19.2.11

ज़ज्बात


मोहब्बत



किसी दिल को हरगिज दुखाया न जाए,
ये मुहब्बत है, मुहब्बत को मिटाया न जाए।

आप से दिल मेरा जब से लगा,
किसी और से दिल लगाया न जाए।

दबा है जो आपसी नफरतों का मसला,
मेरे यार उसको कुरेदा न जाए।

हर तरफ नफरतों का है बोल-बाला,
च़रागे मुहब्बत बुझाया न जाए।

हुयी मुद्दत खुद को भूल बैठे,
मगर उनका चेहरा दिल से भुलाया न जाए।

वो चाँद है या कोई रोशनी,
वो सूरत है कैसा बताया न जाए।

ये अपने मुहब्बत की दास्तां है ‘सागर’,
इसे गैरों को हरगिज सुनाया न जाए।।

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