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10.6.21

उत्तर प्रदेश भाजपा में अंदरूनी अदावत का खुला एक और मोर्चा

Krishan pal Singh-
    
उत्तर प्रदेश में भाजपा से जुड़ी सनसनी का अंत अभी भी नहीं हुआ है। अपने खिलाफ उबरे सभी अनिष्ट ग्रहों को शांत कर लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंत फला सो सब भला की तर्ज पर टाइम्स आफ इंडिया को दिये इंटरव्यू में एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के प्रति वफादारी की कसमें खायी जिससे लगा कि उनकी दूरियां अब पट जायेगी लेकिन लगता है कि भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने अभी उन्हें शह देने के खेल को विराम नहीं दिया है। कांग्रेस के दिग्गज युवा नेता जितिन प्रसाद को अचानक भाजपा में शामिल कर लिया गया। प्रकट तौर पर तो इसे कांग्रेस की रही सही नीव भी धसका देने का उपक्रम घोषित किया जा रहा है लेकिन सयाने यह कह रहे हैं कि इसके निहितार्थ कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना के बतौर समझे जाने चाहिए।

'मौत की प्रयोगशाला' बनकर रह गया कोरोना का इलाज

charan singh rajput-

आगरा पारस अस्पताल में कोराना के गंभीर मरीजों को मारने के लिए जो माकड्रिल किया गया उससे स्पष्ट हो चुका है कि कोरोना महामारी को डॉक्टरों ने एक प्रयोगशाला के रूप में लिया। कोरोना मरीजों के साथ लगातार प्रयोग किये गये। जगजाहिर है कि मॉकड्रिल किसी आने वाले संकट से निपटने के लिए किया जाता है। पारस अस्पताल में तो मरीजों क जान लेने के लिए यह मॉकड्रिल किया गया मतलब संकट को और बढ़ाने के लिए। मोदी सरकार और भाजपा शासित प्रदेश सरकारों ने अपने भोंपू मीडिया के माध्यम से देश में ऐसा माहौल बना दिया है कि  इन राज में आंख, कान, दिमाग सब बंद रखो। बस जो बोला जाए उसको सुनो और उस पर अमल करो। यही वजह है कि पढ़े लिखे समाज में जो पेशा विज्ञान की देन है उस पेशे से जुड़ा डॉक्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में यह कहते हुए सुनाई पड़ रहा है कि 'दिमाग मत लगाओ और मॉकड्रिल कर दो। इससे हम समझ जाएगा कि कौन मरेगा और कौन नहीं। जिस मरीज को आक्सीजन की जरूरत पड़ी उसके लिए पांच मिनट आक्सीजन रोकने का मतलब पांच मिनट सांस रोकना है। वह भी तब जब मरीज को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो री हो। मतलब गंभीर मरीजों की हत्या कर देना। जिस अस्पताल में मरीज जिंदगी मांगने गया उस अस्पताल ने उसे मौत दे दी। मॉकड्रिल के इस खेल में जिन 22 मरीजों ने छटपटाते हुए दम तोड़ा है। इनकी हत्या का जिम्मेदार न केवल अस्पताल प्रबंधन और उसके डॉक्टर हैं पर बल्कि शासन और प्रशासन भी है। आखिर एक निजी अस्पताल ने मरीजों की जान लेने का इतना बड़ा दुस्साहस कर लिया ?

आज की राजनीति के भस्मासुर बनते जा रहे हैं मोदी!

CHARAN SINGH RAJPUT-

अपनी अति महत्वाकांक्षा और जनता को धोखे में रखने की गलतफहमी पाले बैठे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश का तो बंटाधार कर ही दिया अब भाजपा के लिए भी भस्मासुर बनने जा रहे हैं। अपने सात साल के कार्यकाल में मोदी ने जो चाहा वह किया। मोदी ने औपचारिकता के लिए सलाह-मशविरा के लिए बैठकें जरूर की पर उनका हर निर्णय उनका अपना ही रहा। चाहे नोटबंदी, रही हो, जीएसटी रही हो, धारा 370 का हटाना हो, राम मंदिर निर्माण के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट से फैसला दिलवाना हो, कोराना काल में वैक्सीन का विदेश भिजवाना हो सब मोदी के मनमानी के निर्णय रहे हैं। केंद्र सरकार या फिर भाजपा के संगठन में उन्होंने जो चाहा वह किया। भाजपा पर एकछत्र राज करने वाले नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को साइड लाइन करने के लिए अब भाजपा के मातृ संगठन आरएसएस से पंगा ले लिया है, जो उन्हें भारी पडऩे वाला है। यह भी जमीनी हकीकत है कि नरेंद्र मोदी अपने स्वभाव के अनुकूल इतनी जल्दी हार नही मानने वाले हैं। ऐसे में आरएसएस और नरेंद्र मोदी की टीम का टकराव योगी आदित्यनाथ को मजबूती देगा या फिर भाजपा को पतन की ओर ले जाएगा ? वैसे भी भाजपा के समर्थक योगी आदित्यनाथ को मोदी का विकल्प मानने लगे हैं।

