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28.11.21

जब आंदोलन में बैठे किसानों को बीजेपी ने कभी किसान माना ही नहीं तो मोदी ने बिल वापस क्यों ले लिया?

praveshchauhan405@gmail.com 

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए यह बात तो हम सभी जानते हैं। मगर कुछ बातें हैं जो अब सभी लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं। पहली बात, कई बार भाषणों में बीजेपी के मंत्रियों द्वारा यह कहते हुए हमने भी सुना है कि जो किसान वहां बैठे हैं। वह वास्तव में किसान नहीं उपद्रवी, खालिस्तानी और नकली किसान जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। सबसे बड़ा सवाल यहां पर, जब दिल्ली को घेरे वहां पर बैठे हुए लोग किसान नहीं थे तो फिर नरेंद्र मोदी ने आखिर बिल वापस क्यों ले लिया।

सामाजिक एकता का खात्मा डेमोक्रेसी को चैलेंज: प्रो. मलिक

वाराणसी।आज वाराणसी के नव साधना प्रेक्षागृह,तरना में राइज एंड एक्ट के तहत एक दिवसीय " राष्ट्रीय एकता, शांति व न्याय" विषयक सम्मेलन में वक्ताओं ने राष्ट्रीय एकता,शांति और न्याय की स्थापना को लेकर अपने-अपने विचार रखे। वक्ताओं का मत था कि राष्ट्रीय एकता के कमजोर होने से लोकतंत्र कमजोर होता है। जरूरत हमें सामाजिक ताने-बाने को मजबूती प्रदान करते हुए देश की एकता अखंडता को अक्षुण रखने का प्रयास करना चाहिए।

दैनिक जागरण ने अटल बिहारी को राष्ट्रपति बना दिया

 दैनिक जागरण में शनिवार 27 नवंबर को एक ख़बर सभी संस्करण में छपी है। जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति लिख दिया। यह खबर किसी रिपोर्ट्स ने नहीं बल्कि खुद आउटपुट हेड दिवाकर मिश्र ने लिखी है जो डेस्क पर बिंदी मात्रा की गलती पर माफीनामा लिखाते रहते है और सार्वजनिक डेस्क के साथियों को गालियां देकर अपमानित भी करते हैं।

गैरोला स्मृति सम्मान पर उठे सवाल

अरुण श्रीवास्तव-

 देहरादून। उत्तरांचल प्रेस क्लब ने अपने  डा.पीतांबर दत्त बड़थ्वाल सभागार में एक समारोह आयोजित कर तीन स्थानीय पत्रकारों चांद मोहम्मद मनीष भट्ट और मो. अफजाल अहमद सहित सामाजिक कार्यकर्ता राजीव उनियाल जी को कोरोना से संक्रमित लोगों की मदद करने के लिए " पत्रकार अनूप गैरोला स्मृति सामाजिक सक्रियता सम्मान " से नवाज़ा है। इस सम्मान का इतिहास क्या है, भूगोल क्या है पता नहीं। आसान शब्दों में कब शुरू हुआ, कितनी बार कितनों को दिया गया पता नहीं।

21.11.21

शशिभूषण प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान से नवाजे जाएंगे पत्रकार : आईपीसी

नई दिल्ली : आज वरिष्ठ पत्रकार शशिभूषण प्रसाद सिंह की जयंती समारोह के मौके पर अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद् के द्वारा पत्रकार सम्मान की बात कही गई । बताते चले कि शशिभूषण प्रसाद सिंह बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले थे । जिन्होंने हिंदुस्थान समाचार की नींव बिहार में स्थापित की व कई वर्षों तक संपादन का कार्य किया । इसके अलावा उन्होंने हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्लीज की स्थापना की व संपादन करते रहे । इसी वर्ष 71 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से वे पत्रकारिता जगत को अलविदा कह चले ।

सी एम सिटी के एस आई सी का तुगलकी फरमान ...सिर्फ मान्यता प्राप्त पत्रकार ही मिलें!

