सही है कि तुम चले गये, दूर अब मुझसे हो गये
इतने वक़्त से भी कहाँ करीब थे, पर अब फाँसले सदा के लिए हो गये
बात करने का तुमसे मन नहीं, कोई जवाब तुम्हारे खयाल का देना नहीं
ना तुमसे कोई रिश्ता, ना अब कोई और चाह रही
काश की तुम बीते दिनों से भी मिट जाओ, तुम्हारी यादें इस कोहरे में कहीं गुम जायें
काश कि तुम्हारा नाम मुझे फिर याद न आये, ये याद रहे कि तुम मेरे कोई नहीं
जो हो तुम मेरे कोई नहीं तो फिर भी क्यूं याद करती हूँ ये कह कर कि तुम मेरे 'कोई नही'
चले जाओ तुम मेरे शब्दों से, ख्यालों से, इस वक्ये के बाद तो तुम जा चुके हो मेरे सपनों से भी
नाम लेते ही साँसों में अब भी हलचल सी क्यूँ होती है
क्यूँ किसी बात की आशा अब भी रहती है
हाथों से तुम्हें छिटकना चाहती हूँ फिर भी एहसास छूटता क्यूँ नहीं
चलते हुये गिरती हूँ तो आज भी क्यूँ तुम्हारा हाथ बढा देना याद आता है
ये दिन - यह वाक्या बीता है तो फिर इसी तरह ज़िन्दगी आगे भी बढ जायेगी
तुम्हारा तो पता नहीं, मुझे 'बूढे हो जाने पर ये-वो होगा' - वाली बातें याद आयेगीं
चाहती हूँ इस सबके बाद भी तुमसे कभी मुलाकात ना हो
सामना करने की हिम्मत जो खो बैठी हूँ
सूरत-सीरत, अन्दाज़ और तलफ्फुज़् सब बदल गये हैं
बहुत डर लगता है अपने इस बद्ले हुए रूप से
काफी चीज़े छोड आयीं हूँ पीछे
वो तभी के लिये सही थी
अब तो उन्हें साथ लिये ज़िन्दगी जीना भी कठिन है
खुश रहो तुम सदा, बहुत बडे बनो
ज़िन्दगी का हर मकाम तुम्हें हासिल हो, ये तमन्ना है मेरी
बस तुमसे सामना ना हो फिर कभी, ये ख्वाहिश बाकी रहेगी
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22.1.09
खो देना चहती हूँ तुम्हें.. Feel the words (Poem by Chhiyaishi )
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18.6.08
भड़ास में पहली पोस्ट : रोहित त्रिपाठी
आज भड़ास से जुड़कर बहुत अच महसूस कर रहा हू यशवंत भाई का धन्यवाद हमे भड़ास का निमंत्रण भेजने के लिए। मई ब्लॉग्गिंग में लगभग 1½ साल से हू मगर हिन्दी में नही लिख प् रहा था अभी धीरे धीरे हिन्दी में लिखना सीख रहा हू क्योकि मुझे हिन्दी में लिखना बहुत जयादा पसंद है आशा है आप सब लोगो का साथ मिलेगा धन्यवाद । रोहित त्रिपाठी
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16.5.08
आखिर कब तक?
आज भारत एक बहुत बड़े खतरे में है. कल तक जो आतंकवाद केवल जम्मू कश्मीर तक ही फैला हुआ था आज पूरे भारत में फ़ैल गया है क्यों? आखिर क्यों? हजारो लोग मारे जा रहे है और कुछ भी नहीं हो रहा है आखिर क्यों? आज मै भड़ास से जुडे हर बुध्जिवी से पूछना चाहुगा की हर आतंकवादी घटना के बाद बहुत हो हल्ला होता है परन्तु कुछ दिनों बाद न कोई पकडा जाता है और न ही किसी को सजा होती है आखिर क्यों? और हमारे इन नेताओ ने तो सालो ने सभी हदे पार कर दी है. सूअर है साले... वह ब्लास्ट के बाद इतने लोग मारे गए सभी जगह हाहाकार मचा हुआ है और यह साले खाली २ सेकोन्द का शोक सन्देश की रति रटाई बाते बोलकर फिर अपनी औकात पर आ गए और फिर शुरू हो गया एक दुसरे पर आरोप लगाने का सिलसिला. की मेरी नहीं तेरी गलती है. कसम से दिल टूट जाता है सालो का चेहरा देखते ही... किसी का सब कुछ लुट गया और यह साले A.C में बैठकर एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे है. आज मै रोहित त्रिपाठी भड़ास के सभी आदरणीय सदस्यों से यह पूछता ह की क्या इलाज है इस आतंकवाद का? कैसे रुकेगा यह सब? कैसे. यह मेरी भड़ास की पहली पोस्ट है और मै भड़ास के सभी मेम्बरों से हर चीज़ में छोटा होने के कारन अपने इन सवालो का जवाब चाहता ह, यसवंत जी आपकी लेखनी का बहुत बड़ा फेन ह मै. आपसे भी मेरा सवाल है मै जानना चाहता ह की बेकसूर लोगो को कब तक यह सजा मिलती रहेगी.... आज हमारा देश न जाने कितने संकतो से घिरा है. कही आतंकवाद है तो कही मोवाद, कभी पाकिस्तान तो कभी बंगाल्देश, कही लिट्टे तो नक्सलवादी. कैसे लोतेगी खुशहाली?
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धीरज चौरसिया
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