भड़ास blog

अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...

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7.3.08

पंकज राग की कविता , खास भड़ास के लिए

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होना उसका चेहरा वीभत्स है लिखावट बडी भद्दी है उसकी सोच बेढंगी है और उदगार असभ्य वह वर्षों से किनारे खड़ा है जहाँ-जहाँ उसका अक्स झिलमिलाता है...
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