जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में गुरुवार को हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता का योगदान विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुंदरलाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 30 मई 1826 में उदंत मार्तंड ने हिंदी पत्रकारिता की ऐसी ज्योति जलाई जो स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम चरण में ज्वाला बनकर फूटी। उन्होंने कहा हमनें स्वयं अपने दौर में दिनमान, धर्मयुग, साप्ताहिक हिंदुस्तान जैसी पत्रिकाओं से ज्ञान अर्जित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता सेवा भाव से होना चाहिए इसका दुरुपयोग घिनौना अपराध है। आज हमें इस बात पर चिन्तन करना चाहिए कि हिंदी पत्रकारिता सही दिशा में गतिमान रहे।
30.5.19
राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की अहम् भूमिका
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में गुरुवार को हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता का योगदान विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुंदरलाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 30 मई 1826 में उदंत मार्तंड ने हिंदी पत्रकारिता की ऐसी ज्योति जलाई जो स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम चरण में ज्वाला बनकर फूटी। उन्होंने कहा हमनें स्वयं अपने दौर में दिनमान, धर्मयुग, साप्ताहिक हिंदुस्तान जैसी पत्रिकाओं से ज्ञान अर्जित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता सेवा भाव से होना चाहिए इसका दुरुपयोग घिनौना अपराध है। आज हमें इस बात पर चिन्तन करना चाहिए कि हिंदी पत्रकारिता सही दिशा में गतिमान रहे।
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ब्रांड मोदी ने विपक्ष को घुटने पर बिठाया
मोदी है तो मुमकिन है। आएगा तो मोदी ही। और फिर मोदी ने जनमत के हथियार से विपक्ष के वोटों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी, वह भी उनके गढ़ों में घुसकर। जीत के बाद मोदी का पहला जो ट्वीट आया, उसमें उन्होंने कहा कि सबका साथ+सबका विकास+सबका विश्वास= विजयी भारत। मोदी अपनी चुनावी सभाओं और रैलियों में लगातार कहते रहे कि 2019 का आम चुनाव देश की जनता लड़ रही है। इसी बात पर उनका ट्वीट मोहर लगा रहा है। 2019 का चुनाव मोदी चुनाव रहा।
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कुत्ता काटे तो मनपा दे पीड़ित को मुवावजा!
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दलित राजनीति को डॉ. आंबेडकर से सीखना चाहिए
डॉ. आंबेडकर दलित राजनीति के जनक माने जाते हैं क्योंकि उन्होंने ही सब से पहले दलितों के लिए राजनैतिक अधिकारों की लडाई लड़ी थी. उन्होंने ही भारत के भावी संविधान के निर्माण के सम्बन्ध में लन्दन में 1930-32 में हुए गोलमेज़ सम्मलेन में दलितों को एक अलग अल्पसंख्यक समूह के रूप में मान्यता दिलाई थी और अन्य अल्पसंख्यक मुस्लिम, सिख, ईसाई की तरह अलग अधिकार दिए जाने की मांग को स्वीकार करवाया था. 1932 में जब “कम्युनल अवार्ड” के अंतर्गत दलितों को भी अन्य अल्पसंख्यकों की तरह अलग मताधिकार मिला तो गाँधी जी ने उस के विरोध में यह कहते हुए कि इस से हिन्दू समाज टूट जायेगा, आमरण अनशन की धमकी दे डाली जब कि उन्हें अन्य अल्पसंख्यकों को यह अधिकार दिए जाने में कोई आपत्ति नहीं थी. अंत में अनुचित दबाव में मजबूर होकर डॉ. आंबेडकर को गांधी जी की जान बचाने के लिए “पूना पैकट” करना पड़ा और दलितों की राजनैतिक स्वतंत्रता के अधिकार की बलि देनी पड़ी तथा संयुक्त चुनाव क्षेत्र और आरक्षित सीटें स्वीकार करनी पड़ीं.
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29.5.19
हे बाबा राहुल, हे दीदी प्रियंका.... हम कांग्रेसियों की अरज भी सुन लो....
हे बाबा राहुल आप ऐसा कैसे कह सकते हैं। त्यागपत्र देने का विचार आपके मन में आया भी कैसे। हम सभी कांग्रेसियो का जीवन आपका चरणामृत पी-पी कर पुष्ट हुआ है। आपकी पट्टेचाटी करने मात्र से हमारे शरीर में मिनरल और विटामिन की कमी का अहसास नही होता , इससे हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। हे राजमाता सोनिया जी अपने पुत्र को समझाईये। सत्ता तो आती जाती रहती है मगर इससे आपके राजपरिवार के दर्जे पर कभी असर पड़ सकता है क्या।
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पुण्यतिथि पर विशेष : किसानों के सबसे बड़े चौधरी थे चरण सिंह
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लघुकथा : डर
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लघुकथा : मृत्यु दंड
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लघुकथा : वैध बूचड़खाना
सड़क पर एक लड़के को रोटी हाथ में लेकर आते देख अलग-अलग तरफ खड़ीं वे दोनों उसकी तरफ भागीं। दोनों ही समझ रही थीं कि भोजन उनके लिए आया है। कम उम्र का वह लड़का उन्हें भागते हुए आते देख घबरा गया और रोटी उन दोनों में से गाय की तरफ फैंक कर लौट गया। दूसरी तरफ से भागती आ रही भैंस तीव्र स्वर में रंभाई, “अकेले मत खाना इसमें मेरा भी हिस्सा है।”
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लघुकथा : अदृश्य जीत
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लघुकथा : बहुरूपिया
उस नामी प्रदर्शनी के बाहर एक बड़ी चमचमाती आधुनिक कार रुकी। चालक बाहर निकला और पीछे का दरवाज़ा खोला, अंदर से एक सूटधारी आदमी उतरा। वहीँ कुछ दूर एक भिखारी बैठा हुआ था, वह आदमी उस भिखारी के पास गया और जेब से नोटों का एक पुलिंदा निकाल कर बिना गिने उसमें से कुछ नोट भिखारी की कटोरी में डाल दिए। भिखारी सहित कई व्यक्ति उसकी दरियादिली देख कर चौंक गए।
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लघुकथा : जानवरीयत
वृद्धाश्रम के दरवाज़े से बाहर निकलते ही उसे किसी कमी का अहसास हुआ, उसने दोनों हाथों से अपने चेहरे को टटोला और फिर पीछे पलट कर खोजी आँखों से वृद्धाश्रम के अंदर पड़ताल करने लगा। उसकी यह दशा देख उसकी पत्नी ने माथे पर लकीरें डालते हुए पूछा, "क्या हुआ?"
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28.5.19
विपक्ष क्यों हारा? मोदी क्यों जीते?
