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13.2.08

वैलेंटाइन दिवस की पूर्व संध्या पर देश के एकतरफा प्रेमिओं के नाम संदेश

प्रिय प्रेमियो [एकतरफा]मैं जानता हूँ कि कल का दिन आप लोगों के लिए मानसिक रूप से बड़ा चुनोती भरा होगा
लेकिन इस मुसीबत कि घड़ी मे आप अपने आप को अकेला न समझे क्योंकि हिंदुस्तान मे इस प्रजाति के जीवों कि संख्या करोडों मे है जिनमे से एक मैं भी हूँ । भारत एक लोकतांत्रिक देश है और इसके अधिकांश युवा इस वर्ग से आते हैं ।
हमारी परेशानी यह है कि कोई हमे seriously नही लेता है ,हमे फालतू समझा जाता है। यहाँ तक कि जिसके लिए हम आपने आप को फ़ना कर लेते हैं वह हमारी भावनाओं को कि कद्र करना तो दूर हमारी तरफ़ देखती भी नही है और बचपन से हम सब इस discriminaton का शिकार होते आयें हैं किंतु किसीने भी हमारी आवाज़ नही उठाई ।
दोस्तों अब समय आ गया है की हम अपनी मुसीबतों का दुनिया के आगे रोना छोड़ कर अपने लिए ख़ुद सोंचे .हमारे पास खोने के लिए कुछ नही है और पाने के लिए बहुत कुछ है जिसमें एक अदद प्रेमिका भी शामिल है .इसके लिए humen एकजुट hona पड़ेगा । हमें एक संघ बनाना पडेगा और उसके झंडे के निचे एकत्रित होना होगा .इस संघ के दबाव का प्रयोग कर अपनी मांगे मनवानी होगी ।iska nam hoga' अखिल भारतीय एकतरफा प्रेमी संगठन '[रजी ]सलमान खान इसके प्रेसिडेंट होंगे और विवेक ओबेराय वायस प्रेसिडेंट ।
हमारी मांगे होंगी
हमे रिज़र्वेशन दिया जाए क्योंकि हम हम अपने एकतरफा प्यार करने की वजह से अपने कम पर पुरा मन नही लगा पाते ।
मानसिक अस्पतालों में humen मुफ्त सुविधाएँ मिलें ।
हमारे लिए ट्रेनिंग सेंटर खोले जायें ।
हमारे लिए गलत बोलने वालो के खिलाफ कानून बना कर उन्हें दंडित किया जाए ।
तो दोस्तों जरूरत इस बात की है की देश के कोने कोने तक हमारे संगठन की सखायेँ विकसित हो अत : इसके लिए अधिक से अधिक संख्या मे इस संगठन से से जुड़ें और अपनी बिरादरी के लिए काम करने का गौरव प्राप्त करें । अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें -गौतम यादव ,भारतीय जनसंचार संस्थान , नई दिल्ली

10.2.08

चलों किताबें फाड़े

आज सवेरे से एक दर्जन किताबें फाड़ चूका हूँ और hajoron बार इनके लेखकों को गरिया चूका हूँ.पता नही कब तक मेरा ये अभियान जरी रहेगा ।
तीसरी क्लास से पढता आ रह हूँ कि भारत एक कृषि प्रधान देश है .पर मुझे दिन रात यही लगता है कि भारत एक क्रिकेट प्रधान देश है । मुझे ऐसा लगने के कई कारन है ,इनमे से कुछ को यहाँ पर दे रह हूँ ,बाकी कारणों को जानने के लिए मेरी जल्द ही प्रकाशित होने वाली किताब मैं पढ़ लेना ।
१ सचिन के टेनिस अल्बो के इलाज कि खबर मीडिया मैं ज्यादा द्धिखी या १०००० किसानों कि मोत की ।
किसान को अन्न दाता कहकर भगवन कहकर उसका मजाक बनाया जाता है ,कभी किसी भगवन को भूख से मरते देखा है । भगवन सोने के singhaasano पर बैठे खिलाडी है । crick
et लिए होने वाले हवन तो बहुत देखे होंगे पर कभी किसानों के लिए आम जनता न इस तरह से सोंचा है ।
४ आईसीसी मैं भारतीय अधि करिओं कि दबंगी देखी होगी पर डब्लू टी ओ के समेलन के समय ये दब्न्गी कहाँ घुश जाती है ।
क्रिकेट के लिए जनता सड़कों पर उतरती है कभी कृषि के लिए ऐसा होते देखा है ।
५आप् ही बताएं कि सरद पवार को इच्ल की चौनोती कि चिंता जयादा है या उतर प्रदेश मी गन्ने कि खेती जलाते किशान की ।
जनता वोट किशान कि अपील पर देती है या क्रिच्केतर की अपील पर ।
तो दोस्तों यदि मुझसे सहमत हो तो मेरा साथ किताबों को फाड़ने के अभियान मी सामिल हो जाओ और इस देश के हर चोक चोराहे पर लिख दो की भारत एक क्रिकेट प्रधान देश है ।
आप मुझसे सहमत है न।
गौतम यादव भारतीय जनसंचार संस्थान नई डेल्ही

