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19.7.23

समय के साथ ‘मिजाज’ बदलता लूडो गेम

लूडो में ‘दिल’ हारने वाली सीमा जैसी ‘प्रेम कहानी’ इकरा की भी थी

 संजय सक्सेना,लखनऊ

   विश्व स्तर पर सबसे लोकप्रिय बोर्ड गेम लूडो का समय के साथ अपना ‘मिजाज’ बदलता जा रहा है.कभी यह बच्चों का खेल हुआ करता था तो अब लूडो को जवां दिलों की धड़कन बनते भी देखा जाता है. लूडो एक बौद्धिक खेल भी है. इसकी प्रसांगिकता को देखते हुए अब कई स्कूल-कालेजों में भी बच्चों का बौद्धिक विकास करने के लिए लूडो और शतरंज जैसे परम्परागत खेलों का आयोजन होने लगा है. इसी तरह से कल तो जो महिलाएं किटी पार्टी में ताश खेला करती थीं,अब वह भी लूडो खेलने लगी हैं. लूडो बुजुर्गो का टाइम पास का जरिया भी बनता जा रहा है.

17.7.23

मनाली के रास्ते से लापता 11 लोगों के प्रकरण में तहसील प्रशासन ने शुरू की छानबीन

 दिनेश कुमार जायसवाल-

 एसडीएम मिल्कीपुर और तहसीलदार ने पिठला गांव पहुंच लापता अब्दुल मजीद के दामाद से की वार्ता।

कुल्लू मनाली जा रहे एक ही परिवार के 10 सदस्य सहित 11 लोग हो गए हैं लापता।

अनहोनी की आशंका के चलते गांव में पसरा सन्नाटा।

मिल्कीपुर अयोध्या।
 कुमारगंज थाना क्षेत्र के पिठला गांव से हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली के लिए निकले एक ही परिवार के 10 सदस्य सहित 11 लोगों के रास्ते से लापता होने के मामले में अब तहसील प्रशासन मिल्कीपुर की ओर से जांच पड़ताल और छानबीन शुरू कर दी गई है। हालांकि अभी लापता लोगों का कोई सुराग नहीं लग सका है। फिलहाल गांंव में सन्नाटा पसरा हुआ है और चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। हिमाचल प्रदेश स्थित ब्यास नदी में आई बाढ़ और भूस्खलन के चलते अब लापता लोगों के सगे संबंधियों सहित ग्रामीणों में किसी बड़ी अनहोनी की आशंका समा गई है। बता दें कि कुमारगंज थाना क्षेत्र स्थित पिठला गांव निवासी 62 वर्षीय अब्दुल मजीद कंकाली अपने दामाद रहबर एवं अपने पूरे परिवार सहित हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली में रहकर मेहनत मजदूरी करके जीवन का गुजर-बसर कर रहा था।

The Bhojpuri Legend Manoj Bhawuk Bestowed “Bhojpuri Icons" Filmfare and Femina Award





In a historic moment, two iconic brands “Filmfare and Femina”known for their steadfast dedication to recognising talent and excellence honoured eminent Bhojpuri writer, poet, lyricist and critic Mr. Manoj Bhawuk for his indelible contribution in the history of Bhojpuri cinema and literature. In a grand celebration at Ramada, Lucknow on 16 July 2023,Mr. Manoj Bhawuk was bestowed “Filmfare and Femina Bhojpuri Icons-Reel & Real Star”honour by Ambika Muttoo, Editor-in-Chief of Femina and Vikram Vasudev Narla, Director from South industry in presence of many celebs. This is first time Filmfare and Femina collaborated to honour Bhojpuri Icons who have made remarkable contributions to Bhojpuri entertainment industry.

