Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

25.7.21

समाचार पत्र व न्यूज़ चैनल पर छापे से कई जिलों के पत्रकार आक्रोशित-आंदोलित


फोटो- ज्ञापन देते उपजा के लोग

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर केंद्रीय प्रशासनिक उत्पीड़न के संबंध में पत्रकारों में आक्रोश

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने के कुत्सित प्रयास से आक्रोशित उपजा
 
राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को गया सौंपा

19.7.21

पवार के मोदी से मिलने के मायने

-निरंजन परिहार

वैसे तो देश के दो बड़े नेताओं का मिलना कोई बड़ी खबर नहीं बनता, लेकिन नेता अगर शरद पवार हो, मुलाकात अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हो और मामला महाराष्ट्र का हो, तो सचमुच बड़ी खबर तो बन ही जाता है। क्योंकि महाराष्ट्र में तीन दलों की खिचड़ी सरकार के गठबंधन की गांठ पवार ही है, और बीजेपी उस सरकार के कभी भी गिरने के सपनपाले बैठी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात प्रधानमंत्री आवास पर हुई। दोनों नेताओं की करीब एक घंटा मीटिंग चली। इससे एक दिन पहले शरद पवार ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल से मुलाकात की थी। अब इन मुलाकातों के कई मायने निकाले जा रहे हैं। और सबसे बड़ी चर्चा यही है कि बीजेपी-एनसीपी मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना सकते हैं, जो कि बीजेपी चाहती भी है।

शोषण की पनाहगार सहारा मीडिया: आप वहां अपना खून दे दो, मर जाओ लेकिन आपका पैसा नहीं देंगे...


 Prakash Sharma

एक मार्मिक व्यथा...

महोदय प्रणाम,

मेरे सहारा मीडिया के सफर को सुनकर आप लोगों की आंखे भर आयेगी। मैंने सहारा टाइम्स इंग्लिश मैग्जिन में एक ले-आउट डिजाइनर के रूप में जून 2008 में ज्वाइन किया था। जहां पहले से कार्य से खुश होकर मैनेजमेंट ने 5000 रूपये का एक्सीलेंस प्रदान किया। लेकिन 2013 में मैग्जिन बंद होने के बाद मेरा ट्रांसफर सहारा टीवी के स्टोर में कर दिया और 5000 रूपये एक्सीलेंसी काट दी गई। लेकिन मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करता रहा क्योंकि टैक्निकल स्ट्रोंग होने के कारण मैंने बहुत जल्दी कार्य संभाल लिया। लेकिन वहां के मैनेजर दिनेश शर्मा जो कि फेडरल ऑटो वर्क्स के नाम से अपनी निजी कंपनी चलाता है अपने निजि कार्य भी धमकी स्वरूप करवाने लगा।

एक्सिस बैंक वाले मेरा लगातार पैसा काटे जा रहे हैं...

 

Mere ac se ros paisa cut rha, axis vale kat rhe... Roj mail kr rha hu, but koi jwab nai aa rha.. Jo santust kr ske.




Shubham singh

 shubhamsinghhcs@gmail.com

 

12.7.21

पत्रकारों की खंड स्तर के साथ साथ जिला व राज्य स्तर की एक्रीडेशन भी रदद् करे सरकार

 Bijender Sharma-

शिमला : सुना है हिमाचल प्रदेश ने पत्रकारों से सुविधाओं कम करने की योजना तैयार की है और इस कड़ी में राज्य के खंड स्तर के पत्रकारों पर सबसे पहले गाज गिरी है, जिनसे सरकार द्वारा खंड स्तर पर दी जाने वाली एक्रीडेशन (मान्यता) को रद्द किया जा रहा है। जैसे जैसे इसकी जानकारी पत्रकारों व उनके संगठनों को मिली है, वैसे ही उनमें कोहराम  मच गया है, सरकार पर दबाव बनाने की कोशिशें शुरू हो गयी हैं।

हम केवल ख़बर, वीडियो नहीं बनाते, जान भी बचाते हैं... क्योंकि हम पत्रकार हैं

Yogesh Mishra-
    
जब भी हमारे, आपके आसपास किसी तरह की घटना होती है और पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर, रिस्क लेकर लोगों को बचाने का प्रयास करते हैं, तो विरोध करने वाले कई लोग बड़ी आसानी से कहते हैं कि 'पत्रकार हो इसका मतलब क्या? छोटी बात को बड़ा क्यों बना रहे हो भाई? पत्रकार है, मतलब मदद नहीं करेगा, देखना वीडियो बनाएगा? मजलूमों पर अत्याचार करते, गलत काम करते कई असामाजिक लोग धमकाकर कहते हैं, क्यों बीच में आ रहे हो? क्या तुमने ही क्या ठेका लिया है? यह सवाल बिल्कुल सही है, पर जवाब ये है कि 'हां हमने ठेका लिया है। हाँ हम पत्रकार हैं, औरों की तरह तमाशा नहीं देखेंगे, कमज़ोरों को बचाएंगे।'

11.7.21

न्यू मीडिया के बेहतर इस्तेमाल से समाज को बदला जा सकता है : नरेंद्र नाहटा



सामाजिक समरसता को बचाये रखने के लिए मीडिया साक्षरता की ज़रूरत : प्रोफेसर पुष्पेंद्र पाल सिंह

मंदसौर विश्वविद्यालय में न्यू मीडिया एंड पॉलिटिक्स ऑफ ट्रुथ विषय पर आयोजित हुआ राष्ट्रीय वेबिनार

मंदसौर विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग द्वारा न्यू मीडिया और पॉलिटिक्स ऑफ ट्रुथ विषय पर 8 जुलाई को राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया । इस वेबिनार में मंदसौर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और प्रसिद्ध शिक्षाविद नरेंद्र नाहटा तथा मध्य प्रदेश सरकार के पत्र रोजगार एवं निर्माण के मुख्य संपादक और पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया,भोपाल चैप्टर के चेयरमैन प्रोफेसर पुष्पेंद्र पाल सिंह बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित रहे।

डिजिटल मीडिया आचार संहिता का उदेश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कायम रखना - विक्रम सहाय

पटना : केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा डिजिटल मीडिया आचार संहिता 2021 का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कायम रखते हुए ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रसारित होने वाली सामग्री के गुणवत्ता को बनाये रखना है। पत्र सूचना कार्यालय (पटना, लखनऊ, रांची एवं देहरादून) द्वारा डिजीटल मीडिया आचार संहिता 2021 पर एक विशेष ई-बैठक को संबोधित करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री विक्रम सहाय ने यह बात कही। इस ई-बैठक में आचार संहिता के भाग-3 से जुड़े प्रावधानों के बारे में जानकारी देते हुए श्री सहाय ने बताया कि आचार संहिता का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं है। उन्होंंने बताया कि पिछले कुछ वर्षो में डिजिटल मीडिया की भूमिका काफी बढ़ी है और पिछले 6 वर्षो में इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल 43 प्रतिशत तक बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रसारित की जाने वाली सामग्री को लेकर शिकायतें मिल रही थीं, जिसके मद्देनजर डिजिटल मीडिया आचार संहिता बनायी गयी है। इसके तहत न्यूज पोर्टल या ओटीटी प्लेटफार्म पर काम कर रहे लोगों के बारे में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सामान्य जानकारी एकत्रित करेगा।

सत्ता की दुर्गति का आधार है सुख सुविधाओं की अति

सरकार/सत्ता में चेहरा बदलता हैं चाल और चरित्र नहीं। सारे नेताओं का चाल और चरित्र सत्ता मिलते ही वैसा ही हो जाता है जैसा पूर्ववर्ती सत्ता पक्ष के लोगों का होता है। नेता जब तक सत्ता में नहीं होता तब तक शालीन होता है। शालीनता, मानवता का प्रतीक है। सत्ता मिलते ही नेता अभिनेता हो जाता है। कहने का तात्पर्य जिस प्रकार अभिनेता, अभिनय करके किसी भी चरित्र का निर्माण करता हैं। उसी प्रकार नेता सत्ता मिलते ही अभिनय की भूमिका में आ जाता है। अभिनय नाटक का एक अंग है। नेताओ को गौर से देंखे और समझें तो आप पाएंगे कि सत्ता पाते ही नेताओं के बोलने का ढंग,चलने का ढंग,बैठने का ढंग,खान-पान का ढंग,लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करने का ढंग सब कुछ बेढंगा हो जाता है। सत्ता मिलते ही सुख सुविधाओं की अति नेताओं की दुर्गति का कारण बनती है। सुख सुविधा उतनी ही होनी चाहिए जितनी आवश्यक हो।

8.7.21

शिमला (आंचलिक) यात्रा वृतांत : वो शिमला जिसे शायद आप नहीं जानते!

Saksham Dwivedi-
    
शिमला का नाम सुनते ही चर्च, मॉल रोड और सैलानियों की भीड़ के दृश्य सामने घूमने लगते हैं . वास्तव में समुद्र तल से 2,206 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस जिले के आँचल में 2 -3 किलोमीटर की  भीड़-भाड़ के व शोर के अतिरिक्त पहाड़ की समृद्ध संस्कृति व छिपा हुआ प्राकृतिक सौंदर्य तथा पर्यावरण के क्षरण की चिंता भी बसती है.

टीम के कैप्टन होने के नाते खुद इस्तीफा देते प्रधानमंत्री!

CHARAN SINGH RAJPUT-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. डॉ हर्षवर्धन, अश्विनी चौबे समेत 11 मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी कर ज्योतिरादित्य सिंधिया, नारायणे राणे, वीरेंद्र कुमार, अश्विनी वैष्णव और भूपेंद्र सिंह समेत 15 मंत्रियों को कैबिनेट में लेकर 43 नये मंत्री भी बना दिये हैं। मोदी सरकार के लिए काम करने वाला गोदी मीडिया मंत्रियों के फेरबदल को पिछड़ों की सरकार की संज्ञा भी देने लगा है। मतलब पिछड़े समाज से अधिक मंत्री बनाने पर मोदी सरकार पिछड़ों की सरकार बन गई है। वह बात दूसरी है कि मोदी के लिए अगड़े पिछड़े सभी अडानी और अंबानी ही हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि इतने बड़े स्तर पर मंत्रियों को हटाकर नये मंत्री क्यों बनाये गये हैं?

दिलीप कुमार अब कोई नहीं जन्मेगा!

-निरंजन परिहार

 बार बार जन्म नहीं लेते दिलीप कुमार !


कहते हैं कि दिलीप कुमार ऐसी शख्सियत थे कि एक बार उनसे जो कोई मिल लेता, वह उनका मुरीद हुए बिना नहीं रहता।  परंतु सिनेमा के संसार के चमकते सितारों के बीच काफी समय से रहते हुए भी अपन दिलीप कुमार से कभी नहीं मिले। देवआनंद से अकसर अपन मिलने जाते थे, और उन्होंने कहा भी था कि मुझसे तो रोज मिलते हो और इतना प्यार भी करते हो, पर कभी दिलीप साहब से भी मिलो, तो समझ में आएगा कि मिलना क्या होता है, कोई कैसे किसी से जुड़ता है और कैसे अनजाने को भी अपना बना लेता है। मगर, इसे संयोग कहें, या समय का शिलालेख कि सिनेमाई लेखन से निकल जाने और देव साहब के संसार से चले जाने के साथ ही सिनेमा के लोगों से अपना रिश्ता भी धीरे धीरे रिसता गया। वैसे कभी कोई काम भी नहीं पड़ा दिलीप कुमार से मिलने का। बिना काम किसी से भी मिलने का अपने लिए कोई मतलब भी अपन नहीं मानते। फिर भी मिलते तो, जैसा कि सभी कहते है, शायद अपन भी उनके मुरीद हो जाते। लेकिन मिले ही नहीं तो मुरीद कैसे बनते! फिर भी दिलीप कुमार के दुनिया से विदा लेने के दिन उनकी श्रद्धांजलियों में जितना कुछ उनके बारे में पढ़ पाए, वह अपने आप में उनको जानने, समझने और मुरीद हो जाने के लिए काफी है। उनके निधन पर अमिताभ बच्चन की आकुलता, धर्मेंद्र की आंखों में छलके आंसू और सायरा बानो के पहलू में बैठे शाहरुख खान की सांत्वना से दिलीप कुमार के प्रति दुनिया के मन में बसे सम्मान समझा जा सकता है।

