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26.5.22

बीएसए जालौन पुस्तक घोटाला


 
बेसिक शिक्षा विभाग के पुस्तक घोटने की जाँच हेतु मंडल स्तरीय जाँच समिति गठित

▪️जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने कमिश्नर से की थी जिला स्तरीय जांच में खानापूरी की शिकायत

▪️राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर लगाया था शिक्षकों पर दबाव बनाकर झूठी रिपोर्ट माँगने का आरोप

1991 उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम का स्पष्टीकरण

प्रस्तुति : डा.राधे श्याम द्विवेदी एडवोकेट

1991 उपासना स्थल अधिनियम का उद्देश्य स्पष्ट रूप से कहता है कि यह किसी भी पूजा स्थल के रूपांतरण को प्रतिबंधित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि उसका धार्मिक रूप वैसा ही रहे, जैसा कि वह 15 अगस्त, 1947 को अस्तित्व में था। अधिनियम में धारा 3 और धारा 4 इसी आधार पर तैयार की गई हैं.

भगवतीचरण वोहरा की शहादत को याद करते हुए


-    कल्पना पांडे   

 भगत सिंह के महत्वपूर्ण साथी भगवती चरण वोहरा का जन्म 4 नवंबर, 1903 को लाहौर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। वे एक गुजराती ब्राह्मण थे। उनके पिता पंडित शिवचरण वोहरा रेलवे में एक उच्च पदस्थ अधिकारी थे। उन्हें अंग्रेजों द्वारा 'रायसाहब' की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। चूंकि उस समय टाइपराइटर नहीं था, इसलिए भगवती चरण के दादाजी आगरा को जीवन निर्वाह के लिए लिखते (किताबत) थे। उनके पूर्वज गुजरात से आगरा और आगरा से लाहौर चले गए। उपनाम वोहरा (संस्कृत मूल: व्यूह) का अर्थ उर्दू में व्यापारी भी है। माना जाता है कि भगवतीचरण के परिवार ने अपना अंतिम नाम खो दिया था क्योंकि उन्होंने लाहौर के मुस्लिम-बहुल इलाके में ब्राह्मण के रूप में अपनी नौकरी छोड़ दी थी। भगवती चरण के दादाजी के बारे में एक मजेदार कहानी है। उस समय वह एक रुपया प्रतिदिन कमाते थे, और एक रुपया कमाने के बाद वह काम करना बंद कर दिया करते थे। डेढ़ सौ साल पहले आज की तरह असुरक्षा और लालच नहीं था। 1918 में, जब वह सिर्फ 14 साल के थे, उनके माता-पिता ने उनकी शादी 11 वर्षीय दुर्गावती देवी से कर दी, जिन्होंने 5 वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी।

सहारा और सपा की कानूनी ढाल बनेंगे कपिल सिब्बल

चरण सिंह राजपूत-

सहारा के चैयरमैन सुब्रत राय तो कानूनी रूप से घिर ही चुके हैं अब सपा दिग्गजों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाने का अंदेशा अखिलेश यादव को लगने लगा है। पिता मुलायम सिंह यादव के बल पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यध बने अखिलेश यादव जो राजनीति कर रहे हैं उसे समाजवाद तो कतई नहीं कहा जा सकता है। विपक्ष में रहते हुए भी आंदोलनों से दूर रहने वाले अखिलेश यादव पर अब पूंजीवाद में ढलने का अंदेशा जताया जाने लगा है। ओमप्रकाश राजभर के अखिलेश यादव को ऐसी से बाहर निकलकर जमीनी राजनीति करने की नसीहत भी उनको कोई सीख न दे सकी। अब वह कांग्रेसी कपिल सिब्बल को राज्यसभा भेज रहे हैं। बाकायदा कपिल सिब्बल के पर्चा दाखिल करने के समय वह मौजूद रहे। कपिल सिब्बल को राज्यसभा भिजवाने में सहारा के चैयरमैन सुब्रत राय का बड़ा हाथ माना जा रहा है।

15.5.22

सागर के मरीज इलाज के लिए दूसरे शहर जाने को है मजबूर!

सतीश भारतीय-

मध्यप्रदेश का सागर शहर जिसे 'भारत का हदयस्थल' भी कहा जाता है। सागर के अंतर्गत करीब 2244 गांव आते है। जिनकी अनुमानित जनसंख्या 30 लाख है। इस लाखों की तादाद वाले शहर में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज है। जिसे बुन्देलखंड मेडिकल कॉलेज के नाम से भी जाना जाता है। यहां रोगों के उपचार हेतु शहर से लेकर गांव तक के लोग आते है। जिससे गरीब आवाम मेडिकल कॉलेज सागर को जिले की रीढ़ की हड्डी मानती है। लेकिन इतनी बड़ी मेडिकल कॉलेज में गंभीर बीमारियों की जांच और उपचार के लिए कोई उपयुक्त व्यवस्था नहीं है। जिससे सागर जिले के हजारों लोग रोेजाना नागपुर (दूरी करीब 400 किमीं), भोपाल (दूरी करीब 200 किमीं) और जबलपुर (दूरी करीब 180 किमीं) जैसे शहरों में इलाज कराने के लिए जाते है। ऐसे में मरीजों का इन शहरों में आने-जाने और इलाज कराने में तकरीबन 3 दिन तक का समय लग जाता है। 



फिनलैंड पर हमला करना रूस के लिए यूक्रेन से भी ज्यादा आसान है

डॉ. वेदप्रताप वैदिक-

नाटो का विस्तार और भारत.... ‘नाटो’ नामक सैन्य संगठन में अब यूरोप के दो नए देश भी जुड़नेवाले हैं। ये हैं- फिनलैंड और स्वीडन। इस तरह 1949 में अमेरिका की पहल पर बने 15 देशों के इस संगठन के अब 32 सदस्य हो जाएंगे। यूरोप के लगभग सभी महत्वपूर्ण देश इस सैन्य संगठन में एक के बाद एक शामिल होते गए, क्योंकि शीतयुद्ध के जमाने में उन्हें सोवियत संघ से अपनी सुरक्षा चाहिए थी और सोवियत संघ के खत्म होने के बाद उन्हें स्वयं को संपन्न करना था। फिनलैंड, स्वीडन और स्विटजरलैंड जान-बूझकर सैनिक गुटबंदियों से अलग रहे लेकिन यूक्रेन पर हुए रूसी हमले ने इन देशों में भी बड़ा डर पैदा कर दिया है। फिनलैंड तो इसलिए भी डर गया है कि वह रूस की उत्तरी सीमा पर अवस्थित है। रूस के साथ उसकी सीमा 1340 किमी की है, जो नाटो देशों से दुगुनी है। फिनलैंड पर हमला करना रूस के लिए यूक्रेन से भी ज्यादा आसान है। 

सुब्रत राय को संरक्षण देने के बराबर है सुप्रीम कोर्ट का पटना हाईकोर्ट के गिरफ्तारी वारंट पर स्टे देना!

चरण सिंह राजपूत-

नई दिल्ली। यह बात बहुत प्रचलित है कि कोर्ट पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। मीडिया में तो इस बारे में सख्त निर्देश होते हैं। सुप्रीम कोर्ट को तो देश की सर्वोच्च संस्था माना जाता है। क्या आज सुप्रीम कोर्ट अपनी विश्वसनीयता को बरकरार रख पा रहा है ?  वैसे तो देश में अनगिनत मामले हैं जिनको लेकर सुप्रीम कोर्ट के रवैये को लेकर उंगली उठाई जा रही है पर सहारा के चैयरमेन का मामला तो ऐसा मामला बनता जा रहा है कि जैसे सुप्रीम कोर्ट उन्हें संरक्षण दे रहा हो।

राज्यसभा चुनावः आजम-शिवपाल पर टिकी रहेंगी सबकी नजरें

                                    अजय कुमार,लखनऊ

 उत्तर प्रदेश की सियासत में दस जून का दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दिन उत्तर प्रदेश से रिक्त होने वाली राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान होना है।सभी 11 सीटों पर नतीजे लगभग तय हैं। आठ सीटें भाजपा और तीन सीटें भाजपा की झोली में गिरती दिख रही हैं। इन चुनावों में बसपा और कांग्रेस के पास हासिल करने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन यह चुनाव इस हिसाब से महत्वपूर्ण होंगे कि समाजावादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं सपा विधायक शिवपाल यादव किस तरफ खड़े नजर आएंगे या फिर तटस्थ रहेगें। शिवपाल यादव तो अपने भतीजे अखिलेश यादव से नाराज चल ही रहे हैं,लेकिन आजम को लेकर अभी सब कुछ स्पष्ट नहीं है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव कह रहे हैं कि आजम खान उनके साथ हैं,लेकिन जिस तरह से आजम समर्थक अखिलेश पर हमलावर हैं और पिछले दिनों जेल में बंद आजम खान ने सपा विधायक रविदास महरोत्रा जिन्हें अखिलेश का प्रतिनिधि माना जा रहा था, से मिलने से इंकार कर दिया था,उससे आजम को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। 

12.5.22

बस्ती जिले की पत्र पत्रिकाओं पर प्रशासन ने कसा शिकंजा

बस्ती, अपर प्रेस पंजीयक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय नई दिल्ली द्वारा जनपद बस्ती से प्रकाशित समाचार पत्र/पत्रिकाओं की विगत पॉच वर्षो के दौरान वार्षिक विवरणी न प्रस्तुत करने पर प्रकाशन को निरस्त करने के लिए जिला कलेक्टर/जिला मजिस्टेªट को पत्र प्रेषित किया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी श्रीमती सौम्या अग्रवाल ने अपर जिलाधिकारी एवं सहायक निदेशक सूचना को अग्रिम कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। 

अगर नई पीढ़ी ने सवाल नहीं किया तो आचार्य कृपलानी का संघर्ष अधूरा रह जाएगा - विजय दत्त श्रीधर

आचार्य कृपलानी स्मृति व्याख्यान : 2021-22

नई दिल्ली। देश की शासन व्यवस्था में जिस तरह 'तंत्र' यानी सिस्टम 'लोक' यानी जनता पर हावी हो रहा है, वह आज के समाज के लिए एक गंभीर चिंता है। इसको दुरुस्त करने के लिए नई पीढ़ी को सवाल करने होंगे। अगर ऐसा नहीं किया गया तो वह संघर्ष अधूरा रह जाएगा जिसे आचार्य कृपलानी ने पंडित नेहरू के शासन काल मेँ शुरू किया था। 

नवोदय टाइम्स, पंजाब केसरी जलांधर, जगवाणी, हिंद समाचार ग्रुप में पिछले चार सालों से वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं

दोस्तों नमस्कार,

हमारे देश भारत में जो चौथा स्तंभों पर खड़ा हैं

1. न्यापालिका

2. कार्यपालिका

3.विधायकी

4. मीडिया

सड़क पर नंगा करती है नये भारत की पुलिस

पहले वे कम्युनिस्टों के लिए आए।

और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं कट नहीं बोला क्योंकि मैं ट्रेड यूनियन में नहीं था।

फिर वे यहूदियों के लिए आए और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं यहूदी नहीं था‌ फिर वे मेरे लिए आए

और तब कोई बचा ही नहीं था जो मेरे लिए बोलता"।

मानवाधिकार मीडिया में पत्रकार बनाने का बढ़ रहा धंधा

देश का चौथा स्तंभ कहा जाने वाला मीडिया संस्थान अब मार्केट में दीपावली व होली की तरह ऑफर देने लगा है। जिससे युवाओं को बेरोजगार करने का ही रास्ता बनता जा रहा है। क्योंकि युवा पत्रकार बनने की होड़ में इन्हें 3 हजार रुपये से लेकर 2 हजार रुपये तक दे देते हैं। और वह पत्रकार बनकर समाज के अधिकारियों व सामाजिक लोगों को परेशान करने लगते हैं। जिससे कहीं कहीं पर इन मीडिया से जुड़े पत्रकारों को भी शोषित होना पड़ता है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित मानवाधिकार मीडिया के नाम से एक संस्थान पिछले कई वर्षों से चल रहा है। 