विपक्ष के किसी नेता को इतनी बुरी हार का अंदाजा नहीं था। सभी को लगता था कि मोदी आर्थिक मोर्चे पर और रोजगार के मामले में जिस तरह जन आंकाक्षाओं पर खरे नहीं उतरे, तो आम जनता में अंदर ही अंदर एक आक्रोश पनप रहा है, जो विपक्ष के फायदे में जाऐगा। मोदी के आलोचक राजनैतिक विश्लेषक मानते थे कि मोदी की 170 से ज्यादा सीटें नहीं आऐंगी। हालांकि वे ये भी कहते थे कि मोदी लहर, जो ऊपर से दिखाई दे रही है, अगर वह वास्तविक है, तो मोदी 300 से ज्यादा सीटें ले जाऐंगे।
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अमर उजाला के जिला प्रभारी ने दलित पत्रकारों की यूनियन बनाने की शुरुआत की
यूपी के एक जिले में अमर उजाला के जिला प्रभारी दलित समुदाय के हैं. जिले में अपने पैर जमाने के बाद इन महोदय ने पिछले दिनों विभिन्न संस्थानों के दलित पत्रकारों के साथ गोपनीय मीटिंग की. सभी को अहसास कराया कि हम सब एक हैं और सवर्ण पत्रकारों से डरने की जरूरत नहीं है.
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22.5.19
दिल के बड़े गरीब हैं न्यूज़ चैनल के मालिकान, खा जाते हैं स्ट्रिंगर के हक का पैसा
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चिरकुट मैनेजमेंट खा जाता है पत्रकारों के खून-पसीने का वेतन!
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मामूली सिरदर्द को न करें नजरअंदाज
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वरिष्ठ पत्रकार रतन अग्रवाल की पुत्री ने जिले में लाया 7वाँ स्थान
Yudhishthir Mahato
सिन्दरी । मैट्रिक परीक्षा 2019 में एक के बाद जिले के छात्राओं की मेहनत सामने आ रही है। समाज में बेटियां साबित कर रही हैं कि वे भी बेटों से कम नहीं हैं। जो बेटियों को पढ़ाना नहीं चाहते हैं, उनके लिए ऐसी खबरें प्रेरणादायक हैं। आपको बता दें कि सिन्दरी के वरिष्ठ पत्रकार रतन कुमार अग्रवाल की द्वितीय सुपुत्री श्रेया अग्रवाल ने सिन्दरी में प्रथम स्थान व जिला में 9वाँ स्थान प्राप्त कर सिन्दरी का नाम रोशन किया है।
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चुनाव आयोग की नीयत में खोट!
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सावधान! छतीसगढ़ और उत्तराखंड में ब्लैकमेलर गैंग ‘तहलका इंडिया न्यूज़’ सक्रिय है!
चोर चोर ही रहता है चाहे कोई भी लबादा पहन ले। कुछ ऐसा ही हाल अनुज अग्रवाल नाम के इस ब्लैक मेलर से जर्नलिस्ट बने और ‘तहलका इंडिया न्यूज़’ नाम का फ़र्ज़ी चैनल चलाने वाले इस शातिर क़िस्म के आदतन अपराधी का। नाम तहलका तो हैरान मत हॉ ये तेजपाल वाला नहीं है बल्कि फ़र्ज़ी और नक़ली है। जिसका लोगों भी इसने चुरा लिया और साथ ही टाइम्ज़ के ’T’ का पेटरन भी पर इस बेशर्म को अभी तक किसी ने नोटिस नहीं दिया। ये आजकल दोनो स्टेट के चक्कर लगा रहा है ताकि अपने वसूली के धंधे को आगे बड़ा सके।
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दैनिक जनवाणी: गजब का प्रसार, मेरठ के रोहटा इलाके में सिर्फ तीन प्रतियां बिकती हैं
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Was Keeping Space Blank by The Telegraph Justified?
We are inviting the opinion/ suggestion of all journalists on an issue related to the profession of journalism so that the matter can be sent for the consideration of the Press Council of India to decide the limit of the freedom of speech and expression as enshrined in the Constitution of India although the Council should have taken up this issue suo muto. The background of this letter is that on 18th May, the Telegraph, an important newspaper from Calcutta, kept a few columns space blank on the top of the first page saying that it will be filled up when the Prime Minister speaks anything in the Press Conference.
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ऐसे विपक्ष से सत्ता परिवर्तन की बात सोचना बेमानी
जो एग्जिट पोल के झूठे होने की उम्मीद लगाए बैठेे हैं। वे जमीनी हकीकत को समझें। विपक्ष के कई नेता भी मोदी और अमित शाह के डर से एक तरह से भाजपा का ही साथ दे रहे थे। मुलायम सिंह यादव का संसद में विपक्ष के हारने की बात कहते हुए मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने की कामना करने को क्या कहा जाएगा। 2013 में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले का चुनाव में गर्माना और एग्जिट पोल भाजपा के पक्ष में आते ही उन्हें क्लीन चिट मिल जाने को क्या कहोगे।
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21.5.19
सैकड़ों करोड़ की संपत्ति जुटाने के आरोप से मुलायम और अखिलेश को सीबीआई ने 12 साल बाद दी क्लीनचिट
आय से अधिक संपत्ति मामले में सपा संस्थापक और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव को राहत मिली है। सीबीआई ने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को क्लीनचिट दे दी है। जांच एजेंसी ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर इसकी जानकारी दी। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि उसने 7 अगस्त 2013 को मामले की जांच बंद कर दी थी। उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे पिता-पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज कराया जा सके।
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व्यंग्य : पत्रकारिता करते-करते हम इतने कमजोर हो जाएंगे, यह पहली बार एहसास हुआ...
हाँ! तो मैं सोच रहा था कि कोई "स्टार्टअप इंडिया " के अंतर्गत नया करोबार कर लिया जाए। पत्रकारिता करते-करते हम इतने कमजोर हो जाएंगे यह पहली बार एहसास हुआ। दिमाग जिस तेजी से सड़को पर समाचार चुनने में, लिखने में काम कर रहा था वह रोजगार खोलने के नाम पर पूरा रूह ही कांपा दिया। दिमाग के परचे-परचे उखड़-उखड़ कर हाथ में आने लगे।
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14.5.19
माया को पीएम बनाने वाले मुद्दे पर अखिलेश ने मोदी के कारण लिया यूटर्न!