16.7.23

कार्टूनिस्ट कमल किशोर की पेशकश

 


मुंह मोड़ते संगी-साथी,अकेले पड़ते अखिलेश

अजय कुमार,लखनऊ

    समाजवादी पार्टी पिछले करीब दस वर्षो में हार का ’चैका’ लगा चुकी है. 2014 के लोकसभा चुनाव से शुरू हुआ हार का यह सिलसिला 2017 के विधान सभा और 2019 के लोकसभा चुनाव के पश्चात एक बार फिर 2022 के विधान सभा में मिली हार तक जारी रहा था. हर बार सपा को भाजपा से मात खानी पड़ी.बीजेपी के समाने अखिलेश ने सभी दांव अपना चुके हैं. अब 2024 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर सपा के अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव की ’ चुनावी परीक्षा’ होगी,लेकिन इस बार भी अखिलेश की राह आसान नहीं लग रही है. अब तो अखिलेश के पास कोई नया ‘प्रयोग’ भी नहीं बचा है. वह कांगे्रस,बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं. राष्ट्रीय लोकदल और ओम प्रकाश राजभर की पार्टी का भी साथ करके देख लिया हैं,लेकिन कोई भी प्रयोग उनकी हार के सिलसिले को रोक नहीं पाया. स्थिति यह हो गई है कि आज की तारीख मंे 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव बिल्कुल ‘तन्हा’ नजर आ रहे हैं.कांगे्रस और बहुजन समाज पार्टी तो समाजवादी पार्टी से दूरी बनाकर चल ही रहे हैं,इसके अलावा उसके मौजूदा साथी राष्ट्रीय लोकदल के चैधरी जयंत सिंह और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर भी भाजपा गठबंधन की तरफ पेंगे बढ़ा रहे हैं.

आदरणीय रामेश्वर पांडेय जी तो पीड़ित थे, मुलजिम नहीं

Rakesh Sharma-

बात आज जुबान पर आ ही गई है इसलिए आदरणीय रामेश्वर पांडेय जी की विनोदप्रियता और उनकी कुछ बातें जो आज तक नहीं भूला वे भी आप सभी के साथ साझा करने का प्रयास कर रहा हूं। दोस्तों पिछले कई महीनों से तकनीकी तौर पर अपंग था और संसाधनों की तंगी से जूझ रहा था इसी कारण उनके स्वर्गवास के बाद उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित नहीं कर पाया था। पिछले 23 साल पुरानी वे बातें आज भी यूं ही दिमाग में अंकित हैं। मैं ये सभी बातें इसलिए आप लोगों के सामने ला रहा हूं कि जिस व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन लोगों की भलाई करने में बिताया वे इस सम्मान के हकदार हैं कि हमारी आगामी पीढ़ी के लोग उनके बारे में जरूर जानें।

आदरणीय अतुल जी भी अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन पत्रकारिता की दुनिया को निष्कलंक आगे बढ़ाने के लिए इन दोनों महानुभावों का योगदान में कभी कम नहीं आंकना हूं। एक दिन अतुल जी मेरी डेस्क से गुजर रहे थे तो अचानक रुक गए और मेरे द्वारा संपादित की जा रही खबर को देखने लगे और वर्तनी को लेकर  कुछ सवाल पूछे। उस समय मैं यह भी नहीं जानता था कि वे कौन हैं, लेकिन जैसे ही वे आगे बढ़े तो कई वरिष्ठ साथी आकर मेरे समाचार के संपादन को देखने लगे और घोषणा कर दी कि मुन्ना कल सुबह अपना बोरिया बिस्तर बांध लो और घर जाने के लिए अगली टिकट बुक करा लो। मैं बहुत परेशान और उस समय मेरी पत्नी अस्पताल में मेरे पहले बच्चे के जन्म के लिए भर्ती थी। पांडेय जी ने अगले दिन दोपहर में ही मुझे कार्यालय में किसी को संदेश भेजकर बुलवा लिया...
    
पत्रकारिता के जगत में आपके इर्द गिर्द जो भी पर घटनाएं घटती हैं उसके साक्षी मात्र हम ही नहीं होते हैं, परन्तु कुछ मामले इस तरह के होते हैं कि प्रत्यक्ष तौैर पर हम लोग एक मुलजिम नजर आते हैं लेकिन असल में हम पीड़ित होते हैं। इन अवस्थाओं की जानकारी हमें बाद में होती है तो उस समय सिर्फ पछतावे के अलावा कुछ किया नहीं जा सकता। भाई अमरीक ने हाल ही में अपनी तरफ से स्पष्ट किया है कि हर किसी का नजरिया किसी के लिए एक नहीं हो सकता और कुछ बातें हम इसलिए नजरअंदाज कर जाते हैं। किसी इंसान की अच्छी बातों को सिर्फ अपने कारणों से हम भुला दें तो उसे न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता...

