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15.5.09

Loksangharsha: यहि देस कै भैया का होई

आओ हम सब मिलिकै रोई । यहि देस कै भैया का होई॥

खादी खाकी मौसेरे भाई,काटे मनइन कै गटई ।
आपन-आपन धरम छोडि ,उई करत है दुनो चोरकटई॥

यहि देस कै भैया का होई ॥ आओ हम....

तुम
देखो जाई कचेहरी मा,सब रोवा-रोवा नोच लेई।
अर्दली ,वकील और पेशकार ,मिली खून चूस जस जोंक लेई ॥
यहि देस कै भइया का होई ॥ आओ हम....

राम अंधेरे जन-प्रिय नेता ,काटि चुके दस साल जेल है।
और लड़े इलेक्शन जेलै से,मुल अब तो उई मंत्री जेल है॥
यहि देस कै भइया का होई ॥ आओ हम....

बासी रोटी टूका-टूका ,घिसुआ कै लरिके बाँटी रहे ।
जनता के सेवक नेताजी ,मुर्गा बिरयानी काटि रहे ॥
यहि देस कै भइया का होई ॥ आओ हम....

नेता जी के घर भरी पड़ी , काजू बादामन की बोरी ।
मुल मूंगफली का तरस रहे,मजदूरन कै छोरा -छोरी ॥
यहि देस कै भइया का होई ॥ आओ हम....

मोहम्मद जमील शास्त्री
प्रवक्ता (हिन्दी)

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