28.4.11
27.4.11
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आप अपने ब्लॉग का विज्ञापन इस ब्लॉग मेँ दे सकते हैँ वो भी बिल्कुल मुफ्त मेँ। http://advertise-mee.blogspot.com
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Kunal Verma
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Mera bharat mahan hai bhai
Mera bharat mahan hai par jam se parshan hai
Pal-pal marta raam hai ravan ka abhiman hai
Sita ke liye har chakki me pista kyon hanuman hai
Jeeta hai jo mar jayega,ghada paap ka bhar jayega
Is kalyug me aane se to ravan bhi dar jayega
Khali muththi,khali pait ,khali hi to aaye the
Kiss paise me,mohmaya me atke jate pran hai…
im.nikhhil@gmail.com
9314445222
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Nikhil
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एक कल्पना कीजिए ..... must read
है. 3 दिन
बाद आपको फांसी दे दी जायेगी. आपकी मौत निश्चित है....
अब आप उस मौत के दर्द को महसूस कीजिये ..... आपका परिवार और सब कुछ छूट
जायेगा.....
क्या आप अपने गले मे फांसी का फन्दा सोच कर कांप गये ????
अब सोचो भगत सिंह जैसे अनगिनत शहीदों को जो हंसते हंसते देश के लिये फांसी पर
चढ़ गये थे .....
महसूस करो उनके दर्द को, और देखो आज के भ्रष्टाचार से भरे भारत को , क्या ऐसा
भारत बनाने के लिये उन्होने अपनी जान की कुर्बानी दी थी ....
अब मरने की कल्पना से बाहर आइये और सोचिये ......
जब वो लोग देश के लिये मर सकते है तो क्या आप देश के लिये *जी* भी नहीं सकते
?????????
देश के लिये जिएँ और अच्छा भारत बनाएँ, अपने आप से शुरुआत करें. आप बदलेंगे तभी
देश बदलेगा .
भगवान आपको लम्बी उम्र दे .........
*अब एक और कल्पना कीजिये** ...............*
आप लम्बी उम्र जिएँ, लेकिन ना आप बदलें, ना देश बदले, 20-25 साल बाद आपके
बच्चे, पोते, नाती सब एक ऐसे देश मे जी रहे हों जिसकी हालत सोमालिया आदि देशो
से भी बदतर है, बेहिसाब आबादी है , हर तरफ मारकाट मची है, कोई कानून नहीं है,
जंगलराज की सी हालत है , सभी जातियाँ कबीलों की तरह लड़ रही है . भूख से बेहाल
गरीब अमीरों को लूट रहें हैं, अमीर उनपर गोलियां चला रहे हैं , एक पल का भी
भरोसा नहीं है कब कौन आपके बच्चों को अनाथ कर दे या बच्चो का अपहरण कर ले.
क्या आप अपने बच्चों को ऐसा भारत देना चाहते हो ? आप अपने बच्चों को हर चीज
देते है , अच्छी शिक्षा , अच्छे कपड़े, अच्छे गेजेट्स ....
फिर क्या आप उन्हे अच्छा भारत नहीं देंगे ??????
एक लाख अस्सी हजार करोड़ (18,00,00,00,00,000) का 2G स्पेक्ट्रम घोटाला, सत्तर
हजार करोड का CWG घोटाला जैसे अनेक घोटालों ने देश को हिला कर रख दिया है. और
आप चुपचाप है, आप कर भी क्या सकते है ?
आप सबकुछ कर सकते है , आप ही ने उन नेताओ को वोट देकर नेता बनाया
था............
*आप क्या क्या कर सकते हैं** ?*
1. देश मे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून (जन लोकपाल) बनाने के लिये "भारत
बनाम भ्रष्टाचार<http://prolinks.rediffmailpro.com/cgi-bin/prored.c
के बेनर तले देश में एक अन्दोलन चल रहा है जिसका नेतृत्व गणमान्य लोग जैसे
स्वामी रामदेव, श्री रवि शंकर, अन्ना हजारे, महमूद मदानी, दिल्ली के आर्कबिषप,
किरण बेदी, अरविन्द केजरीवाल, स्वामी अग्निवेश, न्यायमूर्ति लिंगदोह, मल्लिका
साराभाइ आदि अनेक लोग कर रहे * **हैं** *(अधिक जानकारी के लिये साइट देखें
http://www.indiaagainstcorruption.org/<http://prolinks.rediffmailpro.com/cgi-bin/prored.c
)
2. लोकतंत्र मे आप सबसे ताकतवर * **हैं** *क्योंकि आप से वोट से सरकार बनती है,
सोचसमझ कर वोट दें , सिर्फ जाति और धर्म के आधार पर वोट ना दें . भारत के
सभी सभ्य और ईमानदार लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर एक वोट बैंक बना रहे
* **हैं** *आप उसमें अपने आप को रजिस्टर करें
(http://voteforindia.org/<http://prolinks.rediffmailpro.com/cgi-bin/prored.c
).