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जबर्दस्त यूटर्न लेकर अब यूपी से ही नया पीएम आयेगा की जगह कहने लगे हैं कि बसपा सुप्रीमों मायावती को प्रधानमंत्री बनता देख मुझे खुशी होगी। पांच चरणों के चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद की पंसद के लिए अखिलेश की जुबान पर अगर खुलकर बसपा सुप्रीमों मायावती का नाम आता है तो यह अप्रत्याशित नहीं, उनकी सियासी मजबूरी है। इसी तरह की मजबूरी अखिलेश 2017 के विधान सभा चुनाव में भी (जब कांगे्रस के साथ उनका गठबंधन हुआ था) दिखा चुके थे, तब उन्होंने कहा था कि वह तो सीएम के लिए हैं जब पीएम का चुनाव होगा तो राहुल गांधी ही इसके हकदार होंगे,लेकिन दो बरस के भीतर ही अखिलेश की पीएम की पसंद मायावती बन गई हैं।
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महल सी चमचमाती मस्जिदें और उजड़ी क़बरों से घरों में क़ैद करवटें बदलता मुस्लमान
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13.5.19
न्यू मीडिया भारत में लोकतंत्र की नई किरण
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11.5.19
चुनाव आयोग को इस चुनाव में अफसरों की शिकायत / ट्रान्सफर की जानकारी नहीं
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संकट में है गौरैया
बचपन से देखता आ रहा हूं मेरी मां गौरेया को आटे की नन्हीं नन्हीं गोलियां बनाकर देती है और एक एक कर गौरैया का झुंड मेरे घर की दालान में इकट्ठा हो जाता था और इन आटे को अपना भोजन बनाता था। मेरी भुआ ने हम भाई बहनों को गौरैया का झूठा पानी ये सोच कर कईं बार पिलाया है कि हम भी इनकी भांति चहचहाते रहे और आबाद रहें। बरसों हम भाई बहनों ने इनके लिए घौंसले बनाए हैं और इनके जमीन पर गिरे अंडों को बिना हाथ लगाए वापस घौसलों में रखा है। घर के आंगन में लगे कांच पर जब ये गौरैया अपनी चोंच मारती तो ऐसा लगता जैसे दो पक्षी आपस में लड रहे हो और मां आकर उस कांच पर कोई पर्दा डाल देती ताकि इसकी चोंच को नुकसान न हो।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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विकास संवाद मीडिया फैलोशिप के लिए चार पत्रकारों का चयन
भोपाल। विकास और जनसरोकारों के मुद्दे पर रिपोर्टिंग और शोध के लिए दी जाने वाली विकास संवाद मीडिया फैलोशिप के तहत चार पत्रकारों का चयन किया गया है। वर्ष 2019 के लिए दैनिक भास्कर भोपाल के हरेकृष्ण दुबोलिया, द वायर ग्वालियर से जुड़े दीपक गोस्वामी, धार की स्वतंत्र पत्रकार एकता शर्मा और भोपाल के स्वतंत्र पत्रकार मनीष चंद्र मिश्र शामिल हैं। फैलो का चयन वरिष्ठ संपादकों की एक चयन समिति ने किया। फैलोशिप के तहत सभी फैलो को 84 हजार रुपए की सम्मान राशि दी जाएगी।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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10.5.19
मांछे तेल तिके मांछ भाजा होबे!
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पूर्वांचल : सियासी बयार अंतिम पड़ाव पर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आखिरी दो चरणों में 12 और 19 मई को पूर्चांचल की 27 सीटों (छठे में 14 और सातवें चरण 13) पर मतदान होना हैं। पूर्वांचल में इन दिनों पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड व अवध के नेताओं की बाढ़ सी आ गई है। किसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी संसदीय सीट पर भेजा गया है तो कोई अखिलेश यादव के चुनाव क्षेत्र आजमगढ़ के ग्रामीण इलाकों की खाक छान रहा है। यूपी ही नहीं, दूसरे प्रदेशों के नेताओं ने भी पूर्वांचल में डेरा डाल दिया है। योगी के प्रभाव वाली गोरखपुर संसदीय सीट पर भी लोगों की नजर लगी है। कांगे्रस ने प्रियंका वाड्रा को पूर्वांचल की जिम्मेदारी सौंपी थी,इस चरण में उनकी सियासी ताकत का अंदाजा भी हो जाएगा। आखिरी दो चरण के चुनावों की 27 सीटों में से 24 सीटों पर भाजपा गठबंधन और तीन सीटों पर सपा काबिज है। सपा ने उप-चुनाव में फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट बीजेपी से हथिया ली थी,जबकि आजमगढ़ से 2014 में मुलायम जीते थे।
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इलैक्ट्रोमैग्रेटिक तरंगों से कैंसर का इलाज
उमेश कुमार सिंह
कई बार अथक प्रयास करने के बाद भी ट्यूमर जैसे रोगों का निवारण नामुमकिन हो जाता है. आज इक्कीसवीं सदी में भी हम ऐसे रोगों का उपचार नहीं खोज पाए हैं. ऐसे रोगों से ग्रस्त मरीज सभी प्राकर के कैंसरों को असाध्य मानकर तब तक डाक्टर के पास नहीं जाते जब तक रोग बहुत बढ़ न जाए. कहीं न कहीं उनके मन में कैंसर के प्रति डर तो होता है लेकिन साथ ही वे अभी तक उपलब्ध कैंसर से लडने वाली सभी उपचारों के दुष्प्रभावों को लेकर भी चिंतित रहते हैं. अब कई अध्ययनों और ट्रायलों से यह साफ हो चुका है कि साइटोट्रोन चिकित्सा की मदद से किसी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और बेहद कम समय मेें कैंसर से छुटकारा पाया जा सकता है. इससे मरीज का डर कम हो जाता है. लुधियाना स्थित सिबिया मेडिकल सेंटर के निदेशक डा. एस.एस. सिबिया का कहना है कि जितनी जल्दी कैंसर का निदान किया जाए और उसका उपचार शुरु कराया जाए, उतनी ही जल्दी कैंसर से छुटकारा पाया जा सकता है. इसके सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करने के लिए इस रोग का निदान होते ही नियमित उपचार आवश्यक है. साइटोट्रोन थैरेपी क्लीनिकली प्रमाणित की हुई एक ऐसी शल्य रहित प्रक्रिया है जिससे कैंसर की बढ़त को रोका जा सकता है और कैंसर के मरीजों की जिंदगी को सुधारा जा सकता है.
