23.10.12
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ASHUTOSH VERMA
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22.10.12
बिहार में महिला थानों का औचित्य-ब्रज की दुनिया
मित्रों, जब भी आप बिहार के किसी थाने में प्रवेश करेंगे बड़े मोटे अक्षरों में कुछ ईबारतें दीवारों पर लिखी हुई मिलेंगी, जैसे-ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति होती है, क्या मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ इत्यादि। परन्तु ये ईबारतें सिर्फ दिखावे के लिए होती हैं। लिखना जरूरी होता है सो लिख दिया जाता है वैसे कोई इन्हें पढ़ता नहीं। दरोगा जी पढ़ने की जरुरत नहीं समझते और आरोपी य़ा आरोपित पढ़कर क्या करेगा? अगर कभी प्रतिवादस्वरूप किसी ने कह दिया कि हुजूर दीवार पर लिखा तो ऐसा है आपने तो यकीन मानिये उसे सैंकड़ों गालियाँ तो सुनने को मिलेंगी ही हो सकता है कि सरकारी कर्मचारी/अधिकारी पर हाथ उठाने या काम में बाधा डालने के झूठे इल्जाम में तत्काल भीतर भी कर दिया जाए। हो तो यह भी सकता है कि स्पेलिंग मिस्टेक के चलते मुकदमे की धारा ही बदल जाए,जैसे-धारा 107 धारा 307 हो जाए और यहाँ 1 और 3 का फर्क आप भी जानते होंगे।
मित्रों, कई बार आपने देखा होगा कि पुलिस रेलवे स्टेशन,बस स्टैण्ड आदि स्थानों से चोर,पॉकेटमार को गिरफ्तार करके ले जाती है। आपने कभी पता लगाया है कि उनका क्या होता है और क्या किया जाता है? आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि बिहार में 99.99 आवर्त प्रतिशत ऐसे चोर-पॉकेटमार थाना पहुँचने से पहले या पहुँचने के फौरन बाद बाईज्जत छोड़ दिए जाते हैं कदाचित इस हिदायत के साथ कि काम सफाई से करो,कैसे पकड़े गए। हमारे राज्य बिहार में यह पुलिस की ही कृपा है कि राज्य में सुशासन में भी इतने अपराध हो रहे हैं। पुलिस नहीं होती तो शायद अपराध कब के बंद हो चुके होते। सच्चाई यह भी है कि लोगों के बीच जितना आतंक निजी गुंडों का नहीं है उससे कई गुणा ज्यादा वे वर्दीवाले गुंडों से डरते हैं। एक बड़ा ही रोचक चुटकुला हमारे बिहार में वर्षों से प्रचलन में है और कदाचित् हमेशा रहेगा। हुआ यूँ कि एकबार मुम्बई से एक मराठी बिहार आया और मुम्बई पुलिस के बारे में किसी बिहारी को बताने लगा कि मुम्बई में तो अपराध होने के 24 घंटे के भीतर ही पुलिस अपराध करनेवालों का पता लगा लेती है, गजब की फास्ट है मुम्बई पुलिस। तब बिहारी ने बिहार पुलिस का महिमामंडन करते हुए सिर ऊँचा करके और मूँछों पर ताव देते हुए कहा कि ये तो कुछ भी नहीं है हमारे यहाँ की पुलिस को तो अपराध होने के 24 घंटे पहले से ही पता होता है कि कहाँ अपनाध होनेवाला है और उसमें कौन-कौन शामिल होनेवाले हैं।
मित्रों,न जाने कितनी सरकारें बिहार में आईं और गईं, न जाने कितने एसपी,डीएसपी आए और गए परन्तु बिहार के थानों का न तो स्वभाव ही बदला और न तो सूरत ही। ये थाने आजादी से पहले भी रक्त-चूषक केंद्र थे और आज भी हैं। अब आप कहेंगे कि आपने तो पढ़ा है कि बिहार में तो सुशासन बाबू का सुशासन है। सुशासन है, जरूर है लेकिन अभी तक वह थानों का चक्कर ही लगा रहा है बेचारा थानों में घुसने लायक साहस ही नहीं जुटा पाया है। सुशासन बाबू ने जबसे