8.6.21

संघी नेतृत्व में भारत को आज फिर से गुलामी के दिनों की तरफ ढकेला जा रहा है!

Shyam Singh Rawat-

सन् 1857 की क्रांति आज भी प्रासंगिक है!

ब्रिटिश शासन काल में भारत की जैसी दुर्दशा बना दी गई थी, कमोवेश संघी नेतृत्व में आज भारत को बड़ी चतुराई से उसी राह पर धकेला जा रहा है। इसे एक ओर 1943-44 में संघी श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा बंगाल में खाद्यान्न का कृत्रिम अभाव पैदा कर उसे विदेश भेजने और उसके कारण वहां 30 लाख लोगों को भूख से तड़पते हुए जान गँवाने पर मजबूर कर देने की ऐतिहासिक घटना के संदर्भ में व्याख्यायित किया जा सकता है, तो दूसरी तरफ सरकारी आतंक के जरिए लोगों की आवाज दबाने की वर्तमान कुत्सित मानसिकता के माध्यम से सरलतापूर्वक समझा जा सकता है।  

अपने हठयोग में सफल रहे योगी!


कृष्णमोहन झा-

पश्चिम बंगाल  चुनावों में सत्ता हासिल करने का सुनहरा स्वप्न बिखर जाने के बाद भारतीय  जनता पार्टी ने अब अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए  अभी से कवायद शुरू कर दी है। यद्यपि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अभी आठ माह का समय बाकी है परंतु भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को अभी से यह चिंता सताने लगी है कि  राज्य की योगी सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज़  मंत्रियों और पार्टी विधायकों की अभी से मान मनौव्वल नहीं की गई तो आठ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में  उसे  2017 की  शानदार जीत का इतिहास दोहराने में मुश्किलों का सामना कर पड़ सकता है।  गत विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ दो दशकों के बाद राज्य की   सत्ता हासिल करने वाली भाजपा का अभी से चुनाव की तैयारियों में जुट जाना यही संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता और संगठन के अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है।

7.6.21

अचीवर्स जंक्शन पर मनाया गया डॉ. प्रणयी जन्मशती समारोह

दुनिया के तमाम देशों के विभिन्न क्षेत्र में उपलब्धि प्राप्त करने वाली शख्सियत पर कार्यक्रम करने वाले चैनल अचीवर्स जंक्शन ने आज दिनांक 05 जून, 2021 को संस्कृत, प्राकृत, हिंदी और भोजपुरी के निष्णात आचार्य, कवि - लेखक, शिक्षाविद् , ' पिया के गाँव ' जैसी सुपर हिट फिल्म के गीतकार स्व. ( डॉ. ) रामनाथ पाठक  ' प्रणयी ' का जन्मशती समारोह मनाया। इस कार्यक्रम में देश के कोने-कोने के साहित्यकारों, फिल्मकारों, कलाकारों और डॉ. प्रणयी के परिजनों ने  भाग लिया।  चैनल के निदेशक मनोज भावुक ( दिल्ली ) के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. ब्रज भूषण मिश्र ने डॉ. प्रणयी के व्यक्तित्व-कृतित्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि हिंदी-संस्कृत, भोजपुरी और पॉली भाषा में डॉ. प्रणयी की दो दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हैं। फिल्म समीक्षक मनोज भावुक ने उनके भोजपुरी फिल्मी दुनिया से जुड़ाव के बारे में बताया। भावुक ने बताया कि  ‘’ आँख से आँख मिलिके जे चार हो गइल, साँच मानऽ जिनिगिया हमार हो गइल ‘’, …‘ पहिले पहिल हम अइलीं गवनवाँ, देखली डीजल गाड़ी हो दिलवर जानी’ या ‘ जुग-जुग जीयसु ललनवाँ’ भवनवाँ के भाग जागल हो, ललना लाल होइहें कुलवा के दीपक मनवाँ में आस लागल हो’ और ए डाक्टर बाबू बताईं दवाईं... ये सारे गीत  सबने सुने हैं. लेकिन इन गीतों के गीतकार डॉ. प्रणयी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। 1985 की सुपर हिट भोजपुरी फिल्म ‘ पिया के गाँव’ के इन गीतों को संगीत दिया था चित्रगुप्त जी ने. प्रणयी जी ने फिल्म पिया निरमोहिया का भी टाइटल सांग लिखा था.