अब दुनिया विचारों से नहीं टेक्नोलॉजी से बदल रही है - हरिवंश

सोशल मीडिया के दौर में प्रिंट मीडिया कैसे बचाए अपना वजूद विषय पर राजेंद्र माथुर स्मृति व्याख्यान आयोजित

इंदौर प्रेस क्लब के स्थापना दिवस पर वरिष्ठ पत्रकारों का हुआ सम्मान

इंदौर। टेक्नोलॉजी बेहद खतरनाक है, जो हमारे मानवीय मूल्यों और सिद्धांतों पर ग्रहण लगा रही है। इससे बचने की जरूरत है। पहले दुनिया विचारों से बदलती थी, लेकिन अब टेक्नोलॉजी से बदल रही है। पहले हमारे सबसे बड़े विचारों के पुंज काशी, प्रयाग, पाटलिपुत्र हुआ करते थे, लेकिन अब सिलिकॉन वैली, हैदराबाद पुणे जैसे स्थान हो गए हैं। यह विचार राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश के हैं, जो उन्होंने इंदौर प्रेस क्लब के 60वें स्थापना दिवस पर जाल सभागृह में आयोजित सोशल मीडिया के दौर में प्रिंट मीडिया कैसे बचाए अपना वजूद विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता ने की। विषय प्रवर्तन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने किया। यह व्याख्यान मूर्धन्य पत्रकार राजेंद्र माथुर की स्मृति में किया गया था। इस अवसर पर पत्रकारिता की स्वर्णिम यात्रा पूर्ण कर चुके वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान किया गया। मंच पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल जस्टिस वी.एस. कोकजे, सांसद श्री शंकर लालवानी, दे.अ.वि.वि. की कुलपति डॉ. रेणी जैन विशेष रूप से मौजूद थे। 

For unaffordable and money making fee structure at noida

Respected/Hon'ble Sir,

Through this e-mail I wants to bring into your notice about the costlier and unaffordable education in private schools at noida.This is a serious issue as the education is the basics of every child's life.

अजीत अंजुम जी के नाम एक खुला पत्र

 अजीत अंजुम जी,

हाल ही में आपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से अपने यूट्यूब चैनल के लिए कुछ वैकेंसी निकाली हैं। ज़ाहिर सी बात है आप पत्रकारिता कर रहे हैं तो अकेले आख़िर कितना काम करेंगे काम में हाथ बंटाने वाले कुछ लोग तो चाहिए ही होंगे जो आपके काम को अपना समझकर कर सकें। इसी वजह से टीम को बढ़ाने की आवश्यकता भी होगी और यह ज़रूरी भी है। चूँकि आप देश के वायरल पत्रकारों में से एक हैं तो कल आपकी पोस्ट चंद घंटों में ही पत्रकारिता जगत से जुड़े हज़ारों लोगों की मोबाइल स्क्रीन पर फ़्लैश कर गई जिसके बाद से एक बहस छिड़ी हुई है और उसी बहस में सोशल मीडिया के धुरंधरों ने आपका भूतकाल तक खोद निकाला है। यहाँ तक कि लोगों ने आप पर सामंतवादी सोच का होने से लेकर जूनियर्स से जबरन समय से ज़्यादा काम कराने समेत कई तरह के आरोप मढ़ दिए हैं। ख़ैर, जो बहस छिड़ी है वह लाज़मी भी है। क्यों की आपने पोस्ट में मोटा-माटी एक दर्जन से अधिक खूबियाँ गिना दी हैं जो आप सामने वाले में ढूँढ रहे हैं। फ़िलहाल देश यह नहीं जानता की उनमें से आपके अंदर कितनी खूबियाँ हैं। 

अधिमान्य पत्रकार का नहीं कोई मापदण्ड

राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। मीडियाकर्मियों को अधिमान्य पत्रकार का दर्जा दिया जाने को लेकर जो खेल चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। लोग 30 वर्षो से कार्य करने के बाद भी अपने आपको अधिमान्य पत्रकार का दर्जा नहीं दिला पाये और कुछ स्थानों पर स्थिति है एक समाचार पत्र से ही अनेक लोग जो अधिमान्य पत्रकार के मानक मापदंडो के विरूद्ध अधिमान्य होकर शासन की योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।

लुधियाना का बूढ़ा नाला : पानी रे पानी, तेरा रंग क्यों इतना काला?

12 सौ करोड़ के प्रोजेक्ट के उपरांत भी हालात में नहीं हो पा रहा सुधार

नामधारी सतगुरु उदयसिंह भी अब अध्यक्ष पद छोडऩे का कर रहे विचार

जिस कमेटी में मुख्य सचिव, वह कमेटी भी अधिकारियों में इच्छाशक्ति को नहीं कर पाई बलवती

द सांध्य नेटवर्क

लुधियाना/श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ सहित आधा दर्जन जिलों में पेयजल के रूप में जिस सतलुज नदी के पानी का इस्तेमाल किया जाता है, उस नदी की हालत को सुधारने के लिए नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, केन्द्र सरकार ने बहुतेरे प्रयास किये। मोदी सरकार ने 12 सौ करोड़  से ज्यादा बजट भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के रूप में मंजूर किया किंतु लुधियाना नगर निगम, प्रशासन के अधिकारियों की इच्छाशक्ति के अभाव में यह कार्य नहीं हो पाया। पंजाब सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक निगरानी कमेटी का भी गठन किया ताकि कार्य निर्बाध गति से पूर्ण किया जा सके किंतु यह कमेटी भी उद्योगों के रसायन को सतलुज नदी तक जाने से नहीं रोक पायी। नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल करीबन पांच सौ करोड़ रुपये सरकार पर जुर्माना लगा चुका है किंतु नतीजा जीरो है। इन सब हालात को देखते हुए नामधारी सतगुरु उदयसिंह अब कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं।

11.5.22

लघुपत्रिकाएं : वैकल्पिक पत्रकारिता का स्वप्न

- शैलेन्द्र चौहान

दिनेशपुर, उत्तराखंड में अखिल भारतीय लघु पत्र-पत्रिका सम्मेलन का आयोजन हो रहा है| कुछ समय पूर्व पलाश विश्वास ने पत्रकारिता और साहित्य के संपादन संबधों की चर्चा की थी जिसमें मूल बात यह थी कि रघुवीर सहाय और सव्यसाची जैसे संपादक नये लोगों की रचनाओं को एकदम रिजेक्ट न करके उनकी कमियां बताते थे| उन्हें ठीक करवाते थे और छापते थे| एक और संपादक प्रभाष जोशी को भी एक प्रोफेशनल और समूह-नायक के तौर पर याद किया है| यद्दपि उनके विचारों को लेकर कुछ विवाद भी रहे लेकिन उनका योगदान अवश्य अविस्मरणीय है| आज विडंबना यह है कि दूरदराज के लेखकों को विकसित करना और प्रशिक्षित करना संपादकों के द्वारा अब नहीं हो पा रहा है| यह अब मुश्‍किल है|  

मासूम हाथ परोस रहे शराब

Shashi kant kushwaha- 



सिस्टम की खामियों का खामियाजा भुगत रहे मासूम बच्चे

सिंगरौली: चिराग तले अंधेरा की कहावत तो हम सभी पूरी तरह से वाकिफ हैं ऐसा ही एक मामला सिंगरौली जिले से निकल कर सामने आया है दरसल यह हमारे सिस्टम की बड़ी लापरवाही के रूप में कही जा सकती है। ऐसा नही है कि इस मामले की जानकारी जिम्मेदारों को नही है वो बात अलग है कि इतनी बड़ी लापरवाही को जिम्मेदार नजरअंदाज कर रहे हैं । कुछ दिनों पहले हमने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर इसकी खबर प्रमुखता से उठाया था ।दरशल महज 8 से 10 साल उम्र के बच्चे जिनकी उम्र खेलने कूदने पढ़ने लिखने की है वो बच्चे अवैध मयखाने में शराब परोसने प्लेट लगाने और जूठी प्लेट उठाने का कार्य करते हैं वह भी हमारे सिस्टम की नाकामी की वजह से ।

आजादी की पहली चिंगारी : ब्रिटिश सरकार ने माना कि भारत पर शासन में बहुत गलतियां हुईं!

- शैलेन्द्र चौहान

1857 में वह ऐतिहासिक दिन 10 मई था, जब देश की आजादी के लिए पहली चिंगारी मेरठ से भड़की थी। सबसे पहले मेरठ के सदर बाजार में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ चिंगारी भड़की, जो पूरे देश में फैल गई। मेरठ के क्रांति स्थल और अन्य धरोहर आज भी क्रांति की याद ताजा करती हैं। 1857 में अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने के लिए रणनीति तय की गई थी। एक साथ पूरे देश में आजादी का बिगुल फूंकना था, लेकिन मेरठ में तय तारीख से पहले अंग्रेजों के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इतिहासकारों की मानें और राजकीय स्वतंत्रता संग्रहालय में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित रिकार्ड को देखें तो दस मई 1857 को शाम पांच बजे जब गिरिजाघर का घंटा बजा, तब लोग घरों से निकलकर सड़कों पर एकत्र होने लगे। सदर बाजार क्षेत्र में अंग्रेज फौज पर भीड़ ने हमला बोल दिया। नौ मई को 85 सैनिकों का कोर्ट मार्शल किया गया था। उन्हें विक्टोरिया पार्क स्थित नई जेल में बंद कर दिया था। दस मई की शाम इस जेल को तोड़कर 85 सैनिकों को आजाद करा दिया गया। कुछ सैनिक रात में ही दिल्ली पहुंच गए और कुछ सैनिक 11 मई की सुबह दिल्ली रवाना हुए और दिल्ली पर कब्जा कर लिया था।

झांसी मंडल में योगी का दौरा और उनकी साफगोई से बंधी उम्मीदें

K.P.Singh-

बुन्देलखण्ड का इलाका उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े अंचलों में गिना जाता है। लेकिन यह धार्मिक महत्व का इलाका भी है। माना जाता है कि रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्म भूमि और कर्मभूमि दोनों बुन्देलखण्ड में थी इसलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस अंचल के प्रति विशेष अनुराग सर्व विदित है। उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड को प्रशासनिक दृष्टिकोण से अब दो भागों में विभक्त कर दिया गया है। झांसी मंडल अलग हो गया है और बांदा मंडल चित्रकूट मंडल के नाम से अलग है। पुलिस की दृष्टिकोण से तो और अधिक भिन्नता है। झांसी रेंज कानपुर जोन का हिस्सा है जबकि बांदा रेंज अभी भी इलाहाबाद जोन में ही शामिल रखा गया है।

24.3.22

कश्मीर फाइल्स की आड़ में अभी तक के देश के सारे भाग्य विधाताओं को लाइन में लगाने के प्रयास से क्या हल होगा

Krishan pal Singh-

कश्मीर फाइल्स फिल्म 32 वर्ष पहले घाटी में बर्बर और पाशविक अत्याचार के बल पर उजाड़े गये कश्मीरी पंडितों की कहानी को नये सिरे से सुनाती है। लेकिन क्या इसे निरपेक्ष रूप से एक मार्मिक फिल्म भर कहा जा सकता है। निश्चित रूप से इसके पीछे राजनीतिक दुराशय है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती और इसने फिल्म के नैतिक पक्ष को संदिग्ध बना दिया है। सबसे बड़ी आपत्तिजनक बात यह है कि इस फिल्म की आड़ में जो विमर्श खड़ा किया जा रहा है उसका मकसद इसके पहले के देश के सारे भाग्यविधाताओं को एक लाइन से हिन्दू विरोधी और देश विरोधी साबित करना है। यहां तक कि भाजपा की ही पार्टी के सबसे बड़े यशस्वी राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी पर भी इस तरह के छींटे पड़ने की परवाह नहीं की गई है। हर प्रसंग पर तत्कालीन भाग्य विधाताओं का फैसला परिस्थिति सापेक्ष होता है और वर्तमान की बदली हुई परिस्थिति में उस फैसले के आधार पर उनकी मंशा को लेकर कोई निष्कर्ष निकालने में बहुत सावधानी की जरूरत पड़ती है अन्यथा उनके साथ न्याय नहीं हो सकता।  

19.3.22

बीजेपी की जीत में मायावती की गुप्त मदद

Unmesh Gujarathi-
    
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों ने 403 सीटों में से 273 सीटों पर जीत हासिल की है। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार बीजेपी को 52 सीटों का नुकसान हुआ है। बीजेपी के लिए ये जीत इतनी आसान नहीं थी। इसलिए बीजेपी ने भी दलित और जातिगत आधारित राजनीति का कार्ड खुल कर खेला। भाजपा ने भी अपनी एक समय की दुश्मन बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ अंदरखाने में गठबंधन बनाकर, समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोटों में सेंध लगा कर किसी तरह सत्ता हथिया ली है।

न्यायपलिका और न्यायधीश से आज भी उम्मीदें जिंदा है...