3. अगर आप फेसबुक का उपयोग करते * **हैं** *तो जुड़ जाएं
http://www.facebook.com/IndiACor
<http://prolinks.rediffmailpro.com/cgi-bin/prored.c
से ( इस लिंक पे क्लिक करे और फिर like पर क्लिक करे )
4. *शक्ति संघे कलयुगे* ( कलयुग में संगठन ही सबसे बड़ी शक्ति है ) , आज देश
के सभी भ्रष्ट लोग (20% ) संगठित हैं , जबकि हम सभी ईमानदार ( 80%) लोग बिखरे
पड़े हैं , जिस से भ्रष्ट लोग हावी हैं , और हम लोगो को संगठित नहीं होने देते,
हमे धर्म, जाति, क्षेत्र आदि के नाम पे लड़वाते हैं जिस से हम एक ना हो. तथा देश
की अधिकतर आबादी अनपढ़ बनी रहे. शोषित होने के लिये बाध्य रहे. आप संगठित बनो,
अपने दोस्तो को , पड़ोसियों को इस अन्दोलन के बारे में बताएं (फूट डालो और राज
करो की कुनीति पहले अंग्रेज अपनाते थे अब ये नेता अपना रहे हैं )
Las*t but not theLeast*
5. अपने सभी दोस्तों को ये ई-मेल फॉरवर्ड करो (Forward this Email to all your
friends. (सभी को नहीं तो कम से कम 5 दोस्तो को अवश्य करें, आपको भारत माँ की
कसम). आजादी की जंग में जब लोग फांसी पे हँसते हँसते चढ़ सकते हैं तो क्या आप
अपने दोस्तों को एक ई-मेल भी फॉरवर्ड नहीं कर सकते?????
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Unknown
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26.4.11
It is time to FIGHT FOR INDIA
White: Colour of the fight against corruption
Wear WHITE to school, college, work
Convince ur Friends & Family also
Lets make Wednesday WHITE
Forward this msg to them
1 by 1 we will reach ALL
For FREE updates of d fight against CORRUPTION
sms JOIN Anna to 09219592195
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VYOMESH CHITRAVANSH advocate 9450960851
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Labels: India Anti Corruption 26042011
14 अगस्त 1947 कि रात को आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था
आदरणीय दोस्तों
- इस संधि की शर्तों के मुताबिक हम आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | वो एक शब्द आप सब सुनते हैं न Commonwealth Nations | अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में Commonwealth Game हुए थे आप सब को याद होगा ही और उसी में बहुत बड़ा घोटाला भी हुआ है | ये Commonwealth का मतलब होता है समान सम्पति | किसकी समान सम्पति ? ब्रिटेन की रानी की समान सम्पति | आप जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी है और वो आज भी भारत की नागरिक है और हमारे जैसे 71 देशों की महारानी है वो | Commonwealth में 71 देश है और इन सभी 71 देशों में जाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को वीजा की जरूरत नहीं होती है क्योंकि वो अपने ही देश में जा रही है लेकिन भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ब्रिटेन में जाने के लिए वीजा की जरूरत होती है क्योंकि वो दुसरे देश में जा रहे हैं | मतलब इसका निकाले तो ये हुआ कि या तो ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक है या फिर भारत आज भी ब्रिटेन का उपनिवेश है इसलिए ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं होती है अगर दोनों बाते सही है तो 15 अगस्त 1947 को हमारी आज़ादी की बात कही जाती है वो झूठ है | और Commonwealth Nations में हमारी एंट्री जो है वो एक Dominion State के रूप में है न क़ि Independent Nation के रूप में| इस देश में प्रोटोकोल है क़ि जब भी नए राष्ट्रपति बनेंगे तो 21 तोपों की सलामी दी जाएगी उसके अलावा किसी को भी नहीं | लेकिन ब्रिटेन की महारानी आती है तो उनको भी 21 तोपों की सलामी दी जाती है, इसका क्या मतलब है? और पिछली बार ब्रिटेन की महारानी यहाँ आयी थी तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम था वो ब्रिटेन की महारानी का था और उसके नीचे भारत के राष्ट्रपति का नाम था मतलब हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक नहीं है | ये है राजनितिक गुलामी, हम कैसे माने क़ि हम एक स्वतंत्र देश में रह रहे हैं | एक शब्द आप सुनते होंगे High Commission ये अंग्रेजों का एक गुलाम देश दुसरे गुलाम देश के यहाँ खोलता है लेकिन इसे Embassy नहीं कहा जाता | एक मानसिक गुलामी का उदहारण भी देखिये ....... हमारे यहाँ के अख़बारों में आप देखते होंगे क़ि कैसे शब्द प्रयोग होते हैं - (ब्रिटेन की महारानी नहीं) महारानी एलिज़ाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स नहीं) प्रिन्स चार्ल्स , (ब्रिटेन की प्रिंसेस नहीं) प्रिंसेस डैना (अब तो वो हैं नहीं), अब तो एक और प्रिन्स विलियम भी आ गए है |
- भारत का नाम INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया प्रचारित किया जायेगा और सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से संबोधित किया जायेगा | हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में ये इंडिया है | संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है "India that is Bharat " जब क़ि होना ये चाहिए था "Bharat that was India " लेकिन दुर्भाग्य इस देश का क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया | ये इसी संधि के शर्तों में से एक है | अब हम भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी भारत नहीं है | कुछ दिन पहले मैं एक लेख पढ़ रहा था अब किसका था याद नहीं आ रहा है उसमे उस व्यक्ति ने बताया था कि इंडिया का नाम बदल के भारत कर दिया जाये तो इस देश में आश्चर्यजनक बदलाव आ जायेगा और ये विश्व की बड़ी शक्ति बन जायेगा अब उस शख्स के बात में कितनी सच्चाई है मैं नहीं जानता, लेकिन भारत जब तक भारत था तब तक तो दुनिया में सबसे आगे था और ये जब से इंडिया हुआ है तब से पीछे, पीछे और पीछे ही होता जा रहा है |
- भारत के संसद में वन्दे मातरम नहीं गया जायेगा अगले 50 वर्षों तक यानि 1997 तक | 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस मुद्दे को संसद में उठाया तब जाकर पहली बार इस तथाकथित आजाद देश की संसद में वन्देमातरम गाया गया | 50 वर्षों तक नहीं गाया गया क्योंकि ये भी इसी संधि की शर्तों में से एक है | और वन्देमातरम को ले के मुसलमानों में जो भ्रम फैलाया गया वो अंग्रेजों के दिशानिर्देश पर ही हुआ था | इस गीत में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक नहीं है जो मुसलमानों के दिल को ठेस पहुचाये | आपत्तिजनक तो जन,गन,मन में है जिसमे एक शख्स को भारत भाग्यविधाता यानि भारत के हर व्यक्ति का भगवान बताया गया है या कहें भगवान से भी बढ़कर |
- इस संधि की शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा अंग्रेजों के हवाले करना था | यही वजह रही क़ि सुभाष चन्द्र बोस अपने देश के लिए लापता रहे और कहाँ मर खप गए ये आज तक किसी को मालूम नहीं है | समय समय पर कई अफवाहें फैली लेकिन सुभाष चन्द्र बोस का पता नहीं लगा और न ही किसी ने उनको ढूँढने में रूचि दिखाई | मतलब भारत का एक महान स्वतंत्रता सेनानी अपने ही देश के लिए बेगाना हो गया | सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई थी ये तो आप सब लोगों को मालूम होगा ही लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है क़ि ये 1942 में बनाया गया था और उसी समय द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था और सुभाष चन्द्र बोस ने इस काम में जर्मन और जापानी लोगों से मदद ली थी जो कि अंग्रेजो के दुश्मन थे और इस आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था | और जर्मनी के हिटलर और इंग्लैंड के एटली और चर्चिल के व्यक्तिगत विवादों की वजह से ये द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ था और दोनों देश एक दुसरे के कट्टर दुश्मन थे | एक दुश्मन देश की मदद से सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के नाकों चने चबवा दिए थे | एक तो अंग्रेज उधर विश्वयुद्ध में लगे थे दूसरी तरफ उन्हें भारत में भी सुभाष चन्द्र बोस की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था | इसलिए वे सुभाष चन्द्र बोस के दुश्मन थे |