सभी संप्रदायों में परस्पर प्रेम और सौहार्द्र के पक्षधर हैं RSS प्रमुख

कृष्णमोहन झा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत  ने हाल में ही गाज़ियाबाद में आयोजित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के एक समारोह में जो व्याख्यान दिया उसकी देश भर में बहुत चर्चा हो रही है। सरसंघचालक ने इस कार्यक्रम  में मुख्य अतिथि की आसंदी से अपने संबोधन में कहा था कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए 40 हजार साल पूर्व से  एक ही है और  हम समान पूर्वजों के वंशज हैं । इसके साथ ही  भागवत ने यह भी कहा था कि आज  हिंदू मुस्लिम एकता की बात की जाती है परन्तु यह सवाल तो तब उठता है जब कि दोनों अलग अलग हों। केवल पूजा पद्धति अलग अलग अलग होने से उनमें भेद करना ग़लत है ।  भागवत ने इस कार्यक्रम में अपने संबोधन में लिंचिंग  को भी ग़लत ठहराया था। भागवत ने उक्त कार्यक्रम में जो सारगर्भित विचार व्यक्त किए उसके लिए वे  निःसंदेह साधुवाद पाने हकदार हैं परन्तु आश्चर्य की बात तो यह है कि  भागवत के धीर गंभीर संबोधन में भी छिद्रान्वेषण का सिलसिला शुरू हो गया है। अनेक विपक्षी राजनीतिक दलों के नेता भागवत के इस संबोधन को उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी चुनावों में भाजपा की जीत की संभावनाओं को बलवती बनाने के लिए सोची समझी रणनीति के रूप में देख रहे हैं लेकिन उन विपक्षी नेताओं को शायद यह स्मरण नहीं है कि  भागवत ने गाज़ियाबाद के कार्यक्रम में जो बातें  कही हैं उनमें ऐसा कुछ भी नहीं है जो उन्होंने पहली बार कहा हो भागवत के उक्त संबोधन को उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी चुनावों से जोड़ कर देखना भी उचित नहीं होगा। यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि उन्होंने 2015 में संपन्न विधानसभा चुनावों के दौरान आरक्षण को लेकर लेकर एक ऐसा बयान दिया था जिसके कारण भाजपा को असहज स्थिति का सामना करने के लिए विवश होना पड़ा था । इसलिए मैं  भागवत के ताजे बयान को भी राजनीतिक नफा-नुकसान की दृष्टि से  देखने का पक्षधर नहीं हूं।  स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पद की बागडोर संभालने के बाद से ही भागवत पूरी बेबाकी से ज्वलंत मुद्दों पर अपनी  राय देते रहे हैं और  एक बार वे जो कुछ कह देते हैं उस पर  हमेशा अडिग रहते हैं। उनके बयानों को लेकर उन पर निशाना साधने वाले नेताओं पर पलटवार करते हुए भी उन्हें कभी नहीं सुना गया है।

मिशन यूपी : पहला कदम मोदी का, दूसरा योगी बढ़ाएंगे

अजय कुमार, लखनऊ

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी ने ‘मिशन यूपी- 2022‘ पर काम शुरू कर दिया है। सामजिक और क्षेत्रीय  समीकरण साधे, सहयोगी दलों को खुश किया जा रहा है। पार्टी के भीतर की नाराजगी को भी ‘ठंडा‘ किए जाने का प्रयास चल रहा है। इसी लिए छोटे नेताओं को ब्लाक प्रमुख चुनाव में अपने परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ाने की छूट दे दी गई है,तो बड़े नेताओं की नाराजगी दूर करने के लिए मोदी-योगी मोर्चा संभाले हुए हैं। इसी लिए ‘मिशन यूपी-2022 को पूरा करने के लिए पहला कदम उठाते हुए मोदी मंत्रिमंडल में उत्तर प्रदेश का कोटा अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया गया है। अभी तक प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी सहित उनकी कैबिनेट  में यूपी से आठ मंत्री हुआ करते थे,अब यह संख्या 15 पर पहुंच जाना,यह बताने और समझने के लिए काफी है कि बीजेपी और मोदी के लिए ‘मिशन यूपी-2022‘ कितना महत्व रखता है। इसी के साथ मोदी मंत्रिमंडल  में यूपी का सबसे अधिक प्रतिनिधित्व हो गया है। यही नहीं लखनऊ के तो दोनों ही सांसद (राजनाथ सिंह और कौशल किशोर) मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं। मिशन यूपी-2022 ‘ को अमली जामना पहनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहला कदम उठाया है तो जल्द ही दूसरा कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करके उठाने जा रहे हैं। ताकि जिन नेताओं के अरमान ‘दिल्ली‘ में नहीं पूरे हो पाए हैं उनके अरमान ‘लखनऊ‘ में पूरे करके मिशन यूपी-2022 के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को और मजबूती प्रदान की जा सके। योगी भी मोदी की तर्ज पर कुछ मंत्रियों की छुटटी तो कुछ का कद बढ़ा सकते हैं। माना जा रहा  है कि ब्लॉेक प्रमुख चुनाव के बाद ही मंत्रिमंडल  विस्तार किया जा सकता है। इसमें ओबीसी जातियों में से निषाद समाज को समायोजित किया जा सकता है। कांग्रेस से भाजपा में आए जितिन प्रसाद को भी योगी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। वहीं मनोनीत किए जाने वाले चार विधान परिषद सदस्यों में भी निषाद समाज को प्रतिनिधित्व दिए जाने की अटकलें है। चर्चा है कि मोदी कैबिनेट में जगह बनाने में असफल रहे निषाद समाज के नेता को यूपी में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिल सकती है या फिर पार्टी मनोनीत किए जाने वाले चार विधान परिषद सदस्यों के नामों में से एक डा. संजय निषाद हो सकते हैं। पार्टी का मानना है कि पूर्वांचल में ओबीसी की प्रमुख जातियां में से एक निषाद समाज को पार्टी अपने साथ रखना चाहती है।

5.7.21

सिलेब्रिटी आमिर खान का है विवादों से गहरा नाता

अजय कुमार, लखनऊ

56 वर्षीय फिल्म अभिनेता आमिर खान ने 2002 में अपनी पहली पत्नी रीना दत्त के बाद 2021 में अपनी दूसरी पत्नी किरण राव को भी तलाक दे दिया है। तलाक दोनों की सहमति से हुआ है इसलिए इस पर किसी को ‘नुक्ताचीनी’ नहीं करना चाहिए। आमिर खान कोई पहले ऐसे शख्स भी नहीं हैं जिन्होंने अपनी पत्नी को तलाक दिया हो। 135 करोड़ की आबादी वाले देश में तलाक जैसी समाजिक बुराई जगह-जगह जन्म लेती रहती है। अगर कोई नई बात है तो वह यह है कि संभवता पहली बार ऐसा तलाक हुआ है जिसमें पति-पत्नी में से कोई अपने संबंधों को लेकर दुखी या परेशान भी नहीं था और साथ रह भी नहीं सकता था। यहां तक की तलाक पेपर पर हस्ताक्षर करते समय तक इनके बीच कोई मतभेद या रिश्तों में ‘दरार’ जैसी बात सामने नहीं आई। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि स्वयं इस जोड़े ने तलाक के बाद कही है।

सरकार के लिए बड़ी चुनौती बने कोरोना के साइड इफेक्ट

CHARAN SINGH RAJPUT
    
इसे जीत कहा जाए या पराजय, इसे जिंदगी कहा जाए य मौत, कोरोना महामारी की चपेट में आने वाला व्यक्ति तरह-तरह के साइड इफेक्ट से जूझ रहा है।   ये साइड इफेक्ट घर पर इलाज करने वालों से ज्यादा अस्पताल में गये व्यक्तियों ेमं ज्यादा देखे जा रहे हैं। कोरोना महामारी को परास्त करने वाले लोगों में तरह-तरह की बीमारियां होने की खबरें सामने आ रही हैं। यह कोरोना का साइड इफेक्ट है या फिर उनको दी जाने वाले दवाओं का आये दिन कोरोना से सही हुए लोगों में तरह-तरह की बीमारियां होने की खबरें आ रहे हैं। इन लोगों में ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस नाम की बीमारी तो जगजाहिर हो ही चुकी है। गत दिनों कई राज्यों में इसे महामारी भी घोषित किया था, अब  इसी कड़ी में एक नई बीमारी और जुड़ गई है, जिसका नाम है अवैस्क्यूलर नैक्रोसिस यानी बोन डेथ है। इस बीमारी ने मुंबई के डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुंबई में इस बीमारी के 3 मरीज सामने आए हैं। इस बीमारी की सबसे खास और डराने वाली बात यह है कि इसमें मरीजों की हड्डियां गलने लगती है।  

3.7.21

जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ महाराष्ट्र द्वारा आयोजित पत्रकार मार्गदर्शन शिविर सफलता पूर्वक संपन्न

 "पत्रकार एक सच्चा सामाजिक कार्यकर्ता है।"- मेयर ज्योत्सना हसनाले

मीरा भायंदर( ठाणे/ मुंबई) : जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ महाराष्ट्र द्वारा आयोजित पत्रकार मार्गदर्शन शिविर का आयोजन शुक्रवार २ जुलाई २०२१ को अम्बर प्लाजा हॉल, मीरा रोड, थाणे में किया गया था, जोकि सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जहाँ पर मुख्य अतिथि मीरा-भायंदर नगर निगम मेयर ज्योत्सना हसनाले थी, जिनके हाथों दीप प्रज्ज्वलित कर पत्रकार मार्गदर्शन शिविर का उद्घाटन किया गया।  इस अवसर पर पत्रकारों को आरोग्य कार्ड, रेनकोट,छतरी व भारत के  संविधान की बुक वितरित किया गया। 

अडानी के हिसाब से बनता है भाजपा का मैनिफेस्टो!

CHARAN SINGH RAJPUT-

वैसे तो मौजूदा हालात में लगभग सभी दल कॉरपोरेट घरानों के लिए राजनीति कर रहे हैं। पर भाजपा ने इन सबके रिकार्ड तोड़ दिये हैं। भाजपा का तो मैनिफेस्टो भी पूंजपीतियों के हिसाब बनता है।  तभी तो देश की जनता की स्थिति बद से बदतर होती जा ही है और प्रधानमंत्री मोदी के करीबी अडानी और अंबानी ग्रुप मालामाल होते जा रहे हैं।

बहराइच कोऑर्डिनेटर द्वारा ₹5000 की अवैध मांग


आदरणीय यशवंत जी नमस्कार

मैं शुभम मिश्रा जो पयागपुर तहसील से पब्लिक्वाइब में पिछले एक माह से कार्य कर रहा था. मगर बहराइच कोऑर्डिनेटर महेश गुप्ता द्वारा₹5000 की अवैध मांग की गई. जिसके बाद मुझे पयागपुर तहसील से संवाददाता के रूप में रखा गया था. मगर दोबारा से मुझसे ₹5000 की मांग की गई. मेरे द्वारा न दे पाने पर 30 तारीख की देर रात मुझे ग्रुप से रिमूव कर दिया गया. मेरी आईडी को भी डीएक्टिवेट कर दिया गया है.

पिछड़ों की सियासत करने वाले क्यों ‘पिछड़ा वर्ग आयोग’ को लेकर गंभीर नहीं

अजय कुमार,लखनऊ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव की आहट सुनाई देते ही सियासतदारों ने पिछड़ा वोट बैंक को लुभाने के लिए हाथ-पैर मारना शुरू कर दिया है। सभी दलों में पिछड़ा समाज के नेताओं को अपने पाले में खींचने के लिए ‘रस्साकशी’ का दौर चल रहा है। इसी के चलते पिछड़ा समाज के नेताओं और दलों की बन आई है। यूपी में पिछड़ा वोट बैंक को काफी सशक्त माना जाता है। किसी भी चुनाव में पिछड़ा वर्ग वोट की महत्ता से इंकार नहीं किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में पिछड़ा समाज की करीब 54 फीसदी की भागीदारी है। यह समाज जिस दल के साथ खड़ा हो जाता हैं, उसकी किस्मत का ताला खुलने के साथ ही जीत करीब-करीब सुनिश्चित हो जाती है,लेकिन पिछले कुछ वर्षो में पिछड़ा समाज का सियासी माहौल काफी बदल चुका है। पिछड़ा वर्ग की राजनीति में पिछले कुछ वर्षो में काफी बदलाव देखने को मिला है,जिसके चलते किसी भी दल के लिए एक मुस्त पिछड़ा वोट हासिल कर लेना असंभव हो गया है।

शराब दुकान के सामने मारपीट के आरोपों पर न्यूज18 के बांदा के पत्रकार अंकित का पक्ष पढ़ें

ANKIT TRIPATHI- 



सही वीडियो और सही डिटेल ये है शराब की दुकान के बाहर सहजाद के कुछ पत्रकार मौजूद हैं जो बता रहे है हम सहजाद के साथ काम करते है पत्रकार हैं लेकिन अवैध और महंगे दाम मे शराब बेचेंगे क्योंकि हम पत्रकार हैं देर रात 12 बजे के आस पास अवैध तरीके से हो रही थी बिक्री वहां से अरबाज के दो सहयोगी पत्रकार वहां से निकल रहे थे देखा कि कालूकुआ के मॉडल साप के बाहर जबरदस्त भीड़ लगी हुई है लोग शराब खरीद रहे हैं जिसका वीडियो भी बनाया वीडियो बनाने के बाद तुरंत वीडियो अरबाज खान को भेजा गया अरबाज खान ने मुझे वीडियो भेजा है इसके बाद मैंने पूरे मामले में आबकारी विभाग और पुलिस को सूचना दी है आबकारी विभाग से  30 मिनट बात भी की है आबकारी आयुक्त संतोष कुमार से बात हुई है संतोष कुमार आबकारी आयुक्त के अलावा शहर कोतवाल से दो बार बात हुई है कि मौके पर पुलिस को भेजकर कार्यवाही करावे लेकिन ना तो आबकारी विभाग पहुंचा तो पुलिस के कोई अधिकारी पहुंचे लेकिन संतोष कुमार ने  आश्वासन दिया की सुधांशु चौधरी 8 आबकारी इंस्पेक्टर पहुंच रहे है  कुछ कथित पत्रकार शराब बेच रहे थे खबर करने पहुचे सही पत्रकारों ने खबर की उस दौरान उनके साथ शराब माफियाओं ने गाली गलौच और मारपीट पर आमादा हो गए पत्रकारों ने खबर भी प्रकाशित की जिसके बाद यह लोग तथाकथित पत्रकार हैं वह फसाने की कोशिश कर रहे हैं

News 18 राजस्थान ने लाखों के गबन के आरोपी को स्ट्रिंगर बनाया

 बांसवाड़ा में चार साल पहले ATM में पैसा डालने वाली निजी कम्पनी में काम करने वाले व्यक्ति आकाश सेठिया जिस पर लाखों रुपए का गबन करने के आरोप में गिरफ्तार हुए व्यक्ति को न्यूज़ 18 राजस्थान ने बांसवाडा का नया स्ट्रिंगर नियुक्त किया है। 

धर्मांतरण में लगा है हवाला का पैसा, एनजीओ और विदेशी ताकतें

संजय सेक्सना, लखनऊ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता(एटीएस) ने यह खुलासा करके  चैका दिया है कि धर्मांतरण कराने वाले गैंग के तार हवाला रैकेट से जुड़े हुए हैं। अहमदाबाद में पकड़े गए मोहम्मद उमर गौतम के सहयोगी सलाउदीन के जरिए एसटीएफ इस गैंग के विदेश में मिल रही फंडिग के बारे में जल्द ही बड़ा खुलासा कर सकती है।यूपी एटीएस  21 जून को जब से अवैध धर्मांतरण मामले का खुलासा किया है, तब से अब तक कुल 6 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें उमर गौतम और जहांगीर के अलावा मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान, इरफान शेख, राहुल भोला, सलाउद्दीन शामिल हैं लेकिन, बड़ी बात ये है कि धर्मांतरण का ये जाल यूपी ही नहीं दिल्ली, महाराष्ट,जम्मू-कश्मीर,बिहार और गुजरात समेत देश के 24 राज्यों तक फैला हुआ हैं। धर्मांतरण का खेल हवाला के जरिए विदेशी धन से किया जा रहा था।

ABP Network celebrated Doctors’ Day with special programming initiatives

Noida, 02nd July 2021: On the occasion of Doctors’ Day, ABP Network saluted Indian medical professionals for their meaningful contributions towards the fight against Covid-19 through special programming initiatives on ABP News, ABP Majha, ABP Ananda, and ABP Ganga.

