किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी !!
भड़ास की
और से श्रृद्धांजलि
सुदर्शन-फाकिर को
अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...
Posted by
Girish Billore Mukul
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Labels: फाकिर, श्रृद्धांजलि, सुदर्शन