- इस संधि की शर्तों के अनुसार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह, रामप्रसाद विस्मिल जैसे लोग आतंकवादी थे और यही हमारे syllabus में पढाया जाता था बहुत दिनों तक | और अभी एक महीने पहले तक ICSE बोर्ड के किताबों में भगत सिंह को आतंकवादी ही बताया जा रहा था, वो तो भला हो कुछ लोगों का जिन्होंने अदालत में एक केस किया और अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया है (ये समाचार मैंने इन्टरनेट पर ही अभी कुछ दिन पहले देखा था) |
- आप भारत के सभी बड़े रेलवे स्टेशन पर एक किताब की दुकान देखते होंगे "व्हीलर बुक स्टोर" वो इसी संधि की शर्तों के अनुसार है | ये व्हीलर कौन था ? ये व्हीलर सबसे बड़ा अत्याचारी था | इसने इस देश क़ि हजारों माँ, बहन और बेटियों के साथ बलात्कार किया था | इसने किसानों पर सबसे ज्यादा गोलियां चलवाई थी | 1857 की क्रांति के बाद कानपुर के नजदीक बिठुर में व्हीलर और नील नामक दो अंग्रजों ने यहाँ के सभी 24 हजार लोगों को जान से मरवा दिया था चाहे वो गोदी का बच्चा हो या मरणासन्न हालत में पड़ा कोई बुड्ढा | इस व्हीलर के नाम से इंग्लैंड में एक एजेंसी शुरू हुई थी और वही भारत में आ गयी | भारत आजाद हुआ तो ये ख़त्म होना चाहिए था, नहीं तो कम से कम नाम भी बदल देते | लेकिन वो नहीं बदला गया क्योंकि ये इस संधि में है |
- इस संधि की शर्तों के अनुसार अंग्रेज देश छोड़ के चले जायेगे लेकिन इस देश में कोई भी कानून चाहे वो किसी क्षेत्र में हो नहीं बदला जायेगा | इसलिए आज भी इस देश में 34735 कानून वैसे के वैसे चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय चलता था | Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC चलता है और Ireland में जहाँ "I" का मतलब Irish है वही भारत के IPC में "I" का मतलब Indian है बाकि सब के सब कंटेंट एक ही है, कौमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है) Indian Citizenship Act, Indian Advocates Act, Indian Education Act, Land Acquisition Act, Criminal Procedure Act, Indian Evidence Act, Indian Income Tax Act, Indian Forest Act, Indian Agricultural Price Commission Act सब के सब आज भी वैसे ही चल रहे हैं बिना फुल स्टॉप और कौमा बदले हुए |
- इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन जैसे के तैसे रखे जायेंगे | शहर का नाम, सड़क का नाम सब के सब वैसे ही रखे जायेंगे | आज देश का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति भवन कितने नाम गिनाऊँ सब के सब वैसे ही खड़े हैं और हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं | लार्ड डलहौजी के नाम पर डलहौजी शहर है , वास्को डी गामा नामक शहर है (हाला क़ि वो पुर्तगाली था ) रिपन रोड, कर्जन रोड, मेयो रोड, बेंटिक रोड, (पटना में) फ्रेजर रोड, बेली रोड, ऐसे हजारों भवन और रोड हैं, सब के सब वैसे के वैसे ही हैं | आप भी अपने शहर में देखिएगा वहां भी कोई न कोई भवन, सड़क उन लोगों के नाम से होंगे | हमारे गुजरात में एक शहर है सूरत, इस सूरत शहर में एक बिल्डिंग है उसका नाम है कूपर विला | अंग्रेजों को जब जहाँगीर ने व्यापार का लाइसेंस दिया था तो सबसे पहले वो सूरत में आये थे और सूरत में उन्होंने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था | ये गुलामी का पहला अध्याय आज तक सूरत शहर में खड़ा है |