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9.5.19
DECENTRALISE CENTRAL GOVT. TO REDUCE DELHI’S AIR POLLUTION & CONGESTION
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1.5.19
मुख्य न्यायाधीश यौन उत्पीडन मामले में पीड़िता बोली- जिस तरह से हो रही सुनवाई, उससे नहीं लगता कि मुझे न्याय मिल पाएगा
जे.पी.सिंह
जिस तरह से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के मामले की जिस तरह से सुनवाई की जा रही है, उससे नहीं लगता कि मुझे न्याय मिल पाएगा।साथ ही मुझे ‘डर’ भी लगता है।मुझे मौखिक तौर पर ये निर्देश दिए गए कि मैं मीडिया के सामने समिति की सुनवाई से संबंधित कोई बात ना रखूं और ना ही इसके बारे में मेरे वकील वृंदा ग्रोवर को कुछ बताऊं।यह संगीन आरोप लगाते हुये यौन उत्पीड़न पीड़ित महिला ने कहा है कि अब वह इस मामले में सुनवाई के लिए आतंरिक समिति के सामने पेश नहीं हो पाएगी, क्योंकि उसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।इसके साथ ही इस मामले मेंनात्कीय मोड़ आ गया है।महिला ने मामले की सुनवाई कर रही जजों की समिति पर सवाल खड़े किए हैं। महिला ने समिति पर यौन उत्पीड़न अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। साथ ही महिला ने अब समिति के सामने पेश नहीं होने का फैसला किया है।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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राफेल पर सुनवाई टालने की मांग खारिज, मोदी और शाह के खिलाफ याचिका पर मांगा जवाब, चुनाव आयोग ने पीएम को दी क्लीन चिट
जे.पी.सिंह
उच्चतम न्यायालय में मंगलवार को तीन हाईप्रोफाइल मामलों की सुनवाई हुई जिसमें राहुल ने उच्चतम न्यायालय के हवाले 'चौकीदार चोर है' कहने के लिए उच्चतम न्यायालय से माफ़ी मांग ली है । केंद्र सरकार द्वारा राफेल पर सुनवाई को करीब 4 हफ्ते के लिए टालने के अनुरोध को अस्वीकृत करते हुये उच्चतम न्यायालय ने कहा कि केंद्र को अपना जवाब शनिवार तक देना होगा। इसके साथ ही न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय की। कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत पर उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है।इस बीच चुनाव आयोग ने पीएम नरेंद्र मोदी को सेना के नाम पर वोट मांगने के आरोपों पर क्लीन चिट दे दिया है। आयोग ने कहा है कि पीएम मोदी ने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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30.4.19
एक मई मजदूर दिवस यानि मजदूरों के सम्मान की सवा सौ साल पुरानी परम्परा
एक मई-मजदूर दिवस पर विशेष... किसी भी देश की तरक्की उस देश के किसानों तथा कामगारों (मजदूर/कारीगर) पर निर्भर होती है। एक मकान को खड़ा करने और सहारा देने के लिये जिस तरह मजबूत “नीव” की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, ठीक वैसे ही किसी समाज,देश,उद्योग,संस्था,व्यवसाय को खड़ा करने के लिये कामगारों (कर्मचारियों) की विशेष भूमिका होती है। मजदूरों की विशेष भूमिका को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष एक मई को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है। मजदूरों के बारे में चार लाईनों में समझना हो तो हम कह सकते हैं-
मेहनत उसकी लाठी है,मजबूत उसकी काठी है,
हर बाधा वो कर देता है दूर, दुनिया उसे कहती है मजदूर।
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बर्खास्त सैनिक तेज बहादुर यादव के बहाने मोदी के राष्ट्रवाद के नारे को भोथरा करेगी सपा
वाराणसी। समाजवादी पार्टी ने वाराणसी से अपना प्रत्याशी बदल दिया है। अब सपा पूर्व में घोषित अपनी प्रत्याशी शालनी यादव की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर को वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से महागठबंधन उम्मीदवार के रूप में उतार रही है। बीएसएफ कांस्टेबल रहे तेजबहादुर को साल 2017 में सैनिकों को परोसे जाने वाले भोजन के बारे में शिकायत करते हुए एक वीडियो ऑनलाइन पोस्ट करने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था, उन्होंने पहले ही कहा था कि वह वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे।
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उप्र लोक सेवा आयोग की भर्तियों में भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच कब कंप्लीट होगी
भारतीय जनता पार्टी ने उ0प्र0 विधान सभा चुनाव, 2012 के दौरान उ0प्र0 लोक सेवा आयोग की भर्तियों की जांच कराकर प्रतियोगियों को न्याय दिलाने के मुद््दे को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपनी चुनावी सभाओं में इस मुद््दे को उठाया था। श्री योगी आदित्यनाथ ने पांच साल की आयोग की भर्तियों की सी0बी0आई0 जांच के आदेश दिये जिसके बाद सी0बी0आई0 ने आयोग की अपर निजी सचिव (उ0प्र0 सचिवालय) परीक्षा-2010 में भ्रष्टाचार/अनियमिततायें बरतने की दिसम्बर, 2017 में लिखित पुष्टि की और काफी विलम्ब से जारी जांच के नोटीफिकेशन के उपरान्त सी0बी0आई0 मुख्यालय, नई दिल्ली में पी0ई0 दर्ज की है, लेकिन अभी तक अंतिम कार्यवाही नहीं हुई है।
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मजदूरों का शोषण मानवता का उपहास
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लोकतंत्र में चुनाव उत्सव है जंग नहीं
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मज़दूर दिवस पर विशेष : न घर है न ठिकाना, बस चलते जाना है....
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28.4.19
शार्प रिपोर्टर ने शुरू किया अपना आनलाईन वर्जन
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पांचवे चरण की 14 सीटों का पोस्टमार्टम : अवध की जमीं से बुंदेलों की धरती तक संघर्ष गाथा
उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव का पांचवां चरण राज्य की राजनीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। इस चरण में सियासत का रंग लखनऊ और उसके आसपास के जिलों में सुर्ख होते दिखेगा। पाचवां चरण आते-आते राज्य को लू के थपेड़ों ने अपने आगोश में समेट लिया है। दिन में सड़के विरान होने लगी हैं। सूरज के ढलने के बाद यह विरानगी टूटती है। 06 मई को पांचवें चरण का मतदान होना है और इसी दिन से पवित्र रमजान के महीने की भी शुरूआत हो जाएगी। हो सकता है गरमी और रमजान के चलते मतदान का प्रतिशत थोड़ा कम रहे, इसी को ध्यान में रखते हुए मतदान कार्य से जुड़े और मतदान को बढ़ावा देने वाली संस्थाएं और जागरूक नागरिकों ने भी अपनी मुहिम तेज कर दी है ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान करने के लिए पोलिंग बूथ पर पहुंचे।
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अब संभव है हृदय रोगों का बिना सर्जरी इलाज
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27.4.19
प्रियंका के वाराणसी से न लड़ने से बुआ-बबुआ को सबसे ज्यादा खुशी
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का जोश हाई है। वाराणसी में जिस तरह से विपक्ष और खासकर अपने आप को राष्ट्रीय पार्टी कहने वाली कांगे्रस ने हथियार डाले उससे बीजेपी को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली है। कांगे्रस को इसका बढ़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है तो उधर, प्रियंका का वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ना मायावती और अखिलेश गठबंधन के लिए राहत भरी खबर रही। प्रियंका अगर मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ती तो भले वह वाराणसी से चुनाव हार जाती, लेकिन पूर्वांचल की अन्य कई लोकसभा सीटों के कांगे्रस प्रत्याशियों को इसका जबर्दस्त फायदा मिलता,जिससे पूर्वांचल लोकसभा चुनाव प्रभारी होने के नाते प्रियंका का कद काफी बढ़ जाता। पूर्वांचल में प्रियंका के प्रभार वाली करीब चार दर्जन लोकसभा सीटें हैं, जिसमें एक आजमगढ़ की लोकसभा सीट को छोड़कर 2014 में भाजपा का सभी सीटों पर कब्जा रहा था। आजमगढ़ से सपा नेता मुलायम सिंह यादव चुनाव जीते थे। इस बार आजमगढ़ से अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे है।
