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22.6.15

बाबू मोशाय,ब्रांड से नहीं खेल से मैच जीते जाते हैं

हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,पूरी दुनिया जानती है कि बंगाली बाबू जगमोहन डालमिया का भारतीय और विश्व क्रिकेट में क्या योगदान है। आपको याद होगा कि आज से दो दशक पहले तक पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों की भुखमरी के किस्से कैसे समाचार पत्रों में छाये रहते थे। यह डालमिया की ही देन है कि आज भारत दुनिया के क्रिकेट का गढ़ बन गया है और भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों की गिनती दुनिया के सबसे धनी खिलाड़ियों में की जाती है। लेकिन अगर हम यह कहें कि क्रिकेट के इसी व्यवसायीकरण ने भारतीय क्रिकेट का बंटाधार करके रख दिया है तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। आज भारतीय क्रिकेट के लिए खिलाड़ियों का चयन कदाचित यह देखकर नहीं किया जाता कि कौन खिलाड़ी अभी कैसा खेल रहा है बल्कि यह देखकर किया जाता है कि किस खिलाड़ी का ब्रांड वैल्यू कितना है।

मित्रों,अगर हम भारत-बांग्लादेश एकदिवसीय शृंखला के नतीजों और दोनों देशों की टीमों पर सरसरी नजर भी डालेंगे तो पाएंगे कि जहाँ बांग्लादेश की टीम में सारे फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को रखा गया था वहीं भारत की टीम में बड़े-बड़े ब्रांड खेल रहे थे और उनमें से अधिकतर लंबे समय से आउट ऑफ फॉर्म चल रहे थे।

मित्रों,शायद यही कारण था भारत के कागजी शेर बांग्लादेश के नौजवान,जोशीले और देशभक्त खिलाड़ियों के आगे ढेर हो गए और इस प्रकार दोनों ही मैच एकतरफा हो गए। हम यह नहीं कहते कि भारतीय खिलाड़ी देशभक्त नहीं हैं लेकिन सवाल उठता है कि क्या कारण है कि जब भारतीय टीम विश्वकप के सेमीफाईनल में हारती है तो टीम के किसी भी खिलाड़ी की आँखों से आँसू नहीं बहते लेकिन जब वही खिलाड़ी आईपीएल के मैच हारते हैं तो मैदान पर फूट-फूटकर रोने लगते हैं? खेल में पैसा होना तो चाहिए मगर उसके प्रति इतना भी पागलपन नहीं हो कि देश के लिए खेलते समय खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता ही खतरे में पड़ जाए।

मित्रों,इसलिए तो हम कहते हैं कि बाबू मोशाय भारतीय क्रिकेट को अगर बचाना है तो टीम से निकाल फेंकिए सारे बिस्कुट-पेप्सी-शैंपू आदि बेचनेवाले चुके हुए ब्रांडों को सिर्फ और सिर्फ उन्हीं खिलाड़ियों को टीम में रखिए जो पूरी तरह से फिट हों,फॉर्म में हों और देश के लिए खेलने में गौरव अनुभव करते हों। देश को ब्रांडों से भरी दिशाहारा टीम नहीं चाहिए बल्कि मैच जितानेवाली,देश का गौरव बढ़ानेवाली मजबूत टीम चाहिए।

(हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित)