Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

27.4.11

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आप अपने ब्लॉग का विज्ञापन इस ब्लॉग मेँ दे सकते हैँ वो भी बिल्कुल मुफ्त मेँ। http://advertise-mee.blogspot.com

Mera bharat mahan hai bhai

Mera bharat mahan hai par jam se parshan hai

Pal-pal marta raam hai ravan ka abhiman hai
Sita ke liye har chakki me pista kyon hanuman hai

Jeeta hai jo mar jayega,ghada paap ka bhar jayega
Is kalyug me aane se to ravan bhi dar jayega

Khali muththi,khali pait ,khali hi to aaye the
Kiss paise me,mohmaya me atke jate pran hai…

im.nikhhil@gmail.com
9314445222

एक कल्पना कीजिए ..... must read

जिसने जन्म लिया है उसे एक दिन अवश्य मरना भी है, आपको भी 3 दिन बाद मरना
है. 3 दिन
बाद आपको फांसी दे दी जायेगी. आपकी मौत निश्चित है....

अब आप उस मौत के दर्द को महसूस कीजिये ..... आपका परिवार और सब कुछ छूट
जायेगा.....

क्या आप अपने गले मे फांसी का फन्दा सोच कर कांप गये ????

अब सोचो भगत सिंह जैसे अनगिनत शहीदों को जो हंसते हंसते देश के लिये फांसी पर
चढ़ गये थे .....

महसूस करो उनके दर्द को, और देखो आज के भ्रष्टाचार से भरे भारत को , क्या ऐसा
भारत बनाने के लिये उन्होने अपनी जान की कुर्बानी दी थी ....

अब मरने की कल्पना से बाहर आइये और सोचिये ......

जब वो लोग देश के लिये मर सकते है तो क्या आप देश के लिये *जी* भी नहीं सकते
?????????

देश के लिये जिएँ और अच्छा भारत बनाएँ, अपने आप से शुरुआत करें. आप बदलेंगे तभी
देश बदलेगा .

भगवान आपको लम्बी उम्र दे .........

*अब एक और कल्पना कीजिये** ...............*

आप लम्बी उम्र जिएँ, लेकिन ना आप बदलें, ना देश बदले, 20-25 साल बाद आपके
बच्चे, पोते, नाती सब एक ऐसे देश मे जी रहे हों जिसकी हालत सोमालिया आदि देशो
से भी बदतर है, बेहिसाब आबादी है , हर तरफ मारकाट मची है, कोई कानून नहीं है,
जंगलराज की सी हालत है , सभी जातियाँ कबीलों की तरह लड़ रही है . भूख से बेहाल
गरीब अमीरों को लूट रहें हैं, अमीर उनपर गोलियां चला रहे हैं , एक पल का भी
भरोसा नहीं है कब कौन आपके बच्चों को अनाथ कर दे या बच्चो का अपहरण कर ले.

क्या आप अपने बच्चों को ऐसा भारत देना चाहते हो ? आप अपने बच्चों को हर चीज
देते है , अच्छी शिक्षा , अच्छे कपड़े, अच्छे गेजेट्स ....

फिर क्या आप उन्हे अच्छा भारत नहीं देंगे ??????

एक लाख अस्सी हजार करोड़ (18,00,00,00,00,000) का 2G स्पेक्ट्रम घोटाला, सत्तर
हजार करोड का CWG घोटाला जैसे अनेक घोटालों ने देश को हिला कर रख दिया है. और
आप चुपचाप है, आप कर भी क्या सकते है ?

आप सबकुछ कर सकते है , आप ही ने उन नेताओ को वोट देकर नेता बनाया
था............

*आप क्या क्या कर सकते हैं** ?*

1. देश मे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून (जन लोकपाल) बनाने के लिये "भारत
बनाम भ्रष्टाचार<http://prolinks.rediffmailpro.com/cgi-bin/prored.cgi?red=http%3A%2F%2Fwww.indiaagainstcorruption.org%2F&isImage=0&BlockImage=0&rediffng=0>"
के बेनर तले देश में एक अन्दोलन चल रहा है जिसका नेतृत्व गणमान्य लोग जैसे
स्वामी रामदेव, श्री रवि शंकर, अन्ना हजारे, महमूद मदानी, दिल्ली के आर्कबिषप,
किरण बेदी, अरविन्द केजरीवाल, स्वामी अग्निवेश, न्यायमूर्ति लिंगदोह, मल्लिका
साराभाइ आदि अनेक लोग कर रहे * **हैं** *(अधिक जानकारी के लिये साइट देखें
http://www.indiaagainstcorruption.org/<http://prolinks.rediffmailpro.com/cgi-bin/prored.cgi?red=http%3A%2F%2Fwww.indiaagainstcorruption.org%2F&isImage=0&BlockImage=0&rediffng=0>
)

2. लोकतंत्र मे आप सबसे ताकतवर * **हैं** *क्योंकि आप से वोट से सरकार बनती है,
सोचसमझ कर वोट दें , सिर्फ जाति और धर्म के आधार पर वोट ना दें . भारत के
सभी सभ्य और ईमानदार लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर एक वोट बैंक बना रहे
* **हैं** *आप उसमें अपने आप को रजिस्टर करें
(http://voteforindia.org/<http://prolinks.rediffmailpro.com/cgi-bin/prored.cgi?red=http%3A%2F%2Fvoteforindia.org%2F&isImage=0&BlockImage=0&rediffng=0>
).

3. अगर आप फेसबुक का उपयोग करते * **हैं** *तो जुड़ जाएं
http://www.facebook.com/IndiACor
<http://prolinks.rediffmailpro.com/cgi-bin/prored.cgi?red=http%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2FIndiACor&isImage=0&BlockImage=0&rediffng=0>
से ( इस लिंक पे क्लिक करे और फिर like पर क्लिक करे )

4. *शक्ति संघे कलयुगे* ( कलयुग में संगठन ही सबसे बड़ी शक्ति है ) , आज देश
के सभी भ्रष्ट लोग (20% ) संगठित हैं , जबकि हम सभी ईमानदार ( 80%) लोग बिखरे
पड़े हैं , जिस से भ्रष्ट लोग हावी हैं , और हम लोगो को संगठित नहीं होने देते,
हमे धर्म, जाति, क्षेत्र आदि के नाम पे लड़वाते हैं जिस से हम एक ना हो. तथा देश
की अधिकतर आबादी अनपढ़ बनी रहे. शोषित होने के लिये बाध्य रहे. आप संगठित बनो,
अपने दोस्तो को , पड़ोसियों को इस अन्दोलन के बारे में बताएं (फूट डालो और राज
करो की कुनीति पहले अंग्रेज अपनाते थे अब ये नेता अपना रहे हैं )

Las*t but not theLeast*

5. अपने सभी दोस्तों को ये ई-मेल फॉरवर्ड करो (Forward this Email to all your
friends. (सभी को नहीं तो कम से कम 5 दोस्तो को अवश्य करें, आपको भारत माँ की
कसम). आजादी की जंग में जब लोग फांसी पे हँसते हँसते चढ़ सकते हैं तो क्या आप
अपने दोस्तों को एक ई-मेल भी फॉरवर्ड नहीं कर सकते?????

26.4.11

It is time to FIGHT FOR INDIA


Hi ALL,

We are lending support to India’s Fight against corruption via SMS GupShup platform.

