय करना है कि ऐसे सांसदों का क्या किए जाये जो इस बार बीजेपी के लिए जीत की गारंटी नहीं रह गए हैं.यह सब बातें बीजेपी के आंतरिक सर्वे में भी समाने आ चुकी हैं.इसी लिए पार्टी ने कुछ लोकसभा सीटों के प्रत्याशी बदलने का भी मन बना लिया है. सूत्र बताते हैंे कि पार्टी के आंतरिक सर्वे में करीब 16 सीटें ऐसी मिली हैं, जहां पर पार्टी की स्थिति अत्यंत कमजोर है। इन सीटों पर जीत के लिए पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है,लेकिन अच्छी बात यह कि इन सीटों पर भी बीजेपी हार की संभावना के बीच भी लड़ती हुई नजर आयेगी. पार्टी के भीतर कुछ सांसदो का टिकट काटे जाने की चर्चा शुरू होते ही उन सांसदों ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक में बैठे अपने आकाओं के यहां दौड़ लगाना शुरू कर दिया है,जिनकी टिकट बंटवारे में अहम भूमिका रहती है.लेकिन बीजेपी आलाकमान इन सब बातों को अनदेखा करते हुए मिशन 80 पूरा करने में लगा है.