ठाकरे जी की बातों से तो ऐसे लग रहा है की जैसे हम फ़िर १९४७ के भारत की और जा रहे है...अब सब अपने प्रदेश और भाषा की बात करेंगे?देश कहीं पीछे छूट गया है...प्रदेश हावी हो रहें है.अरे भाई देश बचेगा तो ही तुम बचोगे...वरना फ़िर वाही घुलामी आने वाली है...लेकिन क्या करें?नेता लोग तो देश तोड़ने पर तुले है...अरे शर्म करो.ठाकरे जी आज कोई सरदार पटेल नहीं आने वाला है....क्यूंकि उससे भी तुम लोग गुजराती या कुछ और कह दोगे....ना जाने इस देश का क्या होगा?सारे नेता,अभिनेता और भुधिजिवी खामोश क्यूँ है?क्या सोच रहे है वो? इन घटनाओं की.......पुनरावर्ती................पूरे देश में होने लगी तो क्या ठाकरे..मुंबई में सुरक्षित रह पायेंगे.......अब बहुत हो गया ठाकरे जी एक बनो नेक बनो....रजनीश परिहार...बीकानेर...
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22.10.08
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