          
It is time to raise your voice against Corruption
It is time to FIGHT FOR INDIA
Get READY for the White Revolution
Be a part of  India’s Anti Corruption army
We are 50,000 strong and growing
sms join anna to 09219592195


What YOU can do?
·         Join the group.
·         Help the group grow virally via your facebook, gtalk status messages.
·         Spread the word about the White Wednesday campaign:
White: Purity
White: Colour of the fight against corruption
Wear WHITE to school, college, work
Convince ur Friends & Family also
Lets make Wednesday WHITE

·         Help the group grow virally by forwarding this to family and friendsDo u know 5 honest Indians?
Forward this msg to them
1 by 1 we will reach ALL
For FREE updates of d fight against CORRUPTION
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14 अगस्त 1947 कि रात को आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था


14 अगस्त 1947 कि रात को आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था

आदरणीय दोस्तों 

आपने देखा होगा कि राजीव भाई बराबर सत्ता के हस्तांतरण के संधि के बारे में बाट करते थे और आप बार बार सोचते होंगे कि आखिर ये क्या है ? मैंने उनके अलग अलग व्याख्यानों में से इन सब को जोड़ के आप लोगों के लिए लाया हूँ उम्मीद है कि आपको पसंद आएगी |  पढ़िए सत्ता के हस्तांतरण की संधि ( Transfer of Power Agreement ) यानि भारत के आज़ादी की संधि | ये इतनी खतरनाक संधि है की अगर आप अंग्रेजों द्वारा सन 1615 से लेकर 1857 तक किये गए सभी 565 संधियों या कहें साजिस को जोड़ देंगे तो उस से भी ज्यादा खतरनाक संधि है ये | 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था पंडित नेहरु और लोर्ड  माउन्ट बेटन के बीच में | Transfer of Power और Independence ये दो अलग चीजे है | स्वतंत्रता और सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग चीजे है | और सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है ? आप देखते होंगे क़ि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में हार जाये, दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर की बुक कहते है और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है | और पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है  | यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात को 12 बजे | लार्ड  माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया | कैसा स्वराज्य और काहे का स्वराज्य ? अंग्रेजो के लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? और हमारे लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? ये भी समझ लीजिये | अंग्रेज कहते थे क़ि हमने स्वराज्य दिया, माने अंग्रेजों ने अपना राज तुमको सौंपा है ताकि तुम लोग कुछ दिन इसे चला लो जब जरुरत पड़ेगी तो हम दुबारा आ जायेंगे |  ये अंग्रेजो का interpretation (व्याख्या) था | और हिन्दुस्तानी लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया | और इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए और भारत और पाकिस्तान नामक दो Dominion States बनाये गए हैं | ये Dominion State का अर्थ हिंदी में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और भारत के सन्दर्भ में इसका असल अर्थ भी यही है | अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है  "One of the self-governing nations in the British Commonwealth" और दूसरा "Dominance or power through legal authority "| Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है | मतलब सीधा है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | दुःख तो ये होता है की उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे या आप कह सकते हैं क़ि पुरे होशो हवास  में इस संधि को मान लिया या कहें जानबूझ कर ये सब स्वीकार कर लिया | और ये जो तथाकथित आज़ादी आयी, इसका कानून अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा गया Indian Independence Act यानि भारत के स्वतंत्रता का कानून | और ऐसे धोखाधड़ी से अगर इस देश की आजादी आई हो तो वो आजादी, आजादी है कहाँ ?  और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे | वो नोआखाली में थे | और कोंग्रेस के बड़े नेता गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थे  कि बापू चलिए आप | गाँधी जी ने मना कर दिया था | क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई आजादी आ रही है | और गाँधी जी ने स्पस्ट कह दिया था कि ये आजादी नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है | और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी | उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा  कि मै हिन्दुस्तान के उन करोडो लोगों को ये सन्देश देना चाहता हु कि ये जोतथाकथित आजादी (So Called Freedom) आ रही है ये मै नहीं लाया | ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है | मै मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है | और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे नोआखाली में थे | माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था | क्यों ? इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे | (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था असल बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही था) और 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई .... ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट लागू हुआ था पंडित नेहरु और अंग्रेजी सरकार के बीच में | अब शर्तों की बात करता हूँ , सब का जिक्र करना तो संभव नहीं है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण शर्तों की जिक्र जरूर करूंगा जिसे एक आम भारतीय जानता है और उनसे परिचित है ...............
  • इस संधि की शर्तों के मुताबिक हम आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | वो एक शब्द आप सब सुनते हैं न Commonwealth Nations | अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में Commonwealth Game हुए थे आप सब को याद होगा ही और उसी में बहुत बड़ा घोटाला भी हुआ है | ये Commonwealth का मतलब होता है समान सम्पति | किसकी समान सम्पति ? ब्रिटेन की रानी की समान सम्पति | आप जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी है और वो आज भी भारत की नागरिक है और हमारे जैसे 71 देशों की महारानी है वो | Commonwealth में 71 देश है और इन सभी 71 देशों में जाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को वीजा की जरूरत नहीं होती है क्योंकि वो अपने ही देश में जा रही है लेकिन भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ब्रिटेन में जाने के लिए वीजा की जरूरत होती है क्योंकि वो दुसरे देश में जा रहे हैं | मतलब इसका निकाले तो ये हुआ कि या तो ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक है या फिर भारत आज भी ब्रिटेन का उपनिवेश है इसलिए ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं होती है अगर दोनों बाते सही है तो 15 अगस्त 1947 को हमारी आज़ादी की बात कही जाती है वो झूठ है | और Commonwealth Nations में हमारी एंट्री जो है वो एक Dominion State के रूप में है न क़ि Independent Nation के रूप में| इस देश में प्रोटोकोल है क़ि जब भी नए राष्ट्रपति बनेंगे तो 21 तोपों की सलामी दी जाएगी उसके अलावा किसी को भी नहीं | लेकिन ब्रिटेन की महारानी आती है तो उनको भी 21 तोपों की सलामी दी जाती है, इसका क्या मतलब है? और पिछली बार ब्रिटेन की महारानी यहाँ आयी थी तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम था वो ब्रिटेन की महारानी का था और उसके नीचे भारत के राष्ट्रपति का नाम था मतलब हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक नहीं है | ये है राजनितिक गुलामी, हम कैसे माने क़ि हम एक स्वतंत्र देश में रह रहे हैं | एक शब्द आप सुनते होंगे High Commission ये अंग्रेजों का एक गुलाम देश दुसरे गुलाम देश के यहाँ खोलता है लेकिन इसे Embassy नहीं कहा जाता | एक मानसिक गुलामी का उदहारण भी देखिये ....... हमारे यहाँ के अख़बारों में आप देखते होंगे क़ि कैसे शब्द प्रयोग होते हैं - (ब्रिटेन की महारानी नहीं) महारानी एलिज़ाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स नहीं) प्रिन्स चार्ल्स , (ब्रिटेन की प्रिंसेस नहीं) प्रिंसेस डैना (अब तो वो हैं नहीं), अब तो एक और प्रिन्स विलियम भी आ गए है |    
