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4.4.20

क्या कोरोना के उपचार की कोई जड़ी बूटी जंगलों में होगी?


वैज्ञानिक, तकनीकी क्रांति के बूम की बजाय इससे पहले का युग आज होता तो कोरोना महामारी रोकने के लिए लोग प्रयोगशाला में वैक्सीन विकसित होने की प्रतीक्षा करने की बजाय देहाती वैद्य के पास पहुंचते जो उनके विश्वास के मुताबिक जंगल जाकर एक वनस्पति उखाड़ लाता जिसमें इस बीमारी का सहज निदान छुपा होता।

31.3.20

वनवास हुआ लॉकडाउन का एकांतवास ....

कोरोना के  खौफ पर खांटी  खड़गपुरिया की एक और  ....
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वनवास हुआ लॉकडाउन का  एकांतवास  ....
तारकेश कुमार ओझा
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वनवास हुआ लॉकडाउन
का  एकांतवास
खलने लगी जबरदस्ती की आराम तलबी 
तड़पाने  लगी वो स्थगित जिंदगी  ,
फिर लौटे मैदानों में  खेल
पटरियों पर दौड़े धड़धड़ाती रेल  ,
समझ आने लगी उन पलों की  अहमियत
दोस्तों संग एक कुल्हड़ चाय की कीमत ,
भागे मनहूसियत , मिटे  विधि का  लेखा
लौटे रौनक , सजे दुनिया का  मेला
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लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ट पत्रकार हैं। संपर्कः 9434453934, 9635221463

28.3.20

कोरोना के चलते यूपी हुआ अपराध मुक्त


अजय कुमार,लखनऊ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकार किसी भी दल की रही हो,लेकिन सबके सामने कानून व्यवस्था हमेशा एक जैसी बड़ी चुनौती बनी रही। समाजवादी सरकारों का तो इस मामले में टैªक रिकार्ड काफी खराब रहा ही,योगी जैसे सख्त सीएम भी उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त नहीं कर पाए,जबकि अखिलेश राज में जंगलराज का नारा देकर ही भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में अपनी सरकार बनाई थी। हाॅ कोरोना वायरस आने के बाद जरूर योगी सरकार को इससे राहत मिल गई है। प्रदेश में पहले पहले अमूमन लूट, डकैती, बलात्कार  की 3 से 5 घटनाएं रोज होती है. वहीं 22 मार्च से लेकर 27 मार्च तक कहीं कोई घटना नहीं सुनाई दी। इस बीच हत्या और एक बच्ची से दुष्कर्म की घटना जरूर सामने आई, लेकिन वे पारिवारिक रंजिश या विवाद के चलते हुई थी।

पत्रकार मनोज मिश्रा ने मीडिया वालों के लिए बनाया कंट्रेाल रूम, यहां मिलेगी हर संभव सहायता!


लखनऊ : क्या होगा अगर हममें से कुछ लोग खबर करते हुए कोरोना पीड़ित हो जाएं तो? एक सच जिसका न तो जवाब होगा और न ही सुनने में अच्छा लगेगा -- हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिकित्सकों, अस्पतालकर्मियों, पुलिस और सरकारी अधिकारियों की तर्ज पर दो बार मीडिया का ज़िक्र अनिवार्य सेवाओं के रूप में किया जो कानों में घुलकर पूरे शरीर को आनंदित करता है - लेकिन ज़मीनी हकीकत से हम मुँह नहीं मोड़ सकते, चिकित्सकों, अस्पतालकर्मियों, पुलिस और सरकारी अधिकारियों की तर्ज पर न तो हमें कोई पेंशन मिलती है और न ही हमारी मौत के बाद हमारे किसी भी आश्रित को कही भी नौकरी मिलने की आस दिखती है -- इस सबके बावजूद हम कलम के सिपाही एकदम विपरीत परिस्थितयों में अपना काम इस यकीन के साथ कर रहें है की हम महत्वपूर्ण हैं और एक अनिवार्य सेवा देते हैं।

कोरोना और ईएमआई : सरकार माई बाप दुहाई!