के. सत्येन्द्र-

कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायधीश को पैसे से प्रभावित करने के मामले से समूचा कानून जगत स्तब्ध है लेकिन यह भी सत्य है कि बहुत से ऐसे मामले सामने आ ही नही पाते ।

वरिष्ठ कवि बुद्धिसेन शर्मा का निधन

प्रयागराज। नगर के वरिष्ठ कवि बुद्धिसेन शर्मा का मंगलवार की सुबह निधन
हो गया। 26 दिसंबर 1941 को कानपुर में जन्मे बुद्धिसेन शर्मा प्रयागराज
के करैलाबाग कॉलोनी में निवास करते थे, लंबे समय से बीमार होने के कारण
अपने शार्गिद इश्क़ सुल्तानपुरी के साथ गौरीगंज में रह रहे थे। उन्होंने
आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। समाचार पत्र
‘दैनिक प्रताप’, ‘भारत’ और ‘मनोरमा’ पत्रिका में उन्होंने काम किया था।
मुशायरों में भाग लेने के लिए कई देशों की यात्रा की थी। देश राष्टपति के
हाथों उन्हें ‘साहित्य श्री’ की उपाधि मिली थी। इसके अलावा वर्ष 2019 में
गुफ़्तगू द्वारा उन्हें ‘अकबर इलाहाबादी सम्मान’ प्रदान किया गया था।
उनका एक ग़ज़ल संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला था। श्री शर्मा का अंतिम
संस्कार मंगलवार को शाम चार बजे रसूलाबाद घाट पर किया जाएगा।
गु़्फ़्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, प्रभाशंकर शर्मा, मनमोहन सिंह
तन्हा, नरेश कुमार महरानी, अनिल मानव, शैलेंद्र जय, नीना मोहन
श्रीवास्तव, विजय प्रताप सिंह, मासूम रजा राशदी, संजय सक्सेना, अफ़सर
जमाल, डॉ. नीलिमा मिश्रा, इश्क़ सुल्तानपुरी, रेशादुल इस्लाम, शिवाजी
यादव, देवेंद्र प्रताप वर्मा, संजय सागर, अर्चना जायसवाल, शिवपूजन सिंह
सरिता श्रीवास्तव, डॉ. मधुबाला सिन्हा, जया मोहन, दयाशंकर प्रसाद आदि ने
उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

12.3.22

भारत में केवल एक नेता की जरूरत है जो नई कांग्रेस बनाने की घोषणा करे

करणीदानसिंह राजपूत-

भारत में केवल एक नेता की  जरूरत है जो नई कांग्रेस बनाने की घोषणा करे। नया विधान और नया निशान हो। अब घोषणा हो ताकि सन 2024 के लोकसभा आमचुनाव से पहले  संपूर्ण देश भर में उठाव हो सके।  इसके बाद कॉन्ग्रेस का मानस बदल जाएगा स्वरूप बदल जाएगा और लोग जाग जाएंगे। केवल नामों में पदों में जिंदा रहने वाले लोग पूरे देश में खत्म हो जाएंगे। कॉन्ग्रेस इसलिए पिट रही है हार रही है कि उसमें से कोई एक भी व्यक्ति घोषणा नहीं कर रहा।

उत्तर प्रदेश के चुनाव में कैसे भारी पड़ी व्यवहारिक सच्चाईयां

Krishan pal Singh-

उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव नतीजे सामने आ चुके हैं। अब समय उनके निष्कर्षो के चीढ़ फाड़ का है। मुझ सहित अधिकांश राजनीतिक विश्लेषक प्रदेश की सरकार के बारे में अपने अंदाजे बिफल हो जाने से परेशान हैं। चुनाव में किसी तरह की हेरा फेरी साबित करने का कोई सबूत तलाशने से भी नहीं मिला सो प्राश्यचित इस बात का है कि जमीनी सच्चाई जानने में हमसे कहां चूक हुई। बड़ी संख्या में खिन्न लोग हमें मिले थे जिन्होंने चुनाव के पहले सरकार के कामों पर तीव्र असंतोष प्रकट किया था जबकि इनमें से अधिकांश ने 2017 में भाजपा की ही पालकी ढ़ोने में गुरेज नहीं किया था। हमारे लिए पहेली बन गया है कि ये वोट कहां चले गये। आकलन में हमसे कहां से चूक हुई ताकि भविष्य में अपनी विश्वसनीयता के लिए हम अधिक सतर्कता से काम कर सकें।

9.3.22

कनाडा की महिला संस्था ने असमिया कवयित्री को किया सम्मानित

Vikram Singh Rathod-

असमिया कवयित्री और गायिका तनुप्रिया कलिता को यूनिवर्सल विमेंस नेटवर्क, कनाडा द्वारा वूमेन ऑफ़ इंस्पिरेशन अवार्ड २०२२ में सांस्कृतिक राजदूत के रूप में नामित किया गया है । उन्हें यह नामांकन साहित्य और संगीत में उनके योगदान के लिए मिला है।

उत्तर प्रदेश में छुट्टा गोवंश की समस्या : चुनौतियां एवं समाधान

उत्तर प्रदेश में छुट्टा पशुओं की समस्या एक मानव जनित सामाजिक समस्या है जिसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव कृषि पर पड़ा है. गाँव गाँव में सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु खुले आम घूम रहे हैं और फसल को बर्बाद कर रहे हैं. किसानों की व्यथा अंततः विभिन्न मंचों के माध्यम से राजनैतिक दलों,  प्रशासन  एवं सरकार तक भी पहुंच चुकी है. विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से उठता रहा.  स्वयं प्रधानमन्त्री तक को इस समस्या को स्वीकारते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन देना पड़ा. विभिन्न दलों के घोषणा पत्र और चुनावी भाषणों के दौरान छुट्टा गोवंश की समस्या की चर्चा हुयी. अगले सप्ताह तक प्रदेश में नयी सरकार का गठन हो जाना है, आगामी सरकार के समक्ष भी इस समस्या के समाधान हेतु कारगर उपाय करने का दबाव होगा. आइये, जमीनी सच्चाई को स्वीकारते हुए समस्या और समाधान पर कुछ समझने की चेष्टा करें.

7.3.22

पत्रकारिता का राष्ट्रधर्म

जयराम शुक्ल-

राष्ट्रवाद इन दिनों विमर्श के केन्द्र पर है। भारत के संदर्भ में और वैश्विक संदर्भ में भी। राजनीतिक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पक्ष व विपक्ष पर खूब चर्चाएं हुईं, हो रही हैं, तो भला पत्रकारिता इससे क्यों अछूती रहे। उसमें भी राष्ट्रवाद के तत्व तलाशे जा रहे हैं।

महिला दिवस विशेष : दख़ल ज़रूरी है आह्लादिनी का

-डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'

सृष्टि की उत्पत्ति से, सृजन की वेदिका से, अक्ष के केन्द्र से, धर्म के आचरण से, कर्म की प्रधानता से, कृष के आकर्षण से, सनातन के सत्य से , चेतन के अवचेतन से, जो ऊर्जा का ऊर्ध्वाधर प्रभाव पैदा होता है, वह निःसंदेह सृजन के दायित्वबोध के कारण संसार की आधी आबादी को समर्पित है। ब्रह्माण्ड  की समग्र अवधारणा के केन्द्र में जो भाव स्थायी रूप से विद्यमान है, उन भावों के पोषण, पल्लवन और प्रवर्तन के लिए सृष्टि की प्रथम सृजक को पूजनीया के साथ-साथ पालक और पोषक की भूमिका का निर्वहन भी करना चाहिए।

27.2.22

राजस्थान भास्कर में अब पंचांग भी गलत छपने लगा!

Priyanka-
    
 राजस्थान में प्रकाशित दैनिक भास्कर में अब पंचांग भी गलत छपने लगा. इसकी चर्चा फेसबुक पर हो रही और लोग कमियों के बारे में बता रहे हैं.

13.2.22

इमरान खान मुसीबत में, पाकिस्तान में अनिश्चितता

pankaj mishra-
 
1965 के भारत -पाकिस्तान के युद्ध के बाद सोवियत संघ की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच ताशकन्द में समझौते की बातचीत हो रही थी. इस बातचीत में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान कर रहे थे. पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल में  थे .इसी दौरान एक बार  सोवियत प्रतिनिधिमंडल  से बातचीत के बीच जुल्फिकार अली भुट्टो ने जनरल अयूब के कान में कुछ कहा .भुट्टो की बात सुनते ही जनरल साहब को गुस्सा आ  गया और जोर से बोले "उल्लू के पट्ठे बकवास बंद करो ".