  • भारत का नाम INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया प्रचारित किया जायेगा और सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से संबोधित किया जायेगा | हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में ये इंडिया है | संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है "India that is Bharat " जब क़ि होना ये चाहिए था "Bharat that was India " लेकिन दुर्भाग्य इस देश का क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया | ये इसी संधि के शर्तों में से एक है | अब हम भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी भारत नहीं है | कुछ दिन पहले मैं एक लेख पढ़ रहा था अब किसका था याद नहीं आ रहा है उसमे उस व्यक्ति ने बताया था कि इंडिया का नाम बदल के भारत कर दिया जाये तो इस देश में आश्चर्यजनक बदलाव आ जायेगा और ये विश्व की बड़ी शक्ति बन जायेगा अब उस शख्स के बात में कितनी सच्चाई है मैं नहीं जानता, लेकिन भारत जब तक भारत था तब तक तो दुनिया में सबसे आगे था और ये जब से इंडिया हुआ है तब से पीछे, पीछे और पीछे ही होता जा रहा है | 
  • भारत के संसद में वन्दे मातरम नहीं गया जायेगा अगले 50 वर्षों तक यानि 1997 तक | 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस मुद्दे को संसद में उठाया तब जाकर पहली बार इस तथाकथित आजाद देश की संसद में वन्देमातरम गाया  गया | 50 वर्षों तक नहीं गाया गया क्योंकि ये भी इसी संधि की शर्तों में से एक है | और वन्देमातरम को ले के मुसलमानों में जो भ्रम फैलाया गया वो अंग्रेजों के दिशानिर्देश पर ही हुआ था | इस गीत में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक नहीं है जो मुसलमानों के दिल को ठेस पहुचाये | आपत्तिजनक तो जन,गन,मन में है जिसमे एक शख्स को भारत भाग्यविधाता यानि भारत के हर व्यक्ति का भगवान बताया गया है या कहें भगवान से भी बढ़कर |
  • इस संधि की शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा अंग्रेजों के हवाले करना था | यही वजह रही क़ि सुभाष चन्द्र बोस अपने देश के लिए लापता रहे और कहाँ मर खप गए ये आज तक किसी को मालूम नहीं है | समय समय पर कई अफवाहें फैली लेकिन सुभाष चन्द्र बोस का पता नहीं लगा और न ही किसी ने उनको ढूँढने में रूचि दिखाई | मतलब भारत का एक महान स्वतंत्रता सेनानी अपने ही देश के लिए बेगाना हो गया | सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई थी ये तो आप सब लोगों को मालूम होगा ही लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है क़ि ये 1942 में बनाया गया था और उसी समय द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था और सुभाष चन्द्र बोस ने इस काम में जर्मन और जापानी लोगों से मदद ली थी जो कि अंग्रेजो के दुश्मन थे और इस आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था | और जर्मनी के हिटलर और इंग्लैंड के एटली और चर्चिल के व्यक्तिगत विवादों की वजह से ये द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ था और दोनों देश एक दुसरे के कट्टर दुश्मन थे | एक दुश्मन देश की मदद से सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के नाकों चने चबवा दिए थे | एक तो अंग्रेज उधर विश्वयुद्ध में लगे थे दूसरी तरफ उन्हें भारत में भी सुभाष चन्द्र बोस की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था |  इसलिए वे सुभाष चन्द्र बोस के दुश्मन थे | 
  • इस संधि की शर्तों के अनुसार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह, रामप्रसाद विस्मिल जैसे लोग आतंकवादी थे और यही हमारे syllabus में पढाया जाता था बहुत दिनों तक | और अभी एक महीने पहले तक ICSE बोर्ड के किताबों में भगत सिंह को आतंकवादी ही बताया जा रहा था, वो तो भला हो कुछ लोगों का जिन्होंने अदालत में एक केस किया और अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया है (ये समाचार मैंने इन्टरनेट पर ही अभी कुछ दिन पहले देखा था) | 
  • आप भारत के सभी बड़े रेलवे स्टेशन पर एक किताब की दुकान देखते होंगे "व्हीलर बुक स्टोर" वो इसी संधि की शर्तों के अनुसार है | ये व्हीलर कौन था ? ये व्हीलर सबसे बड़ा अत्याचारी था | इसने इस देश क़ि हजारों माँ, बहन और बेटियों के साथ बलात्कार किया था | इसने किसानों पर सबसे ज्यादा गोलियां चलवाई थी | 1857 की क्रांति के बाद कानपुर के नजदीक बिठुर में व्हीलर और नील नामक दो अंग्रजों ने यहाँ के सभी 24 हजार लोगों को जान से मरवा दिया था चाहे वो गोदी का बच्चा हो या मरणासन्न हालत में पड़ा कोई बुड्ढा | इस व्हीलर के नाम से इंग्लैंड में एक एजेंसी शुरू हुई थी और वही भारत में आ गयी | भारत आजाद हुआ तो ये ख़त्म होना चाहिए था, नहीं तो कम से कम नाम भी बदल देते | लेकिन वो नहीं बदला गया क्योंकि ये इस संधि में है |
  • इस  संधि की शर्तों के अनुसार अंग्रेज देश छोड़ के चले जायेगे लेकिन इस देश में कोई भी कानून चाहे वो किसी क्षेत्र में हो नहीं बदला जायेगा | इसलिए आज भी इस देश में 34735 कानून वैसे के वैसे चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय चलता था | Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC चलता है और Ireland में जहाँ "I" का मतलब Irish है वही भारत के IPC में "I" का मतलब Indian है बाकि सब के सब कंटेंट एक ही है, कौमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है)  Indian Citizenship Act, Indian Advocates Act, Indian Education Act, Land Acquisition Act, Criminal Procedure Act, Indian Evidence Act, Indian Income Tax Act, Indian Forest Act, Indian Agricultural Price Commission Act  सब के सब आज भी वैसे ही चल रहे हैं बिना फुल स्टॉप और कौमा बदले हुए |
  • इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन जैसे के तैसे रखे जायेंगे | शहर का नाम, सड़क का नाम सब के सब वैसे ही रखे जायेंगे | आज देश का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति भवन कितने नाम गिनाऊँ सब के सब वैसे ही खड़े हैं और हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं | लार्ड डलहौजी के नाम पर डलहौजी शहर है , वास्को डी गामा नामक शहर है (हाला क़ि वो पुर्तगाली था ) रिपन रोड, कर्जन रोड, मेयो रोड, बेंटिक रोड,  (पटना में) फ्रेजर रोड, बेली रोड, ऐसे हजारों भवन और रोड हैं,  सब के सब वैसे के वैसे ही हैं | आप भी अपने शहर में देखिएगा वहां भी कोई न कोई भवन, सड़क उन लोगों के नाम से होंगे | हमारे गुजरात में एक शहर है सूरत, इस सूरत शहर में एक बिल्डिंग है उसका नाम है कूपर विला | अंग्रेजों को जब जहाँगीर ने व्यापार का लाइसेंस दिया था तो सबसे पहले वो सूरत में आये थे और सूरत में उन्होंने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था | ये गुलामी का पहला अध्याय आज तक सूरत शहर में खड़ा है |   
  • हमारे यहाँ शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों की है क्योंकि ये इस संधि में लिखा है और मजे क़ि बात ये है क़ि अंग्रेजों ने हमारे यहाँ एक शिक्षा व्यवस्था दी और अपने यहाँ अलग किस्म क़ि शिक्षा व्यवस्था रखी है | हमारे यहाँ शिक्षा में डिग्री का महत्व है और उनके यहाँ ठीक उल्टा है | मेरे पास ज्ञान है और मैं कोई अविष्कार करता हूँ तो भारत में पूछा जायेगा क़ि तुम्हारे पास कौन सी डिग्री है ? अगर नहीं है तो मेरे अविष्कार और ज्ञान का कोई मतलब नहीं है | जबकि उनके यहाँ ऐसा बिलकुल नहीं है आप अगर कोई अविष्कार करते हैं और आपके पास ज्ञान है लेकिन कोई डिग्री नहीं हैं तो कोई बात नहीं आपको प्रोत्साहित किया जायेगा | नोबेल पुरस्कार पाने के लिए आपको डिग्री की जरूरत नहीं होती है | हमारे शिक्षा तंत्र को अंग्रेजों ने डिग्री में बांध दिया था जो आज भी वैसे के वैसा ही चल रहा है | ये जो 30 नंबर का पास मार्क्स आप देखते हैं वो उसी शिक्षा व्यवस्था क़ि देन है, मतलब ये है क़ि आप भले ही 70 नंबर में फेल है लेकिन 30 नंबर लाये है तो पास हैं, ऐसा शिक्षा तंत्र से सिर्फ गदहे ही पैदा हो सकते हैं और यही अंग्रेज चाहते थे | आप देखते होंगे क़ि हमारे देश में एक विषय चलता है जिसका नाम है Anthropology | जानते है इसमें क्या पढाया जाता है ? इसमें गुलाम लोगों क़ि मानसिक अवस्था के बारे में पढाया जाता है | और ये अंग्रेजों ने ही इस देश में शुरू किया था और आज आज़ादी के 64 साल बाद भी ये इस देश के विश्वविद्यालयों में पढाया जाता है और यहाँ तक क़ि सिविल सर्विस की  परीक्षा में भी ये चलता है | 