अफसरों की ताकत में ईजाफा किया है तबसे तो जनता की प्रतिनिधि खादी भी थाने में घुसने से डरती है तो फिर सुशासन कहाँ से लाएगा हिम्मत? वैसे भी राज की बात तो यह भी है कि बिहार में इन दिनों न तो सुशासन बाबू का राज है और न ही कानून का बल्कि अफसरों का राज है। अफसर जो कहें वही कानून है और वे जो करें वही कानून का पालन है। उदाहरण के लिए अगर किसी थाने में थानेदार किसी महिला के साथ बलात्कार कर रहा है तो यह माना जाना चाहिए कि उसने ऐसा करके बलात्कारियों से उक्त महिला की रक्षा की है।
मित्रों, पहले से ही पुलिस थाने बिहार की गरीब जनता की आहिस्ता-आहिस्ता खाल उतारने में तन्मयता से लगी हुई थी परन्तु नीतीश जी का दिल तो बहुत बड़ा है और हमेशा मोर एंड मोर मांगता रहता है सो जनाब ने जनता को लूटने के अतिरिक्त केंद्र खोलने की न केवल योजना बनाई बल्कि खोल भी डाले। नहीं समझे क्या? जनाब मेरा मतलब महिला थानों से है। महिलाओं की (कदाचित् पत्नी को छोड़कर) विशेष चिंता करनेवाले नीतीश जी ने पूरे बिहार के प्रत्येक जिले में एक-एक महिला थाना खोला है जहाँ महिलाओं से संबंधित मामले दर्ज किए जाएंगे और उनके प्रति होनेवाले अपराधों पर बाजाप्ता अनुसंधान किया जाएगा। इनके खुलने से बिहार की आम महिलाओं को भले ही कोई फायदा नहीं हुआ हो (यकीनन होगा भी नहीं) इन थानों की महिला थानेदारों के घरों में तो छत तोड़कर श्यामा-लक्ष्मी की बरसात हो रही है। ये महिला थानेदार रिश्वत (अथवा रंगदारी) वसूलने में पुरूष-महिला समानता में बिल्कुल भी यकीन नहीं रखती हैं बल्कि इनका तो मानना है कि कम-से-कम इस मामले में तो स्त्रियों को पुरूषों से श्रेष्ठ होना ही चाहिए।
मित्रों, अभी कुछ दिन पहले मेरे दूधवाले ...... सिंह जो हाजीपुर के गंगाब्रिज थाने के सहदुल्लापुर के रहनेवाले हैं ने मुझे दूध देना बंद कर दिया। मुझे बड़ी चिंता हो गई क्योंकि जबसे हम महनार से हाजीपुर आए हैं वही हमें दूध दे रहे हैं। मुझे लगा कि कहीं मर-वर तो नहीं गए बेचारे बीमार तो थे ही। सो एक दिन ढूंढ़ते-ढूंढ़ते उनके घर पहुँचा तब पता चला कि कुछ दिन पहले भतीजे और उसकी पत्नी से उनकी हल्की-फुल्की हाथापाई हो गई थी और उनका भतीजा सपत्नीक गंगाब्रिज थाने में मुकदमा करने चला गया। गंगाब्रिज थाने ने उसे समझा-बुझाकर लौटा दिया तो उसने जिला महिला थाना में जाकर केस कर दिया। उन्होंने यानि मेरे दूधवाले ने थानेदारनी को पैसे भी दिए हैं परन्तु थानेदारनी फिर भी दो-चार दिन बीचकर दरवाजे पर पुलिस-गाड़ी खड़ा कर देती है और इस प्रकार पूरा परिवार हाड़तोड़ मेहनत करके जो कुछ कमाता है छीन कर ले जाती है, ऊपर से बहुत कर्ज भी हो गया है। उनका भतीजा भी उनकी ही तरह घोर गरीब है और जाहिर है कि उसका हाल भी कोई अहलदा नहीं है। कैसे करूँ-क्या करूँ समझ में नहीं आ रहा। आप कुछ कर सकते हैं तो बताईये। मैंने सुना और सुनते ही मेरी समझ में भी नहीं आया कि मैं उसके लिए क्या करूँ और कैसे करूँ? आपके पास कोई उपाय हो तो बताईये नहीं तो बेचारे पर जब तक मुकदमा है ऐसे ही सपरिवार खटते-कमाते रहेंगे और भरते रहेंगे गोदान के होरी की तरह। समझ में तो मेरी यह भी नहीं आ रहा है कि क्या इसलिए बिहार में सुशासन बाबू ने महिला थानों की स्थापना की है?