वन स्टॉप सेंटर से एक पीड़ित नाबालिग किशोरी गायब!

देवरिया : प्रदेश के देवरिया जिले के वन स्टॉप सेंटर से एक पीड़ित नाबालिग किशोरी के फरार हो जाने की घटना ने पुलिस विभाग की सक्रियता पर सवालिया निशान लगा दिया है। जानकारी के अनुसार भटनी थाना क्षेत्र की एक गांव निवासी बलात्कार पीड़िता नाबालिग किशोरी बुधवार को रहस्यमई परिस्थितियों में फरार हो गई।

ज्ञानवापी : सबूतों का खजाना, फिर भी आक्रांता औरंगजेब महान?

Suresh Gandhi-

वेद-पुराणों से लेकर इतिहास में दर्ज है काशी दुनिया के सबसे प्राचीनतम से प्राचीन शहरों में से एक है। 2,500 साल से भी अधिक पुराना इसका इतिहास है। सारनाथ में अशोक की सिंह राजधानी को पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व में बुद्ध के पहले उपदेश की स्मृति के रूप में व्याख्या किया गया है। जबकि इस्लाम का इतिहास 14 सौ साल पुराना है। ऐसे में बड़ा सवाल तो यही है कथित ज्ञानवापी मस्जिद हजारों साल पुरानी कैसे हो सकती है? दस्तावेजों के मुताबिक इस्लाम की पहली मस्जिद कुवत-उल-इस्लाम मस्जिद 12वीं सदी के अंत की है, तो कथित ज्ञानवापी का निर्माण कैसे हो गया? जबकि स्कंद पुराण में कहा गया, देवस्य दक्षिणी भागे वापी तिष्ठति शोभना। तस्यात वोदकं पीत्वा पुनर्जन्म ना विद्यते। अर्थात प्राचीन विश्ववेश्वर मंदिर के दक्षिण भाग में जो वापी है, उसका पानी पीने से जन्म मरण से मुक्ति मिलती है

सुरेश गांधी-

दरअसल, वाराणसी के ज्ञानवापी केस में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है। हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करते हुए सर्वे में मिले शिवलिंग को फव्वारा बताना 125 करोड़ हिन्दुओं के अपमान का आरोप लगाया है। इसमें हिंदू पक्ष की तरफ से वादी महिलाओं ने अपनी दलील में औरंगजेब को क्रूर शासक बताते हुए आदि विश्ववेश्वर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाने की बात कहीं है। जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हिंदू पक्ष का दावा बिल्कुल बेबुनियाद है। ज्ञानवापी मामला सुनवाई योग्य नहीं है. मस्जिद हजारों साल पुराना है। जिसे शिवलिंग कहा जा रहा है, वो फव्वारा है. ज्ञानवापी के दीवार पर त्रिशूल, डमरू, ओम जैसी कलाकृतियां का अंकित कहना गलत है। औरंगजेब निर्दयी नहीं था और उसने किसी मंदिर पर आक्रमण नहीं किया था. हालांकि मुस्लिम पक्ष की इस दलील के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. बता दें, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी में मिले कथित शिवलिंग का साइंटिफिक सर्वे कराने का आदेश दिया था. इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी. ऐसे में कोर्ट का फैसला क्या होगा, यह आने वाला वक्त बतायेगा। लेकिन औरंगजेब निर्दया नहीं था, वो मुस्लिमों का आदर्श रहा, यह 125 करोड़ हिन्दुओं का अपमान नहीं तो और क्या है? वह औरंगजेब जिसके क्रूरता के किस्से मथुरा, वृंदावन, काशी, अयोध्या से लेकर दिल्ली तक में टूटे सैकड़ों मंदिरों के अवशेष चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं।

कुल्लू मनाली जा रहे एक ही मुस्लिम परिवार के 11 सदस्य लापता, अनहोनी की आशंका के चलते गांव में पसरा सन्नाटा