  • इस संधि की शर्तों के हिसाब से हमारे देश में आयुर्वेद को कोई सहयोग नहीं दिया जायेगा मतलब हमारे देश की विद्या हमारे ही देश में ख़त्म हो जाये ये साजिस की गयी | आयुर्वेद को अंग्रेजों ने नष्ट करने का भरसक प्रयास किया था लेकिन ऐसा कर नहीं पाए | दुनिया में जितने भी पैथी हैं उनमे ये होता है क़ि पहले आप बीमार हों तो आपका इलाज होगा लेकिन आयुर्वेद एक ऐसी विद्या है जिसमे कहा जाता है क़ि आप बीमार ही मत पड़िए |  आपको मैं एक सच्ची घटना बताता हूँ -जोर्ज वाशिंगटन जो क़ि अमेरिका का पहला राष्ट्रपति था वो दिसम्बर 1799 में बीमार पड़ा और जब उसका बुखार ठीक नहीं हो रहा था तो उसके डाक्टरों ने कहा क़ि इनके शरीर का खून गन्दा हो गया है जब इसको निकाला जायेगा तो ये बुखार ठीक होगा और उसके दोनों हाथों क़ि नसें डाक्टरों ने काट दी और खून निकल जाने की वजह से जोर्ज वाशिंगटन मर गया | ये घटना 1799 की है और 1780 में एक अंग्रेज भारत आया था और यहाँ से प्लास्टिक सर्जरी सीख के गया था | मतलब कहने का ये है क़ि हमारे देश का चिकित्सा विज्ञान कितना विकसित था उस समय | और ये सब आयुर्वेद की वजह से था और उसी आयुर्वेद को आज हमारे सरकार ने हाशिये पर पंहुचा दिया है |   
  • इस संधि के हिसाब से हमारे देश में गुरुकुल संस्कृति को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा | हमारे देश के समृद्धि और यहाँ मौजूद उच्च तकनीक की वजह ये गुरुकुल ही थे | और अंग्रेजों ने सबसे पहले इस देश की गुरुकुल परंपरा को ही तोडा था, मैं यहाँ लार्ड मेकॉले की एक उक्ति को यहाँ बताना चाहूँगा जो उसने 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में दिया था, उसने कहा था "“I have traveled across the length and breadth of India and have not seen one person who is a beggar, who is a thief, such wealth I have seen in this country, such high moral values, people of such caliber, that I do not think we would ever conquer this country, unless we break the very backbone of this nation, which is her spiritual and cultural heritage, and, therefore, I propose that we replace her old and ancient education system, her culture, for if the Indians think that all that is foreign and English is good and greater than their own, they will lose their self esteem, their native culture and they will become what we want them, a truly dominated nation” | गुरुकुल का मतलब हम लोग केवल वेद, पुराण,उपनिषद ही समझते हैं जो की हमारी मुर्खता है अगर आज की भाषा में कहूं तो ये गुरुकुल जो होते थे वो सब के सब Higher Learning Institute हुआ करते थे | 
  • इस संधि में एक और खास बात है | इसमें कहा गया है क़ि अगर हमारे देश के (भारत के) अदालत में कोई ऐसा मुक़दमा आ जाये जिसके फैसले के लिए कोई कानून न हो इस देश में या उसके फैसले को लेकर संबिधान में भी कोई जानकारी न हो तो साफ़ साफ़ संधि में लिखा गया है क़ि वो सारे मुकदमों का फैसला अंग्रेजों के न्याय पद्धति के आदर्शों के आधार पर ही होगा, भारतीय न्याय पद्धति का आदर्श उसमे लागू नहीं होगा | कितनी शर्मनाक स्थिति है ये क़ि हमें अभी भी अंग्रेजों का ही अनुसरण करना होगा |
  • भारत में आज़ादी की लड़ाई हुई तो वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ था और संधि के हिसाब से ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत छोड़ के जाना था और वो चली भी गयी लेकिन इस संधि में ये भी है क़ि ईस्ट इंडिया कम्पनी तो जाएगी भारत से लेकिन बाकि 126 विदेशी कंपनियां भारत में रहेंगी और भारत सरकार उनको पूरा संरक्षण देगी | और उसी का नतीजा है क़ि ब्रुक बोंड, लिप्टन, बाटा, हिंदुस्तान लीवर (अब हिंदुस्तान यूनिलीवर) जैसी 126 कंपनियां आज़ादी के बाद इस देश में बची रह गयी और लुटती रही और आज भी वो सिलसिला जारी है |
  • अंग्रेजी का स्थान अंग्रेजों के जाने के बाद वैसे ही रहेगा भारत में जैसा क़ि अभी (1946 में) है और ये भी इसी संधि का हिस्सा है | आप देखिये क़ि हमारे देश में, संसद में, न्यायपालिका में, कार्यालयों में हर कहीं अंग्रेजी, अंग्रेजी और अंग्रेजी है जब क़ि इस देश में 99% लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है | और उन 1% लोगों क़ि हालत देखिये क़ि उन्हें मालूम ही नहीं रहता है क़ि उनको पढना क्या है और UNO में जा के भारत के जगह पुर्तगाल का भाषण पढ़ जाते हैं |
  • आप में से बहुत लोगों को याद होगा क़ि हमारे देश में आजादी के 50 साल बाद तक संसद में वार्षिक बजट शाम को 5:00 बजे पेश किया जाता था | जानते है क्यों ? क्योंकि जब हमारे देश में शाम के 5:00 बजते हैं तो लन्दन में सुबह के 11:30 बजते हैं और अंग्रेज अपनी सुविधा से उनको सुन सके और उस बजट की समीक्षा कर सके | इतनी गुलामी में रहा है ये देश | ये भी इसी संधि का हिस्सा है |
  • 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेजों ने भारत में राशन कार्ड का सिस्टम शुरू किया क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को अनाज क़ि जरूरत थी और वे ये अनाज भारत से चाहते थे | इसीलिए उन्होंने यहाँ जनवितरण प्रणाली और राशन कार्ड क़ि शुरुआत क़ि | वो प्रणाली आज भी लागू है इस देश में क्योंकि वो इस संधि में है | और इस राशन कार्ड को पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल उसी समय शुरू किया गया और वो आज भी जारी है | जिनके पास राशन कार्ड होता था उन्हें ही वोट देने का अधिकार होता था | आज भी देखिये राशन कार्ड ही मुख्य पहचान पत्र है इस देश में |
  • अंग्रेजों के आने के पहले इस देश में गायों को काटने का कोई कत्लखाना नहीं था | मुगलों के समय तो ये कानून था क़ि कोई अगर गाय को काट दे तो उसका हाथ काट दिया जाता था | अंग्रेज यहाँ आये तो उन्होंने पहली बार कलकत्ता में गाय काटने का कत्लखाना शुरू किया, पहला शराबखाना शुरू किया, पहला वेश्यालय शुरू किया और इस देश में जहाँ जहाँ अंग्रेजों की छावनी हुआ करती थी वहां वहां वेश्याघर बनाये गए, वहां वहां शराबखाना खुला, वहां वहां गाय के काटने के लिए कत्लखाना खुला | ऐसे पुरे देश में 355 छावनियां थी उन अंग्रेजों के | अब ये सब क्यों बनाये गए थे ये आप सब आसानी से समझ सकते हैं | अंग्रेजों के जाने के बाद ये सब ख़त्म हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ क्योंक़ि ये भी इसी संधि में है |
  • हमारे देश में जो संसदीय लोकतंत्र है वो दरअसल अंग्रेजों का वेस्टमिन्स्टर सिस्टम है | ये अंग्रेजो के इंग्लैंड क़ि संसदीय प्रणाली है | ये कहीं से भी न संसदीय है और न ही लोकतान्त्रिक है| लेकिन इस देश में वही सिस्टम है क्योंकि वो इस संधि में कहा गया है | और इसी वेस्टमिन्स्टर सिस्टम को महात्मा गाँधी बाँझ और वेश्या कहते थे (मतलब आप समझ गए होंगे) |
ऐसी हजारों शर्तें हैं | मैंने अभी जितना जरूरी समझा उतना लिखा है | मतलब यही है क़ि इस देश में जो कुछ भी अभी चल रहा है वो सब अंग्रेजों का है हमारा कुछ नहीं है | अब आप के मन में ये सवाल हो रहा होगा क़ि पहले के राजाओं को तो अंग्रेजी नहीं आती थी तो वो खतरनाक संधियों (साजिस)  के जाल में फँस कर अपना राज्य गवां बैठे लेकिन आज़ादी के समय वाले नेताओं को तो अच्छी अंग्रेजी आती थी फिर वो कैसे इन संधियों के जाल में फँस गए | इसका कारण थोडा भिन्न है क्योंकि आज़ादी के समय वाले नेता अंग्रेजों को अपना आदर्श मानते थे इसलिए उन्होंने जानबूझ कर ये संधि क़ि थी | वो मानते थे क़ि अंग्रेजों से बढियां कोई नहीं है इस दुनिया में | भारत की आज़ादी के समय के नेताओं के भाषण आप पढेंगे तो आप पाएंगे क़ि वो केवल देखने में ही भारतीय थे लेकिन मन,कर्म और वचन से अंग्रेज ही थे | वे कहते थे क़ि सारा आदर्श है तो अंग्रेजों में, आदर्श शिक्षा व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श अर्थव्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श चिकित्सा व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श कृषि व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श न्याय व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श कानून व्यवस्था है तो अंग्रेजों की | हमारे आज़ादी के समय के नेताओं को अंग्रेजों से बड़ा आदर्श कोई दिखता नहीं था और वे ताल ठोक ठोक कर कहते थे क़ि हमें भारत अंग्रेजों जैसा बनाना है | अंग्रेज हमें जिस रस्ते पर चलाएंगे उसी रास्ते पर हम चलेंगे | इसीलिए वे ऐसी मूर्खतापूर्ण संधियों में फंसे | अगर आप अभी तक उन्हें देशभक्त मान रहे थे तो ये भ्रम दिल से निकाल दीजिये | और आप अगर समझ रहे हैं क़ि वो ABC पार्टी के नेता ख़राब थे या हैं तो XYZ पार्टी के नेता भी दूध के धुले नहीं हैं | आप किसी को भी अच्छा मत समझिएगा क्योंक़ि आज़ादी के बाद के इन 64 सालों में सब ने चाहे वो राष्ट्रीय पार्टी हो या प्रादेशिक पार्टी,  प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता का स्वाद तो सबो ने चखा ही है | खैर ...............