29.1.08

हम चुप हैं ।

बर्तन होटल पर धोता है ,फटे कपड़ो में सोता है
वो किसी और का बेटा है ,इसलिए हम चुप है।
सड़को पर भीख मांगती है ,और मैला सर पे है।
वह बहन किसी और की है ,इसीलिए हम चुप है।
बेटी की इज्जत लुट जाने पर भी वो बेबस कुछ न कर पाती है ।
वो माँ है किसी और कि इसीलिए हम चुप हैं ।
दिन भर मजदूरी करता है, फिर भी भूखा सोता है ।
किसी और का भाई है वो ,इसीलिए हम चुप है ।
बेटी का दहेज जुटाने को ,कितने समझोते करता है
वह किसी और का बाप है ,इसलिए हम चुप हैं ।
चुप रहना हमने सीख लिया है ,बंद करके अपने होंठो को ।
और जीना हमने सीख लिया है ,बंद कर के अपने होंट को ।
लकिन याद रखो दोस्तों ,एक ऐसा दिन भी आयेगा ।
अत्य्चार हम पे होगा ,और तब हमसे बोला न जाएगा ।
क्योंकि हम चुप हैं ।
गौतम यादव , भारतीय जनसंचार केन्द्र ,नई देहली

25.1.08

धरत राष्ट्र के अनुयायी

हम भारतीय अपनी परम्पराओं का पालन बढ़ी ईमानदारी के साथ करते हैं .भाई इसी से तो हमारी संस्कृति इतनी महान है.जरा सोचिएगा अगर धरत राष्ट्र पुत्र मोह में नही पड़ते तो महाभारत कैसे होता और भारतीय संस्कृती का इतना महान ग्रंथ कैसे लिखा जाता ।
इसी परम्परा को अब हमारे नेता बढ़ी निष्ठा के साथ निभा रहें हैं । भारत मेँ अनेक धरत राष्ट्र पैदा हो गए हैं .पुत्र मोह परम्परा के लिए मराठी शेर बल ठाकरे ने तो पार्टी ही तुड़वा ली .अपने देव गोड्डा साहब ने तो बेटे के चक्कर में पार्टी का घनचक्कर ही बना दिया है .बेटे कुलदीप विस्नोई खातिर अपने भजन करने के दिनों मेँ भजनलाल ने कांग्रेस छोड़ कर नई पार्टी ही बना डाली .उधर शरद पंवार के खेमे से भी खबर आ रही है कि भतीजा अजित पंवार ख़म ठोंक सकता है .लकिन इस परम्परा को निभाने का स्वर्ण पदक मिलेगा हमारे माननीय कलिग्नार करुनानिधि जी को ,इन साहब ने तो परम्परा के लिए अपने भांजे को केन्द्रीय मंत्री के पद से सीधे जमीन पर ला पटका .बहरहाल संतोष है कि अब आने वाली जनरेशन के लिए अनेक महाभारतों की सम्र्द्साली विरासत तो छोड़
जायेंगे।
गौतम यादव भारतीय जनसंचार संस्थान ,नईदिल्ली gautamyadav420@gmail.com

24.1.08

जुगाड़ सास्तर

यह सही है कि अभाव मेँ एक अलग किस्म की रचना शक्ति को जनम देता है.उसका नाम है जुगाड़ .और यह कला हम भारतियो मेँ कूट कूट कर भरी हुई है.हमने एक बार फिर साबित कर दिया कि जुगाड़ सास्तर के हम सबसे बडे कलाकार हैं ।
कहीं कि ईंट कही का रोड़ा कि तर्ज पर बना डाली दुनिया कि सबसे सस्ती कार .पूरी दुनिया हमारा मुहं तकती रह गयी ।
पर बेचारे दुनिया वाले क्या जाने कि जुगाड़ एक ऐसी कला है जिसे हम भारतीय बचपन से ही एक अतिरिक्त योग्यता के रूप मेँ सीखते हैं .अब चाहे पेपर मेँ पास होने के लिए 'नक़ल' , किराया बचाने के लिए' रेल की छत पर बैठकर सफर करना',शादी के लिए 'कुंडली' का जुगाड़, झमेले से बचने के लिए' रिश्वत 'का ,या फिर नोकरी पाने के लिए सोर्स का जुगाड़ हो । इस कला मेँ हम पारंगत हो जाते हैं ।
अब बाकी दुनिया जले तो जले .उसकी बला से .पर एक लाख की कार तो भारतीय इंजिनियर ही बना सकते है न .भाई ,एक अतिरिक्त गुण जो दिया है उपरवाले ने.