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ब्रजकिशोर सिंह
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21.10.12
पगथिया: आक और केक्टस
पगथिया: आक और केक्टस: आक और केक्टस एक जंगल में आक और केक्टस के पौधे पास-पास में लगे हुए थे।केक्टस पर कांटे और सुन्दर फूल लगे थे।केक्टस के पास लगे आक के पौ...
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Anonymous
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19.10.12
पंचरत्न हलुवा
पंचरत्न हलुवा
बादाम
|
50 ग्राम
|
पोस्तदाना
|
50 ग्राम
|
मखाने
|
50 ग्राम
|
सावा
|
50 ग्राम
|
अलसी
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50 ग्राम
|
कसा हुआ नारियल
|
10 ग्राम
|
पिसी इलायची
|
एक टीस्पून
|
घी
|
250 ग्राम
|
चीनी
|
250 ग्राम
|
विधि
·
रात को बादाम और पोस्तदाने
को पानी में भिगो दें।
·
सुबह मखानों को घी में थोड़ा
तल लें और ठंडा होने पर मिक्सी में सूखा पीस लें।
·
अलसी और सावा को भी सूखा पीस
लीजिये।
·
अब बादाम को छील कर और
पोस्तदाने को मिक्सी में अलग अलग पीस लीजिये ।
·
बादाम, पोस्तदाना, मखाने और
सावा को कढ़ाही में घी डाल कर मध्यम आंच पर अलग अलग भूनें जब तक सिकने की खुशबू
नहीं आने लगे।
· अब
कढ़ाही में भुने हुए बादाम, पोस्तदाना, मखाने, सावा और पिसी अलसी और बचा
हुआ घी डाल कर 2-3 मिनट और भूनें। फिर अंदाज से पानी डाल कर हिलायें। 2-3 मिनट बाद
चीनी डाल कर हिलाते रहें, जब पानी नहीं सूख जाये। बस अब आपका पंचरत्न हलुवा तैयार
है। इसे कसे नारियल और इलायची से सुंदर बर्तन में सजायें। यह हलुवा वृत और उपवास
में खाया जा सकता है। यह स्वादिष्ट हलुवा श्रीमती उषा वर्मा ने बनाया है।
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Shri Sitaram Rasoi
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सोनिया ने हमें दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया-ब्रज की दुनिया
मित्रों,हमने ऐसी कभी सपने में भी नहीं सोंचा था कि देश में कभी ऐसी पार्टी की सरकार भी आएगी जो उसे वोट देने और नहीं देनेवाले राज्यों के बीच इस कदर भेदभाव रखेगी। लेकिन वो कहते हैं न कि तेरे मन कछु और है कर्ता के कछु और। कभी-कभी आपका सोंचा हुआ नहीं भी होता है। इटली की बेटी और इंडिया की मदर सोनिया गांधी ने एक झटके में यह घोषणा करके कि कांग्रेस शासित राज्यों में रहनेवालों को साल में सिर्फ 9 सिलेंडर और नहीं रहनेवालों को सिर्फ 6 सिलेंडर दिए जाएंगे हमें दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया। क्या हम गैर कांग्रेसी सरकार वाले राज्य के लोग कम खाते हैं या आगे से कम खाएंगे? क्या उनको भारत के संविधान ने समानता का अधिकार नहीं दिया है? क्या गैर कांग्रेसी सरकारों वाले राज्यों में गरीब नहीं रहते सिर्फ अमीर ही रहते हैं? क्या इन राज्यों में महंगाई का असर नहीं पड़ रहा है? या वे आदमी नहीं जानवर हैं जो किसी तरह भी जी लेंगे?