तो भारत क़ि गुलामी जो अंग्रेजों के ज़माने में थी, अंग्रेजों के जाने के 64 साल बाद आज 2011 में जस क़ि तस है क्योंकि हमने संधि कर रखी है और देश को इन खतरनाक संधियों के मकडजाल में फंसा रखा है | बहुत दुःख होता है अपने देश के बारे जानकार और सोच कर | मैं ये सब कोई ख़ुशी से नहीं लिखता हूँ ये मेरे दिल का दर्द होता है जो मैं आप लोगों से शेयर करता हूँ | 

ये सब बदलना जरूरी है लेकिन हमें सरकार नहीं व्यवस्था बदलनी होगी और आप अगर सोच रहे हैं क़ि कोई मसीहा आएगा और सब बदल देगा तो आप ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं | कोई हनुमान जी, कोई राम जी, या कोई कृष्ण जी नहीं आने वाले | आपको और हमको ही ये सारे अवतार में आना होगा, हमें ही सड़कों पर उतरना होगा और और इस व्यवस्था को जड मूल से समाप्त करना होगा | भगवान भी उसी की मदद करते हैं जो अपनी मदद स्वयं करता है | 

इतने लम्बे पत्र को आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद् | और अच्छा लगा हो तो इसे फॉरवर्ड कीजिये,

बाबा रामदेव का भ्रस्ताचार के विरुद्ध संग्राम , क्या सफल हो पायेगा ?

बाबा रामदेव का भ्रस्ताचार के विरुद्ध संग्राम , क्या सफल हो पायेगा ?


Baba Ramdev starting Maha Sangram against Black Money and Corruption -- GET READY

प्रिय भरासियो ,

मुझे अमेरिका से एक महान एक्टिविस्ट इंडियन अमेरिकेन फोरम ऑफ इंटेलेक्चुअल से यह मेसेज मिला.

अमेरिका बैठे लोग भी हम्मरे बारे में कितने चिंतित हैं.

On Tue, Apr 26, 2011 at 7:03 AM, <Katariaxxxxx@aol.com>wrote:

Baba Ramdev starting Maha Sangram against Black Money and Corruption -- GET READY

पर मैं उन्हें यह जबाब लिख पाया.

thanks kataria jee,

my good wishes with all the activists.


there is no doubt about the planning, and intentions of baba ramdev, hazare or subramaniam swami or others.

but do not you realise that the masses of leaders and beaurocrats are having an immoral, anti religious training in their life, from childhood.

they just can not differentiate between good money and bad money. no nationalism, no morals, no conscience. they are like mad animals, harming nation, by all means, and they have power and planning to do that.

and we wish to change them by some bill, law , or punishments.

we have to start, them teaching national feeling from the childhood, and scan and remove every curropt officer in one go.

till then it would be a dreadful dream .

i am sorry to write this.

thanks and regards

ashok gupta

देल्ही

ashok.gupta4@gmail.com

क्या कोई सुझाव / रास्ता हो सकता है, जिससे बेऔरोक्रेट्स को नैतिक शिक्छा दी जा सके ?

एक नई आस

नई चेतना


नई चेतना, नई आस है

नव बेला की सांझ नई

लोग खड़े हैं राष्ट्र सृजन को

कलुषित मानव हुए विकल

भांति-भांति के तर्क हैं गढ़ते

कहते इससे क्या हो सकता

मंजिल की है बातें करते

चलने पर बेचैनी

बेखौफ जवानी की अंगड़ाई

परिवर्तन का मार्ग प्रसस्त हुआ

प्रथम कदम है शुरूवात

नव उषा की मादकता है

इसकी सुगन्ध में नव जीवन की।

जागी है उम्मीद नई।।


अन्ना हजारे के आन्दोलन को समर्पित और उन लोगों को जिन्होंने भ्रष्टाचार से लड़ने की ठानी।

एम. अफसर खान सागर

खबरगंगा: मियां की जूती मियां के सर

खबरगंगा: मियां की जूती मियां के सर

political news

क्या इंका और भाजपा में होगी लाल बत्ती की अदला बदली ?

