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12.9.10

Vacuum मतलब 'बाप की ट्रेन'

Vacuum मतलब 'बाप की ट्रेन'... सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा है न? आप और हम इससे पहले यही जानते थे न कि Vacuum (वैक्युम) का हिंदी होता है निर्वात, जहां कुछ भी नहीं हो। निर्वात की स्थिति में गैसीय दाब, वायुमंडलीय दाब की तुलना में न के बराबर होता है। लेकिन वैक्युम का ये मतलब भी सही है, सोच में पड़ गए न!  चलिए जनाब दिमाग पर ज्यादा जोर मत डालिए, सस्पेंस यहीं खत्म करता हूं और बतात हूं कि कैसे होता है वैक्युम मतलब 'बाप की ट्रेन'।
बिहार के कई हिस्सों खास कर जमुई से बख्तियारपुर और गया-जहानाबाद रूट के बच्चे से लेकर बूढे तक कमोबेश वैक्युम का यही मतलब जानते हैं। इनमें से कई लोगों ने तो स्कूल का मुंह तक नहीं देखा है और ना ही अंग्रेजी का A B C ही जानते हैं... लेकिन Vacuum मतलब बखुबी समझते हैं हां ये दीगर बात है कि इसका मतलब उनके लिए थोड़ा जुदा है। इनमें से कई लोग तो काफी पढ़े लिखे भी हैं लेकिन वो भी किताबों में लिखे अर्थ को भूल गए हैं और नए अर्थ को अपना लिया है। हां उच्चारण थोड़ा अपभ्रंशित होकर वैक्युम से वैकम हो गया है। अब नहीं समझे आप...?
अजी इन लोगों के लिए ट्रेन किसी टॉय ट्रेन जैसी चिज है... जहां मन चाहे रोक लो.... गाड़ी चाहे कोई भी हो लोकल, एक्सप्रेस, मेल या सुपरफास्ट लेकिन इन रूटों पर ये चलती है बैलगाड़ी सरीखी। कोई हॉल्ट आया और ट्रेन के वैक्युम सिस्टम में छेड़छाड़ कर गाड़ी को रोक देना इनके लिए बच्चों के खेल जैसा है। ड्राइवर करे भी तो क्या... और मजाल है जो ट्रेन में सवार स्क्वॉड इनके खिलाफ कोई एक्शन ले ले! चाहे तो इनकी मनमानी सहो या फिर कभी किसी ने रोकने की हिमाकत की तो बस मत पुछो... अगले ही दिन तोड़फोड़ और न जाने कितना फसाद! पहले तो ऐसे लोग जबरदस्ती आरक्षित कोचों में घुस आते हैं फिर आपके ही बर्थ पर टांग फैलाकर कहेंगे एमएसटी हैं रोज का आनाजाना है थोड़ी देर चलेंगे...और दिन में बर्थ पर सोना कैसा....(एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी) ऐसे ऐसे महानुभाव हर स्टेशन पर इतने आएंगे की आपका सफर यूं ही बतियाते-गपियाते कट जाएगा। इनहीं में से चंद लोग दो डब्बों को जोड़ने वाली जगहों पर बैठते हैं ताकि ट्रेन के वैक्युम पाइप से छेड़छाड़ कर ट्रेन को रोका जा सके।
इन लोगों की हरकत से उन्हें थोड़ा फायदा होता है और वे थोड़ी जल्दी घर पहुंच जाते हैं, लेकिन उनकी ऐसी हरकतों से रेलवे को तो नुकसान होता ही है साथ ही उसका खामियाजा हजारों मुसाफिरों को भी भुगतना पड़ता है। खैर उन्हें क्या उनके लिए तो एक ही आदर्श वाक्य है कि 'दुनिया जाए तेल लेने, ऐश तू कर'।

21.2.10

विधायक की आजा नच ले!

