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23.10.08

डा.रूपेश श्रीवास्तव की मौत ..... हत्या या आत्महत्या?

जो जन्मा है वो मरेगा ही लेकिन कैसे मरेगा और कब मरेगा ये भला कौन जानता है,हां पैदा कैसे होगा ये तमाम लोग जानते हैं। एक थे डा.रूपेश श्रीवास्तव,अक्सर कहानियां सुनाते थे। जिनमें से कुछ कहानियां आपकी नजर हैं....
पहली कहानी : - एक आदमी था। वह बहुत विद्वान था। एक दिन वह मर गया।
दूसरी कहानी : - एक आदमी था। वह बहुत बलवान था। एक दिन वह मर गया।
तीसरी कहानी : - एक आदमी था। वह बहुत धनवान था। एक दिन वह मर गया।
इन कहानियों से हट कर एक और कहानी थी जो खुद उनकी आत्मकथा वो सुनाते थे कि एक आदमी था, एक दिन वह मर गया। पिछले कुछ समय से डा.रूपेश श्रीवास्तव इस पन्ने से गायब थे जबकि कुछ लोगों ने उन्हें याद भी करा (कु.मंजुराज ठाकुर और रजनीश के.झा) लेकिन एक न एक दिन सब भुला दिये जाते हैं तो लोग उन्हें भी बस भूलने की प्रक्रिया में हैं जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। डा.रूपेश श्रीवास्तव भी मर गये और वो अपनी आत्मकथा हमारे लिये छोड़ गये शायद खुद को संत कबीर समझने के मुग़ालते में जिये इसीलिये ज्यों की त्यों धर दीन्हीं चदरिया.....। चलिये मर तो गये लेकिन अब तक ये नहीं पता चल पाया कि उनकी मौत हुई कैसे? ये हत्या है या आत्महत्या? इतनी जल्दी तो मरने वालों में से लगते नहीं थे। आपको शायद पता न हो उन्होंने भड़ास से खूब प्रसिद्धि और पैसा कमा लिया था तो कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी भयंकर उपलब्धि के चलते उन्हें सफलता की खुशी सहन न हुई हो और हास्य अटैक आकर मर गये हों? ऐसा भी संभव है कि जैसे कुत्ते को घी हज़म नही होता वैसे ही डा.रूपेश श्रीवास्तव को शोहरत न पची हो और पगला गये हों और इसी पागलपन में किसी गाड़ी-साड़ी के नीचे आकर मर गये हों? उनके बारे में मुझे एक रहस्य जो आज उनकी मौत के बाद खोल रहा हूं वह ये है कि वे आखिरी सांस तक हिंदू बने रहे इसलिये नहीं कि मुसलमान या क्रिस्तान बनने में कोई दिक्कत रही हो पर उनके अनुसार ये सम्प्रदाय पुनर्जन्म की सोच नहीं मानते इसलिये डा.रूपेश श्रीवास्तव जीवन भर दुविधा में रहे कि अगर पुनर्जन्म की व्यवस्था न हुई तो प्रेतयोनि तो होती होगी। बेचारे इसी धर्मसंकट में झूलते मर गये। कुछ लोग बताते हैं कि उन्हें न समझ पाने वालों ने उन्हें प्रसिद्धि और पैसे का ज़हर दे दिया जिससे कि उनकी मौत हो गयी। बस ईश्वर से एक ही प्रार्थना है कि उन्हें कभी शान्ति न मिले।