हरवंश की लालबत्ती जाना तय, क्या शशि,कमल,ढ़ालसिंह या नरेश को मिलेगी लालबत्ती या शिव की नगरी रहेगी लाल बत्ती विहीन

सिवनी। प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस में हुये परिवर्तन को लेकर भाजपा मे भी ऊहा पोह के हालात बन गये हैं। इसका जिले की राजनीति में भी व्यापक असर पड़े की सम्भावनायें व्यक्त की जा रहीं हैं। जहां एक ओर कांग्रेस के हरवंश सिंह को मिली लाल बत्ती जाना तय माना जा रहा हैं तो वहीं दूसरी ओर भूरिया फेक्टर के कारण जिले के किसी आदिवासी विधायक को मन्त्री बनाकर या पूर्व विधायकों में से किसी एक को निगम में नवाज कर लाल बत्ती मिलने की सम्भावना हैं। अब देखना यह हैं कि इंका और भाजपा में लाल बत्ती की अदला बदली होकर लाल बत्ती जिले में बनी रहती हैं या फिर जिला लालबत्ती विहीन हो जायेगा।

प्रदेश कांग्रेस में कान्तिलाल भूरिया के अध्यक्ष और अजय सिंह के नेता प्रतिपक्ष बनने से प्रदेश की राजनीति में अचानक तेजी आ गई हैं। प्रदेश की अधिकांश आदिवासी सीटों को जीतने वाली भाजपा इंका के आदिवासी कार्ड से विचलित दिखायी दे रही हैं। नेता प्रतिपक्ष के रूप में अजय सिंह की ताजपोशी और चन्द महीनों पहले सिधिंया गुट के महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा का लोक लेखा समिति का अध्यक्ष बनना जातीय समीकरणों के चलते विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को भारी पड़ रही हैं। विपक्ष को मिलने वाले तीनों प्रमुख पदों पर ठाकुर नेताओ का कब्जा आड़े आने से यह तय माना जा रहा हैं कि जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह लाल बत्ती से महरूम होने वाले हैं।

भूरिया फेक्टर से विचलित भाजपा मन्त्री मंड़ल विस्तार के दौरान हो सकता हैं कि दो आदिवासी विधायकों को मन्त्री बना कर आदिवासी वोटों के बिखराव को रोकने की कोशिश कर सकती हैं। ऐसा भी माना जा रहा हैं कि इनमें से एक मन्त्री महाकौशल क्षेत्र से होगा। इस क्षेत्र के दो जिले डिण्डोरी और सिवनी मन्त्री विहीन जिले हैं। इनमें से डिण्डोरी में सभी विधायक कांग्रेस के हैं जबकि सिवनी जिले में चार में से तीन विधायक भाजपा के हैं जिनमें से दो आदिवासी वर्ग के है।कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले लखनादौन क्षेत्र की भाजपा विधायक शशि ठाकुर दूसरी बार विधायक बनीं हैं जबकि बरघाट क्षेत्र के युवा विधायक कमल मर्सकोले पहली बार बरघाट सीट से विधायक बन कर इस सीट पर पांचवी बार भाजपा का कब्जा बरकरार रखने में सफल रहें हैं। मन्त्री मंड़ल के प्रस्तावित फेर बदल में इन दोनों में से किसी एक को लालबत्ती मिल सकती हैं। वैसे भी भाजपा का यह मानना है कि पचास साल से अधिक उम्र वाले आदिवासी आज भी कांग्रेस के ही पक्ष में जाते हें इसलिये युवा आदिवासियों को अपनी ओर आकषिZत करने के लिये युवा विधायकों पर दांव खेला जा सकता हैं।

सिवनी की विधायक नीता पटेरिया के प्रदेश महिला मोर्चे के अध्यक्ष बन जाने के बाद उनके मन्त्री बनने की सम्भावनायें कम हो गईं हैं। यदि मन्त्री मंड़ल में जिले को लालबत्ती नहीं मिल पाती हैं तो ऐसा भी माना जा रहा हैं कि पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन या पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को किसी निगम में लाल बत्ती दी जा सकती हैं। दोनों के ही पक्ष विपक्ष में तर्क दिये जा रहें हैं। जहां एक ओर डॉ. बिसेन के चुनाव हारने की बात कही जा रही हैं तो वहीं नरेश की टिकिट कटने के कारण गिनाते हुये भाजपायी ही भ्रष्टाचार की बात कहने से नहीं चूक रहें हैं। पिछले चुनावों में हारी हुयी सीटों को जीतने की रणनीतिबनाने में जुटी भाजपा यदि इसपर अमल करती हें तो डॉ. बिसेन की सम्भावनायें प्रबल हो सकती हैं।

अब देखना यह हैं कि अपने राज में शिव की नगरी सिवनी को लालबत्ती विहीन रखने वाले शिवराज जिले को लाल बत्ती देकर इंका और भाजपा में लाल बत्ती की अदला बदली करतें हैं या फिर जिला लाल बत्ती विहीन होकर रह जायेगा क्योंकि विस उपाध्यक्ष हरवंश की लाल बत्ती छिनना तो तयही माना जा रहा हैं।





आदिवासी एवं सामान्य के बाद अब पिछडों पर कांग्रेस की नज़र !

मिशन 2013 फतह करने हरवंश सिंह को देनी पड सकती है कुबाZनी .क्षेत्रीय एवं गुटीय सन्तुलन के मद्देनज़र विस उपाध्यक्ष पद महाकौशल को ही .विधायक कटंगी विश्वेश्वर भगत प्रबल दावेदार

सिवनी (सञ्जय सिंह) । प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विधायक अजय सिंह राहुल की नेता प्रतिपक्ष पर हुई ताजपोशी के बाद प्रदेश के कांग्रेसी हलकोें में यह चचाZ बडे जोरों से चल रही है कि जातीय समीकरण के चलते अब प्रदेश के कद्दावर कांग्रेसी नेता ठा. हरवंश Çसह का विधानसभा उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देना तय माना जा रहा है। कांग्रेसियों का मानना है कि विधानसभा में विपक्ष को मिलने वाले तीनों पदों प्रतिपक्ष नेता, विधानसभा उपाध्यक्ष एवं लोक लेखा समिति पर ठाकुरों का कब्जा हो गया है। लोक लेखा समिति के अध्यक्ष बनाये गये महेन्द्र सिंह कालूखेडा की नियुक्ति हुये अभी करीब 2 माह ही हुये हैं और वे ज्योतिरादित्य सिन्धिया के गुट के हैं। ऐसे में उनको हटाया जाना राजनैतिक समीकरणों की दृष्टि से उचित नहीं होगा। यदि तीनों ठाकुर अपने-अपने पदों पर विराजमान रहते हैं तो कांग्रेस पर नि:सन्देह ठाकुरवाद का ठप्पा लग जायेगा जो भविष्य में बीजेपी के लिये जातीय समीकरण के आधार पर राजनैतिक लाभ देने वाला सिद्Ëा होगा।

प्रदेश के साथ-साथ जिले के कांग्रेसियों खास कर हरवंश समर्थकों द्वारा छिपे हुये अन्दाज और दबी हुई जुबान से यहां तक कहा जा रहा है कि विगत दिनों साहब का दिल्ली प्रवास इसी सिलसिले में था। आलाकमान ने साहब को दिल्ली तलब कर उनसे इस्तीफा ले लिया है उसके बाद ही राहुल की ताजपोशी का रास्ता बनाया गया। हरवंश समर्थकों का यह मानना है कि अब साहब को विधानसभा 2.13 के मिशन के मद्देनज़र संगठन में महती जिम्मेदारी मिलने वाली है, ताकि कांग्रेस उनकी सर्वविदित संगठनात्मक क्षमता का पूरा लाभ उठाकर प्रदेश अगली सरकार पार्टी की बना सके। श्री सिंह के समर्थकों एवं कांग्रेसी हलकों में व्याप्त चचाZ को सच मान लिया जाये तो अगली विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने की कांग्रेस की कवायदों को देखते हुये आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद विधानसभा उपाध्यक्ष का पद किसी पिछडे वर्ग के विधायक की झोली में जा सकता है। सम्भावना यह भी है कि चूंकि वर्तमान में यह पद महाकौशल क्षेत्र के पास है इसीलिये अगल विस उपाध्यक्ष भी महाकौशल क्षेत्र से ही बनाया जाये ताकि क्षेत्रीय सन्तुलन भी बरकरार रखा जा सके। ज्ञातव्य हो कि नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष कान्तिलाल भूरिया एवं लोक लेखा समिति अध्यक्ष महेन्द्र सिंह कालूखेडा मध्य क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, वहीं अभी हाल ही में नियुक्त हुये प्रतिपक्ष नेता अजय सिंह विन्ध्य के साथ-साथ बुन्देलखण्ड का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