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बहनजी को सीबीआई के जरिए फिर घेरने की तैयारी
सात सरकारी चीनी मिलों के बिक्री घोटाले में 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर, मायावती सरकार को दौरान बेचीं गयी 21 चीनी मिलों का मामला, सरकारी खजाने को 1179 करोड़ रुपए का नुकसान
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yashwant
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25.4.19
यूपी चौथा चरण : भाजपा के सामने साख की चुनौती, देखें किस सीट पर किस जाति के कितने वोटर
यूपी में चौथे चरण में 29 अपै्रल को 13 सीटों पर चुनावी जंग होनी है। 2014 में भाजपा को 13 में से 12 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। एक सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी। यहां से डिम्पल यादव चुनाव जीती थीं। भाजपा के सामने अपनी 12 सीटें बरकरार रखने की चुनौती है तो सपा-बसपा गठबंधन के सामने जातीय समीकरणों के बूते पुरानी जमीन भाजपा से छीनने का लक्ष्य है। कांग्रेस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर उन सीटों पर खास निगाह लगाए है जो उसने 2009 में जीती थीं। चौथे चरण में जिन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। उसमें बीजेपी सभी 13 सीटो पर तो सपा-बसपा क्रमशः 07 और 06 सीटों पर तथा कांगे्रस 13 सीटों पर मैदान में है। कांगे्रस ने डिम्पल के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा है। इस चरण में डिम्पल यादव,राम शंकर कठेरिया,सत्यदेव पचैरी,श्री प्रकाश जायसवाल,देवेन्द्र सिंह भोले,आदि दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है।
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yashwant
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बाबा भोलेनाथ की नगरी दो दिनों तक रहेगी मोदीमय
देश की सबसे अधिक चर्चित लोकसभा सीटों में से एक वाराणासी संसदीय सीट पर लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। यहां सांतवें और अंतिम चरण में मतदान होना है। यहां से 26 अ्रपै्रल को नामांकन के लिए भाजपा उम्मीदवार और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक दिन पूर्व 25 अ्रपै्रल को वाराणसी पधार रहे हैं। पीएम मोदी 25 अप्रैल को रोड शो और 26 अप्रैल को नामांकन करेंगे। दो दिनों तक यहां सियासत उफान पर होगी। यह कहना गलत नहीं होगा की बाबा भोलेनाथ की नगरी वाराणसी इन दो दिनों में मोदीमय नजर आएगी।
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पत्रकारों की किल्लत हो गई है क्या जो 'चौकीदार' का इंटरव्यू 'खिलाड़ी' ले रहा!
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हेमंत करकरे उत्पीड़न और प्रताड़ना का अपराधी था!
हेमंत करकरे को लेकर कोई एक नहीं बल्कि अनेकानेक प्रश्न खडे थे, पर अधिकतर लोग इस प्रश्न पर बात ही नहीं करना चाहते थे? हेमंत करकरे को लेकर उठे प्रश्नों पर आखिर लोग बात क्यों नहीं करना चाहते थे? पहला कारण यह था कि कांग्रेस हर हाल में हिन्दू -भगवा आतंकवाद को प्रत्यारोपित करना चाहती थी, इसके लिए कांग्रेस हर वह हथकंडा अपनाने के लिए तैयार बैठी थी जो हथकंडा अपना सकती थी, हथकंडे के तौर पर कांग्रेस के पास तीस्ता सीतलवाड, हर्ष मंदर, जान दयाल और शबनम हाशमी जैसे तमाम चेहरे थे जो भारत को एक खलनायक के तौर पर प्रस्तुत करते थे और हिन्दुओं को आतंकवादी, खतरनाक तथा अमानवीय मानुष साबित करने के लिए तुले रहते थे, इसी सोच से प्रस्तावित दंगा रोधी विधेयक सामने आया था, जिसमें प्रावधान यह था कि कहीं भी दंगा होगा तो बेगुनाह साबित करने की जिम्मेदारी हिन्दुओं को ही होगी, मुस्लिम पर आरोप होने पर भी उसे बेगुनाही के सबूत नहीं जुटाने होंगे, वह प्रस्तावित विधेयक सोनिया गांधाी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने लायी थी जिसके सदस्य तीस्ता सीतलवाल सहित अन्य तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोग शामिल थे।
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किसी ईसाई ने नमाज़ पढ़ रहे लोगों को मारा तो ये दुनिया में कहीं भी क्रिश्चियन मार के बदला लेंगे!
Tabish Siddiqui : ISIS ने कहा है कि न्यूज़ीलैंड में मारे गए लोगों का बदला उन्होंने श्रीलंका में लिया है.. मतलब न्यूज़ीलैण्ड में किसी ईसाई ने मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे लोगों को मारा था तो ये दुनिया मे कहीं भी क्रिस्चियन मार के वो उसका बदला ले लेंगे. अब सवाल ये नहीं है कि ये सही है या ग़लत.. सवाल ये है कि आपको ये पसंद आया कि नहीँ?
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yashwant
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24.4.19
राज ठाकरे ने तो बीजेपी आईटी सेल की बैंड बजा दी!
मोदी-शाह की नाक में दम कर दिया है राज ठाकरे ने। इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू हैं राज ठाकरे. उनकी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ रहा है लेकिन राज ठाकरे पूरे महाराष्ट्र में ताबड़ तोड़ रैलियां कर रहे हैं. अपने हर भाषण में वो सिर्फ मोदी और अमित शाह पर तीखे हमले करते हैं.
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यशवंत सिंह yashwant singh
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दैनिक भास्कर प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ जमकर खबरें छाप रहा है
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यशवंत सिंह yashwant singh
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क्या वाकई फंस गए हैं देश के मुख्य न्यायाधीश?
जस्टिस रंजन गोगोई पर गम्भीर आरोप, यौन उत्पीड़न मामले में जस्टिस बोबडे और दो अन्य जज करेंगे जाँच
जे.पी.सिंह
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीडन के आरोपों को जिस तरह शनिवार को एक विशेष पीठ बनाकर स्वयं को क्लीन चिट देने का प्रयास किया उसकी विधिक और न्यायिक क्षेत्रों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई और उच्चतम न्यायालय द्वारा स्वयं बनाई गयी प्रक्रिया के तहत जाँच की मांग बहुत बड़े पैमाने पर उठी।अंततः मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की आंतरिक जांच के लिए मंगलवार को उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए बोबडे को नियुक्त किया गया । न्यायमूर्ति बोबडे ने वह मुख्य न्यायाधीश के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं।न्यायमूर्ति बोबडे ने उच्चतम न्यायालय के दो न्यायाधीशों न्यायमूर्ति एनवी रमन और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी को शामिल कर एक समिति गठित की है। न्यायमूर्ति रमन वरिष्ठता में न्यायमूर्ति बोबडे के बाद हैं और न्यायमूर्ति बनर्जी को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि वह महिला न्यायाधीश हैं।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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गुजरात दंगों की गैंगरेप पीड़िता बिलकिस बानो की कहानी इस लोकतंत्र का सिर शर्म से झुकाती रहेगी!
