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23.11.23

Microsoft Outlook Lite Expands its Reach with Vernacular features and SMS support for Indian Users

 With features such as translation, voice typing, and transliteration, users can compose and read emails in their preferred regional language and can also access and manage their SMSes in Outlook Lite. 

New Delhi : Microsoft has announced new vernacular features in Outlook Lite, an email and SMS app designed specifically for Indian users that combines the best of email, and SMS in one place. 

कासगंज में VIP न्यूज के तथाकथित पत्रकार रंजीत राय का ऑडियो वायरल।

अतुल यादव-

कासगंज में VIP न्यूज के तथाकथित पत्रकार रंजीत राय का एक और कारनामा, अब राशन डीलर को धमकाकर अवैध उगाही के दवाब बनाने का ऑडियो वायरल

कासगंज: यूपी के कासगंज में नाकारा अफसरशाही के चलते तथाकथित पत्रकारों की चांदी है. जिले मैं अपराधिक किस्म के लोग पत्रकारिता का चोला ओढ़ भोले भाले लोगों को धमका कर जमकर अवैध उगाही कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ऑडियो ने कासगंज की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ऑडियो मैं एक तथाकथित पत्रकार रंजीत राय जिले के एक राशन डीलर को धमकाकर उसे मिलने की बात कर रहा है।
 
पत्रकार साहब का लहजा सुन कर ऐसा लगता है कि जिले के डीएसओ साहब ने अपना पद छोड़ कर जिले के पूर्ति विभाग की कमान रंजीत राय को सौंप दी है और पुलिस ने तो खुला संरक्षण प्रदान कर रखा है।
 
दरअसल रंजीत राय नाम के ये महान शख्स जिले की पत्रकारिता को शर्मशार करने का बीड़ा उठाए हुए हैं और जिला प्रशासन व पुलिस अपनी आंख और कान बंद किए बैठे हैं, पूरी जानकारी के मुताबिक रंजीत राय ने सदर कोतवाली क्षेत्र के मौहल्ला नाथूराम के रहने वाले राशन डीलर अहसान को फोन कर जो धमकाया उसे सुन कर आप भी कह उठेंगे कि जिले के डीएम और एसपी को अब जिले की कमान रंजीत राय को सौंप देनी चाहिए क्योंकि जो हड़काने का जज्बा रंजीत राय मैं है वो तो दरोगा जी मैं भी नहीं होगा।
 
सुनिए पूरा ऑडियो.....
 

 

प्रदूषण के असली कारण खोजने होंगे

रजनीश कपूर-

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या को हम कई सालों से सुनते आ रहे हैं। एक से एक सनसनीखेज वैज्ञानिक रिपोर्टो की बातों को हमें भूलना नहीं चाहिए। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि दिल्ली से निकलने वाले गंदे कचरे, कूड़ा करकट को ठिकाने लगाने का पुख्ता इंतजाम अभी तक नहीं हो पाया। सरकार यही सोचने में लगी है कि यह पूरा का पूरा कूड़ा कहां फिंकवाया जाए या इस कूड़े का निस्तार यानी ठोस कचरा प्रबंधन कैसे किया जाए? जाहिर है इस गुत्थी को सुलझाए बगैर जलाए जाने लायक कूड़े को चोरी छुपे जलाने के अलावा और क्या चारा बचता होगा? इस गैरकानूनी हरकत से उपजे धुंए और जहरीली गैसों की मात्रा कितनी है जिसका कोई हिसाब किसी भी स्तर पर नहीं लगाया जा रहा है। इन सबके चलते आम नागरिकों पर सरकार द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंधों से असुविधा हो रही है। परंतु सरकार या उसकी प्रदूषण नियंत्रण करने वाली एजेंसियाँ असल कारण तक नहीं पहुँच पा रहीं।

सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर पत्रकार रंजीत राय ने लोगों को लूटा

अतुल यादव-

कासगंज : यूपी के कासगंज में VIP न्यूज चैनल के पत्रकार रंजीत राय ने जिले में आतंक मचा रखा है, वह ग्रामीण इलाकों के लोगों को पत्रकार बनाने के नाम पर अपनी ठगी का शिकार बना रहा है। रंजीत राय पर आरोप है कि वो गांव गांव जाकर भोले भाले लोगों से मिलता है और युवाओं को पत्रकार बनाने का सपना दिखाकर उनसे पैसों की मांग करता है। ग्रामीण इलाकों में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर रंजीत राय विधवाओं और वृद्धों से भी पैसों की ठगी करता है।