लोगों को कहते सुना है कि बिहार की तस्वीर बदल रही है। सीएम नीतीश कुमार और उनके दरबारी बिहार की सूरत बदलने में लगे हुए हैं। लेकिन उसी बिहार की राजधानी में उनके ही विधायक ने जो किया.. उससे उनके सारे किए धरे पर पानी फिरता दिख रहा है। भय और भ्रष्टाचार से मुक्त शासन का दावा करने वाली सरकार के लिए शनिवार की रात विधायक निवास में हुई घटना गले की हड्डी बन गया है। यहां जनता दल यूनाइटेड के नाचता जीरादेई से विधायक श्याम बहादुर सिंह रातभर बार बालाओं के साथ भौंडा डांस करते रहे। हद तो ये है कि विधायक महोदय नाचने के दौरान अपनी सुधबुध ऐसे खो चुके थे कि उन्हें ये होश नहीं रहा कि उनकी हरकतों पर कैमरों की निगाह है। मीडिया ने जब पूरे मामले से पर्दा उठा दिया तो पहले तो श्याम बहादुर सिंह होली के मौके पर मनोरंजन की बात कहते रहे... बात इस पर भी नहीं बनी तो दूसरों का उदाहरण देकर अपनी गलती ढांकने की कोशिश की और इस पर बवाल होता देख उन्होंने कैमरे के सामने कान पकड़कर और हाथ जोड़ कर माफी मांग ली। लेकिन सवाल तो ये है कि जब जनप्रतिनिधि ही ऐसे हो तो जनता से किस आचरण की उम्मीद की जाए? होली के नाम पर अश्लीलता और फूहड़ता की हद कहां तक जायज है? ऐसे लोगों को क्या सत्ता में रहने का कोई हक है?

16.11.09

ट्वेंटी ट्वेंटी क्रिकेट अवध चैम्पियनशिप का आयोजन

आप सभी से क्षमा चाहूँगा की की काफी दिनों बाद भड़ास परिवार से दूर रहा लेकिन ख़ुशी के साथ आप सभी को बताना चाहूँगा की फैजाबाद शहर में ११ नवम्बर से १५ नवम्बर तक बारह प्रान्तों को एक जुट कर के एक ट्वेंटी ट्वेंटी क्रिकेट अवध चैम्पियनशिप का आयोजन किया था , इसके पीछे हम सभी की मंशा थी की इतने प्रान्तों के युवा जहाँ साथ होंगे वहां से हम एक नई मुहीम चलाएंगे, इस नेशनल क्रिकेट टूर्नामेंट में बिहार, झारखण्ड, महाष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तरांचल, आंध्र प्रदेश, सहित अन्य प्रान्तों की १६ सदसिय टीमो ने प्रतिभाग किया और एक साथ खूब मज़े किए यहाँ हम अयोध्या फैजाबाद के बारे में बहोत कुछ बताने समझाने में इन लोगों को कामयाब रहे अभी इतना ही .......बाकि फोटो सहित आपके सामने उपस्थिति दर्ज करूँगा.....

आपका हमवतन भाई गुफरान....(अवध पीपुल्स फॉरम फैजाबाद,अयोध्या.)

28.10.08

राहुल की मुठभेड़ या हत्या

सोमवार कि सुबह मुंबई के कुर्ला इलाके में बस नंबर 332 को अपहृत करने वाला पटना के 23 वर्षीय राहुल राज की मुंबई पुलिस ने एनकाउंटर किया या फिर निर्मम हत्या ? राज ठाकरे को मारने आया यह शक्स पुलिस की गोली से मारा गया था। लेकिन पुलिसिया एनकाउंटर एक बार फिर शक के घेरे में आ रही हैं। क्या सचमुच राहुल राज को नही बचाया जा सकता था ?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार राहुल चिल्ला चिल्ला कर कह रहा था कि वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता। उसने बस से सभी यात्रियों को उतार भी दिया था। बस खड़ी होने के बाद वहां काफी भीड़ थी, अगर वह चाहता तो लोगों पर फायरिंग कर सकता था। मुंबई पुलिस का यह दावा कि राहुल पर गोलीबारी जवाबी कार्रवाई के तहत की गई, सच नही लग रही। चश्मदीदों के अनुसार उसने अपनी देसी पिस्तौल से एक बार भी पुलिस की ओर फायर नहीं किया था। अगर मुंबई पुलिस ने थोड़ी-सी समझदारी से काम ली होती, तो शायद राहुल बच सकता था। वह बार बार एक मोबाइल मांग रहा था जिसके मार्फत वह अपनी बात कहना चाहता था। उसने कुछ करेंसी नोट पर लिखकर पुलिस की ओर भी फेंकी थी।