यदि कांग्रेस के रणनीतिकार पिछडा वर्ग का कार्ड खेलते हैं और महाकौशल को प्रतिनिधित्व देते हैं तो सीधे राजनैतिक संकेत यही कहते हैं कि गुटीय सन्तुलन का यदि ताना-बाना बुना गया तो विधानसभा उपाध्यक्ष का पद कमलनाथ समर्थक की झोली में जायेगा। महाकौशल क्षेत्र में कांग्रेस के पिछडे वर्ग के विधायकों और कमलनाथ समर्थकों में दो ही नाम उभरकर आते हैं और ये दोनों ही नाम बालाघाट जिले से हैं, कटंगी विधायक विश्वेश्वर भगत एवं वारासिवनी विधायक प्रदीप जायसवाल । महाकौशल क्षेत्र के मण्डला, डिण्डोरी जिले में आदिवासी विधायक हैं तथा छिन्दवाडा जिले में दीपक सक्सेना छिन्दवाडा, मेहरसिंह चौधरी चौरई सामान्य से, तेजीलाल सरयाम आदिवासी वर्ग से, नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव से नरबदा प्रसाद प्रजापति हरिजन वर्ग से, सुनील जायसवाल नरसिंहपुर पिछडा वर्ग से एवं साधना स्थापक गाडरवाडा सामान्य वर्ग से , जबलपुर जिले में जबलपुर पूर्व विधानसभा के विधायक लखन घनघोरिया हरिजन वर्ग से, कटनी जिले में सञ्जय पाठक विजय राघवगढ सामान्य वर्ग से एवं निषिद पटेल बहोरीबन्द पिछडा वर्ग से हैं। आदिवासी वर्ग और सामान्य वर्ग के लिये अब कोई राजनैतिक समीकरण बनता नहीं दिखाई दे रहा है। पिछडे वर्ग से नरसिंहपुर के सुनील जायसवाल जरूर विधायक हैं , किन्तु वे जूनियर हैं। इसी तरह बहोरीबन्द के निषिद पटेल पिछडा वर्ग से जरूर हैं, किन्तु वे सिन्धिया गुट के हैं तथा इस गुट के महेन्द्र सिंह कालूखेडा को विधानसभा में एक पद दिया जा चुका है। पिछडे वर्ग के प्रदीप जायसवाल सीनियर तो जरूर हैं , किन्तु कलार जाति की अपेक्षा भाजपा समर्थक पंवार जाति पर कांग्रेस की नज़रें गढी होने के कारण कटंगी के विधायक विÜवेÜवर भगत खरे उतर सकते हैं। श्री भगत के पास काफी राजनैतिक अनुभव भी है तथा बालाघाट से लेकर ब्ौतूल जिले तक फैली और वोट ब्ौंक के हिसाब से निर्णायक पंवार जाति में यदि किसी कांग्रेसी नेता की पकड है तो सिर्फ वे ही हैं। श्री भगत को दो बार सांसद (वर्ष 1991 से 1996 एवं 1996 से 1998) तथा वर्तमान मिलाकर 3 बार विधायक एवं मन्त्री(वर्ष 1985 से 1990 ) का पद सम्भालने का अनुभव है। विÜवेÜवर भगत को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाकर कांग्रेस विधानसभा में जहां उनके राजनीतिक अनुभव का लाभ ले सकेगी , वहीं भाजपा के पंवार जाति के थोक वोट ब्ौंक में सेन्धमारी भी कर सकेगी।

महाकौशल क्षेत्र के बालाघाट ,सिवनी, छिन्दवाडा एवं ब्ौतूल की करीब 15 से अधिक विधानसभा सीटों पर पंवार जाति निर्णायक भूमिका में है। कांग्रेस से मोह भंग होने पर जब से पंवार जाति ने भाजपा का दामन थामा है, तब से परिसीमन के पूर्व बालाघाट जिले की 8 विधानसभा में कम से कम 4 एवं अधिकतम 6 विधानसभा सीट कटंगी, बालाघाट, लांजी, ब्ौहर, किरनापुर , सिवनी जिले की वर्ष 199. से लगातार बरघाट एवं सिवनी विधानसभा सीट , छिन्दवाडा की पांढुनाZ एवं सौंसर विधानसभा सीट तथा ब्ौतूल जिले की मुलताई विधानसभा सीट भाजपा के पास ही रही है। परिसीमन के पूर्व बालाघाट जिले की खैरलाञ्जी सीट से विÜवेÜवर भगत जीतते रहे हैं भले ही वे बतौर कांग्रेस प्रत्याशी जीते हों। खेैरलाञ्जी से बोधÇसह भगत भाजपा भी पंवारों के बल पर ही जीतते थे। इसी तरह पंवार बाहुल्य किरनापुर विधानसभा सीट से वर्ष 198. एवं 1985 में भुवनलाल पारधी भाजपा के ही विधायक थे। बालाघाट जिले की कटंगी विधानसभा सीट से भी विधायक पंवार जाति का ही चुना गया है भले ही वह कांग्रेस या भाजपा का हो। एक बार ही वर्ष 1985 में इस विधानसभा से ग्ौर पंवार डॉ निर्मल सिंह हीरावत कांग्रेस से चुने गये थे। परिसीमन के बाद बालाघाट जिले में भाजपा के 4 विधायक एवं 2 विधायक कांग्रेस के हैं जिनमें गौरीशंकर बिसेन भाजपा(बालाघाट) एवं विÜवेÜवर भगत कांग्रेस(कटंगी) पंवार जाति के हैंं। बालाघाट जिले की लांजी सीट में भी पंवार निर्णायक हैं, वर्तमान में वहां से रामकिशोर कांवरे भाजपा के विधायक हैं। सिवनी जिले की बरघाट विधानसभा में पंवार जाति पूर्णत: निर्णायक है तो सिवनी विधानसभा में भी पंवारों की संख्या पर्याप्त है, वर्ष 1990 से ये दोनों सीटें भाजपा की झोली में हैं। बरघाट विधानसभा सीट से वर्ष 1990 से वर्ष 2003 के विधानसभा चुनावों में डॉ ढालसिंह बिसेन एवं वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव से कमल मर्सकोले तथा सिवनी विधानसभा सीट से वर्ष 1990 से वर्ष 1998 तक स्व. पण्डित महेश प्रसाद शुक्ला, वर्ष 1998 से वर्ष 2008 तक नरेश दिवाकर एवं वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव से श्रीमती नीता पटेरिया भाजपा का परचम लहरा रहे हैं। इसी तरह जिला छिन्दवाडा की पंवार बाहुल्य पांढुनाZ विधानसभा सीट(परिसीमन से पूर्व) से पंवार जाति के मारूतिराव खपसे 4 बार विधायक चुने जा चुके हैं। ब्ौतूल जिले की पंवार बाहुल्य मुलताई विधानसभा सीट(परिसीमन के पूर्व) से भी पंवार जाति के ही मनिराम बारंगे 1 बार निर्दलीय एवं दो बार भाजपा से जीतते रहे थे। यही नहीं जिला पंचायत के पिछले चुनावों में बालाघाट , छिन्दवाडा और ब्ौतूल में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद भी भाजपा क ी झोली में गया था। सिवनी में श्रीमती गोमती ठाकुर भाजपाई गुटबन्दी के चलते जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं बन सक ीं थीं।

