भड़ास blog
अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...
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गधापना
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21.1.08
अबे, सुन बे, ओ लड़कियां, दीदी जी, हरामी साले को
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तुमको सुनता हूं पढ़ता हूं तो अट्टाहस करता हूं तरस खाता हूं तुम पर हम मर्द हरामी के, कितना समझदार हो गए हैं सोचते हैं रोज, हर रोज हरामीपने के...
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