भड़ास blog

अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...

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20.2.10

समय

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चटखी कली पर गून्ज उपवन में अटकी रही, क्षण की एक बून्द भर समय के मेघ पर लटकी रही । घडी की सुइयाँ इस बीच भी मगर भागती रहीं, सूरज की किरणें धरत...
4 comments:
4.4.08

कुमार विकल

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गालियाँ फ़ैक्टरी के मालिक ने मेरे बेटे को गालियाँ दीं हरामख़ोर... सूअर की औलाद कुत्ते...कमीने और न जाने क्या-क्या मेरा बेटा सुनता रहा रोता र...
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