दिनेश कुमार जायसवाल- 
 
मिल्कीपुर, अयोध्या।
 
हिमाचल प्रदेश के ब्यास नदी में आई बाढ़ एवं भूस्खलन के चलते बस सहित लापता होने की परिवारीजन जता रहे आशंका
 
कुमारगंज थाना क्षेत्र स्थित पिठला गांव से हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली के लिए निकले एक ही परिवार के 11 लोग अचानक लापता हो गए हैं। उनके सगे संबंधी अब उनकी खोजबीन में जुट गए हैं हालांकि किसी अनहोनी की आशंका से घबराए परिवारी जनों ने कुमारगंज पुलिस को मामले की जानकारी देते हुए कार्यवाही की गुहार की है। 

2.7.23

स्त्री का चरित्र और पुरुष का भाग्य देवता भी नहीं जानते, मनुष्य कैसे जान सकता है ?


सत्येंद्र कुमार

त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम देवो न जानाति, कुतो मनुष्य: अर्थात स्त्री का चरित्र और पुरुष का भाग्य देवता भी नहीं जानते, मनुष्य कैसे जान सकता है ?

आपने वो फ़िल्म देखी होगी जिसका एक बड़ा मशहूर गाना था "ठुकरा के मेरा प्यार... मेरा इंतकाम देखेगी । इस फ़िल्म का वास्तविक चित्रण आजकल देखने को मिल रहा है ।उत्तर प्रदेश की फिज़ा में एक बेवफा एसडीएम की  बेवफाई की चर्चा जोरों पर है । मतलब अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का ! यह तराना आज लगभग हर वो शख्श गुन गुना रहा है जिसके सूख चुके जख्मों को फिर से एस डी एम साहिबा की बेवफाई वाले नए किस्से ने कुरेद दिया है । आज सोशल मीडिया में एक पति की दर्द भरी कहानी सभी की जुबानी चर्चा में शामिल हो चुकी है। सच के धरातल पर बेवफाई का नजारा ऐसा है कि एक पत्नी भक्त बेचारा सिसकता हुआ कह रहा है कि "अगर बेवफाओं की अलग कोई दुनिया होती... तो मेरी बीवी वहाँ की महारानी होती..!"

चारों तरफ शोर है, और सोशल मीडिया में उस बेवफा पत्नी के चरित्र का बेबाक वर्णन हो रहा है जो एक बड़ी पदाधिकारी है । दिल में चोट लगी पति आलोक मौर्या को और दर्द से कराहने लगे वे पत्नी भक्त, जो अपनी पत्नियों को सरकारी नौकरी या अधिकारी बनाने का ख्वाब लेकर तैयारी करवा रहे थे। आज बेवफाई के इस नए किस्से ने मुसीबत का ऐसा पहाड उन महिलाओं के सामने खड़ा कर दिया जो सपनो की उड़ान में अपने पतियों के भरोसे मचल रही थी । एक तरफ आज महिला सशक्तिकरण के इस युग में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ जैसे स्लोगनों के जरिये देश का परिवेश बदलने का प्रयास चल रहा है वहीं दूसरी तरफ एस डी एम साहिबा के किस्से ने लोगों को दिलों में एक नई पटकथा का संवाद पिरोना शुरू कर दिया है । इस किस्से ने चर्चाओ के बाजार में उठे सवाल पर बवाल पैदा कर दिया है कि "बीबी मत पढ़ाओ वर्ना हश्र देख रहे हो भाई" ! आखिर एक ही मछली पूरे तालाब को गन्दा कर देती है वाली कहावत को बतौर पत्नी एस डी एम साहिब ने लोगों के बीच साबित कर दिया ! 

