अरविन्द शर्मा
फाइलों में लगभग दफन हो भोपाल गैस त्रासदी की फाइल 25 साल बाद खुली तो एंडरसन, इंसाफ और सियासत में फंसकर रह गई। लेकिन बड़ा सवाल आज भी जवाब मांग रहा है, सवाल उस कायरत से जुड़ा है, जो उस वक्त देश के सियासतदारों ने दिखाई। अब हम अमेरिका को कोस रहे हैं? यह भी हैरान करने वाली बात है कि उस वक्त मामले को दबाने और एंडरसन को भगाने से जुड़े अफसर व सियासतदार इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। कई अफसर तो इस मामले की बजाए मीडिया को बनारस जैसे शहरों की खुबसूरती की बात करने के लिए कह रहे हैं। यानी हर कोई चुप्प रहना चाहता है? जाहिर है कि इस चुप्पी के पीछे ऐसा राज छिपा है जो सामने आया तो कई चेहरे बेनकाब होंगे। आज भोपाल के गैस पीडि़तों के लिए शोर मचा रहे सब लोग अपने गिरेबान में झांकें और यह सोचे कि 25 बरसों में उन्होंने गैस पीडि़तों के लिए कौनसा विशेष कार्य किया? केंद्र व राज्य सरकार मिलकर इस बात की जांच करें कि क्या सचमुच यूनियन कार्बाइड भोपाल के आस-पास का भूमिगत जल दूषित व प्रदूषित है या सिर्फ यह कोरी अफवाह है। सवाल यह भी है कि कैसे कोई संस्था वैज्ञानिक आधार पर यह दावा कर सकती है कि पानी दूषित है, वहीं राज्य सरकार कहती है कि ऐसा कुछ भी नहीं है। यूनियन कार्बाइड के आसपास का पानी बिल्कुल स्वच्छ है। हैरानी और दुख की बात है कि इस मामले में कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया।
ऐसे बड़े सवाल, जिनका जवाब शायद आपके पास हो?
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20.6.10
भोपाल गैस त्रासदी : एंडरसन, इंसाफ और सियासत
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7.2.10
शेखावाटी के सबसे बड़े ब्लॉग पर स्वागत है
विभिन्न रंगों से सजे शेखावाटी के सबसे बड़े ब्लॉग शेखावाटी लाइव में आपका स्वागत है। शेखावाटी की संस्कृति, उत्सव, आस्था, ऐतिहासिक सहित सभी रंगों को इस एक जगह पिराने की एक छोटी से कोशिश की गई है। कई दिनों से सोच रहा था कि जिस शेखावाटी को निहारने के लिए विदेशों से हर साल 52 हजार सैलानी आते हैं, जबकि इन सभी रंगों को एक जगह वेबसाइट पर नहीं पिरोया गया है। तो लीजिए, आपके सामने शेखावाटी के सभी रंगों से सजा नया ब्लॉग। यहां आपको शेखावाटी के सभी रंग तो मिलेंगे ही, शेखावाटी के तीनों जिलो सीकर, झुंझुनूं व चूरू में हर दिन घटने वाली खबरें भी मिलेगी।
तो लॉग इन कीजिए : http://shekhavatilive.blogspot.com/ हां, आपकी राय जरूर दीजिएगा ताकि ब्लॉग को और भी निहारा जा सके।
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26.1.10
गणतंत्र : जानना चाहेंगे तो चले आइए यहां

गणतंत्र की मिसाल देखनी हो तो राजस्थान के झुंझुनूं जिले में चले आइए। जयपुर से 146 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बलवंतपुरा-चैलासी रेलवे स्टेशन। यह स्टेशन जन प्रयासों का बेमिसाल नमूना तो है ही, आजाद भारत का एकमात्र स्टेशन भी होगा, जिसे ग्रामीणों ने बनाया तो है ही, प्रबंधन और संचालन भी रेलवे नहीं बल्कि उन्हीं के हाथों में है।
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