- हमारे यहाँ शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों की है क्योंकि ये इस संधि में लिखा है और मजे क़ि बात ये है क़ि अंग्रेजों ने हमारे यहाँ एक शिक्षा व्यवस्था दी और अपने यहाँ अलग किस्म क़ि शिक्षा व्यवस्था रखी है | हमारे यहाँ शिक्षा में डिग्री का महत्व है और उनके यहाँ ठीक उल्टा है | मेरे पास ज्ञान है और मैं कोई अविष्कार करता हूँ तो भारत में पूछा जायेगा क़ि तुम्हारे पास कौन सी डिग्री है ? अगर नहीं है तो मेरे अविष्कार और ज्ञान का कोई मतलब नहीं है | जबकि उनके यहाँ ऐसा बिलकुल नहीं है आप अगर कोई अविष्कार करते हैं और आपके पास ज्ञान है लेकिन कोई डिग्री नहीं हैं तो कोई बात नहीं आपको प्रोत्साहित किया जायेगा | नोबेल पुरस्कार पाने के लिए आपको डिग्री की जरूरत नहीं होती है | हमारे शिक्षा तंत्र को अंग्रेजों ने डिग्री में बांध दिया था जो आज भी वैसे के वैसा ही चल रहा है | ये जो 30 नंबर का पास मार्क्स आप देखते हैं वो उसी शिक्षा व्यवस्था क़ि देन है, मतलब ये है क़ि आप भले ही 70 नंबर में फेल है लेकिन 30 नंबर लाये है तो पास हैं, ऐसा शिक्षा तंत्र से सिर्फ गदहे ही पैदा हो सकते हैं और यही अंग्रेज चाहते थे | आप देखते होंगे क़ि हमारे देश में एक विषय चलता है जिसका नाम है Anthropology | जानते है इसमें क्या पढाया जाता है ? इसमें गुलाम लोगों क़ि मानसिक अवस्था के बारे में पढाया जाता है | और ये अंग्रेजों ने ही इस देश में शुरू किया था और आज आज़ादी के 64 साल बाद भी ये इस देश के विश्वविद्यालयों में पढाया जाता है और यहाँ तक क़ि सिविल सर्विस की परीक्षा में भी ये चलता है |
- इस संधि की शर्तों के हिसाब से हमारे देश में आयुर्वेद को कोई सहयोग नहीं दिया जायेगा मतलब हमारे देश की विद्या हमारे ही देश में ख़त्म हो जाये ये साजिस की गयी | आयुर्वेद को अंग्रेजों ने नष्ट करने का भरसक प्रयास किया था लेकिन ऐसा कर नहीं पाए | दुनिया में जितने भी पैथी हैं उनमे ये होता है क़ि पहले आप बीमार हों तो आपका इलाज होगा लेकिन आयुर्वेद एक ऐसी विद्या है जिसमे कहा जाता है क़ि आप बीमार ही मत पड़िए | आपको मैं एक सच्ची घटना बताता हूँ -जोर्ज वाशिंगटन जो क़ि अमेरिका का पहला राष्ट्रपति था वो दिसम्बर 1799 में बीमार पड़ा और जब उसका बुखार ठीक नहीं हो रहा था तो उसके डाक्टरों ने कहा क़ि इनके शरीर का खून गन्दा हो गया है जब इसको निकाला जायेगा तो ये बुखार ठीक होगा और उसके दोनों हाथों क़ि नसें डाक्टरों ने काट दी और खून निकल जाने की वजह से जोर्ज वाशिंगटन मर गया | ये घटना 1799 की है और 1780 में एक अंग्रेज भारत आया था और यहाँ से प्लास्टिक सर्जरी सीख के गया था | मतलब कहने का ये है क़ि हमारे देश का चिकित्सा विज्ञान कितना विकसित था उस समय | और ये सब आयुर्वेद की वजह से था और उसी आयुर्वेद को आज हमारे सरकार ने हाशिये पर पंहुचा दिया है |
- इस संधि के हिसाब से हमारे देश में गुरुकुल संस्कृति को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा | हमारे देश के समृद्धि और यहाँ मौजूद उच्च तकनीक की वजह ये गुरुकुल ही थे | और अंग्रेजों ने सबसे पहले इस देश की गुरुकुल परंपरा को ही तोडा था, मैं यहाँ लार्ड मेकॉले की एक उक्ति को यहाँ बताना चाहूँगा जो उसने 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में दिया था, उसने कहा था "“I have traveled across the length and breadth of India and have not seen one person who is a beggar, who is a thief, such wealth I have seen in this country, such high moral values, people of such caliber, that I do not think we would ever conquer this country, unless we break the very backbone of this nation, which is her spiritual and cultural heritage, and, therefore, I propose that we replace her old and ancient education system, her culture, for if the Indians think that all that is foreign and English is good and greater than their own, they will lose their self esteem, their native culture and they will become what we want them, a truly dominated nation” | गुरुकुल का मतलब हम लोग केवल वेद, पुराण,उपनिषद ही समझते हैं जो की हमारी मुर्खता है अगर आज की भाषा में कहूं तो ये गुरुकुल जो होते थे वो सब के सब Higher Learning Institute हुआ करते थे |
