Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

1.11.22

A strong third quarter lifts gold demand to pre-pandemic levels

The World Gold Council’s latest Gold Demand Trends report reveals that gold demand (excluding OTC) in the third quarter of 2022 hit 1,181 tonnes, up 28% year-on-year. Strong demand pushed the year-to-date total to its pre-COVID levels. Gold demand was bolstered by consumers and central banks, although there was a notable contraction in investment demand.

40% of Indians surveyed have been targeted by a scam when shopping online during the festive season


 

• Over 4 in 5 Indian adults surveyed (85%) admit to risking their personal information or privacy in several ways during the festive season
• 74% of Indian adults surveyed say that spending time online via their connected devices helps their mental well-being during the holiday season

 

India, Delhi – November 1, 2022 – Norton, a global leader in consumer Cyber Safety, today published Indian findings from a global study conducted online in August 2022 among 1,001 Indian adults aged 18+ by The Harris Poll on behalf of NortonLifeLock that explored attitudes towards Cyber Safety and online shopping during the festive season. The report highlights the importance of taking precautions with your personal information online. The findings reveal that all (100%) of those planning to shop during the 2022 festive season expect to do so online, with 61% saying that they expect to do more than half of their festive season shopping online.

The festive season is often a time when many people buy gifts for their family and friends. This holiday season, Indian adults surveyed expect tech-based gifts including smartphones (64%), smart watches (55%), and smart home devices (47%) to be the most sought out gifts. Though only a small minority of adults in India surveyed(8%) plan to buy fewer technology gifts this festive season compared to years past, over 4 in 5 of those planning to buy less tech gifts (84%) say this is due to concerns of rising costs of living and inflation. To help with inflation/the rising cost of living, most Indians surveyed (91%) are likely to take cost cutting measures of some kind this festive season,  which for some includes clicking on a questionable link offering them a good deal on technology products (36%) or a reduced energy bill (29%).

27.10.22

गुजरात चुनाव-2022

शंभु चौधरी-

आगामी माह  गुजरात व हिमाचल प्रदेश  की विधान सभाअसें के चुनाव होने जा रहें हैं। इस बार के चुनाव में इस बार इन दोनों राज्यों में चुनाव त्रिकोणीय  चुनाव होने जा रहा है। मेरे इस लेख को गुजरात चुनाव तक केंद्रित कर लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।  जैसा कि आप सभी जानते हैं कि बंगाल में वामपंथी  दलों को शासन 35 साल चलां, लोगों को लगता था कि इनकी जड़ें इतनी मजबूत है कि इसे बंगाल से उखाड़ फैंकना नामुमकिन ही नहीं असंभव भी प्रतित होता है। इसके बावजूद ममता के नये संगठन ने उसे मिट्टी में मिला दिया। आज बंगाल में वामपंथियों को राजनीतिक रूप से नई जमीन तलाशनी पड़ रही है।

6 गुणा अधिक प्रदूषित हुई काशी की आबोहवा

 



जम कर फूटे पटाखों ने फिर बिगाड़ी बनारस की आबोहवा, एक बार फिर जुमला साबित हुआ ग्रीन पटाखा

इंग्लिशिया लाइन, पांडेयपुर, सारनाथ, लहुराबीर बने गैस चेंबर, महमूरगंज और सिगरा रहे तुलनात्मक रूप से साफ़

क्लाइमेट एजेंडा की ओर से हर वर्ष की तरह सातवीं बार इस वर्ष भी दिवाली पर वाराणसी में वायु प्रदूषण की एक विस्तृत रिपोर्ट आज 26 अक्टूबर 2022 को दिन में 1 बजे जारी की गयी. इस रिपोर्ट के अनुसार, बनारस में ग्रीन पटाखे और जिला प्रशासन की ओर से हुई अपील इस बार पुनः बेअसर साबित हुई. कोविड 19 के साथ साथ अन्य श्वसन सम्बन्धी संक्रमण के खतरों के मद्देनजर, बनारस में वायु गुणवत्ता ठीक रखने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष के लिए जारी NGT के दिशा निर्देशों की खुल कर अवहेलना हुई और जिला प्रशासन हर वर्ष की तरह इस बार भी मूकदर्शक बना रहा. रात्री दस बजे के बाद पूर्ण रूप से पटाखा प्रतिबन्ध के लिए जारी आदेश को ताक पर रखते हुए काशीवासियों ने जहां एक तरफ जम कर पटाखे बजाये, वहीं दूसरी ओर इन पटाखों से शहर में पी  एम 2.5, पी एम 10 और वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) , दोनों के ही मानकों की तुलना में काफी खराब हो गया.

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2023 में शामिल होंगे दुनिया के कुछ श्रेष्ठ कहानीकार

कथा लेखन में वो ताकत होती है, जो पाठकों को तुरंत ही एक काल्पनिक जगत में ले जाती है| ये ताकत वास्तव में कहानी कहने की कला में ही निहित है| जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 16वें संस्करण में शामिल होने वाले दुनिया के श्रेष्ठ कहानीकार आपको इसी कला से रुबरु करायेंगे|

14.10.22

इल्तुतमिश ने तोड़ा, मोदी ने संवारा ! महाकाल शिवलिंग की वीरगाथा !!

के. विक्रम राव-

        खोरासान के बटमार मुहिउद्दीन मोहम्मद गोरी के गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक के ही गुलाम शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने करीब नौ सदियां बीते धर्मनगरी उज्जैन को खण्डित किया था, लूटा था। स्वयंभू दक्षिणामूर्ति शिवलिंग को क्षिप्रा नदी में फेंक दिया था। ऐसा ही फरगना के डाकू जहीरूद्दीन बाबर द्वारा श्रीराम जन्मस्थल पर जघन्य प्रहार हुआ था। आलमगीर औरंगजेब के वहशियानापन का शिकार बने विश्वनाथ मंदिर को तो मोदी ने विभूषित किया। भारत ऋणी है। राजा भोज द्वारा पूजित, कालिदास द्वारा महिमा मंडित, बारह लिंगों में से एक शंकर भगवान का यह देवालय जंबुद्वीप में प्राचीन ज्ञान का भण्डार रहा, मेधा का पर्याय और आस्था केन्द्र की धुरी। हिन्दुओं के धैर्य और शौर्य की सीमा अपार थी। अत: स्वाधीनता के बाद दशकों तक वे शांति से सुधार हेतु प्रतीक्षारत रहा। पराधीन प्रजा तो बेबस ही रही थी। आजादी के सात दशकों बाद वोट के लुटेरे, मजहब के दलालों की उदासीनता से ही शासन में लोकास्था डिगी। इस बीच अयोध्या का भी समाधान हो गया है। सोमनाथ को तो सरदार वल्लभभाई पटेल ने पहले ही संवार दिया था, जवाहरलाल नेहरु के जोरधार प्रतिरोध के बावजूद। अत: भला हो नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का कि अपने सहप्रदेशीय सरदार पटेल की भांति वे भी तत्पर हुये राष्ट्र गौरव को संजोने के लिये।

इसका नाम मुलायम है जिसका जलवा कायम है!!

के. विक्रम राव-

एक गुत्थी उलझी है, मुलायम सिंह यादव के दिवंगत होने के बाद से। कभी खुलनी चाहिये। सार्वजनिक दर्शन तथा श्रद्धांजलि देने हेतु इस जननायक की शव यात्रा दिल्ली और लखनऊ पार्टी कार्यालय तथा दोनों आवासों से होते हुये जा सकती थी। हजारों चाहनेवाले वंचित रह गये। मेदांता (हरियाणा) से सैफई गांव सीधे ले जाने की तुलना में कुछ समय शायद ज्यादा लग जाता। यूं तो पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव का शव सोनिया गांधी ने कांग्रेस पार्टी मुख्यालय के फाटक के बाहर फुटपाथ पर ही  रखवा कर सीधे हैदराबाद रवना कर डाला था। मुलायम सिंह यादव तो जनप्रिय नायक रहे। फिर आधुनिक युग में तो इतने रसायन उपयोग में हैं कि लम्बे अरसे तक शव को परिरक्षित रखा जा सकता है। अब आमजन जिसके अत्यंत अजीज यह लोहियावादी नेता रहे को महरूम कर दिया गया। अक्षम्य है। गमगीन अधिक कर दिया गया।

12.10.22

औसत से भी नीचे चरित्र की पायदान पर खड़े भारतीय कैसे हों दुनिया के लिए रोल माडल, क्या संघ प्रमुख इसे विचारेंगे

केपी सिंह-

हाल ही में कोलकता में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के दो वयोवृद्ध प्रचारकों की याद में आयोजित कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश के प्रत्येक हिन्दू का पूरी दुनिया के लिए रोल माडल के रूप में अपने को तराशने का आवाहन पूरे हिन्दू समाज की गौरव ग्रन्थि को छू गया। किसी कोम के चारित्रिक उत्थान में ऐसे उपक्रम का बड़ा योगदान हो सकता है इसलिए संघ प्रमुख का हिन्दू समाज के सकारात्मक मनोबल बढ़ाने का यह तरीका फलदायक है।

पूंजीवाद का विकल्प हासिल करने के लिए मेहनतकशों के राजनीतिक आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान

विद्यानंद चौधरी-
समाज में जब एक समुदाय की नागरिकता पर हमला होता है और बहुमत इसका समर्थन करता है तो वह खुद अपनी नागरिकता हारने की भी सहमति दे देता है। सवाल वह भी नहीं कर सकता। अधिकार वह भी नहीं मांग सकता। शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार, किसानी, मजदूरी, महिलाओं, बच्चों, युवाओं आदि के नागरिक अधिकारों का क्या हाल है? किसने क्या खोया? बहुमत ने कुछ पाया क्या? नागरिकता संपूर्णता में हासिल होती है और संपूर्णता में खत्म भी हो जाती है। विभाजन केवल संपूर्णता में नागरिक अधिकारों को छीनने के लिए, उनके आंदोलनों के अधिकारों को कुचलने के लिए इस्तेमाल में लाए जाते हैं। वास्तविकता यह है कि कट्टरता और उन्माद पूंजीवाद द्वारा एक स्मोक स्क्रीन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अपने छिनते अधिकारों को न देख नागरिक केवल नफरत और कट्टरता के अंधकार में गुम हो गया है। नशे में वह नफरत के नालियों में गिरा कीड़े की तरह गंदगी में लिपटा खुद को खो चुका है। चेतनाविहीनता की यह स्थिति बहुत खतरनाक है। वह पूंजीवादी अधिनायक को सर्वशक्तिमान समझ खुद निर्बल निरीह जीव बन समर्पण भाव में नतमस्तक खड़ा है। वह नफरती उन्मादी अधिनायक का हथियार बन गया है।

सहायक नगर आयुक्त मथुरा (sdm) राजकुमार मित्तल द्वारा दीपक पत्रकार के साथ मारपीट, गाली गलौज, अभद्रता

दीपक चौधरी- 

सरकारी गाड़ी में पालतू कुत्ते की सैर, फोटो खींचने पर पत्रकार से ही भिड़ गए 'SDM'

मथुरा - सरकारी गाड़ियों का दुरुपयोग कर रहे हैं अधिकारी ,सहायक नगर आयुक्त सरकारी गाड़ी में घूमा रहे थे पालतू कुत्ता , फोटो खींचने पर सहायक नगर आयुक्त ने पत्रकार के साथ जमकर की बदसलूकी ओर गाली गलौज ,किया हाई वोल्टेज ड्रामा

सामाजिक लोकतंत्र को पूर्व शर्त मानने वाले बाबा साहब और डा लोहिया के इरादे क्यों नहीं हुए कामयाब

केपी सिंह-

भारतीय लोकतंत्र की गुत्थियों में बहुत उलझाव है जिन्हें सुलझाना आसान नहीं है। पश्चिम की लोकतांत्रिक महाशक्तियों में इसकी प्रेक्टिस को लगभग पांच दशक का समय व्यतीत हो चुका है तब वहां परिपक्व लोकतंत्र बन सका, जबकि भारत में अभी सत्तर वर्ष से कुछ ही ज्यादा समय गुजरा है लेकिन तब दुनिया एक गांव में नहीं बदली थी। आज संचार की रफ्तार  वैश्विक विमर्श की सघनता कहां से कहां पहुंच चुकी है ऐसे में बदलाव के लिए सत्तर वर्ष का समय भी बहुत होता है। हालांकि भारतीय लोकतंत्र ने कई उत्कृष्ट सोपान भी चढ़े हैं लेकिन कई पहलुओं में यह इतनी विडम्बना का शिकार है कि स्थिति शोचनीय नजर आने लगती है।

बांसवाड़ा में साजिशन दर्ज किए जाते हैं पत्रकारों के खिलाफ मुकदमें

किशन सेन-

जब खेत ही बाढ़ को खाने लगे तो खेत का क्या कसूर यही हाल है वर्तमान में बांसवाड़ा के पत्रकारों का?