कोरोना काल में भी नहीं सुधर रहे अस्पतालों के संचालनकर्ता, वसूल रहे मनमानी फीस

देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर्स द्वारा दिया गया योगदान सराहनीय है. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बेहतरीन तालमेल के चलते देश ने काफी हद तक इस महामारी पर काबू पा लिया है. बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात के संस्करण में भी डॉक्टरों की उपलब्धि पर बात की गई. इस दौरान पीएम मोदी ने डॉक्टरों, नर्सों, मेडिकल स्टाफ के कार्यों की न सिर्फ तारीफ़ की, बल्कि उनके कार्यों को भी सराहा।

4.6.21

विपक्ष के तीखे तेवरों को ‘कुंद’ करने के लिए बीजेपी की आक्रमक नीति

स्वदेश कुमार,लखनऊ

     लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश की सत्ता में पुनः वापसी के लिए ‘मिशन-2022’ पर काम शुरू कर दिया है। एक तरह से अगले वर्ष होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए केन्द्र ने कमान अपने हाथों में ले ली है। आलाकमान के  के कई बड़े नेता यूपी आकर संगठन और सरकार की ऊपर से नीचे तक नब्ज टटोल रहे हैं, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि नब्ज टटोलते समय सरकार या संगठन की कोई कमजोरी विरोधियों के हाथ नहीं लग जाए। जिससे जनता के बीच योगी सरकार को लेकर किसी तरह का गलत मैसेज जाए। इसी को ध्यान में रखकर बीजेपी आलाकमान संभवता योगी सरकार की कैबिनेट  में कोई बड़ा फेरबदल नहीं करेगी ? लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि सत्ता विरोधी लहर को थामने के लिए आलाकमान द्वारा कुछ किया ही नहीं जाएगा। आलाकमान ने जो रणनीति बनाई है उसके अनुसार विरोधी दलों के नेता जितनी तेजी से योगी सरकार के खिलाफ हमलावर होंगे उसकी दुगनी तेजी से उन्हें पार्टी और सरकारी स्तर से जबाव दिया जाएगा, मगर मर्यादा का भी ध्यान रखा जाएगा। विरोधियों के आरोपों को तर्कपूर्ण तरीके से ‘काटा’ जाएगा।

डाक्टर बनाओ ड्राकुला नहीं... मंजूर करो इस्तीफे

anand purohit-
    

मानवता और मानव धर्म को बचाओ, मंजूर करो इस्तीफें।.......
डाक्टर बनाओ ड्राकूला नहीं......

खबर ये है कि इंदौर के लगभग 480 डॉक्टर सहित प्रदेश के सभी जूनियर डॉक्टर्स ने सामूहिक इस्तीफा सौंपा..... *गर सरकार में गैरत है तो ऐसे बेगैरत और गैरजिम्मेदारों का इस्तीफा तुंरत मंजूर कर लेना चाहिए यही नहीं इनसे वसूली की जानी चाहिए जो इनकी इस उच्च व्यावसायिक शिक्षा पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी व्यय हुआ है......

30.5.21

मोदी जी, पुरानी पेंशन बहाल करें, फ्रीज किए गए महंगाई भत्ते को रिलीज करें!