- इस संधि में एक और खास बात है | इसमें कहा गया है क़ि अगर हमारे देश के (भारत के) अदालत में कोई ऐसा मुक़दमा आ जाये जिसके फैसले के लिए कोई कानून न हो इस देश में या उसके फैसले को लेकर संबिधान में भी कोई जानकारी न हो तो साफ़ साफ़ संधि में लिखा गया है क़ि वो सारे मुकदमों का फैसला अंग्रेजों के न्याय पद्धति के आदर्शों के आधार पर ही होगा, भारतीय न्याय पद्धति का आदर्श उसमे लागू नहीं होगा | कितनी शर्मनाक स्थिति है ये क़ि हमें अभी भी अंग्रेजों का ही अनुसरण करना होगा |
- भारत में आज़ादी की लड़ाई हुई तो वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ था और संधि के हिसाब से ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत छोड़ के जाना था और वो चली भी गयी लेकिन इस संधि में ये भी है क़ि ईस्ट इंडिया कम्पनी तो जाएगी भारत से लेकिन बाकि 126 विदेशी कंपनियां भारत में रहेंगी और भारत सरकार उनको पूरा संरक्षण देगी | और उसी का नतीजा है क़ि ब्रुक बोंड, लिप्टन, बाटा, हिंदुस्तान लीवर (अब हिंदुस्तान यूनिलीवर) जैसी 126 कंपनियां आज़ादी के बाद इस देश में बची रह गयी और लुटती रही और आज भी वो सिलसिला जारी है |
- अंग्रेजी का स्थान अंग्रेजों के जाने के बाद वैसे ही रहेगा भारत में जैसा क़ि अभी (1946 में) है और ये भी इसी संधि का हिस्सा है | आप देखिये क़ि हमारे देश में, संसद में, न्यायपालिका में, कार्यालयों में हर कहीं अंग्रेजी, अंग्रेजी और अंग्रेजी है जब क़ि इस देश में 99% लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है | और उन 1% लोगों क़ि हालत देखिये क़ि उन्हें मालूम ही नहीं रहता है क़ि उनको पढना क्या है और UNO में जा के भारत के जगह पुर्तगाल का भाषण पढ़ जाते हैं |
- आप में से बहुत लोगों को याद होगा क़ि हमारे देश में आजादी के 50 साल बाद तक संसद में वार्षिक बजट शाम को 5:00 बजे पेश किया जाता था | जानते है क्यों ? क्योंकि जब हमारे देश में शाम के 5:00 बजते हैं तो लन्दन में सुबह के 11:30 बजते हैं और अंग्रेज अपनी सुविधा से उनको सुन सके और उस बजट की समीक्षा कर सके | इतनी गुलामी में रहा है ये देश | ये भी इसी संधि का हिस्सा है |
- 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेजों ने भारत में राशन कार्ड का सिस्टम शुरू किया क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को अनाज क़ि जरूरत थी और वे ये अनाज भारत से चाहते थे | इसीलिए उन्होंने यहाँ जनवितरण प्रणाली और राशन कार्ड क़ि शुरुआत क़ि | वो प्रणाली आज भी लागू है इस देश में क्योंकि वो इस संधि में है | और इस राशन कार्ड को पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल उसी समय शुरू किया गया और वो आज भी जारी है | जिनके पास राशन कार्ड होता था उन्हें ही वोट देने का अधिकार होता था | आज भी देखिये राशन कार्ड ही मुख्य पहचान पत्र है इस देश में |
