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24.3.22

कश्मीर फाइल्स की आड़ में अभी तक के देश के सारे भाग्य विधाताओं को लाइन में लगाने के प्रयास से क्या हल होगा

Krishan pal Singh-

कश्मीर फाइल्स फिल्म 32 वर्ष पहले घाटी में बर्बर और पाशविक अत्याचार के बल पर उजाड़े गये कश्मीरी पंडितों की कहानी को नये सिरे से सुनाती है। लेकिन क्या इसे निरपेक्ष रूप से एक मार्मिक फिल्म भर कहा जा सकता है। निश्चित रूप से इसके पीछे राजनीतिक दुराशय है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती और इसने फिल्म के नैतिक पक्ष को संदिग्ध बना दिया है। सबसे बड़ी आपत्तिजनक बात यह है कि इस फिल्म की आड़ में जो विमर्श खड़ा किया जा रहा है उसका मकसद इसके पहले के देश के सारे भाग्यविधाताओं को एक लाइन से हिन्दू विरोधी और देश विरोधी साबित करना है। यहां तक कि भाजपा की ही पार्टी के सबसे बड़े यशस्वी राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी पर भी इस तरह के छींटे पड़ने की परवाह नहीं की गई है। हर प्रसंग पर तत्कालीन भाग्य विधाताओं का फैसला परिस्थिति सापेक्ष होता है और वर्तमान की बदली हुई परिस्थिति में उस फैसले के आधार पर उनकी मंशा को लेकर कोई निष्कर्ष निकालने में बहुत सावधानी की जरूरत पड़ती है अन्यथा उनके साथ न्याय नहीं हो सकता।  

19.3.22

बीजेपी की जीत में मायावती की गुप्त मदद

Unmesh Gujarathi-
    
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों ने 403 सीटों में से 273 सीटों पर जीत हासिल की है। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार बीजेपी को 52 सीटों का नुकसान हुआ है। बीजेपी के लिए ये जीत इतनी आसान नहीं थी। इसलिए बीजेपी ने भी दलित और जातिगत आधारित राजनीति का कार्ड खुल कर खेला। भाजपा ने भी अपनी एक समय की दुश्मन बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ अंदरखाने में गठबंधन बनाकर, समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोटों में सेंध लगा कर किसी तरह सत्ता हथिया ली है।

न्यायपलिका और न्यायधीश से आज भी उम्मीदें जिंदा है...

के. सत्येन्द्र-

कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायधीश को पैसे से प्रभावित करने के मामले से समूचा कानून जगत स्तब्ध है लेकिन यह भी सत्य है कि बहुत से ऐसे मामले सामने आ ही नही पाते ।

वरिष्ठ कवि बुद्धिसेन शर्मा का निधन

प्रयागराज। नगर के वरिष्ठ कवि बुद्धिसेन शर्मा का मंगलवार की सुबह निधन
हो गया। 26 दिसंबर 1941 को कानपुर में जन्मे बुद्धिसेन शर्मा प्रयागराज
के करैलाबाग कॉलोनी में निवास करते थे, लंबे समय से बीमार होने के कारण
अपने शार्गिद इश्क़ सुल्तानपुरी के साथ गौरीगंज में रह रहे थे। उन्होंने
आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। समाचार पत्र
‘दैनिक प्रताप’, ‘भारत’ और ‘मनोरमा’ पत्रिका में उन्होंने काम किया था।
मुशायरों में भाग लेने के लिए कई देशों की यात्रा की थी। देश राष्टपति के
हाथों उन्हें ‘साहित्य श्री’ की उपाधि मिली थी। इसके अलावा वर्ष 2019 में
गुफ़्तगू द्वारा उन्हें ‘अकबर इलाहाबादी सम्मान’ प्रदान किया गया था।
उनका एक ग़ज़ल संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला था। श्री शर्मा का अंतिम
संस्कार मंगलवार को शाम चार बजे रसूलाबाद घाट पर किया जाएगा।
गु़्फ़्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, प्रभाशंकर शर्मा, मनमोहन सिंह
तन्हा, नरेश कुमार महरानी, अनिल मानव, शैलेंद्र जय, नीना मोहन
श्रीवास्तव, विजय प्रताप सिंह, मासूम रजा राशदी, संजय सक्सेना, अफ़सर
जमाल, डॉ. नीलिमा मिश्रा, इश्क़ सुल्तानपुरी, रेशादुल इस्लाम, शिवाजी
यादव, देवेंद्र प्रताप वर्मा, संजय सागर, अर्चना जायसवाल, शिवपूजन सिंह
सरिता श्रीवास्तव, डॉ. मधुबाला सिन्हा, जया मोहन, दयाशंकर प्रसाद आदि ने
उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

