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15.9.09

Bihar Ka Shiksha Mitra Ghotala: Sabse Bada Megha Ghotala

बिहार में शिक्षा मित्र की शुरुआत तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के शाशन काल में हुई थी लेकिन शिक्षामित्र फेज़ २ की शुरुआत वर्तमान मुख्यमंत्री नीतिश कुमार जी के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ. जिसमे असीमित घोटाले हुए. कही कही तो उच्च अंक प्राप्त अभ्यर्थी की जगह पैसे लेकर ऐसे लोगो को शिक्षा मित्र बनाया गया है जो कही से भी उस पद के लायक नहीं थे. जिनका कोउन्सल्लिंग भी नहीं हुआ था, पैसे की माया ने इस मेघा घोटाले को पूरी तरह ढक दिया. अभी भी बिहार के प्रखंड से लेकर जिल्हे तक और जिल्हे से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक सेकडों की तादाद में शिकायत दर्ज है, जिसका निबटारा नीतिश जी के आदेश के बावजूद अभी तक नहीं हुआ है, क्यों की अभ्यर्थी और उनके रिश्तेदार साथ में पंचायत के मुखिया पंचायत सेवक प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी आपस में मिलकर पैसे के बल पर गलत रिपोर्ट देते है या फिर रिपोर्ट भेजते ही नहीं जिससे बिहार का अब तक का सबसे बड़ा मेघा घोटाला आज भी फाइलों में ही बंद है, जिसका निष्पादन शायद संभव नहीं. इसके लिए जिस निति की ज़रुरत है वह निति नीतिश जी के पास नहीं है. शिक्षा मित्र की बहाली के लिए जो गाइड लाइन बनाये गए थे वह प्रकाशित होने के बाद हर बार, बार बार, लगातार इतनी बार की लिख नहीं सकते बदले गए, जिसके चलते हमेशा से शिक्षा मित्र फेज़ २ विवादस्पद रही है, कुछ और न सही कम से कम जिन लोगो के उपर शिकायत दर्ज की गयी है उनका तो निष्पादन हो जाये ताकि इस मेघा घोटाले के पाप से नीतिश जी को थोडी मुक्ति मिल जायेगी.
ऐसे ही एक अभ्यर्थी है जिन्होंने अपनी शिकायत दर्ज करवाए लेकिन नीतिश जी के आदेश के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल पाया, उन्होंने अपनी शिकायत जिल्हा मधुबनी प्रखंड बेनीपट्टी ग्रामपंचायत राज करहरा के शिक्षा मित्र सुरेन्द्र राय के खिलाफ दर्ज कराई थी उस समय से लेकर आज तक लग भग २३ महीनो में दर दर भटकने के बावजूद अभी तक न्याय नहीं मिला.
सारे घोटाले के पीछे का सच यह है की सुरेन्द्र राय का शिक्षा मित्र के कोउन्सल्लिंग के लिए बने पैनल में नाम नही होने के बाद भी वोह आज शिक्षा मित्र है जबकि फायनल कोउन्सल्लिंग करने वाले छात्र आज भी शिकायते दर्ज कर न्याय की आस में दर दर भटक रहा है, यह सब संभव हुआ करहरा पंचायत के तत्कालीन पंचायत सेवक जीबछ पासवान, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कपिलेश्वर पासवान, प्रखंड विकास पदाधिकारी अजय पासवान, करहरा पंचायत के मुखिया अतीक अंसारी, पूर्व मुखिया देवेन्द्र यादव ने ५५००० रुपये लेकर सुरेन्द्र राय को शिक्षा मित्र बना दिया जबकि सुरेन्द्र राय को मात्र ५८% ही अंक थे, उनकी कोउन्सल्लिंग हुई ही नहीं थी क्योकि पेनल लिस्ट में नाम ही नहीं था, जिसका कोउन्सल्लिंग ५ और ६ नवम्बर २००७ को हुआ था जिसे ६८% अंक थे उसे शिक्षा मित्र नहीं बनाया गया. इस बात की चर्चा बिहार के समाचार पत्र हिन्दुस्तान में दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में किया गया था. ज्ञात हो की ६८% वाले एक मात्र अभ्यर्थी को शिक्षा मित्र न बनाकर ५८% वाले सुरेन्द्र राय को १९ नवम्बर २००७ को शिक्षा मित्र बना दिया गया. वर्तमान मुख्यमंत्री नीतिश जी के इस साल जनुअरी/ फरवरी २००९ को बिहार भ्रमण के दौरान जिल्हा मधुबनी के ही धकजरी में हुए जनता दरबार में शिकायते दर्ज कराने के बाद उन्होंने राजीव भूषण जी को नियुक्त कर जल्द से जल्द एक महीने के अन्दर न्याय दिलाने की बात कही थी लेकिन ८ महीने बीतने के बाद भी अभी तक न्याय नहीं मिल पाया १०% ज्यादा अंक पाने के बाद भी बिहार में शिक्षा मित्र बनना मुश्किल है क्यों की चुनाव से पहेले किये गए वादे जीत हासिल होने पर सत्ता के मद में उन्हें यह याद नहीं रहता की धीरे धीरे कब वोह जनता से दूर होकर उसकी नफरत बन गए है, नीतिश जी को शायद यह बात चुभती हो पर कभी कांग्रेस के गढ़ रहे बिहार या फिर लालूजी राबडी जी के बिहार, सबो को बिहार की जनता ने अपनी नफरत का शिकार बनाया.
मैं नीतिश जी से उम्मीद करता हूँ की अपने शाशन काल में हुए सबसे बड़े मेघा घोटाले की शिकायतों को खुद्द अपने हाथों में लेकर सरकार से उम्मीद लगाये मेघावी छात्रों को उन्हें सच में न्याय दे. और उम्मीद करते है की इस घोटाले से जुड़े सारे लोगो को सजा मिले जो संभव नहीं दीखता. ये वही नीतिश जी है जो सत्ता में आते ही एंटी करप्शन विभाग द्वारा भ्रष्ट्राचारियों पर नकेल कस कर एक उम्मीद की किरण दिखाई दी थी, लेकिन बिहार की जनता अब न उम्मीद हो चुकी है. भले ही लोक सभा चुनाव में जीत हासिल कर अपनी पीठ थप-थपा रहे हो लेकिन दीपक की लो से हम रौशनी की उम्मीद क्या कर सकते है. बस यही उम्मीद है की शिक्षा मित्र में हुए घोटाले की निष्पक्ष जांच कर न्याय देने की कोशिश करें.