डॉक्टर की जगह फोर्थ क्लास कर्मी दुआरा उपचार दिए जाने का गॉववासियो ने लगाया आरोप


रिपोर्ट तेजेन्द्र सिंह 9760313579

हॉस्पिटल के ग्राउंड में नही देखने को मिली कोई साफ सफाई

हॉस्पिटल न खुलने में फोर्थ क्लास कर्मी दुआरा बताया गया कि चाबी नही मिल पाई है

आसपास  के मरीज आते है उपचार लेने के लिए किन्तु हताश होकर जाना पड़ रहा है वापस

जनपद के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया मामला

डॉक्टर की तैनाती न होने का भी किया  गॉववासियो ने दावा

23.6.21

तीसरा मोर्चा : क्या वाम मोर्चा का इतिहास दोहराएंगी ममता बनर्जी?

CHARAN SINGH RAJPUT-

एनसीपी नेता शरद पवार के दिल्ली स्थित आवास पर विपक्ष के नेताओं की बैठक हो रही है। राजनीतिज्ञ पंडित इसे तीसरा मोर्चा तैयार करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। भले ही प्रशांत किशोर इस कवायद में लगे हों पर पर यह प्रयास पं. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का माना जा रहा है। अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में होने वाले विधानसभा से ठीक पहले ममता बनर्जी का तीसरे मोर्चा बनाने का प्रयास क्या गुल खिलाएगा यह तो समय बताएगा पर इस कवायद से अलग-थलग पड़े विपक्ष को मजबूती जरूर मिल सकती है। देश की राजनीति की यह भी जमीनी हकीकत है जब भी राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे मोर्चा की कवायद शुरू हुई पं. बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी इसकी सूत्रधार रही। गैरकांग्रेसवाद का आधार मानकर वाम मोर्चा ने  ने एक बार नहीं दो बार तीसरे मोर्चा की सरकार बनवाई है। वह बात दूसरी है कि जो वाम मोर्चा गैर कांग्रेसवाद का आधार लेकर चल रहा था वही वाम मोर्चा बाद में कांग्रेस से सट गया और सरकार भी बनवाई। इस बार ममता तीसरे मोर्चा के गठन में ममता बनर्जी का आधार गैर भाजपावाद है।

22.6.21

काश 'रोटी दिवस' मनाया जाता!

 CHARAN SINGH RAJPUT-

कहावत है कि 'भूखे पेट भजन न होई गोपाला'। लोग अच्छी सेहत के लिए रोटी मांग रहे हैं और मोदी सरकार अच्छी सेहत के लिए योग करने को कह रही है। ये लोग यह समझने को तैयार नहीं कि जब भूखे पेट भजन नहीं हो सकता है तो योग कैसे होगा ? या फिर भूखे आदमी को योग से क्या फायदा होगा ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विफलता को छिपाने के लिए कोरोना महामारी में योग को उम्मीद की किरण बताने लगे। यदि योग ही सब कुछ होगा तो फिर देश में सरकारों की जरूरत ही क्या है ? वैसे भी योग की जरूरत तो उस व्यक्ति को पड़ती है जिसके पास खाने-पीने की कोई कमी न हो। कोरोना महामारी में मोदी सरकार के हर मोर्चे पर विफल होने पर आज देश में जो व्यक्ति है उसके अनुसार तो लोग दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हैं। 

भारत में राजनीतिक दल सांप्रदायिकता को सदैव उत्प्रेरक के रूप में इस्तेमाल करते हैं

- शैलेन्द्र चौहान

भारत में जब भी सांप्रदायिकता की बात चलती है तो उसका आशय हिन्दू मुस्लिम सम्बंधों में आपसी द्वेष एवं घृणा से ही लिया जाता है। यदि सांप्रदायिक समस्या के समाधान की भी बात की जाती है तो भी हिन्दू मुस्लिम विरोध को समाप्त करने का ही आशय होता है। असल में भारत में सम्प्रदाय का तात्पर्य हिन्दू ,मुस्लिम धर्म विभाजन से ही है जो 14-15 अगस्त 1947 के भारत-पाक विभाजन से प्रत्यक्षत: जुड़ा हुआ है। ध्यातव्य है कि 1914-15 के शहीदों ने धर्म को राजनीति से अलग कर दिया था। वे समझते थे कि धर्म व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है इसमें दूसरे का कोई दखल नहीं। इसे राजनीति में घुसाना न चाहिए क्योंकि यह समस्त भारतीय जनों को मिलकर एक जगह काम नहीं करने देता। इसलिए गदर पार्टी जैसे आन्दोलन एकजुट व एकजान रहे, जिसमें सिख बढ़-चढ़कर फाँसियों पर चढ़े और हिन्दू मुसलमान भी पीछे नहीं रहे। यदि धर्म को अलग कर दिया जाये तो राजनीति पर हम सभी इकट्ठे हो सकते है। धर्मों में हम चाहे अलग-अलग ही रहें। इतिहास के पन्नों में ऐसे अनगिनत मुस्लिम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम दर्ज हैं जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में हिन्दू स्वातंत्र्य योद्धाओं के साथ मिलकर अपना बहुमूल्य योगदान दिया। अंग्रेजों के खिलाफ भारत के संघर्ष में अनेकों मुस्लिम क्रांतिकारियों, कवियों और लेखकों का योगदान उल्लेखनीय है।

21.6.21

खुशवंत उवाच : हाय नि रब्बा ! ....... नाडा किथे खोला ?

सत्य पारीक-

उपरोक्त शब्द हैं जाने माने पत्रकार खुशवंत सिंह के जिन्होंने वर्षो पहले लगभग 1986 में जयपुर के बाजारों में स्कूटर पर रात्रि भृमण करते हुए कहे थे , मैं सौभाग्य से उनका दुपहिया वाहक था ,आज ये वाकिया मुझे अचानक ही विख्यात न्यूज पोर्टल भड़ास पर की गई एक महिला एंकर साक्षी जोशी की टिप्पणी देख कर स्मरण हो उठी , जिनके दो धारे कटाक्ष का शीर्षक था " ममता वॉशरूम कैसे जाती है " यानी साक्षी को कवरेज के दौरान वाशरूम की जरूरत हुई होगी , तभी उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता पर ऐसी टिप्पणी कर शासन की कमी के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शौचालय निर्माण कार्यक्रम पर कटाक्ष किया , जो वाशरूम की जरूरत वाली महिला एंकर का दुख भी कहा जा सकता है , अब शौचालय प्रेमी मोदी इस समस्या पर कितना ध्यान देंगे ये समय बतायेगा

पत्रकार के परिवार पर भूमफिया ने करवाया अपने ही परिवार से जानलेवा हमला


सेवा में
श्रीमान थानाध्यक्ष
थाना करौदीकला, कादीपुर, सुलतानपुर, यूपी*

विषय : पत्रकार के परिवार की हत्या के प्रयास की प्राथमिकी दर्ज करने के संदर्भ में

-जनवरी से हत्या की दी जा रही धमकी, पत्नी का गला कस दिया, बेटे के हाथ को लाठी से तोड़ दिया

- इससे पहले भी तीन बार किया जा चुका हमला, पुलिस ने भूमफिया पर 107 तक की कार्रवाई नहीं की

-हमला हो जाने के बाद थानाध्यक्ष ने कहा, प्राथमिकी दर्ज करवाओ, कार्रवाई होगी

बड़ा बेदर्द है यह, तेल का खेल... शाइनिंग इंडिया या क्राइंग इंडिया

  संतोष गुप्ता-

राजा द्वारा कितना टैक्स लिया जाना चाहिए, नीति शास्त्र में इसका बड़े विस्तार से वर्णन किया गया है। पुराने राजे- महाराजे इस बात का विशेष ध्यान भी रखते थे। वे यह बात अच्छी तरह जानते थे कि अगर जनता का ज्यादा तेल निकाला गया तो वो बागी हो सकती है। जनता के बागी हो जाने पर निकाले गए तेल से कई गुना ज्यादा ऊर्जा उस बगावत को दबाने में नष्ट हो जाती है। अतः समझदार राजा देश की जनता पर जरूरत से ज्यादा टैक्स लगाने की नीति से अक्सर किनारा करने में ही अपनी भलाई समझता था। जब कभी जनता की बात ना सुनकर, उनकी परेशानी ना समझ कर राजा ने अपनी मनमानी की तो उसका राज ज्यादा समय तक ना तो कायम रह सका और ना उसकी जनता कभी उससे संतुष्ट रह सकी। इतिहास ऐसी घटनाओं से अटा पड़ा है।

भारत में मीडिया की दुर्गति

- शैलेन्द्र चौहान

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का काम यह होना चाहिए था कि वह लोगों को जागरूक करे किन्तु टीआरपी के चलते समाचार चैनल इन दिनों किसी भी खबर को सनसनी बनाकर पेश करने से नहीं चूक रहे। यह चिंताजनक स्थिति है। अगर हम भारतीय समाचार पत्रों तथा इलेक्ट्रानिक चैनलों पर प्रसारित होने वाले समाचारों को देखे तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि इस देश में अब सूचना माध्यमों के लिए एकमात्र प्रमुख चिंता है राजनीतिक उठापटक और चंद राजनीतिज्ञों की चमक दमक एवं शौहरत का प्रचार प्रसार। बाकी सब बेकार है कोरोना के अलावा। महामारी है तो समाचार देना अनिवार्य है। या फिर निकट अतीत में सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या। चुनावी मौसम में तो चैनलों की बल्ले बल्ले होती है। यह सब नहीं तो क्रिकेट। महंगाई, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था अब समाचार नहीं बचे हैं या हाशिए के समाचार हैं।

सरकारी सिस्टम के आगे लाचार है नालंदा की एक बेटी

संजय कुमार-

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से  मांग रही इंसाफ

बिहारशरीफ। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार कि बेटियों को सभी क्षेत्र में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जी जान से लगे हुए हैं ।जिसका परिणाम यह निकला है कि बिहार कि बेटियां भी सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है। सरकारी सेवा में भी बिहार कि बेटियां  अपने मेहनत के बलबूते मुकाम हासिल कर रही है।

आस्था को कमाई का जरिया बनाकर अथाह संपत्ति के मालिक बने बैठे हैं मंदिराधीश

CHARAN SINGH RAJPUT -
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करा रही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार के आरोप कोई नई बात नहीं है। देश में मंदिर कमाई का एक बड़ा जरिया बने हुए हैं। आस्था के नाम पर लोगों को ठगने का खेल लंबे से समय से चल रहा है। राम मंदिर भले ही सत्ता हथियाने का मुद्दा बना रहा हो पर देश में ऐसे कई मंदिर हैं जिनके पास अथाह संपत्ति है। राम मंदिर निर्माण के नाम पर हिन्दुओं की भावनाओं को भड़काकर एक बार नहीं बार-बार चंदा लिया गया है। इसका हिसाब न मांगा गया और न ही किसी ने दिया। हां यह बात दूसरी है कि राजनीतिक दल मंदिरों के नाम हो रहे भ्रष्टाचार को जनहित में कम उठाते हैं बल्कि राजनीतिक  लाभ के लिए ज्यादा उठाते हैं। आप नेता संजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करा रही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए आप नेता संजय सिंह ने उसकी जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। ये आरोप संजय सिंह ने बाकायदा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाये हैं। संजय सिंह आरोप है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने संस्था के सदस्य अनिल मिश्रा की मदद से दो करोड़ रुपए कीमत की जमीन 18 करोड़ रुपए में खरीदी। संजय सिंह ने इसे सीधे रूप से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताया है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि देश में मंदिर आस्था और राजनीति तक ही सीमित हैं या फिर इसके पीछे खेल कुछ और भी है।

टी वी पत्रकार भूपेंद्र ‌द्विवेदी बने उत्तर प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के जिलाध्यक्ष

गोरखपुर। टीवी पत्रकार भूपेंद्र ‌‌द्विवेदी उत्तर प्रदेश व‌र्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मनोनीत किए गए हैं। प्रदेश कार्यकारिणी ने उन्हें जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपते हुए कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारी और सदस्यों के नाम का भी अनुमोदन किया है।