के. सत्येंद्र- 

 गोरखपुर के ए डी एम (एफ आर) साहब से मैं कहना चाहता हूँ कि आपके मना करने के बावजूद हमने फिर से बदतमीजी कर दी और फिर से मैंने आपके जनपद के एक होनहार अफसर द्वारा जारी किए गए तुगलकी फरमान की  रिकॉर्डिंग खबर बनाकर वायरल कर दी है । तुगलकी फरमान जारी करने वाले इन साहब से जब मैं  मिला तो मुझे यह अहसास हुआ कि ये साहब शायद एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं । ये दिन भर अपने आफिस में बैठ कर अपनी ही उधेड़ बुन में लगे रहते हैं और अपने मुखबिरों से जिला अस्पताल गोरखपुर में होने वाले भ्रष्टाचार का कमीशन प्रतिशत का हिसाब किताब लगाते रहते हैं। 

मजीठिया वेज बोर्ड : तारीख...तारीख ... तारीख...


अरुण श्रीवास्तव-

है तो यह एक मुंबइया फिल्म का डायलाग लेकिन मजीठिया वेजबोर्ड पर काफी हद तक लागू होता है। आखिर अब तक हर किसी को तारीख ही मिली। किसी को श्रम विभाग से मिल रही है तो किसी को श्रम न्यायालय से। शायद वो खुशकिस्मत होंगे जिन्हें हाई कोर्ट से तारीख मिल रही है। वो भी तब जब बामुश्किल तीन सेपांच फीसद लोगों ने साहस दिखाया और कोर्ट के सुझाए रास्ते को अपनाते हुए वेजबोर्ड की रिपोर्ट की संस्तुतियों के अनुसार वेतन और अन्य परिलाभ मांगा लेकिन 10 साल बाद उन्हें मिला क्या ... ?

भ्रष्टाचार और कदाचार के नए नए कीर्तिमान गढ़ रही है सी एम सिटी की पुलिस

के. सत्येंद्र-


गोरखपुर : यूपी पुलिस तो बेमिसाल थी आज भी है और शायद हमेशा यूँ ही बेमिसाल बनी रहेगी लेकिन योगी जी की गोरखपुर पुलिस तो योगी जी के नाक के नीचे खुद ही  अपने कर्मकांडों से अपनी आबरू कई बार तार-तार कर चुकी है । सी एम सिटी में ही वर्दीधारियों ने चेकिंग के नाम पर कभी सर्राफ को लूटा तो कभी ब्लैकमेल कर डॉक्टर से लाखों रुपये ऐंठ लिए । कभी किसी की दीवार गिरा कर वसूली की तो कभी होटल में व्यवसाई को पीट-पीटकर मार डाला। कमाई के मामले में तो लगता है जैसे अपनी गोरखपुर पुलिस को कोई  विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।

महिलाओं की तरह ही पुरुष भी असमानता का शिकार होते हैं

डॉ. विक्रम चौरसिया-

मर्द को दर्द नहीं होता कहावत को सच मानकर,जो हम पुरुष ता उम्र अपना दर्द छिपाते है,जी हां वो पुरुष ही होते है,जी हां, मैं पुरुष हूं ! ध्यान से देखो  मां के पेट से जब मैं दुनियां में आता हूं, परिवार के सपने पूरे करने का जरिया बन जाता हूं, कोई मुझे बुढ़ापे का सहारा कहता है, तो किसी की आंखों का तारा बन जाता हूं। लेकिन फिर भी मैं अत्याचारी कहलाता हूं। जी हां, मैं पुरुष हूं ! देखे तो किसी भी सभ्य समाज के जीवन रूपी गाड़ी के पुरुष और महिला दोनों ही पहिये हैं ,जबकि अक्सर  पुरुष नेपथ्य में रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों व दायित्वों का भलीभांति निर्वहन करते हुए जीवन गुजार देता है,जबकि किसी भी लोकतांत्रिक देश या सभ्य  समाज में दोनों को बराबर का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन हमने पिछले दिनों लखनऊ में सरेआम पुरुष का धज्जियां उड़ते हुए देखें तो वही ऐसे ही बहुत से झूठे आरोप पुरुषों पर लगा दिया जाता है।

20.11.21

गंगा-यमुना की सफाई के नाम पर हुए भ्रष्टाचार में सबने हाथ धोए हैं...

