( भोपाल) वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के १५०वें वर्ष के उपलक्ष्य में तथा महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस के अवसर पर सिंधुभवन के सभागार में २०जून को सायं ६.००बजे राष्ट्रीय कवी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है,जिसमें हिंदी के अनेक लोकप्रिय कवि भाग ले रहे हैं। जिनमें सर्वश्री प्रकाश प्रलय (कटनी), डॉ. मधु चतुर्वेदी (जयपुर), डॉ. प्रेम लता नीलम (दमोह),विश्वंभर अग्निहोत्री (शाहजहांपुर), श्रीकांत सिंह (लखीमपुर खीरी), के अलावा दिल्ली से अरविंद चतुर्वेदी,मृगेन्द्र मकबूल, अरविंद पथिक,धर्मेश चतुर्वेदी, पुरुषोत्तम नारायण सिंह, रमाकांत पूनम और भगवान सिंह हंस काव्य-पाठ करेंगे। इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता लोकप्रिय हिंदी कवि पं. सुरेश नीरव करेंगे।
प्रस्तुतिः मृगेन्द्र मकबूल
17.6.08
वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस
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Maqbool
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23.5.08
डाकू और कवि
संदर्भः चंबलघाटी कवि सम्मेलन
चंबल के भयंकर डाकुओं ने
यानी स्टेनलेस स्टील के चाकुओं ने
कर दिया मुख्यमंत्री के आगे आत्मसमर्पण
यानी अपनी ही नस्ल के जंतु के आगे अपना तर्पण
प्रश्न ये उठा कि इन्हें क्या सजा दी जाए
किसी ने कहा-
इनसे चक्की चलवाई जाएं
किसी ने कहा-
इनसे भारी-भारी दरियां बुनवाई जाएं
तो हमने कहा-
भैया...
ये आत्समर्पित डाकू हैं
इसलिए न तो इनसे चक्कीयां चलवाई जाएगी
और न ही इनसे भारी-भारी दरियां बुनवाई जाएंगी
इन सब को सजाए बतौर
माइकपकड़ू कवियों की बोर कविताएं सुनवाई जांएगी
डाकू चिल्लाएंगे...
हमें मार डालो या फांसी के फंदे पर लटकाओ
मगर इन बोर कवियों की कविताओं से बचाओ।
पं. सुरेश नीरव
मों.९८१०२४३९६६
( इस से सिद्ध होता है कि कवियों के आगे बेचारा डाकू कितना निरीह होता है? खैर.. मेरी रचना पर भाई यशवंत, डॉ.रूपेश श्रीवास्तव, अनिल भारद्वाज, रजनीश के.झा, वरुण राय, अंकित माथुर और मृगेन्द्र मकबूल ने जो अपनी दिलचस्प टिप्पणियां भेजी हैं,वह मेरी मौलिक कविता से ज्यादा मजेदार हैं, मैं उनकी मजाकिया मर्दानगी को साष्टांग दंडवत करता हूं, और कर भी क्या सकता हूं? हास्यमेव जयते..। )
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