देश के  दो बड़े  अखबार के पत्रकारों कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी  क्या अन्य सस्थान के पत्रकारों के लिए मौका देखते है ये आखिर मजबूरी या फिर किसी साजिश का हिस्सा।

गांधी और लोहिया में उतना ही भेद देखता हूँ जितना कि राम और कृष्ण में!

-जयराम शुक्ल

 डा.लोहिया ने गांधी को पढ़ा भगत सिंह को जिया

राजनीति ऐसा तिलस्म है कभी सपनों को यथार्थ में बदल देता है तो कभी यथार्थ को काँच की तरह चूर चूर कर देता है। काँग्रेसमुक्त भारत की सोच डाक्टर राममनोहर लोहिया की थी। 12 अक्टूबर को डा. लोहिया की पुण्यतिथि पड़ती है। एक दिन पहले 11 अक्टूबर को जेपी और नाना जी पैदा हुए थे। आज देश लगभग कांग्रेस मुक्त है पर लोहिया मुखपृष्ठ पर नहीं हैं। 1967 में उत्तरप्रदेश में चरण सिंह चौधरी की सरकार के जरिये लोहिया ने गैरकांग्रेस सरकार की ओर पहला कदम बढाया था जिसे  दस साल बाद 77 में जयप्रकाश नारायण और नाना जी ने परिणति तक पहुँचाया।

समाचार प्रकाशन पर मुझे गलत कांड में फंसाने के संबंध में

 सेवा में,

पुलिस महानिदेशक,
बिहार, पटना

विषय :- समाचार प्रकाशन पर मुझे गलत कांड में फंसाने के संबंध में

हाईटेक पत्रकारिता में बिजनेस प्रोडक्ट हुई खबरें

सुधीर अवस्थी परदेसी-

पत्रकारिता महज एक काम नहीं बल्कि मिशन रही है। इस क्षेत्र में आने वाला शख्स अपना सब कुछ दांव पर लगा कर पत्रकार कहलाता है। बिल्कुल इस बात को कहने में संकोच नहीं कि वर्तमान समय में हाईटेक पत्रकारिता में साधन सुविधाएं बढ़ीं पत्रकारिता आसान हुई लेकिन पत्रकारिता का स्तर गिरता नजर आ रहा है।

बधाई हो! भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले शतक बना सकता है

पैट्रोलियम पदार्थ जनवरी के बाद 85 डॉलर से नीचे, फिर भी महंगाई बढ़ेगी क्योंकि रुपया कमजोर हो रहा है
अडाणी-अम्बानी की खुशियां भारतीयों के कंधों पर बोझ

10.10.22

संघ प्रमुख का संबोधन हिन्दू समाज के रूढ़िवादी तबके को झकझोरने वाला है!

केपी सिंह-
जातिगत भेदभाव से खंडित होते रहे हिन्दू समाज की हाल में कायम हुई जोरदार राजनैतिक एकता को बनाये रखने के क्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दलितों के तिरस्कार को खतम करने को लेकर एक बार फिर क्रांतिकारी स्तर का वक्तव्य जारी किया है। नागपुर में एक पुस्तक के विमोचन समारोह के अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जाति व्यवस्था और वर्ण व्यवस्था अतीत की बातें हो चुकी हैं। अब इन अवधारणाओं को खारिज करना ही बेहतर होगा। उन्होंने ब्राह्मणों से उनके पूर्वजों द्वारा दलितों के साथ किये गये व्यवहार के लिए माफी मांगने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे उनके नीचे देखने का सवाल नहीं है क्योंकि सभी के पूर्वजों ने अतीत में गल्तियां की हैं जिनका प्रायश्चित होना चाहिए।

न्यूज चैनल में ऐसी गलती प्रसारित हो जाने पर दर्शक दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं..

देखिए इंडिया न्यूज का कमाल... क्या सोचकर ऐसे न्यूज बनाते हैं इंडिया न्यूज के कर्णधार ?? देखें स्क्रीनशाट...

ज्ञानवापी सहित जिन 40 हजार मंदिरों को कानूनी लड़ाई लड़कर वापस लेंगे और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाएंगे : हरिशंकर जैन

सुरेश गांधी

वाराणसी। हिन्दुस्तान के सीनियर अधिवक्ता एवं बाबा विशेश्वरनाथ को पुनः स्थापित करने की लड़ाई लड़ रहे हरिशंकर जैन ने बिना किसी लाग-लपेट के खुलेअंदाज में कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है।  इसके लिए हम हर लड़ाई लड़ रहे हैं। खासकर देश के जिन 40 हजार मंदिरों को तोड़कर उन पर कब्जा किया गया है उन्हें कानूनी लड़ाई लड़कर वापस लेना भी है असल मकसद। यह बातें वे शनिवार को होटल कैस्टीलो में आयोजित पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, कश्मीरी पंडित सुशील पंडीत, पूर्व कर्नल आरएसएन सिंह व ट्रस्ट इंडिया फाउंडेशन के अनिल यादव आदि मौजूद रहे। बता दें, ये प्रखर राष्ट्रवादी विचारक 9 अक्टूबर को ट्रस्ट इंडिया फाउंडेशन व रोटरी क्लब आफ वाराणसी नार्थ के तत्वावधान में रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर में आयोजित भारत राष्ट्र के सामने चुनौतियां और समाधान विषयक संगोष्ठी में भाग लेने वाराणसी आएं हैं। संगोष्ठी का मकसद देश की संस्कृति और सभ्यता को लेकर आ रही चुनौतियों पर चर्चा व उसका समाधान निकालना है।

3.10.22

ABP News-CVoter opinion poll on caste factor in upcoming Gujarat polls

 
• What is the mood of caste in this upcoming Gujarat polls?
• What does the Patidar of Gujarat has to say?
• Which way will the Hindu voters swing?
• Are the muslim votes getting divided?

 

New Delhi, October 3rd, 2022: According to the ABP News-CVoter (Centre for Voting Opinion & Trends in Election Research) opinion poll, the ruling BJP (BharatiyaJanata Party) is predicted to win the elections for a record seventh time since 1995, in Gujarat. The BJP is anticipated to win between 135-143 seats, which would represent a significant gain from its 2017 total tally of 99 seats.

"हिंद स्वराज" का विमोचन किया एक गरीब मूर्तिकार ने

 



महात्मा गांधी की 153 वीं जयंती के ऐतिहासिक मौके पर छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नगर कोरबा में पत्रकार संपादक सुरेशचंद्र रोहरा के संयोजन में महात्मा गांधी दर्शन, मानिकपुर संस्थान द्वारा गांधी जी की 122 साल पहले लिखी गई बहुचर्चित पुस्तक "हिंद स्वराज" का प्रकाशन किया गया था जिसका विमोचन  एक गांधी जी की मूर्तियां बनाने में समर्पित मूर्तिकार कृष्णा सहिस और छत्तीसगढ़ के गांधी कहे जाने वाले वयोवृद्ध गांधीवादी बोध राम कंवर पूर्व विधायक द्वारा किया गया।

25.9.22

योगीराज में निष्पक्ष पत्रकार के साथ ये कैसा सलूक?

 रदोई के पत्रकार हरिश्याम बाजपेई को सच लिखने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है

16.9.22

वीपी सिंह को खलनायक मानने वाले चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया की नियुक्ति पर चुप क्यों है?

सौरभ सिंह सोमवंशी, लखनऊ।

मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बाद अर्थात अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान करने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजा मांडा विश्वनाथ प्रताप सिंह जब दोबारा1991 में फतेहपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए गए तब वहां के तमाम सारे क्षत्रिय समुदाय के लोग उनसे नाराज बताए गये, तब विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपने लोगों से एक संदेश भिजवाया और कहा कि मुझे वोट दें या ना दें परंतु मैं एक बार अपने भाइयों से मुलाकात करना चाहता हूं।

13.9.22

कवि केवल देता है कुछ लेता नहीं- कहानीकार राजेन्द्र राव

अवनीश यादव-

काव्य संग्रह अंतिम विकल्प से पहले के लोकार्पण समारोह में बोले, दिल्ली से आये कवि ओम निश्चल बोले नया प्रयोग हैं आस्था की कविताएं        


बिल्हौर। प्रेस क्लब बिल्हौर के तत्वाधान में राम सहाय इंटर कालेज, बैरी शिवराजपुर की प्रधानाचार्य श्रीमती आरती "आस्था" के काव्य संग्रह "अंतिम विकल्प से पहले" का लोकार्पण कानपुर के नवीन नगर काकादेव स्थित एक गेस्ट हाउस में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ उपन्यासकार राजेंद्र राव ने की। मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली से आए वरिष्ठ आलोचक व कवि डा0 ओम निश्चल, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कथाकार,कवि व लेखक श्री कृष्ण बिहारी और वी0एस0एस0डी0 कालेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष वरिष्ठ कवि डा0 पंकज चतुर्वेदी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अनीता मिश्रा ने किया।

पद्मश्री दिलीप वेंगसरकर ने स्कूली क्रिकेटरों के लिए 'इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट' की विधिवत घोषणा की

हैदराबाद: एक नए नेशनल क्रिकेट बोर्ड 'इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट'(आईएसबीसी)(ISBC )की शुरुआत की गई।आईएसबीसी एक गैर-लाभकारी संगठन है,जोकि पूरे भारत में युवा क्रिकेट प्रतिभाओं की तलाश और प्रशिक्षित करेगी,खास करके ग्रामीण इलाकों में छुपी और होनहार प्रतिभाओं को नया भविष्य और मौका देगी। जिसकी घोषणा के लिए हैदराबाद के होटल ताज कृष्णा में सोमवार १२ सितंबर २०२२ को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था। जिसकी घोषणा और बोर्ड की जानकारी भारतीय क्रिकेट के दिग्गज, पूर्व कप्तान,मुख्य चयनकर्ता तथा इस बोर्ड के मुख्य सलाहकार पदमश्री दिलीप वेंगसरकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर बोर्ड के फाउंडर व सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका,अध्यक्ष अंकेश राठौर, सेक्रेटरी पदम राज पारख तथा बोर्ड के सभी पदाधिकारी व सदस्यों ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और कार्यक्रम को सफल बनाया।

हिन्दी बने राष्ट्र भाषा

डॉ. सौरभ मालवीय-

“हिन्दी संस्कृत की बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है।“

ये शब्द बहुभाषाविद और आधुनिक भारत में भाषाओं का सर्वेक्षण करने वाले पहले भाषा वैज्ञानिक जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन के हैं। नि:संदेह हिन्दी देश के एक बड़े भू-भाग की भाषा है। महात्मा गांधी ने हिन्दी को जनमानस की भाषा कहा था। वह कहते थे कि राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है।

स्विगी ने अपने डिलिवरी एग्ज़ीक्यूटिव्‍स और उनके बच्चों की शिक्षा एवं विकास के लिए लॉन्च की "स्विगी स्किल्स एकेडमी"


•    यह ऑनलाइन एकेडमी डिलिवरी पार्टनर ऐप पर उपलब्ध होगी, जिसमें अंग्रेज़ी बोलने, आईटी, पर्सनल फाइनेंस, और कंप्यूटर स्किल्स से जुड़े जरूरी कोर्स उपलब्ध होंगे

•    यह कार्यक्रम डिलिवरी पार्टनर्स की पढ़ाई पूरी करने में मदद करेगी

•    डिलिवरी पार्टनर्स के 24,000 से ज़्यादा बच्चे बेहतर गुणवत्ता वाले ऑनलाइन शैक्षणिक कॉन्टेंट के लिए पहले से साइन अप कर चुके हैं

•    स्विगी ने शिक्षा और विकास संबंधी इस अवसर को उपलब्ध कराने के लिए ‘ रीड अलॉन्ग बाई गूगल’ और ‘ खान एकेडमी’ से साझेदारी की है

मुकेश अंबानी ने जगदीश चंद्रा के नए लांच नेशनल हिंदी न्यूज चैनल ‘भारत24’ में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी!


