सभी भडासीजनों को नमस्कार,
भड़ास यूँ ही निकले तो सही लगती है,
न गोली चलती है न किसी मौत देती है,
कौन फाडेगा, किसकी फटेगी ये समय बताएगा,
हम सबको क्यों एक-दूजे की फाड़ने की लगी रहती है?
पोस्ट पढने, टिप्पणी करने पर सबको धन्यवाद क्योंकि यही कुछ और लिखने की प्रेरणा देती है.
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4.8.08
भड़ास यूँ ही
Posted by
राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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