कहाँ से भरेंगे EMI ? मध्यम वर्गीय परिवार हुई लाचार, सरकार करे इन पर भी विचार, फ्री के नहीं पर समय सीमा के छुट के ये भी हैं हकदार, क्योंकि ये भी हैं भारत सरकार के नागरिक जिम्मेदार...

वैश्विक महमारी कोरोना से पुरी दुनिया परेशान है। इसकी रोकथाम के लिये हर स्तर पर प्रयास जारी है। भारत में भी इसके लिए केंद्र समेत सभी राज्य सरकारों ने कोई कसर नहीं छोड़ा है। लॉक डाउन से इसे रोकने का प्रयास किया जा रहा है। पुरे विश्व में तेजी से फ़ैल रहे इस बीमारी के लिए अनुभवों के आधार पर लॉक डाउन का कदम उठाया गया जिससे कोरोना वायरस के चेन को तोडा जा सके।

कोरोना की दहशत के बीच पत्रिका में जबरन करवाया जा रहा काम

कोरोना वायरस की दहशत के बीच पत्रिका में कर्मचारियों से जबर्दस्ती कार्य करवाया जा रहा है। कोई कर्मचारी अगर घर से कार्य करने के लिए कहता है तो उसे ऐसा काम बताया जा रहा है, जो वह घर से कर ही नहीं सकता। उसे ऑफिस आने पर मजबूर किया जा रहा है। इसके साथ ही ५० साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों को ऑफिस बुलवाया जा रहा है।

लाक डाउन में बेजुबानों का भी रखें ध्यान


कुलबीर सिंह कलसी

चंडीगढ़ : आज कल हर कोई corona virus राष्ट्रीय आपदा के नियमों को मानते हुए अपने अपने घर बैठा है।  कोई संदेह नहीं है प्रशासन और चंडीगढ़ पुलिस बल असहाय गरीब लोगों रोजमर्रा की दिहाड़ी दार कमाई करने वाले मजदूरों में भोजन वितरण की सेवा करवा रही है।

भय और भ्रांतियों के बीच फैल रहा कोरोना और उसका डर

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फर्जी मैसेज

जिस तेजी के साथ कोरोना अपने पांव पसार रहा है। उसी गति से भय और भ्रांतियां भी सोशल मीडिया के माध्यम से फैल रहीं हैं। इसमें से कुछ सच हैं तो कुछ कोरे अफवाह, जो इस महामारी के बीच फैले हुए डर, अनिश्चितता और उहापोह की स्थिति को और बढ़ा रहे हैं।

27.3.20

शहर अंजान हो गया ..

पेश है कोरोना के  खौफ पर खांटी  खड़गपुरिया की  खास पेशकश ....
शहर अंजान हो गया ....
तारकेश कुमार ओझा
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कोरोना के  कहर में  , अपना ही शहर अंजान हो गया
सुनसान हुए चौक - चौराहे
बाजार वीरान हो गया ,
तिनके - तिनके से जहां थी दोस्ती ,
पहचान ही गुमनाम हो गया ,
लापता हो गई यारी - दोस्ती ,
मुल्तवी हर काम हो गया ,
एक अंजाने  - अनचिन्हे डर के आगे ,
बेबस - बेचारा विज्ञान हो गया

लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ट पत्रकार हैं। संपर्कः 9434453934, 9635221463

25.3.20

बंगाल में महामारी पर राजनीति नहीं हो रही, ममता की तारीफ कर रहे विपक्षी नेता

श्वेता सिंह
 
कोलकाता। कोरोना के कहर से बचना ही आज सबकी प्राथमिकता है। राज्य में इस महामारी से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आवश्यक कदम उठा रही हैं। उनके फैसलों की प्रशंसा पार्टी के नेता ही नहीं कर रहे बल्कि विपक्षी पार्टियों के नेता भी खुले दिल से उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। संकट के इस समय में बंगाल के नेता इस महामारी पर राजनीति नहीं कर रहे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्र ने ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने ऐन समय पर राज्य में लॉकडाउन का फैसला लिया जो जरूरी था।

