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27.7.08

हे राम !

दो दिनों में उन्होंने पुरे हिन्दुस्तानको देहला कर रख दिया । परसों बंगलोर में ९ और कल अहमदाबाद में २० धमाकों ने पुरे देश की सुरक्षा की तमाम दलीलों की पोल खोल कर रख दी । लेकिन शायद हमारे देश के नेताओं के दलगत हित अभी भी देश हित के उपर हें और आतंकवादियों को उन्हें देश हित के बारे में सोचने के लिए मजबूर करने हेतु अभी और विस्फोट करने की आवश्यकता हे ।

देश की कांग्रेस सरकार(माफ़ कीजिये केन्द्र सरकार ) ने अपनी नीचता दिखाते हुए एक बार फ़िर इन विस्फोटों को भाजपा का (माफ़ कीजिये राज्य सरकारों का ) आंतरिक मामला बताया हे और वही रटारटाया वाक्य दोहराया हे की राज्यों ने इंटेलिजेंस सुचना को महत्व नही दिया ।

लेकिन क्या देश की सरकार जनता को सुरक्षा का भरोसा इस तरह देगी ? विस्फोट भले किसी ने किए हो कम से कम देश की सरकार को इस समय तो दलगत राजनीती से उपर उठकर कुछ ऐसा कहना और करना चाहिए जिससे जनता को इस मुश्किल घड़ी में राहत महसूस हो, ना की देश की गन्दी राजनीती की तस्वीर सामने आए ।

क्या इन सब से यह नहीं लगता की देश राम भरोसे (राज्यों की भाजपा सरकारों के ) चल रहा हे न की भारत सरकार के ।

हे राम ! ?