अगर राहुल राज ठाकरे को मारने आया था, तो उसे राज ठाकरे के घर के आसपास होना चाहिए था। अगर वह राज ठाकरे के किसी सभा में पिस्टल या बम के साथ पकड़ा जाता तो भरोसा किया जा सकता था। लेकिन राहुल को बेस्ट की एक बस को यात्रियों से खाली करवाकर पिस्तौल लहराने कि क्या जरूरत पर गयी ? क्या वह अपनी बात को राज ठाकरे, मुम्बई की जनता और मीडिया तक पहुचाना चाह्ता था ?


राहुल के पिता ने कहा कि उनका बेटा अपराधी नहीं हैं। उनका आरोप है कि उनके बेटे की सरेआम हत्या की गई है। बिहार के तीन कट्टर विरोधी नेता, रेल मंत्री लालू यादव, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लोकजनशक्ति के नेता राम विलास पासवान ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मांग की कि मुंबई में राहुल की मुठभेड़ में हुई मौत की न्यायिक जांच कराई जाए। इस बीच गृह राज्य मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल ने कहा कि केंद्र ने राज्य से इस पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी है।


राहुल ने अपराध किया था। और उसे सजा भी मिलनी चाहिए थी। लेकिन क्या उसका अपराध इतना संगीन था कि उसे सजा-ए-मौत दी जाए ?

by: सुमीत के झा (Sumit K Jha)
http://www.khabarnamaa.co.cc/

24.7.08

दर्शन विकास की, पथ भी विकास का................

पिछले हप्पते घर चला, चलते समय दिल में हसरत सरकार विकास की बात करती है औरर विकास कार्य में लगी हुई है सो जिज्ञासा इस विकास को देखने की। जो विकास मैने देखा आपसे साझा करता हूँ कुछ तसवीरों के बहाने.................................................... ये तस्वीर जुबानी है गवाह है की हमारी सरकार और तंत्र हमारे प्रान्त का काया कल्प करने में लगे हुए हैं पटना से दरभंगा और फ़िर मधुबनी तक के सफर में मेरा अनुभव पुराने अनुभव से अलग नही रहा। पटना का टेम्पू स्टैंड या राज मार्ग और रास्ट्रीय राज मार्ग, दरभंगा का बस स्टैंड या दरभंगा के कुछ वि आई पी मुहल्ले..... नजाराकरें तस्वीरों से।
बिहार का सबसे बड़ा शहर मुजफ्फरपुर और वहां की सड़क बिहार के औद्योगिक विकास की कहानी कह रही है

इसी बस में मैं था और मुजफ्फरपुर में जाम में पाँच घंटे बिताये, जाम हटाने के लिए ना पोलिस ना प्रशाशन, गरमी में क्या बुढे क्या बच्चे और क्या औरतें सभी बेहाल.

सड़क तो जाम सड़क के नीचे कीचड़ का जाम मैं किधर से जाऊं(रिक्शे वाले की गुहार)

सत्ताधारी पार्टी के विधान पार्षद के निवास का जलमग्न मार्ग, पार्षद तो अपनी सवारी से चले जायेंगे आम जन का क्या ? दरभंगा.......


सत्ताधारी पार्टी के विधान पार्षद का निवास जलमग्न, दरभंगा.................... ये बारिश से पहले का दृश्य है


दरभंगा बिहार का एक और बड़ा शहर, और ये दरभंगा का बस स्टैंड, अगर आको यहाँ आना है तो सोचिये की कैसे आयेंगे और अगर बाहर से आप यहाँ आए तो अपने घर को कैसे जायेंगे।


ये है विकाश पुरुष कि कुछ झलकियां, पत्रकारों के सहारे शानदार विकास किया है नितिश सरकार ने, इसकी जीवन्त झलकियों का भी इन्तेजार करें।

जय जय भड़ास।