24.3.20

सीएए विरोध में लखनऊ के घंटाघर में चल रहा धरना खत्म

अजय कुमार, लखनऊ

जान है तो जहान है। वर्ना सब बेकार है। शायद इसी लिए दो महीने से अधिक समय से लखनऊ के घंटाघर में नागरिकता सुरक्षा कानूनू(सीएए) के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कोरोना खौफ के चलते अपना धरना स्वतः खत्म कर दिया है। आश्चर्यजनक बात यह रही कि जिन महिलाओं को मोदी-योगी सरकार और पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी नही समझा सके थे की सीएए देश के मुसलामनों को खिलाफ नहीे है, उसे कोरोना वायरस ने समझा दिया। वर्ना तो धरना दे रही दादियां यहीं हुंकार भर रही थीं कि अगर सीएए वापस नहीं हुआ तो वह लोग मरते दम तक नहीं हटेेंगी, लेकिन जब मौत सिर चढ़कर बोलने लगी तो सबने जान बचाने के लिए घंटाघर से चले जाना ही बेहतर समझा।

कोरोना खौफ : रूसी राष्ट्रपति ने सड़कों पर छोडे़ शेर-बाघ!


अजय कुमार, लखनऊ
 
मास्को। कोरोना वायरस के चलते दुनिया भर में हाहाकार मचा है. हर दिन सैकड़ों लोगों की जान जा रही है. कई देशों के शहरों को लॉकडाउन कर दिया गया है. इसी बीच सोशल मीडिया पर रूस का एक मैसेज वायरल हो रहा है. इसमें दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लोगों से कोरोना वायरस के चलते घरों में रहने की अपील कर रहे हैं लेकिन लोग मान नहीं रहे हैं. लिहाजा उन्होंने वहां की सड़कों पर 800 शेर और बाघ को छोड़ दिए हैं.

कोरोना वायरस ‘परिवार’ का नया सदस्य है कोविड-19


संजय सक्सेना, लखनऊ
कोरोना वायरस का खतरा पूरी दुनिया पर हावी है। हजारों लोगों की जीवन लीला यह वायरस निगल चुका है। दुनिया के तमाम मुल्कों के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने/तलाशने में लगे हैं, लेकिन इससे इत्तर सोशल मीडिया का कुछ और ही कहना है।

22.3.20

आप चुप क्यों हैं मिस्टर सीएम हेमंत सोरेन ??

Rupesh Kumar Singh
 आप चुप क्यों हैं मिस्टर सीएम Hemant Soren ? आप तो ट्वीटर पर धड़ाधड़ आदेश देने में प्रसिद्ध हो चुके हैं और आपके ही राज्य में एक आदिवासी की लाश थाने में दो दिन से पड़ा हुआ है, फिर भी आप चुप हैं। आपको तो मालूम होगा ही कि 20 मार्च की सुबह सीआरपीएफ ने खूंटी जिला के मुरहू थानान्तर्गत कुम्हारडीह निवासी रोशन होरो की नक्सली समझकर गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसे पुलिस अधिकारियों ने भी गलती मानते हुए मानवीय भूल कहा था।

ट्राम के सफर की दिलचस्प खबर : सिर्फ कोलिकाता नहीं पटना में भी चलता था ट्राम

सक्षम द्विवेदी

"अगला स्टेशन रविन्द्र भवन है। दरवाजे बायीं ओर खुलेंगे।" स्टेशन के नाम बेशक बदल सकते हैं लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि ये वाक्य कोलिकाता, दिल्ली, बंगलुरू और अन्य महानगरों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। दरअसल बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के उलझे जंजाल के बीच डेली लोकल सफर को आसान बनाना कभी भी आसान नहीं रहा। किसी को ऑफिस की जल्दी है तो किसी का एक्जाम छूटा जा रहा है। सड़कें वही हैं, रास्ते वही हैं, जनसंख्या और निर्माण बढ़ते जा रहेहैं। ऐसे बढ़ते दबाव में अनवरत यातायात की वैकिल्पक व समानांतर व्यवस्था के प्रयास भी हमेशा से ही जारी रहे हैं। आज पटरियों में भाग रही मेट्रो इसी व्यवस्था की संकल्पना का मूर्त रूप है।