- अंग्रेजों के आने के पहले इस देश में गायों को काटने का कोई कत्लखाना नहीं था | मुगलों के समय तो ये कानून था क़ि कोई अगर गाय को काट दे तो उसका हाथ काट दिया जाता था | अंग्रेज यहाँ आये तो उन्होंने पहली बार कलकत्ता में गाय काटने का कत्लखाना शुरू किया, पहला शराबखाना शुरू किया, पहला वेश्यालय शुरू किया और इस देश में जहाँ जहाँ अंग्रेजों की छावनी हुआ करती थी वहां वहां वेश्याघर बनाये गए, वहां वहां शराबखाना खुला, वहां वहां गाय के काटने के लिए कत्लखाना खुला | ऐसे पुरे देश में 355 छावनियां थी उन अंग्रेजों के | अब ये सब क्यों बनाये गए थे ये आप सब आसानी से समझ सकते हैं | अंग्रेजों के जाने के बाद ये सब ख़त्म हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ क्योंक़ि ये भी इसी संधि में है |
- हमारे देश में जो संसदीय लोकतंत्र है वो दरअसल अंग्रेजों का वेस्टमिन्स्टर सिस्टम है | ये अंग्रेजो के इंग्लैंड क़ि संसदीय प्रणाली है | ये कहीं से भी न संसदीय है और न ही लोकतान्त्रिक है| लेकिन इस देश में वही सिस्टम है क्योंकि वो इस संधि में कहा गया है | और इसी वेस्टमिन्स्टर सिस्टम को महात्मा गाँधी बाँझ और वेश्या कहते थे (मतलब आप समझ गए होंगे) |
तो भारत क़ि गुलामी जो अंग्रेजों के ज़माने में थी, अंग्रेजों के जाने के 64 साल बाद आज 2011 में जस क़ि तस है क्योंकि हमने संधि कर रखी है और देश को इन खतरनाक संधियों के मकडजाल में फंसा रखा है | बहुत दुःख होता है अपने देश के बारे जानकार और सोच कर | मैं ये सब कोई ख़ुशी से नहीं लिखता हूँ ये मेरे दिल का दर्द होता है जो मैं आप लोगों से शेयर करता हूँ |
ये सब बदलना जरूरी है लेकिन हमें सरकार नहीं व्यवस्था बदलनी होगी और आप अगर सोच रहे हैं क़ि कोई मसीहा आएगा और सब बदल देगा तो आप ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं | कोई हनुमान जी, कोई राम जी, या कोई कृष्ण जी नहीं आने वाले | आपको और हमको ही ये सारे अवतार में आना होगा, हमें ही सड़कों पर उतरना होगा और और इस व्यवस्था को जड मूल से समाप्त करना होगा | भगवान भी उसी की मदद करते हैं जो अपनी मदद स्वयं करता है |
इतने लम्बे पत्र को आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद् | और अच्छा लगा हो तो इसे फॉरवर्ड कीजिये,
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VYOMESH CHITRAVANSH advocate 9450960851
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Labels: nai azadi andolan 26042011
बाबा रामदेव का भ्रस्ताचार के विरुद्ध संग्राम , क्या सफल हो पायेगा ?
बाबा रामदेव का भ्रस्ताचार के विरुद्ध संग्राम , क्या सफल हो पायेगा ?
Baba Ramdev starting Maha Sangram against Black Money and Corruption -- GET READY
प्रिय भरासियो ,
मुझे अमेरिका से एक महान एक्टिविस्ट इंडियन अमेरिकेन फोरम ऑफ इंटेलेक्चुअल से यह मेसेज मिला.
अमेरिका बैठे लोग भी हम्मरे बारे में कितने चिंतित हैं.
On Tue, Apr 26, 2011 at 7:03 AM, <Katariaxxxxx@aol.com>wrote:
Baba Ramdev starting Maha Sangram against Black Money and Corruption -- GET READY
पर मैं उन्हें यह जबाब लिख पाया.
thanks kataria jee,
my good wishes with all the activists.
there is no doubt about the planning, and intentions of baba ramdev, hazare or subramaniam swami or others.
but do not you realise that the masses of leaders and beaurocrats are having an immoral, anti religious training in their life, from childhood.
they just can not differentiate between good money and bad money. no nationalism, no morals, no conscience. they are like mad animals, harming nation, by all means, and they have power and planning to do that.
and we wish to change them by some bill, law , or punishments.
we have to start, them teaching national feeling from the childhood, and scan and remove every curropt officer in one go.
till then it would be a dreadful dream .
i am sorry to write this.
thanks and regards
ashok gupta
देल्ही
ashok.gupta4@gmail.com
क्या कोई सुझाव / रास्ता हो सकता है, जिससे बेऔरोक्रेट्स को नैतिक शिक्छा दी जा सके ?
