एक अनोखा एहसास सा क्यों है.......
आओगी तुम पास मेरे यह आस क्यों है.....
न मिलोगी कभी भी तुम मुझे यह जानता हू ....
लेकिन फिर भी यह तलाश क्यों है.......
न जाने क्यों हर वक्त चाहता है आपका साथ यह मन.........
जानते ही यह मुमकिन नही, फिर भी क्यों बेकरार है यह मन........
चाहते है आपसे बस थोड़ा सा प्यार.....
उसके लिए भी यह लंबा इंतज़ार क्यों है......
छमा चाहता हू सभी से... कोई लेखक या कवि नही हू मै.. बस मन में जो भाव आए उन्हें शब्द दे दिए.. इसे कविता का अपमान न समझियेगा :-)
आओगी तुम पास मेरे यह आस क्यों है.....
न मिलोगी कभी भी तुम मुझे यह जानता हू ....
लेकिन फिर भी यह तलाश क्यों है.......
न जाने क्यों हर वक्त चाहता है आपका साथ यह मन.........
जानते ही यह मुमकिन नही, फिर भी क्यों बेकरार है यह मन........
चाहते है आपसे बस थोड़ा सा प्यार.....
उसके लिए भी यह लंबा इंतज़ार क्यों है......
छमा चाहता हू सभी से... कोई लेखक या कवि नही हू मै.. बस मन में जो भाव आए उन्हें शब्द दे दिए.. इसे कविता का अपमान न समझियेगा :-)

