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23.12.10

दर्द

मेरे फिक्रमंद
पूछते हैं मुझसे
कभी कभी
कि
क्‍यों है दर्द भरा
इतना
मेरी रचनाओं में...?
उन्‍हें मैं
कैसे समझाऊं?
कि
दर्द
मेरी रचनाओं में नहीं
मुझमे
मेरे अंदर भरा है
जो छलककर
आ जाता है
मेरी कृतियों में
हां यही सच है
सिर्फ यही...!