ऐसे निस्तेज हुए योगी

Krishan pal Singh-

उत्तर प्रदेश में हाल में सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर चली उठा पटक में पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने तेवर दिखाये जिससे पार्टी की शीर्ष नेतृत्व बैकफुट पर जाते दिखा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूत सेवा निवृत्त आईएएस अधिकारी अरविन्द शर्मा को मंत्री न बनाने से लेकर कई मामलों में सीएम योगी ने केन्द्रीय नेतृत्व की खुली अवज्ञा की। नौबत उनको मुख्यमंत्री पद से शिफ्ट करने तक की आ गयी लेकिन संघ उनके लिए ढ़ाल बन गया। इससे योगी का मनोबल और बुलंद हो गया था लेकिन अंततोगत्वा केन्द्रीय नेतृत्व ने ऐसे पैंतरे दिखाये कि योगी की हालत दयनीय बन गई। योगी मुख्यमंत्री पद पर तो बने रहेंगे लेकिन उनका वजूद पुतले से ज्यादा नहीं होगा। उत्तर प्रदेश में विभिन्न पार्टियों के साथ गठबंधन करने से लेकर राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने वाले चेहरे तय करने तक के सारे अधिकार केन्द्रीय नेतृत्व ने अपने हाथ में ले लिये हैं। यहां तक कि उन्हें सुबह शाम पानी पी-पीकर गाली देने वाले ओमप्रकाश राजभर को भी दुबारा ससम्मान अपने मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए तैयार रहने का निर्देश योगी के ऊपर पारित कर दिया गया है।

कहीं आत्महत्याओं की घटनाएं न ले लें महामारी का रूप

CHARAN SINGH RAJPUT-

देश में कोरोना की महामारी से अभी छुटकारा नहीं पाया जा सका है कि कोरोना कहर  और सरकारों की विफलता का लोगों की जिंदगी पर यह असर पड़ा है कि अब आत्महत्या महामारी का रूप लेती जा रही है। महानगरों में आत्महत्या करने की घटनाओं ने अचानक विकराल रूप ले लिया है। कोई आर्थिक तंगी तो कोई कोरोना के साइड इफेक्ट से तो कोई कर्जे की वजह से आत्महत्या कर ले रहा है। आर्थिक  रूप और मानसिक रूप से कोरोना महामारी का गांवों पर भले ही कम असर पड़ा हो पर महानगरों में हालात बद से बदतर हो रहे हैं। हर कोई अपना रोना रो रहा है। पैसे के लेने को लेकर विवादों ने अचानक बड़ा रूप ले लिया है। चाहे नौकरीपेशा आदमी हो, व्यापारी हो या फिर दूसरे पेशों को अपनाने वाला, हर कोई परेशान नजर आ रहा है। कोरोना की तीसरी लहर के अंदेशे ने लोगों को और निराशा में लाकर खड़ा कर दिया है।

आईएएस अफसर के आरोप स्थानांतरण की हताशा या ईमानदारी की पीड़ा!

सरकार पर किसी विपक्ष के नेता द्वारा लगाए बेईमानी के आरोपो को तो राजनीतिक दोषारोपण मानकर खारिज किया जा सकता है। किन्तु जब यह आरोप युवा आईएएस अफसर की ओर से लगे तो गम्भीर विषय बन जाते है इसे आसानी से खारिज नही किया जा सकता है। बेशक ईमानदारी सदैव पुरस्कार की पात्र होना चाहिए। जिस राज्य में ईमानदारी सजा ओर तिरस्कार की पात्र हो जाए वहाँ सबकुछ ठीक चलता नहीं माना जा सकता है।मध्यप्रदेश केडर के आईएएस अधिकारी लोकेश जांगिड़ के आरोप कुछ इसी तरह की कहानी बयान कर रहें है।

पत्रिका डिजिटल के कर्मचारी परेशान हैं बिजनेस हेड से!

Patrika.com करीब तीन चार महीने पहले कई लाख के मासिक पैकेज में एक बिजनेस हैड शेखर सुमन को लेकर आई है लेकिन पत्रिका का ये निर्णय पहले से काम कर रही टीम के लिए बेहद खतरनाक साबित हुआ है। सुमन के अभद्र व्यवहार से नाराज होकर अब तक पांच कर्मचारी Patrika.com की नौकरी छोड़ चुके हैं और कई अन्य भी इसी राह पर आगे जा सकते हैं। शेखर सुमन के बारे में मशहूर है कि वे जिस संस्थान में जाते हैं, वहां की पुरानी टीम को नाकारा साबित करने में जुट जाते हैं और मैनेजमेंट को ये यकीन दिला देते हैं कि अगर पुरानी टीम रही तो टारगेट हासिल करना मुश्किल होगा।

पत्रकार ने लोकभवन से पुलिस कर्मी का उड़ा लिया हैलमेट, सीसी फुटेज में कैद हुआ, खूब भद्द पिटी

लखनऊ। अमर उजाला, स्वदेश जैसे अखवार में काम कर चुका यह पत्रकार तो हेलमेट चोर निकला। लोकभवन के स्टैण्ड से एक पुलिस कर्मी की गाड़ी से हैलमेट उठाते हुए सीसीटीवी में कैद हो गया। बाद में बड़ी फजीहत के बाद लौटाया। वर्तमान में यह पत्रकार खुद को एक अखबार का स्थानीय संपादक और मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया सेल का कर्मचारी बताता है।

ABP News concludes another remarkable edition of ‘Yog Sammelan’

Noida, 21st June 2021: As International Yoga Day comes near, ABP News recently concluded the 6th edition of its ‘Yog Sammelan’. Much relevant for our times in a society still recovering from the numerous implications of the COVID-19 pandemic, the special conclave on Yoga, Ayurveda, and other aspects of healthy living was organized by the news channel to educate the viewers on mindfulness, achieving balance, coping with anxiety, and becoming mentally & physically resilient. 

सुलभ की पत्नी को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग




संयुक्त मीडिया क्लब के बुंदेलखंड अध्यक्ष इरफान पठान व महोबा जिलाध्यक्ष भगवानदीन यादव के मार्गदर्शन में आज जनपद की तहसील कुलपहाड़ के अध्यक्ष बृजेंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में प्रतापगढ़ के पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की संदिग्ध मौत के मामले में निष्पक्ष जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही किए जाने की मां की.

GIJN offering three media outlets free, in-depth assessments of their organization

Global Investigative Journalism Network (GIJN) Advisory Services, under its Investigative Journalism Media Assessment Program (IJ-MAP) is offering three small-to-medium media outlets free, in-depth assessments of their organization, and follow-up with expert advice in priority areas.

19.6.21

ट्विटर पर लगाम, दिखेगा व्यापक प्रभाव

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में धीरे-धीरे  चुनावी माहौल बनने लगा है। तमाम दलों के नेताओं की यूपी में सक्रियता बढ़ गई है, जो लोकतंत्र में स्वभाविक भी है, इसी से देश को मजबूती मिलती है, लेकिन चिंता तब बढ़ जाती है जब तमाम राजनैतिक दल और उनके नेता एवं समर्थक पर्दे के पीछे से चुनाव जीतने हराने के लिए साजिशें रचना शुरू कर देते हैंै। खुले तौर पर राजनैतिक दलों द्वारा यह साजिशें अपने पक्ष में वोटों के धु्रवीकरण के लिए रची जाती हैं। इसी लिए चुनावी वर्ष में किसी भी राज्य सरकार के लिए प्रदेश में अमन-चैन और सौहार्द बनाए रखना आसान नहीं होता है। चुनाव जीतने के लिए जो साजिशें रची जाती हैं, उसमें बेवजह नेताओं द्वारा उतेजक और भ्रामक बयानबाजी,विरोधी दलों के नेताओं की छवि पर कुठाराघात, साम्प्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिशें, जातीय विद्वेष बढ़ाने के प्रयास जैसी घटनाएं शामिल रहती हैं तो चुनाव में विरोधियों को पटकनी देने के लिए ‘साम- दाम-दंड-भेद’ का भी सहारा लिया जाता है। यह सब ‘हरकतें’ इतने सुनियोजित तरीके से अंजाम तक पहुंचाई जाती हैं कि जनता के लिए भी इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि हकीकत क्या है। करीब-करीब सभी चुनावों के समय यह मंजर आम हो जाता है। नेताओं के इस तरह के झूठे और बेबुनियाद ओरोपों/चर्चाओं को अमली जामा पहनाने का काम सबसे अधिक कोई करता है तो निश्चित ही इसमें टिवटर जैसे सोशल नेटवर्क अव्वल हैं।अपनी इन्हीं हरकतों के चलते हिन्दुस्तान में ट्विटर विवादों में घिर गया है।

कोरोना वैक्सीन की एक डोज़ बनाने में कितना खर्च आता होगा?

Vishwa Deepak-
 
केला गणतंत्र या समाजवाद -- क्या चाहिए?

फार्मा सेक्टर में काम करने वाले एक मित्र से मैंने पूछा कि कोरोना वैक्सीन की एक डोज़ बनाने में अनुमानत: कितना खर्च आता होगा. उन्होंने कहा कि सब मिलाकर यानि स्टाफ की सैलरी, बिजली, मशीन और ट्रांसपोर्ट का 10-15 रुपये. इससे ज्यादा नहीं. इसे बढ़ाकर अगर डबल कर दें तो भी 30 रुपये से ज्यादा नहीं होगा.

हिंदी के सुपरिचित लेखक-कवि-संपादक सुरेश सलिल का आज जन्मदिन है

Urmilesh-
 
हमारे वरिष्ठ साथी और हिंदी के सुपरिचित लेखक-कवि-संपादक Suresh Salil का आज जन्मदिन है. उनका यह जन्मदिन इस बार खास है क्योंकि वह 79 पूरा कर अपने जीवन के 80 वें वर्ष में प्रवेश कर गये हैं. सुरेश जी से मेरी पहली मुलाकात कहां हुई, ये तो याद नहीं पर निश्चय ही वह सन् 1978-79 का वर्ष रहा होगा, जब मैंने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एम.फिल्./पीएच.डी. के लिए दाखिला लिया था. 


18.6.21

अहद प्रकाश जी की स्मृति पर मातृभाषा ने घोषित किए दो पुरस्कार

इंदौर। प्रसिद्ध बाल साहित्यकार एवं ग़ज़लकार अहद प्रकाश जी की स्मृति में मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने दो सम्मान, 'अहद प्रकाश बाल साहित्य गौरव सम्मान' एवं 'अहद प्रकाश ग़ज़ल रत्न सम्मान', घोषित किए, जो प्रतिवर्ष एक बाल साहित्यकार एवं एक ग़ज़लकार को दिए जाएँगे। इन पुरस्कारों के लिए देशभर से प्रविष्टियाँ आमंत्रित की जाएँगी एवं चयन मण्डल द्वारा सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति का चयन कर, उन्हें समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

भाजपा के लिए आफत बनते जा रहे राकेश टिकैत

CHARAN SINGH RAJPUT-

तीन नये किसान कानूनों को वापस कराने के लिए दिल्ली बार्डर पर चल रहे किसान आंदोलन का चेहरा बन चुके राकेश टिकैत भाजपा के लिए लगातार आफत बनते जा रहे हैं। अब राकेश टिकैत ने 26 जून आपातकाल की वर्षगांठ को लोकतंत्र बचाओ किसान बचाव दिवस मनाने का ऐलान किया है। 26 जून को किसान देशभर के सभी राजभवनों का घेराव करेंगे। देश में अघोषित आपातकाल मानते हुए किसान 26 जून को मोदी सरकार के खिलाफ फिर से हुंकार भरेंगे। मतलब जहां भाजपा 26 जून को कांग्रेस को घेरने क कोशिश करेगी वहीं उसे किसानों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ेगा। राकेश टिकैत ने मोदी सरकार को खुली चेतावनी दे दी है कि अब सरकार से बिना शर्त बातचीत होगी।

अशोक गहलोत के वर्चस्व को चुनौती देने की स्थिति में नहीं हैं पायलट

कृष्णमोहन झा-

राजस्थान में कुछ माह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वर्चस्व को चुनौती देकर सचिन पायलट ने न केवल अपना उपमुख्यमंत्री पद गंवा दिया था बल्कि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद की बागडोर भी उनके हाथ से निकल गई थी । उसके बाद से वे जिस तरह शांत दिखाई दे रहे थे उससे इन अनुमानों को बल मिल रहा था कि गहलोत के हाथों मिली शिकस्त ने उन्हें  हताश कर दिया है। इस बीच न तो उन्होंने फिर से गहलोत सरकार में उपमुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा उजागर की और न ही दुबारा  प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद  हासिल करने के लिए आलाकमान से गुहार लगाई।

17.6.21

राम मंदिर निर्माण में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी जा रहा है भाजपा के पक्ष में!


CHARAN SINGH RAJPUT-

विपक्ष को ही नहीं हर सेकुलर व्यक्ति को यह समझ लेना चाहिए कि जब हम भाजपा समर्थकों को अंधभक्ति की संज्ञा देते हैं तो किसी भी तरह के आरोप का उन पर कोई असर नहीं पडऩे वाला है। आज की तारीख में न ही विपक्ष के आरोपों को कोई जिम्मेदार तंत्र गंभीरता से ले रहा है। मोदी सरकार की गलत नीति के चलते बेरोजगार होने के बावजूद, कोरोना महामारी में सरकार की विफलता के चलते अपनों के खोने के बावजूद , पेट्रो पदार्थांे की बेहताशा वृद्धि के बावजूद, गैस सिलेंडर की सब्सिडी बिना बताये खत्म करने के बावजूद जो लोग मोदी और योगी सरकार के खिलाफ कुछ सुनने को तैयार नहीं उनके लिए कोई आरोप बेकार है।

16.6.21

उत्तर प्रदेश बंटवारे की खबरों के पीछे का खेल क्या है...

