किसी ने कहा है " हट के दिया, हट के किया याद रहता है। हमारे हिंदुस्तान मृत शरीर के प्रति आदर मान का भाव है। डेड बॉडी चाहे किसी भी धर्म से सम्बन्ध रखने वाले इन्सान की हो उसका निरादर नही किया जाता। हम तो बॉर्डर पर रहतें है इसलिए जानते हैं कि बॉर्डर पर जब कोई पाक घुसपैठिया मारा जाता है तो उसकी डेड बॉडी का भी उसके धर्म के अनुरूप अन्तिम संस्कार किया जाता है। यह तो आम बात है। आज जिसके बारे में लिखा जा रहा है वह जरा हट के है।
श्रीगंगानगर में एक परिवार में एक महिला की मौत हो गई। मौत ही एक सच्चाई है बाकी सब झूठ है। महिला के परिजनों ने डेड बॉडी का अन्तिम संस्कार नहीं करके उसको मैडिकल कॉलेज को दान कर दिया । मृत महिला के परिजनों ने शव की अन्तिम यात्रा निकली। अर्थी को मरघट तक लेकर गए । वहां उसके अन्तिम दर्शन करके डेड बॉडी को मेडिकल कॉलेज को दान में दे दिया गया। जिस देश में धर्म के प्रति अंध विश्वाश हो। उस देश में अपने परिजन की मृत देह का अन्तिम संस्कार करने की बजाय उसको किसी के हवाले कर देना अपने आप में जरा हट के है। हजारों साल पहले एक महात्मा दाधीच ने भी अपने शरीर को दान कर दिया था।
"तन का बंधन दुनियादारी, रूह का मिलना प्यार, डाल झुके तो जीत तुम्हारी, उछल तोड़ना हार।''
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5.2.09
डेड बॉडी को दान किया
Posted by
गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर
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