 

एक बड़ी चर्चा मीडिया मार्केट में है. डाक्टर जगदीश चंद्रा के नेतृत्व में लांच हुए नए नेशनल न्यूज चैनल भारत24 में अंबानी ने इनवेस्टमेंट किया है. बताया जा रहा है कि 33 प्रतिशत स्टेक मुकेश अंबानी ने लिया है और अब वे इस चैनल के सबसे बड़े हिस्सेदार हैं.

9.9.22

पार्शियल नी-रिप्लेसमेंट अर्थराइटिस मरीजों के लिए बना वरदान


 वाराणसी. जोड़ों और हड्डियों की समस्याओं में ऑस्टियोअर्थराइटिस दूसरी सबसे कॉमन प्रॉब्लम है. सिर्फ जोड़ों से जुड़ी दिक्कतों की बात की जाए तो भारत में ऑस्टियोअर्थराइटिस बहुत ही आम समस्या है और 40 फीसदी लोग इससे पीड़ित होते हैं. ऑस्टियोअर्थराइटिस भी अर्थराइटिस का ही एक रूप है जिसमें एक या उससे ज्यादा ज्वॉइंट्स के कार्टिलेज को अचानक नुकसान पहुंचता है. कार्टिलेज, प्रोटीन की तरह का एक पदार्थ होता है, जो हड्डियों के जोड़ों के बीच कुशन यानी तकिये का काम करता है. ऑस्टियोअर्थराइटिस एक ऐसी समस्या है जो किसी भी ज्वॉइंट को प्रभावित कर सकता है और ये आमतौर पर हाथों, घुटनों, कूल्हों और रीढ़ में होता है. जोड़ों के दर्द की समस्या कोई हल्की नहीं है, इसके कारण इंसान को ठीक से चल पाने में कठिनाई होती है, सीढ़ियां चढ़ने में मुश्किल होती है, साथ ही घुटनों को मोड़ना भी दर्दनाक बन जाता है. घुटनों पर सूजन भी आ जाती है.

4.9.22

हर निजी संस्थान में श्रमिक संगठनों को जिंदा कैसे करें

श्रम विभाग में संगठन न होने और हर माह बैठक न होने की करें शिकायत

प्राइवेट संस्थानों में शोषण का मुख्य कारण है श्रमिक संगठनों का न होना। वैसे कागजों में हर उद्योग में श्रमिक संगठन होता है और उसकी नियमित बैठक भी होती है लेकिन यह फर्जी होता है। यह मालिक का एक कूटरचित संगठन होता है।

गुरु बिन ज्ञान न उपजै

-डॉ. सौरभ मालवीय

हमारे जीवन में गुरु अथवा शिक्षक का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। गुरु ज्ञान का भंडार होता है। वह हमें ज्ञान देता है, हमारा पाठ आलोकित करता है। ज्ञान वह अमूल्य वस्तु है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता। ज्ञान ऐसा कोश है, जिसमें से जितना व्यय करो वह उतना ही बढ़ता जाता है। गुरु ही हमारे जीवन का मार्गदर्शन करता है। हमारे जीवन को दिशा प्रदान करता है। हमारी प्राचीन गौरवशाली भारतीय संस्कृति में गुरु को अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है। हमारे वेदों, पुराणों, उपनिषदों, रामायण एवं गीता आदि में गुरु की महिमा का गुणगान किया गया है। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के समान पूज्य माना गया है।    

गोर्बाचोव नायक या खलनायक

Krishan pal Singh-

अमर उजाला में पिछले कुछ समय से रविवार को न्यूयार्क टाइम्स के किसी एक लेख को अनुदित करके प्रकाशित करने का जो क्रम चलाया है वह हिन्दी समाज के जिज्ञासु वर्ग के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है। इससे बाहर की दुनिया के घटनाक्रम और समाज के कई अछूते तथ्यों से अवगत होने का अवसर अमर उजाला के प्रसार क्षेत्र के हिन्दी पाठकों को मिला जाता है। जिन्हें प्राय हिन्दी अखबार बौद्धिक तौर पर कुएं के मेढ़क की नियति में धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

हरि रूठे गुरु ठौर है,गुरु रूठे नहीं ठौर!

डॉ. शंकर सुवन सिंह

शिक्षक समाज का दर्पण होता है। समाज में व्याप्त बुराइयों को कुचलने में शिक्षक की अहम् भूमिका होती है। एक आदर्श शिक्षक अपनी लेखनी द्वारा समाज को जाग्रत करता है। एक शिक्षक को भिन्न भिन्न नामो से जाना जाता है। जैसे- टीचर, अध्यापक, गुरु, आचार्य,आदि। भविष्य की नई राह दिखाने वाले को शिक्षक कहते हैं। शिक्षक संकटों से उबारता है। शिक्षक के अंदर क्षमा करने का गुण होता है। गुरु शिष्य परंपरा में गुरु विद्यार्थियों की कमजोरियों को दूर कर उनको सफलता के चरम शिखर पर पहुँचाता है। तभी तो  कृष्ण और अर्जुन जैसी गुरु शिष्य परम्परा को जीवंत रखने वाला भारत विश्व गुरु कहलाया।

1.9.22

कराटे में चीन और ब्राजिल को हराने वाली गोल्डन विजेता बेटी का पिता भाजपाई साहूकार से हारा

Ramkishore Dayaram Pawar

 

अमानत के बतौर रखी 55 क्विंटल सोयाबीन बेचने के बाद कर्ज के ब्याज न देने पर दी किसान को धमकी

बैतूल : वर्ष 2016 में 45 क्विंटल सोयाबीन को गिरवी (अमानत) रख कर एक लाख 20 हजार का 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याजदर से कर्जा लेने वाले किसान ओमकार चोपडे को साहुकार एवं भाजपा नेता  प्रवीण गुगनानी ने जान से मारने की धमकी दी है। मां - बहन की गंदी - गंदी गालिया देने वाले भाजपा नेता प्रवीण गुगनानी ने उस किसान की उसके वेयर हाऊस में रखी 45 क्विंटल सोयाबीन को भी बिना उसकी मर्जी के बेच दिया। अपनी कराते की खिलाडी बेटी को आगरा में हुई अंतराष्ट्रीय चैम्पीयनशीफ में भाग लेने के लिए साहुकार से कर्जा लिया। बेटी ने ब्राजील और चीन को हरा कर देश के लिए गोल्ड मैडल तक जीत लिया। गोल्डन गर्ल का किसान पिता आज तक साहुकार के दंश से ऊबर नहीं पाया और उसे जब साहुकार जरूरत से ज्यादा परेशाान करने लगा तो उसने इस माह 20 अगस्त 2022 को प्रवीण गुगनानी पिता दातारात गुगनानी के खिलाफ पुलिस अधीक्षक को जान माल की सुरक्षा के लिए एक आवेदन पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई।

23.8.22

आबकारी नीति से हुआ था 24 हजार करोड़ का नुकसान, ठंडे बस्ते में रिपोर्ट

Gagan mishra-


लखनऊ: दिल्ली में नई आबकारी नीति में हुए कथित भ्र्ष्टाचार को लेकर हंगामा बरपा हुआ है. सीबीआई ने तेजी दिखाते हुए इस मामलें में एफआईआर दर्ज करने से लेकर छापेमारी तक की है. लेकिन यूपी में आबकारी नीति में जानबूझ कर अनदेखी करने के चलते 24 हजार करोड़ से ज्यादा के नुकसान पर आई कैग की रिपोर्ट के 3 साल बाद भी मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. जबकि रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि सरकार इस नुकसान की जांच करा कर उनकी जिम्मेदारी तय करें जिन्होंने शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाया था. 3 साल से रिपोर्ट के ठंडे बस्ते में पड़े होने पर विपक्ष सवाल उठा रहा है.

भारतीयता मनुष्‍य बनाने की है प्रक्रिया : प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल

‘भारतीय ज्ञानपरंपरा और विचारक’ पर पुस्तक-वार्ता का आयोजन

वर्धा : भारतीयता मनुष्‍य बनाने की प्रक्रिया है। भारतीयता पश्‍चाताप जैसी अवधारणा को स्‍वीकार नहीं करती है। भारतीय परंपराएं प्रायश्चित की बात करती है। हमें भावी पीढ़ी को जीने लायक धरती देनी है तो वर्तमान पीढ़ी को इस विकास की अंधी दौड़ से अलग होकर आवश्‍यक प्रायश्चित करने पड़ेंगे। उक्‍त विचार कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने व्‍यक्‍त किये। वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में प्रकाशन एकक द्वारा विश्‍वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष में ‘पुस्तक-वार्ता श्रृंखला’ के अंतर्गत 18 अगस्त को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा ‘हजारी प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार’ से सम्मानित कृति ‘भारतीय ज्ञानपरंपरा और विचारक’ पर आयोजित पुस्तक-वार्ता कार्यक्रम के दौरान अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य देते हुए बोल रहे थे।

22.8.22

नगर निगम के वाटर एटीम बने सफेद हाथी, आखिर क्यों साहब की नज़र यहां नहीं जाती

 



अलीगढ़ । नगर निगम अलीगढ़ के प्रवेश द्वार (दीवानी न्यायालय ) के ठीक सामने लगी  वाटर ATM  मशीन लम्बे समय से खराब है और नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारी व मेयर आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं।आज राष्ट्रीय लोकदल के पूर्व जिला मीडिया प्रभारी व पूर्व महापौर प्रत्याशी अलीगढ़ रहे प्रतीक चौधरी एडवोकेट ने अलीगढ़ के मंडल अध्यक्ष डॉ इरफान खान के साथ वाटर एटीएम मशीन का निरीक्षक करने पहुंचे ।

Can society prohibit unmarried people from renting a house?

 Adv. Sanjay Pandey-

In many places, bachelors are found to be very cordial. Also, renting to bachelors is more beneficial to the flat owner as they are willing to pay more by splitting the expenses among themselves. But housing societies in cities often rule that no landlord can give a house to an unmarried man or woman on the pretexts – 'Bachelors have a bad experience, bring girls or boys, drink alcohol, party late into the night or argue with security guards, may be criminals, etc.' are made. Flat owners generally have a perception that if a family lives in the flat, they will take better care of the flat. Moreover, there will be no complaints from society and neighbors

फ़िरोज़ाबाद में चल रही है 'इंडिया टीवी ट्रैवल्स'

फिरोजाबाद जिले में दर्जनों चार पहिया गाड़ियां हैं जिन पर इंडिया टीवी का स्टीकर लगा हुआ है. लेकिन यह सभी गाड़ियां ट्रैवल एजेंसी पर चलती हैं.

18.8.22

छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों की पाती मुख्यमंत्री के नाम

आदरणीय मुख्यमंत्री जी..

सवाल डीए एचआरए का नहीं है, सवाल है जनतांत्रिक मूल्यों का। आप जिस तरह से सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं यह लोकतंत्र में चिंताजनक है आप अकेले नहीं हैं इस व्यवस्था में बल्कि विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका मिलकर आप पूर्ण होते हैं और किसी भी जनतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम अधिकार जनता के पास ही सुरक्षित है।वर्तमान परिदृश्य में अगर बात करें तो आप मनमानी करने की कोशिश कर रहे हैं जो कहीं से भी लोकतांत्रिक नहीं है मैं नहीं जानता कि आपके सलाहकार कौन हैं पर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को इतना तो अवश्य पता होना चाहिए कि संविधान की आत्मा "हम भारत के लोग'' आत्मार्पित और अंगीकृत किए हुए हैं वहाँ मनमानी करने की गुँजाइश नहीं है।

15.8.22

हाय उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था

 राहुल अवस्थी:- उन्नाव उत्तर प्रदेश

उन्नाव:- शिक्षा के सार्वभौमिक विकास का सपना देखने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी यदि आज जीवित होते तो सरकारी स्कूलों में कक्षा ६ में पढ़ाई जाने वाली इस इतिहास की किताब को देखकर अवश्य रो रहे होते २००१ में सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत हुई थी, जिसमें भारत भर में व्यापक पैमाने पर प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्रथमिक विद्यालय खोले गए थे उद्देश्य था भारत में जन्म लेने वाले हर बच्चे को शिक्षित बनाना इसलिए संविधान में 86 वां संशोधन भी किया गया.....लेकिन आज की मौजूदा स्थिति कुछ और ही बयां कर रही हैं. 