CHARAN SINGH RAJPUT
    
कहा जाता है कि बिना आग के धुंआ नहीं उठता है। यदि सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के बंटवारे की खबर वायरल हुई है तो इसके पीछे कुछ खेल तो जरूर है। दावा व्यक्त किया जा रहा है कि 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल और बुंदेलखंड को अलग कर दिया  जाएगा। मतलब उत्तर प्रदेश के तीन हिस्से। उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वांचल। सूत्रों की मानें तो योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से लंबी वार्ता की वजह उत्तर प्रदेश का बंटवारा है। वैसे भी योगी आदित्यनाथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मिले हैं। कैबिनेट विस्तार में तो राष्ट्रपति से चर्चा का कोई मतलब नहीं होता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई मीटिंग विदर्भ को अलग राज्य बनाने को लेकर बताई जा रही है। विदर्भ की राजधानी नागपुर को बनाने की योजना है। वैसे भी नागपुर में भाजपा के मातृ संगठन आरएसएस का मुख्यालय है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काम करने का यह अपना तरीका है कि वह किसी बात को लीक नहीं होने देते। चाहे नोटबंदी का मामला हो, जीएसटी का मामला हो या फिर धारा 370 हटाने का उन्होंने किसी को कानोंकान खबर नहीं लगने दी।

सोशलमीडिया की वर्चुअल मिक्सी में तथ्य ऐसे मथे जा रहे हैं कि...

-जयराम शुक्ल

सच के शीर्षासन पर झूँठ का झंडा... सोशलमीडिया की वर्चुअल मिक्सी में तथ्य ऐसे मथे जा रहे हैं कि सत्य को झूँठ से अलग करना दही से उसकी खट्टई अलग करने  जैसा है...

हमारे शहर में पुराने जमाने के खाँटी समाजवादी नेता हैं- दादा कौशल सिंह। खरी-खरी कहने में उनका कोई सानी नहीं। बात-बात में वे एक डायलॉग अक्सर दोहराते हैं - बड़ी अमसा-खमसी मची है, पतै नहीं चलि पावै कि का झूँठि आय, का फुरि। यानी कि सच और झूठ में ऐसा मिश्रण हो गया है कि समझना मुश्किल।

13.6.21

सचिन पायलट कांग्रेस में हैं भी या नहीं?

-निरंजन परिहार

सियासत के इस सत्य और उसके तथ्य को सचिन पायलट अच्छी तरह समझते हैं कि राजनीति में प्रतीकों का बड़ा महत्व है। समझदार नेता प्रतीकों के जरिए संदेश देते हैं। सो, इशारों को समझनेवाले इशारों – इशारों में पूछ रहे हैं कि पायलट कांग्रेस में हैं भी या नहीं? 


बिल्ली के भाग से छींका टूटने की रणनीति से तो फतह नहीं किया जा सकता उत्तर प्रदेश!

चरण सिंह राजपूत-

अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बिसात बिछनी शुरू हो गई है। भले ही चुनाव की घोषणा होने में अभी बहुत समय है पर राजनीतिक दलों ने चुनाव के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है। वह बात दूसरी है कि विपक्ष से ज्यादा सत्तापक्ष ज्यादा सक्रिय नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता का फायदा उठाते हुए गोटी फिट करने का खेल शुरू कर दिया है। वह चुनाव को मजबूत करने के लिए न लखनऊ बल्कि दिल्ली में बैठे नेता नेताओं को भी साध रहे हंै।  विपक्ष भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने करीबी अरविंद शर्मा को उत्तर प्रदेश में भेजने के बाद उपजा योगी और मोदी विवाद विपक्ष के लिए राहतभरा महसूस हो रहा है पर इससे भी योगी मजबूत हुए हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामने पं. बंगाल में ममता बनर्जी, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और बिहार में तेजस्वी यादव की तरह कौन ताल ठोकेगा ? योगी सरकार के खिलाफ बसपा की चुप्पी तो उसे भाजपा के खेमे में खड़ा कर रही है। प्रियंका गांधी लगातार सक्रियता के बावजूद कांग्रेस अभी भी उत्तर प्रदेश में कोई खास छाप नहीं छोड़ पाई है। आप का उत्तर प्रदेश में कुछ खास जनाधार नहीं है। असद्दुदीन आवैसी हर चुनाव में भाजपा के लिए काम कर रहे हंै। ऐसे में सपा ही मुख्य विपक्ष पार्टी मानी जा रही है। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिल्ली के भाग से छींका टूटने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। न वह योगी सरकार के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन खड़ा कर पाये हैं और न ही चुनावी समर में जाने के लिए उनके पास मजबूत संगठन है।

विख्यात धर्म प्रचारक धर्मा भगतजी पंचतत्व में विलीन

सुमेरपुर निवासी भगतजी ने देश को लाखों लोगों को धर्म का मार्ग दिखाया

जयपुर | 12 जून, 2021


श्रीमद्भगवतगीता के जीवन संदेश को लोगों के जीवन में उतारनेवाले प्रख्यात धर्म प्रचारक धर्मा भगतजी आज पंचत्व में विलीन हो गए। राजस्थान के पाली जिले के सुमेरपुर कस्बे में 11 जून की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। जवाई नदी के तट पर आज दोपहर मंत्रोच्चार के बीच परंपरागत धार्मिक विधान से उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। वे 83 वर्ष के थे। देश की राजधानी दिल्ली, सहित जोधपुर, अजमेर, ब्यावर एवं मारवाड़ - मेवाड़ इलाके में उनका खासा सम्मान था। राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत एवं नीरज डांगी सहित राजस्थान में विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री व पाली के सांसद पीपी चौधरी, सुमेरपुर के विधायक जोराराम कुमावत व सिरोही के विधायक संयम लोढ़ा एवं विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े कई प्रमुख लोगों धर्माभगतजी के निधन पर संवेदना व्यक्त की है।    

10.6.21

उत्तर प्रदेश भाजपा में अंदरूनी अदावत का खुला एक और मोर्चा

Krishan pal Singh-
    
उत्तर प्रदेश में भाजपा से जुड़ी सनसनी का अंत अभी भी नहीं हुआ है। अपने खिलाफ उबरे सभी अनिष्ट ग्रहों को शांत कर लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंत फला सो सब भला की तर्ज पर टाइम्स आफ इंडिया को दिये इंटरव्यू में एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के प्रति वफादारी की कसमें खायी जिससे लगा कि उनकी दूरियां अब पट जायेगी लेकिन लगता है कि भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने अभी उन्हें शह देने के खेल को विराम नहीं दिया है। कांग्रेस के दिग्गज युवा नेता जितिन प्रसाद को अचानक भाजपा में शामिल कर लिया गया। प्रकट तौर पर तो इसे कांग्रेस की रही सही नीव भी धसका देने का उपक्रम घोषित किया जा रहा है लेकिन सयाने यह कह रहे हैं कि इसके निहितार्थ कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना के बतौर समझे जाने चाहिए।

'मौत की प्रयोगशाला' बनकर रह गया कोरोना का इलाज

charan singh rajput-

आगरा पारस अस्पताल में कोराना के गंभीर मरीजों को मारने के लिए जो माकड्रिल किया गया उससे स्पष्ट हो चुका है कि कोरोना महामारी को डॉक्टरों ने एक प्रयोगशाला के रूप में लिया। कोरोना मरीजों के साथ लगातार प्रयोग किये गये। जगजाहिर है कि मॉकड्रिल किसी आने वाले संकट से निपटने के लिए किया जाता है। पारस अस्पताल में तो मरीजों क जान लेने के लिए यह मॉकड्रिल किया गया मतलब संकट को और बढ़ाने के लिए। मोदी सरकार और भाजपा शासित प्रदेश सरकारों ने अपने भोंपू मीडिया के माध्यम से देश में ऐसा माहौल बना दिया है कि  इन राज में आंख, कान, दिमाग सब बंद रखो। बस जो बोला जाए उसको सुनो और उस पर अमल करो। यही वजह है कि पढ़े लिखे समाज में जो पेशा विज्ञान की देन है उस पेशे से जुड़ा डॉक्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में यह कहते हुए सुनाई पड़ रहा है कि 'दिमाग मत लगाओ और मॉकड्रिल कर दो। इससे हम समझ जाएगा कि कौन मरेगा और कौन नहीं। जिस मरीज को आक्सीजन की जरूरत पड़ी उसके लिए पांच मिनट आक्सीजन रोकने का मतलब पांच मिनट सांस रोकना है। वह भी तब जब मरीज को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो री हो। मतलब गंभीर मरीजों की हत्या कर देना। जिस अस्पताल में मरीज जिंदगी मांगने गया उस अस्पताल ने उसे मौत दे दी। मॉकड्रिल के इस खेल में जिन 22 मरीजों ने छटपटाते हुए दम तोड़ा है। इनकी हत्या का जिम्मेदार न केवल अस्पताल प्रबंधन और उसके डॉक्टर हैं पर बल्कि शासन और प्रशासन भी है। आखिर एक निजी अस्पताल ने मरीजों की जान लेने का इतना बड़ा दुस्साहस कर लिया ?

आज की राजनीति के भस्मासुर बनते जा रहे हैं मोदी!

CHARAN SINGH RAJPUT-

अपनी अति महत्वाकांक्षा और जनता को धोखे में रखने की गलतफहमी पाले बैठे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश का तो बंटाधार कर ही दिया अब भाजपा के लिए भी भस्मासुर बनने जा रहे हैं। अपने सात साल के कार्यकाल में मोदी ने जो चाहा वह किया। मोदी ने औपचारिकता के लिए सलाह-मशविरा के लिए बैठकें जरूर की पर उनका हर निर्णय उनका अपना ही रहा। चाहे नोटबंदी, रही हो, जीएसटी रही हो, धारा 370 का हटाना हो, राम मंदिर निर्माण के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट से फैसला दिलवाना हो, कोराना काल में वैक्सीन का विदेश भिजवाना हो सब मोदी के मनमानी के निर्णय रहे हैं। केंद्र सरकार या फिर भाजपा के संगठन में उन्होंने जो चाहा वह किया। भाजपा पर एकछत्र राज करने वाले नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को साइड लाइन करने के लिए अब भाजपा के मातृ संगठन आरएसएस से पंगा ले लिया है, जो उन्हें भारी पडऩे वाला है। यह भी जमीनी हकीकत है कि नरेंद्र मोदी अपने स्वभाव के अनुकूल इतनी जल्दी हार नही मानने वाले हैं। ऐसे में आरएसएस और नरेंद्र मोदी की टीम का टकराव योगी आदित्यनाथ को मजबूती देगा या फिर भाजपा को पतन की ओर ले जाएगा ? वैसे भी भाजपा के समर्थक योगी आदित्यनाथ को मोदी का विकल्प मानने लगे हैं।

8.6.21

संघी नेतृत्व में भारत को आज फिर से गुलामी के दिनों की तरफ ढकेला जा रहा है!

Shyam Singh Rawat-

सन् 1857 की क्रांति आज भी प्रासंगिक है!

ब्रिटिश शासन काल में भारत की जैसी दुर्दशा बना दी गई थी, कमोवेश संघी नेतृत्व में आज भारत को बड़ी चतुराई से उसी राह पर धकेला जा रहा है। इसे एक ओर 1943-44 में संघी श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा बंगाल में खाद्यान्न का कृत्रिम अभाव पैदा कर उसे विदेश भेजने और उसके कारण वहां 30 लाख लोगों को भूख से तड़पते हुए जान गँवाने पर मजबूर कर देने की ऐतिहासिक घटना के संदर्भ में व्याख्यायित किया जा सकता है, तो दूसरी तरफ सरकारी आतंक के जरिए लोगों की आवाज दबाने की वर्तमान कुत्सित मानसिकता के माध्यम से सरलतापूर्वक समझा जा सकता है।  

अपने हठयोग में सफल रहे योगी!


