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10.3.18

राजनीति में संघर्षशील युवाओं के लिए पूरा मौका

मुझे नहीं लगता कि देश में कभी इस तरह का माहौल रहा होगा, जैसा कि आज के दौर में है। बात सरकारों की अराजकता की नहीं है बात है जमीनी संघर्ष की। जनहित के मुद्दों को लेकर बहस की। किसान-मजदूर, युवा और रोजगार की, कानून व्यवस्था की। निश्चित रूप से देश में जमीनी मुद्दे गौण हैं और जाति और धर्म और भटकाव के मुद्दे हावी हैं। इतिहास गवाह रहा है कि जब भी देश में अराजकता का माहौल बनता है तो बुद्धिजीवी वर्ग और समाजवादी सोच के लोग इस माहौल का मुकाबले करते हैं। चाहे आजादी की लड़ाई रही हो या फिर सरकारों की अराजकता की। समाजवादियों ने आगे बढ़कर मोर्चा संभाला था। अब जब देश में संघियों की सरकार अराजकता फैलाए हुए है तो इस तरह के जमीनी लोगों का देश में अकाल पड़ गया है। तो यह माना जाए कि अब देश में संघर्षशील समाजवादी नहीं रह गए हैं।
यदि मैं गलत हूं तो गैर संघवाद का नारा देने वाले नीतीश कुमार संघियों की गोद में क्यों बैठे हैं ? अखिलेश यादव को आज अपनी धुर विरोधी मायावती से मिलने की नौबत क्यों आ गई ? दलितों के बल पर आगे बढ़ने वाले रामविलास पासवान और उदित राज सत्ता की मलाई क्यों चाट रहे हैं ? वामपंथियों को कांग्रेस के साथ मिलने की क्यों नौबत आ गई है ? कुल मिलाकर किसी से भी मिलकर और किसी का भी साथ लेकर सदन तक पहुंचना है। सत्ता के लिए तो किसी से भी मिल जाएंगे पर जनहित के लिए कोई समझौता गवारा नहीं। अपने बचाव में तो किसी का भी सहयोग लेंगे पर जनता के लिए किसी से मिलने को तैयार नहीं। जहां तक विपक्ष की बात है कि देश में इससे कमजोर विपक्ष कभी नहीं रहा। ऐसा लग रहा है कि पूरा विपक्ष सरकार से डरा हुआ है। देश भी विरासत के बल पर नेता बने बैठे युवाओं से क्रांति की उम्मीद करे बैठा है। बुद्धिजीवी, देश के लिए चिंतित रहने वाले और विपक्ष में बैठे सभी दलों के लोग समझ लें कि जब तक संघियों से टकराने वाले ऐसे नेता तैयार नहीं होंगे जैसे कि साठ की किसी समय कांग्रेस की अराजकता के खिलाफ डॉ. राम मनोहर लोहिया खड़े हुए थे, लोकनारायण जयप्रकाश, आचार्य नरेंद्र देव, कर्पूरी ठाकुर, राज नारायण, चरण सिंह, मधु लिमये जैसे खाटी समाजवादी आरामतलबी और ऐशोआराम की जिंदगी त्याग कर सड़कों पर उतरे थे तब तक परिवर्तन को भूल जाएं। लोग कितनी भी राजनीति में पैसे व बाहुबल की बात कर रहे हों पर मेरा मानना है कि आज के हालात में जो संघर्ष करेगा वही आगे बढ़ेगा। इस माहौल में उन संघर्षशील युवाओं के लिए राजनीति के क्षेत्र में आगे बढ़ने का पूरा मौका है, जिन्हें जमे जमाए लोग आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं। आओ संघर्ष करो और छा जाओ देश के राजनीतिक पटल पर, देश को ईमानदार जुझारू और कर्त्तव्यनिष्ठ युवाओं की जरूरत है।
चरण सिंह राजपूत
राष्ट्रीय अध्यक्ष फाइट फॉर राइट

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