10.8.22

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ: एक वर्षीय डिग्री पर बन गए प्रोफेसर

वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शारीरिक शिक्षा विभाग एवं योग के विभागाध्यक्ष एवम् शिक्षा संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो0 सुशील कुमार गौतम की नियुक्ति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा निर्गत विज्ञापन संख्या- 1/2002 के माध्यम से शारीरिक शिक्षा विभाग एवम् योग में प्राध्यापक पद पर की गई।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी की परिनियमावली के अनुसार प्राध्यापक पद पर नियुक्ति हेतु न्यूनतम अर्हता द्विवर्षीय परास्नातक पाठ्यक्रम का होना अनिवार्य था।

दबंगों ने निर्धन दलित की बाटी चोखा की दुकान तोड़ी!

 






असहाय महिला समेत बच्चों को जातिसूचक गालियां दी...

शिकायतकर्ता को दी जान से मारने की धमकी..

लखनऊ । दबंगों द्वारा निर्धन हरिजन की दुकान तोड़ने व हाथापाई करने का मामला प्रकाश में आया है। मिली जानकारी के अनुसार फिनिक्स मॉल गेट नंबर 3 ,नागिया प्लॉट सेक्टर बी , एलडीए कॉलोनी में कई वर्षों से एक गरीब हरिजन परिवार द्वारा बाटी चोखा की दुकान का संचालन किया जा रहा था। नगर निगम द्वारा उक्त दुकान के स्वामी कमलेश को दुकान चलाने के संबंध में एक प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। रविवार के दिन 1:00 बजे भूमाफिया अनूप मिश्रा व उसके दर्जनों गुर्गो द्वारा कमलेश की दुकान पर धावा बोल दिया गया। इसी दौरान जब कमलेश की पत्नी ने दबंग अनूप मिश्रा व उसके बहनोई को दुकान तोड़ने से मना किया तब वह असहाय महिला को भद्दी- भद्दी जातिसूचक गालियां देने लगा, और उसके तीन मासूम बच्चों व उसके पति के साथ हाथापाई करने लगा। और बेसहारा हरिजन की दुकान का सामान, कुछ नकदी व मोबाइल लेकर फरार हो गए।  कमलेश द्वारा उक्त गुंडों की वीडियो भी उसी मोबाइल में कैद हो गई है।

KAPIL SIBAL’S STATEMENT ABOUT INDIAN JUDICIARY IS "CONTEMPTUOUS" : DR ADISH C AGGARWALA



 
New Delhi  : All India Bar Association (AIBA) has termed "contemptuous" the statement of former Union Minister for Law & Justice Kapil Sibal lamenting that he has lost hope in the Indian judiciary.

इलेक्ट्रीसिटी अमेंडमेंट बिल-2022 के विरुद्ध देशव्यापी आंदोलन का वर्कर्स फ्रंट ने किया समर्थन

 लखनऊ ।  

        इलेक्ट्रीसिटी अमेंडमेंट बिल-2022 के विरोध में बिजली कामगारों के देशव्यापी आंदोलन का वर्कर्स फ्रंट ने समर्थन किया है। सोनभद्र में वर्कर्स फ्रंट अध्यक्ष दिनकर कपूर,  युवा मंच संयोजक राजेश सचान और फिरोजाबाद में वर्कर्स फ्रंट के उपाध्यक्ष इंजीनियर दुर्गा प्रसाद बिजली कामगारों के आंदोलन व कार्य बहिष्कार में शरीक हुए। प्रेस को जारी बयान में वर्कर्स फ्रंट प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने कहा कि विधेयक के पारित होने से न सिर्फ बिजली दरों में बेहताशा बढ़ोत्तरी तय है बल्कि देश में लाखों कर्मचारियों की नौकरी को भी खतरे में डाला जा रहा है। 
 
वास्तव में विधेयक का मकसद पब्लिक सेक्टर के डिस्कॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को मुफ्त में ही कारपोरेट कंपनियों के हवाले करने और मुनाफाखोरी व लूट को सुगम बनाने के अलावा अन्य कुछ नहीं है। इसीलिए विधेयक के औचित्य को सही ठहराने के लिए सरकार द्वारा दिया जा रहा तर्क कि टेलीकॉम कंपनियों की तरह  च्वॉइस का विकल्प मिलने से बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलेगी पूरी तरह से गुमराह करने वाला है। दरअसल टेलीकॉम नेटवर्क की तरह बिजली नेटवर्क संभव नहीं है क्योंकि इसमें सभी कंपनियों द्वारा एक ही उपलब्ध नेटवर्क का ही उपयोग किया जायेगा। 

3.8.22

अंग्रेजी हुकूमत का झंडा फाड़ने और थाना फूंकने की सज़ा भोगनी पड़ी थी धौलाना के क्रांतिकारियों को

 चेतन आनंद-

आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष लेख-

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान फिरंगियों का यूनियन जैक झंडा फाड़ने और सरकारी थाना फूंकने की सज़ा भोगनी पड़ी थी धौलाना कस्बे के क्रांतिकारियों को। गुस्साये फिरंगियों ने 14 क्रांतिकारियों को सरेआम पीपल के पेड़ पर लटकाकर फांसी दे दी थी और पूरा कस्बा ज़ब्त कर उसे आर्थिक संकट की भट्टी में झोंक दिया था। आज भी धौलाना कस्बे में क्षतिग्रस्त हालात में मौजूद सरकारी थाना और शहीद स्मारक क्रांतिकारियों के हौसलों की याद ताज़ा किए हुए हैं। चित्तौड़ में बप्पा रावल का राज्य स्थिर व विस्तृत हो चला था तो अजमेर में चौहान व दिल्ली में तोमर राजपूतों ने पैर पसार लिए थे। ऐसे में चित्तौड़ के रावल खुम्मान तृतीय के दो छोटे पौत्र हस्तराज सिंह और बच्छराज सिंह अपनी सेना समेत सन् 903 ई. में चित्तौड़ छोड़कर दिल्ली आए और फिर ग़ाज़ियाबाद के देहरा गांव के निकट अपना डेरा जमा लिया। बच्छराज सिंह की सातवीं पीढ़ी में तीन भाई हुए राणा सहजपाल सिंह, राणा जसपाल सिंह व राणा भंवरपाल सिंह। राणा जसपाल सिंह के चार पुत्र हुए मदनपाल सिंह, राणा चांद, राणा गंधर्वसेन व राणा सीध सिंह। मदनपाल सिंह ने देहरा गांव से चलकर धौलाना कस्बा आबाद किया, जिसमें 11 गांव ठाकुरों के निकाले गए। बताते हैं कि मेवाड़ से राजपूत यहां इसलिए आकर रहे कि यहां पशुओं के लिए पर्याप्त चारा-पानी था। यहां ‘रेत’ का जंगल भी बताया जाता है। यहां अक्सर धूल भरी आंधियां चला करती थीं। संभव है कि धूल भरी आंधियां चलने से ही इसका नाम धौलाना पड़ा है। एक ज़माने में धौलाना मुगलों की तहसील भी रहा है।

30.7.22

अस्पताल की खबर बनाने पर पत्रकार के खिलाफ मुकदमा

 
-पीड़ित पत्रकार ने पीसीआई अध्यक्ष को भेजी लिखित शिकायत
-पीसीआई सदस्य श्याम सिंह पंवार ने खबरों के आधार पर पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर न्यायसंगत कार्यवाही करने की बात कही
-पीड़ित पत्रकार विशाल सिंह ने आईजी से मिलकर न्याय की लगाई गुहार

28.7.22

सहारा इंडिया की नेटफ्लिक्स गाथा

 प्रवीण झा-

सहारा इंडिया की नेटफ्लिक्स गाथा में एक बहुत ही स्पष्ट बात जो कही है, वो यह कि सुब्रत रॉय लोगों के दिल से जुड़ गए थे। वह गरीबों के विवाह में मदद कराते थे, सभी इम्प्लॉई का खयाल रखते थे, दानवीर थे आदि। यह बात ग़लत भी नहीं है। सहारा का नाम अमीर भले न लें, गरीब जरूर लेंगे। एक पीढ़ी को पढ़ाने-लिखाने से नौकरी तक पहुँचवाने में सहारा का सहारा मिला है। यह बात वे नहीं जानते, जिनके पास कागज-पत्तर है, या निवेश के तमाम साधन हैं। सहारा पर शोध करने वाले तक ने कहा कि आज तक सहारा का एक भी चेक बाउंस नहीं किया।

17.7.22

भास्कर में छप रही एक-दो साल पुरानी खबरें


राजस्थान में दैनिक भास्कर की टीम मॉनसून के बादलों का पीछा कर रही है। लगता है देश में नंबर वन आने की होड़ में भास्कर के पास खबरों का अकाल पड़ गया है। तभी तो अखबार में लगातार पुरानी खबरें छप रही है। इसी खबर को देख लो। राजस्थान के ब्यावर संस्करण में यह खबर 14 जुलाई 2022 को छपी है। केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की यही खबर 9 फरवरी, 2021 को अमर उजाला छाप चुका है। इसी दिन भदैनी मिरर वेबसाइट पर भी यह खबर लग चुकी है। भड़ास के जागरूक पाठक ने हमें खबरों के लिंक भी भेजे हैं।

9.6.22

सतीश पेडणेकरः स्मृति शेष - एक राष्ट्रवादी पत्रकार का यूं चले जाना!

  -निरंजन परिहार

 

आईएसआईएस की कुत्सित कामवृत्ति, दुर्दांत दानवी दीवानगी और बर्बर बंदिशों की बखिया उधेड़ता इस्लामिक स्टेट की असलियत से अंतर्मन को उद्वेलित कर देने वाला  लेखा-जोखा दुनिया के सामने रखनेवाले पत्रकार सतीश पेडणेकर संसार को सदा के लिए छोडकर निकल गए। तीन दशक तक जनसत्ता में रहे सतीशजी का अचानक चले जाना यूं तो कोई बहुत बड़ी खबर नहीं, लेकिन स्मृतियों की मीमांसा और मंजुषा कहे जाने वाले मनुष्य की मौत जब स्मृति के ही खो जाने से हो जाए, तो वह किसी खबर से भी बहुत ज्यादा बड़ी बात होती है। याददाश्त उनकी बहुत गजब थी, सदियों पुरानी विवेचना से लेकर दशकों पुराने विश्लेषण को वे पल भर में तथ्यों के साथ सामने रख देते थे। वही स्मृति आखिरी दिनों में दगा दे गई थी और 6 जून 2022 को ले गई सतीशजी को अपने साथ। लगभग तीन दशक तक वे जनसत्ता में रहे, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय ख्याति मिली उन्हें इस्लामिक आतंकवाद पर लिखी पुस्तक से।  सन 2017 में आई सतीश पेडणेकर की बहुचर्चित पुस्तक आइएसआइएस और इस्लाम में सिविल वार ने इस्लामिक कट्टरता की जिस तर्ज पर बखिया उधेड़ी, वह हिम्मत उनसे पहले और कोई नहीं कर सका। इसी पुस्तक ने सतीशजी को अपने साथ काम कर चुके कई स्वयंभू दिग्गजों व संपादकों से भी अचानक बहुत बड़ा बना दिया। राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रखर पत्रकार के रूप में सतीश पेडणेकर की छाप सबके दिलों पर अमिट है। ग्वालियर में जन्मे और दिल्ली में इस लोक से विदा हुए सतीश पेडणेकर को शुरुआत में नाम संघ परिवार के अखबार पांचजन्य से मिला और बाकी जिंदगी जनसत्ता में गुजारकर खुद भी गुजर गए। 