कृष्णमोहन झा-

पश्चिम बंगाल  चुनावों में सत्ता हासिल करने का सुनहरा स्वप्न बिखर जाने के बाद भारतीय  जनता पार्टी ने अब अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए  अभी से कवायद शुरू कर दी है। यद्यपि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अभी आठ माह का समय बाकी है परंतु भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को अभी से यह चिंता सताने लगी है कि  राज्य की योगी सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज़  मंत्रियों और पार्टी विधायकों की अभी से मान मनौव्वल नहीं की गई तो आठ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में  उसे  2017 की  शानदार जीत का इतिहास दोहराने में मुश्किलों का सामना कर पड़ सकता है।  गत विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ दो दशकों के बाद राज्य की   सत्ता हासिल करने वाली भाजपा का अभी से चुनाव की तैयारियों में जुट जाना यही संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता और संगठन के अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है।

7.6.21

अचीवर्स जंक्शन पर मनाया गया डॉ. प्रणयी जन्मशती समारोह

दुनिया के तमाम देशों के विभिन्न क्षेत्र में उपलब्धि प्राप्त करने वाली शख्सियत पर कार्यक्रम करने वाले चैनल अचीवर्स जंक्शन ने आज दिनांक 05 जून, 2021 को संस्कृत, प्राकृत, हिंदी और भोजपुरी के निष्णात आचार्य, कवि - लेखक, शिक्षाविद् , ' पिया के गाँव ' जैसी सुपर हिट फिल्म के गीतकार स्व. ( डॉ. ) रामनाथ पाठक  ' प्रणयी ' का जन्मशती समारोह मनाया। इस कार्यक्रम में देश के कोने-कोने के साहित्यकारों, फिल्मकारों, कलाकारों और डॉ. प्रणयी के परिजनों ने  भाग लिया।  चैनल के निदेशक मनोज भावुक ( दिल्ली ) के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. ब्रज भूषण मिश्र ने डॉ. प्रणयी के व्यक्तित्व-कृतित्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि हिंदी-संस्कृत, भोजपुरी और पॉली भाषा में डॉ. प्रणयी की दो दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हैं। फिल्म समीक्षक मनोज भावुक ने उनके भोजपुरी फिल्मी दुनिया से जुड़ाव के बारे में बताया। भावुक ने बताया कि  ‘’ आँख से आँख मिलिके जे चार हो गइल, साँच मानऽ जिनिगिया हमार हो गइल ‘’, …‘ पहिले पहिल हम अइलीं गवनवाँ, देखली डीजल गाड़ी हो दिलवर जानी’ या ‘ जुग-जुग जीयसु ललनवाँ’ भवनवाँ के भाग जागल हो, ललना लाल होइहें कुलवा के दीपक मनवाँ में आस लागल हो’ और ए डाक्टर बाबू बताईं दवाईं... ये सारे गीत  सबने सुने हैं. लेकिन इन गीतों के गीतकार डॉ. प्रणयी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। 1985 की सुपर हिट भोजपुरी फिल्म ‘ पिया के गाँव’ के इन गीतों को संगीत दिया था चित्रगुप्त जी ने. प्रणयी जी ने फिल्म पिया निरमोहिया का भी टाइटल सांग लिखा था.

कोरोना काल में भी नहीं सुधर रहे अस्पतालों के संचालनकर्ता, वसूल रहे मनमानी फीस

देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर्स द्वारा दिया गया योगदान सराहनीय है. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बेहतरीन तालमेल के चलते देश ने काफी हद तक इस महामारी पर काबू पा लिया है. बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात के संस्करण में भी डॉक्टरों की उपलब्धि पर बात की गई. इस दौरान पीएम मोदी ने डॉक्टरों, नर्सों, मेडिकल स्टाफ के कार्यों की न सिर्फ तारीफ़ की, बल्कि उनके कार्यों को भी सराहा।

4.6.21

विपक्ष के तीखे तेवरों को ‘कुंद’ करने के लिए बीजेपी की आक्रमक नीति

स्वदेश कुमार,लखनऊ

     लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश की सत्ता में पुनः वापसी के लिए ‘मिशन-2022’ पर काम शुरू कर दिया है। एक तरह से अगले वर्ष होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए केन्द्र ने कमान अपने हाथों में ले ली है। आलाकमान के  के कई बड़े नेता यूपी आकर संगठन और सरकार की ऊपर से नीचे तक नब्ज टटोल रहे हैं, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि नब्ज टटोलते समय सरकार या संगठन की कोई कमजोरी विरोधियों के हाथ नहीं लग जाए। जिससे जनता के बीच योगी सरकार को लेकर किसी तरह का गलत मैसेज जाए। इसी को ध्यान में रखकर बीजेपी आलाकमान संभवता योगी सरकार की कैबिनेट  में कोई बड़ा फेरबदल नहीं करेगी ? लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि सत्ता विरोधी लहर को थामने के लिए आलाकमान द्वारा कुछ किया ही नहीं जाएगा। आलाकमान ने जो रणनीति बनाई है उसके अनुसार विरोधी दलों के नेता जितनी तेजी से योगी सरकार के खिलाफ हमलावर होंगे उसकी दुगनी तेजी से उन्हें पार्टी और सरकारी स्तर से जबाव दिया जाएगा, मगर मर्यादा का भी ध्यान रखा जाएगा। विरोधियों के आरोपों को तर्कपूर्ण तरीके से ‘काटा’ जाएगा।

डाक्टर बनाओ ड्राकुला नहीं... मंजूर करो इस्तीफे

anand purohit-
    

मानवता और मानव धर्म को बचाओ, मंजूर करो इस्तीफें।.......
डाक्टर बनाओ ड्राकूला नहीं......

खबर ये है कि इंदौर के लगभग 480 डॉक्टर सहित प्रदेश के सभी जूनियर डॉक्टर्स ने सामूहिक इस्तीफा सौंपा..... *गर सरकार में गैरत है तो ऐसे बेगैरत और गैरजिम्मेदारों का इस्तीफा तुंरत मंजूर कर लेना चाहिए यही नहीं इनसे वसूली की जानी चाहिए जो इनकी इस उच्च व्यावसायिक शिक्षा पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी व्यय हुआ है......

30.5.21

मोदी जी, पुरानी पेंशन बहाल करें, फ्रीज किए गए महंगाई भत्ते को रिलीज करें!

लखनऊ 30 मई : राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष जे एन तिवारी ने देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी को उनके आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक पत्र प्रेषित करते हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए उन सुविधाओं को बहाल करने की मांग किया है, जिसका सीधा असर उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों पर पड़ रहा है।

स्वामी, बाबा या सुपर प्राइम मिनिस्टर



स्वामी रामदेव कहें या बाबा रामदेव, पर है तो वह एक कारोबारी आदमी ही और एक कारोबारी भला हमारे देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को टर-टर कैसे कह सकता है? जबकि ठीक एक दिन पहले वे उन्हीं के पत्र के जवाब में खुद पत्र लिखकर डॉक्टर्स के लिए कहे गए अपने अपशब्दों के लिए माफी मांग चुका होता है। है ना अजीब!

‘अगेंस्ट द वेरी आइडिया ऑफ़ जस्टिस: यू.ए.पी.ए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़’ पुस्तिका का विमोचन

रांची  : मूवमेंट अगेंस्ट यु.ए.पी.ए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़ (एम.यु.आर.एल.) – राष्ट्रिय स्तर पर विभिन्न मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संस्थाओं का साझा मंच के तहत झारखण्ड में पुस्तिका ‘अगेंस्ट द वेरी आइडिया ऑफ़ जस्टिस: यु.ए.पी.ए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़’ का विमोचन हुआ.

भारत की अखंडता-संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा है विदेशी सोशल मीडिया

संजय सक्सेना, लखनऊ   

विदेशी सोशल कम्पनी ’द्विटर’ और वाटसएप का कुछ वर्ष पूर्व ठीक वैसे ही हिन्दुस्तान में पर्दापण हुआ था, जैसे कभी ‘ईस्ट इंडिया कम्पनी’ के नाम पर अंगे्रज व्यापार करने के लिए भारत में पधारे थे।ईस्ट इंडिया कंपनी सन 1600 में बनाई गई थी। उस समय ब्रिटेन की महारानी थीं एलिजाबेथ प्रथम थीं, जिन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी को एशिया में कारोबार करने की खुली छूट दी थी,बात एशिया में कारोबार की होती जरूर थी,लेकिन कम्पनी की नजर सिर्फ और सिर्फ हिन्दुस्तान पर टिकी हुई थी। कम्पनी के पीछे के इरादों को कोई भांप नहीं पाया था। इसी के चलते यह कंपनी कारोबार करते-करते ही भारत में सरकार बनाने की साजिश तक में कामयाब हो गई। उसकी इस साजिश को अमलीजामा पहनाने वालों में  कुछ हिन्दुस्तानियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा था।

आज उदंत मार्तण्ड की कमी खलने लगी है

वह 30 मई का ही दिन था, जब भारत में एक क्रांतिकारी युग का उदय हुआ था। एक ऐसा क्रांतिकारी युग, जो खुद अपनी बेबाक दुनिया रचने जा रहा था। जिसकी चाह न सिर्फ स्वधीनता की प्राप्ति थी, बल्कि देश के क्रांतिकारियों, नौंजवानो, लेखकों और कलमकारों को अपनी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी देना था। देश में कई अंग्रेजी अखबार अपनी पैठ बना चुके थे। उनमें भारतीयों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का कोई स्थान नहीं था। उस समय हिंदी भाषी भारतीयों के पास ऐसा सशक्त माध्यम नहीं था, जिन्हे वह अपना कह सके, जिसके माध्यम से अपनी बात तानाशाही अंग्रेजी हुकुमत तक पहुंचा सके।

कुमार विश्वास के कोविड केयर केन्द्र पर पहुँची स्थानीय विधायक, कुमार के कार्यालय ने दी शीत-निद्रा टूटने पर शुभकामनाएँ




 
मशहूर कवि कुमार विश्वास का कोविड केयर सेंटर अब जनप्रतिनिधियों के लिये भी प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है। कुमार की इस का अनुकरण अब कई राजनीतिक लोग भी बखूबी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में कुमार विश्वास द्वारा अम्बेडकर नगर जनपद के शुकुलबाजार गॉंव में शुरू कराए गए कोविड केयर सेंटर पर शनिवार को स्थानीय विधायक भी पहुँची। उन्होंने वहॉं पहुँच कर ज़रूरतमंदों के बीच कुमार विश्वास द्वारा भिजवाए गए कोविड केयर किट का वितरण भी किया।

कुमार विश्वास ने एक ही दिन में खुलवाया कई गाँवों के लिए कोविड केयर सेंटर

प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने इन दिनों गॉंवों को कोरोना मुक्त बनाने की एक मुहिम छेड़ रखी है। गॉंव बचाओ के नाम से चल रहे अपने अभियान में कुमार अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में बसे सैकड़ों गॉंवों की मदद कर चुके हैं। गॉंव वासियों द्वारा अनुरोध मिलने पर कुमार की टीम द्वारा वहॉं कोविड केयर सेंटर खुलवाए जा रहे हैं तथा ग्रामीणों के बीच कोरोना केयर किट के ज़रिए सभी आवश्यक दवाएँ पहुँचाई जा रही हैं। बिहार के लोगों की ट्विट का रिप्लाई करते हुए कुमार ने कई गॉंवों के लिए कोविड केयर सेंटर की व्यवस्था करा दी है। अररिया से प्रभात यादव ने कुमार से कोविड केयर सेंटर खोलने का अनुरोध करते हुए ट्विटर पर लिखा-

23.5.21

जनता मूर्ख बन रही है और मोदी बना रहे हैं!

CHARAN SINGH RAJPUT-

वैसे तो हर सरकार ने किसी न किसी रूप में जनता को ठगा ही है पर मोदी सरकार ने ऐसा बेवकूफ बनाया कि कहीं न छोड़ा। उनको भी जिनके बलबूते पर सत्ता का मजा लूटते रहे। क्या रोजी-रोटी स्वयंभू हिन्दुओं की नहीं गई है ? क्या कोरोना कहर से ये लोग अछूते रह गये हैं ? क्या आज के हालात में इन लोगों के बच्चों का भी भविष्य और जान खतरे में नहीं है ? जमीनी हकीकत तो यह है कि हिन्दुत्व का राग अलापने वाली मोदी सरकार ने सबसे अधिक हिन्दुओं की भावनाओं से ही खिलवाड़ किया है।  ये जो नदियों में शव बह रहे हैं किन लोगों के हैं ? ये जो शवों के आसपास कपड़े दिखाई दे रहे है किस धर्म के लोगों के हैं ?

जरूरतमंद परिवारों को मदद से निगम ने किया इंकार तो माकपा ने बनाया अनाज बैंक

माकपा पार्षदों ने दिया अपना वेतन, तो रेड वालंटियर्स ने संभाला मोर्चा, पहुंचाया राशन

कोरबा। लॉक डाऊन के कारण बांकी मोंगरा क्षेत्र में पसरती भुखमरी से लड़ने के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने अनाज बैंक की स्थापना की है। इस अनाज बैंक से आज इस क्षेत्र के मोंगरा बस्ती, मड़वाढ़ोढा तथा गंगानगर में लगभग 50 गरीब परिवारों को राशन किट वितरित किया गया। इस किट में चावल, दाल, तेल, नमक, चाय और शक्कर के साथ ही प्याज, मसाले और हरी सब्जियां भी हैं। प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को न्यूनतम एक सप्ताह का राशन देने का लक्ष्य रखा गया है।

22.5.21

कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के!



कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के : निगम कंगाल, तो माकपा पार्षद ने की व्यवस्था, कहा- माकपा कार्यकर्ता महापौर के साथ मिलकर चंदा इकट्ठा करने के लिए तैयार

कोरबा। कोरोना महामारी की इस दूसरी भयानक लहर में भी कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के काम कर रहे हैं। कोरबा निगम क्षेत्र के अंतर्गत सैकड़ों मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को घर-घर जाकर कोरोना पीड़ितों का सर्वे करने और कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता फैलाने का काम दिया गया है, लेकिन ये 'कोरोना योद्धा' बिना किसी सुरक्षा किट के मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर यह काम कर रहे हैं।

18.5.21

मजबूर पिता ने बेटी की लाश को कंधे पर लादा और बेटे के साथ श्मशान घाट निकल पड़ा, देखें वीडियो

Rizwan Chanchal-

एक बार फिर मानवीय संवेदना को तार तार करता वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जो नंगे होते समाज पर प्रश्न चिन्ह छोड़ गया। कंधे पर बेटी का शव उठाये सड़क पर चलते इस बाप के दर्द से न तो पत्थर दिल होते समाज के उन तमाम आते जाते राहगीरों वाहन सवारों में किसी  एक का दिल पसीजा और न ही कोई प्रसाशनिक सहायता दी गई।


17.5.21

बौद्धिक श्रमिकों को कोरोना योद्धा घोषित करने को लेकर सियासी दलों की मंशा साफ़ नहीं

विनय प्रकाश सिंह-

देश भर में लगातार कोरोना की जद में आ रहे बौद्धिक श्रमिकों (पत्रकारों) की स्थिति को लेकर राजनीतिक दल केवल बयानबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस जिन राज्यों में विपक्ष में है उन राज्यों में  कांग्रेस नेताओं द्वारा पत्रकारों को कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग मीडिया के माध्यम से की जा रही है।जिन राज्यों में भाजपा विपक्ष में है वहा भाजपा प्रदेश नेतृत्व पत्रकारो को कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग कर रहा है। पत्रकारों को लेकर लगातार बयानबाजी की जा रही है। कई राज्यों के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के उप राष्ट्रपति तक ने ट्वीट कर पत्रकारों को कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग की है।

भागवत जी, अब जलती चिताओं पर 'सकारात्मकता' का पाठ पढ़ाने वाले से मुक्ति चाहता है देश

‬CHARAN SINGH RAJPUT-
 
क्या कोई जिम्मेदार आदमी इतना संवेदनहीन और क्रूर हो सकता है कि कोरोना महामारी में आक्सीजन की कमी से मरने वाले लोगों को 'मुक्ति' मिलने की बात कहे। आरएसएस के कर्णधार तो अपने इस संगठन को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बताता रहा है। आरएसएस से जुड़े लोग तो संगठन को मानवता को समर्पित बताते-बताते थकते नहीं हैं। क्या आरएसएस इस सोच पर नाज करता है।



15.5.21

काम करो नकारात्मक और उपदेश दो सकारात्मकता का, नहीं चलेगा ...


CHARAN SINGH RAJPUT-
    
 
गजब खेल है आरएसएस और भाजपा का काम करेंगे नकारात्मक, माहौल बनाएंगे बांटने का और उपदेश देने निकल जाएंगे सकारात्मकता का। कोरोना कहर में मोदी सरकार स्वास्थाएं सेवाओं के प्रति उदासीन रवैया अपनाती रही। भावनात्मक मुद्दों का राग छेडक़र लोगों को बेवकूफ बनाती रही। बेतहाशा महंगाई के साथ नोटबंदी, जीएसटी, नये किसान कानून लागू कर औेर श्रम कानून में संशोधन कर लोगों का जीना मुश्किल कर दिया। रोजी-रोटी का बड़ा संदेश में खड़ा कर दिया। घोर लापरवाही बरत कर लोगों को कोरोना महामारी के मुंह में झोंक दिया और अभियान चलाने निकलने हैं सकारात्मकता का। लोगों को सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रवचन दिया जा रहा है। प्रवचन भी कौन दे रहा है ? जो संगठन निर्माण के बाद से ही नकारात्मक काम करता आ रहा है। लोगों की सोच सकारात्मक करने का बीड़ा आरएसएस ने उठाया है। इनकी नजरों में लोग बेवकूफ हैं। बिना वजह के नकारात्मकता में जी रहे हैं। कोरोना महामारी में लोग आक्कसीजन की कमी से मर रहे हैं। लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए 40000 तक आक्सीजन सिलेंडर के नाम पर वसूले जा रहे हैं। कोरोना मरीजों को अस्पतालों  में बेड तक नहीं मिल रहे हैं। संक्रमित शवों के कंधे देने और मुंह देखने के लिए नाम उगाही चल रही है। नदियों में शव बह रहे हैं, उन्हें कुत्ते नोच रहे हैं और ये लोग सकारात्मकता का संदेश देते घूम रहे हैं।

कोविड 19 की आपदा को अवसर में बदला पंजाब यूनिवर्सिटी ने, दाखिला टेस्टों के नाम पर आवेदकों से लूटे करोड़ों रुपए

Dr Rajinder K Singla

RTI Activist, Chandigarh

Mob. 9417538456

यहां एक तरफ कोविड 19 महामारी ने विकराल रूप धारण कर देश में सभी जगह त्राहि त्राहि मचा रखी है, और मानवता की इस दुखद घड़ी में अनेक लोग व संस्थाएं पीड़ित लोगों की मदद में जुटे  हुए हैं, वहां दूसरी तरफ सोशल मीडिया में फैली खबरों और न्यूज विडियोज से ऐसे केस भी दिन प्रतिदिन उजागर हो रहे हैं यहां दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने इस आपदा को अवसर में बदल कर लूटने का काम शुरू किया हुआ, फिर लूट चाहे दवाइयों, हॉस्पिटल बेड, ऑक्सीजन के नाम पर हो या किसी अन्य तरीके से।

योगी का रामराज : कोरोना संक्रमितों के शवों की दुर्गति के साथ हो रही सौदेबाजी

CHARAN SINGH RAJPUT-
    
 
आक्सीजन की कमी से कोरोना संक्रमित मरीजों को मरने के लिए मजबूर करने वाले लोग तो हत्यारे हैं ही पर जो लोग शवों पर सौदेबाजी कर रहे हैं उन्हें क्या कहा  जाए ? जिन लोगों के राज में यह सब हो रहा है उन्हें क्या कहा जाए ? शव को कंधा दिलाने, मुंह दिखाने के नाम पर पैसा लेना कहां की सभ्यता, कहां के संस्कार औेर कहां की संस्कृति है ? कानपुर से आ रही खबरों में मोर्चरी हाउस में शव को कंधा देने के नाम पर 500 रुपये और मुंह दिखाने के 1000 रुपये वसूले जा रहे हैं। क्या इन सब बातों की जानकारी शासन-प्रशासन को नहीं है ?

कोरोना के बहाने शादियों को लेकर कुदरत का यह संदेश

Krishan pal Singh-
    
कोरोना की दूसरी लहर ने ऐसे समय में दस्तक दी जब शादियों की लगन शुरू हो गई थी। लोगों ने गेस्ट हाउस से लेकर डीजे तक बुक करा लिये थे और थोक के भाव में निमंत्रण कार्ड बांट डाले थे। लेकिन सारा खेल खराब हो गया। अप्रैल में काफी दिनों तक खतरे के बावजूद मेजबान तो कोरोना का मुंह चिढ़ाते रहे जबकि मेहमानों ने संयम बरता। बाद में जब हर रोज जाने पहचाने लोगों में एक दो की मौत की खबरें आने लगी तो मेजबानों को भी झुरझुरी आ गई और उनका उत्साह मंद पड़ गया। खासतौर से मई में अब जो शादियां हो रही हैं उनमें सीमित मेहमान बुलाये जा रहे हैं। फालतू के तामझाम में भी बड़ी कमी देखी जा रही है।

भाजपा नेता ने लगाई ट्वीटर पर गुहार, कुमार विश्वास ने पहुँचाई मदद

कोरोना संकट के दौरान जहॉं देश एक तरफ़ भयंकर असुरक्षा बोध से गुजर रहा है वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने पूरी ज़िम्मेदारी के साथ सकारात्मकता सृजित करने का ज़िम्मा सँभाल रखा है। अपनी कविताओं तथा  बेबाक़ टिप्पणियों के लिए सदा चर्चा में बने रहने वाले लोकप्रिय कवि डॉ. कुमार विश्वास इन दिनों लोगों की मदद करने के लिए सुर्ख़ियों में बने हुए हैं। ट्विटर पर लोग उनसे बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर जैसी आवश्यकताओं के लिए सहायता माँग रहे हैं तथा कुमार की टीम बेहद त्वरित गति से लोगों की समस्याओं का समाधान भी कर रही है।  कुमार से मदद मॉंगने वालों में सामान्य लोगों से लेकर प्रशासनिक पदाधिकारी एवं अलग-अलग राजनीतिक दलों के बड़े नेतागण भी शामिल हैं। 


जेल में गोलियों की तड़तड़ाहट का खेल क्यों और कैसे...?

Rizwan Chanchal-
    
उत्तर प्रदेश की चित्रकूट जेल शुक्रवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी,जेल के अंदर शार्प शूटर अंशुल दीक्षित ने शार्प शूटर मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली और मुकीम उर्फ काला पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हुए दोनों को मौत के घाट उतार दिया बाद में जेल पुलिस ने अंशू को भी जेल में ही ढेर कर दिया। घटना घटित होने के बाद से शासन-प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

मैं पुलिस कमिश्नर नोएडा हूं, आप लोगों को इस महामारी में कोई दिक्कत हो तो मुझे बताइए!

यह शब्द जनपद गौतमबुद्धनगर के पुलिस आयुक्त श्री आलोक सिंह ने आज दिनांक 14 मई 2021 को ग्रामीण क्षेत्र में भ्रमण के समय जेवर के ग्राम रामपुर बांगर में कहे। उन्होंने वहां मौजूद बुजुर्गों की कुशलक्षेम जानी और बीते दिनों के हालात के बारे में तफ्सील से बातें की।

11.5.21

कोरोना काल में उलटे-सीधे दावों के साथ कई कंम्पनियां कर रही हैं अपनी-अपनी दवाओं की ब्रांडिंग


आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर का दावा कोरोना की तीसरी लहर अक्टूबर में आएगी

अजय कुमार,लखनऊ

कोरोना महामारी से निपटने एवं अपने आप को इससे बचाए रखने के लिए देश के नागरिक  हर संभव कोशिश कर रहे है,जिसकी जहां तक ‘पहुंच’ है वह उसका उतना फायदा उठा रहा है। काढ़ा, भंपारा, गरारा, योगासन से लेकर विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। इंग्लिश से लेकर होम्योपैथिक, आर्युवैदिक, हकीमी सब कुछ अपनाया जा रहे हैं। दादी माॅ के नुस्खें अपनाए जा रहे हैं। इसके लिए घरेलू इलाज बताने वालीं किताबें खंगाली जा रही हैं। यार-दोस्तों से सुझाव लिए जाते हैं। खासकर सुझाव लेने के लिए उन लोगों को ज्यादा तरजीह दी जाती है जो कोरोना पाॅजिटिव होने के बाद निगेटिव हो चुके हैं। प्रिंट एवं इलेक्टानिक मीडिया के माध्यम से डाक्टर जो सुंझाव देते हैं उसे ‘देववाणी’ समझ कर उस पर अमल किया जाता  है। स्थिति यह है कि इस समय जिससे भी बात करिये वह ऐसे समझाता है जैसे किसी एक्सपर्ट से बात हो रही हो। दवा कम्पनियां भी मौके का खूब फायदा उठा रही हैं। इन्होंनेअपनी कई दवाओं को कोरोना से निपटने में कारगर बता कर बाजार में झोंक दिया है,जिसमें ग्राहक फंसने से बच नहीं पाता है। उधर, हालात यह है कि आम आदमी कोरोना महामारी की दो लहरो से जूझ ही रहा था कि कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक से लोग भयभीत होने लगे हैं। जिस तरह से यह आशंका जताई जा रही हे कि तीसरी लहर का प्रभाव बच्चों पर ज्यादा पड़ेगा,उससे तमाम माॅ-बाप का सहम जाना स्वभाविक है।

साधारण खांसी जुकाम बुखार पेट दर्द के मरीज अपना इलाज कहां कराएं?

नान कोविड मरीज इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं, उनके लिए भी अस्पताल निर्धारित करने की मांग, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

लखनऊ  : राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने मुख्यमंत्री जी के अधिकारिक ई मेल आईडी पर एक पत्र प्रेषित करते हुए नॉन कोविड मरीजों के इलाज की व्यवस्था के बारे में चिंता व्यक्त किया है। उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि राजधानी में स्थित सभी बड़े अस्पताल एसजीपीजीआई लखनऊ ,केजीएमयू लखनऊ, आर एम एल आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ बलरामपुर अस्पताल लखनऊ, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय लखनऊ, दीनबंधु चिकित्सालय लखनऊ  डेडीकेटेड कोविड अस्पताल के रूप में चिन्हित कर दिए गए हैं । इन अस्पतालों में कोविड पॉजिटिव वाले मरीजों की भर्ती हो रही है ।जो मरीज कोविड नेगेटिव है उनको डेडीकेटेड अस्पतालों में देखा नहीं जा रहा है।

डिजीटल ट्रांसफार्मेशन के लिए तैयार हों नए पत्रकार


- प्रो. संजय द्विवेदी

एक समय था जब माना जाता है कि पत्रकार पैदा होते हैं और पत्रकारिता पढ़ा कर सिखाई नहीं जा सकती। अब वक्त बदल गया है। जनसंचार का क्षेत्र आज शिक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। वर्ष 2020 को लोग चाहे कोरोना महामारी की वजह से याद करेंगे, लेकिन एक मीडिया शिक्षक होने के नाते मेरे लिए ये बेहद महत्वपूर्ण है कि पिछले वर्ष भारत में मीडिया शिक्षा के 100 वर्ष पूरे हुए थे। वर्ष 1920 में थियोसोफिकल सोसायटी के तत्वावधान में मद्रास राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में डॉक्टर एनी बेसेंट ने पत्रकारिता का पहला पाठ्यक्रम शुरू किया था। लगभग एक दशक बाद वर्ष 1938 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के पाठ्यक्रम को एक सर्टिफिकेट कोर्स के रूप में शुरू किया गया। इस क्रम में पंजाब विश्वविद्यालय, जो उस वक्त के लाहौर में हुआ करता था, पहला विश्वविद्यालय था, जिसने अपने यहां पत्रकारिता विभाग की स्थापना की। भारत में पत्रकारिता शिक्षा के संस्थापक  कहे जाने वाले प्रोफेसर पीपी सिंह ने वर्ष 1941 में इस विभाग की स्थापना की थी। अगर हम स्वतंत्र भारत की बात करें, तो सबसे पहले मद्रास विश्वविद्यालय ने वर्ष 1947 में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की स्थापना की।

खूनी चरित्र वाली भाजपा पश्चिम बंगाल में टीएमसी पर हिंसा का आरोप लगा रही है!