-शैलेन्द्र चौहान

नदियों को प्रदूषण से क्या कोई बचा पाएगा... राजधानी दिल्ली में यमुना नदी पर ओखला बैराज के पास विगत कई वर्षों से जहरीले झाग की मोटी परत दिखती है। इस वर्ष राजनीतिक कारणों से छठपूजा के अवसर पर यह विशेष चर्चा में रही। यह झाग इस नदी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का नतीजा है। कई साल से यह नजारा दिख रहा है लेकिन हालात बेहतर होते नहीं दिखते। दो चार दिन आरोप-प्रत्यारोप के बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। दिल्ली सरकार ने इसी साल जनवरी में झाग रोकने के लिए 9 सूत्री कार्य योजना बनाई, जिसका नतीजा अभी तक शून्य ही रहा है। बजट में दिल्ली सरकार ने यमुना क्लीनिंग प्रोजेक्ट के लिए 2,074 करोड़ रुपये आवंटित किए लेकिन उसका नतीजा भी अभी तक शून्य ही रहा है। दिल्ली सरकार ने यमुना की सफाई के लिए 2018 से 2021 के बीच तीन साल में करीब 200 करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन अभी तक उस खर्च का कुछ असर नहीं दिखा।

Complaint againstYOUTUBE STAR CANADA TV

 sir,

 channel under name of Star Canada tv situated at sector 82 plot no.740 is not giving joining Letter and after 3 months the person named Jaspreet Singh so called channel head by making bogus blames on staff ,wo targeted staff Ko bina salry diye nikal diya jata hai, pehle se hi plan Kiya jata hai,do teen months ki salary rokne ke baad ye sb drama hota hai,8-10 logo ko sath aisa hi hua hai
 
Thanks
Komal

किसानों के संघर्ष के आगे केंद्र सरकार के झुकने पर आप कार्यकर्ताओं ने पटना में बांटी मिठाई




आम आदमी पार्टी, बिहार के प्रभारी सह बुराड़ी विधानसभा, दिल्ली के विधायक श्री संजीव झा ने किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष के बाद केंद्र सरकार द्वारा तीनों काले कृषि कानून वापस लेने की घोषणा को जनतंत्र की जीत करार दिया। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा तीनों काले कानून वापस लेने की घोषणा के पश्चात् सिंधु बार्डर लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसान भाईयों से मिलकर उन्हें मीठाई खिलाई एवं उनकी ऐतिहासिक जीत के लिए उन्हें बधाई भी दी।

किसान कानून को लेकर मीडिया के एंकर क्या बोले... व्यंग्यकार पंकज प्रसून को पढ़िए

Pankaj Prasun-

कृषि कानून रद्द होने के बाद आज शाम टीवी पर यही होने वाला है..

अमीश देवगन  - आज मोदी जी के दरियादिली की जीत हुई है। उन्होंने विपक्ष  को एक झटके में उखाड़ फेंका है।
अब क्या करेंगे यह खालिस्तानी ,कहां जाएंगे देशद्रोह करने?  कृषि कानूनों को काला कानून बताने वाले विपक्ष के काले कारनामे कब बन्द होंगे। आज की डिबेट है -कृषि कानून निरस्त, विपक्ष हुआ पस्त।

19.11.21

किसानों का ऐतिहासिक संघर्ष ज़िंदाबाद!