मोदी शाह नड्डा जी चुनाव में कांग्रेसियों को नहीं, लोकतंत्र सेनानियों को गले लगाओ।

 करणीदानसिंह राजपूत-

लोकतंत्र सेनानियों ने तो आपातकाल में कुर्बानियां देने के लिए सब कुछ छोड़ दिया था। अत्याचार सहे।आप तो उन कुर्बानियां देने वाले लोकतंत्र सेनानियों के हाल जानने के लिए भी कभी नहीं निकले। आपके पास देने को समय तक नहीं है। लोकसभा में मोदी जी द्वारा आपातकाल में कुरबानियां देने वालों पर भाषण देना और सेनानियों का जीवन उनके घर जाकर देखने में बड़ा अंतर है। असली आंसुओं और मगरमच्छी आंसुओं में जो अंतर होता है वह आपके भाषण की असलियत है।

11.2.22

आरएसएस का हिन्दू राष्ट्र का सपना उत्तर प्रदेश में क्यों लड़खड़ाया

Krishan pal Singh-

यह तो सर्वविदित है कि आरएसएस का लक्ष्य देश में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना रहा है। अब जबकि आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष 2025 में पूरे होने जा रहे हैं तो अपने शताब्दी वर्ष में हिन्दू राष्ट्र के सपने को साकार रूप देने के लिए वह अधीरता की हद तक जल्दबाजी में है। अधिकांश लोग हिन्दू राष्ट्र से सिर्फ यह तात्पर्य रखते हैं कि इसका अर्थ मुसलमानों सहित सभी गैर हिन्दू अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे के नागरिक के रूप में व्यवहारिक रूप से बसर करने को अपनी नियति मान लेने के लिए मजबूर करना है जबकि हिन्दू राष्ट्र के वास्तविक सरोकार इससे कहीं आगे हैं। इसका अभीष्ट देश में वर्ण व्यवस्था के शासन को कायम करना है लेकिन आज बक्त जहां पहुंच चुका है उसमें इस दुराग्रह से कई जटिलतायें पैदा हो सकती हैं जिनके बारे में आरएसएस ख्याल नहीं कर सकी है। वैसे भी हिन्दू राष्ट्र के अपने अंतर्विरोध भयानक हैं जिसे अपनी कल्पना में उसने भुला दिया था। उत्तर प्रदेश में अपने हस्तक्षेप से आरएसएस ने हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को फलीभूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया था पर अब यह उसके गले की फांस बन गया है जिसके कारण भाजपा को उत्तर प्रदेश में अपनी सत्ता की वापिसी के लिए लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं।

ABP Network marks 50% growth in total unique visitors

Comscore Data, Dec 2020-Dec 2021
 
Only news publisher in the top-10 category to register 50% y-o-y growth
 
Noida, 11th February 2022: ABP Network’s growth story continues, and shows how the trailblazer in the digital space has emerged as a leader in a short span.

4.2.22

69000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने सरकार के विरुद्ध बिगुल फूंका

 69000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित ओबीसी तथा एससी वर्ग के अभ्यर्थियों ने  शिक्षक भर्ती में हुए 19000 से अधिक आरक्षण घोटाले के विरोध में सरकार के विरुद्ध बिगुल फूंक दिया है l

31.1.22

पत्रकारों को प्रेस बैग, डायरी, पेन व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया

धनहा : मधुबनी व पिपरासी प्रखंड के बार्डर पर स्थित विजय राज मेवाड़ कंट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के हॉट मिक्स प्लांट पर रविवार को मधुबनी प्रखंड प्रमुख विजया सिंह व प्रमुख प्रतिनिधि विजय सिंह ने गंडक पार के पत्रकारों के सम्मान में एक सभा का आयोजन किया था।

29.1.22

झारखण्ड के बहादुर योद्धा-भगवान बिरसा मुंडा

(जन्म-1875,मृत्यु-1900)

भारत की आज़ादी के 75 साल का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इसी दौरान उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जा रहा है जिनका देश को स्वतंत्र कराने में कुछ न कुछ योगदान रहा है। लेकिन वे इतिहास के पन्नों में नहीं हैं। बहुत से स्वतंत्रता सेनानी ऐसे हैं जिनका नाम सदैव लोगों की जु़बान पर रहता है, कहीं न कहीं किसी न किसी तरह से उनका ज़िक्र भी होता है, उनके बारे में कुछ स्वतंत्रता संबंधी कार्यक्रमों में कुछ पढ़ने और सुनने को मिल  जाता है, बहुत से बहुचर्चित नामों को सामान्य जनता भी बखूबी जानती है, लेकिन कुछ नाम गुमनामी के अँधेरे में खो गये हैं। हालांकि स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान अद्वितीय है और अगर कहा जाए कि उनके योगदान के बिना आज़ादी सम्भव नहीं थी तो इसमें कोई अतिश्योक्ति न होगी। उनके अन्दर भी देशप्रेम का जज्बा कूट-कूटकर भरा था। वे भी अपने भारतदेश पर अंग्रेजों का आधिपत्य बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते थे। उन्हें अपने देश से भगाने और अपने देश को स्वतंत्र कराने के लिये उन्हांेने अपने तरीके से इस स्वतंत्रता संग्राम को लड़ा और उनकी यह लड़ाई बहुत अहम और महत्वपूर्ण भी थी। ऐसा करते हुए उन्होंने बहुत-सी तकलीफों का भी सामना किया, परन्तु इन सबकी परवाह किये बिना उन्होंने अपने जीवन में इस लड़ाई को बिना रुके लड़ा और कुछ हद तक उसमें कामयाबी भी पाई।

Ye company ek sal se salary nahi de rahi hai

Bajarang Yadav-

Dear sir / Ma'am
Good morning

Kya mein jis company me kam karta hoo uske liye RTI lga sakta hoo?

इस बार दिए गए 128 पद्म सम्मानों के लिए लगभग 50 हजार अर्जियां आई थीं!

डॉ. वेदप्रताप वैदिक-

पद्म पुरस्कारों की प्रामाणिकता? इस बार घोषित पद्म पुरस्कारों पर जमकर वाग्युद्ध चल रहा है। कश्मीर के कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद को पद्मभूषण देने की घोषणा क्या हुई, कांग्रेस पार्टी के अंदर ही संग्राम छिड़ गया है। एक कांग्रेसी नेता ने बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और कम्युनिस्ट नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य के कंधे पर रखकर अपनी बंदूक दाग दी। भट्टाचार्य को भी भाजपा सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया है। उन्होंने यह सम्मान लेने से मना कर दिया।

24.1.22

द्विवेदी की कविता को बच्चन की कविता बता दिया अमर उजाला बदायूं ने

खुद को शुद्ध हिंदीभाषी अखबार कहने वाले अमर उजाला का दावा तो त्रुटिरहित अखबार देने का है। यहां के अधिकारी भी खुद को बेहद काबिल मानते हैं और खबरों में नुक्ताचीनी करने से गुरेज नहीं करते लेकिन बदायूं के रिपोर्टर, डेस्क वाले और बरेली में बैठे आला अधिकारी इन दिनों अखबार में कम बल्कि चुनावी डग्गे में ज्यादा ध्यान दे रहे है।

हिंदी उपन्यासकार अनूपलाल मंडल, उनकी कथायात्रा और औपन्यासिक विन्यास

■ डॉ. सदानंद पॉल (लेखक)

'मैला आँचल' में बरारी-समेली के क्रांतिकारी नक्षत्र मालाकार के व्यक्तित्व और कृतित्व को 'चलित्तर कर्मकार' नाम से चित्रित किया गया है और असली नाम को किसी खौफ़ के कारण बदला गया है, जबकि अनूपलाल मंडल ने अपने उपन्यास 'तूफान और तिनके' में नक्षत्र मालाकार के किसी छद्म नाम तक का उल्लेख नहीं किया है, किंतु उसे नामी डाकू के रूप में चित्रित किया है, जो बड़े किसानों, जमींदारों और जमींदारों को पत्र व संवाद भेज देते थे कि फलाँ गाँव में गरीबों में अनाज बाँट दो, अन्यथा अनाज लूट लिया जाएगा । सत्यश:, यह अनाज गरीबों में बंटती थी । परंतु उपन्यासकार ने नक्षत्र मालाकार व उनके छद्म नाम का भी उल्लेख न कर 'साहस' से साफ बचते व भागते नज़र आये हैं। जो हो, कलम के जादूगर रामवृक्ष बेनीपुरी ने अनूपजी की प्रशंसा में कलम तोड़ दिए हैं, "अनूप उपन्यास-लेखक हैं, किंतु उसका जीवन स्वयं एक उपन्यास है । ...... संसार के असंख्य प्रहारों को हँस-हँस कर झेलनेवाले इस योद्धा की जीवनी स्वयं भी एक उत्तम उपन्यास का उपादान है । अनूप कलाकार योद्धा है, साहित्यकार साधक है । उसकी कूची में हरी, पीली, गुलाबी रंगीनियों की कमी नहीं । उसकी लेखनी में खट्टे-मीठे-तीते रसों का अभाव नहीं ।"

लोकतंत्र में सत्ता त्याग और सेवा का दुर्गम-पथ है

 डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र-
 


                पश्चिमी देशों की तथाकथित आधुनिकता ने बीसवीं शताब्दी में सारे विश्व को दूर तक प्रभावित किया और समाज की शासन-व्यवस्था के लिए राजतंत्र के स्थान पर लोकतंत्र का नया विचार दिया। यद्यपि भारत सहित अनेक देशों में गणतांत्रिक व्यवस्था प्राचीन एवं मध्यकालीन राज्यों में भी सफलतापूर्वक संचालित होती रही है, महाराष्ट्र में अष्टप्रधान का व्यवस्थापन इसी जनतांत्रिक शक्ति का भिन्न स्वरूप प्रकट करता है किंतु संपूर्ण देश में निर्वाचन के माध्यम से राजनीतिक दलों की आंतरिक संरचना और संपूर्ण राष्ट्र की व्यापक व्यवस्था का नया लोकतांत्रिक स्वरूप निश्चय ही पश्चिम के आधुनिक चिंतन की देन है।

पीएम रैली में गई बसों का भुगतान न होने से नाराज मालिकों ने सौंपा ज्ञापन

Rahul Mishra-

भुगतान न होने पर सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी

सीतापुर। बीते माह बहराइच में हुई पीएम रैली में जाने वाली परिवहन डिपों की बसों का भुगतान न होने के कारण नाराज वाहन स्वामियों ने एआरएम से भुगतान करने की मांग की है।

22.1.22

अखिलेश के बिजली सियासत की हवा निकालेगी बीजेपी

संजय सक्सेना, लखनऊ                   

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जल्द ही किसानों को मुफ्त बिजली देने की घोषणा कर सकती है. ऐसा करके वह सपा के उस वादे की हवा निकालेगी जिसमें सपा प्रमुख ने समाजवादी सरकार बनने पर किसानों को सिंचाई के लिए और शहरी क्षेत्र में 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की बात कही थी. वैसे इससे पहले आम आदमी पार्टी भी 300 यूनिट श्री बत्ती देने का वादा कर चुकी है, लेकिन आप के वादे को इसलिए ज्यादा से गंभीरता से नहीं लिया क्या क्योंकि वह सत्ता की दौड़ में कहीं नजर नहीं आ रही है, जबकि सपा के लिए अखिलेश का वादा गेम चेंजर बन सकता है. इसीलिए योगी सरकार भी फ्री बिजली का बड़ा दांव चल सकती है.

यूपी चुनाव में नहीं चलेगा बीजेपी का 'गुजराती फार्मूला'

अजय कुमार, लखनऊ     

बगावत क़े डर से आलाकमान ने बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट काटने की बदली रणनीति          

भारतीय जनता पार्टी  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी (योगी सरकार के खिलाफ)  वोटिंग के प्रभाव को कम करने के लिए  गुजरात वाला फार्मूला नहीं अपनाएगी. गौरतलब हो गुजरात में सत्ता विरोधी लहर का असर कम करने के लिए बीजेपी ने कई ऐसे विधायकों का टिकट काट दिया था जिनसे जनता नाराज चल रही थी. इसका उसे गुजरात में फायदा भी मिला था. लेकिन यही फॉर्मूला  बीजेपी आलाकमान ने यूपी में लागू करने का सोचा तो उसकी चिंता बढ़ गई. बीजेपी के पास जो इनपुट आया है  उसके अनुसार यदि सिटिंग विधायकों का बड़ी संख्या में टिकट काटा गया तो  पार्टी में बगावत जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.

युवा किसान कवि गोलेन्द्र पटेल की 8 कविताएँ


1).