दर दर भटकता दो बच्चियों का बाप आज भविष्य के ताने बाने में ठीक वैसे ही उलझकर रह गया है जैसे दहेज प्रताड़ना के झूठे किस्सों में कई परिवार उलझे हुए बेचारगी से घूम रहे हैं । बेवफाई के इल्ज़ाम के लिए पहले से ही बदनाम नारी जाति के लिए नफ़रत की जो लहर आज फिर हिलोरें मारने लगी हैं उसका सारा श्रेय एस डी एम साहिब को जाता है , लेकिन साथ ही इसका  खामियाजा उन औरतों को भी भुगतना पड़ सकता है  जिनके लिए उनका घर परिवार ही सब कुछ होता है। तमाम उदाहरण  ऐसे भी मौजूद हैं जहाँ पति और परिवार की खुशी के लिए बड़े ओहदे की नौकरी को भी लात मार दी है वफ़ा की देवियों ने !समाज में मान सम्मान के साथ जीने का हक दिलाने वाली अर्धांगिनियों की बदौलत ही सभ्य समाज में पुरुष ने नारी को पूज्यनीय का दर्जा देकर खुशहाल जीवन जीने की परिकल्पना को साकार किया है। सदियों से एस डी एम साहिब जैसे बेवफाई के किस्से मशहूर जरुर है- मगर "छोड़ेंगे न हम तेरा साथ ओ साथी मरते दम तक का तराना भी मशहूर है" ! क्यों किसी को वफ़ा के बदले वफ़ा नहीं मिलती जैसा तराना सवाल बनकर भले आज की फ़िज़ाओं में गूंज रहा है लेकिन वफ़ा की देवियों की सुरीली आवाज में आज भी यह गीत सुनाई दे रहा है कि " तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है " ! 

आज पति चपरासी और पत्नी एस डी एम वाले किस्से को लेकर सोशल साईट पर जबरदस्त ज़ुबानी फाइट चल रही है और लोग कहने लगे हैं कि "तोता मैना की कहानी तो पुरानी और पुरानी हो गयी" ! इस किस्से ने समाज के भीतर, भीतरखानों में बैठे भेड़ियों को आज सवाल पूछने का मौका दे दिया है कि क्या पतियों को अपनी पत्नियों को उच्च शिक्षा नहीं दिलानी चाहिए ? क्या वास्तव में वक्त के साथ औरत बदल जाती है ? इस पर समाज ने फिर नये सिरे से मंथन करना शुरु कर‌ दिया है‌। एसडीएम साहिबा की बेवफाई को किसी भी महिला सामाजिक संगठन ने समर्थन नहीं दिया है लेकिन हकीकत के धरातल पर चपरासी पति की विवशता ने सभी के दिलों मे हमदर्दी का तूफान खड़ा कर दिया है । कल क्या होगा यह तो नहीं पता लेकिन इस किस्से ने आज हर एक पति के मन मे एक सशंकित भाव पैदा कर दिया है जो अपनी पत्नी को आईएस पीसीएस की तैयारी करवा रहे हैं । एक की ग़लती ने तमाम लोगों के भविष्य को गर्त‌ के किनारे लाकर खड़ा कर दिया है । सरकार द्वारा चलाए जा रहे महिला सशक्तिकरण अभियान का ज्वलंत उदाहरण बनकर उभरी हैं एस डी एम साहिब ! दूसरी तरफ अपनी कुर्बानी देकर और कर्ज लेकर अपनी पत्नी को आसमान की बुलन्दी पर पहुँचाने वाले चपरासी पति की बेबसी बयां कर रही है कि .. 

"पढ़ रहा हूँ मैं भी इश्क की किताब ! अगर बन गया वकील तो, बेवफओं की खैर नही.."

