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7.4.08

कहिये कहिये मुझे बुरा कहिये

न रवा कहिये न सज़ा कहिये
कहिये कहिये मुझे बुरा कहिये



दिल में रखने की बात है ग़म-ए-इश्क़
इस को हर्गिज़ न बर्मला कहिये



वो मुझे क़त्ल कर के कहते हैं
मानता ही न था ये क्या कहिये



आ गई आप को मसिहाई
मरने वालो को मर्हबा कहिये



होश उड़ने लगे रक़ीबों के
"दाग" को और बेवफ़ा कहिये
-दाग़ देहलवी
(dag kee ye pnktiyan mai apne jhuthe, mkkar, dhurt, ahsanframos aur khiladi doston (kabhi dost aur hmnva hone ka jinne natk kiya) ko smrpit krte hue pesh kr rha hoon.)