Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Showing posts with label बोलो तो करो वरना चुप रहो. Show all posts
Showing posts with label बोलो तो करो वरना चुप रहो. Show all posts

24.9.08

बोलो तो करो,वरना चुप रहो

"आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता" "आतंकवादियों की कोई जाति नहीं होती ............"। जैसे बयान हर रोज़ आते है। जितना बड़ा नेता उतना बड़ा बयान। जब ऐसा है तो फ़िर उनको पुचकारने,उनके लाड करने की जरुरत क्या है। क्यों उनके धर्म या जाति से जुड़े वोट बैंक की चिंता की जाती है।उनके खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले सरकार के अन्दर और बाहर के नेता हांफने क्यों लगते हैं। तुम ख़ुद कहते हो कि इनका कोई धर्म और जाति नहीं है फ़िर इनके खिलाफ ठोस कार्यवाही क्यों नहीं होती। आतंकवादी जब चाहे जहाँ चाहे धमाके करते हैं और हमारे नेता कपड़े बदल बदल कर बयान देने के अलावा कुछ नहीं करते। अगर इन नेताओं को केवल इनके ही वोट चाहिए तो फ़िर साफ कहें ना कि हम तो कुर्सी के लिए कुछ भी कर सकते हैं आप जानो आपका काम। कितने अफ़सोस की बात है कि हिन्दुओं की बात करने वाला तो साम्प्रदायिक कहा जाता है और इन आतंकवादियों का पक्ष करने वाला महान धर्मनिरपेक्ष। आज तक कोई बता नहीं सका कि यह कैसी धर्मनिरपेक्षता है। इस थोथी और वोट बैंक बनाये रखने के लिए तन पे लपेटी गई धर्मनिरपेक्षता ने देश का बंटा धार कर दिया है। हिन्दुस्तान में इन सबके पक्ष में बोलने वाले तो सभी हैं मगर ऐसा कोई नहीं जो उन लोगों की बात करें जो हिंदू कहलाते हैं। देश के नेता गाँधी जी की कोई और बात माने या न माने मगर "एक गाल पर कोई चांटा मारे तो दूसरा गाल भी आगे कर दो" वाली बात पर हर रोज़ अमल करते हैं।
दूसरा गाल नहीं अपना देश तक उनके हवाले करने को तैयार हैं। मीडिया कौन सा कम है। बात करतें हैं न्याय की। करनी भी चाहिए। लेकिन न्याय तो वह होता है जिसमे सबको एक समान समझा जाता है। जिसको पाने के बाद सभी पक्ष न्याय करने वाले की बल्ले बल्ले करतें हैं। पता नहीं यह सब कब तक चलेगा। हिंदुस्तान कब हिन्दुस्तानियों का होगा। जब तक वोटों की राजनीति के चक्कर में किसी खास वर्ग जाति,धर्म को खास महत्व दूसरों के हितों को नकार कर दिया जायेगा। तब तक आतंकवाद को दौर थमेगा इस में संदेह है।