लखनऊ 30 मई : राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष जे एन तिवारी ने देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी को उनके आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक पत्र प्रेषित करते हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए उन सुविधाओं को बहाल करने की मांग किया है, जिसका सीधा असर उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों पर पड़ रहा है।

स्वामी, बाबा या सुपर प्राइम मिनिस्टर



स्वामी रामदेव कहें या बाबा रामदेव, पर है तो वह एक कारोबारी आदमी ही और एक कारोबारी भला हमारे देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को टर-टर कैसे कह सकता है? जबकि ठीक एक दिन पहले वे उन्हीं के पत्र के जवाब में खुद पत्र लिखकर डॉक्टर्स के लिए कहे गए अपने अपशब्दों के लिए माफी मांग चुका होता है। है ना अजीब!

‘अगेंस्ट द वेरी आइडिया ऑफ़ जस्टिस: यू.ए.पी.ए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़’ पुस्तिका का विमोचन

रांची  : मूवमेंट अगेंस्ट यु.ए.पी.ए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़ (एम.यु.आर.एल.) – राष्ट्रिय स्तर पर विभिन्न मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संस्थाओं का साझा मंच के तहत झारखण्ड में पुस्तिका ‘अगेंस्ट द वेरी आइडिया ऑफ़ जस्टिस: यु.ए.पी.ए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़’ का विमोचन हुआ.

भारत की अखंडता-संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा है विदेशी सोशल मीडिया

संजय सक्सेना, लखनऊ   

विदेशी सोशल कम्पनी ’द्विटर’ और वाटसएप का कुछ वर्ष पूर्व ठीक वैसे ही हिन्दुस्तान में पर्दापण हुआ था, जैसे कभी ‘ईस्ट इंडिया कम्पनी’ के नाम पर अंगे्रज व्यापार करने के लिए भारत में पधारे थे।ईस्ट इंडिया कंपनी सन 1600 में बनाई गई थी। उस समय ब्रिटेन की महारानी थीं एलिजाबेथ प्रथम थीं, जिन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी को एशिया में कारोबार करने की खुली छूट दी थी,बात एशिया में कारोबार की होती जरूर थी,लेकिन कम्पनी की नजर सिर्फ और सिर्फ हिन्दुस्तान पर टिकी हुई थी। कम्पनी के पीछे के इरादों को कोई भांप नहीं पाया था। इसी के चलते यह कंपनी कारोबार करते-करते ही भारत में सरकार बनाने की साजिश तक में कामयाब हो गई। उसकी इस साजिश को अमलीजामा पहनाने वालों में  कुछ हिन्दुस्तानियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा था।

आज उदंत मार्तण्ड की कमी खलने लगी है

वह 30 मई का ही दिन था, जब भारत में एक क्रांतिकारी युग का उदय हुआ था। एक ऐसा क्रांतिकारी युग, जो खुद अपनी बेबाक दुनिया रचने जा रहा था। जिसकी चाह न सिर्फ स्वधीनता की प्राप्ति थी, बल्कि देश के क्रांतिकारियों, नौंजवानो, लेखकों और कलमकारों को अपनी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी देना था। देश में कई अंग्रेजी अखबार अपनी पैठ बना चुके थे। उनमें भारतीयों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का कोई स्थान नहीं था। उस समय हिंदी भाषी भारतीयों के पास ऐसा सशक्त माध्यम नहीं था, जिन्हे वह अपना कह सके, जिसके माध्यम से अपनी बात तानाशाही अंग्रेजी हुकुमत तक पहुंचा सके।

कुमार विश्वास के कोविड केयर केन्द्र पर पहुँची स्थानीय विधायक, कुमार के कार्यालय ने दी शीत-निद्रा टूटने पर शुभकामनाएँ




 
मशहूर कवि कुमार विश्वास का कोविड केयर सेंटर अब जनप्रतिनिधियों के लिये भी प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है। कुमार की इस का अनुकरण अब कई राजनीतिक लोग भी बखूबी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में कुमार विश्वास द्वारा अम्बेडकर नगर जनपद के शुकुलबाजार गॉंव में शुरू कराए गए कोविड केयर सेंटर पर शनिवार को स्थानीय विधायक भी पहुँची। उन्होंने वहॉं पहुँच कर ज़रूरतमंदों के बीच कुमार विश्वास द्वारा भिजवाए गए कोविड केयर किट का वितरण भी किया।