 

काफी दिलचस्प हो गया है आजगढ-रामपुर लोकसभा उप-चुनाव

अजय कुमार, लखनऊ

योगी, अखिलेश, माया और आजम की प्रतिष्ठा पर बड़ा दांव

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से चुनावी बयार बहने लगी है। राज्यसभा से लेकर विधान परिषद की रिक्त सीटों के लिए तो चुनाव हो ही रहा है,इसके अलावा आजम और अखिलेश यादव के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा पर भी चुनाव होना है। यह दोनों सीटें आजम और अखिलेश के हाल ही में सम्पन्न विधान सभा चुनाव में विधायक चुने के बाद खाली हुई हैं,विधान सभा का चुनाव जीतने के बाद दोनों नेताओं ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। दोनों सीटों पर होने वाले उप-चुनाव के नतीजों से केन्द्र की सियासत पर तो कोई बदलाव नजर नहीं आएगा,लेकिन जो भी दल यह चुनाव जीतेगा,उसके लिए यह जीत 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बूस्टर डोज का काम करेगी। इसी लिए भाजपा और सपा ने दोनों ही सीटों पर पूरा दमखम लगा रखा है,वहीं बात बसपा और कांग्रेस की कि जाए तो बसपा ने आजम खान करीबी प्रत्याशी के समर्थन में रामपुर से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है,जबकि कांग्रेस चुनाव लड़ ही नहीं रही है,जो चुनावी तस्वीर उभरती नजर आ रही है उसके अनुसार आजमगढ़ में बसपा, भाजपा-सपा प्रत्याशियों को कड़ी चुनौती देते नजर आ सकते हैं। वहीं रामपुर में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधी टक्कर होगी। कहने को तो यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सिर्फ दो सीटों पर ही चुनाव हो रहे हैं,लेकिन इन चुनावों ने भी एक बार फिर तमाम सियासी दलों के नेताओं और राजनैतिक पंडितों के दिलों की धड़कने तेज कर दी हैं।खास बात यह है कि आजमगढ़ और रामपुर दोनों ही मुस्लिम बाहुल्य सीटे हैं,जिसका अक्सर फायदा समाजवादी पार्टी को ही मिलता है,लेकिन मायावती ने आजमगढ़ में मुस्लिम प्रत्याशी खड़ा करके चुनावी बिसात पर अपनी चाल चल दी है।

26.5.22

बीएसए जालौन पुस्तक घोटाला


 
बेसिक शिक्षा विभाग के पुस्तक घोटने की जाँच हेतु मंडल स्तरीय जाँच समिति गठित

▪️जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने कमिश्नर से की थी जिला स्तरीय जांच में खानापूरी की शिकायत

▪️राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर लगाया था शिक्षकों पर दबाव बनाकर झूठी रिपोर्ट माँगने का आरोप

1991 उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम का स्पष्टीकरण

प्रस्तुति : डा.राधे श्याम द्विवेदी एडवोकेट

1991 उपासना स्थल अधिनियम का उद्देश्य स्पष्ट रूप से कहता है कि यह किसी भी पूजा स्थल के रूपांतरण को प्रतिबंधित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि उसका धार्मिक रूप वैसा ही रहे, जैसा कि वह 15 अगस्त, 1947 को अस्तित्व में था। अधिनियम में धारा 3 और धारा 4 इसी आधार पर तैयार की गई हैं.

भगवतीचरण वोहरा की शहादत को याद करते हुए


-    कल्पना पांडे   

 भगत सिंह के महत्वपूर्ण साथी भगवती चरण वोहरा का जन्म 4 नवंबर, 1903 को लाहौर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। वे एक गुजराती ब्राह्मण थे। उनके पिता पंडित शिवचरण वोहरा रेलवे में एक उच्च पदस्थ अधिकारी थे। उन्हें अंग्रेजों द्वारा 'रायसाहब' की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। चूंकि उस समय टाइपराइटर नहीं था, इसलिए भगवती चरण के दादाजी आगरा को जीवन निर्वाह के लिए लिखते (किताबत) थे। उनके पूर्वज गुजरात से आगरा और आगरा से लाहौर चले गए। उपनाम वोहरा (संस्कृत मूल: व्यूह) का अर्थ उर्दू में व्यापारी भी है। माना जाता है कि भगवतीचरण के परिवार ने अपना अंतिम नाम खो दिया था क्योंकि उन्होंने लाहौर के मुस्लिम-बहुल इलाके में ब्राह्मण के रूप में अपनी नौकरी छोड़ दी थी। भगवती चरण के दादाजी के बारे में एक मजेदार कहानी है। उस समय वह एक रुपया प्रतिदिन कमाते थे, और एक रुपया कमाने के बाद वह काम करना बंद कर दिया करते थे। डेढ़ सौ साल पहले आज की तरह असुरक्षा और लालच नहीं था। 1918 में, जब वह सिर्फ 14 साल के थे, उनके माता-पिता ने उनकी शादी 11 वर्षीय दुर्गावती देवी से कर दी, जिन्होंने 5 वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी।

सहारा और सपा की कानूनी ढाल बनेंगे कपिल सिब्बल

चरण सिंह राजपूत-

सहारा के चैयरमैन सुब्रत राय तो कानूनी रूप से घिर ही चुके हैं अब सपा दिग्गजों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाने का अंदेशा अखिलेश यादव को लगने लगा है। पिता मुलायम सिंह यादव के बल पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यध बने अखिलेश यादव जो राजनीति कर रहे हैं उसे समाजवाद तो कतई नहीं कहा जा सकता है। विपक्ष में रहते हुए भी आंदोलनों से दूर रहने वाले अखिलेश यादव पर अब पूंजीवाद में ढलने का अंदेशा जताया जाने लगा है। ओमप्रकाश राजभर के अखिलेश यादव को ऐसी से बाहर निकलकर जमीनी राजनीति करने की नसीहत भी उनको कोई सीख न दे सकी। अब वह कांग्रेसी कपिल सिब्बल को राज्यसभा भेज रहे हैं। बाकायदा कपिल सिब्बल के पर्चा दाखिल करने के समय वह मौजूद रहे। कपिल सिब्बल को राज्यसभा भिजवाने में सहारा के चैयरमैन सुब्रत राय का बड़ा हाथ माना जा रहा है।

15.5.22

सागर के मरीज इलाज के लिए दूसरे शहर जाने को है मजबूर!

सतीश भारतीय-

मध्यप्रदेश का सागर शहर जिसे 'भारत का हदयस्थल' भी कहा जाता है। सागर के अंतर्गत करीब 2244 गांव आते है। जिनकी अनुमानित जनसंख्या 30 लाख है। इस लाखों की तादाद वाले शहर में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज है। जिसे बुन्देलखंड मेडिकल कॉलेज के नाम से भी जाना जाता है। यहां रोगों के उपचार हेतु शहर से लेकर गांव तक के लोग आते है। जिससे गरीब आवाम मेडिकल कॉलेज सागर को जिले की रीढ़ की हड्डी मानती है। लेकिन इतनी बड़ी मेडिकल कॉलेज में गंभीर बीमारियों की जांच और उपचार के लिए कोई उपयुक्त व्यवस्था नहीं है। जिससे सागर जिले के हजारों लोग रोेजाना नागपुर (दूरी करीब 400 किमीं), भोपाल (दूरी करीब 200 किमीं) और जबलपुर (दूरी करीब 180 किमीं) जैसे शहरों में इलाज कराने के लिए जाते है। ऐसे में मरीजों का इन शहरों में आने-जाने और इलाज कराने में तकरीबन 3 दिन तक का समय लग जाता है। 



फिनलैंड पर हमला करना रूस के लिए यूक्रेन से भी ज्यादा आसान है

डॉ. वेदप्रताप वैदिक-

नाटो का विस्तार और भारत.... ‘नाटो’ नामक सैन्य संगठन में अब यूरोप के दो नए देश भी जुड़नेवाले हैं। ये हैं- फिनलैंड और स्वीडन। इस तरह 1949 में अमेरिका की पहल पर बने 15 देशों के इस संगठन के अब 32 सदस्य हो जाएंगे। यूरोप के लगभग सभी महत्वपूर्ण देश इस सैन्य संगठन में एक के बाद एक शामिल होते गए, क्योंकि शीतयुद्ध के जमाने में उन्हें सोवियत संघ से अपनी सुरक्षा चाहिए थी और सोवियत संघ के खत्म होने के बाद उन्हें स्वयं को संपन्न करना था। फिनलैंड, स्वीडन और स्विटजरलैंड जान-बूझकर सैनिक गुटबंदियों से अलग रहे लेकिन यूक्रेन पर हुए रूसी हमले ने इन देशों में भी बड़ा डर पैदा कर दिया है। फिनलैंड तो इसलिए भी डर गया है कि वह रूस की उत्तरी सीमा पर अवस्थित है। रूस के साथ उसकी सीमा 1340 किमी की है, जो नाटो देशों से दुगुनी है। फिनलैंड पर हमला करना रूस के लिए यूक्रेन से भी ज्यादा आसान है। 

सुब्रत राय को संरक्षण देने के बराबर है सुप्रीम कोर्ट का पटना हाईकोर्ट के गिरफ्तारी वारंट पर स्टे देना!

चरण सिंह राजपूत-

नई दिल्ली। यह बात बहुत प्रचलित है कि कोर्ट पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। मीडिया में तो इस बारे में सख्त निर्देश होते हैं। सुप्रीम कोर्ट को तो देश की सर्वोच्च संस्था माना जाता है। क्या आज सुप्रीम कोर्ट अपनी विश्वसनीयता को बरकरार रख पा रहा है ?  वैसे तो देश में अनगिनत मामले हैं जिनको लेकर सुप्रीम कोर्ट के रवैये को लेकर उंगली उठाई जा रही है पर सहारा के चैयरमेन का मामला तो ऐसा मामला बनता जा रहा है कि जैसे सुप्रीम कोर्ट उन्हें संरक्षण दे रहा हो।

राज्यसभा चुनावः आजम-शिवपाल पर टिकी रहेंगी सबकी नजरें

                                    अजय कुमार,लखनऊ

 उत्तर प्रदेश की सियासत में दस जून का दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दिन उत्तर प्रदेश से रिक्त होने वाली राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान होना है।सभी 11 सीटों पर नतीजे लगभग तय हैं। आठ सीटें भाजपा और तीन सीटें भाजपा की झोली में गिरती दिख रही हैं। इन चुनावों में बसपा और कांग्रेस के पास हासिल करने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन यह चुनाव इस हिसाब से महत्वपूर्ण होंगे कि समाजावादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं सपा विधायक शिवपाल यादव किस तरफ खड़े नजर आएंगे या फिर तटस्थ रहेगें। शिवपाल यादव तो अपने भतीजे अखिलेश यादव से नाराज चल ही रहे हैं,लेकिन आजम को लेकर अभी सब कुछ स्पष्ट नहीं है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव कह रहे हैं कि आजम खान उनके साथ हैं,लेकिन जिस तरह से आजम समर्थक अखिलेश पर हमलावर हैं और पिछले दिनों जेल में बंद आजम खान ने सपा विधायक रविदास महरोत्रा जिन्हें अखिलेश का प्रतिनिधि माना जा रहा था, से मिलने से इंकार कर दिया था,उससे आजम को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। 

12.5.22

बस्ती जिले की पत्र पत्रिकाओं पर प्रशासन ने कसा शिकंजा

बस्ती, अपर प्रेस पंजीयक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय नई दिल्ली द्वारा जनपद बस्ती से प्रकाशित समाचार पत्र/पत्रिकाओं की विगत पॉच वर्षो के दौरान वार्षिक विवरणी न प्रस्तुत करने पर प्रकाशन को निरस्त करने के लिए जिला कलेक्टर/जिला मजिस्टेªट को पत्र प्रेषित किया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी श्रीमती सौम्या अग्रवाल ने अपर जिलाधिकारी एवं सहायक निदेशक सूचना को अग्रिम कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। 

