भड़ास blog
अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...
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13.4.12
हे! तीसरी आँख वाले निर्मल बाबा धन्य हो!
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-कपड़े की दुकान, ठेकेदारी नहीं बाबागिरी जम गई। -अब धंधा जम गया, तो उन्नति से चिड़ रहे हैं। त्रिलोकदर्शी, तीसरी आंख से सब देखने वाला। यानि त...
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