पिछले कई दिनों से स्कूल में बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं तो उसमें व्यस्त रही क्योंकि प्रश्नपत्र बनाने से लेकर उत्तरपुस्तिकाएं जांचने तक बहुत जिम्मेदारी रहती है। भड़ास पर लिखने का समय नहीं मिलता है लेकिन दो-चार दिन में नजर मार लेती हूं। कल घर में जो हुआ उसने मजबूर कर दिया कि भड़ास पर जाकर उगल दूं वरना उस बात से तो दिल ही जला जा रहा है। कल हमारे घर डा.रूपेश आए और अब्बा हुज़ूर ने उन्हें भोजन का आग्रह करके मनुहार करके रोक लिया,वे अपनी व्यस्ततता के बावज़ूद प्रेमवश रुक गए। मैने जनाब डा.रूपेश के लिये शाकाहारी भोजन बनाया लेकिन मेरी बेटी ज़िद करके दस्तरख़्वान पर दोपहर का उसके द्वारा पकाया गोश्त लेकर बैठ गयी। मैंने उसे दबी जुबान से मना किया लेकिन वो मानी नहीं। इस बीच हमेशा की तरह हमारे अब्बा हुज़ूर और जनाब बातों में मशगूल थे और विदेशी गायक माइकल जैक्सन का जिक्र आया तो मेरी बेटी ने बीच में उछल कर कहा कि अभी हाल ही में उसने एक गाना गाया है जो समझ में तो कुछ ज्यादा नहीं आता पर उस गाने में अल्लाह शब्द कई बार आया है और ढेरों अरबी शब्द हैं और शायद हो सकता है कि वह कन्वर्ट होकर मुस्लिम बनने का इरादा रखता होगा जैसे कि विश्वप्रसिद्ध मुक्केबाज़ कैसियस क्ले कन्वर्ट हो कर मुहम्मद अली बन गये थे। दुनिया मुसलमान बनने की राह पर है लेकिन हमारे घर के लोग हैं कि डा.अंकल के कारण हिन्दू बने जा रहे हैं। उसका इशारा हमारे खाने-पीने में आये परिवर्तन की ओर था। बच्चे ते़ज़, चटपटा और मसालेदार मांसाहार के शौकीन हैं लेकिन मैंने जबसे डा.रूपेश के कहे अनुसार अपने भोजन में बदलाव लाया है मैं जोकि हाईब्लड प्रेशर की एक भयंकर मरीज़ा थी अब बिना दवाओं के स्वस्थ हूं बस ध्यान करती हूं और भड़ास से जुड़ी हूं यही मेरे स्वास्थ्य का राज़ है। क्या कारण है कि लोग अभी भी खान-पान को धर्म या मजहब से जोड़ कर देखते हैं जबकि डा.रूपेश कहते हैं कि खान-पान पेट का विषय है और धर्म आत्मा का विषय है,कुछ भी खाने पीने से आप अधार्मिक नहीं हो जाते; शाकाहार और मांसाहार का मुद्दा धर्म जैसी विराटता का करोड़वां हिस्सा भी नहीं हो सकता है। कहां लिखा है कि मुस्लिम हूं तो मांसाहार ही करूं? अगर ऐसा लिखा भी है तो मैं इसे मानने से आप सबके सामने इंकार कर रही हूं। जिसे मेरे बारे में जो सोचना है सोचे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। यशवंत भाईसाहब जानते हैं कि डा.रूपेश की भोजन संबंधी सोच कितनी शाइस्ता है।
भड़ास ज़िन्दाबाद
5.4.08
कहां लिखा है कि मुस्लिम हूं तो मांसाहार ही करूं?????....
18.1.08
हमेशा जवान रहने और अल्झीमार को पास न फटकने देने के दस फंडे

अपने एक आनलाइन और आरकुटी मित्र हैं डा. राहुल टंडन। मुंबई वाले। वे रोजना कुछ मजेदार, रोचक, सीखने-समझने लायक मेल भेजते हैं। उनका पूरा एक ग्रुप है, जिसे मेल भेजते हैं। उसमें सौभाग्य से मैं भी हूं। कल जो मेल भेजा था, वो काफी प्रेरणादायी है, जिसे आप सभी लोगों को पढ़ना और इसका पालन करना चाहिए। उन्होंने मेल के अंत में लिखा कि इस ज्ञानवर्द्धक मेल को कम से कम आठ लोगों को सेंड करिये, तो मैंने सोचा कि भड़ास पर डाल दिया जाये ताकि आठ की बजाय आठ सौ लोग इसे देख-पढ़ लें।
अल्झीमार रोग के बारे में सभी जानते हैं, ब्लैक फिल्म में अमिताभ को यही रोग है, जिसमें स्मृतिलोप का शिकार होने लगता है आदमी। यह रोग ज्यादा उम्र में होने लगता है। इस मेल में यही बताया गया है कि ज्यादा उम्र होने की मानसिकता को दिमाग में लाना ही नहीं चाहिए और हर दम आदमी को सकारात्मक व सुखदायी कामों में संलग्न होना चाहिए। साथ ही लगातार सीखते रहना चाहिए, दिमाग पर जोर देते रहना चाहिए, जिससे की फालतू के टेंशन दिमाग में न आएँ। खैर, ऐसा तो संभव ही नहीं कि आदमी टेंशन में न आए, लेकिन यह जरूर है कि हम नीचे लिखे सलाहों को अमल में लाकर अपनी उम्र तो बढ़ा ही सकते हैं, खुद को सदा जवान रख सकते हैं, अल्झीमार जैसे रोग को भी कभी पास नहीं फटकने दे सकते हैं।
डा. राहुल टंडन की मेल काफी लंबी थी, जिसमें उम्र को लेकर एक पूरा लंबा विश्लेषण है जो काफी रोचक है। पर मैं वो हिस्सा डाल रहा हूं जिसे अमल में लाने से आप हम फायदे में रह सकते हैं.....
HOW TO STAY YOUNG
1. Throw out nonessential numbers. This includes age, weight and height. Let the doctors worry about them. That is why you pay "them."
2. Keep only cheerful friends. The grouches pull you down.
3. Keep learning. Learn more about the computer, crafts, gardening, whatever. Never let the brain idle. "An idle mind is the devil's workshop." And the devil's name is Alzheimer's.
4. Enjoy the simple things.
5. Laugh often, long and loud. Laugh until you gasp for breath.
6. The tears happen. Endure, grieve, and move on. The only person, who is with us our entire life, is ourselves. Be ALIVE while you are alive.
7. Surround yourself with what you love , whether it's family, pets, keepsakes, music, plants, hobbies, whatever. Your home is your refuge.
8. Cherish your health: If it is good, preserve it. If it is unstable, improve it. If it is beyond what you can improve, get help.
9. Don't take guilt trips. Take a trip to the mall, even to the next county; to a foreign country but NOT to where the guilt is.
10. Tell the people you love that you love them, at every opportunity.
AND ALWAYS REMEMBER :
Life is not measured by the number of breaths we take,but by the moments that take our breath away.