जोंक
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रोपनी जब करते हैं कर्षित किसान ;
तब रक्त चूसते हैं जोंक!
चूहे फसल नहीं चरते
फसल चरते हैं
साँड और नीलगाय.....
चूहे तो बस संग्रह करते हैं
गहरे गोदामीय बिल में!
टिड्डे पत्तियों के साथ
पुरुषार्थ को चाट जाते हैं
आपस में युद्ध कर
काले कौए मक्का बाजरा बांट खाते हैं!
प्यासी धूप
पसीना पीती है खेत में
जोंक की भाँति!
अंत में अक्सर ही
कर्ज के कच्चे खट्टे कायफल दिख जाते हैं
सिवान के हरे पेड़ पर लटके हुए!
इसे ही कभी कभी ढोता है एक किसान
सड़क से संसद तक की अपनी उड़ान में!

14.1.22

The ABP News-CVoter fifth opinion poll predicts BJP’s victory in UP and Goa

Manipur and Uttarakhand are showing signs of a nail biting contest for power

AAP leading the race to form the government in Punjab


Noida, January 2022: The ABP News-CVoter (Centre for Voting Opinion & Trends in Election Research) fifth opinion poll predicts BJP’s victory in UP and Goa. While, Manipur and Uttarakhand are showing signs of a nail biting contest for power. In Punjab, AAP is likely to form the government as it is inching close to the majority mark, as per the recent survey. The EC had announced the election dates in the five states with UP going to poll in seven phases from 10th February to 7th March, while Punjab, Uttarakhand and Goa will vote on 14th February and Manipur on 27th February and 3rd March. The election results will be declared on 10th March.

नियम और कानून से भी बड़ा हो गया नोएडा का प्रेस क्लब


मीडिया, यानी देश का चौथा स्तंभ। पत्रकारों के लिए देशभर के विभिन्न जिलों में प्रेस क्लब बनाए गए हैं. ऐसा ही एक प्रेस क्लब नोएडा में भी है. प्रेस क्लब के गठन से लेकर आज तक यहां पैनल का कब्जा है. पत्रकारों के रोष के बाद किसी चुनाव कराने का फैसला हुआ लेकिन चुनाव में सभी नियमों को ताक पर रखा जा रहा है. हैरानी की बात है कि प्रेस क्लब की कार्यकारिणी में नामी संस्थानों के पत्रकार जुड़े हैं. वह भी इसमें शामिल हैं.

10.1.22

सतर्क रहें तो तीसरी लहर नहीं बरपा सकेगी कहर

कृष्णमोहन झा-

भारत में कोरोना संक्रमण की रफ्तार एक बार फिर भयावह गति से बढ़ने लगी है और एक दिन में 1लाख 80000 से अधिक मामले सामने आने के बाद अब यह माना जा रहा है  कि देश में कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है। दक्षिण अफ्रीका में मिला कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रान भारत में 27 राज्यों में पांव पसार चुका है और यह यह आंकड़ा रोज ही बढ़ता जा रहा है।  पश्चिम बंगाल , महाराष्ट्र, और  दिल्ली में कोरोना संक्रमण की रफ्तार अब डराने लगी है । सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीश,  दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाजपा सांसद मनोज तिवारी के साथ ही महाराष्ट्र सरकार के दस मंत्री और बीस विधायक , मध्यप्रदेश सरकार के दो मंत्रियों सहित अनेक वरिष्ठ राजनीतिक नेता  और देश के कई अस्पतालों के चिकित्सक , स्वास्थ्य कर्मी भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।कोरोना  के नए वैरिएंट ओमिक्रान से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या भी देश में लगभग चार हज़ार तक पहुंच चुकी है यद्यपि राहत की बात यह है कि ओमिक्रान को डेल्टा वैरिएंट से अधिक संक्रामक होने के बावजूद उससे कम घातक बताया जा रहा है और ओमिक्रान संक्रमित मरीज अस्पतालों से जल्दी ही स्वस्थ हो कर घर लौट रहे हैं।

सम्पादक मण्डल जौनपुर जनपद इकाई की कार्यकारिणी घोषित

वीरेन्द्र गुप्ता कोषाध्यक्ष, डा. ब्रजेश यदुवंशी प्रवक्ता व शम्भूनाथ सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष

जौनपुर। सम्पादक मण्डल उत्तर प्रदेश की जनपद इकाई की बैठक सोमवार को कलेक्टेªट स्थित पत्रकार भवन में सम्पन्न हुई जिसकी अध्यक्षता अध्यक्ष रामजी जायसवाल ने किया। इस मौके पर सदस्यता अभियान पर बल देते हुये नयी कार्यकारिणी का गठन कर घोषणा भी कर दी गयी। 


 

11 जनवरी को दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाने वाले इंसुलिन की खोज और उपयोग के 100 साल पूरे

मुंबई। आज (11 जनवरी 2022) से 100 साल पहले कोई भी कल्पना नहीं कर सकता था कि डाइबिटीज़ (मधुमेह) के टाइप 1 स बच्चों का जीवन बचाया जा सकता था,लेकिन 11 जनवरी 1922 को कनाडा में लियोनार्ड थॉम्पसन के लिए इंसुलिन की खोज और इसके पहले उपयोग ने दुनिया भर में डाइबिटीज़ (मधुमेह) वाले लोगों की नियति बदल दी। बैंटिंग, बेस्ट, मैकलियोड और कोलिप की टीम को इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा खोजों में से एक के लिए सम्मानित किया गया।

फ़ेक न्यूज़ समाज के लिए ख़तरनाक, हो चुकी है सैकड़ों मौतें : डॉ मनीष जैसल

मंदसौर विश्वविद्यालय के सूचना और पुस्तकालय विभाग द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया

फ़ेक न्यूज़ से बचाव के  टूल्स एंड टेक्निक विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में फ़ैक्टशाला के मीडिया ट्रेनर डॉ मनीष जैसल बतौर प्रशिक्षक उपस्थित रहे। डेटा लीड्स और इंटरन्यूज़ पूरे देश में फ़ेक न्यूज़ और मिसइन्फ़ॉर्ममेशन  से जुड़े पहलुओं को लेकर जन जागरूकता अभियान चला रहा है। 

सनातन संस्कृति को संजीवनी प्रदान करने वाला महानायक

डॉ. शंकर सुवन सिंह-

विवेकानंद का तात्पर्य ख़ुशी से है। विवेक+आनंद अर्थात विवेकानंद। विवेक का सम्बन्ध ज्ञान से है। आनंद का सम्बन्ध सुख और दुःख से परे है। जो व्यक्ति सुख और दुःख दोनों स्थितियों में समभाव (एक सामान) रहता है वही आनंदित है। खुश वह है जो आनंदित है। कर्म का सम्बन्ध विद्वता से है। कर्म, ज्ञान प्राप्ति के लिए होना चाहिए। ज्ञान समता का मूलक है। अज्ञानता विषमता का मूलक है। कहने का तातपर्य ज्ञानी व्यक्ति आनंदित है। यहां ज्ञान का तात्पर्य आध्यात्मिक ज्ञान से है। सुख, शांति का प्रतीक है। दुःख, अशांति का प्रतीक है। शांति और अशांति के बीच तारतम्यता बैठा लेना ही आनंद है।

8.1.22

यूपी विस चुनाव में इस बार क्या कम नजर आएंगे दागी उम्मीदवार

संजय सक्सेना, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में चुनाव का बिगुल बजते ही तमाम राजनैतिक दलों ने प्रत्याशी चयन का काम तेज कर दिया है. हर पार्टी जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश कर रही हैं. बात डिमांड की कि जाए तो अबकी से भाजपा और उसके बाद समाजवादी पार्टी में टिकट के दावेदारों की संख्या सबसे अधिक दिखाई दे रही है.सभी दलों के छोटे-बड़े सभी नेता टिकट की आस लगाए बैठा है तो ऐसे दावेदारों की संख्या भी कम नहीं है जिनकी अपराधिक या दबंग वाली छवि है.अपराधिक छवि के यह नेता कहीं मतदाताओं को डरा कर तो कहीं अपनी बिरादरी में रॉबिनहुड वाली छवि के सहारे चुनाव जीतना चाहते हैं.ऐसा पहली बार नहीं है जब दागी-दबंग चुनाव मैदान में ताल ठोंकने का सपना देख रहे हैं.पिछले कुछ दशकों में राजनीति में अपराधिक / दबंग / माफिया वाली छवि के नेताओं का बोलबाला बढ़ा है. इसकी शुरुआत कांग्रेस राज में हो गई थी, जिसको आगे चलकर भाजपा,समाजवादी पार्टी,बहुजन समाज पार्टी और अन्य छोटे-छोटे दलों ने भी खूब बढ़ावा दिया.

आचार संहिता लागू होते ही सरकारी और सियासी मोर्चे पर काफी कुछ बदल जाता है

अजय कुमार,लखनऊ

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान होते ही सरकारी स्तर पर काफी बदलाव आ जाएगा. किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश सहित उत्तराखंड,पंजाब,गोंवा,मणिपुर में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही ना सिर्फ राजनीतिक हलचल तेज हो जाएगी,बल्कि इन प्रदेशों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो जाएगी. उक्त प्रदेशों में आचार संहिता लागू होने के बाद चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक आचार संहिता का पालन किया जाएगा. ऐसे में जानते हैं कि आचार संहिता क्या होती है और जब तक आचार संहिता लागू रहती है, तब तक कौन-कौन से काम नहीं किए जाते हैं.

4.1.22

अपने पुराने Realme 8S को एक्सचेंज करें लावा ProudlyIndian Agni 5G के साथ

मुम्बई, 4 जनवरी, 2022: भारतीय स्मार्टफोन ब्राण्ड लावा इंटरनेशनल लिमिटेड ने स्मार्टफोन यूज़र्स के लिए अपनी तरह के अनूठे एक्सचेंज ऑफर की घोषणा की है। अब आप Realme 8S को एक्सचेंज कर लावा का सबसे चर्चित 5G स्मार्टफोन- अग्नि ले सकते हैं। रियलमी 8एस के 6 जीबी और 8 जीबी- दोनों वेरिएन्ट्स के बदले यूज़र इस ऑफर का लाभ उठा सकते हैं।

2.1.22

BIGG BOSS के सेट पर पत्रकार अमिताभ बुधौलिया के कविता संग्रह 'घंटा फर्क पड़ेगा' के साथ नजर आईं भारती सिंह

उपन्यासकार और कवि अमिताभ बुधौलिया का नया हास्य-व्यंग्य काव्य संग्रह-'घंटा फर्क पड़ेगा' इन दिनों चर्चाओं में है। साहित्य-फिल्म और टीवी के कई बड़े नाम उनके लेखन को सराह चुके हैं। कॉमेडियन भारती सिंह और उनके एंकर-लेखक पति हर्ष लिंबाचिया भी अमिताभ की कविताओं के प्रशसंक हो गए हैं।

1.1.22

भास्कर की रिपोर्टिंग- डिप्टी एसपी को बना दिया बैंक कर्मी

चंदौली जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र में एसपी आवास के समीप इंडियन बैंक की शाखा में चोरी हुई. मौके पर जांच करने पहुंचे डिप्टी एसपी सीओ सदर चंदौली अनिल राय. इन अनिल राय को अमर उजाला चंदौली मुख्यालय के रिपोर्टर रविकांत सिंह ने बैंक कर्मी बताकर खबर चला दी. भास्कर डाट काम की महानता ये कि उन्होंने खबर भी पब्लिश कर दी।