यही कारण है कि राजनीति में पिछडे वर्ग के पंवारों के बढते वचZस्व को देखते हुये परिसीमन के दौरान भाजपा के ही पंवार विरोधी नेताओं और कांग्रेसी नेताओं ने मिलकर पंवार बाहुल्य बालाघाट जिले की किरनापुर एवं खैरलाञ्जी विधानसभा सीट, छिन्दवाडा जिले की पांढुनाZ एवं ब्ौतूल की मुलताई विधानसभा सीट को समाप्त कर दिया, वहीं सिवनी की बरघाट विधानसभा सीट को आदिवासी कोटे में डाल दिया। व्ौसे तो पिछडे वर्ग की यह पंवार जाति आर्थिक , शैक्षणिक, राजनेैतिक क्षेत्र में काफी आगे है तथा सामाजिक तौर से लामबन्द भी है। वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियों में पंवार वोट ब्ौंक भाजपा के साथ है। वर्ष 1985 के राजनैतिक परिदृश्य को टटोला जाये तो इस जाति का उसी समय से धीरे-धीरे कांग्रेस से मोहभंग होने लगा था और वर्ष 1990 के आते-आते पंवार जाति पूरी तरह भाजपा के साथ हो गई थी। इस जाति का साथ भाजपा को मिलने से महाकौशल के बालाघाट, सिवनी, छिन्दवाडा और ब्ौतूल के अनेक कांग्रेसी गढ ध्वस्त होते चले गये और वहां भगवा लहराने लगा। कांग्रेस की लाख कोशिशों के बाद भी उसके हाथ से गई सीटें उसे वापस नहीं मिल सक ीं। पिछडे वर्ग की पंवार जाति में जातिगत नेतृत्व भाजपा के हाथ में चला गया है। कांग्रेस यदि इसे तोडना चाहती है तो जरूरी है कि उस नेता को आगे करे जिसकी इस जाति में पकड है। बालाघाट से लेकर ब्ौतूल तक कांग्रेस के पास ऐसा कोई नेता है तो वो है विश्वेÜवर भगत।

श्री भगत ने अपने राजनैतिक जीवन में पंवारों के समर्थन से ही दो बार सांसद एवं 3 बार विधायक की कुसीZ हासिल कर चुके हैं। विधानसभा का लम्बा अनुभव भी जितना उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिये उपयुक्त माना जा सकता है, वहीं गुटीय सन्तुलन के हिसाब से भी कमल नाथ समर्थक होने के कारण उनका दावा पुख्ता बनता है। राजनैतिक समीकरण इस ओर भी संकेत कर रहे हैं कि कांग्रेस विश्वेÜवर भगत को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा द्वारा महाकौशल के साथ किये जा रहे पक्षपातपूर्ण रव्ौये , पीएचई मन्त्री गौरीशंकर बिसेन की पंवारों के बीच होती कमजोर पकड तथा उनकी बेलगामी पर नकेल कसने एवं पंवारों के सर्वमान्य नेता पूर्व मन्त्री डॉ ढालसिंह बिसेन की भाजपा द्वारा लगातार की जा रही उपेक्षा का लाभ भी ले सकती है।

अब महान कैसे हो गए सत्य साईं बाबा?

पुट्टापर्थी में सत्य साईं बाबा के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर निधन के बाद तक सारे न्यूज चैनल जिस तरह बाबा की महिमा का बखान कर रहे हैं, उस देख यह हैरानी होती है कि कभी अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए ये ही चैनल उन्हें डोंगी बाबा बता कर सनसनी पैदा कर रहे थे और आज जनता के मूड की वजह से उन्हें वे ही यकायक करोड़ों लोगों के भगवान और हजारों करोड़ रुपए के साम्राज्य वाले धर्मगुरू कैसे दिखाई दे रहे हैं। कभी ये ही चैनल तर्कवादियों की जमात जमा करके बाबा को फर्जी बताने से बाज नहीं आ रहे थे, आज वे ही पुट्टापर्थी की पल-पल की खबर दिखाते हुए दुनियाभर में उनकी ओर से किए गए समाजोत्थान के कार्यों का बखान कर रहे हैं। ये कैसा दोहरा चरित्र है?
असल में महत्वपूर्ण ये नहीं है कि साईं बाबा चमत्कारी थे या नहीं, कि वे जादू दिखा कर लोगों को आकर्षित करते थे और वह जादू कोई भी दिखा सकता है, महत्वपूर्ण ये है कि उस शख्स ने यदि हजारों करोड़ रुपए का साम्राज्य खड़ा भी किया तो उसका मकसद आखिर जनता की भलाई ही तो था।
सवाल ये भी है कि क्या केवल जादू के दम पर करोड़ों लोगों को अपना भक्त बनाया जा सकता है? जादू से अलबत्ता आकर्षित जरूर किया जा सकता है, मगर कोई भी व्यक्ति भक्त तभी होता है, जब उसके जीवन में अपेक्षित परिवर्तन आए। केवल जादू देख कर ज्यादा देर तक जादूगर से जुड़ा नहीं रहा जा सकता। राजनेता जरूर वोटों की राजनीति के कारण हर धर्म गुरू के आगे मत्था टेकते नजर आ सकते हैं, चाहे उनके मन में उसके प्रति श्रद्धा हो या नहीं, मगर सचिन तेंदुलकर जैसी अनेकानेक हस्तियां यदि बाबा के प्रति आकृष्ठ हुई थीं, तो जरूर उन्हें कुछ तो नजर आया होगा।
माना कि जो कुछ लोग उनके कथित आशीर्वाद की वजह से खुशहाल हुए अथवा जो कुछ लोग उनकी ओर किए गए समाजोपयोगी कार्यों का लाभ उठा रहे थे, इस कारण उनके भक्त बन गए, मगर इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाहिए कि चाहे जादू के माध्यम से ही सही, मगर उन्होंने लोगों को अध्यात्म का रास्ता दिखाया, गरीबों का कल्याण किया। अगर ये मान भी लिया जाए कि वे जो चमत्कार दिखाते थे, उन्हें कोई भी जादूगर दिखा सकता है, मगर क्या यह कम चमत्कार है कि करोड़ों लोग उनके प्रति आस्थावान हो गए।
संभव है आज पुट्टापर्थी का चौबीस घंटे कवरेज देने के पीछे तर्क ये दिया जाए कि वे तो महज घटना को दिखा रहे हैं कि वहां कितनी भीड़ जमा हो रही है या फिर वीवीआईपी का कवरेज दिखा रहे है या फिर करोड़ों लोंगों की आस्था का ख्याल रख रहे हैं, तो इस सवाल जवाब क्या है कि वे पहले उन्हीं करोड़ों लोगों की आस्था पर प्रहार क्यों कर रहे थे।
कुल जमा बात इतनी सी है कि न्यूज चैनल संयमित नहीं हैं। उन्हें जो मन में आता है, दिखाते हैं। जिस व्यक्ति से आर्थिक लाभ होता है, उसका कवरेज ज्यादा दिखाते हैं। बाबा रामदेव उसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। वे जो योग सिखा रहे हैं, वह हमारे ऋषि-मुनि हजारों वर्षों से करते रहे हैं, वह हजारों योग गुरू सिखा रहे हैं, कोई बाबा ने ये योग इजाद नहीं किया है, मगर चूंकि उन्होंने अपने कार्यक्रमों का कवरेज दिखाने के पैसे दिए, इस कारण उन्हें ऐसा योग गुरू बना दिया, मानो न पहले ऐसे योग गुरू हुए, न हैं और न ही भविष्य में होंगे।
तेजवानी गिरधर, अजमेर