साल भर से जारी अभूतपूर्व किसान आंदोलन के दबाव में आज केंद्र सरकार को तीनों प्रतिगामी कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। यह किसानों की एक ऐतिहासिक जीत है। जनवादी लेखक संघ किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे को इस जीत के लिए मुबारक़बाद देता है और उनका क्रांतिकारी अभिनंदन करता है। 

14.11.21

कंगना तो बहाना हैं अपनी सोच को मनवाना है

arun srivastava-

अच्छा-खासा समय लग गया यह सोचने में कि, कंगना पर लिखूं या न लिखूं। आखिर में बाल लोकतंत्र में कम्युनिस्टों ने भी तो कहा था कि, देश की जनता भूखी है ये आजादी झूठी है जेएनयू के छात्रों ने भी हमें चाहिए आजादी वाला गीत गाया था। पर इसको लेकर पार्टी के अंदर अच्छी-खासी बहस चली और कन्हैया ने आजाद भारत में क्यों चाहिए आजादी पर अपना पक्ष रखा था।  

सौरभ द्विवेदी के जाते ही लल्लनटॉप की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में

Ankit-

युवाओं में बेहद लोकप्रिय द लल्लनटॉप इसके सम्पादक सौरभ द्विवेदी के जाते ही विश्वसनीयता के सवालों के घेरे में आ गया है। अभी हाल में ही इसकी टीम ने लखनऊ प्रवास के दौरान एक हाइटेक स्मार्ट गांव लतीफ़पुर के विषय में एक स्टोरी वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में एक गांव और उसके पूर्व प्रधानपति का प्रशस्ति गान किया गया है। पहली नज़र में यह एक सामान्य वीडियो लगता है लेकिन बारीकी से देखने पर लल्लनटॉप के इस वीडियो की चतुराई पकड़ में आ जाती है। जो सीधे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर देती है। इसे निम्न बिन्दुओं में साफ़ समझा जा सकता है-

13.11.21

मध्यवर्गीय संघर्ष और विषमताओं की ताकत का आख्यान

शैलेन्द्र चौहान-

गजानन माधव मुक्तिबोध उन गिने चुने कवियों में थे जिन्होंने विज्ञान और फैंटेसी के आधुनिक तथा कलात्मक बिंब और भाव कविता में लिए। उनकी एक कविता 'मुझे मालूम नहीं' में मनुष्य की उस असहायता का चित्रण है जिसमें वह यथास्थिति तोड़ नहीं पाता। वह दूसरों के बने नियमों तथा संकेतों से चलता है। उसका स्वयं का सोच दूसरों के सोच पर आधारित होता है। दूसरों का सोच सत्ता के आसपास का चरित्र होता है। सत्ता अपने को स्थापित करने के लिए मनुष्य के सोच की स्थिरीकरण करती है। परन्तु मनुष्य की चेतना कभी कभी चिंगारी की भांति इस बात का अहसास कराती है कि वह जो सामने का सत्य है उससे आगे भी कुछ है। संवेदनहीन होते व्यक्ति की संवेदना को वह चिंगारी पल भर के लिए जागृत करती है।

1.11.21

धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान की आत्मा है : प्रो.मंडल





वाराणसी।जिस आइडिया ऑफ इंडिया का सपना आजादी के आंदोलन के दौरान परवान चढ़ा था आज वह बर्बाद हो रहा है. मुल्क नफरत, गैर बराबरी और कारपोरेट फासीवाद की आग में झुलस रहा है यदि समय रहते  स्वतन्त्रता, समता,बंधुता और इंसाफ पर आधारित आईडिया ऑफ़ इंडिया/भारत की परिकल्पना के लिए संघर्ष नहीं किया जाएगा तो हमारी बसुधैव कुटुम्बकम की विरासत खतरे में पड़ जाएगी। आज जरूरत है कि संविधान की प्रस्तावना को आत्मसात कर उसे सुदुर ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाए ,जिससे जन मानस को न सिर्फ संवैधानिक मूल्यों की जानकारी हासिल हो बल्कि इन मूल्यों पर आधारित समाज निर्मित करने में भी आसानी हो।उक्त बातें मात्रिधाम स्थित अंजलि में राइज एंड एक्ट प्रोग्राम के तहत आयोजित *भारत की परिकल्पना* विषयक एक संगोष्ठी में वक्ताओं ने कही।