30.12.21

आतंकियों के एंट्री गेट 'तब्लीगी जमात' पर सउदी अरब का प्रहार

विष्णुगुप्त-

सउदी अरब ने आतंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है और आतंकवाद की जड़ पर बहुत ही सटीक व कड़ा प्रहार किया है, सउदी अरब की आतंकवाद की जड़ में सटीक और कड़े प्रहार की गूंज पूरी दुनिया में दिखायी देगी, मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भी मदद मिलेगी। भारत जैसे देशों को भी राहत मिलेगा। यह अलग बात है कि मुस्लिम दुनिया के कट्टरंपथी इस कार्रवाई के खिलाफ अपने गुस्से जाहिर करेंगे और सउदी अरब की आलोचना भी करने से पीछे नहीं हटेंगे। पर सउदी अरब आगे भी अपनी कार्रवाईयों को विराम नहीं देगा, क्योंकि सउदी अरब के अस्तित्व का प्रश्न है। आतंक अब सउदी अरब को भी अपने आगोश में ले लिया है, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक और लेबनान की तरह ही मुस्लिम आतंकी सउदी अरब को भी अपने आगोश में लेना चाहते हैं और सउदी अरब को हिंसा, अलगाव तथा अराजकता का प्रतीक बनाना चाहते हैं। सउदी अरब किसी भी स्थिति में अब आतंकी मानिकसता से छूटकारा चाहता है, सउदी अरब अपने आप को आतंकियों को सुरक्षित पनाहगार के तौर पर स्थापित नहीं करना चाहता है। ओसामा बिन लादेन के सबक से सउदी अरब ने काफी कुछ सीखा है और यह महसूस किया है कि आतंकी किसी के लिए भी हितैषी नहीं हो सकते हैं। आतंकी मानवता के दुश्मन हैं, इनसे दूर रहना और इनका दमन करना ही सही नीति है।

29.12.21

लावा ने अपने अग्नि 5 जी उपभोक्ताओं के लिए वाईडवाईन एल1 अपडेट की घोषणा की

मुम्बई, 29 दिसम्बर, 2021: अग्रणी भारतीय स्मार्टफोन ब्राण्ड लावा इंटरनेशनल लिमिटेड ने अपने अग्नि 5 जी उपभोक्ताओं के लिए वाईडवाईन एल1 अपडेट की घोषणा की है। यह अपग्रेड  एचडी कंटेंट व्यूइंग और अग्नि 5 जी डिवाइसेज़ में ओटीटी कंटेंट की स्ट्रीमिंग को आसान बनाएगा, जिससे यूज़र व्यूइंग का शानदार अनुभव पा सकेंगे। अग्नि में वाईडवाईन एल1 अपडेट पर उपभोक्ताओं के फीडबैक को ध्यान में रखते हुए यह घोषणा की गई है।

28.12.21

हिंदी में बोलने पर टोके जाने का जवाब मालवीय जी ने कुछ यूं दिया...

 डॉ.शंकर सुवन सिंह

महामाना मालवीय जी मर्मज्ञ पुरुष थे। अद्वितीय प्रतिभा के धनी पण्डित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसम्बर,1861 को इलाहाबाद(प्रयागराज)में हुआ था। वर्ष 2021 में महामना मालवीय की 160वीं जयंती है। इस अवसर पर मालवीय जी के द्वारा सामाजिक,राजनैतिक और शैक्षणिक क्षेत्र में किये गए कार्यों को याद किया जाता है। इस दिन उनके आदर्शों को जीवन में उतारने   की कोशिश होती है। पंडित मदन मोहन मालवीय जी के पूर्वज मालवा प्रान्त के निवासी थे। अतएव इन्हें मालवीय कहा जाता था। मदन मोहन मालवीय को धार्मिक संस्कार विरासत में मिले थे।

23.12.21

113 भाषाओं और उप भाषाओं के 176 कवियों वाला अंतरराष्ट्रीय कविता महोत्सव

meethesh nirmohi-

त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय कविता महोत्सव... कोकराझार - आसाम (भारत)..... पिछले दिनों  कोकराझार - आसाम में  शांति और प्रेम  की थीम पर आयोजित  त्रिदिवसीय (14से16 नवम्बर,21)अन्तरराष्ट्रीय काव्योत्सव, भव्यता के साथ सम्पन्न  हुआ । बोड़ो साहित्य दिवस के अवसर पर गौरांग नदी के किनारे बोडोफा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस अनूठे, ऐतिहासिक और अविस्मरणीय साहित्योत्सव  के लिए बीटीआर सरकार , उसके मुखिया श्री प्रमोद बोड़ो तथा साहित्य अकादेमी ,नई दिल्ली से पुरस्कृत कवि और असम सरकार में कैबिनेट मंत्री  श्री यू. जी. ब्रह्मा,बोड़ो साहित्य सभा और  उससे जुड़े साहित्यकारों  की जितनी प्रशंसा की जाए कम है ।

22.12.21

काकोरी : वीर रस कवि सम्मेलन - एसपी और इंस्पेक्टर ने भी सुनाई कविताएं

लखनऊ : शहीदों को नमन करने काकोरी फिर से आए हैं...  काकोरी एक्शन के अमर बलिदानियों के 94वें बलिदान दिवस पर  काकोरी शहीद मंदिर प्रांगण में आयोजित वीर रस कवि सम्मेलन व मुशायरे का आगाज़ प्रातः 9 बजे जी. पी. ओ. हजरतगंज स्थित काकोरी स्तम्भ पर एस. डी. एम. सदर, साहित्य शिरोमणि डा. रंगनाथ मिश्रा सत्य, पण्डित बेअदब लखनवी, अनिल किशोर शुक्ल "निडर", कृष्णानंद राय, उदय खत्री, यादवेंद्र कुमार व उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के राम प्रकाश सिंह द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि से हुआ । तत्पश्चात काफिला बाजनगर स्थित काकोरी शहीद मंदिर पहुंचा जहाँ एस. डी. एम. सदर, पण्डित बेअदब लखनवी , डा. रंगनाथ मिश्रा "सत्य" द्वारा दीप प्रज्वलित कर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के द्वारा आयोजित होने वाले भव्य समारोह व चित्र प्रदर्शनी का शुभारम्भ हुआ ।


 

भारतीय समाज एकरंगा बनाने की कोशिश बेहद खतरनाक



नवसाधना कला केन्द्र में 'राष्ट्रीय एकता, शांति और न्याय' शिविर का समापन

वाराणसी ।तीन दिन तक 'प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण' शिविर के समापन पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये कार्यकर्ता इस नारे के साथ अपने घरों को लौट गये कि 'हम होंगे कामयाब एक दिन, मन में है विश्वास...'। साझी विरासत और मेल-जोल की भारतीय संस्कृति का विस्तार करने की शपथ लेने के साथ ही उन्होंने माना कि सतरंगी भारतीय संस्कृति को एकरंगी बनाने की कोशिश ही मुल्क के लिए सबसे बड़ा खतरा है जिससे मुल्क को बचाने की जरूरत है.

हिंदू देह है और हिंदुत्व उसकी आत्मा

 डा. कृष्णगोपाल मिश्र-

आजकल हिंदू और हिंदुत्व में अंतर की चर्चा जोरों पर है। पिछले दिनों एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता ने राजस्थान की एक सभा में हिंदू और हिंदुत्व को लेकर जो ज्ञान दिया है उसे सुनकर बड़े-बड़े विद्वान और भाषाविद् भी आश्चर्यचकित हैं क्योंकि इससे पहले इन शब्दों की ऐसी ज्ञानगर्भित व्याख्या कभी पढ़ने-सुनने में नहीं आयी है। ऐसा लगता है कि हमारे विकासशील देश में राजनीति के साथ-साथ भाषा, साहित्य, इतिहास, दर्शन, विज्ञान, अर्थशास्त्र आदि सभी विषयों पर कुछ भी बोलने का एकाधिकार हमारे नेताओं ने अपने पक्ष में सुरक्षित कर लिया है। अब इन विषयों के विद्वानों की आवश्यकता नहीं रही। सारे विषय राजनीति के स्वार्थ सागर में समा गए हैं और अब जो राजनेता कहें वही अंतिम सत्य है।

18.12.21

झुकने के बजाय पत्रकार ने सवाल क्यों कर दिया?

 arun srivastava-

सलाम कीजिए आली जनाब आये हैं... तो आली जनाब के आगे झुक जाना चाहिए था। झुकने के बजाए सवाल करने लगे, वो भी ऐरे-गैरे से नहीं सांसद से और जब सांसद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हो वो भी राक्षसी बहुमत प्राप्त वाली सरकार का, तब सवाल! अब यह मत कहिएगा कि, इससे ज्यादा सांसद तो स्व. राजीव गांधी सरकार के पास भी थे और उसमें से कई बाहुबली भी रहे होंगे। रहे होंगे पर किसी ने सरेआम घोषित तो नहीं किया था न कि, मैं एक विधायक या सांसद ही नहीं हूँ ... यहाँ के लोग जानते हैं कि इसके पहले मैं क्या था। फिर यह बात उन्होंने किसी के कान में नहीं कही थी। सरे-आम कहा था और  लाउडस्पीकर से कहा था। अब चूक यह हो गई कि, यह नहीं बताया कि, ' इसके पहले वो क्या थे ?

14.12.21

निर्वाचन पास वाले पत्रकारो की अलग मतदान व्यवस्था की जाए

Vikram Srivastava-
    
चुनावों के दौरान निर्वाचन पास वाले पत्रकारो को अलग मतदान व्यवस्था के लिए राजधानी के सैकड़ो पत्रकारों के हस्ताक्षर किये हुए मांग पत्र को आज मंगलवार को वरिष्ठ पत्रकार विक्रम श्रीवास्तव ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीमती सौजन्या को सौपा दिया है। 


 

ABP News-CVoter third opinion poll predicts victory of BJP in four states with AAP in the lead in Punjab

Noida: The ABP News-CVoter (Centre for Voting Opinion & Trends in Election Research) November 2021 opinion poll predicts a narrow win for the BJP in UP, Uttarakhand and Goa, with its seat share falling precariously close to the majority mark in UP and Uttarakhand. Punjab and Manipur remain too close to call for any party, with AAP and BJP leading in Punjab and Manipur respectively.

कलम और बॉर्डर के सिपाही को जर्नलिस्ट क्लब ने दी श्रद्धांजलि

कानपुर-देश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत और पत्रकार ब्रजेश दीक्षित के आकस्मिक निधन के बाद शनिवार को कानपुर जर्नलिस्ट क्लब में कलम और बॉर्डर के सिपाही को एकसाथ श्रद्धांजलि दी गयी, श्रद्धांजलि सभा में पत्रकार भावुक दिखे  सीडीएस स्व. बिपिन रावत और पत्रकार ब्रजेश दीक्षित को श्रद्धांजलि दी गई और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगतों की आत्मा की शान्ति की प्रार्थना की गई।

पत्रकारिता की ऐसी स्थिति लोकतंत्र के लिए बहुत भयावह है

प्रवेश चौहान-

आज की मीडिया इंडस्ट्री में एक नया प्रचलन बढ़ गया है। पत्रकार सरकार से सवाल ना पूछ कर विपक्ष से सवाल पूछता है। अगर कोई मीडिया हाउस सरकार से सवाल करता भी है तो उस पर इनकम टैक्स काले साए की तरह मंडराता रहता है। अभी कुछ समय पहले ही देश के जाने-माने प्रतिष्ठित अखबार दैनिक भास्कर पर लगातार छापे पड़े थे। जिस कारण सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इससे पहले वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा जिस यूट्यूब चैनल के लिए काम करते हैं उस यूट्यूब चैनल न्यूज़ क्लिक के दफ्तर पर छापे मारे गए थे। यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या छापा मारने से सरकार पत्रकारों की आवाज दबा लेगी। खैर यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

पुणे में नहीं है हिंदी के रिपोर्टर्स के लिए कोई खास मौका

आज देश में पुणे बहुत तेजी से बढ़ते शहर के रूप में जाना जाता है। कभी यह सिर्फ एजुकेशन के लिए जाना जाता था, लेकिन आज हर क्षेत्र में यह विकास कर रहा है, लेकिन यहाँ पर आज भी हिंदी रिपोर्टर्स के लिए कोई स्थान नहीं है। कभी वो छोटी सैलरी पर काम करने को मजबूर हो जाते हैं तो कभी उन्हें दूसरी भाषा की ओर मुड़ना पड़ता है। जो तटस्थ होकर हिंदी के लिए ही काम करना होता है वे मजबूरी में सिर्फ ट्रांसलेशन का काम करते हैं। उन्हें निखरने का मौका ही नहीं मिलता है। वो सिर्फ एक ट्रांसलेटर बनकर रह जाते हैं।

11.12.21

मोदी सरकार यदि हार गई तो क्या बेरोजगार अन्य राजनीतिक दल पर भरोसा कर सकते हैं?

