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17.3.18

दो नतीजे, एक निष्कर्ष

जनता महानता में भरोसा करती है और महानता का कोई विकल्प नहीं होता.

कथन1- "गुरुत्वाकर्षण वो नियम है जिसकी वजह से ब्रह्मांड अपने आपको शून्य से एक बार फिर शुरू कर सकता है और करेगा भी. ये अचानक होने वाली खगोलीय घटनाएं हमारे अस्तित्व के लिए ज़िम्मेदार हैं. ऐसे में ब्रह्मांड को चलाने के लिए भगवान की जरूरत नहीं है." स्टीफन हॉकिंग

कथन2- “सनातन संस्कृति में है संसार की समस्याओं का समाधान” - मोदी

दोनों ने ही मानव प्रयासों को सर्वोपरि माना. 14 मार्च 2018 का दिन दो महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा. पहला, महान भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग का 76 साल की उम्र में निधन और दूसरा, उपचुनाव में यूपी के दो लोकसभा सीटों का बीजेपी की झोली से निकल कर अखिलेश यादव की पार्टी में जाना. राजस्थान, मध्यप्रदेश और अब उत्तर प्रदेश के उपचुनावों के नतीजों से साफ है कि जब मोदी प्रचार के लिए नहीं आते हैं तो जनता स्थानीय बीजेपी उम्मीदवारों को नकार देती है. यानि जनता डुप्लीकेट नेतृत्व के विकल्प में भरोसा नहीं करती है. वैसे ही, जैसे किसी नौसिखिए के सिद्धांतों को विज्ञानी बिना जाने सुने ही खारिज कर देते है.


स्टीफन हॉकिंग की मौत ने अंतरिक्ष में पसरते जा रहे भौतिकी सिद्धांतों को झटका दिया है. सभी मानते हैं कि जैसे आइंसटीन अपने आप में इकलौते रहे, वैसे ही हॉकिंग के दिमाग का भी कोई विकल्प नहीं है. विज्ञान जगत में एक शून्यता का अहसास हो रहा है. कारण, भौतिकी विज्ञान में गुरुत्वाकर्षण, ब्रह्मांड विज्ञान, क्वांटम थ्योरी, सूचना सिद्धांत और थर्मोडायनमिक्स संबंधी घटना या प्रकृति को समझना हॉकिंग के दिमाग के ही बस की बात रही. मोटर न्यूरॉन या कहे एम्योट्रोफ़िक लेटरल सिलेरोसिस से लकवाग्रस्त होने के बावजूद हॉकिंग ने ब्लैक होल से संबंधी सिद्धांत रखा. उन्होंने कहा कि ब्लैक होल को छोटे ब्लैक होल में विभाजित नहीं किया जा सकता. दो ब्लैक होल के टकराने पर भी ऐसा नहीं होगा. हॉकिंग ने ही मिनी ब्लैक होल का सिद्धांत भी दिया. कई अपने बनाये सिद्धांतों को सुधारा भी. 

मोदी और हॉकिंग दोनों ही दुनिया के उन परतों को देख लेते रहे हैं, जो सामान्य इंसान के लिए संभव नहीं दिखती. इसीलिए जिन चुनावों की अनदेखी मोदी कर रहे हैं, वहां के नतीजे बीजेपी के लिए चौंकाने वाले रहे हैं. जनता नेता चुनती है, उस पर भरोसा करती है, उसे सिरमाथे बैठाती है, क्योंकि लोगों को अहसास होता है कि उनका नेता कभी छल नहीं सकता. लेकिन ये भरोसा वैकल्पिक नेतृत्व मुहैया कराने पर डोल जाता है. नेता की इच्छा भी नकार दी जाती है. इन चुनाव नतीजों को बीजेपी के लिए जनता की चेतावनी समझी जानी चाहिए. क्योंकि जनता महानता में भरोसा करती है और महानता का कोई विकल्प नहीं होता.

लेखक प्रसून शुक्ला वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं. 

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