गुजरात दंगों में गैंगरेप पीड़िता को 50 लाख का मुआवजा और आवास देने के सुप्रीम निर्देश
जे.पी.सिंह
"आप खुद को भाग्यशाली समझिए कि हम अपने आदेश में सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कह रहे हैं।" यह कहते हुये उच्चतम न्यायालय ने 2002 गुजरात दंगा मामले में गैंगरेप सर्वाइवल बिलकिस बानो को 50 लाख रुपए का हर्जाना देने का निर्देश गुजरात सरकार को दिया है। उच्चतम न्यायालय ने गुजरात सरकार को ये भी निर्देश दिया है कि उन्हें नियमों के मुताबिक नौकरी और रहने की सुविधा दी जाए। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने 29 मार्च को बिलकिस बानो मामले में गलत जांच करने वाले 6 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने को कहा था। अपने फैसले में कोर्ट ने ये कहा था कि उन्हें सेवा में नहीं रखा जा सकता।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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जयपुर की सेंट्रल जेल में ये क्या चल रहा है!
जयपुर केंद्रीय कारागारः कैद तनहाई और बर्बर पिटाई की दास्तान, रिहाई मंच व अवमेला के संयुक्त प्रनिधिमंडल की दौरा रिपोर्ट.... रिहाई मंच और अवमेला के तीन सदस्यीय संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर केंद्रीय कारागार, जयपुर में जयपुर ब्लास्ट समेत आतंकवाद के नाम पर कैद विचाराधीन कैदियों की 30 अप्रैल 2019 को जेल के अंदर बर्बर पिटाई की घटना के तथ्यों को जानने लिए तीन दिवसीय (6, 7, 8 अप्रैल) दौरा किया। प्रतिधिमंडल जयपुर स्थित मानवाधिकार/सामाजिक संगठनों, जेल अधीक्षक सेंट्रल कारागार जयपुर और पीड़ित विचाराधीन कैदियों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में मसीहुद्दीन संजरी, मो0 आसिम और शादाब अहमद शामिल थे।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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22.4.19
संचार में धैर्य और समन्वय से कार्य करना जरूरी: नरेश कुमार
भोपाल : क्राइसिस मैनेजमेंट के समय प्रबंधन, प्लानिंग, रिसर्च ,कारपोरेट संचार, प्रबंधन टीम पर भरोसा और समन्वय के साथ कार्य करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। किसी भी संस्थान की संचार प्रबंधन की टीम की योग्यता और क्षमता, संस्थान को संकट से उबार लेती है। जनसंपर्क विभाग की काबलियत उस समय बहुत मदद करती है, जबकि संकट से निपटने के लिए समय बहुत ही कम होता है। जनसंपर्क अधिकारी को सदैव सतर्क रहना चाहिए।
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सहारा का संकट : जब कार्यकर्ता और जमाकर्ता ही नहीं बचेगा तो क्या कर लोगे
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गायब कर दिया 'धूलकोट चौराहा' नाम
इतिहास के पन्नों में दर्ज 'आहड़ सभ्यता' के अवशेष उदयपुर के आयड़ क्षेत्र में महासतियां के पास है, जो 'मिट्टी' में दबे होकर संरक्षित है। इन मिट्टी के टीलों को 'धूलकोट' के नाम से जाना जाता है। 80 के दशक में जब धूलकोट के पीछे आबादी बसी और आवासीय कॉलोनियां बनी तो यहां चार रास्ते निकले, जिनमें से एक ठोकर, दूसरा आयड़, तीसरा पहाड़ा और चौथा बोहरा गणेश मंदिर। इससे इस चौराहा का नाम 'धूलकोट चौराहा' रखा गया और तभी से यह 'धूलकोट चौराहा' के रूप में ही जाना जाता रहा है।
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कई संघियों की सेलेक्टिव शर्म जागी है!
कई संघियों की सेलेक्टिव शर्म जागी है, उन्हें संविधानवाद याद आया है और वे आईपीएस करकरे पर प्रज्ञा की बकवास को इस मायने में जस्टिफाई करना चाहते हैं कि उसके साथ हिरासत में अच्छा व्यवहार नहीं हुआ। वे आतंकी प्रज्ञा सिंह की पुलिस हिरासत में हुई यातना का विरोध करना चाहते हैं। हम इस वाली बात का स्वागत करते हैं।
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हेमंत करकरे पर प्रज्ञा का बयान और प्रधानमंत्री द्वारा किया गया उनका बचाव
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श्रीलंका के आतंकी विस्फोटों से जुड़े सवाल
श्रीलंका अपनी शांति और मनोरतमा के लिये नई इबारत लिख ही रहा था कि वहां हुए सिलसिलेवार शक्तिशाली बम विस्फोटों एवं धमाकों केे खौफनाक एवं त्रासद दृश्यों नेे सम्पूर्ण मानवता को लहुलूहान कर दिया, आहत कर दिया और दहला दिया। कैसी उन्मादी आंधी पसरी कि 200 से अधिक लोगों का जीवन ही समाप्त कर दिया। हजारों गंभीर रूप से घायल हो गए तथा करोड़ों रुपये की सम्पत्ति नष्ट हो गई। इस प्रकार यह विस्फोटों की शृंखला, अमानवीय कृत्य अनेक सवाल पैदा कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि कुछ उन्मादी लोगों के उन्माद में न जिन्दगी सुरक्षित है और न ही जीवन-मूल्यों की विरासत। आखिर कब रूकेगा हिंसा, आतंक एवं त्रासदी का यह खूनी खेल। इस तरह के हिंसा, भय, आतंक, अन्याय एवं अमानवीयता के घृणित कर्मों ने यह भी साबित कर दिया कि आदमी के मन में पाप का भय रहा ही नहीं।
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21.4.19
बरेली व आंवला में 5-10% ज़्यादा मुस्लिम वोट बीजेपी को न पड़ा तो सियासत छोड़ दूंगा : डॉ.हुदा
याद है न?
बरेली के भी एक सियासी रहनुमा सूबे में मुस्लिम वोटों पर जीत कर हुक़ूमत में आला वज़ीर बने बैठे थे...सद अफसोस!!!
सुनो मुसलमानों!जोगी नवादा,पनबढिया,रबड़ी टोला, सुभाषनगर...याद है न या ये भी याद दिलायूँ?
जिस वक्त अखिलेश हुक़ूमत ने रबड़ी टोला के इमरान को पुलिस की गोली से शहीद किया,सुभाष नगर बब्बन पुर्वा का इमरान शहीद हुया,जोगी नवादा का जाफरी भाई शहीद हुया तब सर पर कफ़न बांध कर रमज़ाम में जान हतेली पर लेकर जनाज़ों को कंधा कौन दे रहा था?
शहीदों की तदफ़ीन के लिये कफ़न और पटलो का इंतेज़ाम कर्फ्यू में हाथ जोड़-जोड़ कर लोगो से दुकान खुलवाकर कौन कर रहा था? जब मुसलमानों के घरों में चूल्हे नही जल रहे थे तब जान हतेली पर रख कर कर्फ्यू में राहत सामग्री लेकर पूरी बरेली के मोहल्लों मोहल्लों में कौन बाटता घूम रहा था? शराफ़त मियाँ हुज़ूर की खानकाह पर कर्फ्यू के दौरान फसी हामला बहनों को जान की बाज़ी लगाकर उनके घर तक कौन पहुँचा रहा था? जली हुई दुकानों के मुआवज़े और शहीद हुए लड़को के हक़ के लिये हुक़ूमत से अकेला कौन लड़ कर उनके हक़ का मुतालबा कर रहा था? कौन मस्जिदों में नमाज़ क़याम करा रहा था क्योंकि कर्फ्यू की वजह से लोग घरों से नही निकल पा रहे थे?