 Maheshwari Mishra-

 बेरोजगारी भत्ता अभी तक सिर्फ चुनावी घोषणा बनकर रह गया है... देश के युवा उसी भ्रमजाल में फंस रहे हैं जिस भ्रमजाल 7 साल पहले फंसे थे। तब कांग्रेस के प्रति लोगों में आक्रोश था और भाजपा-आरएसएस का साइलेंट सेल लोगों की नफरत की आग में घी डाल रहा था और फिर साहब आए गुजरात का विकास मॉडल पेश किया। दो करोड़ हर साल रोजगार देने का वादा किया। महंगाई का रोना रोया।

7.12.21

किसानों की आत्महत्याओं के कारणों का निवारण कैसे हो

- शैलेन्द्र चौहान
किसान आत्महत्याओं के बारे में जानने के लिए इस दुखांतिका का इतिहास जान लेना भी आवश्यक है। और इसे महाराष्ट्र राज्य के संदर्भ में जानना अधिक तर्कसंगत होगा। सन 1990 में अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' के ग्रामीण मामलों के संवाददाता पी. साईंनाथ ने किसानों द्वारा नियमित आत्महत्याओं की सूचना दी। आरंभ में ये रपटें महाराष्ट्र से आईं। जल्दी ही आंध्रप्रदेश से भी आत्महत्याओं की खबरें आने लगी। शुरुआत में लगा कि अधिकांश आत्महत्याएं महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों ने ही की हैं। लेकिन महाराष्ट्र के राज्य अपराध लेखा कार्यालय से 2010 में प्राप्त आँकड़ों को देखने से स्पष्ट हो गया कि पूरे महाराष्ट्र में कपास सहित अन्य नकदी फसलों के किसानों की आत्महत्याओं की दर बहुत अधिक रही है। आत्महत्या करने वाले केवल छोटी जोत वाले किसान नहीं थे बल्कि मध्यम और बड़े जोतों वाले किसान भी थे। राज्य सरकार ने इस समस्या पर विचार करने के लिए कई जाँच समितियां बनाईं। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सरकार द्वारा विदर्भ के किसानों पर व्यय करने के लिए 110 अरब रूपए के अनुदान की घोषणा की। बाद के वर्षों में कृषि संकट के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, आंध्रप्रदेश, पंजाब, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी किसानों ने आत्महत्याएँ की। 2009 में भारत के राष्ट्रीय अपराध लेखा कार्यालय ने 17368 किसानों के आत्महत्या की रपटें दर्ज कीं। सबसे ज़्यादा आत्महत्याएँ महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुई थी। इन 5 राज्यों में 10765 यानी 62% आत्महत्याएँ दर्ज हुई।

सिनेमा और टीवी के श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश देने की एफडब्लूआइसीई ने फिर की मांग

shashikant singh-
    
फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज (एफडब्लूआइसीई) ने महाराष्ट्र सरकार को एक ज्ञापन भेजकर सिनेमा,टीवी शो और मनोरंजन के दूसरे माध्यम से जुड़े   श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश और उन्हें पीएफ तथा इ एस आई की सुविधा दिए जाने की फिर से  मांग की है।

हाय ये योगी जी का पोस्टरी विकास

priyanshi singh-
 



मोदी के नाम पर पुनः सत्ता में आना चाहती भाजपा.... उत्तरप्रदेश जहां की गली गली अब आगामी विधानसभा चुनाव के रंग में रंगी हुई है और प्रदेश की सत्ताधारी सरकार का कहना ही क्या यह रोज एक नई रणनीति के साथ जनता को लुभाने के लिए एक नया दावं खेल देते हैं। वही आजकल इन्होंने जनता के मध्य मोदी मंत्र के जाप का आरम्भ कर दिया है और अब यह प्रदेश में मोदी ब्रांड के नाम से एक बार पुनः सत्ता में आने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि भगवा रंग की चुनर ओढे इस सरकार को ऐसा लगता है की मोदी इनके लिए तुरुप का इक्का है जिनका एक संबोधन जनता को अपने शाब्दिक मायाजाल में गाँस लेगा।

अगर मीडिया में जाना है तो मल्टीटास्कर बनना मत भूलना

priyanshi singh-

बुर्जुग कहावत कहते थे कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं आजकल यह दिखाई भी दे रहा है। पत्रकार सुनने में जितना खूबसूरत लगता है कॉलेज लाइफ में यह हमें उतना ही खूबसूरत दिखाई भी देता है। लेकिन जैसे ही स्नातक की पढ़ाई पूरी होती है हम इसकी हकीकत से रूबरू होने लगते हैं। क्योंकि रोजगार की भूख से हमारा पेट बिलख उठता है और हम आय दिन रोजगार के लिए समाचार संस्थानों के चक्कर लगाने लगते हैं लेकिन वहां हमें मिलता एक दाना भी नहीं क्योंकि बड़े संस्थान बड़े पत्रकारों को जानते हैं और उनकी भूख शांत करने की योजनाओं के साथ चलते है। वहीं यदि कही कोई लोकल न्यूज़ चैनल आपको अपने यहां मौका दे देता है तो यह आपके लिए वैसा रोजगार सिद्ध होता है जैसे ढोल के अंदर पोल। जो बिना टाँकी के शानदार बजता रहे यानी सैलरी में पूरी डेस्क का काम सम्भाल ले। वहीं यदि उसे सब नहीं आता है तो वह उसे सीखे अन्यथा उनके हिसाब से लोगों की कमी नही है जो कम पैसे में सब जगह हांथ पसार कर काम कर सकते हैं। लेकिन एक बात तो है इन लोकल चैनलों की इन्हें कंटेंट तो ऐसा चाहिए जो सभी पोर्टल से भिन्न हो और एक नजर में लोगों को अपनी और आकर्षित करें इनके व्यू भी बढ़वाए लेकिन लेखक ऐसा बिल्कुल नहीं चाहिए जो सिर्फ उत्त्तम कोटि का कंटेंट बनाए।

5.12.21

मीडिया का यह सच अगर कॉलेजों में बता दिया जाए तो पत्रकारों की भड़ास न निकले

 Aman Rathaur
journalist.aman.rathaur@gmail.com

मीडिया में काम कर रहे लोगों के व्यवसायिक जीवन की अनुभूति और असलियत में जमीन-आसमान का अंतर है। हाईलेवल पर्सनालिटी के लोगों के साथ उठना-बैठना, पत्रकारिता से राजनेताओं और बयूरोक्रेट्स को अपनी मुट्ठी में रखना। अलग-अलग कई शाखाओं और पदों पर काम करने का अनुभव; रोज नई चुनोतियों का सामना करके कुछ सीखना; अच्छा खासा पैसा और हाथ मे पावर, अक्सर पत्रकारों की ऐसी ही छवि लोग बनाते है। पर जिस प्रकार अभिनेता पर्दे पर कुछ तथा असलियत में अलग होते हैं। वैसे ही पत्रकार कैमरे के आगे और पीछे काफी अलग होता है।

1.12.21

सबको सुधारने का दावा करने वाले पत्रकार ने महिला को सरेआम गरिया दिया

के. सत्येंद्र-

पुरानी आग ठंडी भी नही हुई थी कि फिर से धधक पड़ी!

गोरखपुर : गोरखपुर जनपद के चौरीचौरा थानाक्षेत्र में आज एक महिला ने एक टी वी चैनल के पत्रकार पर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी । सार्वजनिक तौर पर इस घटना से आहत महिला ने अपनी सहायक महिलाओ को एकत्र कर इस घटना के संबंध में अपना बयान कैमरे पर दिया है । महिला का आरोप है कि वो अपने सहायक महिला साथियों के साथ पत्रकार हरेंद्र दूबे से मिली और उनसे अपनी मदद करने को कहा।

झूठ क्यों बोलते हो 15 लाख मिले तो थे ....याद करो वो वाक्या जब !

के. सत्येंद्र-

सबको मिले थे पंद्रह लाख याद करो जब एक जनसभा में मोदीजी ने कहा भाईयों और बहनों...अयोध्या में दीपावली पर एक साल में 3 लाख दिए जलाए, तो बोलो 5 साल में कितने दिए ?

28.11.21

जब आंदोलन में बैठे किसानों को बीजेपी ने कभी किसान माना ही नहीं तो मोदी ने बिल वापस क्यों ले लिया?

praveshchauhan405@gmail.com 

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए यह बात तो हम सभी जानते हैं। मगर कुछ बातें हैं जो अब सभी लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं। पहली बात, कई बार भाषणों में बीजेपी के मंत्रियों द्वारा यह कहते हुए हमने भी सुना है कि जो किसान वहां बैठे हैं। वह वास्तव में किसान नहीं उपद्रवी, खालिस्तानी और नकली किसान जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। सबसे बड़ा सवाल यहां पर, जब दिल्ली को घेरे वहां पर बैठे हुए लोग किसान नहीं थे तो फिर नरेंद्र मोदी ने आखिर बिल वापस क्यों ले लिया।

सामाजिक एकता का खात्मा डेमोक्रेसी को चैलेंज: प्रो. मलिक

वाराणसी।आज वाराणसी के नव साधना प्रेक्षागृह,तरना में राइज एंड एक्ट के तहत एक दिवसीय " राष्ट्रीय एकता, शांति व न्याय" विषयक सम्मेलन में वक्ताओं ने राष्ट्रीय एकता,शांति और न्याय की स्थापना को लेकर अपने-अपने विचार रखे। वक्ताओं का मत था कि राष्ट्रीय एकता के कमजोर होने से लोकतंत्र कमजोर होता है। जरूरत हमें सामाजिक ताने-बाने को मजबूती प्रदान करते हुए देश की एकता अखंडता को अक्षुण रखने का प्रयास करना चाहिए।

दैनिक जागरण ने अटल बिहारी को राष्ट्रपति बना दिया

 दैनिक जागरण में शनिवार 27 नवंबर को एक ख़बर सभी संस्करण में छपी है। जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति लिख दिया। यह खबर किसी रिपोर्ट्स ने नहीं बल्कि खुद आउटपुट हेड दिवाकर मिश्र ने लिखी है जो डेस्क पर बिंदी मात्रा की गलती पर माफीनामा लिखाते रहते है और सार्वजनिक डेस्क के साथियों को गालियां देकर अपमानित भी करते हैं।

गैरोला स्मृति सम्मान पर उठे सवाल

अरुण श्रीवास्तव-

 देहरादून। उत्तरांचल प्रेस क्लब ने अपने  डा.पीतांबर दत्त बड़थ्वाल सभागार में एक समारोह आयोजित कर तीन स्थानीय पत्रकारों चांद मोहम्मद मनीष भट्ट और मो. अफजाल अहमद सहित सामाजिक कार्यकर्ता राजीव उनियाल जी को कोरोना से संक्रमित लोगों की मदद करने के लिए " पत्रकार अनूप गैरोला स्मृति सामाजिक सक्रियता सम्मान " से नवाज़ा है। इस सम्मान का इतिहास क्या है, भूगोल क्या है पता नहीं। आसान शब्दों में कब शुरू हुआ, कितनी बार कितनों को दिया गया पता नहीं।

21.11.21

शशिभूषण प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान से नवाजे जाएंगे पत्रकार : आईपीसी

नई दिल्ली : आज वरिष्ठ पत्रकार शशिभूषण प्रसाद सिंह की जयंती समारोह के मौके पर अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद् के द्वारा पत्रकार सम्मान की बात कही गई । बताते चले कि शशिभूषण प्रसाद सिंह बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले थे । जिन्होंने हिंदुस्थान समाचार की नींव बिहार में स्थापित की व कई वर्षों तक संपादन का कार्य किया । इसके अलावा उन्होंने हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्लीज की स्थापना की व संपादन करते रहे । इसी वर्ष 71 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से वे पत्रकारिता जगत को अलविदा कह चले ।

सी एम सिटी के एस आई सी का तुगलकी फरमान ...सिर्फ मान्यता प्राप्त पत्रकार ही मिलें!

