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14.8.08

हैदराबाद में शायद ही ऐसा दिन होगा जिस दिन हम नहीं रोये हों

भड़ास4मीडिया डाट काम (WWW.BHADAS4MEDIA.COM) से फुर्सत निकालकर भड़ास पर आकर लिखना दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है पर मेरा पहला प्यार तो ये ब्लाग भड़ास ही है। भड़ास4मीडिया उस सौतन की तरह है जो नई आई और छा गई लेकिन ओल्ड इज गोल्ड को कैसा भुला देंगे। तो चलिए, बहुत दिन बाद, दो बातें आप तक पहुंचाता हूं। भड़ास4मीडिया को लेकर मेरे पास रोजाना 50 से 60 मेल आती हैं। इसमें ज्यादातर मेलों में भड़ास4मीडिया जैसा पोर्टल लांच करने के लिए मुझे बधाई दी गई होती है। उसी में से एक मेल आपके सामने रख रहा हूं।

दूसरी मेल एक पत्रकार की दास्तान है। किस तरह उसे प्रताड़ित किया जाता रहा है। मतलब, पत्रकारिता में अब शरीफों का गुजारा नहीं। आपको या तो बदमाश बनना होगा या फिर बदमाशी में शामिल होना होगा।

दोनों पत्रों इस तरह हैं....(पत्र लेखकों के नाम बदल दिए गए हैं ताकि वे जहां काम कर रहे हैं वहां उन्हें कोई दिक्कत न हो)

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यशवंत जी,
भड़ास4मीडिया इतना लोकप्रिय हुआ है कि अंग्रेजीदां लड़कियां भी इस े निहारती रहती है। ऑफिस आने पर सबसे पहला काम होता है भड़ास4मीडिया खोलना। वजह साफ है कि इसकी विषय वस्तु इतनी सटीक और रिपोर्टिंग इतनी सख्त होती है कि बड़े-2 सूरमा कांप उठे हैं।मुझे लगती है इसकी रोजाना हिट्स 20-30 हजार तो जरुर होगी। इधर कुछ मीडियाकर्मी अपनी तारीफ भी सुनने को इच्छुक हो गए हैं या कईयों को लगता है कि उनके काम की तारीफ न होकर सिर्फ उनके सहकर्मी के काम की तारीफ हुई है। कुलमिलाकर कहने का मतलब ये कि इस साईट ने जितनी जल्दी मीडियाकर्मियों के बीच अपनी जगह बनाई है वो वाकई काबिले
तारीफ है। मुझे लगता है कि आनेवाले वक्त में इस साईट पर और भी अभिनव प्रयोग किये जाएंगे और इसको और भी प्रासंगिक बनाया जाएगा।
धन्यवाद सहित
विक्रांत


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yashwant sir

mai copy editor hu. pichle mahine etv chodkar delhi me ek news channel ko join kar liya hai.

sir etv me mere saath bahut bura saluk kiya gaya. mai apne anubhav ko aapke ssath batna chata hu ki kaise juniour ke saath seniour behave karte hai.

sir, hyderabad me sayad hi aaisa din hoga jis din hum nahi roye the. ek loby ke sikhar hum ho gaye kyonki hum shirf apne kam se matlab rakhte the, kisi ki siykayt karna ya sunna mujhe pasand nahi.

sir rojana meri sikayat ki jati thi. manager bhi meri baat nahi sunte the. meri 8 mahine tak night shift laga di gai.office aane ke bad bhi meri 20 dino ki salery absent dikha kar kat di gai.sir mere saath aaisa kiyo kiya gaya yah sawal aaj tak mere kano me gunj raha hai, hame jawab chahiya , kya aake pass hai jawab?

aabhi bhi mere siniours chahte hai ki kisi tarah meri job chli jaye.

aapka

anil