बरेली की कम से 50 से ज़्यदा मस्जिदों में सेहरी और अफ्तार का इंतेज़ाम कौन करा रहा था? मस्जिदों के इमाम साहब किन हालातो में रोज़े रख रहे थे उनको हौसला देने के लिये पुलिस-प्रशासन के सहयोग से रुट मार्च कौन निकलवा रहा था? बन्द रोज़गार और दुकानें कौन खुलवा रहा था? आश्रित परिवारों के लिये बरेली से लेकर लखनऊ तक मुआवज़े और सरकारी नोकरी के लिए हुक़ूमत से अकेले कौन लड़ रहा था?
सूबे में समाजवादी सरकार थी और जोगी नवादा में पुलिस के ज़ुल्म के ख़िलाफ़ अकेले जान पर खेल कर PAC किसने हटवाई थी? अहमद उल्लाह भाई, इफ्तेकार कुरैशी भाई अगर वाक़ई पंजतन के ग़ुलाम हो तो गवाही देना...ज़रा अल्लाह को हाज़िर नाज़िर जान कर बताओ बरेली के मुसलमानों! इस ख़ादिम ने क्या कोई कसर छोड़ी? जान की बाज़ी लगा दी आपके लिये तब कहाँ थे आपके कांग्रेसी और सामाजवादी नेता?
अरे मुझे गालियां देने से पहले निगाहों का लिहाज़ तो कर लेते...या सब लिहाज़,मोहब्बत,हया भूल गए? मेरे भाई तौसीफ भैया के लिये सऊदी हुक़ूमत से किसने पैरवी की थी? मदरसों को आतंक का अड्डा कहने वाले वसीम रिज़वी पर पूरे सूबे में उसके ख़िलाफ़ सबसे पहले किसने मोर्चा खोल कर FIR कराई थी?
चंद फेसबुक पर मुख़ालफ़त करने वालो सुन लो! जिंतनी आपकी तादाद है उससे लाख गुना ज़्यदा मेरे चाहने वाले और उनकी अज़ीम दुआएं मेरे साथ हैं...लगा लेना जितना ज़ोर लगाना हो!अगर बरेली और आंवला में 2014 के मुकाबले 5-10% ज़्यदा मुस्लिम वोट इस बार बीजेपी को नहीं पड़ा तो सियासत छोड़ दूंगा...
मुझे उम्मीद है मेरे हज़ारों,लाखो चाहने वाले मुझे मेरे मुखलीफो के सामने रुसवा नही होने देंगे...इन्शा अल्लाह!
आप सिर्फ मुझे देखिये बस और ये सोचिए कि बरेली और आंवला दोनों जगह से बीजेपी से आपका ख़ादिम डॉ हुदा लड़ रहा है"...
अरे मेरी कुर्बानियों का कुछ तो लेहाज़ करो मेरे अज़ीज़ों...
"व तो इज़्ज़ो मन्तशाओ व तो ज़िल्लो मन्तशा"...
जय-हिंद
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drhuda
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20.4.19
प्रियंका गांधी के एक बयान ने बीजेपी वालों के दोनों हाथों में लड्डू थमा दिया है
अजय कुमार, लखनऊ
वाराणसी कांग्रेस के लिए बनी दोधारी तलवार... सियासत की डगर बड़ी पथरीली और उबड़-खाबड़ होती है। यहां कदम-कदम पर ठोकर का डर रहता है। हर कदम बहुत संभल कर रखना पड़ता है। जरा सी भी लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है।संभवता इस बात का अहसास कांग्रेस का तरूप का इंका समझी जाने वाली प्रियंका वाड्रा को भी हो गया होगा। अभी प्रियंका को यूपी की राजनीति में कदम रखे दो-ढाई महीना ही हुआ होगा,लेकिन उनकी चमक फीकी पड़ने लगी है। वह भी भाई राहुल गांधी की तरह ही अपना पक्ष जनता के सामने मजबूती से नहीं रख पा रही हैं। शायद इसी लिए प्रियंका जनसभा करने की बजाए रोड शो को अधिक तरजीह दे रही हैं,लेकिन इस हकीकत को अनदेखा नहीं किया जा सकता है कि कोई भी नेता बिना बोले जनता से संवाद स्थापित नहीं कर सकता है, लेकिन मजबूरी यह है कि प्रियंका जैसे ही बोलती हैं भाजपा नेता उनकी बात पकड़ लेते हैं।
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साध्वी प्रज्ञा मुस्लिम होती तो आतंकी होती!
आप सोचिये कि यदि किसी मुस्लिम को जिसपर आतंकी घटना में शामिल होने का केस चल रहा हो उसे कांग्रेस या अन्य कोई दल लोकसभा का प्रत्याशी बना दे तो देश में कथित राष्ट्रवादियों और मीडिया की क्या प्रतिक्रिया होती ? देशभर में भाजपाइयों ने हंगामा खड़ा कर दिया होता और तूफ़ान ला दिया होता | लेकिन राष्ट्रवाद का राग अलापने वाली भाजपा ने अचानक चुनाव में आतंकवाद की आरोपी मालेगांव ब्लास्ट की आतंकी साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से चुनाव में उतारा है, राष्ट्रवादी मौन हैं ? | पीएम मोदी ने भी एक इंटरव्यू में साध्वी से हमदर्दी जताकर अपनी मौन स्वीकृति दे दी है | आतंकी साध्वी प्रज्ञा को भाजपा ने ऐसे समय में टिकट दिया है जब देश में दो चरण का मतदान हो चुका है | तो क्या यह माना जाये कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए आतंक के आरोपी के जरिये ध्रुवीकरण करना चाहती है ?