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https://worldisahome.blogspot.com
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एक नई आस
नई चेतना
नई चेतना, नई आस है
नव बेला की सांझ नई
लोग खड़े हैं राष्ट्र सृजन को
कलुषित मानव हुए विकल
भांति-भांति के तर्क हैं गढ़ते
कहते इससे क्या हो सकता
मंजिल की है बातें करते
चलने पर बेचैनी
बेखौफ जवानी की अंगड़ाई
परिवर्तन का मार्ग प्रसस्त हुआ
प्रथम कदम है शुरूवात
नव उषा की मादकता है
इसकी सुगन्ध में नव जीवन की।
जागी है उम्मीद नई।।
अन्ना हजारे के आन्दोलन को समर्पित और उन लोगों को जिन्होंने भ्रष्टाचार से लड़ने की ठानी।
एम. अफसर खान सागर
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M. Afsar Khan
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political news
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ASHUTOSH VERMA
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अब महान कैसे हो गए सत्य साईं बाबा?
असल में महत्वपूर्ण ये नहीं है कि साईं बाबा चमत्कारी थे या नहीं, कि वे जादू दिखा कर लोगों को आकर्षित करते थे और वह जादू कोई भी दिखा सकता है, महत्वपूर्ण ये है कि उस शख्स ने यदि हजारों करोड़ रुपए का साम्राज्य खड़ा भी किया तो उसका मकसद आखिर जनता की भलाई ही तो था।
सवाल ये भी है कि क्या केवल जादू के दम पर करोड़ों लोगों को अपना भक्त बनाया जा सकता है? जादू से अलबत्ता आकर्षित जरूर किया जा सकता है, मगर कोई भी व्यक्ति भक्त तभी होता है, जब उसके जीवन में अपेक्षित परिवर्तन आए। केवल जादू देख कर ज्यादा देर तक जादूगर से जुड़ा नहीं रहा जा सकता। राजनेता जरूर वोटों की राजनीति के कारण हर धर्म गुरू के आगे मत्था टेकते नजर आ सकते हैं, चाहे उनके मन में उसके प्रति श्रद्धा हो या नहीं, मगर सचिन तेंदुलकर जैसी अनेकानेक हस्तियां यदि बाबा के प्रति आकृष्ठ हुई थीं, तो जरूर उन्हें कुछ तो नजर आया होगा।
माना कि जो कुछ लोग उनके कथित आशीर्वाद की वजह से खुशहाल हुए अथवा जो कुछ लोग उनकी ओर किए गए समाजोपयोगी कार्यों का लाभ उठा रहे थे, इस कारण उनके भक्त बन गए, मगर इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाहिए कि चाहे जादू के माध्यम से ही सही, मगर उन्होंने लोगों को अध्यात्म का रास्ता दिखाया, गरीबों का कल्याण किया। अगर ये मान भी लिया जाए कि वे जो चमत्कार दिखाते थे, उन्हें कोई भी जादूगर दिखा सकता है, मगर क्या यह कम चमत्कार है कि करोड़ों लोग उनके प्रति आस्थावान हो गए।
संभव है आज पुट्टापर्थी का चौबीस घंटे कवरेज देने के पीछे तर्क ये दिया जाए कि वे तो महज घटना को दिखा रहे हैं कि वहां कितनी भीड़ जमा हो रही है या फिर वीवीआईपी का कवरेज दिखा रहे है या फिर करोड़ों लोंगों की आस्था का ख्याल रख रहे हैं, तो इस सवाल जवाब क्या है कि वे पहले उन्हीं करोड़ों लोगों की आस्था पर प्रहार क्यों कर रहे थे।
कुल जमा बात इतनी सी है कि न्यूज चैनल संयमित नहीं हैं। उन्हें जो मन में आता है, दिखाते हैं। जिस व्यक्ति से आर्थिक लाभ होता है, उसका कवरेज ज्यादा दिखाते हैं। बाबा रामदेव उसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। वे जो योग सिखा रहे हैं, वह हमारे ऋषि-मुनि हजारों वर्षों से करते रहे हैं, वह हजारों योग गुरू सिखा रहे हैं, कोई बाबा ने ये योग इजाद नहीं किया है, मगर चूंकि उन्होंने अपने कार्यक्रमों का कवरेज दिखाने के पैसे दिए, इस कारण उन्हें ऐसा योग गुरू बना दिया, मानो न पहले ऐसे योग गुरू हुए, न हैं और न ही भविष्य में होंगे।
तेजवानी गिरधर, अजमेर
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तेजवानी गिरधर
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