अगर नई पीढ़ी ने सवाल नहीं किया तो आचार्य कृपलानी का संघर्ष अधूरा रह जाएगा - विजय दत्त श्रीधर

आचार्य कृपलानी स्मृति व्याख्यान : 2021-22

नई दिल्ली। देश की शासन व्यवस्था में जिस तरह 'तंत्र' यानी सिस्टम 'लोक' यानी जनता पर हावी हो रहा है, वह आज के समाज के लिए एक गंभीर चिंता है। इसको दुरुस्त करने के लिए नई पीढ़ी को सवाल करने होंगे। अगर ऐसा नहीं किया गया तो वह संघर्ष अधूरा रह जाएगा जिसे आचार्य कृपलानी ने पंडित नेहरू के शासन काल मेँ शुरू किया था। 

नवोदय टाइम्स, पंजाब केसरी जलांधर, जगवाणी, हिंद समाचार ग्रुप में पिछले चार सालों से वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं

दोस्तों नमस्कार,

हमारे देश भारत में जो चौथा स्तंभों पर खड़ा हैं

1. न्यापालिका

2. कार्यपालिका

3.विधायकी

4. मीडिया

सड़क पर नंगा करती है नये भारत की पुलिस

पहले वे कम्युनिस्टों के लिए आए।

और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं कट नहीं बोला क्योंकि मैं ट्रेड यूनियन में नहीं था।

फिर वे यहूदियों के लिए आए और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं यहूदी नहीं था‌ फिर वे मेरे लिए आए

और तब कोई बचा ही नहीं था जो मेरे लिए बोलता"।

मानवाधिकार मीडिया में पत्रकार बनाने का बढ़ रहा धंधा

देश का चौथा स्तंभ कहा जाने वाला मीडिया संस्थान अब मार्केट में दीपावली व होली की तरह ऑफर देने लगा है। जिससे युवाओं को बेरोजगार करने का ही रास्ता बनता जा रहा है। क्योंकि युवा पत्रकार बनने की होड़ में इन्हें 3 हजार रुपये से लेकर 2 हजार रुपये तक दे देते हैं। और वह पत्रकार बनकर समाज के अधिकारियों व सामाजिक लोगों को परेशान करने लगते हैं। जिससे कहीं कहीं पर इन मीडिया से जुड़े पत्रकारों को भी शोषित होना पड़ता है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित मानवाधिकार मीडिया के नाम से एक संस्थान पिछले कई वर्षों से चल रहा है। 



अब दुनिया विचारों से नहीं टेक्नोलॉजी से बदल रही है - हरिवंश

सोशल मीडिया के दौर में प्रिंट मीडिया कैसे बचाए अपना वजूद विषय पर राजेंद्र माथुर स्मृति व्याख्यान आयोजित

इंदौर प्रेस क्लब के स्थापना दिवस पर वरिष्ठ पत्रकारों का हुआ सम्मान

इंदौर। टेक्नोलॉजी बेहद खतरनाक है, जो हमारे मानवीय मूल्यों और सिद्धांतों पर ग्रहण लगा रही है। इससे बचने की जरूरत है। पहले दुनिया विचारों से बदलती थी, लेकिन अब टेक्नोलॉजी से बदल रही है। पहले हमारे सबसे बड़े विचारों के पुंज काशी, प्रयाग, पाटलिपुत्र हुआ करते थे, लेकिन अब सिलिकॉन वैली, हैदराबाद पुणे जैसे स्थान हो गए हैं। यह विचार राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश के हैं, जो उन्होंने इंदौर प्रेस क्लब के 60वें स्थापना दिवस पर जाल सभागृह में आयोजित सोशल मीडिया के दौर में प्रिंट मीडिया कैसे बचाए अपना वजूद विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता ने की। विषय प्रवर्तन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने किया। यह व्याख्यान मूर्धन्य पत्रकार राजेंद्र माथुर की स्मृति में किया गया था। इस अवसर पर पत्रकारिता की स्वर्णिम यात्रा पूर्ण कर चुके वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान किया गया। मंच पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल जस्टिस वी.एस. कोकजे, सांसद श्री शंकर लालवानी, दे.अ.वि.वि. की कुलपति डॉ. रेणी जैन विशेष रूप से मौजूद थे। 

For unaffordable and money making fee structure at noida

Respected/Hon'ble Sir,

Through this e-mail I wants to bring into your notice about the costlier and unaffordable education in private schools at noida.This is a serious issue as the education is the basics of every child's life.

अजीत अंजुम जी के नाम एक खुला पत्र

 अजीत अंजुम जी,

हाल ही में आपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से अपने यूट्यूब चैनल के लिए कुछ वैकेंसी निकाली हैं। ज़ाहिर सी बात है आप पत्रकारिता कर रहे हैं तो अकेले आख़िर कितना काम करेंगे काम में हाथ बंटाने वाले कुछ लोग तो चाहिए ही होंगे जो आपके काम को अपना समझकर कर सकें। इसी वजह से टीम को बढ़ाने की आवश्यकता भी होगी और यह ज़रूरी भी है। चूँकि आप देश के वायरल पत्रकारों में से एक हैं तो कल आपकी पोस्ट चंद घंटों में ही पत्रकारिता जगत से जुड़े हज़ारों लोगों की मोबाइल स्क्रीन पर फ़्लैश कर गई जिसके बाद से एक बहस छिड़ी हुई है और उसी बहस में सोशल मीडिया के धुरंधरों ने आपका भूतकाल तक खोद निकाला है। यहाँ तक कि लोगों ने आप पर सामंतवादी सोच का होने से लेकर जूनियर्स से जबरन समय से ज़्यादा काम कराने समेत कई तरह के आरोप मढ़ दिए हैं। ख़ैर, जो बहस छिड़ी है वह लाज़मी भी है। क्यों की आपने पोस्ट में मोटा-माटी एक दर्जन से अधिक खूबियाँ गिना दी हैं जो आप सामने वाले में ढूँढ रहे हैं। फ़िलहाल देश यह नहीं जानता की उनमें से आपके अंदर कितनी खूबियाँ हैं। 

अधिमान्य पत्रकार का नहीं कोई मापदण्ड

राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। मीडियाकर्मियों को अधिमान्य पत्रकार का दर्जा दिया जाने को लेकर जो खेल चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। लोग 30 वर्षो से कार्य करने के बाद भी अपने आपको अधिमान्य पत्रकार का दर्जा नहीं दिला पाये और कुछ स्थानों पर स्थिति है एक समाचार पत्र से ही अनेक लोग जो अधिमान्य पत्रकार के मानक मापदंडो के विरूद्ध अधिमान्य होकर शासन की योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।

लुधियाना का बूढ़ा नाला : पानी रे पानी, तेरा रंग क्यों इतना काला?

12 सौ करोड़ के प्रोजेक्ट के उपरांत भी हालात में नहीं हो पा रहा सुधार

नामधारी सतगुरु उदयसिंह भी अब अध्यक्ष पद छोडऩे का कर रहे विचार

जिस कमेटी में मुख्य सचिव, वह कमेटी भी अधिकारियों में इच्छाशक्ति को नहीं कर पाई बलवती

द सांध्य नेटवर्क

लुधियाना/श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ सहित आधा दर्जन जिलों में पेयजल के रूप में जिस सतलुज नदी के पानी का इस्तेमाल किया जाता है, उस नदी की हालत को सुधारने के लिए नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, केन्द्र सरकार ने बहुतेरे प्रयास किये। मोदी सरकार ने 12 सौ करोड़  से ज्यादा बजट भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के रूप में मंजूर किया किंतु लुधियाना नगर निगम, प्रशासन के अधिकारियों की इच्छाशक्ति के अभाव में यह कार्य नहीं हो पाया। पंजाब सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक निगरानी कमेटी का भी गठन किया ताकि कार्य निर्बाध गति से पूर्ण किया जा सके किंतु यह कमेटी भी उद्योगों के रसायन को सतलुज नदी तक जाने से नहीं रोक पायी। नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल करीबन पांच सौ करोड़ रुपये सरकार पर जुर्माना लगा चुका है किंतु नतीजा जीरो है। इन सब हालात को देखते हुए नामधारी सतगुरु उदयसिंह अब कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं।

11.5.22

लघुपत्रिकाएं : वैकल्पिक पत्रकारिता का स्वप्न

- शैलेन्द्र चौहान

दिनेशपुर, उत्तराखंड में अखिल भारतीय लघु पत्र-पत्रिका सम्मेलन का आयोजन हो रहा है| कुछ समय पूर्व पलाश विश्वास ने पत्रकारिता और साहित्य के संपादन संबधों की चर्चा की थी जिसमें मूल बात यह थी कि रघुवीर सहाय और सव्यसाची जैसे संपादक नये लोगों की रचनाओं को एकदम रिजेक्ट न करके उनकी कमियां बताते थे| उन्हें ठीक करवाते थे और छापते थे| एक और संपादक प्रभाष जोशी को भी एक प्रोफेशनल और समूह-नायक के तौर पर याद किया है| यद्दपि उनके विचारों को लेकर कुछ विवाद भी रहे लेकिन उनका योगदान अवश्य अविस्मरणीय है| आज विडंबना यह है कि दूरदराज के लेखकों को विकसित करना और प्रशिक्षित करना संपादकों के द्वारा अब नहीं हो पा रहा है| यह अब मुश्‍किल है|  

मासूम हाथ परोस रहे शराब

Shashi kant kushwaha- 



सिस्टम की खामियों का खामियाजा भुगत रहे मासूम बच्चे

सिंगरौली: चिराग तले अंधेरा की कहावत तो हम सभी पूरी तरह से वाकिफ हैं ऐसा ही एक मामला सिंगरौली जिले से निकल कर सामने आया है दरसल यह हमारे सिस्टम की बड़ी लापरवाही के रूप में कही जा सकती है। ऐसा नही है कि इस मामले की जानकारी जिम्मेदारों को नही है वो बात अलग है कि इतनी बड़ी लापरवाही को जिम्मेदार नजरअंदाज कर रहे हैं । कुछ दिनों पहले हमने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर इसकी खबर प्रमुखता से उठाया था ।दरशल महज 8 से 10 साल उम्र के बच्चे जिनकी उम्र खेलने कूदने पढ़ने लिखने की है वो बच्चे अवैध मयखाने में शराब परोसने प्लेट लगाने और जूठी प्लेट उठाने का कार्य करते हैं वह भी हमारे सिस्टम की नाकामी की वजह से ।

आजादी की पहली चिंगारी : ब्रिटिश सरकार ने माना कि भारत पर शासन में बहुत गलतियां हुईं!

