भड़ास blog

अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...

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11.12.09

कुछ अपने मन की

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वो महफ़िल में आये, और दिल-ए-महफ़िल को चुरा ले गए.. आलम ऐसा हुआ इस महफ़िल का, हम पानी को शराब समझकर पी गए... हम निकले थे ज़माने को अपना बना...
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9.4.09

डायरेक्ट दिल-से

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मेरा दिल है तू, ज़िगर भी तू...तू ही ज़िंदगी की सुबो-शाम है तू यकीं जो कर तो कहूं ये मैं, मेरे लब पे तेरा ही नाम है ------- वो जानते हैं नहीं...
1 comment:
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