Vote for your favourite Sportsperson at ‘CNN-News18 Indian of the Year 2023’

 New Delhi | November 17, 2023: Celebrating the relentless spirit of India’s sports icons who have brought glory to the nation, ‘CNN-News18 Indian of the Year’ (IOTY), news television’s biggest awards platform, has unveiled the nominees in the Sports category this year. The awards platform would honour exceptional sportspersons whose talent and commitment have elevated India's standing on the global sports stage. 

16.11.23

ताकि बहिष्कार की नौबत ही न आए

राजीव शर्मा-

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक सूची बहुत तेज़ी से शेयर की जा रही है, जिनमें ग़ाज़ा मामले को लेकर कुछ ख़ास कंपनियों के प्रॉडक्ट्स का बहिष्कार करने की अपील की गई है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी जब-जब फ़लस्तीन-इसराइल तनाव बढ़ा तो मेरे पास ऐसी ही एक सूची पहुँची थी।

क़र्ज़ की किश्तें: कितनी आसान, कितनी पेचीदा

रजनीश कपूर-

त्योहारों के मौसम में ग्राहकों को आकर्षित करने के इरादे से ज़्यादातर कंपनियाँ अपने उत्पादों पर आकर्षक ऑफर चला देते हैं। इनमें कई तरह के ऑफर होते हैं जैसे हर ख़रीद पर मुफ़्त उपहार। एक के साथ एक फ़्री। पुराना लाओ नया पाओ ऑफर आदि। परंतु इन सब में सर्वप्रथम ऑफर ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ का है। ग्राहक इस ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ के झाँसे में बड़ी आसानी से आ जाते हैं। परंतु क्या ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ वास्तव में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के, ग्राहकों को मिलती है?

बीएचयू की मुस्लिम छात्रा ने पीएम मोदी पर की पीएचडी

अजय कुमार,लखनऊ

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी एक बार फिर चर्चा में है,अबकी से चर्चा का विषय न तो राजनैतिक है, न ही कोई धार्मिक वजह है.इस बार वाराणसी ‘बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय’ की एक मुस्लिम  छात्रा की वजह से सुर्खियों में है. दरअसल, राजनीति विज्ञान की मुस्लिम शोध छात्रा नजमा परवीन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पीएचडी  की है.उन्होंने अपने अध्ययन में मोदी को राजनीति का महानायक बताया है.परवीन ने कहा है कि वह(मोदी) देश के भरोसेमंद नेता हैं. वह मुसलमानों के विरोधी नहीं, बल्कि हितैषी हैं. आध्यात्मिक चिंतक व समाज सुधारक भी हैं. वर्ष 2014 का चुनाव वंशवाद की समाप्ति और एक पार्टी के अधिनायकवाद को खत्म करने वाला रहा. शाही रक्त पर साधारण रक्त की विजय हुई थी।


टारगेट पूरा करने के चक्कर मे भूँजा बनकर रह गया है, यू पी में गंगेस्टर एक्ट !

 सत्येंद्र कुमार-

भारत एक ऐसा देश है जहाँ का कानून तमाम ख़ामियों से भरा होने के बावजूद इसके नायाब होने का ढिंढोरा पूरी बेशर्मी के साथ पीटा जाता है । अंग्रेजो ने ये कानून इसलिए बनाये थे कि इस कानून के जरिये गोरे लोग कालों को दबा कुचल सके और उनपर राज कर सकें । आज गोरे तो नही रहे लेकिन कानून वही है । नियति ने ऐसा खेल दिखाया कि आज इस कानून की बाग़डोर कालों के हाथ मे है और इसकी चोट अपने लोग अपनों पर ही कर रहे हैं । यहाँ 13 साल से ऊपर के बच्चे को वयस्क मानकर उसका पूरा टिकट वसूल किया जाता है लेकिन 16 साल के बलात्कारी को अवयस्क मानकर रियायत दे दी जाती है । यहाँ शराब और गुटखे के पाउच पर सेहत के लिए हानिकारक है लिखकर बेचा जा सकता है लेकिन पटाखों पर  पर्यावरण के लिए हानिकारक है लिखकर उसे फोड़ा नही जा सकता ।