- शैलेन्द्र चौहान

1857 में वह ऐतिहासिक दिन 10 मई था, जब देश की आजादी के लिए पहली चिंगारी मेरठ से भड़की थी। सबसे पहले मेरठ के सदर बाजार में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ चिंगारी भड़की, जो पूरे देश में फैल गई। मेरठ के क्रांति स्थल और अन्य धरोहर आज भी क्रांति की याद ताजा करती हैं। 1857 में अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने के लिए रणनीति तय की गई थी। एक साथ पूरे देश में आजादी का बिगुल फूंकना था, लेकिन मेरठ में तय तारीख से पहले अंग्रेजों के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इतिहासकारों की मानें और राजकीय स्वतंत्रता संग्रहालय में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित रिकार्ड को देखें तो दस मई 1857 को शाम पांच बजे जब गिरिजाघर का घंटा बजा, तब लोग घरों से निकलकर सड़कों पर एकत्र होने लगे। सदर बाजार क्षेत्र में अंग्रेज फौज पर भीड़ ने हमला बोल दिया। नौ मई को 85 सैनिकों का कोर्ट मार्शल किया गया था। उन्हें विक्टोरिया पार्क स्थित नई जेल में बंद कर दिया था। दस मई की शाम इस जेल को तोड़कर 85 सैनिकों को आजाद करा दिया गया। कुछ सैनिक रात में ही दिल्ली पहुंच गए और कुछ सैनिक 11 मई की सुबह दिल्ली रवाना हुए और दिल्ली पर कब्जा कर लिया था।

झांसी मंडल में योगी का दौरा और उनकी साफगोई से बंधी उम्मीदें

K.P.Singh-

बुन्देलखण्ड का इलाका उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े अंचलों में गिना जाता है। लेकिन यह धार्मिक महत्व का इलाका भी है। माना जाता है कि रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्म भूमि और कर्मभूमि दोनों बुन्देलखण्ड में थी इसलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस अंचल के प्रति विशेष अनुराग सर्व विदित है। उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड को प्रशासनिक दृष्टिकोण से अब दो भागों में विभक्त कर दिया गया है। झांसी मंडल अलग हो गया है और बांदा मंडल चित्रकूट मंडल के नाम से अलग है। पुलिस की दृष्टिकोण से तो और अधिक भिन्नता है। झांसी रेंज कानपुर जोन का हिस्सा है जबकि बांदा रेंज अभी भी इलाहाबाद जोन में ही शामिल रखा गया है।

24.3.22

कश्मीर फाइल्स की आड़ में अभी तक के देश के सारे भाग्य विधाताओं को लाइन में लगाने के प्रयास से क्या हल होगा

Krishan pal Singh-

कश्मीर फाइल्स फिल्म 32 वर्ष पहले घाटी में बर्बर और पाशविक अत्याचार के बल पर उजाड़े गये कश्मीरी पंडितों की कहानी को नये सिरे से सुनाती है। लेकिन क्या इसे निरपेक्ष रूप से एक मार्मिक फिल्म भर कहा जा सकता है। निश्चित रूप से इसके पीछे राजनीतिक दुराशय है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती और इसने फिल्म के नैतिक पक्ष को संदिग्ध बना दिया है। सबसे बड़ी आपत्तिजनक बात यह है कि इस फिल्म की आड़ में जो विमर्श खड़ा किया जा रहा है उसका मकसद इसके पहले के देश के सारे भाग्यविधाताओं को एक लाइन से हिन्दू विरोधी और देश विरोधी साबित करना है। यहां तक कि भाजपा की ही पार्टी के सबसे बड़े यशस्वी राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी पर भी इस तरह के छींटे पड़ने की परवाह नहीं की गई है। हर प्रसंग पर तत्कालीन भाग्य विधाताओं का फैसला परिस्थिति सापेक्ष होता है और वर्तमान की बदली हुई परिस्थिति में उस फैसले के आधार पर उनकी मंशा को लेकर कोई निष्कर्ष निकालने में बहुत सावधानी की जरूरत पड़ती है अन्यथा उनके साथ न्याय नहीं हो सकता।  

19.3.22

बीजेपी की जीत में मायावती की गुप्त मदद

Unmesh Gujarathi-
    
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों ने 403 सीटों में से 273 सीटों पर जीत हासिल की है। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार बीजेपी को 52 सीटों का नुकसान हुआ है। बीजेपी के लिए ये जीत इतनी आसान नहीं थी। इसलिए बीजेपी ने भी दलित और जातिगत आधारित राजनीति का कार्ड खुल कर खेला। भाजपा ने भी अपनी एक समय की दुश्मन बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ अंदरखाने में गठबंधन बनाकर, समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोटों में सेंध लगा कर किसी तरह सत्ता हथिया ली है।

न्यायपलिका और न्यायधीश से आज भी उम्मीदें जिंदा है...

के. सत्येन्द्र-

कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायधीश को पैसे से प्रभावित करने के मामले से समूचा कानून जगत स्तब्ध है लेकिन यह भी सत्य है कि बहुत से ऐसे मामले सामने आ ही नही पाते ।

वरिष्ठ कवि बुद्धिसेन शर्मा का निधन

प्रयागराज। नगर के वरिष्ठ कवि बुद्धिसेन शर्मा का मंगलवार की सुबह निधन
हो गया। 26 दिसंबर 1941 को कानपुर में जन्मे बुद्धिसेन शर्मा प्रयागराज
के करैलाबाग कॉलोनी में निवास करते थे, लंबे समय से बीमार होने के कारण
अपने शार्गिद इश्क़ सुल्तानपुरी के साथ गौरीगंज में रह रहे थे। उन्होंने
आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। समाचार पत्र
‘दैनिक प्रताप’, ‘भारत’ और ‘मनोरमा’ पत्रिका में उन्होंने काम किया था।
मुशायरों में भाग लेने के लिए कई देशों की यात्रा की थी। देश राष्टपति के
हाथों उन्हें ‘साहित्य श्री’ की उपाधि मिली थी। इसके अलावा वर्ष 2019 में
गुफ़्तगू द्वारा उन्हें ‘अकबर इलाहाबादी सम्मान’ प्रदान किया गया था।
उनका एक ग़ज़ल संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला था। श्री शर्मा का अंतिम
संस्कार मंगलवार को शाम चार बजे रसूलाबाद घाट पर किया जाएगा।
गु़्फ़्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, प्रभाशंकर शर्मा, मनमोहन सिंह
तन्हा, नरेश कुमार महरानी, अनिल मानव, शैलेंद्र जय, नीना मोहन
श्रीवास्तव, विजय प्रताप सिंह, मासूम रजा राशदी, संजय सक्सेना, अफ़सर
जमाल, डॉ. नीलिमा मिश्रा, इश्क़ सुल्तानपुरी, रेशादुल इस्लाम, शिवाजी
यादव, देवेंद्र प्रताप वर्मा, संजय सागर, अर्चना जायसवाल, शिवपूजन सिंह
सरिता श्रीवास्तव, डॉ. मधुबाला सिन्हा, जया मोहन, दयाशंकर प्रसाद आदि ने
उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

12.3.22

भारत में केवल एक नेता की जरूरत है जो नई कांग्रेस बनाने की घोषणा करे

करणीदानसिंह राजपूत-

भारत में केवल एक नेता की  जरूरत है जो नई कांग्रेस बनाने की घोषणा करे। नया विधान और नया निशान हो। अब घोषणा हो ताकि सन 2024 के लोकसभा आमचुनाव से पहले  संपूर्ण देश भर में उठाव हो सके।  इसके बाद कॉन्ग्रेस का मानस बदल जाएगा स्वरूप बदल जाएगा और लोग जाग जाएंगे। केवल नामों में पदों में जिंदा रहने वाले लोग पूरे देश में खत्म हो जाएंगे। कॉन्ग्रेस इसलिए पिट रही है हार रही है कि उसमें से कोई एक भी व्यक्ति घोषणा नहीं कर रहा।

उत्तर प्रदेश के चुनाव में कैसे भारी पड़ी व्यवहारिक सच्चाईयां

Krishan pal Singh-

उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव नतीजे सामने आ चुके हैं। अब समय उनके निष्कर्षो के चीढ़ फाड़ का है। मुझ सहित अधिकांश राजनीतिक विश्लेषक प्रदेश की सरकार के बारे में अपने अंदाजे बिफल हो जाने से परेशान हैं। चुनाव में किसी तरह की हेरा फेरी साबित करने का कोई सबूत तलाशने से भी नहीं मिला सो प्राश्यचित इस बात का है कि जमीनी सच्चाई जानने में हमसे कहां चूक हुई। बड़ी संख्या में खिन्न लोग हमें मिले थे जिन्होंने चुनाव के पहले सरकार के कामों पर तीव्र असंतोष प्रकट किया था जबकि इनमें से अधिकांश ने 2017 में भाजपा की ही पालकी ढ़ोने में गुरेज नहीं किया था। हमारे लिए पहेली बन गया है कि ये वोट कहां चले गये। आकलन में हमसे कहां से चूक हुई ताकि भविष्य में अपनी विश्वसनीयता के लिए हम अधिक सतर्कता से काम कर सकें।

9.3.22

कनाडा की महिला संस्था ने असमिया कवयित्री को किया सम्मानित

Vikram Singh Rathod-

असमिया कवयित्री और गायिका तनुप्रिया कलिता को यूनिवर्सल विमेंस नेटवर्क, कनाडा द्वारा वूमेन ऑफ़ इंस्पिरेशन अवार्ड २०२२ में सांस्कृतिक राजदूत के रूप में नामित किया गया है । उन्हें यह नामांकन साहित्य और संगीत में उनके योगदान के लिए मिला है।

उत्तर प्रदेश में छुट्टा गोवंश की समस्या : चुनौतियां एवं समाधान

उत्तर प्रदेश में छुट्टा पशुओं की समस्या एक मानव जनित सामाजिक समस्या है जिसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव कृषि पर पड़ा है. गाँव गाँव में सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु खुले आम घूम रहे हैं और फसल को बर्बाद कर रहे हैं. किसानों की व्यथा अंततः विभिन्न मंचों के माध्यम से राजनैतिक दलों,  प्रशासन  एवं सरकार तक भी पहुंच चुकी है. विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से उठता रहा.  स्वयं प्रधानमन्त्री तक को इस समस्या को स्वीकारते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन देना पड़ा. विभिन्न दलों के घोषणा पत्र और चुनावी भाषणों के दौरान छुट्टा गोवंश की समस्या की चर्चा हुयी. अगले सप्ताह तक प्रदेश में नयी सरकार का गठन हो जाना है, आगामी सरकार के समक्ष भी इस समस्या के समाधान हेतु कारगर उपाय करने का दबाव होगा. आइये, जमीनी सच्चाई को स्वीकारते हुए समस्या और समाधान पर कुछ समझने की चेष्टा करें.

7.3.22

पत्रकारिता का राष्ट्रधर्म

जयराम शुक्ल-

राष्ट्रवाद इन दिनों विमर्श के केन्द्र पर है। भारत के संदर्भ में और वैश्विक संदर्भ में भी। राजनीतिक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पक्ष व विपक्ष पर खूब चर्चाएं हुईं, हो रही हैं, तो भला पत्रकारिता इससे क्यों अछूती रहे। उसमें भी राष्ट्रवाद के तत्व तलाशे जा रहे हैं।

महिला दिवस विशेष : दख़ल ज़रूरी है आह्लादिनी का

-डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'

सृष्टि की उत्पत्ति से, सृजन की वेदिका से, अक्ष के केन्द्र से, धर्म के आचरण से, कर्म की प्रधानता से, कृष के आकर्षण से, सनातन के सत्य से , चेतन के अवचेतन से, जो ऊर्जा का ऊर्ध्वाधर प्रभाव पैदा होता है, वह निःसंदेह सृजन के दायित्वबोध के कारण संसार की आधी आबादी को समर्पित है। ब्रह्माण्ड  की समग्र अवधारणा के केन्द्र में जो भाव स्थायी रूप से विद्यमान है, उन भावों के पोषण, पल्लवन और प्रवर्तन के लिए सृष्टि की प्रथम सृजक को पूजनीया के साथ-साथ पालक और पोषक की भूमिका का निर्वहन भी करना चाहिए।

27.2.22

राजस्थान भास्कर में अब पंचांग भी गलत छपने लगा!

Priyanka-
    
 राजस्थान में प्रकाशित दैनिक भास्कर में अब पंचांग भी गलत छपने लगा. इसकी चर्चा फेसबुक पर हो रही और लोग कमियों के बारे में बता रहे हैं.

13.2.22

इमरान खान मुसीबत में, पाकिस्तान में अनिश्चितता

pankaj mishra-
 
1965 के भारत -पाकिस्तान के युद्ध के बाद सोवियत संघ की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच ताशकन्द में समझौते की बातचीत हो रही थी. इस बातचीत में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान कर रहे थे. पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल में  थे .इसी दौरान एक बार  सोवियत प्रतिनिधिमंडल  से बातचीत के बीच जुल्फिकार अली भुट्टो ने जनरल अयूब के कान में कुछ कहा .भुट्टो की बात सुनते ही जनरल साहब को गुस्सा आ  गया और जोर से बोले "उल्लू के पट्ठे बकवास बंद करो ".