12.3.22

भारत में केवल एक नेता की जरूरत है जो नई कांग्रेस बनाने की घोषणा करे

करणीदानसिंह राजपूत-

भारत में केवल एक नेता की  जरूरत है जो नई कांग्रेस बनाने की घोषणा करे। नया विधान और नया निशान हो। अब घोषणा हो ताकि सन 2024 के लोकसभा आमचुनाव से पहले  संपूर्ण देश भर में उठाव हो सके।  इसके बाद कॉन्ग्रेस का मानस बदल जाएगा स्वरूप बदल जाएगा और लोग जाग जाएंगे। केवल नामों में पदों में जिंदा रहने वाले लोग पूरे देश में खत्म हो जाएंगे। कॉन्ग्रेस इसलिए पिट रही है हार रही है कि उसमें से कोई एक भी व्यक्ति घोषणा नहीं कर रहा।

उत्तर प्रदेश के चुनाव में कैसे भारी पड़ी व्यवहारिक सच्चाईयां

Krishan pal Singh-

उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव नतीजे सामने आ चुके हैं। अब समय उनके निष्कर्षो के चीढ़ फाड़ का है। मुझ सहित अधिकांश राजनीतिक विश्लेषक प्रदेश की सरकार के बारे में अपने अंदाजे बिफल हो जाने से परेशान हैं। चुनाव में किसी तरह की हेरा फेरी साबित करने का कोई सबूत तलाशने से भी नहीं मिला सो प्राश्यचित इस बात का है कि जमीनी सच्चाई जानने में हमसे कहां चूक हुई। बड़ी संख्या में खिन्न लोग हमें मिले थे जिन्होंने चुनाव के पहले सरकार के कामों पर तीव्र असंतोष प्रकट किया था जबकि इनमें से अधिकांश ने 2017 में भाजपा की ही पालकी ढ़ोने में गुरेज नहीं किया था। हमारे लिए पहेली बन गया है कि ये वोट कहां चले गये। आकलन में हमसे कहां से चूक हुई ताकि भविष्य में अपनी विश्वसनीयता के लिए हम अधिक सतर्कता से काम कर सकें।

9.3.22

कनाडा की महिला संस्था ने असमिया कवयित्री को किया सम्मानित

Vikram Singh Rathod-

असमिया कवयित्री और गायिका तनुप्रिया कलिता को यूनिवर्सल विमेंस नेटवर्क, कनाडा द्वारा वूमेन ऑफ़ इंस्पिरेशन अवार्ड २०२२ में सांस्कृतिक राजदूत के रूप में नामित किया गया है । उन्हें यह नामांकन साहित्य और संगीत में उनके योगदान के लिए मिला है।

उत्तर प्रदेश में छुट्टा गोवंश की समस्या : चुनौतियां एवं समाधान

उत्तर प्रदेश में छुट्टा पशुओं की समस्या एक मानव जनित सामाजिक समस्या है जिसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव कृषि पर पड़ा है. गाँव गाँव में सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु खुले आम घूम रहे हैं और फसल को बर्बाद कर रहे हैं. किसानों की व्यथा अंततः विभिन्न मंचों के माध्यम से राजनैतिक दलों,  प्रशासन  एवं सरकार तक भी पहुंच चुकी है. विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से उठता रहा.  स्वयं प्रधानमन्त्री तक को इस समस्या को स्वीकारते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन देना पड़ा. विभिन्न दलों के घोषणा पत्र और चुनावी भाषणों के दौरान छुट्टा गोवंश की समस्या की चर्चा हुयी. अगले सप्ताह तक प्रदेश में नयी सरकार का गठन हो जाना है, आगामी सरकार के समक्ष भी इस समस्या के समाधान हेतु कारगर उपाय करने का दबाव होगा. आइये, जमीनी सच्चाई को स्वीकारते हुए समस्या और समाधान पर कुछ समझने की चेष्टा करें.

7.3.22

पत्रकारिता का राष्ट्रधर्म

जयराम शुक्ल-

राष्ट्रवाद इन दिनों विमर्श के केन्द्र पर है। भारत के संदर्भ में और वैश्विक संदर्भ में भी। राजनीतिक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पक्ष व विपक्ष पर खूब चर्चाएं हुईं, हो रही हैं, तो भला पत्रकारिता इससे क्यों अछूती रहे। उसमें भी राष्ट्रवाद के तत्व तलाशे जा रहे हैं।

महिला दिवस विशेष : दख़ल ज़रूरी है आह्लादिनी का

-डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'

सृष्टि की उत्पत्ति से, सृजन की वेदिका से, अक्ष के केन्द्र से, धर्म के आचरण से, कर्म की प्रधानता से, कृष के आकर्षण से, सनातन के सत्य से , चेतन के अवचेतन से, जो ऊर्जा का ऊर्ध्वाधर प्रभाव पैदा होता है, वह निःसंदेह सृजन के दायित्वबोध के कारण संसार की आधी आबादी को समर्पित है। ब्रह्माण्ड  की समग्र अवधारणा के केन्द्र में जो भाव स्थायी रूप से विद्यमान है, उन भावों के पोषण, पल्लवन और प्रवर्तन के लिए सृष्टि की प्रथम सृजक को पूजनीया के साथ-साथ पालक और पोषक की भूमिका का निर्वहन भी करना चाहिए।