मित्रों,कल को कोई विधायक या एमपी क्या यह देखकर अपने क्षेत्र के लोगों की मदद करेगा कि उन्होंने उसे वोट दिया था कि नहीं? अगर वह सचमुच ऐसा करता भी है तो क्या वह लोकतंत्र के मौलिक सिद्धांतों के प्रतिकूल नहीं होगा? लोकतंत्र का तो मतलब ही होता है अपने से अलग राय रखनेवालों की राय का भी सम्मान करना। तो क्या सोनिया जी को लोकतंत्र का मौलिक ज्ञान भी नहीं है? परन्तु ऐसा कैसे संभव है वह तो विदेश में ही जन्मी और पढ़ी है? या वे उन राज्यों के निवासियों को दंडित करना चाहती हैं जिन्होंने उनकी महाभ्रष्ट पार्टी को पहली बार में समझ लिया और वोट नहीं दिया। पूरे देश की जनता पहले से ही बेतहाशा महंगाई से परेशान है। आज जीना काफी कठिन और मरना काफी आसान हो गया है। जनसाधारण की थाली से बारी-बारी से दाल-दूध-सब्जी गायब हो चुकी है और अब उसके रसोईघर से गैस-सिलेंडर को भी गायब किया जा रहा है? सरकार कहती है कि 2 महीने में 1 सिलेंडर खर्च करो। कैसे हो सकेगा ऐसा? ऐसा हो पाना तो तभी संभव है जब हम महीने में 15 दिन तक उपवास रखें या फिर एक महीना बीच करके चांद्रयण व्रत रखें। भैया अपनी तो आप जानिए हमसे तो व्रत-उपवास कभी हुआ नहीं। कभी जन्माष्टमी के दिन उपवास रखा भी तो दोपहर होते-होते जान निकलने लगी और भोजन कर लिया। हाँ,इतना जरूर हो सकता है कि हम अपने बजट का पुनर्निधारण करें और खाद्य-सामग्री की मात्रा कम और भी कम कर दें जिससे सिलेंडर पर होनेवाले अतिरिक्त खर्च की यथासंभव भरपाई हो सके। गुणवत्ता से समझौता करने की हमें तो आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि वह तो हम पहले ही कर चुके हैं।
मित्रों,हालाँकि हमें इस कारण से उन लोगों से थोड़ा ज्यादा कष्ट दिया जा रहा है जो कांग्रेसशासित राज्यों के निवासी हैं परन्तु हमें इस बात के लिए कोई खेद बिल्कुल भी नहीं है कि हमने पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को वोट नहीं दिया था। बल्कि हमें खुद पर और पूरे बिहार की जनता पर गर्व है कि हम उन राज्यों में से एक हैं जहाँ के निवासियों ने सबसे पहले कांग्रेस के देशबेचवा (देश को बेचनेवाला) और देशखौका (देश को खानेवाला) चरित्र को समझ लिया था। हम यह गारंटी भी अभी से देते हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बिहार से एक भी सीट नहीं मिलनेवाली है। लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार को अभी से ही दूसरे किसी राज्य में ठिकाना ढूंढ़ लेना चाहिए। साथ ही मैं अन्य राज्यों के लोगों से भी निवेदन करता हूँ कि अभी से ही कांग्रेस को हमेशा के लिए उखाड़ फेंकने का मन बना लीजिए नहीं तो एक बार और अगर यह डकैत पार्टी सत्ता में आ गई तो हमारे साथ-साथ आप भी सिलेंडर तो क्या थाली तक खरीदने के लायक भी नहीं रह जाएंगे।
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ब्रजकिशोर सिंह
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Labels: सोनिया ने हमें दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया-ब्रज की दुनिया
पवार के मामले में चुप्पी क्यों साधे हैं दिग्गज!
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Suraj Singh Solanki
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18.10.12
राम शिव मूर्ति यादव को 'साहित्य-मंडल', श्रीनाथद्वारा द्वारा 'हिंदी भाषा-भूषण' की मानद उपाधि
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Unknown
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Labels: राम शिव मूर्ति यादव, शब्द-साहित्य, सम्मान-उपलब्धि
सुर्खियों के लिए केजरीवाल की जल्दबाजी
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Unknown
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तुम सब जगह हो, मलाला!
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Suraj Singh Solanki
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विकास किसका – कचरे का
कृपया अपनी प्रतिक्रिया हमें जरुर दें..
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"MURKHA --- RAAJ"
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खाप – वोटतंत्र का श्राप
कृपया अपनी प्रतिक्रिया हमें जरुर दें..
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"MURKHA --- RAAJ"
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