मोदी शाह नड्डा जी चुनाव में कांग्रेसियों को नहीं, लोकतंत्र सेनानियों को गले लगाओ।

 करणीदानसिंह राजपूत-

लोकतंत्र सेनानियों ने तो आपातकाल में कुर्बानियां देने के लिए सब कुछ छोड़ दिया था। अत्याचार सहे।आप तो उन कुर्बानियां देने वाले लोकतंत्र सेनानियों के हाल जानने के लिए भी कभी नहीं निकले। आपके पास देने को समय तक नहीं है। लोकसभा में मोदी जी द्वारा आपातकाल में कुरबानियां देने वालों पर भाषण देना और सेनानियों का जीवन उनके घर जाकर देखने में बड़ा अंतर है। असली आंसुओं और मगरमच्छी आंसुओं में जो अंतर होता है वह आपके भाषण की असलियत है।

11.2.22

आरएसएस का हिन्दू राष्ट्र का सपना उत्तर प्रदेश में क्यों लड़खड़ाया

Krishan pal Singh-

यह तो सर्वविदित है कि आरएसएस का लक्ष्य देश में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना रहा है। अब जबकि आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष 2025 में पूरे होने जा रहे हैं तो अपने शताब्दी वर्ष में हिन्दू राष्ट्र के सपने को साकार रूप देने के लिए वह अधीरता की हद तक जल्दबाजी में है। अधिकांश लोग हिन्दू राष्ट्र से सिर्फ यह तात्पर्य रखते हैं कि इसका अर्थ मुसलमानों सहित सभी गैर हिन्दू अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे के नागरिक के रूप में व्यवहारिक रूप से बसर करने को अपनी नियति मान लेने के लिए मजबूर करना है जबकि हिन्दू राष्ट्र के वास्तविक सरोकार इससे कहीं आगे हैं। इसका अभीष्ट देश में वर्ण व्यवस्था के शासन को कायम करना है लेकिन आज बक्त जहां पहुंच चुका है उसमें इस दुराग्रह से कई जटिलतायें पैदा हो सकती हैं जिनके बारे में आरएसएस ख्याल नहीं कर सकी है। वैसे भी हिन्दू राष्ट्र के अपने अंतर्विरोध भयानक हैं जिसे अपनी कल्पना में उसने भुला दिया था। उत्तर प्रदेश में अपने हस्तक्षेप से आरएसएस ने हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को फलीभूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया था पर अब यह उसके गले की फांस बन गया है जिसके कारण भाजपा को उत्तर प्रदेश में अपनी सत्ता की वापिसी के लिए लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं।

ABP Network marks 50% growth in total unique visitors

Comscore Data, Dec 2020-Dec 2021
 
Only news publisher in the top-10 category to register 50% y-o-y growth
 
Noida, 11th February 2022: ABP Network’s growth story continues, and shows how the trailblazer in the digital space has emerged as a leader in a short span.

4.2.22

69000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने सरकार के विरुद्ध बिगुल फूंका

 69000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित ओबीसी तथा एससी वर्ग के अभ्यर्थियों ने  शिक्षक भर्ती में हुए 19000 से अधिक आरक्षण घोटाले के विरोध में सरकार के विरुद्ध बिगुल फूंक दिया है l

31.1.22

पत्रकारों को प्रेस बैग, डायरी, पेन व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया

धनहा : मधुबनी व पिपरासी प्रखंड के बार्डर पर स्थित विजय राज मेवाड़ कंट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के हॉट मिक्स प्लांट पर रविवार को मधुबनी प्रखंड प्रमुख विजया सिंह व प्रमुख प्रतिनिधि विजय सिंह ने गंडक पार के पत्रकारों के सम्मान में एक सभा का आयोजन किया था।

29.1.22

झारखण्ड के बहादुर योद्धा-भगवान बिरसा मुंडा

(जन्म-1875,मृत्यु-1900)

भारत की आज़ादी के 75 साल का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इसी दौरान उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जा रहा है जिनका देश को स्वतंत्र कराने में कुछ न कुछ योगदान रहा है। लेकिन वे इतिहास के पन्नों में नहीं हैं। बहुत से स्वतंत्रता सेनानी ऐसे हैं जिनका नाम सदैव लोगों की जु़बान पर रहता है, कहीं न कहीं किसी न किसी तरह से उनका ज़िक्र भी होता है, उनके बारे में कुछ स्वतंत्रता संबंधी कार्यक्रमों में कुछ पढ़ने और सुनने को मिल  जाता है, बहुत से बहुचर्चित नामों को सामान्य जनता भी बखूबी जानती है, लेकिन कुछ नाम गुमनामी के अँधेरे में खो गये हैं। हालांकि स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान अद्वितीय है और अगर कहा जाए कि उनके योगदान के बिना आज़ादी सम्भव नहीं थी तो इसमें कोई अतिश्योक्ति न होगी। उनके अन्दर भी देशप्रेम का जज्बा कूट-कूटकर भरा था। वे भी अपने भारतदेश पर अंग्रेजों का आधिपत्य बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते थे। उन्हें अपने देश से भगाने और अपने देश को स्वतंत्र कराने के लिये उन्हांेने अपने तरीके से इस स्वतंत्रता संग्राम को लड़ा और उनकी यह लड़ाई बहुत अहम और महत्वपूर्ण भी थी। ऐसा करते हुए उन्होंने बहुत-सी तकलीफों का भी सामना किया, परन्तु इन सबकी परवाह किये बिना उन्होंने अपने जीवन में इस लड़ाई को बिना रुके लड़ा और कुछ हद तक उसमें कामयाबी भी पाई।

Ye company ek sal se salary nahi de rahi hai

Bajarang Yadav-

Dear sir / Ma'am
Good morning

Kya mein jis company me kam karta hoo uske liye RTI lga sakta hoo?

इस बार दिए गए 128 पद्म सम्मानों के लिए लगभग 50 हजार अर्जियां आई थीं!

डॉ. वेदप्रताप वैदिक-

पद्म पुरस्कारों की प्रामाणिकता? इस बार घोषित पद्म पुरस्कारों पर जमकर वाग्युद्ध चल रहा है। कश्मीर के कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद को पद्मभूषण देने की घोषणा क्या हुई, कांग्रेस पार्टी के अंदर ही संग्राम छिड़ गया है। एक कांग्रेसी नेता ने बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और कम्युनिस्ट नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य के कंधे पर रखकर अपनी बंदूक दाग दी। भट्टाचार्य को भी भाजपा सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया है। उन्होंने यह सम्मान लेने से मना कर दिया।

24.1.22

द्विवेदी की कविता को बच्चन की कविता बता दिया अमर उजाला बदायूं ने

खुद को शुद्ध हिंदीभाषी अखबार कहने वाले अमर उजाला का दावा तो त्रुटिरहित अखबार देने का है। यहां के अधिकारी भी खुद को बेहद काबिल मानते हैं और खबरों में नुक्ताचीनी करने से गुरेज नहीं करते लेकिन बदायूं के रिपोर्टर, डेस्क वाले और बरेली में बैठे आला अधिकारी इन दिनों अखबार में कम बल्कि चुनावी डग्गे में ज्यादा ध्यान दे रहे है।

हिंदी उपन्यासकार अनूपलाल मंडल, उनकी कथायात्रा और औपन्यासिक विन्यास

■ डॉ. सदानंद पॉल (लेखक)

'मैला आँचल' में बरारी-समेली के क्रांतिकारी नक्षत्र मालाकार के व्यक्तित्व और कृतित्व को 'चलित्तर कर्मकार' नाम से चित्रित किया गया है और असली नाम को किसी खौफ़ के कारण बदला गया है, जबकि अनूपलाल मंडल ने अपने उपन्यास 'तूफान और तिनके' में नक्षत्र मालाकार के किसी छद्म नाम तक का उल्लेख नहीं किया है, किंतु उसे नामी डाकू के रूप में चित्रित किया है, जो बड़े किसानों, जमींदारों और जमींदारों को पत्र व संवाद भेज देते थे कि फलाँ गाँव में गरीबों में अनाज बाँट दो, अन्यथा अनाज लूट लिया जाएगा । सत्यश:, यह अनाज गरीबों में बंटती थी । परंतु उपन्यासकार ने नक्षत्र मालाकार व उनके छद्म नाम का भी उल्लेख न कर 'साहस' से साफ बचते व भागते नज़र आये हैं। जो हो, कलम के जादूगर रामवृक्ष बेनीपुरी ने अनूपजी की प्रशंसा में कलम तोड़ दिए हैं, "अनूप उपन्यास-लेखक हैं, किंतु उसका जीवन स्वयं एक उपन्यास है । ...... संसार के असंख्य प्रहारों को हँस-हँस कर झेलनेवाले इस योद्धा की जीवनी स्वयं भी एक उत्तम उपन्यास का उपादान है । अनूप कलाकार योद्धा है, साहित्यकार साधक है । उसकी कूची में हरी, पीली, गुलाबी रंगीनियों की कमी नहीं । उसकी लेखनी में खट्टे-मीठे-तीते रसों का अभाव नहीं ।"

लोकतंत्र में सत्ता त्याग और सेवा का दुर्गम-पथ है

 डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र-
 


                पश्चिमी देशों की तथाकथित आधुनिकता ने बीसवीं शताब्दी में सारे विश्व को दूर तक प्रभावित किया और समाज की शासन-व्यवस्था के लिए राजतंत्र के स्थान पर लोकतंत्र का नया विचार दिया। यद्यपि भारत सहित अनेक देशों में गणतांत्रिक व्यवस्था प्राचीन एवं मध्यकालीन राज्यों में भी सफलतापूर्वक संचालित होती रही है, महाराष्ट्र में अष्टप्रधान का व्यवस्थापन इसी जनतांत्रिक शक्ति का भिन्न स्वरूप प्रकट करता है किंतु संपूर्ण देश में निर्वाचन के माध्यम से राजनीतिक दलों की आंतरिक संरचना और संपूर्ण राष्ट्र की व्यापक व्यवस्था का नया लोकतांत्रिक स्वरूप निश्चय ही पश्चिम के आधुनिक चिंतन की देन है।

पीएम रैली में गई बसों का भुगतान न होने से नाराज मालिकों ने सौंपा ज्ञापन

Rahul Mishra-

भुगतान न होने पर सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी

सीतापुर। बीते माह बहराइच में हुई पीएम रैली में जाने वाली परिवहन डिपों की बसों का भुगतान न होने के कारण नाराज वाहन स्वामियों ने एआरएम से भुगतान करने की मांग की है।

22.1.22

अखिलेश के बिजली सियासत की हवा निकालेगी बीजेपी

संजय सक्सेना, लखनऊ                   

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जल्द ही किसानों को मुफ्त बिजली देने की घोषणा कर सकती है. ऐसा करके वह सपा के उस वादे की हवा निकालेगी जिसमें सपा प्रमुख ने समाजवादी सरकार बनने पर किसानों को सिंचाई के लिए और शहरी क्षेत्र में 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की बात कही थी. वैसे इससे पहले आम आदमी पार्टी भी 300 यूनिट श्री बत्ती देने का वादा कर चुकी है, लेकिन आप के वादे को इसलिए ज्यादा से गंभीरता से नहीं लिया क्या क्योंकि वह सत्ता की दौड़ में कहीं नजर नहीं आ रही है, जबकि सपा के लिए अखिलेश का वादा गेम चेंजर बन सकता है. इसीलिए योगी सरकार भी फ्री बिजली का बड़ा दांव चल सकती है.

यूपी चुनाव में नहीं चलेगा बीजेपी का 'गुजराती फार्मूला'

अजय कुमार, लखनऊ     

बगावत क़े डर से आलाकमान ने बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट काटने की बदली रणनीति          

भारतीय जनता पार्टी  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी (योगी सरकार के खिलाफ)  वोटिंग के प्रभाव को कम करने के लिए  गुजरात वाला फार्मूला नहीं अपनाएगी. गौरतलब हो गुजरात में सत्ता विरोधी लहर का असर कम करने के लिए बीजेपी ने कई ऐसे विधायकों का टिकट काट दिया था जिनसे जनता नाराज चल रही थी. इसका उसे गुजरात में फायदा भी मिला था. लेकिन यही फॉर्मूला  बीजेपी आलाकमान ने यूपी में लागू करने का सोचा तो उसकी चिंता बढ़ गई. बीजेपी के पास जो इनपुट आया है  उसके अनुसार यदि सिटिंग विधायकों का बड़ी संख्या में टिकट काटा गया तो  पार्टी में बगावत जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.