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18.4.19
डिप्टी कलेक्टर दिवाकर की ये कविता हो रही लोकप्रिय
तो हम तुमसे प्रश्न करेंगे---
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yashwant
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17.4.19
कांग्रेस से आचार्य प्रमोद कृष्णन के आने पर लखनऊ में पूनम सिन्हा के लिए जीत की राह हुई बेहद मुश्किल
भारतीय जनता पार्टी से बगावत करके कांगे्रस के टिकट पर पटना साहिब से और उनकी पत्नी पूनम सिन्हा के गठबंधन प्रत्याशी के रूप में लखनऊ से चुनाव लड़ने की खबर लगभग पक्की हो गई है, लेकिन पूनम सिन्हा के लिए जीत के हालात वैसे नहीं बन पाए हैं जैसे उनके पति और गुजरे जमाने के नायक और खलनायक शत्रुघ्न सिन्हा सोचते थे। बॉलीवुड में शॉटगन के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा ने पटना साहिब में अपना टिकट पक्का होने के बाद लखनऊ में अपनी पत्नी पूनम सिन्हा के लिए सियासी गोटियां बेहद खूबसूरती से बिछाई थी, अगर उनकी गोटी पिटती नहीं तो सिन्हा परिवार में एक नहीं, दो-दो सांसद हो जातें।
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16.4.19
विवादित बयानबाजी आजम का पुराना शगल, एक बार सपा से निकाले जा चुके हैं
उत्तर प्रदेश की सियासत और समाजवादी पार्टी में आजम खान का रूतबा किसी से छिपा नहीं है। वह कभी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खास हुआ करते थे तो अब अखिलेश यादव की ‘नाक के बाल’ बने हुए हैं। अखिलेश ने गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर आजम खान को रामपुर लोकसभा सीट से मैदान में उतारा है।उनके मुकाबले में भाजपा ने गुजरे जमाने की फिल्मी अदाकारा जयाप्रदा को मैदान में उतारा है। आज भले ही जयाप्रदा रामपुर में कमल खिलाने की कोशिश कर रही हों, लेकिन अतीत को भुलाया नहीं जा सकता है। जयाप्रदा यहां से साइकिल पर सवार होकर संसद तक का सफर पूरा कर चुकी हैं।
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यायावर हैं आवारा हैं बंजारे हैं : पंकज सुबीर ने एक यात्री और पर्यटक के तौर पर यह किताब लिखी है
"यायावर हैं आवारा हैं बंजारे हैं", ये किताब हाथ में लेते ही मुझे बहुत भा गई। सुंदर कवर, हल्का वज़न और गोल्डन स्याही से लिखा हुआ लेखक और किताब का नाम। क़िताब के पन्नों और स्याही की लिखावट की ख़ुशबू पाठक पर क्या प्रभाव छोड़ती है, यह हर पुस्तक प्रेमी समझ सकता है। किताब को पढ़ना उस पर लिखे हुए को ही पढ़ना नहीं होता पाठक के लिए। किताब को हाथों में थामना, खोलना उसकी ख़ुशबू में खो जाना एक पूरी प्रक्रिया होती है पढ़ने की। और उस पर किताब इतनी रोचक हो तो कहने ही क्या।
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खजुराहो और कामसूत्र वाले इस देश की 'काम कुंठा'
सतीश सिंह
आज भी भारत में सेक्स को वर्जना की तरह देखा जाता है। जबकि हमारे देश में खजुराहो से लेकर वात्सायन के कामसूत्र जैसी कृतियों में सेक्स के हर पहलू पर रोशनी डाली गई है। स्वस्थ व सुखी जीवन के लिए संयमित सेक्स को उपयोगी बताया गया है। सेक्स का स्थान जीवन में पहला तो नहीं कह सकते हैं। पर इसका स्थान गेहूं के बाद पर गुलाब के साथ जरुर है। सेक्स शरीर की एक जरुरत है और साथ ही इंसान के जीवन चक्र को जारी रखने वाला जरिया भी। आम जीवन में सेक्स को लेकर बहुत सारी भ्रांतियाँ हैं। जानकारी के अभाव में, परिस्थितियों के कारण या फिर मनोविकार के कारण इंसान बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य करके सामाजिक बहिष्कार का पात्र बन जाता है। बलात्कार आज भारत में सबसे ज्वलंत मुद्दा है। बावजूद इसके इस समस्या के तह में जाने का कभी प्रयास नहीं किया गया है।
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'इंडिया टुडे' वाले वाकई आपके बेडरुम में घुसकर 'रात में क्या किया, कैसे किया' की बातें करते हैं?
सेक्स सर्वे आए दिन होने लगा है। तमाम पत्रिकाएं सर्वे कर रही हैं। सेक्स सर्वेयर न जाने किस घर में जाकर किससे ऐसी गहरी बातचीत कर आता है। कब जाता है यह भी एक सवाल है। क्या तब जाता है जब घर में सिर्फ पत्नी हो या तब जाता है जब मियां बीबी दोनों हों। क्या आप ऐसे किसी को घर में आने देंगे जो कहे कि हम फलां पत्रिका की तरफ से सेक्स सर्वे करने आए हैं या फिर वो यह कह कर ड्राइंग रूम में आ जाता होगा कि हम हेल्थ सर्वे करने आए हैं।
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15.4.19
विपक्षी पार्टी को जगह न देकर हिन्दुस्तान अखबार लोकतंत्र की कर रहा हत्या
चुनाव के मौसम में पटना संस्करण के हिंदुस्तान अखबार को देखकर दुख भी हो रहा है और घृणा भी। एक अखबार इस प्रकार कैसे कर सकता है। कैसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह से चैपट कर सकता है, जिनसे अभिव्यक्ति की आजादी दी। लिखने का अधिकार दिया, उसी का गला घोंटने में लगा हुआ है। इसके संपादक शशी शेखर हैं। एक अविवेकपूर्ण निर्णय ने इस अखबार की विश्वसनीयता को पूरी से चैपट कर दिया है, जिसे दोबारा हासिल करने में कितने साल लग जाएंगे पता नहीं। 10 अप्रैल से हिंदुस्तान अखबार को देख रहा हूं।
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समाज को अंधकार से निकालने में पत्रकारों की भूमिका अविस्मरणीय : मधुरेश प्रियदर्शी
समाज के नवनिर्माण में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पत्रकारिता के बदौलत हम समाज को नई दिशा दे सकते हैं। उक्त बातें पत्रकार प्रेस परिषद के प्रदेश अध्यक्ष मधुरेश प्रियदर्शी ने रविवार को मोतिहारी के बैंक रोड स्थित केसरिया गेस्ट हाउस में आयोजित परिषद् की जिला बैठक को मुख्य वक्ता के रुप में संबोधित करते हुए कही। इससे पहले आगत अतिथियों ने बैठक का विधिवत उद्घाटन संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित करके किया।
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14.4.19
सतुआन के वैज्ञानिक महत्व : जय सतुआन, जय भोजपुरी!
आज सउंसे पूर्वांचल में सतुआनी के पर्व मनावल जा रलह बा. आजू के दिन भोजपुरिया लोग खाली सतुआ आ आम के टिकोरा के चटनी खाला. साथे-साथ कच्चा पियाज, हरिहर मरिचा आ आचार भी रहेला. एह त्योहार के मनावे के पीछे के वैज्ञानिक कारण भी बा. इ खाली एगो परंपरे भर नइखे. असल में जब गर्मी बढ़ जाला, आ लू चले लागेला तऽ इंसान के शरीर से पानी लगातार पसीना बन के निकलले लागेला, तऽ इंसान के थकान होखे लागे ला.
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आत्म अनुभूति के लिए ध्यान अनिवार्य है अन्यथा व्यक्ति के हृदय में ईश रस नहीं बहता
दर्पण आश्रम का तीसरा उपनिषद् श्रंखला राम नवमी के मौके पर हुआ सम्पन्न
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विश्व मानचित्र पर जैव विविधता वाला हॉट स्पॉट है भारत : प्रो. डॉ. साईराम भट्ट
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