कोरोना का इससे आसान ब्योरा तो नहीं मिलेगा... ज़रूर पढ़िेए-


तेज़ रफ्तार से चल रही दुनिया अचानक से थम सी गई है, दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है. लोग डरे हुए हैं सहमे हुए हैं हर कोई सोच रहा है कोरोना का यह खौफ़ आखिर कब तक दिलों को दहलाता रहेगा. दुनिया के बड़े-बड़े देशों में लोग अपने घरों में ही कैद हो गए हैं. अंतराष्ट्रीय उड़ानें रद हो रही हैं, सरकारें परेशान हैं, कोई इलाज मिलता नहीं दिख रहा है, दिनों-दिन यह वायरस पूरी दुनिया में अपना पैर पसारता दिख रहा है, अब तक लगभग 170 देशों में कोरोना वायरस ने कोहराम बरपा कर दिया है, 11 हज़ार से अधिक लोगों की जान तक ले बैठा है यह वायरस, लेकिन अभी तक किसी को भी इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि यह कब खत्म होगा और इसपर कंट्रोल कब तक पाया जा सकेगा यह वायरस अभी और कितना दहशत फैलाएगा इसके बारे में कुछ भी ठीक-ठाक नहीं कहा जा सकता है.

21.3.20

क्रांति का चोता (कहानी)



आलोक नंदन शर्मा

घर के सामने बजबजाती हुई छोटी सी नाली पर दोनों तरफ पैर करके दंगला अभी टट्टी करने बैठा ही था कि सामने से गुजरने वाला ग्वाला दुगरन जो अपनी गलमुछों की वजह बडा ही भयानक लगता था   ने उसे जोर से हुल्की दी, “आज तुने अपने पिछवाड़े से लेढ़की निकाली तो मैं उसे फिर से तुम्हारे ही अंदर ठूंस दूंगा।”

ajnara khel gaov : Refund karaye es thag builder se


Hello sir,

Maine 4 year pahle ajnara khel gaov me flat book kiya tha.jo abhi tk nahi bana .jb complnt kiya to pata chala k project nahi banega .so refund nd return kar lijiye .jb refund return  k liye appliction bhar k diye to bole 2 month me bank loan close hojayega uske baad 6 month me full refund hojayega.

19.3.20

कोरोना और करूणा ....

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18.3.20

योगी के तीन साल थे ‘बेमिसाल’ या विपक्ष था लाचार

अजय कुमार,लखनऊ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के तीन साल हो गए हैं। इन तीन वर्षो में पूरे देश में योगी जी हिन्दुत्व का नया चेहरा बनकर उभरे हैं। हाईकमान द्वारा कई राज्यों के विधान सभा चुनाव में योगी जी स्टार प्रचारक के तौर पर उतारा गया,जिसका भारतीय जनता पार्टी को फायदा भी मिला,लेकिन लाख टके का सवाल यही है कि क्या उत्तर प्रदेश की जनता जहां के योगी जी मुख्यमंत्री हैं योगी सरकार के कामकाज से संतुष्ट है। इसको लेकर लोगों के बीच अलग-अलग राय है। कुछ लोग योगी सरकार के कामकाज से पूरी तरह से संतुष्ट है तो कई का मानना है कि योगी जी दोहरी राजनीति करते हैं। वह एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए दूसरे वर्ग के लोगों का उत्पीड़न करते हैं। इसका उदाहण देते हुए बताया जाता है कि नागरिकता संशोधन एक्ट(सीएए) के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करने वालों के विरूद्ध जिस तरह योगी सरकार ने दंगाइयों जैसा व्यवहार किया वह लोकतांत्रिक तरीका नहीं था। योगी सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्रों पर लाठियां चलवाईं। कभी जिन्ना की तस्वीर के नाम पर तो कभी आतंकवाद के नाम पर छात्रों का उत्पीड़न किया गया। वहीं गौकशी के नाम पर माॅब लिंचिंग करने वालों को इस सरकार में खुली छूट मिली है। सैकड़ों मुस्लिम युवक आतंकवाद और दंगों आदि के नाम पर जेल भेज दिए गए हैं।