कुमार विश्वास ने एक ही दिन में खुलवाया कई गाँवों के लिए कोविड केयर सेंटर

प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने इन दिनों गॉंवों को कोरोना मुक्त बनाने की एक मुहिम छेड़ रखी है। गॉंव बचाओ के नाम से चल रहे अपने अभियान में कुमार अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में बसे सैकड़ों गॉंवों की मदद कर चुके हैं। गॉंव वासियों द्वारा अनुरोध मिलने पर कुमार की टीम द्वारा वहॉं कोविड केयर सेंटर खुलवाए जा रहे हैं तथा ग्रामीणों के बीच कोरोना केयर किट के ज़रिए सभी आवश्यक दवाएँ पहुँचाई जा रही हैं। बिहार के लोगों की ट्विट का रिप्लाई करते हुए कुमार ने कई गॉंवों के लिए कोविड केयर सेंटर की व्यवस्था करा दी है। अररिया से प्रभात यादव ने कुमार से कोविड केयर सेंटर खोलने का अनुरोध करते हुए ट्विटर पर लिखा-

23.5.21

जनता मूर्ख बन रही है और मोदी बना रहे हैं!

CHARAN SINGH RAJPUT-

वैसे तो हर सरकार ने किसी न किसी रूप में जनता को ठगा ही है पर मोदी सरकार ने ऐसा बेवकूफ बनाया कि कहीं न छोड़ा। उनको भी जिनके बलबूते पर सत्ता का मजा लूटते रहे। क्या रोजी-रोटी स्वयंभू हिन्दुओं की नहीं गई है ? क्या कोरोना कहर से ये लोग अछूते रह गये हैं ? क्या आज के हालात में इन लोगों के बच्चों का भी भविष्य और जान खतरे में नहीं है ? जमीनी हकीकत तो यह है कि हिन्दुत्व का राग अलापने वाली मोदी सरकार ने सबसे अधिक हिन्दुओं की भावनाओं से ही खिलवाड़ किया है।  ये जो नदियों में शव बह रहे हैं किन लोगों के हैं ? ये जो शवों के आसपास कपड़े दिखाई दे रहे है किस धर्म के लोगों के हैं ?

जरूरतमंद परिवारों को मदद से निगम ने किया इंकार तो माकपा ने बनाया अनाज बैंक

माकपा पार्षदों ने दिया अपना वेतन, तो रेड वालंटियर्स ने संभाला मोर्चा, पहुंचाया राशन

कोरबा। लॉक डाऊन के कारण बांकी मोंगरा क्षेत्र में पसरती भुखमरी से लड़ने के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने अनाज बैंक की स्थापना की है। इस अनाज बैंक से आज इस क्षेत्र के मोंगरा बस्ती, मड़वाढ़ोढा तथा गंगानगर में लगभग 50 गरीब परिवारों को राशन किट वितरित किया गया। इस किट में चावल, दाल, तेल, नमक, चाय और शक्कर के साथ ही प्याज, मसाले और हरी सब्जियां भी हैं। प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को न्यूनतम एक सप्ताह का राशन देने का लक्ष्य रखा गया है।

22.5.21

कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के!



कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के : निगम कंगाल, तो माकपा पार्षद ने की व्यवस्था, कहा- माकपा कार्यकर्ता महापौर के साथ मिलकर चंदा इकट्ठा करने के लिए तैयार

कोरबा। कोरोना महामारी की इस दूसरी भयानक लहर में भी कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के काम कर रहे हैं। कोरबा निगम क्षेत्र के अंतर्गत सैकड़ों मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को घर-घर जाकर कोरोना पीड़ितों का सर्वे करने और कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता फैलाने का काम दिया गया है, लेकिन ये 'कोरोना योद्धा' बिना किसी सुरक्षा किट के मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर यह काम कर रहे हैं।

18.5.21

मजबूर पिता ने बेटी की लाश को कंधे पर लादा और बेटे के साथ श्मशान घाट निकल पड़ा, देखें वीडियो

Rizwan Chanchal-

एक बार फिर मानवीय संवेदना को तार तार करता वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जो नंगे होते समाज पर प्रश्न चिन्ह छोड़ गया। कंधे पर बेटी का शव उठाये सड़क पर चलते इस बाप के दर्द से न तो पत्थर दिल होते समाज के उन तमाम आते जाते राहगीरों वाहन सवारों में किसी  एक का दिल पसीजा और न ही कोई प्रसाशनिक सहायता दी गई।