रोहित शर्मा विश्वकर्मा-

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में अब तक रिपोर्टों के मुताबिक 12 लोग मारे गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का आरोप है कि इन 12 लोगों में उसके 6 कार्यकर्ता शामिल हैं। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का आरोप है कि उसके भी 4 कार्यकर्ता मारे गए। बाकी मारे गए लोगों की स्पष्ट पहचान नहीं हो पाई है। इसी बीच पश्चिम बंगाल पुलिस ने प्रदेश में चुनाव के बाद हिंसा में भाजपा महिला कार्यकर्ता की बलात्कार की घटना को झूठा बताया है। प्रदेश में हिंसा की इन घटनाओं पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है। स्पष्ट है राज्यपाल जगदीप धनकड़ वही रिपोर्ट देंगे जिसका आरोप भाजपा लगा रही है, जो सच्चाई से बिल्कुल परे होगी। इस बारे में बीबीसी की रिपोर्ट सच्चाई के करीब नजर आती है जिसमें कहा गया है कि चुनाव के नतीजे के बाद प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हिंसा फैली हुई है व डर और भय का माहौल पाया जा रहा है। जो इस बात को संकेत करता है कि भाजपा के गुंडे हार की हताशा में उन लोगों पर हमला कर रहे हैं जिन्होंने टीएमसी को वोट देकर उसे अप्रत्याशित जीत दिलाई। वास्तव में भाजपा के गुंडों को यह लग रहा था कि मोदी-शाह की रैलियों और रोड शो में आने वाली भीड़ से प्रभावित होकर भाजपा को वोट देकर उसे पश्चिम बंगाल में सत्तासीन करेंगे। लेकिन इन गुंडों की भाषाओं और आक्षांशाओं के विपरीत चुनाव नतीजा आने के बाद भाजपा के गुंडे हताशा का शिकार होकर बौखला गए हैं और हिंसा पर उतारू हो गए हैं। जो भाजपा के चरित्र का प्रदर्शन करती हैं।

प्राकृतिक आक्सीजन को जहरीली कर कब तक जिंदा रहेंगे कृत्रिम आक्सीजन के सहारे?

CHARAN SINGH RAJPUT-

कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक आक्सीजन सिलेंडरों का रोना रोया जा रहा है। अधिकतर मौतें आक्सीजन की कमी से होने की बातें सामने आ रही हैं। आक्सीजन भी कैसी कृत्रिम। क्या हमारे शरीर में इतनी प्राकृतिक आक्सीजन है कि हम अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रख सकते हैं। हम अपने संसाधनों के पीछे भागते-भागते आक्सीनज को जहरीला नहीं कर दिया है। क्या आज के जीवन स्तर में हम आक्सीजन से ज्यादा कार्डन डाई आक्साइड अपने अंदर लेने को मजबूर नहीं हो रहे हैं। क्या आज की तारीख में इन सब बातों पर मंथन करने की जरूरत नहीं है कि आखिरकार कोरोना जैसी महामारी और आक्सीजन की कमी से लोगों के संक्रमण होने और उनकी मौतों की नौबत आई कैसे ? क्या कृत्रिम आक्सीजन के सहारे हम जी सकते हैं ? क्या हमने खुद ही प्राकृतिक आक्सीजन को जहरीला नहीं किया है ? क्या आक्सीजन के स्रोत हम खुद ही खत्म नहीं कर रहे हैं ? आधुनिकता की दौड़ में दौड़ते-दौड़ते हमने शहरों को तो छोड़ दीजिए गांवों में भी आक्सीजन के स्रोत खत्म नहीं कर दिये हैं ? शहरों का प्रदूषण गांवों तक पहुंच गया है। यहां तक शुद्ध हवा देने वाले पर्वतीय क्षेत्रों तक (गंगोत्री) तक लोग प्रदूषण फैला दे रहे हैं। क्या कोरोना न होते हुए भी कितने लोग लोग कृत्रिम आक्सीजन लेने को मजबूर नहीं हैं ?

5.5.21

हॉस्पिटल में एडमिट के समय का एक डरावना किस्सा जिसे मैंने सकारात्मकता में बदला


Mohit Shukla-
    
 मैं कोरोना के समय नोएडा सेक्टर - 39 के कोविड हॉस्पिटल में एडमिट था, जिसमें मेरे रूम के ठीक सामने दीवार पर साफ - साफ लिखा था , कोरोना मरीज के शव को ले जाने का रास्ता, और जब कोई बॉडी जाती तो ऐसा लगता कि मानो हम सब कैदी की तरह बंद हैँ और आज फलां व्यक्ति को फांसी के लिए ले जा रहे हैँ , हर मरीज अंदर से सहमा हुआ , डरा हुआ और घबराया हुआ , कि ना जाने अब किसका नंबर आयेगा , सबकी हिम्मत जबाब दे रही थी , ये पहली मरतफ़ा था जब सब मौत को इतने पास से देख रहे थे , और ये मेरे तो एक दम सामने वाली दीवार पर ही लिखा था , और मैं सिंगल प्राइवेट रूम में एडमिट था , तो साथ में कोई दूसरा कोई नहीं.

IFWJ's former Secretary General Andhare Passes Away

Andhare will always be remembered by the newspaper employees of the country

New Delhi, 1 May. Indian Federation of Working Journalist has deeply mourned the death of its former Secretary-General, an accomplished journalist and trade unionist Manohar P Andhare. He passed away on 29th April at Secunderabad (Telangana). He was 94. He was living with his son, who is also a journalist with a Hyderabad based English daily He was the editor of Yugdharma daily of Nagpur.

जिनके पास स्मार्टफोन या कंप्यूटर नहीं है वो कैसे करेंगे कोरोना टीका के लिए अपना रजिस्ट्रेशन...

 
कॅरोना महामारी को लेकर एक तरफ जहां पूरे विश्व मे आपदा आ गई है। वही भारत सरकार इस आपदा में भी गरीबों के साथ मजकिया रवैया अपना रही है।बताते चले कि कोविड 19 को लेकर देश मे वैक्सीनेशन की कार्य एक एक लोगो तक सरकार द्वारा दिए जाने की बात कही जा रही है वही ग्रामीणों क्षेत्रों में यह वादे अभी भी पूणर्तः कमजोर दिख रही है।

इस महामारी में भी कुछ लोग हैवानियत की सारी हदें पार कर गए

 Ashok Chopra

करोना महामारी ने विश्व के अधिकांश लोगों के जीवन को बदल दिया है । लोग सहम गए हैं। बहुत से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। बहुतों के अपने बेवक्त काल की आगोश में चले गए। भारत सहित बहुत से देशों में बिमारी के विकराल रूप के आगे समुचा स्वास्थ्य तन्त्र बेबस, मजबूर व लाचार हो गया है।
 
अमेरिका जैसे विकसित देश में भी स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई । लोगों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा। संसाधनों की कमी हों गई। बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा है। कोई भी देश बेबस हो सकता है ये बात समझ आती है।

भाजपा के लिए खतरे की घंटी हैं दमोह में पराजय

कृष्णमोहन झा-


मध्यप्रदेश की  शिवराज सरकार को  राज्य विधानसभा के अंदर इतना बहुमत हासिल है कि एक विधान सभा सीट के उपचुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी के प्रत्याशी की हार से उसकी प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आना चाहिए थी परंतु विगत दिनों संपन्न दमोह विधानसभा सीट के उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी की करारी हार ने सत्तारूढ़ पार्टी ही नहीं बल्कि शिवराज सरकार को भी स्तब्ध कर दिया है। आश्चर्य जनक बात तो यह है कि मात्र एक सीट के उपचुनाव परिणाम ने सरकार और पार्टी को इस स्थिति में ला दिया है मानों उसके पैरों के नीचे की जमीन ही खिसक गई हो। दमोह के उपचुनाव में कांग्रेस की शानदार विजय से एक ओर जहां उसके नेता और कार्यकर्ता फुले नहीं समा रहे हैं वहीं दूसरी ओर  भाजपा सरकार और संगठन को मानों सांप ‌सूंघ गया है।
 

30.4.21

ऐसे कैसे चले गए रोहित सरदाना!

देश के जाने माने युवा पत्रकार और न्यूज एंकर रोहित सरदाना हमारे बीच से अचानक उठकर चल दिए। कोरोना उनको लील गया। वे एक राष्ट्रवादी पत्रकार के रूप में जाने जाते थे। लोग स्तब्ध हैं कि ऐसे भला संसार छोड़कर कोई जाता है क्या।

-निरंजन परिहार

रोहित सरदाना चले गए। नहीं जाना चाहिए था। बहुत जल्दी चले गए। जाना एक दिन सबको है। आपको, हमको, हर एक को। फिर भी, रोहित के जाने पर दुख इसलिए है, क्योंकि न तो यह उनके जाने की उम्र थी और न ही जाने का वक्त। कोई नहीं जाता इस तरह। खासकर वो तो कभी नहीं जाता, जिसको दुनिया ने इतना प्यार किया हो। पर, रोहित सरदाना फिर भी चले गए। वे 22 सितंबर 1979 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जन्मे और 30 अप्रेल 2021 को कोरोना के क्रूर काल में समा गए। सिर्फ 42 साल, संसार से जाने की उम्र नहीं होती। फिर भी चले गए। दरअसल, विधि जब हमारी जिंदगी की किताब लिखती है, तो मौत का पन्ना भी साथ ही लिखकर भेजती है। विधि ने उनकी जिंदगी की किताब कम पन्नों की लिखी थी। रोहित ने इस रहस्य को जान लिया था। इसीलिए, बहुत समझदारी से उन्होंने आपसे, हमसे और करोड़ॆं लोगों की जिंदगी के पन्नों के आकार के मुकाबले अपनी जिंदगी के आकार को बहुत ज्यादा बड़ा कर लिया, और बहुत कम वक्त में ही उन्होंने बहुत कुछ जी लिया। 

10.4.21

कोरोना काल या काल है कोरोना ...??

कोरोना काल या काल है कोरोना ...??

भाजपा का रेजिडेंशियल टाउनशिप का वादा पुलिस आवासों के नाम बदलने तक ही रह गया सीमित

Satya Prakash Bharti
satyabhrt7@gmail.com


-गोरखपुर सहित ज़ोन के 11 जिलों में पुलिस आवासों के नाम बदलकर कर दिए शहीद रौशन सिंह के नाम
 
-बीजेपी के घोषणा पत्र में था पुलिसकर्मियों और उनके परिवार वालों के लिए शहीद रौशन सिंह के नाम पर रेजिडेंशियल टाउनशिप बनाने का दावा

-प्रदेश के बड़े शहरों में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए स्कूल सहित हाईटेक टाउनशिप बनाने का था वादा

-चार साल बाद भी नहीं मिल सकी पुलिसकर्मियों को रेजिडेंशियल टाउनशिप

 
लखनऊ। प्रदेश में बीजेपी सरकार अपने 32 पन्नो के घोषणा पत्र और उनमें किये गए वादों को लेकर सत्ता में आई। मूलभूत आवश्यकताओं को भूलकर अन्य मार्ग पर चल पड़ी। बीजेपी ने 2017 में चुनाव से पूर्व पुलिसकर्मियों और उनके परिवार वालों के लिए स्कूल सहित रेजिडेंशियल टाउनशिप बनाने के वादे किए थे। लेकिन यह वादा भी नाम बदलने तक ही सीमित रह गया। बीते 22 फरवरी को गोरखपुर सहित ज़ोन के 11 जिलों में मौजूद पुलिस आवासों के नाम बदलकर शहीद रौशन सिंह के नाम पर करने का अहम फैसले तक ही सीमित रह गया। वहीं चार साल बाद भी उत्तर प्रदेश पुलिस को टाऊनशिप न मिल सकी। वहीं जिस शहीद के नाम पर यह टाउनशिप बननी थी उसके गांव की हालत भी खस्ताहाल है।

5.4.21

‘Hun To Bolish’ by Ronak Patel launches as fully-fledged Primetime show today on ABP Asmita

 


Ahmedabad, 5th April 2021: With an aim to deliver the promise of innovative and fresh content, ABP Asmita has launched a new show ‘Hun To Bolish’ € a prime-time show which started off as a popular segment on the news channel eight months ago. Taking the cue from the segment’s rising popularity, India’s fastest-growing Gujarati news channel, ABP Asmita has now formally launched it as a full-fledged programme, hosted by renowned journalist Mr. Ronak Patel, Editorial Head, ABP Asmita.

3.4.21

पत्रकार प्रमोद श्रीवास्तव के परिजनों की मदद के लिए योगी को पत्र लिखा

माननीय मुख्यमंत्री जी

वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रमोद श्रीवास्तव के कोरोना से हुये असामयिक निधन से समूचा पत्रकार जगत दुःखी है।

मैं उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि स्वर्गीय प्रमोद श्रीवास्तव के परिवार को कोरोना से हुए निधन से मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए।

2.4.21

राज्यव्यवस्था के साथ-साथ जेल में बंद जनता के चरित्र का भी सटीक चित्रण है जेल डायरी ''कैदखाने का आईना''

अधिवक्ता श्याम कुमार सिन्हा-

कानूनी अर्थ में जेल को सुधारगृह कहा जाता है और बंदियों को सामाजिक रूप से विकारग्रस्त माना जाता है। राज्यव्यवस्था (सरकार) हमेशा यह दावा करती है कि जेल प्रवास बंदियों को आपराधिक गलती दोहराने से रोकती है, समाज से अलग-थलग करके बंदियों को पश्चाताप का अवसर दिया जाता है, आदि-आदि।