अंग्रेजी की एक कहावत है "रूल्स आर मेड फ़ॉर फूल्स" मतलब नियम कानून सिर्फ मूर्खों के लिए बनाए गए हैं । यहाँ मूर्ख का अर्थ मात्र ऐसे लोगों से है जो कानून से ही चलना चाहते हैं लेकिन एक न एक दिन कानून के ही चुंगल में फंसा दिए जाते हैं । इसके ठीक उलट हिंदी में एक कहावत है "समरथ को नही दोष गुसाई" मतलब नियम कानून को मानने की बाध्यता हमेशा कमजोर अर्थात मूर्खों के लिए होती है । कमजोर के लिए अपने को निर्दोष साबित करना केवल तभी संभव हो सकता है जब खुद उसके पास वैसी या उससे बड़ी ताकत आ जाये । यदि आज के माहौल की तुलना कुछ वर्षों पूर्व से कर ली जाए तो पहले मान्या सुर्वे, हाजी मस्तान, संदीप भाटी, लॉरेंस विशनोई, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी, सुधीर सिंह, प्रदीप सिंह, श्री प्रकाश शुक्ला जैसे खतरनाक लोगों को गैंगेस्टर का रुतबा और तमगा हासिल था लेकिन आज बिस्कुट और साइकिल चुराने वाला चिमरखी टाइप का मरियल आदमी भी गैंगेस्टर है बशर्ते ये चोरी उसने अकेले नही बल्कि किसी के साथ मिलकर की हो ।

आज प्रदेश के लगभग हर जिले में गैंगेस्टर का टास्क और टारगेट पूरा करने की ऐसी होड़ पुलिस में मची है कि मर चुके आदमी पर भी आंख बंद कर गैंगेस्टर ठोक दिया जा रहा है । चिमरखी टाइप का चोर भी गैंगेस्टर हो सकता है पोल खोलने वाला पत्रकार और डिग्री बेचने वाला डॉक्टर भी गैंगेस्टर हो सकता है । दुकानदार और व्यवसायी तथा किसान भी गैंगेस्टर हो सकता है लेकिन एक पुलिस वाला यदि चरस की स्मगलिंग में दो तीन लोगों के साथ पकड़ लिया जाए तो वो गैंगेस्टर नही हो सकता और वहाँ गैंगेस्टर एक्ट फेल हो जाता है ।

टारगेट पूरा करने की पुलिसिया ललक ने गैंगेस्टर शब्द का रुतबा और जलवा दोनो खत्म कर दिया है । वास्तव में जो गैंगेस्टर हैं उनका रुतबा और मोह अब गैंगेस्टर शब्द से भंग हो चुका है । कहने के लिए तो पुलिस रिकॉर्ड में गैंगेस्टरों की संख्या राक्षसी बालों की तरह बढ़ रही है लेकिन अभियोजन पक्ष का रिकॉर्ड देखने  से पता चलता है कि गैंगेस्टर के मामलों मे अदालतों में सजा सिर्फ मुख्तार अंसारी जैसे लोगों को होती है जो वाकई में गैंगेस्टर शब्द को परिभाषित करते हैं । बाकी चिमरखी टाइप लोगों को कटघरे में देखते ही अदालतें समझ जाती हैं ये चिमरखी गैंगेस्टर है नही बल्कि बनाये गए हैं अदालत का वक्त जाया करने के लिए !

अब सवाल यह उठता है कि क्या हमारी पुलिस वाकई अपराध समाप्त करने की ओर बढ़ रही है या गैंगेस्टर जैसी धारा का उपयोग कर उन लोगो को भी सामाजिक तौर पर एक बड़ा अपराधी घोषित कर दे रही है,जो समाज की मुख्य धारा से फिर वापस जुड़ सकते थे और एक सामान्य जिंदगी जी सकते थे । पत्रकार तो फिर से कलम और डॉक्टर फिर से छुरी कैची ही चलाएगा साथ ही किसान भी फिर से खेती ही करेगा लेकिन बाकी के चिमरखी चोर टाइप क्या करेंगे ? वे निश्चित तौर पर अपराध की ओर अग्रसर होंगे और भविष्य में सिस्टम तथा आम जन के लिए परेशानी का सबब बनेंगे ।