के. सत्येंद्र- 

 गोरखपुर के ए डी एम (एफ आर) साहब से मैं कहना चाहता हूँ कि आपके मना करने के बावजूद हमने फिर से बदतमीजी कर दी और फिर से मैंने आपके जनपद के एक होनहार अफसर द्वारा जारी किए गए तुगलकी फरमान की  रिकॉर्डिंग खबर बनाकर वायरल कर दी है । तुगलकी फरमान जारी करने वाले इन साहब से जब मैं  मिला तो मुझे यह अहसास हुआ कि ये साहब शायद एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं । ये दिन भर अपने आफिस में बैठ कर अपनी ही उधेड़ बुन में लगे रहते हैं और अपने मुखबिरों से जिला अस्पताल गोरखपुर में होने वाले भ्रष्टाचार का कमीशन प्रतिशत का हिसाब किताब लगाते रहते हैं। 

मजीठिया वेज बोर्ड : तारीख...तारीख ... तारीख...


अरुण श्रीवास्तव-

है तो यह एक मुंबइया फिल्म का डायलाग लेकिन मजीठिया वेजबोर्ड पर काफी हद तक लागू होता है। आखिर अब तक हर किसी को तारीख ही मिली। किसी को श्रम विभाग से मिल रही है तो किसी को श्रम न्यायालय से। शायद वो खुशकिस्मत होंगे जिन्हें हाई कोर्ट से तारीख मिल रही है। वो भी तब जब बामुश्किल तीन सेपांच फीसद लोगों ने साहस दिखाया और कोर्ट के सुझाए रास्ते को अपनाते हुए वेजबोर्ड की रिपोर्ट की संस्तुतियों के अनुसार वेतन और अन्य परिलाभ मांगा लेकिन 10 साल बाद उन्हें मिला क्या ... ?

भ्रष्टाचार और कदाचार के नए नए कीर्तिमान गढ़ रही है सी एम सिटी की पुलिस

के. सत्येंद्र-


गोरखपुर : यूपी पुलिस तो बेमिसाल थी आज भी है और शायद हमेशा यूँ ही बेमिसाल बनी रहेगी लेकिन योगी जी की गोरखपुर पुलिस तो योगी जी के नाक के नीचे खुद ही  अपने कर्मकांडों से अपनी आबरू कई बार तार-तार कर चुकी है । सी एम सिटी में ही वर्दीधारियों ने चेकिंग के नाम पर कभी सर्राफ को लूटा तो कभी ब्लैकमेल कर डॉक्टर से लाखों रुपये ऐंठ लिए । कभी किसी की दीवार गिरा कर वसूली की तो कभी होटल में व्यवसाई को पीट-पीटकर मार डाला। कमाई के मामले में तो लगता है जैसे अपनी गोरखपुर पुलिस को कोई  विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।

महिलाओं की तरह ही पुरुष भी असमानता का शिकार होते हैं

डॉ. विक्रम चौरसिया-

मर्द को दर्द नहीं होता कहावत को सच मानकर,जो हम पुरुष ता उम्र अपना दर्द छिपाते है,जी हां वो पुरुष ही होते है,जी हां, मैं पुरुष हूं ! ध्यान से देखो  मां के पेट से जब मैं दुनियां में आता हूं, परिवार के सपने पूरे करने का जरिया बन जाता हूं, कोई मुझे बुढ़ापे का सहारा कहता है, तो किसी की आंखों का तारा बन जाता हूं। लेकिन फिर भी मैं अत्याचारी कहलाता हूं। जी हां, मैं पुरुष हूं ! देखे तो किसी भी सभ्य समाज के जीवन रूपी गाड़ी के पुरुष और महिला दोनों ही पहिये हैं ,जबकि अक्सर  पुरुष नेपथ्य में रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों व दायित्वों का भलीभांति निर्वहन करते हुए जीवन गुजार देता है,जबकि किसी भी लोकतांत्रिक देश या सभ्य  समाज में दोनों को बराबर का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन हमने पिछले दिनों लखनऊ में सरेआम पुरुष का धज्जियां उड़ते हुए देखें तो वही ऐसे ही बहुत से झूठे आरोप पुरुषों पर लगा दिया जाता है।

20.11.21

गंगा-यमुना की सफाई के नाम पर हुए भ्रष्टाचार में सबने हाथ धोए हैं...

-शैलेन्द्र चौहान

नदियों को प्रदूषण से क्या कोई बचा पाएगा... राजधानी दिल्ली में यमुना नदी पर ओखला बैराज के पास विगत कई वर्षों से जहरीले झाग की मोटी परत दिखती है। इस वर्ष राजनीतिक कारणों से छठपूजा के अवसर पर यह विशेष चर्चा में रही। यह झाग इस नदी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का नतीजा है। कई साल से यह नजारा दिख रहा है लेकिन हालात बेहतर होते नहीं दिखते। दो चार दिन आरोप-प्रत्यारोप के बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। दिल्ली सरकार ने इसी साल जनवरी में झाग रोकने के लिए 9 सूत्री कार्य योजना बनाई, जिसका नतीजा अभी तक शून्य ही रहा है। बजट में दिल्ली सरकार ने यमुना क्लीनिंग प्रोजेक्ट के लिए 2,074 करोड़ रुपये आवंटित किए लेकिन उसका नतीजा भी अभी तक शून्य ही रहा है। दिल्ली सरकार ने यमुना की सफाई के लिए 2018 से 2021 के बीच तीन साल में करीब 200 करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन अभी तक उस खर्च का कुछ असर नहीं दिखा।

Complaint againstYOUTUBE STAR CANADA TV

 sir,

 channel under name of Star Canada tv situated at sector 82 plot no.740 is not giving joining Letter and after 3 months the person named Jaspreet Singh so called channel head by making bogus blames on staff ,wo targeted staff Ko bina salry diye nikal diya jata hai, pehle se hi plan Kiya jata hai,do teen months ki salary rokne ke baad ye sb drama hota hai,8-10 logo ko sath aisa hi hua hai
 
Thanks
Komal

किसानों के संघर्ष के आगे केंद्र सरकार के झुकने पर आप कार्यकर्ताओं ने पटना में बांटी मिठाई




आम आदमी पार्टी, बिहार के प्रभारी सह बुराड़ी विधानसभा, दिल्ली के विधायक श्री संजीव झा ने किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष के बाद केंद्र सरकार द्वारा तीनों काले कृषि कानून वापस लेने की घोषणा को जनतंत्र की जीत करार दिया। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा तीनों काले कानून वापस लेने की घोषणा के पश्चात् सिंधु बार्डर लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसान भाईयों से मिलकर उन्हें मीठाई खिलाई एवं उनकी ऐतिहासिक जीत के लिए उन्हें बधाई भी दी।

किसान कानून को लेकर मीडिया के एंकर क्या बोले... व्यंग्यकार पंकज प्रसून को पढ़िए

Pankaj Prasun-

कृषि कानून रद्द होने के बाद आज शाम टीवी पर यही होने वाला है..

अमीश देवगन  - आज मोदी जी के दरियादिली की जीत हुई है। उन्होंने विपक्ष  को एक झटके में उखाड़ फेंका है।
अब क्या करेंगे यह खालिस्तानी ,कहां जाएंगे देशद्रोह करने?  कृषि कानूनों को काला कानून बताने वाले विपक्ष के काले कारनामे कब बन्द होंगे। आज की डिबेट है -कृषि कानून निरस्त, विपक्ष हुआ पस्त।

19.11.21

किसानों का ऐतिहासिक संघर्ष ज़िंदाबाद!

साल भर से जारी अभूतपूर्व किसान आंदोलन के दबाव में आज केंद्र सरकार को तीनों प्रतिगामी कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। यह किसानों की एक ऐतिहासिक जीत है। जनवादी लेखक संघ किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे को इस जीत के लिए मुबारक़बाद देता है और उनका क्रांतिकारी अभिनंदन करता है। 

14.11.21

कंगना तो बहाना हैं अपनी सोच को मनवाना है

arun srivastava-

अच्छा-खासा समय लग गया यह सोचने में कि, कंगना पर लिखूं या न लिखूं। आखिर में बाल लोकतंत्र में कम्युनिस्टों ने भी तो कहा था कि, देश की जनता भूखी है ये आजादी झूठी है जेएनयू के छात्रों ने भी हमें चाहिए आजादी वाला गीत गाया था। पर इसको लेकर पार्टी के अंदर अच्छी-खासी बहस चली और कन्हैया ने आजाद भारत में क्यों चाहिए आजादी पर अपना पक्ष रखा था।  

सौरभ द्विवेदी के जाते ही लल्लनटॉप की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में

Ankit-

युवाओं में बेहद लोकप्रिय द लल्लनटॉप इसके सम्पादक सौरभ द्विवेदी के जाते ही विश्वसनीयता के सवालों के घेरे में आ गया है। अभी हाल में ही इसकी टीम ने लखनऊ प्रवास के दौरान एक हाइटेक स्मार्ट गांव लतीफ़पुर के विषय में एक स्टोरी वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में एक गांव और उसके पूर्व प्रधानपति का प्रशस्ति गान किया गया है। पहली नज़र में यह एक सामान्य वीडियो लगता है लेकिन बारीकी से देखने पर लल्लनटॉप के इस वीडियो की चतुराई पकड़ में आ जाती है। जो सीधे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर देती है। इसे निम्न बिन्दुओं में साफ़ समझा जा सकता है-

13.11.21

मध्यवर्गीय संघर्ष और विषमताओं की ताकत का आख्यान

शैलेन्द्र चौहान-

गजानन माधव मुक्तिबोध उन गिने चुने कवियों में थे जिन्होंने विज्ञान और फैंटेसी के आधुनिक तथा कलात्मक बिंब और भाव कविता में लिए। उनकी एक कविता 'मुझे मालूम नहीं' में मनुष्य की उस असहायता का चित्रण है जिसमें वह यथास्थिति तोड़ नहीं पाता। वह दूसरों के बने नियमों तथा संकेतों से चलता है। उसका स्वयं का सोच दूसरों के सोच पर आधारित होता है। दूसरों का सोच सत्ता के आसपास का चरित्र होता है। सत्ता अपने को स्थापित करने के लिए मनुष्य के सोच की स्थिरीकरण करती है। परन्तु मनुष्य की चेतना कभी कभी चिंगारी की भांति इस बात का अहसास कराती है कि वह जो सामने का सत्य है उससे आगे भी कुछ है। संवेदनहीन होते व्यक्ति की संवेदना को वह चिंगारी पल भर के लिए जागृत करती है।