1.7.23

अपराधों के नये नये रिकार्ड रचता उत्तर प्रदेश

केपी सिंह-
योगी सरकार के समय उत्तर प्रदेश में हैरतअंगेज आपराधिक वारदातों के नये नये रिकार्ड रचे जा रहे हैं। कभी जेल के अन्दर माफिया को गोलियों से भून दिया जाता हैं तो कभी पुलिस हिरासत में माफिया भाई मीडिया के कैमरों के सामने फायरिंग की अंधाधुंध बौछार करके ढ़ेर कर दिये जाते हैं तो कोर्ट रूम में घुसकर जज के सामने माफिया को शूट कर दिया जाता हैं। एक ओर यह दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था इतनी मजबूत की जा चुकी है कि बड़े बड़े अपराधी अपनी जान की खैर मांगते हुये बाहरी राज्यों में भाग निकलें हैं या उन्हें बाहर रहने में डर लग रहा है जिसकी वजह से वे खुद थाने पहुंच कर पुलिस से अपने को जेल भेजने की भींक मांग रहे हैं। दूसरी ओर इन वारदातों की मिसाल है जो यह जाहिर करती है कि प्रदेश में कहीं भी, कोई भी सुरक्षित नहीं बचा है। अभैद्य सुरक्षा के रहते हुये भी शूटर कहीं भी प्रकट हो सकते है और कुछ भी कर सकते हैं। शूटर भी ऐसे जो नादान उम्र के हैं और जिनको वे टारगेट कर देते हैं उनसे अदावत का कोई कारण भी किसी को पता नहीं होता लेकिन उनकी प्लानिंग और तैयारी प्रशिक्षित आतंकियों से भी ज्यादा कमाल की रहती है। प्रयागराज में अतीक और अशरफ जैसे दुर्दान्त अपराधियों को मौत के घाट उतारने वाले नौजवानों के पीछे किसका मास्टर माइंड था और ऐसे कई सवालों को लेकर रहस्य बना हुआ है लेकिन यह भी रहस्य है कि अब उन सवालों की चर्चा न पुलिस के तीरंदाज कर रहे है न मीडिया के लाल बुझक्कड़। इसमें कौन सा आका है जिसका हुकुम बजाने के लिये उनको चुप्पी साधनी पड़ गयी है।

चौबीस लाख की गाड़ी में भी सुरक्षा तकनीक भगवान भरोसे ही है !

सत्येंद्र कुमार-

गोरखपुर : गाड़ियों में लाखों रुपये खर्च करने वालों का खुदा ही मालिक है । इनकी लाखों की गाड़ी कब इनके लिए कब्रगाह बन जाये कुछ कह नही सकते । तमाम सुरक्षा फीचर के दावे करने वाली गाड़ी कंपनियों का हाल यह है कि जान पर बन आने के बाद भी ये लोग इन घटनाओं को सीरियसली नही लेते । बड़े अरमान से साल भर पहले हमारे मित्र ने भी 24 लाख रुपये में चारपहिया वाहन टाटा हैरियर खरीदा था । लेकिन इनकी यही 24 लाख की उड़नखटोला इनकी कब्रगाह बन गयी होती । कल दोपहर के समय गाड़ी चलाते वक्त इनकी गाड़ी के अंदर अचानक धुआँ उठने लगा । धुएँ की रफ्तार बढ़ने पर जैसे ही इन्होंने ब्रेक लगाया कि गाड़ी बीच सड़क पर जेल में तब्दील हो गयी । गाड़ी के सारे सिस्टम लॉक हो गए । अब गाड़ी न आगे जा पा रही थी न पीछे । ट्राफिक जाम हुआ तो अंदर इन्हें फंसा देख जनता जनार्दन ने जैसे तैसे इन्हें बाहर निकाला । 

ये महाशय तो बच गए लेकिन कंपनी इतना सब कुछ होने पर भी बेहयाई पर उतर आई । कंपनी का कहना है ऐसा हो जाता है अब गाड़ी पूरी चेक अप के बाद लगभग डेढ़ दो महीने में मिलेगी । तब तक गाड़ी में 24 लाख खर्च करने वाले हमारे मित्र फिर से पैदल हो गए हैं ।
 

 

अमर उजाला : नम्बर एक या फ्रेश रद्दी

 पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद मंडल में खुद को नम्बर एक अखबार कहने वाले अमर उजाला की हालत खराब हो गई है। रिपोर्टर के माध्यम से दवाब बनाकर प्रसार बढ़ाने की कोशिश में एजेंटों पर अखबार जबरन रद्दी कराया जा रहा है। रामपुर जिले की मिलक तहसील के एक अखबार विक्रेता ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट व स्टोरी साझा की है, जिसमें अमर उजाला अखबार के बंडल का फोटो डालकर लिखा है कि किसी को अमर उजाला की फ्रेश रद्दी चाहिए तो सम्पर्क करें। विक्रेता ने अपना नाम और मोबाइल नम्बर भी दिया है।